Gold Silver price Today: फेड फैसले से पहले सोने-चांदी में उठा-पटक, चांदी ‌₹2200 हुई महंगी, अब क्या करें निवेशक

Gold Silver price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आज 29 जुलाई को उठा- पटक देखने को मिल रही है। बुधवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 158 रुपये गिरकर 1,41,465 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। उसके विपरीत, चांदी की कीमतें 0.69 फीसदी बढ़कर 2.17 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी के लिए सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स 158 रुपये या 0.11 प्रतिशत गिरकर 1,41,465 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुए, जिसमें 375 लॉट का कारोबार हुआ। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी की कीमतें 2250 रुपये या 1.04 फीसदी बढ़कर 2,18,649 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

बाजार जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है। ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स 4,031.22 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर ट्रेड कर रहे थे। मार्केट में नई पोजीशन बनने से चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।

आज रात US फेड पॉलिसी को होगा ऐलान

US फेड का पॉलिसी फ़ैसला आज रात 11:30 बजे (IST) आएगा, जबकि फेड चेयर केविन वॉर्श की टिप्पणी रात 12:00 बजे (IST) होनी है।

जून में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहने के बाद, ऐसी पूरी उम्मीद है कि US सेंट्रल बैंक आज ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण महंगाई बढ़ने की नई चिंताओं की वजह से फेड सितंबर और दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, FedWatch टूल बताता है कि बाज़ार को सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 76% संभावना और 29 जुलाई को 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की 30% संभावना दिख रही है।

क्या कहते है बाजार जानकार

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ के चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह ने कहा, “बाज़ार अभी ब्याज दरें बढ़ने की लगभग एक-तिहाई संभावना मानकर चल रहा है। सख़्त मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों ने US डॉलर इंडेक्स को 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे बुलियन (सोने-चांदी) पर दबाव पड़ा है।” US फेड के अलावा, बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (BoE) और बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) भी क्रमशः गुरुवार और शुक्रवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं।

बढ़ी हुई ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक होती हैं, क्योंकि ऊंची दरों से इस पीली धातु (जो कोई रिटर्न नहीं देती) को अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है।

इस बीच, डॉलर इंडेक्स 0.10% गिरकर 101.30 पर आ गया, जबकि US 10-साल के बॉन्ड का यील्ड पिछले सेशन के 4.60% से बढ़कर 4.61% हो गया।

अब क्या हो रणनीति

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के अनुसार, आज के सेशन में सोने के लिए $4,010 और $3,974 पर सपोर्ट और $4,070 और $4,110 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी के लिए $56.80 और $56 पर सपोर्ट और $58.40 और $59.10 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है।

MCX पर, जैन ने बताया कि सोने के लिए सपोर्ट ₹1,40,800 और ₹1,40,000 पर है और रेजिस्टेंस ₹1,42,200 और ₹1,43,100 पर है, जबकि चांदी के लिए सपोर्ट ₹2,14,000 और ₹2,12,200 पर है और रेजिस्टेंस ₹2,17,700 और ₹2,20,000 पर है।जैन ने कहा, “हम लंबे समय के निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे बाजार में आई इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी खरीदें, और ट्रेडर्स FOMC मीटिंग के नतीजों से पहले इससे दूर रहें।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Rate: सोने की कीमत फिर टूटी, क्या ये एक लाख रुपये तक गिर जाएगा? एक्सपर्ट्स ने 3 बड़ी बातें बताईं

इस साल सोना खरीदने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कीमत और गिरने का इंतजार करना चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि सोने की कीमत कितनी नीचे जाएगी। इसलिए सिर्फ सस्ता होने की उम्मीद में खरीदारी टालना सही फैसला नहीं हो सकता। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 तक भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत कभी भी 1 लाख रुपये से ऊपर नहीं गई थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने की कीमत 1.43 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार की अपील के बावजूद देश में सोने का कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है। हालांकि, कई खरीदार फिलहाल ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमत फिर से 1 लाख रुपये के आसपास आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध जैसे वैश्विक हालात के कारण महंगाई बढ़ी है। ऐसे में लोग पेट्रोल और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों पर खर्च के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं, इसलिए सोने की खरीदारी को लेकर भी सावधानी बरत रहे हैं।

क्या सोने की कीमत और गिरेगी? 

ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की कीमत आगे और कम होगी या अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल बहुत कम है। ऑगमॉन्ट की रिसर्च प्रमुख रेनिशा चैनानी के मुताबिक, ज्यादातर विशेषज्ञों को नहीं लगता कि सोना जल्द ही फिर से 10 ग्राम के लिए 1 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूत सहारा मिल रहा है। उनके अनुसार, सोने का 1 लाख रुपये तक गिरना सिर्फ एक बहुत कम संभावना वाली स्थिति है, न कि सामान्य अनुमान।

उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, जिसका असर सोने पर भी पड़ा। मार्च से ही सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली और 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.43 लाख रुपये के आसपास रहा। रेनिशा चैनानी का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आना सामान्य बात है। उनका अनुमान है कि 2026 तक सोना 10 ग्राम के लिए 1.40 लाख से 1.50 लाख रुपये के दायरे से ऊपर ही बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि 5 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट बाजार में सामान्य उतार-चढ़ाव है, इसे बड़ी गिरावट या क्रैश नहीं माना जाना चाहिए।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपना पैसा सिर्फ सोने में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि अलग-अलग निवेश विकल्पों में निवेश करना चाहिए। उनका कहना है कि खबरों या अफवाहों को देखकर जल्दबाजी में सोना खरीदने या बेचने का फैसला नहीं लेना चाहिए। सबसे कम कीमत का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

कब आ सकती है सोने में बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट तभी आ सकती है जब कोई बड़ा आर्थिक बदलाव हो। जैसे अमेरिकी डॉलर बहुत मजबूत हो जाए, ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी हो या फिर सोने की मांग में भारी कमी आ जाए। फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिख रहे हैं।

क्या सोना फिर 1 लाख रुपये तक आ सकता है?

बोनांजा के वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि 10 ग्राम सोने की कीमत का फिर से 1 लाख रुपये तक पहुंचना पूरी तरह असंभव नहीं है। हालांकि, मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए ऐसा जल्द होने की संभावना नहीं है। अगर ऐसा होता भी है, तो यह आने वाले मध्यम या लंबे समय में ही संभव हो सकता है।

किन वजहों से सस्ता हो सकता है सोना?

वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी, यह दुनिया की आर्थिक स्थिति, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर करेगा।

उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों में सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है:

  • अगर दुनिया में युद्ध या दूसरे अंतरराष्ट्रीय तनाव कम हो जाते हैं, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट सकती है।
  • अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं या अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने में देरी करता है, तो सोने में निवेश कम आकर्षक हो सकता है।
  • अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो इसका असर सोने जैसी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
  • अगर दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक सोना खरीदना कम कर देते हैं, तो कीमतों में कमजोरी आ सकती है।
  • अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर जा सकते हैं।

निरपेंद्र यादव ने कहा कि इतिहास बताता है कि अपने सबसे ऊंचे स्तर से 10 से 20 फीसदी तक गिरना सोने के लिए कोई असामान्य बात नहीं है। हालांकि, लंबे समय में इसकी दिशा दुनिया की आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। उन्होंने सलाह दी कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अगर सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आती है, तो इसे धीरे-धीरे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा सकता है। वहीं, कम समय के लिए निवेश करने वालों को कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और उसी के अनुसार अपनी निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

Gold Silver Price Today: सोना ₹800 उछला, ₹1.47 लाख के पार पहुंचा दाम; चांदी सपाट रही

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1,47,700 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। मजबूत घरेलू मांग और वैश्विक बाजार में तेजी की वजह से सोने में यह उछाल देखने को मिला। इससे पहले सोमवार को सोना ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

वहीं, चांदी की कीमत ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। कारोबारियों के मुताबिक हालिया गिरावट के बाद चांदी में खरीदारी सीमित रही। वहीं, सोने में लगातार अच्छी मांग बनी हुई है।

सोने की कीमत क्यों बढ़ी?

HDFC Securities के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीद से भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम हुआ है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और निवेशकों का रुझान फिर से सोने की ओर बढ़ा।

उन्होंने कहा कि चीन में मजबूत फिजिकल डिमांड और दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

ग्लोबल मार्केट में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.25% बढ़कर 4,057.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 4,082 डॉलर प्रति औंस के इंट्राडे हाई तक भी गया।

Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च की कायनात चैनवाला ने कहा कि पिछले हफ्ते 4,000 डॉलर से नीचे फिसलने के बाद सोने ने अब फिर से तेजी पकड़ ली है।

चांदी ने भी दिखाई मजबूती

वैश्विक बाजार में स्पॉट सिल्वर 4% से ज्यादा बढ़कर 58.80 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। वहीं, चीन की ओर से टेक सेक्टर को समर्थन देने के लिए किए जा रहे बड़े निवेश से इंडस्ट्रियल मेटल्स, खासकर चांदी, को भी मजबूती मिली है।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि हालिया गिरावट के बाद सोने में फिर से मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। MCX पर सोना करीब ₹1,500 यानी 1% चढ़कर ₹1,42,800 के आसपास पहुंच गया। वहीं, COMEX Gold भी 4,070 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है और 4,000 डॉलर के अहम स्तर से ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव की वजह से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग फिर बढ़ी है। इसी का फायदा सोने को मिल रहा है। हाल की गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव भी काफी हद तक कम हो गया है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों को फिर से सोने की ओर खींच रही है। उनका अनुमान है कि अगले कुछ कारोबारी सत्रों में MCX Gold ₹1,41,000 से ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है।

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गोल्ड पर ईरान युद्ध का कितना असर पड़ा? अब खरीदें या बेचने में भलाई, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: जुलाई की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली एसेट की ओर रुख करते हैं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मुनाफावसूली बढ़ने के साथ सोने की कीमतों में फिर गिरावट आ गई।

युद्ध के तनाव के अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों ने भी सोने के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा किया।

जुलाई में सोने की चाल कैसी रही?

MCX पर 1 जुलाई को सोने का भाव करीब ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम था। सिर्फ दो कारोबारी सत्र में यह बढ़कर ₹1,47,650 पर पहुंच गया। यानी करीब 4.1% की तेजी आई।

लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार ने युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का नए सिरे से आकलन किया। इसका असर यह हुआ कि 17 जुलाई तक सोना गिरकर ₹1,40,550 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 20 जुलाई को सोने में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली। इसका भाव फिर ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

अगर लंबी अवधि की बात करें, तो 29 जनवरी को सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम (करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस) से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 जून तक इसमें करीब 30% की गिरावट आ चुकी थी और भाव करीब ₹1.40 लाख (करीब 3,960 डॉलर प्रति औंस) तक आ गया।

युद्ध के बावजूद सोना क्यों कमजोर पड़ा?

Augmont की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद इस महीने सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो जून के आखिर के बाद का सबसे निचला स्तर है।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से ज्यादा असर ब्याज दरों की चिंता का पड़ा।

अभी खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

Geojit Investments के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च हरीश वी का कहना है कि युद्ध से जुड़े जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही सोने की कीमतों में शामिल हो चुका है। अब निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर ज्यादा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, वे फिलहाल होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को तेजी के दौरान खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

‘घबराकर बेचने की जरूरत नहीं’

रेनिशा चैनानी का कहना है कि अभी होल्ड की रणनीति बेहतर रहेगी। जिन लोगों ने पहले से निवेश किया हुआ है, वे बाजार की मौजूदा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशक 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि फिलहाल घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ाता है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल आता है, तो सोने की कीमतें 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।

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Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में घटेंगे या बढ़ेंगे सोने के दाम? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट ने बताए बड़े ट्रिगर

Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में सोने की चाल कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। इनमें सबसे अहम हैं भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरें और निवेशकों का रुख। यह बात वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट में कही है।

इस साल की पहली छमाही सोने के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाली रही। जनवरी के आखिर में सोना 5,405 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद जून में कीमत गिरकर 4,002 डॉलर प्रति औंस तक आ गई। यानी रिकॉर्ड हाई से 26% की गिरावट। इसके बावजूद पिछले एक साल में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एसेट्स में शामिल है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बढ़ा है और वोलैटिलिटी 30% तक पहुंच गई है।

सबसे बड़ा असर किसका रहा?

WGC का कहना है कि पहली छमाही में अमेरिका-ईरान तनाव जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने सोने को सबसे ज्यादा सपोर्ट दिया। इसके अलावा निवेशकों की खरीद-बिक्री और मुनाफावसूली का भी असर दिखा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में सबसे ज्यादा हलचल एशिया और अमेरिका के ट्रेडिंग घंटों के दौरान हुई। इससे साफ है कि अब एशियाई निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

WGC का मानना है कि मौजूदा कीमतें इस उम्मीद को दिखाती हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल अक्टूबर तक कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ा सकता है। इसके अलावा Bank of England, Bank of Japan और European Central Bank भी सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो साल के आखिर तक सोना करीब 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकता है। इसमें करीब 5% ऊपर या नीचे का उतार-चढ़ाव संभव है।

किन वजहों से बढ़ सकती हैं कीमतें?

अगर दुनिया में तनाव बढ़ता है, अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है या ब्याज दरों को लेकर बाजार की सोच बदलती है, तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है। हालांकि 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ी सुस्ती जैसी स्थिति बननी होगी।

दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा बढ़ती हैं और निवेशक शेयर जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ लौटते हैं, तो सोने पर दबाव बन सकता है।

WGC का कहना है कि अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। लेकिन इतिहास बताता है कि बड़ी गिरावट के बाद केंद्रीय बैंक, बड़े निवेशक और आम खरीदार फिर से खरीदारी शुरू कर देते हैं। इससे कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold Silver Price Today: सोना फिसला, चांदी ने लगाई 5000 रुपये की छलांग

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Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Gold-Silver Ratio: पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio या GSR) तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि निवेशक चांदी की तुलना में सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बनी महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने चांदी पर ज्यादा दबाव डाला है।

Augmont Research के मुताबिक, जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहा। वहीं चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। इससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 67:1 तक पहुंच गया।

यह मई में 55:1 था, जबकि जनवरी में यह करीब 50:1 के निचले स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में यह रेशियो 11 से 17 अंक तक बढ़ गया है। आसान शब्दों में कहें तो अब 1 औंस सोना खरीदने के लिए करीब 66-67 औंस चांदी की जरूरत पड़ रही है।

चांदी क्यों पिछड़ रही है?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के मुताबिक, जून में फेडरल रिजर्व के संकेतों ने बाजार का रुख बदल दिया। अब दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 86% मानी जा रही है। साथ ही महंगाई दर 4.2% बनी हुई है।

इन वजहों से चांदी की निवेश मांग कमजोर हुई है और हाल के हफ्तों में उसका प्रदर्शन सोने से कमजोर रहा है।

अब क्या करें निवेशक?

एनालिस्टों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर नए रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 70:30 का गोल्ड-सिल्वर पोर्टफोलियो बेहतर हो सकता है। फिलहाल सोना करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.25 लाख प्रति किलो के आसपास है। पिछले 50 वर्षों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का औसत 65:1 से 70:1 के बीच रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर पर चांदी को बहुत सस्ता नहीं माना जा रहा।

रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर यह रेशियो 75-80 तक पहुंचता है तो निवेशक चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 60:40 या 55:45 का अनुपात अपना सकते हैं। वहीं अगर रेशियो 60 से नीचे आ जाता है तो फिर पोर्टफोलियो को दोबारा सोना-केंद्रित बनाना बेहतर होगा।

सोना और चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। अगर मकसद सिर्फ कीमतों में बढ़त का फायदा उठाना है, तो ETF अच्छा विकल्प हो सकता है।

वहीं भविष्य में वास्तविक डिलीवरी या उपयोग के लिए डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर पर भी विचार किया जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर तब, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति अपना रहा हो।

रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि निकट अवधि में गोल्ड-सिल्वर रेशियो स्थिर रह सकता है या थोड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठे साल कमी रहने का अनुमान है। करीब 4.63 करोड़ औंस की सप्लाई कमी चांदी को मजबूत आधार दे सकती है।

अगर आगे चलकर फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है या सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर से चांदी की मांग बढ़ती है, तो साल के अंत तक गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर 55-60 तक आ सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो कैसे निकालें?

24 जून 2026 को घरेलू बाजार में सोना ₹1,43,399 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,26,891 प्रति किलो थी। गोल्ड-सिल्वर रेशियो निकालने का फॉर्मूला है:

10 ग्राम सोने की कीमत ÷ 10 ग्राम चांदी की कीमत

इस हिसाब से:

₹1,43,399 ÷ ₹2,268.91 = 63.2

यानी फिलहाल 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए करीब 63.2 ग्राम चांदी की जरूरत है। सिर्फ 40 दिनों में यह रेशियो 7.58 अंक बढ़ चुका है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

Gold Price Today: दो हफ्ते के निचले स्तर पर सोना, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक?

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।