Gold Silver Price Today: एक ही दिन में ₹8900 सस्ती हुई चांदी, सोने का भी गिरा भाव

Gold Silver Price Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹700 सस्ता होकर ₹1,46,300 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोमवार को इसका भाव ₹1,47,000 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका भाव ₹8,900 टूटकर ₹2,26,100 प्रति किलोग्राम रह गया। एक दिन पहले चांदी ₹2,35,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोना-चांदी के दाम?

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, ज्वैलर्स और औद्योगिक खरीदारों की मांग कमजोर रहने से घरेलू बाजार में सोना और चांदी दबाव में रहे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का क्या हाल?

वैश्विक बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। स्पॉट गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,020.13 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 1% चढ़कर 58.06 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

आगे क्या रहेगा असर?

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद सोने में रिकवरी की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन तेजी ज्यादा नहीं टिक सकी।

उन्होंने कहा कि इसकी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई बढ़ने की चिंता है। यह भी माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से सोने में बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिख रही है। अब बाजार की नजर अमेरिका के CPI और Core CPI महंगाई के आंकड़ों पर है।

उन्होंने कहा कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे डॉलर और मजबूत होगा और सोने पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम आते हैं, तो सोने को सहारा मिल सकता है। उनके मुताबिक, इन आंकड़ों से पहले सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Today: सोना ₹1500 सस्ता हुआ, ₹2000 गिरा चांदी का भाव; जानिए लेटेस्ट रेट

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को दिल्ली में बड़ी गिरावट देखने को मिली। 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹1,500 टूटकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी ₹2,000 गिरकर ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2.37 लाख प्रति किलो था।

सोना-चांदी क्यों हुए सस्ते?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता फिर गहरा गई है। साथ ही अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है। इन दोनों वजहों का दबाव सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं, जिसका असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी रही। स्पॉट गोल्ड 1.3% गिरकर 4,067.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 2.32% टूटकर 58.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह का कहना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि सोने पर दबाव बना हुआ है।

अब किस पर रहेगी बाजार की नजर?

अब निवेशकों की नजर मंगलवार को आने वाले अमेरिका के CPI (Consumer Price Index) आंकड़ों पर रहेगी। इससे यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठा सकता है।

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर अमेरिका में महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है। इससे सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर महंगाई के आंकड़े नरम आते हैं, तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

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Gold Price Today: चांदी 5000 रुपये सस्ती हुई, सोने के भी गिरे दाम; चेक करें लेटेस्ट प्राइस

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी में 24 कैरेट सोना 150 रुपये सस्ता होकर 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। शुक्रवार को चांदी 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोने और चांदी के भाव?

सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नरमी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली की। इसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला।

ट्रेडर्स का कहना है कि फिलहाल बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। एक तरफ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब भी बना हुआ है। दूसरी तरफ मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर

बाजार की नजर अब अमेरिका के महंगाई (Inflation) के आंकड़ों पर है। निवेशकों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।

इसके अलावा वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

स्पॉट गोल्ड घटकर 4,160.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 62.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से गोल्ड में हल्की गिरावट आई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अब बाजार की नजर इस सप्ताह आने वाले अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग PMI, नॉन-मैन्युफैक्चरिंग PMI और फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी। इन आंकड़ों से डॉलर और सोने की कीमतों को नई दिशा मिल सकती है। उनके मुताबिक, इन अहम आर्थिक आंकड़ों के आने तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

*एजेंसी इनपुट के साथ

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Gold-Silver Price Today: चांदी ने लगाई ₹6000 की छलांग, सोना हुआ सस्ता; जानिए आज का रेट

Gold-Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में मांग कमजोर रहने की वजह से 24 कैरेट सोना 800 रुपये सस्ता होकर 1,45,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) पर आ गया। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोमवार को सोने का भाव 1,46,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

चांदी में जोरदार वापसी

वहीं, चांदी ने लगातार चार कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद जोरदार वापसी की। इसकी कीमत 6,000 रुपये बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

सोना क्यों टूटा, चांदी क्यों चमकी?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने पर दबाव बना रहा। वहीं, हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चांदी में निचले स्तर पर खरीदारी की, जिससे कीमतों में तेज उछाल आया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,021.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर में करीब 1% की तेजी रही और यह 58.81 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने गोल्ड में निचले स्तर पर खरीदारी की संभावना जताई है।

जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, अब बाजार की नजर अमेरिका के आर्थिक और रोजगार के आंकड़ों पर रहेगी। इन आंकड़ों से सोने और चांदी की कीमतों की अगली दिशा तय हो सकती है।

Gold Silver Buy or Sell: सोने-चांदी में रिकॉर्ड गिरावट, क्या यह खरीदारी का सबसे सही मौका है या फटाफट बेचने में ही भलाई? एक्सपर्ट्स से समझें

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Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

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Gold-Silver in Jun Quarter: सोने के लिए दस साल की सबसे कमजोर तिमाही, चार वर्षों में सबसे तेज फिसल रही चांदी

Gold and Silver News: यह तिमाही खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और सोने-चांदी की जैसी चाल है, उस हिसाब से जून 2026 तिमाही इनके लिए झटका साबित हो रहा है। यह निगेटिव जोन में एंट्री करने जा रहा है और इसके साथ ही लगातार पांच तिमाहियों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट जाएगा। गोल्ड की हालत तो और खराब है क्योंकि यह दस साल की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की तरफ बढ़ रहा है, तो चांदी की चमक चार साल में सबसे अधिक फीकी होने वाली है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने और चांदी की लगातार गिरावट अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के हाई लेवल पर बने रहने और फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर बदलते रुझान के चलते है। चूंकि सोना और चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता तो लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का माहौल इन्हें अमेरिकी ट्रेजरी जैसे निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों की तुलना में कम आकर्षक बना देता है।

कितना फीका हुआ सोना-चांदी?

जून तिमाही में अब तक गोल्ड के भाव 12% नीचे आ चुके हैं जो दिसंबर 2016 के बाद इसकी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। वहीं चांदी 17.6% फिसल चुकी है, जो जून 2022 के बाद इसकी सबसे तेज गिरावट है। हालांकि अगर रिकॉर्ड हाई से तुलना करें तो स्थिति और भी गंभीर दिखाई देती है। गोल्ड प्रति औंस (28.35 ग्राम) $5,417 के रिकॉर्ड हाई से 24% नीचे आ चुका है तो 28 जनवरी को प्रति औंस $117 के रिकॉर्ड हाई से चांदी लगभग 47% गिर चुकी है।

सोने-चांदी की यह गिरावट पिछले दो साल में ताबड़तोड़ तेजी के बाद आई है। साल 2024 में 28% और साल 2025 में 65% की बढ़त के बाद, जनवरी और मार्च 2026 के बीच सोने की कीमत में 10% की तेजी आई तो दूसरी तरफ साल 2024 में 22% और साल 2025 में 148% चढ़ने के बाद जनवरी और फरवरी 2026 में चांदी की कीमत 28% बढ़ी।

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कब तक बना रहेगा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने सोने-चांदी पर दबाव डाला था लेकिन यह दबाव तब भी जारी रहा, जब इनके बीच शांति समझौता हो गया। पश्चिमी एशिया में युद्ध ने तेल की कीमतों में आग लगा दी थी और सख्त मौद्रिक नीतियों के आसार बढ़ा दिए। अब अमेरिकी फेड ने मौद्रिक नीतियों की हालिया बैठक के बाद नए चेयरमैन केविन वार्श ने फिलहाल ब्याज दरों में किसी बढ़ोतरी का ऐलान तो नहीं किया लेकिन इस साल एक बार दर बढ़ाने के संकेत दिए। इसने निवेशकों की चिंता बढ़ी दी और अमेरिका-ईरान के समझौते के पॉजिटिव इफेक्ट को फीका कर दिया। अमेरिकी फेड के मौद्रिक नीतियों के कमेटी की हालिया बैठक के बाद से डॉलर इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हो चुका है।

एक्सिस डायरेक्ट के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज) देवेया गागलानी (Deveya Gaglani) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम होने और कच्चे तेल की फिसलन के बावजूद अमेरिकी फेड के सख्त रुख, हाई इनफ्लेशन और डॉलर इंडेक्स में तेज उछाल के कारण बुलियन यानी सोना-चांदी पर दबाव बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स हाल ही में एक साल के हाई लेवल पर पहुंच गया। देवेया के अनुसार जब तक डॉलर $100 से ऊपर बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रहा सकता है।

अब किस बात पर रहेगी नजर

हाल ही में शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट ऑस्टन गूल्सबी (Austan Goolsbee) ने कहा था कि उन्हें महंगाई बढ़ने की रफ्तार को लेकर चिंता है और यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है है कि महंगाई बढ़ाने वाले सभी फैक्टर्स अस्थायी हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से लक्ष्य से कहीं अधिक मुद्रास्फीति या इनफ्लेशन की समस्या से जूझ रही है और हाल के रुझान सही दिशा में नहीं हैं। अब कारोबारियों और निवेशकों की नजर गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर होगी, जिसके तेज होने के आसार हैं। इसका असर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर करने वाली नीति पर दिख सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।