Nifty Outlook: 21 अक्टूबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? क्रूड समेत ये बड़े फैक्टर करेंगे तय

Nifty Outlook: शेयर बाजार में जैसे ही रिकवरी की उम्मीद बनती है, कोई नई परेशानी सामने आ जाती है। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। AI से जुड़ी बिकवाली का दबाव कम हुआ था। बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई थी। IT कंपनियों के मिले-जुले नतीजों से बाजार को संभलने की उम्मीद थी। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने फिर चिंता बढ़ा दी।

दशहरा की छुट्टी के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर को बाजार खुलेगा। इस बार उसके सामने महंगे तेल की चुनौती होगी। ब्रेंट क्रूड करीब 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसके अलावा, बड़ी टेक कंपनियों के नतीजे भी आने शुरू होंगे। बाजार की नजर इन नतीजों पर रहेगी।

इसी दिन Jio Platforms का IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। ₹30,213 करोड़ के इस इश्यू को एंकर निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब देखना होगा कि रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशक इसमें कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं।

तिमाही नतीजों पर भी रहेगी नजर

कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। सोमवार को Urban Company और Himadri Specialty Chemicals के नतीजों में मामूली कमी को भी निवेशकों ने पसंद नहीं किया। इसका असर दोनों कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के रूप में दिखा।

बुधवार को बाजार Bajaj Finance, L&T Technology Services, Hindustan Zinc, IREDA, Piramal Finance और Sobha समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। इनके नतीजों सोमवार को बाजार बंद होने के बाद आए थे।

इसके अलावा Eternal, KEI Industries, M&M Finance, Mahindra Holidays, SRF और Vishal Mega Mart के नतीजे भी आने हैं। Indian Hotels और Aditya Birla Sun Life AMC के नतीजों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Nifty के लिए 22,800 का स्तर अहम

Religare Broking के अजीत मिश्रा के मुताबिक, सोमवार की गिरावट के बाद Nifty अपने 20-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA के करीब पहुंच गया है। यह स्तर 22,900 है। इसके नीचे 22,550 से 22,750 का दायरा अगला अहम सपोर्ट हो सकता है। वहीं, बाजार में तेजी लौटने पर 23,200 से 23,300 के स्तर पर रुकावट आ सकती है।

HDFC Securities के विनय रजानी का कहना है कि बाजार में गिरावट के बावजूद तेजी से जुड़े इंडिकेटर और ऑसिलेटर अभी कमजोर नहीं पड़े हैं। उनके मुताबिक, Nifty के लिए 22,800 का स्तर अहम है। यहां 20-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA और पिछला स्विंग हाई, दोनों सपोर्ट दे रहे हैं।

विनय रजानी के मुताबिक, Nifty इस स्तर के आसपास संभलकर फिर तेजी पकड़ सकता है। हालांकि, अगर इंडेक्स 22,500 के नीचे चला जाता है, तो तेजी की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहना होगा।

Bank Nifty में 55,500 का सपोर्ट अहम

Bank Nifty भी 55,500 के करीब बंद हुआ है। यह इसका अहम सपोर्ट स्तर है। अगर यहां से लगातार बिकवाली होती है, तो इंडेक्स 55,000 और फिर 54,500 तक गिर सकता है। वहीं, बाजार में रिकवरी होने पर 56,000 का स्तर पहली बड़ी चुनौती होगा।

LKP Securities के वत्सल भुवा के मुताबिक, सोमवार की गिरावट के बावजूद Bank Nifty अपने 20-दिन के मूविंग एवरेज और 55,200 के अहम सपोर्ट के ऊपर बंद हुआ। उनके अनुसार, तेजी की वापसी की पुष्टि तभी होगी, जब इंडेक्स लगातार 56,000 के ऊपर बंद होने लगेगा।

जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक इस तेजी को गिरावट के बाद की रिकवरी के तौर पर ही देखना चाहिए। वत्सल भुवा ने यह भी कहा कि अगर इंडेक्स 55,000 के नीचे जाता है, तो निवेशकों को अपनी लॉन्ग पोजीशन पर दोबारा नजर डालनी करनी चाहिए।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty Outlook: सितंबर में 1600 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी, क्या अब 22600 का अहम लेवल बचेगा?

Nifty Outlook: सितंबर एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। Nifty50 मंगलवार को 64 अंक गिरकर 22,716 पर बंद हुआ। पूरे सितंबर में इंडेक्स 1,600 अंक से ज्यादा यानी करीब 6.5% टूट चुका है।

मंगलवार को Nifty की शुरुआत गैप-डाउन हुई। शुरुआती कारोबार में बिकवाली तेज रही और इंडेक्स काफी नीचे चला गया। हालांकि, दिन के निचले स्तर से रिकवरी आई और Nifty ने शुरुआती नुकसान का बड़ा हिस्सा कम कर लिया।

एक्सपायरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा। आखिर में Nifty 0.28% की गिरावट के साथ 22,716 पर बंद हुआ। सेक्टरों की बात करें तो IT, Realty और FMCG में गिरावट जारी रही। हालांकि, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

200-वीक मूविंग एवरेज तक पहुंचा निफ्टी

गिरावट के साथ Nifty अपने 200-वीक मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह लेवल अभी करीब 22,600 है। कोविड के समय बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद पहली बार Nifty इस लंबे समय के टेक्निकल सपोर्ट तक पहुंचा है।

यही वजह है कि अब 30 सितंबर को 22,600 का स्तर बाजार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसके आसपास इंडेक्स का अगला रुख तय हो सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दबाव

बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.99% गिरा। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.81% की गिरावट आई।

बाजार में कमजोरी का असर अब सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

लगातार आठवें हफ्ते बाजार गिरा

हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। Nifty में करीब 6.8% की गिरावट दर्ज हुई है। इसके साथ ही इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते गिरा है।

2020 के बाद यह Nifty की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े अभी राहत दे रहे हैं।

इकोनॉमी से मिले कुछ अच्छे संकेत

अगस्त में भारत की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 8% रही। यह दो महीने में सबसे तेज बढ़त है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। इससे शहरी इलाकों में लोगों के खर्च में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। GDP ग्रोथ भी बाजार के लिए एक सपोर्टिव फैक्टर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण रहेंगी। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी बाजार के लिए अहम होगी।

22,550 के नीचे गिरावट पर दबाव

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक निफ्टी का ट्रेंड अभी कमजोर है। उनका कहना है कि 22,900 से 23,000 के बीच आने वाली तेजी ज्यादा टिक नहीं सकती। इस स्तर पर बिकवाली देखने को मिल सकती है।

उनके मुताबिक, अगर निफ्टी 22,550 के नीचे जाता है तो 22,200 तक गिरावट बढ़ सकती है।

22,570-22,550 का जोन अहम

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 22,570 से 22,550 का जोन Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट है। इसके नीचे गिरावट आने पर 22,400 तक दबाव बढ़ सकता है।

ऊपर की तरफ 22,900 से 22,930 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा। अगर Nifty इस रेंज के ऊपर टिकता है तो रिकवरी 23,050 तक जा सकती है।

22,600 के ऊपर टिकना जरूरी

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक 22,600 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली तेज हो सकती है। वहीं, अगर Nifty इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी की गुंजाइश रहेगी।

उनके मुताबिक 22,600 फिलहाल अहम सपोर्ट है। वहीं 22,800 तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

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Nifty Outlook: 21 सितंबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन रिकवरी की। हालांकि, कारोबार में उतार-चढ़ाव काफी रहा। इसके बावजूद निफ्टी 75 अंक चढ़कर बंद हुआ। हफ्ते की शुरुआत बाजार ने अच्छी तेजी के साथ की थी। लेकिन ऊपर जाते ही बिकवाली शुरू हो गई। इससे निफ्टी फिर नीचे आ गया।

इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटी। इससे निफ्टी 23,000 के अहम स्तर के ऊपर बना रहा। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर अभी भी कमजोर रही। निफ्टी लगातार छठे हफ्ते गिरावट में बंद हुआ। इस हफ्ते इंडेक्स 0.22% नीचे रहा।

HDFC Bank और UltraTech में तेजी

निफ्टी के शेयरों में HDFC Bank और UltraTech Cement सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी ओर TCS और TMPV सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे।

सेक्टरों की बात करें तो Cement और Metal शेयरों में खरीदारी दिखी। IT शेयरों पर दबाव बना रहा। बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 1.24% और Nifty Smallcap 100 में 1.74% की तेजी रही।

कच्चे तेल से बाजार को मिली राहत

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड अपने ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। सऊदी अरब की पाइपलाइनों की मरम्मत का काम आगे बढ़ा है। इसके अलावा तेल निर्यात के दूसरे रास्ते भी मिले हैं। इससे सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहने की चिंता कुछ कम हुई है।

अमेरिकी फेड के ब्याज दर के फैसले के बाद अब बाजार का ध्यान दूसरी चीजों पर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। कच्चा तेल भी ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। घरेलू बाजार में लिक्विडिटी भी मजबूत है। ऐसे में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह तेजी का संकेत नहीं माना जा सकता।

अभी भी कई बड़े जोखिम

बाजार के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। ब्रेंट क्रूड अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। रुपया भी करीब 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा जोखिम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी।

अगले हफ्ते घरेलू स्तर पर सितंबर का फ्लैश PMI डेटा आएगा। अगस्त के इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट के आंकड़े भी आएंगे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़े भी बाजार को दिशा दे सकते हैं। अमेरिका से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े आएंगे। चीन के लोन प्राइम रेट पर भी बाजार की नजर रहेगी।

ईरान युद्ध से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट की यात्रा पर फिर से विचार करने को कहा है।

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध तेजी से बढ़ सकता है। वहीं, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपना सख्त रुख कायम रखा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है।

हूती विद्रोहियों के मुताबिक, उन्होंने रियाद में कुछ अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे कुछ घंटे पहले शहर के मुख्य एयरपोर्ट के पास आग और धुएं का गुबार देखा गया था। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने इसकी वजह की पुष्टि नहीं की है।

23,500 के ऊपर जाना आसान नहीं

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी में आगे तेजी आती है तो 23,500 से 23,600 का स्तर बड़ी चुनौती होगा। वहीं, गिरावट आने पर 23,100 से 23,000 के बीच सपोर्ट मिल सकता है।

SBI Securities के सुदीप शाह भी 23,150 के आसपास के स्तर को अहम मानते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी अगर लगातार 23,150 के नीचे जाता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स 23,000 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,500 से 23,520 का स्तर बड़ी रुकावट है। अगर निफ्टी 23,520 के ऊपर टिक गया तो शॉर्ट कवरिंग हो सकती है। इससे इंडेक्स 23,650 तक जा सकता है।

23,550 तक जा सकता है निफ्टी

LKP Securities के रुपक डे का कहना है कि कच्चा तेल अगर 96 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहता है तो बाजार में तेजी टिक सकती है। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 से 23,100 का स्तर अहम सपोर्ट है। मौजूदा रिकवरी जारी रहती है तो इंडेक्स 23,550 तक जा सकता है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,100 से 23,000 का जोन अहम सपोर्ट है। वहीं, 23,250 से 23,200 के आसपास भी सहारा मिल सकता है। ऊपर की तरफ 23,450 से 23,500 का स्तर रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,600 अहम रहेगा। खास बात यह है कि 23,600 पहले सपोर्ट था। अब यह रेजिस्टेंस की तरह काम कर सकता है।

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Gold Price Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: सोमवार 21 सितंबर से शुरू हो रहे नए हफ्ते सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, इसके एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में हलचल पर बाजार की नजर रहेगी। इसके अलावा पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा भी सोने को प्रभावित करेगी।

मौद्रिक नीति और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम से भरे पिछले हफ्ते के बाद अब निवेशकों की नजर नए आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI के आंकड़े जारी होंगे।

हफ्ते के आखिर में अमेरिका के हाउसिंग डेटा, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े भी आएंगे। इनसे मौद्रिक नीति और सोने की मांग को लेकर बाजार को संकेत मिल सकते हैं।

MCX पर सोने-चांदी में तेजी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना पिछले हफ्ते ₹1,597 यानी 1.04 फीसदी बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी का भाव ₹6,629 यानी करीब 3 फीसदी बढ़कर ₹2.41 लाख प्रति किलो हो गया।

LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि MCX पर सोने की शुरुआत पिछले हफ्ते करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कमजोर रही। हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी आने से कीमतों में मजबूत रिकवरी हुई और सोना ₹1.54 लाख तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि बाजार में बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर काफी उतार-चढ़ाव रहा। अब कई अहम घटनाक्रम पीछे छूट चुके हैं। ऐसे में बाजार की नजर मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के अगले दौर पर रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला कॉमेक्स गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,424.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी करीब 3 फीसदी बढ़कर 67.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

JM Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर ने कहा कि सोने की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते सीमित दायरे में कारोबार हुआ। हालांकि, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में गिरावट के दौरान निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली। इससे सोना हफ्ते के अंत में बढ़त के साथ बंद हुआ।

मेर के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कुछ बढ़त कम हुई। इसी दौरान हफ्ते के बीच तेल की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 कारोबारी हफ्तों से निवेशकों की सोने में दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है। दुनियाभर के गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ETF में लगातार निवेश इसका संकेत है।

चीन के फैसले पर भी नजर

चांदी की कीमतों ने भी इंडस्ट्रियल मेटल्स की चाल को फॉलो किया। शुरुआती गिरावट के बाद चांदी में रिकवरी हुई और हफ्ते का अंत मजबूत बढ़त के साथ हुआ।

मेर ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की अहम बैठकें अब खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में बाजार की नजर चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना पर रहेगी। बैंक सोमवार को अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान कर सकता है। बाजार को फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।

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Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोना-चांदी धड़ाम, इन तीन फैक्टर का दिखा असर

Gold Silver Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 सितंबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने बुलियन पर दबाव बनाया। वहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त पॉलिसी की उम्मीद भी बढ़ी है।

कॉमेक्स गोल्ड गुरुवार शाम कारोबार में 1.68% गिरकर 4,386 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया। वहीं, चांदी 5.37% गिरकर 65 डॉलर प्रति औंस से नीचे रही।

घरेलू बाजार में भी दबाव दिखा। अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड फ्यूचर्स शाम के कारोबार में करीब 1% गिरकर ₹1,52,249 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी 3.63% गिरकर ₹2,35,347 प्रति किलोग्राम पर रही।

सोने पर क्यों बढ़ा दबाव?

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, सोने में कारोबार कमजोर और उतार-चढ़ाव वाला रहा। ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी रही।

गुरुवार को डॉलर रुपया के मुकाबले 38 पैसे मजबूत होकर 95.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर के स्तर से ऊपर चली गई।

त्रिवेदी के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई की चिंता बनी हुई है। इससे फेड की सख्त पॉलिसी की उम्मीद बढ़ रही है। इसका दबाव सोने पर पड़ रहा है।

उनका कहना है कि मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के बीच ऊंचे स्तरों पर सोने पर दबाव बना रह सकता है। घरेलू बाजार में सोने की रेंज ₹1,51,500 से ₹1,55,000 के बीच रह सकती है।

गोल्ड प्राइस का आउटलुक कैसा है

अब बाजार की नजर फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर है। इस हफ्ते आने वाले PCE Price Index के आंकड़े महंगाई की स्थिति का संकेत देंगे। इससे अगले हफ्ते होने वाली फेड बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें तय हो सकती हैं।

Anand Rathi Share and Stock Brokers की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में रिकवरी सोने पर फिर दबाव बना रही है। फिलहाल बाजार में तेजी को लेकर ज्यादा भरोसा नहीं है। निवेशक फेड के अगले कदम को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।

गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश

दूसरी तरफ, गोल्ड ETF में निवेश का रुझान मजबूत बना हुआ है। अगस्त 2026 में गोल्ड ETF में 18 अरब डॉलर का निवेश आया। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो है।

इससे ग्लोबल गोल्ड ETF होल्डिंग बढ़कर 4,189 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह फरवरी 2026 के 4,176 टन के पिछले रिकॉर्ड से भी ज्यादा है।

नार्वेकर के मुताबिक, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगे कच्चे तेल का दबाव सोने पर बना हुआ है। साथ ही, अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। ऐसे में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के बावजूद सोने की सेफ हेवन डिमांड को कुछ सपोर्ट मिल रहा है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: क्या 7 सितंबर को 24000 का लेवल टच कर पाएगा निफ्टी? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: निफ्टी शुक्रवार को चार दिन की लगातार गिरावट के बाद संभला। इंडेक्स 24 अंक चढ़कर 23,897 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर कमजोर रही। निफ्टी में 1.15% की गिरावट आई। यह लगातार चौथा हफ्ता है, जब इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ।

पूरे हफ्ते बिकवाली हावी रही

हफ्ते की शुरुआत ही कमजोर रही। ज्यादातर कारोबारी सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। हफ्ते के बीच में बाजार तेज गैप-डाउन के साथ खुला। इसके बाद खरीदारों ने गिरावट रोकने की कोशिश की। लेकिन ऊंचे स्तरों पर खरीदारी ज्यादा देर नहीं टिक पाई। नतीजा यह रहा कि मुनाफावसूली जारी रही और निफ्टी पूरे हफ्ते दबाव में रहा।

किन शेयरों में बड़ी हलचल दिखी

निफ्टी 50 में SBI Life, Tata Steel और HDFC Life सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी तरफ HCL Tech, Bharti Airtel और Maruti सबसे ज्यादा टूटे। सेक्टोरल प्रदर्शन भी मिला-जुला रहा। Metals, Financial Services और Cement सेक्टर में तेजी रही। वहीं रियल्टी, हेल्थकेयर और केमिकल्स में दबाव देखने को मिला।

ब्रॉडर मार्केट में भी तस्वीर साफ नहीं रही। Nifty Midcap 100 में 0.25% की गिरावट आई। Nifty Smallcap 100 में 0.22% की बढ़त रही।

रुपया भी मजबूत हुआ

डॉलर के मुकाबले रुपये में भी मजबूती रही। यह सिलसिला पूरे हफ्ते जारी रहा। हफ्ते के दौरान रुपया करीब 1% मजबूत हुआ। शुक्रवार को यह लगभग 94.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अब इन संकेतों पर रहेगी नजर

आने वाले दिनों में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिका में फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है। लेकिन बाजार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहला, ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर है। दूसरा, वेस्ट एशिया में तनाव बना हुआ है।

निवेशकों की नजर क्रूड की कीमतों पर रहेगी। वेस्ट एशिया के घटनाक्रम भी अहम होंगे। इसके अलावा ग्लोबल रेट आउटलुक और घरेलू लिक्विडिटी पर भी नजर रहेगी। शुक्रवार को जारी अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। इनसे फेड के अगले फैसले को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, अगले हफ्ते US ISM Services PMI, ECB की पॉलिसी, OPEC की मंथली ऑयल मार्केट रिपोर्ट और भारत के फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़े बाजार के लिए अहम रहेंगे।

24,000 के ऊपर जाना जरूरी

HDFC Securities के विनय राजानी के मुताबिक, 24,000-24,200 का जोन निफ्टी के लिए बड़ा रेजिस्टेंस है। 23,800 के नीचे जाने पर निफ्टी 23,600 तक गिर सकता है। वहीं, 23,800 के ऊपर टिकने पर कुछ समय के लिए बाजार दायरे में रह सकता है। हालांकि, बड़ी तस्वीर में ट्रेंड अभी कमजोर है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,750-23,600 का जोन अहम सपोर्ट है। इसके नीचे डेली क्लोज मिलने पर निफ्टी 23,450-23,400 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 24,000-24,050 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद 24,150-24,200 का स्तर आएगा।

50-EMA से नीचे निफ्टी

LKP Securities के रूपक डे ने कहा कि अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों से पहले ट्रेडर्स सतर्क रहे। इन आंकड़ों का असर फेड के ब्याज दर के फैसले पर पड़ सकता है।

उनके मुताबिक, निफ्टी प्रति घंटे के चार्ट पर 50-EMA से नीचे है। इससे शॉर्ट टर्म ट्रेंड कमजोर दिख रहा है। जब तक निफ्टी 24,000-24,200 के नीचे है, तेजी पर बिकवाली की रणनीति काम कर सकती है। नीचे 23,830 और 23,700 पर सपोर्ट है।

Banking Index में भी लंबे समय से ठहराव

बैंकिंग इंडेक्स करीब 24 सत्रों से एक दायरे में घूम रहा है। यानी इसमें भी कोई साफ दिशा नहीं दिख रही। शुक्रवार को इंडेक्स 0.02% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, 56,900-56,800 का जोन अहम सपोर्ट है। इसके ऊपर टिके रहने पर कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। ऊपर 57,800-57,900 का स्तर रेजिस्टेंस है।

अगर इंडेक्स 57,900 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देता है या 56,800 के नीचे टूटता है, तो कंसोलिडेशन खत्म हो सकता है। इसके बाद बाजार में किसी एक दिशा में बड़ी चाल देखने को मिल सकती है।

अगले हफ्ते IPO की भी धूम

प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज हैं। अगले हफ्ते 11 मेनबोर्ड IPO खुलने वाले हैं। ये कंपनियां मिलकर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने की तैयारी में हैं। कई कंपनियों की लिस्टिंग भी अगले हफ्ते होगी। यानी शेयर बाजार के मुख्य इंडेक्स में भले ही सावधानी है, लेकिन IPO बाजार में हलचल बनी हुई है।

नए हफ्ते में निफ्टी 50 के 23600-23500 के नीचे जाने की संभावना ज्यादा, ये शेयर करा सकते हैं अच्छी कमाई

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: रक्षाबंधन पर सोना ₹3300 सस्ता हुआ, चांदी का ₹5000 गिरा भाव

Gold Price Today: सोने की कीमत में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। दिल्ली के बाजार में 24 कैरेट 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹3,300 टूटकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसमें सभी टैक्स शामिल हैं। गुरुवार को इसका भाव ₹1,65,700 था।

तीन दिन में सोना ₹4,700 यानी करीब 3% सस्ता हो चुका है। 25 अगस्त को इसका भाव ₹1,67,100 प्रति 10 ग्राम था। हाल की तेजी के बाद अब कारोबारी मुनाफावसूली कर रहे हैं।

चांदी भी ₹5,000 सस्ती

चांदी में भी शुक्रवार को गिरावट रही। घरेलू बाजार में इसका भाव ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ₹2,50,500 प्रति किलो थी।

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जितिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर 99.15 के स्तर से ऊपर चला गया। इसका असर सोने पर पड़ा। हाल की तेजी के बाद कारोबारी लगातार तीसरे दिन मुनाफावसूली कर रहे हैं।

कस्टम ड्यूटी घटने की खबर का भी असर

घरेलू बाजार में कस्टम ड्यूटी घटाने की खबरों से भी सोने पर दबाव आया। बढ़ती तस्करी के बीच सरकार कस्टम ड्यूटी घटा सकती है। ऐसी खबरें बाजार में चल रही हैं।

Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, इन खबरों से घरेलू सोने की कीमत पर दबाव बढ़ा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों में अंतर भी बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना कमजोर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड मामूली गिरावट के साथ $4,599.70 प्रति औंस पर था। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वार्श के जैक्सन होल सिम्पोजियम में होने वाले भाषण पर है।

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, बाजार वार्श के बयान पर नजर रख रहा है। महंगाई को लेकर उनका रुख अहम होगा। ऊंची यील्ड के बीच बाजार को उनके भाषण से संकेत मिलने की उम्मीद है।

बाजार में फिलहाल सख्त रुख वाले बयान की उम्मीद है। अगर वार्श निवेशकों को भरोसा नहीं दिला पाते हैं, तो डॉलर कमजोर हो सकता है। ऐसे में सोने को फिर तेजी मिल सकती है।

Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Nifty Outlook: दो हफ्तों की गिरावट के बाद क्या अब आएगी रिकवरी? एक्सपर्ट्स ने बताएं अहम लेवल्स

Nifty Outlook: शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद रखने वालों के लिए पिछला हफ्ता भी खास नहीं रहा। निफ्टी लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि शुक्रवार को हल्की बढ़त मिली, लेकिन पूरे हफ्ते में इंडेक्स 0.47% टूटकर 24,252 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को क्या हुआ?

निफ्टी 53 अंकों की बढ़त के साथ खुला। लेकिन पूरे दिन बाजार छोटी रेंज में ही घूमता रहा। आखिर में इंडेक्स 20 अंक यानी 0.08% चढ़कर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन में भी 19 अंकों का सहारा मिला।

निफ्टी में Power Grid, HDFC Life और Nestlé सबसे ज्यादा चढ़े। वहीं Trent, Maruti Suzuki और IndiGo सबसे ज्यादा गिरे।

कौन से सेक्टर चमके?

इस बार तस्वीर मिली-जुली रही। मेटल, प्राइवेट बैंक और रियल्टी में खरीदारी दिखी। वहीं ऑटो, मीडिया और आईटी सेक्टर दबाव में रहे।

अच्छी बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 0.10% और Nifty Smallcap 100 में 0.69% की बढ़त रही।

अगले हफ्ते क्या रहेगा फोकस?

बाजार जानकारों का कहना है कि अगले हफ्ते निफ्टी एक सीमित दायरे में रह सकता है। दो हफ्तों की गिरावट के बाद हल्की रिकवरी की उम्मीद भी बनी हुई है। इन बातों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • मानसून की रफ्तार
  • FII की खरीद-बिक्री
  • कच्चे तेल की कीमत
  • बड़े आर्थिक घटनाक्रम

ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं?

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का मानना है कि निफ्टी का ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। उनके मुताबिक इंडेक्स अगले हफ्ते 24,500 से 24,600 तक जा सकता है। उन्होंने 24,100 को अहम सपोर्ट बताया है।

HDFC Securities के विनय राजानी का कहना है कि निफ्टी अभी 50 और 100 दिन के EMA के ऊपर टिका हुआ है। ये दोनों करीब 24,200 के आसपास हैं। लेकिन इंडेक्स अभी भी 20 दिन के EMA यानी 24,300 और 200 दिन के EMA यानी 24,376 से नीचे है। इसलिए फिलहाल बाजार में साफ दिशा नहीं दिख रही।

उनके मुताबिक अगर निफ्टी 24,000 से नीचे बंद होता है, तो गिरावट बढ़ सकती है। वहीं 24,400 के ऊपर टिकने पर शॉर्ट टर्म में तेजी लौट सकती है।

LKP Securities के रूपक डे भी बाजार को फिलहाल साइडवेज से हल्का पॉजिटिव मानते हैं। उनके मुताबिक 24,200 पहला सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर निफ्टी 24,000 तक जा सकता है। वहीं 24,350 पहला रेजिस्टेंस है। इसे पार करने पर 24,500 का रास्ता खुल सकता है।

Bank Nifty के अहम स्तर

Bank Nifty शुक्रवार को करीब 290 अंकों की रेंज में रहा। SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 58,200 से 58,300 बड़ा रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर इंडेक्स 58,700 और फिर 59,000 तक जा सकता है। नीचे की तरफ 57,300 से 57,200 मजबूत सपोर्ट है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: सोना ₹600 उछलकर ₹1.56 लाख के पार, कमजोर डॉलर से बढ़ी चमक

Gold Price Today: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट वाला सोना ₹600 चढ़कर ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीद कम हुई है। इससे डॉलर पर दबाव बढ़ा और सोने की मांग को सहारा मिला।

पिछले हफ्ते अमेरिका में महंगाई, रोजगार और रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से नरम रहे। इससे बाजार को लगने लगा कि फेड जल्द ब्याज दरें बढ़ाने से बच सकता है।

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ग्लोबल बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% बढ़कर 4,398 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं, चांदी 1% से ज्यादा चढ़कर 65.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की सीमित कीमतें फिलहाल सोने को सहारा दे रही हैं।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-ईरान तनाव अब भी बाजार की नजर में है। हालांकि, इस हफ्ते निवेशकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेड की FOMC बैठक के मिनट्स पर रहेगी।

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, फेड के मिनट्स से ब्याज दरों के अगले संकेत मिल सकते हैं। इससे सोने की कीमतों की अगली दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर,

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आया बड़ा उछाल! कमजोर डॉलर और US Fed के फैसले से रॉकेट बने दाम, देखें नया भाव!

Gold Price Today: कमजोर डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटने से सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। स्पॉट गोल्ड 0.5% चढ़कर 4,398.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% बढ़कर 4,455.50 डॉलर प्रति औंस हो गया।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.2% गिरावट आई। इससे दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया। Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड ओले हैनसेन का कहना है कि अमेरिका में महंगाई, रोजगार और उपभोक्ता खर्च के नरम आंकड़ों से फेड की अगली बड़ी चाल अब ब्याज दर बढ़ाने की बजाय कटौती की तरफ झुकती दिख रही है।

सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीद घटी

हाल में आए कमजोर पेरोल डेटा और नियंत्रित महंगाई के बाद बाजार की धारणा बदली है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में फेड के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अब 31% रह गई है। एक महीने पहले यह 51% थी।

UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अब भी 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर हैं। इससे अगले महंगाई आंकड़ों पर कुछ दबाव बना रह सकता है।

इस हफ्ते किन स्तरों पर रहेगी नजर?

LKP Securities में VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, COMEX पर सोना 4,395 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके लिए 4,410-4,415 डॉलर का दायरा नजदीकी रेजिस्टेंस है। 4,375 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। वहीं MCX Gold में ₹1,54,750 का स्तर अहम सपोर्ट और ₹1,55,500 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

दूसरे कीमती धातुओं का हाल

दूसरी कीमती धातुओं में भी तेजी दिखी। चांदी 1.5% बढ़कर 65.61 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। प्लैटिनम 0.7% चढ़कर 1,759.72 डॉलर और पैलेडियम 1.6% बढ़कर 1,333.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

निवेशक अब बुधवार को आने वाली फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।