Silver vs Gold Prices: सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा गिरावट, शिखर से 50% टूटी; अब आगे कैसी रहेगी चाल?

Silver vs Gold Prices: सोना और चांदी दोनों पिछले कुछ महीनों से दबाव में हैं। हालांकि, हालिया गिरावट में चांदी को ज्यादा नुकसान हुआ है। चांदी में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 29 जनवरी को 121 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद यह करीब 50% टूट चुकी है। इसके मुकाबले सोना अपने शिखर से करीब 25% नीचे है। यानी हालिया गिरावट में चांदी पर सोने के मुकाबले दोगुना दबाव पड़ा है।

हालांकि लंबी अवधि की तस्वीर अलग है। पिछले एक साल में चांदी ने 23.80% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 3.81% रहा। पांच साल में चांदी 167.71% और सोना 138.77% चढ़ा। दस साल में भी चांदी ने 249.72% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 233.98% रहा।

Silver vs Gold: अलग-अलग अवधि में रिटर्न

अवधिचांदी का रिटर्नसोने का रिटर्नबेहतर प्रदर्शन
1 महीना-8.14%-3.83%सोना
6 महीने-20.14%-12.19%सोना
इस साल अब तक-16.53%-3.14%सोना
1 साल0.2380.0381चांदी
5 साल1.67711.3877चांदी
10 साल2.49722.3398चांदी

सोर्स: TradingView, 9 अक्टूबर तक। 

चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?

सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है। इसकी बड़ी वजह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में भी होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में इसकी मांग रहती है। इसलिए ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार धीमी होने की आशंका चांदी पर ज्यादा असर डालती है।

Augmont की चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनीशा चैनानी के मुताबिक, चांदी में पहले तेज तेजी आई थी। इसके बाद निवेशकों की बिकवाली और मार्जिन बढ़ने से गिरावट तेज हुई। सोलर सेक्टर में चांदी की खपत घटने की आशंका भी कीमतों पर दबाव बना रही है।

सोने को केंद्रीय बैंकों का सहारा

सोने को दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सपोर्ट मिलता है। पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा है। चांदी को इस तरह का संस्थागत सहारा नहीं मिलता।

इसके अलावा, चांदी का बाजार सोने के मुकाबले छोटा है। इसलिए कम मात्रा में बिकवाली भी इसकी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है।

चांदी की कीमतों पर आगे क्या असर पड़ेगा?

J.P. Morgan ने चांदी की औसत कीमत का अनुमान 84 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 70 डॉलर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर सेक्टर में मांग घटने से चांदी की खपत प्रभावित हो सकती है। Silver Institute ने भी 2026 में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से चांदी की मांग में करीब 10% गिरावट का अनुमान लगाया है।

अहर महंगाई, ऊंची बॉन्ड यील्ड और कमजोर औद्योगिक मांग का दबाव बना रहा, तो चांदी में और गिरावट मुमकिन है। वहीं, इन परिस्थितियों में सुधार आने पर चांदी में तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।

Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: सितंबर में 1600 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी, क्या अब 22600 का अहम लेवल बचेगा?

Nifty Outlook: सितंबर एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। Nifty50 मंगलवार को 64 अंक गिरकर 22,716 पर बंद हुआ। पूरे सितंबर में इंडेक्स 1,600 अंक से ज्यादा यानी करीब 6.5% टूट चुका है।

मंगलवार को Nifty की शुरुआत गैप-डाउन हुई। शुरुआती कारोबार में बिकवाली तेज रही और इंडेक्स काफी नीचे चला गया। हालांकि, दिन के निचले स्तर से रिकवरी आई और Nifty ने शुरुआती नुकसान का बड़ा हिस्सा कम कर लिया।

एक्सपायरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा। आखिर में Nifty 0.28% की गिरावट के साथ 22,716 पर बंद हुआ। सेक्टरों की बात करें तो IT, Realty और FMCG में गिरावट जारी रही। हालांकि, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

200-वीक मूविंग एवरेज तक पहुंचा निफ्टी

गिरावट के साथ Nifty अपने 200-वीक मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह लेवल अभी करीब 22,600 है। कोविड के समय बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद पहली बार Nifty इस लंबे समय के टेक्निकल सपोर्ट तक पहुंचा है।

यही वजह है कि अब 30 सितंबर को 22,600 का स्तर बाजार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसके आसपास इंडेक्स का अगला रुख तय हो सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दबाव

बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.99% गिरा। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.81% की गिरावट आई।

बाजार में कमजोरी का असर अब सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

लगातार आठवें हफ्ते बाजार गिरा

हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। Nifty में करीब 6.8% की गिरावट दर्ज हुई है। इसके साथ ही इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते गिरा है।

2020 के बाद यह Nifty की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े अभी राहत दे रहे हैं।

इकोनॉमी से मिले कुछ अच्छे संकेत

अगस्त में भारत की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 8% रही। यह दो महीने में सबसे तेज बढ़त है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। इससे शहरी इलाकों में लोगों के खर्च में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। GDP ग्रोथ भी बाजार के लिए एक सपोर्टिव फैक्टर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण रहेंगी। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी बाजार के लिए अहम होगी।

22,550 के नीचे गिरावट पर दबाव

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक निफ्टी का ट्रेंड अभी कमजोर है। उनका कहना है कि 22,900 से 23,000 के बीच आने वाली तेजी ज्यादा टिक नहीं सकती। इस स्तर पर बिकवाली देखने को मिल सकती है।

उनके मुताबिक, अगर निफ्टी 22,550 के नीचे जाता है तो 22,200 तक गिरावट बढ़ सकती है।

22,570-22,550 का जोन अहम

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 22,570 से 22,550 का जोन Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट है। इसके नीचे गिरावट आने पर 22,400 तक दबाव बढ़ सकता है।

ऊपर की तरफ 22,900 से 22,930 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा। अगर Nifty इस रेंज के ऊपर टिकता है तो रिकवरी 23,050 तक जा सकती है।

22,600 के ऊपर टिकना जरूरी

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक 22,600 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली तेज हो सकती है। वहीं, अगर Nifty इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी की गुंजाइश रहेगी।

उनके मुताबिक 22,600 फिलहाल अहम सपोर्ट है। वहीं 22,800 तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

Stocks to Watch: 30 सितंबर को फोकस में ये 12 स्टॉक्स, टाटा स्टील से KPI ग्रीन एनर्जी तक शामिल

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी बिल्कुल फ्लैट नजर आ रहा है। एशियाई बाजारों में दबाव दिख रहा है। 10 साल की US बॉन्ड यील्ड 5.25% तक उछलने से अमेरिकी बाजार के सेंटिमेंट भी बिगड़े हैं। इधर कच्चा तेल भी 105 डॉलर के ऊपर कायम है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

कल भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की। भारी बिकवाली के बीच निफ्टी इंट्राडे में 22,800 के नीचे फिसल गया,जिससे लगातार सातवें हफ्ते भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा।

जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी,बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कमजोर ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड यील्ड,FII की लगातार बिकवाली और US-Iran शांति वार्ता में गतिरोध के बाद बढ़ी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बाजार पर दबाव बनाने वाली मुख्य वजहें रहीं। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 22,834 के आसपास सपाट ट्रेड कर रहा था,जिससे घरेलू इक्विटी मार्केट में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

एशियाई बाजार

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार गिरावट के साथ खुले। जापान का निक्केई 1 प्रतिशत और टॉपिक्स इंडेक्स 1.68 प्रतिशत नीचे था। वहीं, कोस्पी में 0.56 फीसदी की और ताइवान के बाजार में 0.06 फीसदी की गिरावट नजर आ रही थी।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट आई। तेल की कीमतें और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने बाजार पर दबाव बनाया। निवेशक ईरान युद्ध से जुड़ी शांति वार्ता की संभावनाओं और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की चाल पर नजरे बनाए हुए हैं।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 347.11 अंक या 0.67% गिरकर 51,481.51 पर आ गया,S&P 500 में 59.72 अंक या 0.77% की गिरावट के साथ यह 7,683.69 पर बंद हुआ और नैस्डैक कम्पोजिट 248.34 अंक या 0.92% गिरकर 26,820.38 पर आ गया। S&P में आई यह गिरावट 20 अगस्त के बाद से एक दिन में प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट थी।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार होता दिख रहा है। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बहत में गिरावट दिख रही है,जबकि फिलीपीन्स के पेसो और मलेशियाई रिंगित में बढ़त हुई है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.42% गिरा है। जबकि थाई बहत में 0.09% और ताइवान डॉलर में 0.11% की गिरावट आई है। सिंगापुर डॉलर 0.05% कमजोर हुआ है,जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन मामूली गिरावट (0.04%) के साथ लगभग सपाट दिख रहा है।

दूसरी ओर फिलीपीन पेसो में 0.22% की बढ़त नजर आई है। इसके बाद मलेशियाई रिंगित में 0.07% और जापानी येन में 0.05% की बढ़ोतरी हुई है। चीनी रेनमिनबी में 0.02% की बढ़त हुई है।

सोना $4200 के नीचे

मजबूत डॉलर और US में अगले 1 साल में 3 रेट हाइक की आशंका से सोने-चांदी में तेज गिरावट आई है और यह $4200 के नीचे फिसल गया है। वहीं, चांदी $61 के नीचे आ गई है। US में अक्टूबर में दरें बढ़ने की 70% संभावना है।

ईरान को प्रतिबंधों में ढील की खबर फर्जी: ट्रंप

ईरान को प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज किए गए फंडों को रिलीज करने की खबरों को ट्रंप ने खारिज करते हुए कहा है कि Axios की खबर फर्जी और कोरी अफवाह हैं। इधर ईरान ने नवंबर में US चुनाव के बाद युद्ध और भड़कने की आशंका जताई है।

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए बड़ा कदम

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए टाटा ट्रस्ट का बड़ा कदम सामने आया है। Tata Electronics, Tata Consulting Engineers का टाटा संस में मर्जर का प्रस्ताव रखा गया है। इसके कंपनी के NBFC और CIC कैटेगरी से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। ट्रस्ट ने कहा है कि रीस्ट्रक्चरिंग शेयरहोल्डर्स के हित में होगी।

कल निफ्टी में होगा बड़ा बदलाव

कल निफ्टी में बड़ा बदलाव होगा। करीब 3 दशक बाद विप्रो निफ्टी से बाहर होगा। वहीं, BSE इसमें शामिल होगा। BSE में 650 मिलियन डॉलर का इनफ्लो हो सकता है। वहीं, विप्रो से करीब 200 मिलियन डॉलर निकलेंगे।

होनासा कंज्यूमर में ब्लॉक डील संभव, Cube Highways Trust में भी बड़े सौदे संभव

आज ब्लॉक डील्स पर नजर रहेगी । सूत्रों के मुताबिक 2.73 परसेंट हिस्से के लिए होनासा कंज्यूमर में 400 Cr रुपए की ब्लॉक डील संभव है। करीब साढ़े 3 परसेंट डिस्काउंट पर 450 रुपए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस तय की गई है। साथ ही Cube Highways Trust में भी करीब पौने 700 करोड़ के बड़े सौदे हो सकते हैं।

कोफोर्ज: अखिल कुमार गुप्ता बने नए चेयरमैन

कोफोर्ज आज फोकस में होगा। अखिल कुमार गुप्ता नए चेयरमैन बने हैं। ये ओपी भट्ट के पद छोड़ने के बाद जिम्मेदारी संभालेंगे। इनका कार्यकाल 5 साल का होगा।

अगस्त IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8%

देश के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में तेजी आई है। अगस्त में IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8% रही है। जुलाई IIP ग्रोथ 6.7% से रिवाइज होकर 7.4% हो गई है। मैन्युफैक्चरिंग,इलेक्ट्रिसिटी और इंटरमीडिएट गुड्स ग्रोथ में तेजी देखने को मिली है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

28 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 5,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस सेशन के दौरान लगभग 5,189 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ वे नेट बायर बने रहे।

Nifty Outlook: 21 सितंबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन रिकवरी की। हालांकि, कारोबार में उतार-चढ़ाव काफी रहा। इसके बावजूद निफ्टी 75 अंक चढ़कर बंद हुआ। हफ्ते की शुरुआत बाजार ने अच्छी तेजी के साथ की थी। लेकिन ऊपर जाते ही बिकवाली शुरू हो गई। इससे निफ्टी फिर नीचे आ गया।

इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटी। इससे निफ्टी 23,000 के अहम स्तर के ऊपर बना रहा। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर अभी भी कमजोर रही। निफ्टी लगातार छठे हफ्ते गिरावट में बंद हुआ। इस हफ्ते इंडेक्स 0.22% नीचे रहा।

HDFC Bank और UltraTech में तेजी

निफ्टी के शेयरों में HDFC Bank और UltraTech Cement सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी ओर TCS और TMPV सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे।

सेक्टरों की बात करें तो Cement और Metal शेयरों में खरीदारी दिखी। IT शेयरों पर दबाव बना रहा। बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 1.24% और Nifty Smallcap 100 में 1.74% की तेजी रही।

कच्चे तेल से बाजार को मिली राहत

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड अपने ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। सऊदी अरब की पाइपलाइनों की मरम्मत का काम आगे बढ़ा है। इसके अलावा तेल निर्यात के दूसरे रास्ते भी मिले हैं। इससे सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहने की चिंता कुछ कम हुई है।

अमेरिकी फेड के ब्याज दर के फैसले के बाद अब बाजार का ध्यान दूसरी चीजों पर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। कच्चा तेल भी ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। घरेलू बाजार में लिक्विडिटी भी मजबूत है। ऐसे में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह तेजी का संकेत नहीं माना जा सकता।

अभी भी कई बड़े जोखिम

बाजार के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। ब्रेंट क्रूड अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। रुपया भी करीब 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा जोखिम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी।

अगले हफ्ते घरेलू स्तर पर सितंबर का फ्लैश PMI डेटा आएगा। अगस्त के इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट के आंकड़े भी आएंगे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़े भी बाजार को दिशा दे सकते हैं। अमेरिका से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े आएंगे। चीन के लोन प्राइम रेट पर भी बाजार की नजर रहेगी।

ईरान युद्ध से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट की यात्रा पर फिर से विचार करने को कहा है।

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध तेजी से बढ़ सकता है। वहीं, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपना सख्त रुख कायम रखा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है।

हूती विद्रोहियों के मुताबिक, उन्होंने रियाद में कुछ अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे कुछ घंटे पहले शहर के मुख्य एयरपोर्ट के पास आग और धुएं का गुबार देखा गया था। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने इसकी वजह की पुष्टि नहीं की है।

23,500 के ऊपर जाना आसान नहीं

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी में आगे तेजी आती है तो 23,500 से 23,600 का स्तर बड़ी चुनौती होगा। वहीं, गिरावट आने पर 23,100 से 23,000 के बीच सपोर्ट मिल सकता है।

SBI Securities के सुदीप शाह भी 23,150 के आसपास के स्तर को अहम मानते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी अगर लगातार 23,150 के नीचे जाता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स 23,000 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,500 से 23,520 का स्तर बड़ी रुकावट है। अगर निफ्टी 23,520 के ऊपर टिक गया तो शॉर्ट कवरिंग हो सकती है। इससे इंडेक्स 23,650 तक जा सकता है।

23,550 तक जा सकता है निफ्टी

LKP Securities के रुपक डे का कहना है कि कच्चा तेल अगर 96 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहता है तो बाजार में तेजी टिक सकती है। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 से 23,100 का स्तर अहम सपोर्ट है। मौजूदा रिकवरी जारी रहती है तो इंडेक्स 23,550 तक जा सकता है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,100 से 23,000 का जोन अहम सपोर्ट है। वहीं, 23,250 से 23,200 के आसपास भी सहारा मिल सकता है। ऊपर की तरफ 23,450 से 23,500 का स्तर रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,600 अहम रहेगा। खास बात यह है कि 23,600 पहले सपोर्ट था। अब यह रेजिस्टेंस की तरह काम कर सकता है।

Dividends Stocks: इस हफ्ते डिविडेंड की बहार! जानिए IRCTC, Dixon और BEML जैसी कंपनियों की रिकॉर्ड डेट

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market This Week : इस हफ्ते 2% टूटे सेंसेक्स-निफ्टी,जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market This Week : 11 सितंबर को मेटल,रियल्टी और PSU बैंक शेयरों में बिकवाली के बीच,उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स दिन के निचले स्तर से तेजी से सुधरे और मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर लगभग $109 प्रति बैरल पर आ गया, जिससे मार्केट गैप-डाउन खुला और ज्यादातर समय नेगेटिव जोन में रहा। निफ्टी ने 23,231.40 का इंट्राडे लो बनाया,जबकि सेंसेक्स 740 अंक तक गिर गया। हालांकि, बाद में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से बिकवाली का दबाव कम हुआ,जिससे इंडेक्स दिन के निचले स्तर से रिकवर हुए और मामूली नुकसान के साथ बंद हुए।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 120.83 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर और निफ्टी 79.70 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर बंद हुआ। वीकली बेसिस पर देखें तो इस हफ्ते BSE सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2% की गिरावट आई।

बाजार की वीकली चाल पर एक नजर

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च, अमोल अठावले का कहना है कि आज खत्म हुए हफ्ते में बेंचमार्क इंडेक्स में तेज गिरावट आई। निफ़्टी लगभग 2 प्रतिशत नीचे बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 1,700 अंक गिर गया। सेक्टरों की बात करें तो लगभग सभी अहम सेक्टर इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग रही। लेकिन रियल्टी और IT इंडेक्स को सबसे अधिक नुकसान हुआ। रियल्टी 6.50 प्रतिशत और IT 5.75 प्रतिशत नीचे गिर कर बंद हुए।

इस हफ्ते मार्केट ने 23,800/76,000 के अहम सपोर्ट जोन को तोड़ा और इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया। टेक्निकल तौर पर डेली और इंट्राडे चार्ट पर मार्केट लोअर हाई और लोअर लो का पैटर्न दिखा रहा है और वीकली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनी है,जो काफी हद तक नेगेटिव संकेत है।

अगले हफ्ते कैसा रह सकता है बाजार?

अमोल अठावले का मानना ​​है कि शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का ट्रेंड कमजोर है,लेकिन ओवरसोल्ड लेवल से संकेत मिलता है कि मौजूदा लेवल से एक पुलबैक रैली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ट्रेडर्स के लिए,तत्काल सपोर्ट जोन 23,200/74,200 के आसपास है। अगर मार्केट इस लेवल से ऊपर ट्रेड करने में कामयाब रहता है,तो 23,500/75,000 तक उछाल जारी रह सकता है। इसके बाद और तेजी आ सकती है,जिससे इंडेक्स 23,700–23,750/75,500–75,800 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत अगर मार्केट 23,200/74,200 से नीचे गिरता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ने की संभावना है। इस लेवल से नीचे जाने पर मार्केट 23,000–22,900/73,700–73,500 के लेवल को फिर से टेस्ट कर सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए सबसे नजदीकी सपोर्ट 56,000 पर है। इस लेवल के ऊपर जाने पर यह 57,000–57,500 की ओर बढ़ सकता है। नीचे की तरफ, अगर यह 56,000 से नीचे गिरता है तो इसके 55,500–55,200 तक गिरने की संभावना बढ़ जाती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ में हेड ऑफ़ रिसर्च,वेल्थ मैनेजमेंट सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि भारतीय इक्विटी बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत US$100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर US$110 प्रति बैरल की ओर बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बढ़ गई हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़त हुई है, जिससे US 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 5% के करीब पहुंच गई है। इससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ रहा है और फेड के ज्यादा सख्त रुख अपनाने की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। रुपया गिरकर ₹95.6/US$ पर आ गया है। जबकि FII की लगातार बिकवाली ने दबाव को और बढ़ा दिया है।

अगले हफ्ते निवेशक भारत के अगस्त के CPI और WPI महंगाई के आंकड़ों, US फ़ेड की पॉलिसी से जुड़े फैसले,US में रिटेल बिक्री और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर नजर रखेंगे। साथ ही कच्चे तेल की कीमतें,रुपये की चाल और ग्लोबल यील्ड भी बाजार के लिए अहम होंगे।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं की बड़ी भूमिका होगी। हालांकि,घरेलू संस्थागत निवेशकों का मजबूत निवेश बाजार को सहारा दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी बड़ी गिरावट भारतीय इक्विटी बाजार को राहत दे सकती है। इसलिए, चुनिंदा और स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति अपना सही रहेगा। ऐसी कंपनियों पर फोकस करें जिनकी अर्निंग की संभावना मजबूत है और जिनका वैल्यूएशन सही है।

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 15 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 शुरुआती गिरावट से उबरने की कोशिश जरूर करता दिखा, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। आखिर में इंडेक्स 65 अंक यानी 0.3% गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। कमजोर वैश्विक संकेतों और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का असर बाजार पर दिखा।

अब सोमवार, 10 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? कौन से लेवल अहम रहेंगे? इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि शुक्रवार को बाजार में क्या खास हुआ था।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

निफ्टी 50 में Grasim, TCS और Hindalco सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Bajaj Finance, Bajaj Finserv और Trent में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी और PSU बैंक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और केमिकल सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nifty Midcap 100 में 0.22% की बढ़त रही। Nifty Smallcap 100 0.05% फिसल गया।

अगले हफ्ते किन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर?

Motilal Oswal के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि अगले हफ्ते भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इसकी वजह मजबूत घरेलू आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और तिमाही नतीजों का अंतिम दौर हो सकता है। हालांकि, शेयरों में खबरों के आधार पर शेयरों में हलचल बनी रह सकती है।

 

इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक आंकड़ों पर रहेगी। इनमें भारत के CPI और WPI महंगाई के आंकड़े, जून तिमाही के नतीजे अहम रहेंगे। साथ ही, अमेरिका के CPI और PPI महंगाई के आंकड़े, OPEC की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और चीन के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन व रिटेल सेल्स के आंकड़े भी आएंगे।

निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी का रुझान फिलहाल कमजोर जरूर है। हालांकि, इंडेक्स 24,400-24,300 के अहम सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है। यह स्तर पहले रेजिस्टेंस था और अब सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी इस स्तर तक फिसलता है तो यह खरीदारी का मौका हो सकता है। वहीं, ट्रेंड बदलने के लिए 24,700 के ऊपर निकलना जरूरी होगा।

Angel One के हितेश राठी के अनुसार, निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,450-24,350 के बीच है। इसके नीचे 24,000 बड़ा सपोर्ट रहेगा। वहीं, ऊपर की ओर 24,650-24,750 पहला रेजिस्टेंस और 24,800-24,850 अगला अहम स्तर होगा।

HDFC Securities के नंदीश शाह का कहना है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों से निफ्टी 24,400-24,700 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स अभी भी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर है, इसलिए लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी सकारात्मक बना हुआ है। उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 24,770 और 25,000 रेजिस्टेंस रहेंगे। वहीं, गिरावट पर 24,430-24,380 का दायरा सपोर्ट देगा।

बैंक निफ्टी पर क्या राय है?

 

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, पिछले पांच कारोबारी सत्रों से बैंक निफ्टी 58,248-57,353 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद इंडेक्स अभी भी अपने 20-डे EMA के ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 58,200-58,300 का दायरा अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर बैंक निफ्टी 58,700 और फिर 59,100 तक जा सकता है। वहीं, नीचे की ओर 57,300-57,200 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

Stocks to Watch: सोमवार 10 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 21 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IIP Growth: औद्योगिक उत्पादन जून में 7.3% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर में दमदार ग्रोथ

IIP Growth: जून 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन (IIP) 7.3% बढ़ा है। यह मई के 5.1% के मुकाबले काफी बेहतर रहा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के मुताबिक, जून में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का क्विक एस्टिमेट 123.1 रहा। पिछले साल जून में यह 114.7 था।

सभी बड़े सेक्टरों में बढ़त

जून में चारों बड़े सेक्टरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। बिजली और गैस सप्लाई सबसे आगे रही। इसमें 10.6% की ग्रोथ दर्ज हुई। मैन्युफैक्चरिंग 7.8% बढ़ा। वॉटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट में 6.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, माइनिंग और क्वैरींग सेक्टर 1% बढ़ा।

किन सेक्टरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया?

मैन्युफैक्चरिंग के 23 में से 19 इंडस्ट्री ग्रुप में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर सबसे आगे रहा। इसमें 34% की शानदार ग्रोथ हुई। स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, UPS, सॉलिड-स्टेट ड्राइव और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टर की मांग बढ़ने से यह तेजी आई।

इसके बाद मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर सेक्टर में 17.5% की बढ़ोतरी हुई। ऑटो पार्ट्स, पैसेंजर कार और कमर्शियल व्हीकल्स की मजबूत मांग इसका बड़ा कारण रही। फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर भी 10.8% बढ़ा। इसमें चाय, नॉन-बासमती चावल और स्टार्च का अहम योगदान रहा।

कैपिटल गुड्स में सबसे तेज बढ़त

इस्तेमाल के आधार पर देखें तो कैपिटल गुड्स में सबसे ज्यादा 14.2% की ग्रोथ दर्ज की गई। इंटरमीडिएट गुड्स 9.3%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 7.7% और इन्फ्रास्ट्रक्चर/कंस्ट्रक्शन गुड्स 7.5% बढ़े। वहीं, प्राइमरी गुड्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स दोनों में 4.9% की बढ़ोतरी हुई। कुल IIP ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान इंटरमीडिएट गुड्स, प्राइमरी गुड्स और कैपिटल गुड्स का रहा।

IIP की गणना का तरीका बदला

MoSPI ने 2022-23 बेस ईयर वाली नई IIP सीरीज में बड़ा बदलाव किया है। अब होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Output PPI) का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बदलाव IIP बास्केट के 463 में से 234 आइटम ग्रुप पर लागू होगा, जिनकी कुल हिस्सेदारी 36.02% है।

मंत्रालय का कहना है कि Output PPI कीमतों का ज्यादा सटीक आकलन करता है। इससे वैल्यू के आधार पर रिपोर्ट होने वाले उत्पादों के वास्तविक उत्पादन का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा। साथ ही, भारत की औद्योगिक उत्पादन मापने की प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच जाएगी।

Aurionpro Solutions Share Price: अपने पीक से 62% नीचे ये स्टॉक आज 12% गिरा, तिमाही नतीजों का दिखा असर

Core Sector Growth: जून में 5% पर पहुंची कोर सेक्टर की ग्रोथ, 5 महीने की सबसे तेज रफ्तार

Core Sector Growth: भारत के कोर सेक्टर ने जून 2026 में 5% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। यह पिछले 5 महीनों की सबसे तेज ग्रोथ है। मई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 3.2% रही थी। जून में तेज बढ़त की सबसे बड़ी वजह आयरन ओर (लौह अयस्क) का उत्पादन, साथ ही बिजली और सीमेंट सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन रहा।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कोर सेक्टर की कुल वृद्धि 3.6% रही। पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 1% थी। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में सुस्ती के बाद औद्योगिक गतिविधियों ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।

आयरन ओर बना सबसे बड़ा सहारा

रिवाइज्ड कोर सेक्टर इंडेक्स में इस बार पहली बार आयरन ओर को शामिल किया गया है। जून में इसका उत्पादन 43.9% बढ़ा। मई में इसमें 19% की वृद्धि दर्ज की गई थी। नए बेस ईयर 2022-23 के तहत इसे इंडेक्स में शामिल किए जाने से इसका योगदान भी बढ़ गया है।

बिजली और सीमेंट सेक्टर ने बनाए रखा दम

भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ी, जिससे बिजली उत्पादन 9.8% बढ़ा। मई में इसमें 11.2% की वृद्धि हुई थी। वहीं, सीमेंट उत्पादन भी 9.8% बढ़ा। इससे साफ संकेत मिलता है कि देश में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

स्टील और कोयला उत्पादन भी बढ़ा

स्टील प्रोडक्शन जून में 4.6% बढ़ा। हालांकि यह मई के 5.1% से थोड़ा कम है, लेकिन सेक्टर लगातार बढ़त में बना हुआ है। मई में 9.5% की गिरावट के बाद कोयला उत्पादन भी वापसी करते हुए 1.4% बढ़ा, जिससे कोर सेक्टर को अतिरिक्त सहारा मिला।

इन सेक्टरों में रही कमजोरी

दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

  • रिफाइनरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% घटा। हालांकि मई में इसमें 8.2% की गिरावट थी।
  • कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 4.2% घटा। यह लगातार तीसरा महीना है जब इसमें गिरावट आई है।
  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का उत्पादन 7.4% घटा, जो एक साल से ज्यादा समय की सबसे बड़ी गिरावट है।
  • उर्वरक (Fertiliser) उत्पादन भी 3.3% घटा। मार्च से इस सेक्टर में कमजोरी बनी हुई है।

बदला कोर सेक्टर इंडेक्स

जून के आंकड़ों के साथ सरकार ने कोर सेक्टर इंडेक्स की नई सीरीज भी जारी की है। इसमें 2011-12 की जगह अब 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है।

अब इंडेक्स में 9 उद्योग शामिल हैं। पहली बार आयरन ओर को इसमें जगह मिली है। वहीं, स्टील इंडेक्स को इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के आंकड़ों के मुताबिक किया गया है। इसके अलावा, पुराने कोयला मापदंड की जगह रॉ कोल (Raw Coal) को शामिल किया गया है, ताकि दोहरी गिनती से बचा जा सके।

क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

बिजली, सीमेंट, स्टील, कोयला और आयरन ओर में मजबूत बढ़त बताती है कि निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियां अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी सेक्टर की कमजोरी अब भी औद्योगिक विकास की रफ्तार पर दबाव बनाए हुए है।

IIP Data: मई में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की बढ़ी रफ्तार, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाया दम

IIP Data: भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन मई 2026 में बढ़कर 5.1% हो गया। अप्रैल में यह 4.9% था। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छी बढ़त की वजह से इंडस्ट्रियल ग्रोथ तेज हुई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने संभाली कमान

IIP में सबसे ज्यादा करीब 76% हिस्सेदारी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की है। मई में इस सेक्टर की ग्रोथ 5.5% रही। हालांकि, अप्रैल के मुकाबले इसमें मामूली नरमी रही, लेकिन कुल मिलाकर रफ्तार बनी रही।

इस दौरान इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, फैब्रिकेटेड मेटल, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।

इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा तेजी

मई में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर का प्रोडक्शन 20.8% बढ़ा। वहीं, फैब्रिकेटेड मेटल प्रोडक्ट्स में 15.5%, मोटर व्हीकल्स में 14.5%, अन्य ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट में 14.3% और कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स में 11.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेश से जुड़े सेक्टरों में मांग मजबूत बनी हुई है।

बिजली उत्पादन में उछाल

मई में बिजली और गैस सेक्टर का उत्पादन 9.9% बढ़ा। अकेले बिजली उत्पादन में 11.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह गर्मियों के दौरान बिजली की बढ़ी हुई मांग रही।

माइनिंग सेक्टर अब भी दबाव में

दूसरी ओर माइनिंग और क्वारिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा। मई में इसका उत्पादन 1.6% घट गया। हालांकि, अप्रैल में इसमें 3.7% की गिरावट आई थी। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और गैर-धातु खनिजों के कमजोर उत्पादन का असर इस सेक्टर पर पड़ा।

कुछ सेक्टरों में रही कमजोरी

सभी सेक्टरों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। गारमेंट्स का उत्पादन 8.8% घटा। प्रिंटिंग सेक्टर में 10.3% की गिरावट आई। रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% और केमिकल्स का उत्पादन 1.3% घट गया।

कैपिटल गुड्स में बनी रही मजबूती

निवेश से जुड़े कैपिटल गुड्स का उत्पादन मई में 12.9% बढ़ा। अप्रैल में इसकी ग्रोथ 12% थी। इससे संकेत मिलता है कि मशीनरी और उपकरणों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। वहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 5.8% और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 7.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स की ग्रोथ सिर्फ 3.6% रही। इससे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की मांग अभी भी कमजोर नजर आती है।

ICRA ने क्या कहा?

ICRA के प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल ने कहा कि मई में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ घटकर 5.5% रह गई, जबकि अप्रैल में यह 6.1% थी। उन्होंने बताया कि 23 में से 15 मैन्युफैक्चरिंग सब-सेक्टरों की रफ्तार धीमी हुई है। वहीं, माइनिंग सेक्टर में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इसकी रफ्तार पहले से कुछ कम रही।

Bajaj Auto Share Buyback: ₹5633 करोड़ का ऑफर 1 जुलाई से, ₹12000 के भाव पर खरीद; किस रेशियो में मंजूर होंगे शेयर