GDP Growth: सरकार ने 2.6% GDP ग्रोथ के दावे को खारिज किया, 7.8% को सटीक बताया

GDP Growth: सरकार ने पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 2.6% रहने के दावे को खारिज कर दिया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि 7.8% की GDP ग्रोथ का आंकड़ा मजबूत प्रोडक्शन डेटा पर आधारित है। उन्होंने पुराने और नए GDP डेटा की तुलना को ‘सेब और संतरे की तुलना’ जैसा बताया। PTI के मुताबिक, सरकार ने कहा कि दोनों आंकड़े अलग-अलग डेटा सीरीज के हैं और उनकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

यह विवाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयान के बाद शुरू हुआ था। उनका कहना था कि अगर पिछले साल की पहली तिमाही की GDP को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ नहीं किया जाता, तो मौजूदा ग्रोथ करीब 2.6% होती।

सरकार ने 2.6% के दावे को क्यों बताया गलत?

सौरभ गर्ग के मुताबिक, आलोचक FY26 की पहली तिमाही के पुराने ₹86.05 लाख करोड़ के GDP आंकड़े की तुलना नए ₹80 लाख करोड़ के आंकड़े से कर रहे हैं। यह ₹86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा पुराने 2011-12 बेस ईयर वाली GDP सीरीज का था।

फरवरी 2026 में सरकार ने 2022-23 को बेस ईयर मानकर नई GDP सीरीज जारी की। इसके बाद पुरानी सीरीज की जगह नई सीरीज लागू हो गई। नई सीरीज में Q1 FY26 का GDP पहले ₹80.32 लाख करोड़ आंका गया। बाद में यह ₹80.44 लाख करोड़ हुआ और फिर नए IIP और PPI डेटा के आधार पर इसे ₹80 लाख करोड़ किया गया।

PTI के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा कि यह सामान्य डेटा रिवीजन की प्रक्रिया है। इसका मकसद पिछले साल का GDP घटाकर मौजूदा ग्रोथ रेट को बढ़ाना नहीं था।

असली तुलना किससे होनी चाहिए?

सरकार का कहना है कि GDP ग्रोथ की तुलना एक ही डेटा सीरीज और स्थिर कीमतों पर की जानी चाहिए। नई 2022-23 बेस ईयर सीरीज के मुताबिक, FY27 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही।

मंत्रालय ने स्टील, सीमेंट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ का भी हवाला दिया। PTI के मुताबिक, सरकार का तर्क है कि वास्तविक उत्पादन में बढ़ोतरी के आंकड़े भी मजबूत आर्थिक गतिविधि दिखाते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग में रियल ग्रोथ ज्यादा कैसे?

मैन्युफैक्चरिंग की रियल GVA ग्रोथ 9.2% रही, जबकि नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही। इसके चलते इंप्लिसिट GVA डिफ्लेटर माइनस 1.5% रहा।

मंत्रालय ने कहा कि इसका मतलब फैक्ट्री गेट कीमतें घटीं, यह जरूरी नहीं है। नई पद्धति में आउटपुट और इनपुट को अलग-अलग डिफ्लेट किया जाता है। अगर कच्चे माल और दूसरे इनपुट की कीमतें आउटपुट कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो ऐसा अंतर आ सकता है।

माइनिंग में रियल ग्रोथ घटी, नॉमिनल क्यों बढ़ी?

Q1 FY27 में माइनिंग की रियल GVA 2.4% घटी। लेकिन नॉमिनल GVA 22.3% बढ़ी। PTI के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह मिनरल्स की कीमतों में तेज उछाल रही।

माइनिंग और क्वॉरिंग की PPI महंगाई अप्रैल में 22% और मई में 21.2% रही। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई।

GDP डिफ्लेटर और CPI-WPI में अंतर क्यों?

सरकार ने कहा कि GDP डिफ्लेटर को CPI और WPI से सीधे नहीं मिलाया जा सकता। CPI घरों के खर्च की तय बास्केट को मापता है। WPI मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों को ट्रैक करता है। वहीं, GDP डिफ्लेटर निवेश, सरकारी खर्च, एक्सपोर्ट और सर्विसेज समेत पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है।

मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन और खर्च के आधार पर निकाले गए GDP आंकड़ों के बीच सांख्यिकीय अंतर भी सामान्य है। जैसे-जैसे ज्यादा डेटा आता है, इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए मौजूदा अंतर को GDP में किसी गड़बड़ी का सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

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FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान, अल नीनो और ईरान संकट से बढ़ सकता है जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष FY27 में कुछ धीमी पड़ सकती है। India Ratings & Research (Ind-Ra) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में FY27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान जताया है। यह FY26 की 7.6% ग्रोथ से कम है। हालांकि यह एजेंसी के मई 2026 के 6.7% अनुमान से थोड़ा बेहतर है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY27 के लिए अपना ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर चुका है। Ind-Ra का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिम आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो सबसे बड़े जोखिम

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और अल नीनो का कृषि पर संभावित असर इस वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। एजेंसी का मानना है कि इन कारकों का असर खपत, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए कच्चे तेल का औसत भाव 95 डॉलर से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-पब्लिक फाइनेंस देवेंद्र पंत के अनुसार, सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर अल नीनो की वजह से खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो सस्ते तेल का पूरा फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पाएगा।

रुपये में कमजोरी की उम्मीद

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकता है। यह मई के 94.28 रुपये के अनुमान से थोड़ा बेहतर है, लेकिन सालाना आधार पर करीब 6.4% की कमजोरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FCNR (Bank) जमा और External Commercial Borrowings (ECB) के जरिए करीब 70 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारत में आ सकता है।

तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ का अनुमान

Ind-Ra ने FY27 की चारों तिमाहियों के लिए अलग-अलग GDP ग्रोथ का अनुमान भी जारी किया है। उसके और RBI के अनुमान में कुछ अंतर भी है।

तिमाहीInd-Ra का अनुमानRBI का अनुमान
अप्रैल-जून6.90%7.00%
जुलाई-सितंबर6.60%6.40%
अक्टूबर-दिसंबर6.70%6.50%
जनवरी-मार्च6.90%6.80%

महंगाई और चालू खाते के घाटे पर नजर

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9% रह सकती है, जबकि FY26 में यह करीब 2% थी। इसी तरह चालू खाते का घाटा बढ़कर GDP का 1.5% हो सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 0.6% था।

राजकोषीय घाटा हासिल करना आसान नहीं

Ind-Ra ने सरकार के FY27 के 4.3% राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, LPG और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए दबाव बना सकता है। हालांकि बेहतर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और नॉन-टैक्स रेवेन्यू इस लक्ष्य को हासिल करने में कुछ राहत दे सकते हैं।

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IIP Growth: औद्योगिक उत्पादन जून में 7.3% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर में दमदार ग्रोथ

IIP Growth: जून 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन (IIP) 7.3% बढ़ा है। यह मई के 5.1% के मुकाबले काफी बेहतर रहा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के मुताबिक, जून में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का क्विक एस्टिमेट 123.1 रहा। पिछले साल जून में यह 114.7 था।

सभी बड़े सेक्टरों में बढ़त

जून में चारों बड़े सेक्टरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। बिजली और गैस सप्लाई सबसे आगे रही। इसमें 10.6% की ग्रोथ दर्ज हुई। मैन्युफैक्चरिंग 7.8% बढ़ा। वॉटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट में 6.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, माइनिंग और क्वैरींग सेक्टर 1% बढ़ा।

किन सेक्टरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया?

मैन्युफैक्चरिंग के 23 में से 19 इंडस्ट्री ग्रुप में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर सबसे आगे रहा। इसमें 34% की शानदार ग्रोथ हुई। स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, UPS, सॉलिड-स्टेट ड्राइव और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टर की मांग बढ़ने से यह तेजी आई।

इसके बाद मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर सेक्टर में 17.5% की बढ़ोतरी हुई। ऑटो पार्ट्स, पैसेंजर कार और कमर्शियल व्हीकल्स की मजबूत मांग इसका बड़ा कारण रही। फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर भी 10.8% बढ़ा। इसमें चाय, नॉन-बासमती चावल और स्टार्च का अहम योगदान रहा।

कैपिटल गुड्स में सबसे तेज बढ़त

इस्तेमाल के आधार पर देखें तो कैपिटल गुड्स में सबसे ज्यादा 14.2% की ग्रोथ दर्ज की गई। इंटरमीडिएट गुड्स 9.3%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 7.7% और इन्फ्रास्ट्रक्चर/कंस्ट्रक्शन गुड्स 7.5% बढ़े। वहीं, प्राइमरी गुड्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स दोनों में 4.9% की बढ़ोतरी हुई। कुल IIP ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान इंटरमीडिएट गुड्स, प्राइमरी गुड्स और कैपिटल गुड्स का रहा।

IIP की गणना का तरीका बदला

MoSPI ने 2022-23 बेस ईयर वाली नई IIP सीरीज में बड़ा बदलाव किया है। अब होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Output PPI) का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बदलाव IIP बास्केट के 463 में से 234 आइटम ग्रुप पर लागू होगा, जिनकी कुल हिस्सेदारी 36.02% है।

मंत्रालय का कहना है कि Output PPI कीमतों का ज्यादा सटीक आकलन करता है। इससे वैल्यू के आधार पर रिपोर्ट होने वाले उत्पादों के वास्तविक उत्पादन का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा। साथ ही, भारत की औद्योगिक उत्पादन मापने की प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच जाएगी।

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Core Sector Growth: जून में 5% पर पहुंची कोर सेक्टर की ग्रोथ, 5 महीने की सबसे तेज रफ्तार

Core Sector Growth: भारत के कोर सेक्टर ने जून 2026 में 5% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। यह पिछले 5 महीनों की सबसे तेज ग्रोथ है। मई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 3.2% रही थी। जून में तेज बढ़त की सबसे बड़ी वजह आयरन ओर (लौह अयस्क) का उत्पादन, साथ ही बिजली और सीमेंट सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन रहा।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कोर सेक्टर की कुल वृद्धि 3.6% रही। पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 1% थी। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में सुस्ती के बाद औद्योगिक गतिविधियों ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।

आयरन ओर बना सबसे बड़ा सहारा

रिवाइज्ड कोर सेक्टर इंडेक्स में इस बार पहली बार आयरन ओर को शामिल किया गया है। जून में इसका उत्पादन 43.9% बढ़ा। मई में इसमें 19% की वृद्धि दर्ज की गई थी। नए बेस ईयर 2022-23 के तहत इसे इंडेक्स में शामिल किए जाने से इसका योगदान भी बढ़ गया है।

बिजली और सीमेंट सेक्टर ने बनाए रखा दम

भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ी, जिससे बिजली उत्पादन 9.8% बढ़ा। मई में इसमें 11.2% की वृद्धि हुई थी। वहीं, सीमेंट उत्पादन भी 9.8% बढ़ा। इससे साफ संकेत मिलता है कि देश में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

स्टील और कोयला उत्पादन भी बढ़ा

स्टील प्रोडक्शन जून में 4.6% बढ़ा। हालांकि यह मई के 5.1% से थोड़ा कम है, लेकिन सेक्टर लगातार बढ़त में बना हुआ है। मई में 9.5% की गिरावट के बाद कोयला उत्पादन भी वापसी करते हुए 1.4% बढ़ा, जिससे कोर सेक्टर को अतिरिक्त सहारा मिला।

इन सेक्टरों में रही कमजोरी

दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

  • रिफाइनरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% घटा। हालांकि मई में इसमें 8.2% की गिरावट थी।
  • कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 4.2% घटा। यह लगातार तीसरा महीना है जब इसमें गिरावट आई है।
  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का उत्पादन 7.4% घटा, जो एक साल से ज्यादा समय की सबसे बड़ी गिरावट है।
  • उर्वरक (Fertiliser) उत्पादन भी 3.3% घटा। मार्च से इस सेक्टर में कमजोरी बनी हुई है।

बदला कोर सेक्टर इंडेक्स

जून के आंकड़ों के साथ सरकार ने कोर सेक्टर इंडेक्स की नई सीरीज भी जारी की है। इसमें 2011-12 की जगह अब 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है।

अब इंडेक्स में 9 उद्योग शामिल हैं। पहली बार आयरन ओर को इसमें जगह मिली है। वहीं, स्टील इंडेक्स को इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के आंकड़ों के मुताबिक किया गया है। इसके अलावा, पुराने कोयला मापदंड की जगह रॉ कोल (Raw Coal) को शामिल किया गया है, ताकि दोहरी गिनती से बचा जा सके।

क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

बिजली, सीमेंट, स्टील, कोयला और आयरन ओर में मजबूत बढ़त बताती है कि निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियां अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी सेक्टर की कमजोरी अब भी औद्योगिक विकास की रफ्तार पर दबाव बनाए हुए है।

Income Tax Bill: विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने वाला बिल संसद में आएगा, जानिए क्या बदलेगा

Income Tax Bill: केंद्र सरकार मानसून सत्र में Income-tax (Amendment) Bill, 2026 पेश करने की तैयारी में है। यह बिल पिछले महीने लाए गए अध्यादेश (Ordinance) की जगह लेगा। इस अध्यादेश के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर आयकर से छूट दी गई थी।

इस बिल का मकसद क्या है?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ा था। ऐसे में सरकार ज्यादा विदेशी निवेश लाना चाहती है। इसी मकसद से यह टैक्स छूट दी गई थी। सरकार चाहती है कि भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में ज्यादा विदेशी निवेश आए। इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी। सरकारी बॉन्ड बाजार भी मजबूत होगा।

सरकार का मानना है कि दुनिया में इस समय काफी अनिश्चितता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। सप्लाई चेन भी कई जगह प्रभावित है। ऐसे माहौल में विदेशी पूंजी आकर्षित करना जरूरी है।

विदेशी निवेशकों को क्या फायदा होगा?

सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को ब्याज से होने वाली कमाई और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स नहीं देना होगा। यह छूट 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी गई है।

पहले विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए शेयर और बॉन्ड पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स भी लगता था।

अध्यादेश क्यों लाना पड़ा?

जब यह फैसला लिया गया, तब संसद का सत्र नहीं चल रहा था। इसलिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया। बाद में इसे कानून बनाने के लिए अब संसद में बिल लाया जाएगा।

मानसून सत्र में और क्या होगा?

सरकार MSME Development (Amendment) Bill, 2026 भी पेश करेगी। इसका मकसद छोटे कारोबारियों के लिए कारोबार करना आसान बनाना है। साथ ही भुगतान में देरी से जुड़े विवादों का समाधान भी मजबूत किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार वित्त वर्ष 2022-23 के लिए Demands for Excess Grants भी संसद में पेश करेगी।

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IIP Data: मई में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की बढ़ी रफ्तार, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाया दम

IIP Data: भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन मई 2026 में बढ़कर 5.1% हो गया। अप्रैल में यह 4.9% था। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छी बढ़त की वजह से इंडस्ट्रियल ग्रोथ तेज हुई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने संभाली कमान

IIP में सबसे ज्यादा करीब 76% हिस्सेदारी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की है। मई में इस सेक्टर की ग्रोथ 5.5% रही। हालांकि, अप्रैल के मुकाबले इसमें मामूली नरमी रही, लेकिन कुल मिलाकर रफ्तार बनी रही।

इस दौरान इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, फैब्रिकेटेड मेटल, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।

इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा तेजी

मई में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर का प्रोडक्शन 20.8% बढ़ा। वहीं, फैब्रिकेटेड मेटल प्रोडक्ट्स में 15.5%, मोटर व्हीकल्स में 14.5%, अन्य ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट में 14.3% और कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स में 11.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेश से जुड़े सेक्टरों में मांग मजबूत बनी हुई है।

बिजली उत्पादन में उछाल

मई में बिजली और गैस सेक्टर का उत्पादन 9.9% बढ़ा। अकेले बिजली उत्पादन में 11.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह गर्मियों के दौरान बिजली की बढ़ी हुई मांग रही।

माइनिंग सेक्टर अब भी दबाव में

दूसरी ओर माइनिंग और क्वारिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा। मई में इसका उत्पादन 1.6% घट गया। हालांकि, अप्रैल में इसमें 3.7% की गिरावट आई थी। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और गैर-धातु खनिजों के कमजोर उत्पादन का असर इस सेक्टर पर पड़ा।

कुछ सेक्टरों में रही कमजोरी

सभी सेक्टरों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। गारमेंट्स का उत्पादन 8.8% घटा। प्रिंटिंग सेक्टर में 10.3% की गिरावट आई। रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% और केमिकल्स का उत्पादन 1.3% घट गया।

कैपिटल गुड्स में बनी रही मजबूती

निवेश से जुड़े कैपिटल गुड्स का उत्पादन मई में 12.9% बढ़ा। अप्रैल में इसकी ग्रोथ 12% थी। इससे संकेत मिलता है कि मशीनरी और उपकरणों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। वहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 5.8% और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 7.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स की ग्रोथ सिर्फ 3.6% रही। इससे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की मांग अभी भी कमजोर नजर आती है।

ICRA ने क्या कहा?

ICRA के प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल ने कहा कि मई में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ घटकर 5.5% रह गई, जबकि अप्रैल में यह 6.1% थी। उन्होंने बताया कि 23 में से 15 मैन्युफैक्चरिंग सब-सेक्टरों की रफ्तार धीमी हुई है। वहीं, माइनिंग सेक्टर में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इसकी रफ्तार पहले से कुछ कम रही।

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