नीलकंठ मिश्रा ने भारतीय शेयर बाजारों में तेजी नहीं टिकने की बताई बड़ी वजह, सोमवार को भी FII ने की 1148 करोड़ रुपये की बिकवाली

विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर यानी सोमवार को भी बिकवाली की। इससे पिछले हफ्ते की अच्छी तेजी के बाद हफ्ते के पहले दिन बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 1.11 फीसदी यानी 257 अंक गिरकर 22,888 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 876 अंक गिरकर 73,852 पर क्लोज हुआ। विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर जब तक बदलेगा नहीं, तब तक बाजार में तेजी टिक नहीं पाएगी।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल का बड़ा असर 

वर्ल्ड बैंक में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर-इंडिया नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड की वजह से भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। निवेश के जटिल नियमों का असर भी फॉरेन इनवेस्टर्स के इनवेस्टमेंट पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स घटाने से काम नहीं चलेगा। इनवेस्टमेंट प्रोसेस को आसान बनाना होगा, नियमों को पारदर्शी बनाना होगा और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। उन्होंने कहा कि रुपये पर जितना दिख रहा है, उससे ज्यादा दबाव है।

अमेरिका और भारतीय बाजार में रिटर्न के बीच का फर्क घटा

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट में निवेश में फायदा नहीं दिखता है। अमेरिका और भारत में रिटर्न के बीच का फर्क घट गया है, जिससे निवेश के लिहाज से भारत का अट्रैक्शन कम हुआ है। हाल में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड अमेरिका में कई दशकों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोपीय देशों में भी बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। यील्ड में उछाल से अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश में दिलचस्पी बढ़ी है।

भारतीय बाजार में घट रही विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

मिश्रा ने एक उदाहरण की मदद से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2 फीसदी और भारत में 8 फीसदी है, तो भारत में निवेश करने में फायदा है। लेकिन, अगर अमेरिका में यील्ड बढ़कर 5.3 फीसदी हो जाती है और भारत में 7.3 फीसदी रहती है भारत में निवेश में दिलचस्पी कम हो जाती है। इसका मतलब है कि फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत में निवेश करने में फायदा नहीं दिखता। ऐसी स्थिति में वे भारत की जगह अमेरिका में इनवेस्ट करना पसंद करेंगे।

FIIs ने सोमवार को शुद्ध रूप से की 1,148 करोड़ की बिकवाली

स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर को भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 1,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। उन्होंने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। लेकिन, 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से 3,201.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली के बीच DII ने लगातार खरीदारी कर भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया है।

FII Selling: FII की बिकवाली नहीं रुक रही! बाजार चढ़ा, फिर भी ₹3209 करोड़ के शेयर बेचे

FII Selling: विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में ₹3,208.76 करोड़ की नेट बिकवाली की। खास बात यह है कि बिकवाली तब बढ़ी, जब निफ्टी लगातार दूसरे दिन बढ़त में बंद हुआ।

एक्सचेंज के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने ₹8,761.71 करोड़ के शेयर खरीदे। वहीं, ₹11,970.47 करोड़ के शेयर बेचे। बुधवार को FIIs की नेट बिकवाली ₹2,032.61 करोड़ थी। यानी एक दिन में बिकवाली काफी बढ़ गई।

इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs नेट खरीदार रहे। उन्होंने ₹14,105.01 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹10,487.26 करोड़ के शेयर बेचे। इस तरह उनकी नेट खरीदारी ₹3,617.75 करोड़ रही। हालांकि, यह बुधवार के ₹3,908.23 करोड़ से कम है।

निफ्टी चढ़ा, सेंसेक्स गिरा

गुरुवार को शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार रहा। Nifty 53 अंक बढ़कर 23,271 पर बंद हुआ। यह निफ्टी की लगातार दूसरी बढ़त है। वहीं, Sensex 22 अंक गिरकर 74,315 पर बंद हुआ।

Nifty Bank में कमजोरी रही। इंडेक्स 237 अंक गिरकर 56,056 पर आ गया। दूसरी ओर, Nifty Midcap में अच्छी तेजी रही। यह 558 अंक बढ़कर 61,432 पर बंद हुआ।

Tata Group के शेयर चढ़े

Nifty के 35 शेयर बढ़त में बंद हुए। इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में खास तौर पर खरीदारी दिखी। Tata Group के शेयर भी चढ़े। N Chandrasekaran के Tata Sons के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्त होने की खबर से इन शेयरों में तेजी आई। Tata Motors Passenger Vehicles भी टॉप गेनर्स में रहा।

त्योहारी सीजन से पहले ऑटो शेयरों में भी खरीदारी रही। Maruti Suzuki और TVS Motor करीब 2% चढ़े।

ONGC समेत इन शेयरों में गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी का असर ऑयल कंपनियों पर दिखा। ONGC करीब 2% गिरा और Nifty का सबसे बड़ा लूजर रहा।

PB Fintech में 4% की गिरावट आई। इससे बुधवार की तेजी का करीब आधा हिस्सा वापस चला गया। Federal Bank भी 2% गिरा। वहीं, कॉरपोरेट अनाउंसमेंट की उम्मीद में Jana Small Finance Bank 2% चढ़ा।

सेमीकंडक्टर शेयरों में खरीदारी

सेमीकंडक्टर से जुड़े शेयरों में अच्छी खरीदारी दिखी। Kaynes Technology, Hitachi Energy India और CG Power में 3% से ज्यादा की तेजी रही।

रुपया थोड़ा मजबूत हुआ

भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ। यह ₹95.93 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया ₹95.96 प्रति डॉलर पर था।

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Income Tax Bill: विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने वाला बिल संसद में आएगा, जानिए क्या बदलेगा

Income Tax Bill: केंद्र सरकार मानसून सत्र में Income-tax (Amendment) Bill, 2026 पेश करने की तैयारी में है। यह बिल पिछले महीने लाए गए अध्यादेश (Ordinance) की जगह लेगा। इस अध्यादेश के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर आयकर से छूट दी गई थी।

इस बिल का मकसद क्या है?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ा था। ऐसे में सरकार ज्यादा विदेशी निवेश लाना चाहती है। इसी मकसद से यह टैक्स छूट दी गई थी। सरकार चाहती है कि भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में ज्यादा विदेशी निवेश आए। इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी। सरकारी बॉन्ड बाजार भी मजबूत होगा।

सरकार का मानना है कि दुनिया में इस समय काफी अनिश्चितता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। सप्लाई चेन भी कई जगह प्रभावित है। ऐसे माहौल में विदेशी पूंजी आकर्षित करना जरूरी है।

विदेशी निवेशकों को क्या फायदा होगा?

सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को ब्याज से होने वाली कमाई और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स नहीं देना होगा। यह छूट 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी गई है।

पहले विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए शेयर और बॉन्ड पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स भी लगता था।

अध्यादेश क्यों लाना पड़ा?

जब यह फैसला लिया गया, तब संसद का सत्र नहीं चल रहा था। इसलिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया। बाद में इसे कानून बनाने के लिए अब संसद में बिल लाया जाएगा।

मानसून सत्र में और क्या होगा?

सरकार MSME Development (Amendment) Bill, 2026 भी पेश करेगी। इसका मकसद छोटे कारोबारियों के लिए कारोबार करना आसान बनाना है। साथ ही भुगतान में देरी से जुड़े विवादों का समाधान भी मजबूत किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार वित्त वर्ष 2022-23 के लिए Demands for Excess Grants भी संसद में पेश करेगी।

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FII DII Data: क्या रिटेल निवेशकों ने घबराकर बेच दिए शेयर? FII और DII ने मार्केट क्रैश में की ₹2753 करोड़ की खरीदारी

FII DII Data: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दिखी। इसके बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखी। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 9 जुलाई को FIIs ने 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी खरीदारी के मूड में रहे और उन्होंने 790.16 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यानी दोनों ने मिलकर 2,753 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। ऐसे में बाजार की तेज गिरावट यह संकेत देती है कि अन्य निवेशक वर्गों, खासकर रिटेल निवेशकों की ओर से घबराहट में बिकवाली हुई होगी।

FII-DII ने कितना खरीदा, कितना बेचा

बुधवार के कारोबारी सत्र में FIIs ने कुल 17,463.95 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 15,501.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, DIIs ने 19,165.13 करोड़ रुपये की खरीदारी और 18,374.97 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

एक दिन पहले यानी 8 जुलाई को भी FIIs ने 393.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। हालांकि, उस दिन DIIs 383.43 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर नेट सेलर रहे थे।

इस हफ्ते कैसा रहा FII-DII का रुख?

इस सप्ताह अब तक FIIs लगातार चारों कारोबारी सत्र में खरीदार रहे हैं। वहीं, DIIs ने भी चार में से तीन सत्रों में खरीदारी की है। इससे साफ है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद संस्थागत निवेशकों का भरोसा अभी बना हुआ है।

तारीखFII नेट फ्लोDII नेट फ्लो
9 जुलाई 2026₹1,962.80 करोड़₹790.16 करोड़
8 जुलाई 2026₹393.19 करोड़-₹383.43 करोड़
7 जुलाई 2026₹243.03 करोड़₹3,791.42 करोड़
6 जुलाई 2026₹1,355.33 करोड़-₹1,953.89 करोड़

भारी गिरावट के बावजूद जारी रही खरीदारी

विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। इससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ गया।

शेयर बाजार कितना गिरा

BSE Sensex 1,677 अंक टूटकर 76,504 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 517 अंक गिरकर 23,882 पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी 23,900 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया।

बाजार में लगभग हर सेक्टर में बिकवाली रही। Nifty 50 के 50 में से 46 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। Nifty PSU Bank और Nifty Chemicals सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर रहे। वहीं, Nifty Bank 1,458 अंक गिरकर 56,743 और Nifty Midcap 963 अंक टूटकर 61,323 पर बंद हुआ।

रुपये पर भी बढ़ा दबाव

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती का असर रुपये पर भी दिखा। भारतीय रुपया 59 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.55 पर बंद हुआ। अमेरिका के ईरान पर नए हमलों और Hormuz Strait में बढ़े तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।

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अगले 6-12 महीनों में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है बाजार, नीलेश शाह ने बताई वजह

बाजार अगले 6-12 महीनो में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। इनविजन कैपिटल के फाउंडर नीलेश शाह ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने पेटीएम के शेयरों में तेजी जारी रहने की उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ, अनुकूल पॉलिसी और बेहतर होते इनवेस्टर सेंटिमेंट से अगली कुछ तिमाही में पेटीएम के शेयरों में तेजी जारी रह सकती है।

बाजार अगले चरण की तेजी के लिए तैयार

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कंसॉलिडेशन के बाद शेयर बाजारों में अगले चरण की तेजी के लिए एक मजबूत बुनियाद बनी है। बैंकिंग और आईटी जैसे सेक्टर में अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ दिख सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) की खरीदारी भी फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इससे अगले 6 से 12 महीनों में बाजार के प्रमुख सूचकांक नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

इन वजहों से बढ़ेगी कॉर्पोरेट अर्निंग्स

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने के बड़े कारण हैं। अगली कुछ तिमाहियों में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ दिख सकती है। बीती कुछ तिमाहियों में पॉलिसी के स्तर पर जो कदम उठाए गए हैं, उनका पूरा असर अभी कंपनियों की अर्निंग्स पर नहीं दिखा है।” उन्होंने कहा कि अगर सरकार नए रिफॉर्म्स करती है तो इससे विदेशी कैपिटल की आवक शुरू हो सकती है।

इन सेक्टर का प्रदर्शन कंसॉलिडेशन के दौरान भी बेहतर

शाह ने कहा कि कुल मिलाकर आउटलुक कंस्ट्रक्टिव लगता है। ऐसा लगता है कि बुरा दौर बीत चुका है। उन्होंने उन सेक्टर्स को अपनी पसंद बताया, जिनका प्रदर्शन बाजार में कंसॉलिडेशन के दौरान भी अच्छा रहा। इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियां शामिल हैं।

आने वाले हैं बाजार में बड़े आईपीओ

उन्होंने कहा कि एनएसई और एनएसडीएल के आईपीओ आने वाले हैं। मार्केट में लिक्विडिटी का एक बड़ा हिस्सा इन शेयरों में जाएगा। हालांकि, म्यूचु्अल फंड्स और सिप के जरिए अच्छा निवेश हो रहा है, जिससे मार्केट में अतिरिक्त सप्लाई से कोई निगेटिव असर नहीं पड़ेगा।

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बाजार का सेंटीमेंट अब हो रहा बेहतर

बीते कुछ महीनों में बाजार पर बड़ा दबाव दिखा था, जिसकी वजह मध्यपूर्व में टेंशन से क्रूड की कीमतों में उछाल था। अब क्रूड की कीमतें नीचे आ रही हैं। इसका पॉजिटिव असर मार्केट पर पड़ा है। अमेरिका-ईरान के बीच डील की खबर का भी बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ा है।