Nifty Outlook: 21 अक्टूबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? क्रूड समेत ये बड़े फैक्टर करेंगे तय

Nifty Outlook: शेयर बाजार में जैसे ही रिकवरी की उम्मीद बनती है, कोई नई परेशानी सामने आ जाती है। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। AI से जुड़ी बिकवाली का दबाव कम हुआ था। बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई थी। IT कंपनियों के मिले-जुले नतीजों से बाजार को संभलने की उम्मीद थी। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने फिर चिंता बढ़ा दी।

दशहरा की छुट्टी के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर को बाजार खुलेगा। इस बार उसके सामने महंगे तेल की चुनौती होगी। ब्रेंट क्रूड करीब 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसके अलावा, बड़ी टेक कंपनियों के नतीजे भी आने शुरू होंगे। बाजार की नजर इन नतीजों पर रहेगी।

इसी दिन Jio Platforms का IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। ₹30,213 करोड़ के इस इश्यू को एंकर निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब देखना होगा कि रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशक इसमें कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं।

तिमाही नतीजों पर भी रहेगी नजर

कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। सोमवार को Urban Company और Himadri Specialty Chemicals के नतीजों में मामूली कमी को भी निवेशकों ने पसंद नहीं किया। इसका असर दोनों कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के रूप में दिखा।

बुधवार को बाजार Bajaj Finance, L&T Technology Services, Hindustan Zinc, IREDA, Piramal Finance और Sobha समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। इनके नतीजों सोमवार को बाजार बंद होने के बाद आए थे।

इसके अलावा Eternal, KEI Industries, M&M Finance, Mahindra Holidays, SRF और Vishal Mega Mart के नतीजे भी आने हैं। Indian Hotels और Aditya Birla Sun Life AMC के नतीजों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Nifty के लिए 22,800 का स्तर अहम

Religare Broking के अजीत मिश्रा के मुताबिक, सोमवार की गिरावट के बाद Nifty अपने 20-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA के करीब पहुंच गया है। यह स्तर 22,900 है। इसके नीचे 22,550 से 22,750 का दायरा अगला अहम सपोर्ट हो सकता है। वहीं, बाजार में तेजी लौटने पर 23,200 से 23,300 के स्तर पर रुकावट आ सकती है।

HDFC Securities के विनय रजानी का कहना है कि बाजार में गिरावट के बावजूद तेजी से जुड़े इंडिकेटर और ऑसिलेटर अभी कमजोर नहीं पड़े हैं। उनके मुताबिक, Nifty के लिए 22,800 का स्तर अहम है। यहां 20-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA और पिछला स्विंग हाई, दोनों सपोर्ट दे रहे हैं।

विनय रजानी के मुताबिक, Nifty इस स्तर के आसपास संभलकर फिर तेजी पकड़ सकता है। हालांकि, अगर इंडेक्स 22,500 के नीचे चला जाता है, तो तेजी की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहना होगा।

Bank Nifty में 55,500 का सपोर्ट अहम

Bank Nifty भी 55,500 के करीब बंद हुआ है। यह इसका अहम सपोर्ट स्तर है। अगर यहां से लगातार बिकवाली होती है, तो इंडेक्स 55,000 और फिर 54,500 तक गिर सकता है। वहीं, बाजार में रिकवरी होने पर 56,000 का स्तर पहली बड़ी चुनौती होगा।

LKP Securities के वत्सल भुवा के मुताबिक, सोमवार की गिरावट के बावजूद Bank Nifty अपने 20-दिन के मूविंग एवरेज और 55,200 के अहम सपोर्ट के ऊपर बंद हुआ। उनके अनुसार, तेजी की वापसी की पुष्टि तभी होगी, जब इंडेक्स लगातार 56,000 के ऊपर बंद होने लगेगा।

जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक इस तेजी को गिरावट के बाद की रिकवरी के तौर पर ही देखना चाहिए। वत्सल भुवा ने यह भी कहा कि अगर इंडेक्स 55,000 के नीचे जाता है, तो निवेशकों को अपनी लॉन्ग पोजीशन पर दोबारा नजर डालनी करनी चाहिए।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आपके PF के पैसे का क्या होता है? जानिए EPFO कहां इन्वेस्ट करता है और कैसे तय होता है ब्याज

Where EPFO invests PF money: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) के नाम पर जो कटौती होती है, उसे हम भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी आपके खाते में जमा करती है।

लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपकी तिजोरी में जमा होने वाले करोड़ों-अरबों रुपये आखिर कहां जाते हैं? क्या यह पैसा किसी बैंक में रखा रहता है या कहीं और निवेश होता है? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) आपके इस पैसे को सुरक्षित रखने और उस पर शानदार रिटर्न (जैसे हालिया 8.25% ब्याज) देने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

EPFO आपके पैसे का क्या करता है?

EPFO कोई साधारण बैंक नहीं है, बल्कि भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक बड़ा वैधानिक निकाय है। कर्मचारियों के इस विशाल फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास होती है। बोर्ड के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत इस पैसे को देश के अलग-अलग वित्तीय और सरकारी साधनों में निवेश किया जाता है। इस निवेश से होने वाली कमाई से ही आपके पीएफ खाते में हर साल ब्याज का पैसा भेजा जाता है।

कहां-कहां होता है पीएफ का निवेश?

सरकार के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईपीएफओ निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाने के लिए फंड को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है:

  1. सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स: लगभग 85% तक
  2. इक्विटी यानी शेयर बाजार (Equity – ETFs): 15% तक

पोर्टफोलियो श्रेणी संभावित आवंटन % मुख्य साधन
सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs)45% – 65% केंद्र सरकार के बॉन्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs)
कॉरपोरेट बॉन्ड्स व डेट20% – 45%PSUs, सरकारी वित्तीय संस्थानों व सुरक्षित कॉरपोरेट बॉन्ड्स
इक्विटी (शेयर बाजार) 5% – 15%केवल इंडेक्स आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs – Nifty 50, Sensex)
शॉर्ट-टर्म डेट/मनी मार्केट0% – 5% लिक्विडिटी और तात्कालिक नकदी प्रबंधन के लिए ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS)

85% पैसा जाता है पूरी तरह सुरक्षित सरकारी डेट में

ईपीएफओ अपने पास आने वाले कुल फंड का करीब 85 हिस्सा ऐसी जगहों पर लगाता है जहां डूबने का जोखिम न के बराबर होता है:

सरकारी बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन: ईपीएफओ का एक बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की विकास योजनाओं के बॉन्ड्स में लगा होता है। इससे देश का बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, रेलवे) मजबूत होता है और पीएफ के लिए तयशुदा रिटर्न सुनिश्चित होता है।

PSU के कॉरपोरेट बॉन्ड्स: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य महारत्न कंपनियों के सुरक्षित डेट सिक्योरिटीज में भी यह पैसा निवेश किया जाता है।

15% हिस्सा शेयर बाजार में: क्या आपका पैसा जोखिम में है?

साल 2015 से पहले ईपीएफओ शेयर बाजार में निवेश नहीं करता था। लेकिन कम ब्याज दरों की चुनौती से निपटने और रिटर्न बढ़ाने के लिए सरकार ने अगस्त 2015 से इक्विटी में 5% से 15% तक निवेश करने की अनुमति दी।

सीधे शेयरों की खरीद नहीं: ईपीएफओ कभी भी किसी कंपनी विशेष के शेयर सीधे बाजार से नहीं खरीदता।

केवल इंडेक्स ETFs का सहारा: यह निवेश केवल BSE Sensex और NSE Nifty-50 जैसे शीर्ष सूचकांकों को ट्रैक करने वाले ETFs के जरिए किया जाता है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

ईपीएफओ कैसे तय करता है आपका सालाना ब्याज?

वित्तीय वर्ष के दौरान डेट बॉन्ड्स से मिलने वाला तय ब्याज और इक्विटी (ETFs) की बिक्री से हुआ मुनाफा जोड़ा जाता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है। वित्त मंत्रालय की मुहर लगने के बाद तय ब्याज दर कर्मचारियों के पीएफ खातों में क्रेडिट कर दी जाती है।

4 वजहों से Sensex में 766 प्वाइंट्स की रिकवरी, 25 सितंबर के बाद Nifty फिर 23100 के पार

Share Market Rally: वैल्यू बाइंग और आईटी सेक्टर में खरीदारी के दम पर शुरुआती उठा-पटक से उबरते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तर से शानदार रिकवरी की। दिन के निचले स्तर से सेंसेक्स 766 प्वाइंट्स ऊपर चढ़ा तो निफ्टी भी फिर 23100 के पार पहुंच गया। इससे पहले निफ्टी ने आखिरी बार 25 सितंबर को 23100 का लेवल छुआ था और इसी के पार बंद भी हुआ था। ब्रोडर लेवल पर भी तेज रिकवरी हुई है। निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी की गिरावट से उबरते हुए फ्लैट हो गया तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी की गिरावट से रिकवर होते हुए ग्रीन जोन में पहुंच गया।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:39 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 398.14 प्वाइंट्स यानी 0.54% की बढ़त के साथ 74,713,75 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 131.35 प्वाइंट्स यानी 0.57% के उछाल के साथ 23,128.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 765.79 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,778.78 और निफ्टी दिन के निचले स्तर से 236.05 प्वाइंट्स उबरते हुए 23,149.85 तक पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स 302.62 प्वाइंट्स गिरकर 74,012.99 और निफ्टी 83.55 प्वाइंट्स फिसलकर 22,913.80 तक आ गया।

Share Market Rally: ये है वजह

वैल्यू बाइंग

मार्केट में शुरुआती गिरावट का निवेशकों ने फायदा उठाते हुए खरीदारी की, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

IT Sector ने खींच लिया ऊपर

आईटी सेक्टर ने मार्केट को आज शानदार तरीके से सपोर्ट दिया और निफ्टी आईटी फिलहाल 3% से अधिक मजबूत है। साथ ही बैंकिंग शेयरों ने भी शानदार वापसी की और मार्केट को सपोर्ट किया। निफ्टी पीएसयू बैंक शुरुआती गिरावट से उबरते हुए आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी बढ़त है। निफ्टी मेटल तो 1% से अधिक ऊपर चढ़ गया और निफ्टी फार्मा भी ग्रीन है। हालांकि निफ्टी एफएमसीजी अभी भी आधे फीसदी कमजोर है।

कच्चे तेल में गिरावट

सैंक्शन लगे देशों से तेल की सप्लाई पर अमेरिकी प्रतिबंधों के ढील की संभावना पर कच्चा तेल नरम पड़ा, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिसलकर प्रति बैरल $105 के करीब आ गया।

टेक्निकल रीजन

एनालिस्ट्स के मुताबिक जब तक निफ्टी 22,900 के ऊपर है, मार्केट में तेजी की गुंजाइश रहेगी। बजाज ब्रोकरिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि निफ्टी अब 23000-23100 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 23500 की तरफ बढ़ सकता है। वहीं अगर इस रेजिस्टेंस के ऊपर निफ्टी टिक नहीं पाता है तो 22,500-23,100 की रेंज में कंसालिडेशन दिख सकता है। पबित्रों के मुताबिक जब तक निफ्टी 22,500 के पार है, नियर टर्म में इसमें पुलबैक रैली आ सकती है।

कोटक नियो के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि इंट्रा-डे में मार्केट आउटलुक पॉजिटिव है और गिरावट पर खरीदारी तो रैली पर सेलिंग की स्ट्रैटेजी अपनाई जा सकती है। श्रीकांत का कहना है कि निफ्टी/सेंसेक्स के लिए नीचे की तरफ 22,875/74,000 और 22,800/73,700 अहम सपोर्ट जोन हैं तो दूसरी तरफ ऊपर की तरफ 23,100–23,200/74,500–74,800 अहम रेजिस्टेंस एरिया हैं। हालांकि श्रीकांत का यह भी कहना है कि अगर मार्केट 22,800/73,700 के नीचे आता है तो सेंटिमेंट बदल सकता है और ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजिशन से बाहर निकल सकते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दक्षिण कोरिया के Kospi में लगा सर्किट, चिप शेयरों की बिकवाली पर टूट गया 8%, इस कारण मचा हाहाकार

चिप शेयरों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने आज दक्षिण कोरियाई बाजार में ऐसा हाहाकार मचाया कि सर्किट लग गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश का एक अहम इंडिकेटर है और चिप शेयरों की बिकवाली में यह 8% टूट गया। चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई। सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार ही नहीं बल्कि अधिकतर एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली।

एशियाई मार्केट में कैसी है हालत

दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी में 8% की गिरावट आई है तो जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) में इंट्रा-डे में 4% और टॉपिक्स (TOPIX) में 2% की फिसलन आई। साथ ही MSCI एशिया पैसेफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जिससे इसके जुलाई के बाद के सबसे निचले बंद स्तर की ओर बढ़ने की आशंका बन गई। हालांकि भारतीय मार्केट में बात करें तो आईटी सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर शानदार रौनक दिखी और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक उछल पड़े।

इस हाहाकार की क्या है वजह

अमेरिका में सितंबर में महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़ों ने बाजार में इस आशंका को मजबूत कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी आई। अमेरिका में पांच महीने में सबसे तेज रफ्तार से महंगाई बढ़ने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है।

भारतीय मार्केट में इस कारण छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IT Sector में रौनक समेत 4 वजह, Sensex भागा 900 प्वाइंट्स ऊपर, Nifty पहुंचा 22900 के करीब

Share Market Rally: कच्चे तेल में गिरावट और रुपये की मजबूती से स्टॉक मार्केट को शानदार सपोर्ट मिला है। इस सपोर्ट पर सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 22900 के करीब पहुंच गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर बिकवाली का दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 में करीब आधे फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 1% की गिरावट है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:09 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 871.57 प्वाइंट्स यानी 1.20% की बढ़त के साथ 73,653.46 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 250.05 प्वाइंट्स यानी 1.11% के उछाल के साथ 22,873.25 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 930.67 प्वाइंट्स उछलकर 73,712.56 और निफ्टी 269.20 प्वाइंट्स चढ़कर 22,891.90 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: ये है वजह

कच्चे तेल में गिरावट

न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका तेल के बेडे़ पर प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है। इससे कच्चे तेल पर दबाव बढ़ा और ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल फिसलकर $104 के करीब आ गया। इसने मार्केट में रौनक बिखेरी है।

IT Sector से मजबूत सपोर्ट

घरेलू मार्केट को आज आईटी सेक्टर से मजबूत सपोर्ट मिला है। एआई स्टॉक्स में भारी बिकवाली के चलते एआई-हैवी दक्षिण कोरियाई इंडेक्स कोस्पी करीब 9% टूट गया। एआई स्टॉक्स में बिकवाली ने आईटी सर्विसेज स्टॉक्स की रौनक बढ़ा दी और घरेलू मार्केट में निफ्टी आईटी 2% से अधिक उछल पड़ा। इसकी तेजी ने पीएसयू बैंकिंग शेयरों की बिकवाली को संभाल लिया, जिसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूटा है। प्राइवेट बैंकों से भी मार्केट को सपोर्ट मिला है, और निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% से अधिक मजबूत हुआ है।

वैल्यू बाइंग

हाल-फिलहाल मार्केट में भारी गिरावट से कई अच्छे-अच्छे स्टॉक्स भी सस्ते में मिलने लगे तो निचले स्तर पर खरीदारी यानी वैल्यू बाइंग होने लगी, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला है।

रुपये की मजबूती

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे मजबूत होकर 94.92 के भाव पर खुला। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; IDBI Bank, HDB Financial और OM Power समेत 15 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी हल्की गिरावट के साथ शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 10.50 प्वाइंट्स यानी 0.05% की फिसलन के साथ 22,612.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 251.89 प्वाइंट्स यानी 0.34% की गिरावट के साथ 72,781.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.25 प्वाइंट्स यानी 0.44% की फिसलन के साथ 22,622.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

ICICI Lombard General Insurance Company Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी का मुनाफा 15.47% बढ़कर ₹946.4 करोड़, प्रीमियम से नेट कमाई 17.7% उछलकर ₹6,651.87 करोड़ और टोटल इनकम 19.2% बढ़कर ₹7,843.7 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान बीमा कंपनी का अंडरराइटिंग लॉस भी ₹178.36 करोड़ से ₹318.38 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने हर शेयर पर ₹7 के अंतरिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है।

HDB Financial Services Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज का मुनाफा 34.2% बढ़कर ₹780.2 करोड़ और प्रीमियम से नेट कमाई 15.6% उछलकर ₹2,533.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Bajaj Consumer Care Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर बजाज कंज्यूमर केयर का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 65.9% बढ़कर ₹70.2 करोड़ और रेवेन्यू 25.5% उछलकर ₹332.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Tata Technologies Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टाटा टेक्नोलॉजीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 3.6% बढ़कर ₹171.44 करोड़ और रेवेन्यू 28.4% उछलकर ₹1698.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Ceat Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर सिएट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 39.8% फिसलकर ₹112 करोड़ पर आ गया लेकिन रेवेन्यू 26.2% उछलकर ₹4,762 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी जीरो से ₹13 करोड़ के एक्सपेश्नल लॉस में आ गई, जो कि वालंटरी रिटायरमेंट स्कीम से जुड़ा है।

Mangalore Refinery and Petrochemicals Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 203% बढ़कर ₹1900.8 करोड़ और रेवेन्यू (एक्साइज ड्यूटी छोड़कर) 43.6% उछलकर ₹32,516.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Hathway Cable and Datacom Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर हाथवे केबल एंड डेटाकॉम का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 44.3% बढ़कर ₹10.16 करोड़ और रेवेन्यू 5.7% उछलकर ₹567.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,187.6 करोड़ का आईपीओ पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। इस आईपीओ के लिए प्राइस बैंड प्रति शेयक ₹1,065–₹1,119 फिक्स किया है। इस इश्यू के तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। इसमें ₹500 करोड़ के शेयर तो जियो प्लेटफॉर्म्स के एलिजिबल एंप्लॉयीज और ₹2500 करोड़ के शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज के एलिजिबल शेयरहोल्डर्स के लिए आरक्षित हैं।

IDBI Bank

फेयरफैक्स फाइेंशियल होल्डिंग्स की कनाडा इंक को आईडीबीआई बैंक खरीदने की मंजूरी मिल गई है। सरकार और एलआईसी इसमें कुल मिलाकर 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेच रही है। सरकार बैंक में अपनी 30.48% और एलआईसी 30.24% हिस्सेदारी बेच रही है। कनाडा इंक इसे प्रति शेयर ₹81 के भाव पर खरीद रही है। सौदे के बाद सरकार की बैंक में 15% और एलआईसी के पास 19% हिस्सेदारी रह जाएगी।

Dr Reddy’s Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में डॉ रेड्डीज की एफटीओ-9 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की PAI (प्री-अप्रूवल इंस्पेक्शन) पूरी कर ली है। 8-9 अक्टूबर की जां के बाद तीन ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी हुआ है।

Enviro Infra Engineers

एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स की सब्सिडियरी सुयोग ऊर्जा को एरी एनर्जी एलएलपी से ₹228 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला है। इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के लातूर में 100 MW के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) टर्न्की काम शामिल हैं।

Om Power Transmission

ओम पावर ट्रांसमिशन को उत्तर गुजरात विज कंपनी से ₹101.56 करोड़ के टर्न्की कॉन्ट्रैक्ट के लिए LoA (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में अंबाजी में मौजूदा इलेक्ट्रिकल लाइन नेटवर्क को अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क में बदलने और उससे जुड़े अन्य काम हैं।

AceVector

ICICI सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप ने ऐसवेक्टर के 32.91 लाख शेयर (0.6% हिस्सेदारी) ₹8.6 करोड़ में प्रति शेयर ₹26.27 के भाव पर बेच दिए।

Devson Catalyst

इंडिया मैक्स इन्वेस्टमेंट फंड ने डेवसन कैटलिस्ट के 72,000 इक्विटी शेयर (0.53% हिस्सेदारी) ₹2.75 करोड़ में प्रति शेयर ₹382.50 के भाव पर बेच दिए। 15 जुलाई, 2026 तक डेवसन कैटलिस्ट में इंडिया मैक्स इन्वेस्टमेंट फंड की 2.41% हिस्सेदारी (3.27 लाख शेयर) थी।

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वॉलफोर्ट फाइनेंशियल सर्विसेज ने फाइन लाइन सर्किट्स के 25,000 शेयर (0.52% हिस्सेदारी) ₹20.71 लाख में प्रति शेयर ₹82.87 के भाव पर खरीदे।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bajaj Finance-M&M के चलते Sensex लाल, Nifty कमजोर, ₹43 हजार करोड़ घटी निवेशकों की दौलत

Sensex-Nifty closed red: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी आज शुरुआती हल्की उठा-पटक के बाद तेज गिरावट दिखी। सेंसेक्स डे-हाई से 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया और निफ्टी भी 22600 के नीचे आ गया और रेड जोन में बंद भी हुए। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक गायब हो गई और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 रेड जोन में बंद हुए। इस दबाव में आज बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹43 हजार करोड़ से अधिक कम हो गया यानी कि निवेशकों की दौलत ₹43 हजार करोड़ से अधिक घट गई।

सेक्टरवाइज मार्केट को आईटी और एफएमसीजी सेक्टर ने ऊपर ले जाने की कोशिश की और इनके निफ्टी इंडेक्स 1-1% से अधिक ऊपर चढ़े। हालांकि फार्मा और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाया। निफ्टी फार्मा 1% से अधिक तो निफ्टी प्राइवेट बैंकों आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो भी करीब 1% कमजोर हुआ।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें आज 14 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 251.89 प्वाइंट्स यानी 0.34% की गिरावट के साथ 72,781.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.25 प्वाइंट्स यानी 0.44% की फिसलन के साथ 22,622.70 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में बात करें तो सेंसेक्स 161.48 प्वाइंट्स चढ़कर 73,195.26 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 616.51 प्वाइंट्स फिसलकर 72,578.75 तक आ गया और निफ्टी भी पहले 36.00 प्वाइंट्स चढ़कर 22,757.95 तक पहुंचा, जहां से यह 199.00 प्वाइंट्स टूटकर 22,558.95 तक आ गया था।

डूबे निवेशकों के ₹43 हजार करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 13 अक्टूबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,70,91,742.63 करोड़ था। आज यानी 14 अक्टूबर 2026 को यह घटकर ₹4,70,47,768.69 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹43,973.94 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 11 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 11 आज बढ़त के साथ बंद हुए। सबसे अधिक तेजी आज इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस में रही। वहीं दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, एमएंडएम और बजाज फिनसर्व में आज सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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126 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4578 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2563 शेयर आज मजबूत हुए तो 1810 में गिरावट रही जबकि 205 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 126 शेयर एक साल के हाई और 103 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 5 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 43 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Fall: डे-हाई से Sensex टूटा 600 प्वाइंट्स, Nifty आया 22600 के नीचे

Share Market Fall: घरेलू स्टॉक मार्केट में आज मिला-जुला रुझान दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी रेड से ग्रीन और ग्रीन से रेड जोन में झूलने लगे। एक तरफ विदेशी निवेशकों की बिकवाली सुस्त होने और टैक्सेशन में राहत की उम्मीद इसे ऊपर ले जाने की कोशिश में है तो दूसरी तरफ मुनाफावसूली और तेल की महंगाई इसे नीचे खींच रही। हालांकि शुरुआती सुस्ती के बाद सेंसेक्स डे-हाई से 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22600 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की बढ़त है।

फिलहाल 01:07 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 313.37 प्वाइंट्स यानी 0.43% की गिरावट के साथ 72,720.41 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 116.45 प्वाइंट्स यानी 0.51% की फिसलन के साथ 22,605.50 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 161.48 प्वाइंट्स चढ़कर 73,195.26 तक पहुंचा था लेकिन शुरुआती हल्की उठा-पटक के बाद यह एक तरफ फिसलता चला गया और डे-हाई से प्वाइंट्स टूटकर 616.51 प्वाइंट्स गिरकर 72,578.75 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी भी पहले 36.00 प्वाइंट्स चढ़कर 22,757.95 तक पहुंचा जिससे यह 199.00 प्वाइंट्स फिसलकर 22,558.95 तक आ गया।

किन वजहों से मार्केट आ रहा नीचे

मुनाफावसूली

एक कारोबारी दिन पहले मार्केट में शानदार रौनक रही। सेंसेक्स और निफ्टी डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक मजबूत हुए। ऐसे में ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली से मार्केट पर दबाव बना और यह नीचे फिसलने लगा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

एक कारोबारी दिन पहले 13 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने लगातार 13वें दिन खरीदारी से अधिक बिकवाली की। 13 अक्टूबर मंगलवार को FIIs ने करीब ₹1305 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की।

तेल की कीमतों में उछाल

हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई ने सप्लाई की चिंताएं बढ़ाई हैं और कच्चे तेल में उबाल आया तो मार्केट में इसकी आंच महसूस हुई। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रू़ड उछलकर प्रति बैरल $107 के करीब पहुंच गया।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX में उछाल से मार्केट पर दबाव बढ़ा है। फिलहाल यह 2.33% की तेजी के साथ 14.45 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

किन वजहों से मार्केट को मिल रहा सपोर्ट

LTCG और STT पर सरकार के नजरिए से सपोर्ट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर सभी पक्षों की राय सुनना चाहेगी। इसने मार्केट में जोश भर दिया। वित्त मंत्री ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार किन सुझावों पर विचार करेगी।

RBI की कोशिशों से FIIs की बिकवाली सुस्त

विदेशी निवेशकों ने लगातार 13वें दिन घरेलू मार्केट में बिकवाली की। हालांकि जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी को रोकने के लिए आरबीआई के उपायों से पिछले दो ट्रेडिंग सेशन में रुपये में 1.5% की मजबूती आई है, जिससे मार्केट में FIIs की बिकवाली को काफी कम करने में मदद मिली है।

टेक्निकल वजह

एनालिस्ट्स के मुताबिक बुलिश रुझान के लिए निफ्टी को 22,750 के पार जाना होगा। कोटक नियो के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि निफ्टी/सेंसेक्स के लिए 22,480/72,500 अहम सपोर्ट लेवल है और ऊपर की तरफ 22,850/73,500 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहा है। श्रीकांत के मुताबिक 22,850/73,500 के ऊपर सफल ब्रेकआउट के बाद मार्केट 23,000/74,000 की तरफ बढ़ सकता है लेकिन अगर नीचे की तरफ 22,480/72,500 का लेवल टूटटा है तो बिकवाली की आंधी चल सकती है।

चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि नियर टर्म में आउटलुक पॉजिटिव है लेकिन उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक पिछले कारोबारी सत्र में जबरदस्त रिकवरी से मार्केट का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली इस दबाव भी डाल रही है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है लेकिन बीच-बीच में प्रॉफिट बुकिंग से मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Asian Market: टेक शेयरों में गिरावट के बाद रिकवरी से एशियाई बाजारों में उछाल, Kospi 1% से ज़्यादा चढ़ा

Asian Market: एशियाई शेयरों में रिकवरी देखने को मिली। जबकि इससे पहले दो सेशन में गिरावट आई थी। निवेशकों को उम्मीद है कि US फेडरल रिजर्व को अगले साल अपनी पॉलिसी को बहुत ज़्यादा सख्त करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। MSCI के एशिया पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में 0.2% की बढ़त हुई। मंगलवार को चिप शेयरों में भारी गिरावट के कारण यह इंडेक्स अगस्त के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था। दक्षिण कोरिया का Kospi 1.73% चढ़ा, Taiex में 0.52% और Nikkei 225 में 0.47% की बढ़त हुई, जबकि Topix 0.11% गिर गया। Hang Seng फ्यूचर्स में कोई खास हलचल नहीं दिखी।

इस क्षेत्र में दूसरी जगहों पर, चीनी शेयरों के फिर से ‘बेयर मार्केट’ (गिरावट वाले बाज़ार) में जाने का खतरा बना हुआ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बात पर शक बढ़ रहा है कि क्या बीजिंग अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए कोई बड़ा स्टिमुलस (आर्थिक राहत पैकेज) देगा या नहीं।

CSI 300 इंडेक्स जून के अपने पीक (उच्चतम स्तर) से 15% से ज़्यादा गिर चुका है और अगस्त 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर है।

भारत में, GIFT Nifty – जो यह बताता है कि देश का शेयर बाज़ार दिन की शुरुआत कैसे करेगा – ने नेगेटिव शुरुआत का संकेत दिया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के शेयर ट्रेडिंग पर लगने वाले ट्रांज़ैक्शन टैक्स पर चर्चा सुनने की इच्छा ज़ाहिर करने के बाद देश के शेयरों पर सबकी नज़र है, क्योंकि देश ज़्यादा कैपिटल इनफ्लो (पूंजी का निवेश) आकर्षित करना चाहता है।

मंगलवार को उनके भाषण के दौरान Nifty 50 में बढ़त जारी रही और यह 1.6% ऊपर बंद हुआ, जो दो महीने से ज़्यादा समय में इसकी सबसे बड़ी बढ़त थी।

इस बीच, जापान की करेंसी स्थिर रही और शुरुआती कारोबार में 158.33 प्रति डॉलर पर ट्रेड करती रही। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ऑफ़ जापान के अधिकारी इस महीने लगातार दूसरी बार ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पॉलिसी बनाने वालों ने दिसंबर में एक और कदम उठाने का विकल्प खुला रखा है।

ऑफशोर युआन में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और यह 6.6930 प्रति डॉलर पर रहा। वॉल स्ट्रीट पर शांत कारोबार के बाद इस क्षेत्र में रिकवरी दिखी। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स के यह कहने के बाद कि उन्हें लगता है कि इस साल एक और बार ब्याज दरें बढ़ानी चाहिए, लेकिन 2027 में और सख्ती की ज़रूरत नहीं है, S&P 500 ने अपनी शुरुआती गिरावट को कम किया और लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ।

उनके बयानों से टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव कम हुआ और माइक्रोसॉफ्ट रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। न्यूयॉर्क में ट्रेडिंग के दौरान US ट्रेजरी में तेज़ी आई और US डॉलर कमज़ोर हुआ, क्योंकि निवेशक ब्याज दरों के आउटलुक पर नए संकेतों के लिए बुधवार के US कंज्यूमर प्राइस डेटा का इंतज़ार कर रहे थे।

व्यापक चिंताओं के बावजूद US इक्विटीज़ ने अच्छा प्रदर्शन किया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, मंगलवार तक 53 सेशन में S&P 500 में एक दिन में 1% की गिरावट नहीं देखी गई, जो जनवरी 2020 के बाद से ऐसा सबसे लंबा दौर था।

US अर्निंग्स सीज़न की शुरुआत ने भी सेंटीमेंट को प्रभावित किया। JPMorgan Chase, Citigroup और Wells Fargo, तीनों ने तीसरी तिमाही में रिकॉर्ड लेंडिंग इनकम दर्ज की, क्योंकि ऊंची दरों के बावजूद ग्राहक लोन लेते रहे।

Goldman Sachs में इक्विटी ट्रेडर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन फिक्स्ड-इनकम और रेट्स ट्रेडिंग वॉल स्ट्रीट के अनुमानों से काफी पीछे रही। निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रेड के बारे में संकेतों के लिए भी अर्निंग्स पर नज़र रखे हुए थे, जिस पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि इस बात पर संदेह है कि क्या अरबों डॉलर खर्च करने से उतना ही रिटर्न मिलेगा।

तेल की कीमतें बढ़ती रहीं। US क्रूड 0.8% बढ़कर लगभग $94.80 प्रति बैरल हो गया, जो लगातार पांचवें दिन की बढ़त थी, क्योंकि वेस्ट एशिया में नए हमलों ने अरब खाड़ी से एनर्जी शिपमेंट की बहाली को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट शुरुआती एशियाई ट्रेडिंग में $106.51 प्रति बैरल तक बढ़ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% बढ़कर $94.81 हो गया। बाज़ारों को चिंता थी कि क्रूड की ऊंची कीमतें महंगाई को लगातार ऊंचा रख सकती हैं, जिससे बुधवार के US महंगाई के आंकड़ों का महत्व और बढ़ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बीच पैसा कहां लगाएं? समझिए FD और बॉन्ड में कौन है बेहतर

FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बाद निवेशक दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बॉन्ड शामिल हैं। दोनों में पैसा लगाकर रिटर्न कमाया जा सकता है। हालांकि, दोनों के फायदे और जोखिम अलग-अलग हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD और बॉन्ड में से किसी एक को चुनने से पहले अपनी जरूरत समझनी चाहिए। आपको पैसा कब चाहिए, कितना जोखिम उठा सकते हैं और निवेश का लक्ष्य क्या है, इन बातों से फैसला करना आसान होगा।

सितंबर में Nifty 50 में 6.06% की गिरावट रही। दूसरी ओर, बाजार में गिरावट के बीच RBI ने भी रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इसके बाद FD और बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों पर निवेशकों का फोकस और भी ज्यादा बढ़ा है।

FD और बॉन्ड में कहां लगाएं पैसा?

Stable Money के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन के मुताबिक, FD लंबे समय से निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प रही है। इसमें एक तय अवधि के लिए पैसा जमा किया जाता है। बदले में तय शर्तों के मुताबिक ब्याज मिलता है। दूसरी ओर, बॉन्ड के जरिए निवेशक फिक्स्ड इनकम में निवेश के नए मौके तलाश सकते हैं। इनमें बेहतर रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी समझना जरूरी है।

सौरभ जैन का कहना है कि FD और बॉन्ड एक जैसे नहीं हैं। इनमें से कौन-सा विकल्प बेहतर है, यह निवेशक के लक्ष्य, निवेश की अवधि और पैसे की जरूरत पर निर्भर करता है। फिलहाल, कॉरपोरेट बॉन्ड में जोखिम के आधार पर करीब 11-15% तक रिटर्न मिल रहा है। वहीं, FD पर ब्याज दरें करीब 6-8% के दायरे में हैं।

अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा अलग रखना है, तो FD काम आ सकती है। इसमें निवेश की अवधि और ब्याज पहले से पता रहता है। वहीं, बॉन्ड उन लोगों के लिए विकल्प हो सकते हैं, जो अपने फिक्स्ड इनकम निवेश में विविधता चाहते हैं।

सरकारी सिक्योरिटीज में क्या देखें?

Jiraaf के को-फाउंडर सौरव घोष का कहना है कि बॉन्ड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि पैसा डूबने या कीमत घटने का कितना जोखिम है। सरकारी सिक्योरिटीज को सरकार की गारंटी मिलती है। इसलिए इनमें क्रेडिट रिस्क कम होता है। दूसरी ओर, कॉरपोरेट बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन इनमें कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ा जोखिम भी रहता है।

सौरव घोष के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज में भी ब्याज दरें बदलने पर कीमत घट-बढ़ सकती है। लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचता है, तो उसे नुकसान भी हो सकता है।

क्या कॉरपोरेट बॉन्ड बेहतर रहेगा?

सौरव घोष के मुताबिक, कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने से पहले कंपनी की कमाई, कैश फ्लो और कर्ज की स्थिति देखनी चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि कंपनी समय पर ब्याज और मूल रकम चुका पाएगी या नहीं। इसके अलावा, बॉन्ड के बदले मिलने वाली सुरक्षा की जानकारी भी जांचनी चाहिए। क्रेडिट रेटिंग से कंपनी की स्थिति समझने में मदद मिलती है। लेकिन सिर्फ रेटिंग देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।

सौरभ जैन भी निवेशकों को बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति, क्रेडिट रेटिंग और लिक्विडिटी जांचने की सलाह देते हैं। साथ ही, यह देखना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर बॉन्ड को कितनी आसानी से बेचा जा सकता है। ब्याज दरों में बदलाव से उसकी कीमत पर क्या असर पड़ेगा, यह समझना भी जरूरी है।

FD और बॉन्ड में से किसे चुनें?

इसका जवाब आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा चाहिए, तो समय से पहले निकासी की सुविधा वाली FD उपयोगी हो सकती है। हालांकि, FD समय से पहले बंद करने पर जुर्माना लग सकता है या ब्याज कम मिल सकता है। इसलिए बैंक की शर्तें पहले पढ़ लें।

सौरव घोष के मुताबिक, जिस पैसे की तुरंत जरूरत नहीं है, उसे तय अवधि वाले बॉन्ड में लगाया जा सकता है। बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज का समय अपने नियमित खर्चों के हिसाब से चुना जा सकता है।

उनका कहना है कि निवेश करने से पहले टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न जरूर देखना चागिए। इसके अलावा, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी, मैच्योरिटी और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा की तुलना करें। सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखकर फैसला न लेने से परेशानी हो सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।