EPFO: सैलरी ₹25,000 है तो तुरंत करें यह काम! EPFO के नए नियम से होगा बड़ा फायदा, जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

EPFO Wage Limit Hike: केंद्र सरकार ने बीतें दिनों कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया। 17 सितंबर से लागू हुए इस फैसले के बाद लगभग 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को अब प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस (EDLI) के दायरे में लाया जाएगा।

वैसे सिर्फ ₹25,000 से कम वेतन होना ही पात्रता की एकमात्र गारंटी नहीं है। कर्मचारियों को संबंधित योजनाओं के नियमों और शर्तों को पूरा करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नई लिमिट का आपको कैसे फायदा मिलेगा और आप अपनी पात्रता कैसे चेक कर सकते हैं।

नए नियम के तहत कौन-कौन हो सकता है शामिल?

यह बदलाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है, जो पहले सिर्फ इसलिए EPF कवरेज से बाहर थे क्योंकि उनका मूल वेतन (Basic Salary + DA) ₹15,000 प्रति माह से अधिक था।

श्रम मंत्रालय के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और वे संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें अब EPF के तहत नामांकित किया जा सकता है। जो कर्मचारी पहले से ही EPF के सदस्य हैं, उनका योगदान उनके लागू वेज बेस और सदस्यता की स्थिति पर निर्भर करेगा।

EPF, EPS और EDLI में कैसे कराएं अपना नामांकन?

कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से किसी अलग सार्वजनिक फॉर्म के जरिए तीनों योजनाओं में सीधे रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते। इसके लिए नियोक्ता को ही प्रक्रिया पूरी करनी होती है:

एलिजिबिलिटी चेक करें: सबसे पहले यह पक्का करें कि आपका मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक नहीं है और आप योजना की अन्य शर्तों को पूरा करते हैं।

HR या पेरोल टीम से संपर्क करें: अपने नियोक्ता की HR या अकाउंट्स टीम से संपर्क करें ताकि वे आपकी पात्रता सत्यापित कर आपका एनरोलमेंट शुरू कर सकें।

जरूरी दस्तावेज दें: अपनी पहचान, रोजगार विवरण, आधार विवरण और बैंक खाते की जानकारी नियोक्ता को सौंपें।

कंट्रिब्यूशन वेरिफाई करें: नामांकन पूरा होने के बाद अपनी सैलरी स्लिप और EPFO पासबुक चेक करें ताकि यह पक्का हो सके कि पीएफ कटौती और योगदान सही से दर्ज हो रहा है।

EPF, EPS और EDLI से आपको क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

योजना का नाम मुख्य लाभ
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज के जरिए रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनता है।
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) अर्हता सेवा और पेंशन नियमों के आधार पर पात्र सदस्यों को आजीवन पेंशन मिलती है।
कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा (EDLI) EPF सदस्यता से जुड़ा मुफ्त जीवन बीमा कवर, जिसके तहत अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को क्लेम की राशि मिलती है।

क्या अब आपकी PF कटौती बढ़ जाएगी?

नई वेज सीलिंग लागू होने से पात्र कर्मचारियों के योगदान की गणना के लिए वेतन आधार बढ़ सकता है। नए ढांचे के तहत, अंशदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा ₹25,000 या कर्मचारी का वास्तविक वेतन जो भी कम हो वो मानी जाएगी।

इस गणित को ऐसे समझिए, अगर आपके ₹25,000 के पूरे वेतन आधार पर 12% पीएफ कटता है, तो कर्मचारी का मासिक योगदान ₹3,000 होगा। नियोक्ता का 12% योगदान नियमानुसार EPF और EPS में बंटेगा, जबकि EDLI का प्रीमियम अलग से पूरी तरह नियोक्ता द्वारा दिया जाएगा।

PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में

PM Viksit Bharat Rozgar Yojana PM VBRY: फॉर्मल सेक्टर में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को फॉर्मल रोजगार से जोड़ना और ईपीएफ (EPF) सिस्टम में उनका स्वागत करना है।

वैसे यह ₹15,000 का इंसेंटिव सभी को एकमुश्त या खुद-ब-खुद नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार और ईपीएफओ ने कुछ जरूरी शर्तें, सैलरी सीमा और सर्विस पीरियड तय किया है।

कब से कब तक की नौकरियों पर मिलेगा फायदा?

यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सर्जित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगी। अगर कर्मचारी का मासिक ईपीएफ वेतन ₹1 लाख प्रति माह तक है, तो वह इस योजना के तहत योग्य माना जाएगा। इंसेंटिव की राशि कर्मचारी के 1 महीने के ईपीएफ वेज के बराबर (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) होगी।

कौन है ₹15,000 इंसेंटिव के लिए योग्य?

PM-VBRY के ‘पार्ट-ए’ के तहत इंसेंटिव पाने के लिए कर्मचारी को पहली बार ईपीएफ सदस्य बनना अनिवार्य है। पात्रता की मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:

पात्रता की शर्तइसका क्या मतलब है?
पहली बार EPF मेंबरशिपकर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफ का अंशदान करने वाला सदस्य (छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट समेत) नहीं होना चाहिए।
जॉइनिंग की तारीख नौकरी में कार्यभार संभालने की तिथि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए।
मासिक सैलरी कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए (योजना की परिभाषा के अनुसार)।
सर्विस की अवधिपहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने की निरंतर सेवा आवश्यक है।
एंप्लॉयर कम्प्लायंसजिस कंपनी/संस्था में काम कर रहे हैं, उसने ईपीएफओ में जरूरी रिपोर्टिंग और कंट्रीब्यूशन (ECR) दाखिल किया हो।

 कैसे मिलेगी ₹15,000 की रकम?

यह इंसेंटिव कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में दिया जाएगा:

किस्तजरूरी शर्त  अधिकतम राशि
पहला किस्त निरंतर 6 महीने की योग्य सेवा पूरी होने पर ₹7,500
दूसरी किस्त 12 महीने की सेवा और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने परबाकी बची राशि (कुल ₹15,000 तक)

ध्यान दें: इंसेंटिव की राशि योग्य सैलरी के आधार पर तय होगी, इसलिए हर किसी को फ्लैट ₹15,000 नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, दूसरी किस्त तुरंत कैश में निकालने योग्य नहीं हो सकती है; गाइडलाइंस के मुताबिक इसे किसी उपयुक्त सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट या डिपॉजिट अकाउंट में तय समय के लिए रखा जा सकता है।

फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों है जरूरी?

दूसरी किस्त पाने के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम को पूरा करना अनिवार्य बनाया गया है। 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर पहली किस्त मिल जाएगी, लेकिन पूरे ₹15,000 पाने के लिए कर्मचारी को 12 महीने की नौकरी के साथ-साथ इस कोर्स को भी पूरा करना होगा।

इसके लिए कर्मचारी PM-VBRY के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर पूरी गाइडेंस ले सकते हैं। पोर्टल पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट करने और यूएएन-आधार लिंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।

पैसा बैंक खाते में कैसे आएगा?

सरकार ने साफ किया है कि पार्ट-ए के तहत इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट (DBT) में आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने बैंक खाते और यूएएन को आधार से लिंक रखना जरूरी है।

एंप्लॉयर्स के लिए अलग लाभ

इस योजना में कंपनियों/नियुक्तियों के लिए भी अलग प्रावधान (‘पार्ट-बी’) है, जहां एंप्लॉयर को हर नए योग्य कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव मिल सकता है। इसे कर्मचारियों के ₹15,000 वाले व्यक्तिगत इंसेंटिव से जोड़कर न देखें।

आपके PF के पैसे का क्या होता है? जानिए EPFO कहां इन्वेस्ट करता है और कैसे तय होता है ब्याज

Where EPFO invests PF money: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) के नाम पर जो कटौती होती है, उसे हम भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी आपके खाते में जमा करती है।

लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपकी तिजोरी में जमा होने वाले करोड़ों-अरबों रुपये आखिर कहां जाते हैं? क्या यह पैसा किसी बैंक में रखा रहता है या कहीं और निवेश होता है? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) आपके इस पैसे को सुरक्षित रखने और उस पर शानदार रिटर्न (जैसे हालिया 8.25% ब्याज) देने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

EPFO आपके पैसे का क्या करता है?

EPFO कोई साधारण बैंक नहीं है, बल्कि भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक बड़ा वैधानिक निकाय है। कर्मचारियों के इस विशाल फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास होती है। बोर्ड के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत इस पैसे को देश के अलग-अलग वित्तीय और सरकारी साधनों में निवेश किया जाता है। इस निवेश से होने वाली कमाई से ही आपके पीएफ खाते में हर साल ब्याज का पैसा भेजा जाता है।

कहां-कहां होता है पीएफ का निवेश?

सरकार के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईपीएफओ निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाने के लिए फंड को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है:

  1. सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स: लगभग 85% तक
  2. इक्विटी यानी शेयर बाजार (Equity – ETFs): 15% तक

पोर्टफोलियो श्रेणी संभावित आवंटन % मुख्य साधन
सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs)45% – 65% केंद्र सरकार के बॉन्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs)
कॉरपोरेट बॉन्ड्स व डेट20% – 45%PSUs, सरकारी वित्तीय संस्थानों व सुरक्षित कॉरपोरेट बॉन्ड्स
इक्विटी (शेयर बाजार) 5% – 15%केवल इंडेक्स आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs – Nifty 50, Sensex)
शॉर्ट-टर्म डेट/मनी मार्केट0% – 5% लिक्विडिटी और तात्कालिक नकदी प्रबंधन के लिए ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS)

85% पैसा जाता है पूरी तरह सुरक्षित सरकारी डेट में

ईपीएफओ अपने पास आने वाले कुल फंड का करीब 85 हिस्सा ऐसी जगहों पर लगाता है जहां डूबने का जोखिम न के बराबर होता है:

सरकारी बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन: ईपीएफओ का एक बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की विकास योजनाओं के बॉन्ड्स में लगा होता है। इससे देश का बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, रेलवे) मजबूत होता है और पीएफ के लिए तयशुदा रिटर्न सुनिश्चित होता है।

PSU के कॉरपोरेट बॉन्ड्स: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य महारत्न कंपनियों के सुरक्षित डेट सिक्योरिटीज में भी यह पैसा निवेश किया जाता है।

15% हिस्सा शेयर बाजार में: क्या आपका पैसा जोखिम में है?

साल 2015 से पहले ईपीएफओ शेयर बाजार में निवेश नहीं करता था। लेकिन कम ब्याज दरों की चुनौती से निपटने और रिटर्न बढ़ाने के लिए सरकार ने अगस्त 2015 से इक्विटी में 5% से 15% तक निवेश करने की अनुमति दी।

सीधे शेयरों की खरीद नहीं: ईपीएफओ कभी भी किसी कंपनी विशेष के शेयर सीधे बाजार से नहीं खरीदता।

केवल इंडेक्स ETFs का सहारा: यह निवेश केवल BSE Sensex और NSE Nifty-50 जैसे शीर्ष सूचकांकों को ट्रैक करने वाले ETFs के जरिए किया जाता है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

ईपीएफओ कैसे तय करता है आपका सालाना ब्याज?

वित्तीय वर्ष के दौरान डेट बॉन्ड्स से मिलने वाला तय ब्याज और इक्विटी (ETFs) की बिक्री से हुआ मुनाफा जोड़ा जाता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है। वित्त मंत्रालय की मुहर लगने के बाद तय ब्याज दर कर्मचारियों के पीएफ खातों में क्रेडिट कर दी जाती है।

PF खाते से कब और कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस पैसा? जानिए मेडिकल, शादी, मकान और पढ़ाई के लिए क्या हैं नियम

EPFO Advance Withdrawal Rules: अगर आप कहीं नौकरी करते हैं, तो हर महीने आपकी सैलरी से एक तय हिस्सा कटता है। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतनी ही रकम आपकी कंपनी भी आपके प्रोविडेंट फंड यानी PF खाते में जमा करती है। यह जमा पैसा आपकी रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा सहारा बनता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट से पहले भी अपने पीएफ खाते से एडवांस पैसा निकाल सकते हैं?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ एडवांस से जुड़े नियमों को काफी आसान और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों (EPF Scheme, 2026) के तहत आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम मेंबरशिप की अवधि को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है।

किस काम के लिए कितनी बार निकाल सकते हैं पीएफ का पैसा?

ईपीएफओ ने विभिन्न जरूरतों को तीन मुख्य श्रेणियों- जरूरी जरूरतें, मकान से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां में बांटा है:

निकासी का कारण कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस?
इलाज/मेडिकल जरूरतेंकोई सीमा नहीं (जितनी बार चाहें निकाल सकते हैं)
बच्चों की पढ़ाईमेंबरशिप के दौरान कुल 10 बार
शादी (स्वयं या बच्चों की)मेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
मकान/प्लाट/होम लोनमेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
विशेष परिस्थितियांएक वित्तीय वर्ष में 2 बार तक

1. मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अचानक इलाज के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तो आप पीएफ से एडवांस निकाल सकते हैं। मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है।

2. बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए

बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए आप पूरी नौकरी (मेंबरशिप) के दौरान 10 बार तक एडवांस निकाल सकते हैं। वहीं, अगर परिवार में या खुद की शादी का खर्च उठाना है, तो इसके लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति दी गई है।

3. मकान खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के लिए

अगर आप नया घर या प्लॉट खरीदना चाहते हैं, घर का निर्माण कराना चाहते हैं, घर का रेनोवेशन कराना चाहते हैं या पुराने होम लोन की किस्त चुकाना चाहते हैं, तो आप अपने पीएफ खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं। आवास से जुड़ी जरूरतों के लिए आप 5 बार तक एडवांस पैसा निकाल सकते हैं।

4. विशेष परिस्थितियों के लिए

केंद्रीय बोर्ड द्वारा अधिसूचित कुछ विशेष या आपातकालीन परिस्थितियों में भी कर्मचारियों को राहत दी जाती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी एक वित्तीय वर्ष में दो बार एडवांस निकाल सकते हैं।

आप अपने पीएफ से कितना पैसा निकाल सकते हैं?

ईपीएफओ के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर आपकी मेंबरशिप को 12 महीने पूरे हो चुके हैं, तो आप अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक एडवांस निकाल सकते हैं। इस बैलेंस में आपका अंशदान, कंपनी का अंशदान और उस पर मिला ब्याज शामिल होता है।

पीएफ एडवांस निकालने से पहले अपनी पात्रता की जांच जरूर कर लें। इसके लिए आप सीधे ईपीएफओ के आधिकारिक मेम्बर सेवा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

PF Withdrawal: EPFO का बड़ा तोहफा: अब पीएफ खाते से निकाल सकेंगे 75% एडवांस! जानिए ये नए नियम

EPFO Partial Withdrawal Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अंशधारकों के लिए पीएफ खाते से पैसे निकालने के नियमों को और आसान बना दिया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत, अब बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए पीएफ कॉर्पस से बड़ा हिस्सा निकाला जा सकता है।

नए नियमों के मुताबिक, आंशिक निकासी के समय कर्मचारियों को अपने पात्र पीएफ बैलेंस का कम से कम 25% हिस्सा खाते में बनाए रखना अनिवार्य होगा। बाकी का 75% तक पैसा संबंधित श्रेणी की शर्तों के आधार पर निकाला जा सकता है।

क्या है 25 प्रतिशत मिनिमम बैलेंस का गणित?

पीएफ खाते में 25% बैलेंस बनाए रखने का मतलब कोई तय रकम (जैसे- 25,000 या 50,000 रुपये) नहीं है, बल्कि यह आपके कुल इलिजिबल पीएफ बैलेंस पर निर्भर करता है।

जैसे अगर आपके पीएफ खाते में कुल पात्र बैलेंस ₹1 लाख है, तो ₹25,000 खाते में ही रहेंगे और आप अधिकतम ₹75,000 तक निकाल सकते हैं।

इलिजिबल बैलेंस में क्या शामिल है: इस बैलेंस में कर्मचारी का अंशदान, नियोक्ता का अंशदान और इस पर जमा हुआ ब्याज शामिल है।

नियम का उद्देश्य: EPFO ने यह 25% मिनिमम बैलेंस का प्रावधान इसलिए लागू किया है ताकि बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के लिए जमा हो रहा कॉर्पस पूरी तरह खत्म न हो जाए।

कब निकाल सकते हैं पूरा पैसा: ध्यान दें कि यह नियम यह नहीं कहता कि बचा हुआ 25% पैसा कभी नहीं मिलेगा। नए प्रावधानों के तहत एक साल बाद विशेष परिस्थितियों में इसे भी निकाला जा सकता है। इसके अलावा, रिटायरमेंट, स्थायी विकलांगता, छंटनी, वीआरएस (VRS) या विदेश बसने जैसी स्थितियों में 100% पीएफ निकासी की अनुमति अलग से है।

आवश्यक सामाजिक जरूरतें

सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) द्वारा स्वीकृत कॉमन फ्रेमवर्क के तहत अब आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि केवल 12 महीने कर दी गई है।

1. बीमारी

सेवा की शर्त: 12 महीने

कितनी बार निकाल सकते हैं: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 बार

2. पढ़ाई

सेवा की शर्त: 12 महीने

कितनी बार निकाल सकते हैं: पूरी सर्विस के दौरान अधिकतम 10 बार

3. शादी

सेवा की शर्त: 12 महीने

कितनी बार निकाल सकते हैं: पूरी सर्विस के दौरान अधिकतम 5 बार

घर और होम लोन से जुड़ी जरूरतें

आवास से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए भी पीएफ से पैसा निकालने की प्रक्रिया बेहद आसान कर दी गई है:

किन कामों के लिए मिलेगा पैसा: घर या प्लॉट/साइट खरीदने, घर का निर्माण कराने, होम लोन चुकाने और मौजूदा मकान की मरम्मत या रेनोवेशन कराने के लिए।

शर्त और सीमा: 12 महीने की कुल सदस्यता के बाद इसके लिए आवेदन किया जा सकता है। पूरी सर्विस अवधि के दौरान हाउसिंग कैटेगरी में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति है।

चूंकि यह नियम घर की जरूरतों के लिए पीएफ के इस्तेमाल की छूट देता है, लेकिन रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल करने से भविष्य में मिलने वाले कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का नुकसान भी होता है।

विशेष परिस्थितियां

तीसरी कैटेगरी ‘विशेष परिस्थितियों’ की है, जिसके दायरे को और बढ़ा दिया गया है। इसके तहत सदस्य को बिना कोई खास वजह बताए भी आंशिक निकासी के लिए आवेदन करने की छूट दी गई है। इसमें अनिवार्य मिनिमम बैलेंस (25%) और लागू फ्रीक्वेंसी को ध्यान में रखते हुए पात्र बैलेंस का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रिटायरमेंट फंड का रखें ध्यान

नए नियम पीएफ का पैसा निकालना आसान बनाते हैं, लेकिन यह आपकी रिटायरमेंट की बचत है। यदि कोई कर्मचारी बार-बार अधिकतम सीमा तक पैसा निकालता है, तो भले ही उसकी तात्कालिक ज़रूरत पूरी हो जाए, लेकिन रिटायरमेंट के समय उसका फंड काफी छोटा रह जाएगा। इसलिए 25% का मिनिमम बैलेंस एक बेसिक बैकअप सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

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अब मिलेगी ₹12,500 मंथली पेंशन! वेज सीलिंग हाइक के बाद EPS नियमों पर EPFO ने दिया ये बड़ा अपडेट

EPFO Pension Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ₹12,500 तक की मंथली पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा।

इसी बीच पेंशन पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) की सदस्यता के नए नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।

EPFO ने EPS सदस्यता के लिए क्या नियम तय किए हैं?

EPFO के अनुसार, पेंशन योजना (EPS) में शामिल होने के लिए दो मुख्य शर्तें और नियम तय किए गए हैं:

सैलरी ₹25,000 या उससे कम होने पर: अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो उसके लिए EPS की सदस्यता अनिवार्य है और उसकी सैलरी से पेंशन अंशदान काटा जाएगा।

सैलरी ₹25,000 से अधिक होने पर: अगर किसी नए कर्मचारी का मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक है और वह पहले कभी EPS का सदस्य नहीं रहा है, तो वह EPS का पात्र नहीं होगा और उसके वेतन से EPS के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी।

(नोट: इसका मतलब यह है कि केवल सैलरी का आंकड़ा ही पात्रता तय नहीं करता, बल्कि कर्मचारी का पुराना EPS रिकॉर्ड भी यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि वह पेंशन पाने का हकदार है या नहीं।)

EPF और EPS में कैसे बंटता है एंप्लॉयर का योगदान?

नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए PF और पेंशन दो अलग-अलग घटक हैं। नियम के मुताबिक कंपनी कर्मचारी के वेतन का कुल 12% हिस्सा ईपीएफ फंड में योगदान करती है। इस 12% योगदान को दो भागों में बांटा जाता है:

8.33% हिस्सा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है।

शेष 3.67% हिस्सा: कर्मचारी के भविष्य निधि (EPF) खाते में जमा किया जाता है।

कैलकुलेशन का गणित: अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹25,000 प्रति माह है, तो कंपनी का कुल 12% योगदान ₹3,000 बनता है। इसमें से:

EPS (पेंशन फंड): 8.33% के हिसाब से ₹2,082.50 जाएंगे।

EPF (फंड खाता): बचा हुआ ₹917.50 ईपीएफ खाते में जमा होगा।

EPS अंशदान न कटने या गलत कटने पर क्या करें?

EPFO ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि अगर ₹25,000 या उससे कम सैलरी होने के बावजूद उनका EPS अंशदान नहीं काटा जा रहा है, या अपात्र होने के बाद भी कटौती की जा रही है, तो वे ये कदम उठाएं:

पहले नियोक्ता से संपर्क करें: अपने HR या सैलरी विभाग से संपर्क करके अपनी पिछली EPS सदस्यता हिस्ट्री और पात्रता की जांच करवाएं।

EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: अगर नियोक्ता स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो कर्मचारी ईपीएफओ के आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

PF Withdrawal: पीएफ से पैसा निकालने के नियमों में बड़ा बदलाव! EPFO ने TDS छूट के लिए इस फॉर्म को घोषित किया अमान्य

EPF Withdrawal Rules Change: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की तरफ से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। EPFO ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया है कि टैक्स वर्ष 2026-27 से EPF निकासी पर TDS छूट का दावा करने के लिए अब फॉर्म 15G और फॉर्म 15H मान्य नहीं होंगे। पीएफ अंशधारकों को अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत TDS छूट का दावा करने के लिए फॉर्म 121 जमा करना अनिवार्य होगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए EPFO ने कहा, ‘EPF TDS छूट का दावा करने के लिए फॉर्म 15G या 15H अब मान्य नहीं है। टैक्स वर्ष 2026-27 से आयकर अधिनियम, 2025 के अनुसार फॉर्म 121 जमा करके ही TDS छूट का दावा किया जा सकता है।’

पहले क्या थे प्रावधान?

किंग स्टब्ब एंड कासिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य के अनुसार, इससे पहले निवासी करदाताओं को अपनी उम्र और पात्रता के आधार पर फॉर्म 15G या फॉर्म 15H में से किसी एक को चुनना होता था:

फॉर्म 15G: 60 वर्ष से कम आयु के उन व्यक्तियों के लिए था जिनकी अनुमानित कुल आय कर योग्य सीमा से कम होती थी।

फॉर्म 15H: 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए था।

EPF सदस्यों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ये दोनों फॉर्म अब टैक्स वर्ष 2026-27 से TDS छूट के लिए अमान्य कर दिए गए हैं। नतीजतन, अगर कोई सदस्य अब EPF विथड्रॉल के लिए फॉर्म 15G या 15H जमा करता है, तो उसे TDS कटने से नहीं रोका जा सकेगा।

क्या बदला है और क्या नहीं?

फॉर्म 15G और 15H से हटाकर एकल फॉर्म 121 को लागू करना केवल एक प्रक्रियात्मक सरलीकरण है, न कि किसी नए टैक्स की शुरुआत। आयकर अधिनियम, 2025 जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है, योग्य निवासी करदाताओं को धारा 393(6) के तहत एक समेकित घोषणापत्र जमा करने की अनुमति देता है, जब उन्हें उम्मीद हो कि उस वर्ष के लिए उनकी कुल कर देनदारी शून्य होगी।

आदित्य भट्टाचार्य ने इस पर विस्तार से समझाते हुए कहा, ‘यह स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है कि फॉर्म 121 क्या करता है। यह आपकी निकासी को अपने-आप टैक्स-फ्री नहीं बनाता है। यह केवल एक पात्र व्यक्ति को जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित कुल आय पर कोई टैक्स नहीं बनता, यह अनुरोध करने की अनुमति देता है कि स्रोत पर टैक्स (TDS) न काटा जाए।

यह पूरी तरह से वैकल्पिक है और अनिवासियों या ऐसे लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है जिन पर वास्तव में टैक्स बनता है। इसके अलावा, EPFO के निर्देशों के तहत एक वैध पैन कार्ड होना अनिवार्य है; बिना पैन के जमा किया गया घोषणापत्र अमान्य माना जाएगा। इसलिए सदस्यों को इसे जमा करने से पहले अपनी पात्रता की जांच कर लेनी चाहिए।’

EPFO का नया ऑनलाइन सिस्टम और यूनिक नंबर

EPFO ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को प्राप्त होने वाले प्रत्येक फॉर्म 121 के लिए एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी करने और ऑनलाइन सबमिशन व ई-साइनिंग की सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से TDS रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी, सटीक और ट्रैसेबल बनेगी। उनकी सलाह है कि पीएफ से पैसा निकालने की योजना बना रहे सदस्यों को कटौतियों का इंतजार करने और फिर रिफंड का दावा करने के बजाय, शुरुआत से ही नए फॉर्म 121 का उपयोग करना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

25 हजार रु प्रति माह वेतन तक पीएफ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकते हैं। नई सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू होगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य निधि कटौती के लिए अब 25,000 रुपये प्रति माह वेतन की नई सीमा होगी। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकेगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर यानी विश्वकर्मा पूजा के दिन से प्रभावी होगी।

ईपीएफओ की वेतन सीमा में 12 साल बाद बदलाव हुआ है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच यह सीमा अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। संगठित क्षेत्र में रोजगार का भी विस्तार हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। इसे देखते हुए वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया गया।

इस फैसले पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये होगा।

सरकार के अनुसार इससे अधिक कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ के तहत बचत, कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना यानी ईडीएलआई के तहत बीमा सुरक्षा मिलेगी। साथ ही भविष्य निधि अंशदान और पेंशन योग्य वेतन की व्यवस्था को मौजूदा वेतन स्तर के अधिक अनुरूप बनाया जा सकेगा।

अभी 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ के अनिवार्य दायरे में नहीं आता। सीमा बढ़ने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो जाएगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने के साथ संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी गति देगा।

उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा और सेवा दिवस का अवसर है और यह फैसला उसी दिन से लागू होगा। ईपीएफओ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक का संचालन करता है। इसके तहत ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाएं चलती हैं।

ईपीएफओ के ताजा आंकड़ों के अनुसार करीब 7.98 करोड़ सदस्य लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठानों से जुड़े हैं। ईपीएस के तहत करीब 82 लाख पेंशनधारकों को पेंशन मिलती है, जबकि ईडीएलआई ईपीएफ सदस्यों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराता है।

EPF Passbook: क्या आपकी कंपनी हर महीने जमा कर रही है PF? जानिए घर बैठे पासबुक चेक करने का तरीका और नियम

EPF Passbook Checking Rules: अक्सर नौकरीपेशा लोग हर महीने अपनी सैलरी स्लिप में पीएफ कटने की एंट्री देखकर निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सैलरी स्लिप में पीएफ काटना इस बात की 100% गारंटी नहीं है कि आपकी कंपनी ने वह पैसा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में जमा भी कर दिया है?

इसीलिए हर 2-3 महीने में एक बार अपनी ई-पासबुक चेक करना बेहद जरूरी है। पासबुक से यह साफ हो जाता है कि आपके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के तहत कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा समय पर जमा हो रहा है या नहीं।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पासबुक में क्या-क्या चेक करना चाहिए, पैसा जमा होने की समयसीमा क्या है और गड़बड़ी मिलने पर क्या कदम उठाना चाहिए।

अपनी पासबुक में क्या-क्या जांचना जरूरी है?

अपनी सैलरी स्लिप और ई-पासबुक को आमने-सामने रखकर इन चीजों का मिलान करें:

मंथली एंट्री: अगर आपकी अप्रैल महीने की सैलरी से पीएफ कटा है, तो पासबुक में अप्रैल का कंट्रीब्यूशन दिखना चाहिए।

तीनों हिस्से जांचें: पासबुक में केवल अपना अंशदान न देखें, बल्कि कंपनी का अंशदान और पेंशन फंड (EPS) का हिस्सा भी जरूर चेक करें।

गड़बड़ी का नुकसान: अगर अभी कोई गलती रह जाती है, तो आगे चलकर जॉब बदलते समय, पीएफ ट्रांसफर करते समय या रिटायरमेंट के वक्त पेंशन क्लेम करने में बड़ी रुकावट आ सकती है।

महीने की किस तारीख तक जमा होना चाहिए PF का पैसा?

15 तारीख का नियम: नियमानुसार, कंपनियों को कर्मचारियों की सैलरी से काटा गया पीएफ और अपना हिस्सा, महीना खत्म होने के 15 दिनों के भीतर (जैसे अप्रैल का पीएफ 15 मई तक) EPFO के पास जमा कराना अनिवार्य होता है।

तकनीकी देरी: अगर सैलरी आते ही तुरंत पासबुक में एंट्री न दिखे तो घबराएं नहीं। कई बार प्रोसेसिंग या सर्वर की वजह से एंट्री अपडेट होने में कुछ दिनों का समय लग जाता है।

अलर्ट रहें: लेकिन अगर बाद के महीनों की एंट्री दिखने लगे और किसी पुराने महीने की एंट्री गायब रहे, तो समझ जाएं कि कोई गड़बड़ी है।

ऑनलाइन EPF Passbook कैसे चेक करें? (3 आसान तरीके)

आप घर बैठे 3 तरीकों से अपना पीएफ बैलेंस और पासबुक चेक कर सकते हैं:

EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर UAN और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करें और संबंधित मेंबर आईडी चुनकर पासबुक देखें।

Passbook Lite: EPFO ने सदस्यों की सुविधा के लिए ‘पासबुक लाइट’ फीचर भी दिया है, जहां जमा-निकासी और बैलेंस का एक आसान समरी व्यू मिलता है।

UMANG App: अपने स्मार्टफोन में उमंग ऐप डाउनलोड करके भी पासबुक और बैलेंस चेक किया जा सकता है।

इस बात का ध्यान दें कि अगर आपने कई नौकरियां बदली हैं, तो एक ही UAN के तहत आपकी अलग-अलग मेंबर आईडी होंगी। जिस कंपनी का रिकॉर्ड देखना हो, उसी की मेंबर आईडी सिलेक्ट करें।

जॉब बदलते समय UAN और डिटेल्स का रखें ध्यान

नई कंपनी जॉइन करते समय नया UAN बनवाने के बजाय अपना पुराना UAN ही एचआर (HR) को दें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आपके पीएफ रिकॉर्ड में आपका नाम, जन्मतिथि और पहचान से जुड़े दस्तावेज (KYC) पूरी तरह मैच करते हों। इससे पुराना पीएफ बैलेंस नई कंपनी के खाते में आसानी से ट्रांसफर हो जाता है।

अगर पीएफ का पैसा जमा न हुआ हो तो क्या करें?

स्टेप 1: अपनी सैलरी स्लिप चेक करें और थोड़ा प्रोसेसिंग टाइम दें।

स्टेप 2: अगर फिर भी जमा राशि न दिखे, तो अपनी कंपनी के पेरोल या HR विभाग से तुरंत संपर्क करें।

स्टेप 3: अगर कंपनी आपकी सैलरी से पीएफ काट रही है लेकिन EPFO में जमा नहीं कर रही, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ EPFO सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ते वक्त पीएफ का पैसा रुकने से बेहतर है कि आप सतर्क रहें। हर 2-3 महीने में सिर्फ 5 मिनट निकालकर अपनी ई-पासबुक चेक करने की आदत डालें ताकि किसी भी गड़बड़ी को शुरुआती स्टेज में ही ठीक कराया जा सके।