EPFO: सैलरी ₹25,000 है तो तुरंत करें यह काम! EPFO के नए नियम से होगा बड़ा फायदा, जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

EPFO Wage Limit Hike: केंद्र सरकार ने बीतें दिनों कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया। 17 सितंबर से लागू हुए इस फैसले के बाद लगभग 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को अब प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस (EDLI) के दायरे में लाया जाएगा।

वैसे सिर्फ ₹25,000 से कम वेतन होना ही पात्रता की एकमात्र गारंटी नहीं है। कर्मचारियों को संबंधित योजनाओं के नियमों और शर्तों को पूरा करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नई लिमिट का आपको कैसे फायदा मिलेगा और आप अपनी पात्रता कैसे चेक कर सकते हैं।

नए नियम के तहत कौन-कौन हो सकता है शामिल?

यह बदलाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है, जो पहले सिर्फ इसलिए EPF कवरेज से बाहर थे क्योंकि उनका मूल वेतन (Basic Salary + DA) ₹15,000 प्रति माह से अधिक था।

श्रम मंत्रालय के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और वे संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें अब EPF के तहत नामांकित किया जा सकता है। जो कर्मचारी पहले से ही EPF के सदस्य हैं, उनका योगदान उनके लागू वेज बेस और सदस्यता की स्थिति पर निर्भर करेगा।

EPF, EPS और EDLI में कैसे कराएं अपना नामांकन?

कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से किसी अलग सार्वजनिक फॉर्म के जरिए तीनों योजनाओं में सीधे रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते। इसके लिए नियोक्ता को ही प्रक्रिया पूरी करनी होती है:

एलिजिबिलिटी चेक करें: सबसे पहले यह पक्का करें कि आपका मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक नहीं है और आप योजना की अन्य शर्तों को पूरा करते हैं।

HR या पेरोल टीम से संपर्क करें: अपने नियोक्ता की HR या अकाउंट्स टीम से संपर्क करें ताकि वे आपकी पात्रता सत्यापित कर आपका एनरोलमेंट शुरू कर सकें।

जरूरी दस्तावेज दें: अपनी पहचान, रोजगार विवरण, आधार विवरण और बैंक खाते की जानकारी नियोक्ता को सौंपें।

कंट्रिब्यूशन वेरिफाई करें: नामांकन पूरा होने के बाद अपनी सैलरी स्लिप और EPFO पासबुक चेक करें ताकि यह पक्का हो सके कि पीएफ कटौती और योगदान सही से दर्ज हो रहा है।

EPF, EPS और EDLI से आपको क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

योजना का नाम मुख्य लाभ
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज के जरिए रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनता है।
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) अर्हता सेवा और पेंशन नियमों के आधार पर पात्र सदस्यों को आजीवन पेंशन मिलती है।
कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा (EDLI) EPF सदस्यता से जुड़ा मुफ्त जीवन बीमा कवर, जिसके तहत अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को क्लेम की राशि मिलती है।

क्या अब आपकी PF कटौती बढ़ जाएगी?

नई वेज सीलिंग लागू होने से पात्र कर्मचारियों के योगदान की गणना के लिए वेतन आधार बढ़ सकता है। नए ढांचे के तहत, अंशदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा ₹25,000 या कर्मचारी का वास्तविक वेतन जो भी कम हो वो मानी जाएगी।

इस गणित को ऐसे समझिए, अगर आपके ₹25,000 के पूरे वेतन आधार पर 12% पीएफ कटता है, तो कर्मचारी का मासिक योगदान ₹3,000 होगा। नियोक्ता का 12% योगदान नियमानुसार EPF और EPS में बंटेगा, जबकि EDLI का प्रीमियम अलग से पूरी तरह नियोक्ता द्वारा दिया जाएगा।

ICICI Bank Share Price:Q2 नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म बुलिश, बढ़ाया टारगेट, मिल सकता है 45% का रिटर्न

ICICI BANK SHARE PRICE: ICICI बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिसके बाद ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक को लेकर काफी बुलिश हैं। जेपी मॉर्गन और नोमुरा ने बैंक के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है, जबकि कई अन्य फर्मों ने ‘Buy’ या इसी तरह की रेटिंग बरकरार रखी है। जिन ब्रोकरेज फर्मों ने इस पर अपनी राय दी है, उनमें गोल्डमैन सैक्स सबसे ज्यादा तेजी की उम्मीद जता रहा है। गोल्डमैन सैक्स ने 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो शुक्रवार के 1,397 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 45 फीसदी की तेजी दिखाता है।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज फर्मों की राय

Bernstein

इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है और प्रति शेयर ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 28.8% तक की तेजी आ सकती है।फर्म ने कहा कि ICICI बैंक ने एक और शानदार तिमाही पेश की है, जिससे सबसे तेजी से बढ़ने वाले बड़े प्राइवेट बैंक के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है।

बैंक के लोन और डिपॉजिट ग्रोथ में काफी तेजी आई है। लोन ग्रोथ में कॉर्पोरेट, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल सेगमेंट – सभी क्षेत्रों का मजबूत योगदान रहा है। बर्नस्टीन के अनुसार, हालांकि इस तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह गिरावट अन्य बैंकों के अनुरूप ही है। साथ ही, मजबूत बैलेंस शीट ग्रोथ के कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी अच्छी बनी रही। फर्म ने आगे कहा कि मजबूत फीस इनकम और बेहतर होती एसेट क्वालिटी के चलते, बैंक अपनी बेहतरीन ऑपरेटिंग और अर्निंग्स ग्रोथ को बनाए रखने में कामयाब रहा है।

JPMorgan

जेपी मॉर्गन ने ICICI बैंक को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि बैंक ने दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹25,340 करोड़ रही, जो जेपी मॉर्गन के अनुमान से 2% ज्यादा है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) ₹20,580 करोड़ रहा, जो अनुमान से 7% अधिक है, और टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) ₹14,840 करोड़ रहा, जो अनुमान से 11% ज्यादा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने बताया कि IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर, कोर NII में पिछली तिमाही के मुकाबले 6% और पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। इसे पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% की लोन ग्रोथ से सपोर्ट मिला, जो इंडस्ट्री में सबसे बेहतर है।

ICICI बैंक का कोर NIM (IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर) पिछली तिमाही के मुकाबले 4 बेसिस पॉइंट्स कम हो गया है, जिसका मुख्य कारण FCNR (B) का असर है।

फर्म ने आगे कहा कि हालांकि FCNR (B) का पूरा असर तीसरी तिमाही में देखने को मिलेगा, जिससे NIM पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन JP मॉर्गन को चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2028 में NIM बढ़ने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि बैंक का 57% लोन बुक रेपो रेट से जुड़ा है। साथ ही, अब अनुमानों में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी (जिसमें दिसंबर 2026 की एक बढ़ोतरी भी शामिल है) को भी जोड़ लिया गया है।

Nomura

नोमुरा ने ICICI बैंक को “Buy” (खरीदने) की रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,700 से बढ़ाकर ₹1,740 प्रति शेयर कर दिया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 24.6% की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

नोमुरा के अनुसार, ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2029 के लिए अपने ‘अर्निंग पर शेयर’ (EPS) के अनुमानों को क्रमशः 3% और 7% बढ़ा दिया है।

फर्म ने बताया कि वन-ऑफ (असाधारण) आइटम्स को एडजस्ट करने के बाद NII में पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। यह नोमुरा के अनुमान से 2% अधिक है, जिसमें लोन और डिपॉजिट ग्रोथ क्रमशः 30% और 27% रही।

कोर PPOP ₹20,800 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 22% अधिक है। नोमुरा ने बताया कि बैंक ने ₹1.6 लाख करोड़ के FCNR (B) डिपॉजिट जुटाए (जो कुल डिपॉजिट का 8% है)। इसमें से 50% हिस्सा इन्हीं डिपॉजिट्स के बदले दिए गए लोन से आया है। बैंक के मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगले दो तिमाहियों में इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल कर लिया जाएगा।

Goldman Sachs

गोल्डमैन सैक्स ने Buy” रेटिंग दी है और प्रति शेयर 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से 44.9% की बढ़त की संभावना दिखाता है। बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर मोर्चे पर उम्मीदों से बेहतर रहा। लोन ग्रोथ 24% रही, जो अनुमान से 2% ज्यादा है, और कोर रेवेन्यू ग्रोथ 18% रही, जो गोल्डमैन सैक्स के अनुमान से 2% अधिक है।

बैंक का NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) अनुमान से 5 बेसिस पॉइंट ज्यादा रहा और PPoP (प्रोविजन से पहले का मुनाफा) भी उम्मीद से बेहतर रहा, जबकि प्रोविजन (संभावित नुकसान के लिए रखी गई रकम) कम रहे। NIM का प्रदर्शन खास तौर पर उल्लेखनीय रहा; सिस्टम में सबसे मजबूत FCNR (B) डिपॉजिट बेस होने के बावजूद, इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले केवल 10 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, बैंक ने ब्याज दर चक्र के निचले स्तर पर भी लिक्विडिटी (नकदी) को बनाए रखा है। इसका लिक्विडिटी डिपॉजिट रेशियो (LDR) 95% है। इससे मध्यम अवधि में कमाई बढ़ाने के लिए काफी गुंजाइश मिलती है, क्योंकि इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल आगे किया जा सकता है।

UBS

UBS ने ICICI बैंक के लिए “Buy” रेटिंग दी है और 1,800 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म का कहना है कि बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर लिहाज से शानदार रहा, जिसे मजबूत लोन और डिपॉजिट ग्रोथ का सहारा मिला।

बैंक की लोन ग्रोथ पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% और पिछले साल के मुकाबले 30% रही, जो उम्मीदों और अन्य बैंकों के प्रदर्शन से काफी बेहतर है। इसमें बिजनेस बैंकिंग की लगातार मजबूती के अलावा, कॉर्पोरेट लोन में भी काफी तेजी देखी गई।

मैनेजमेंट को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में मार्जिन अपने निचले स्तर पर आ जाएंगे, जिसके बाद चौथी तिमाही में इनमें सुधार देखने को मिलेगा।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPS Pension: ₹25,000 सैलरी पर कितनी मिलेगी पेंशन? जानिए 50, 58 और 60 साल की उम्र पर पूरा हिसाब

EPS Pension Calculation: नौकरीपेशा कर्मचारियों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि उनकी मौजूदा सैलरी के हिसाब से रिटायरमेंट के बाद कितनी ईपीएस पेंशन मिलेगी। अगर आपकी सैलरी 25,000 रुपये प्रति महीना है, तो हो सकता है कि आप यही उम्मीद कर रहे हों कि पेंशन की गणना भी इसी रकम पर होगी। वैसे, EPFO के मानक नियमों के अनुसार, पेंशन योग्य वेतन की सीमा अधिकतम 15,000 रुपये प्रति महीना तय की गई है।

इसके अलावा, आप किस उम्र में पेंशन लेना शुरू करते हैं, इसका असर भी मिलने वाली मासिक पेंशन पर सीधे तौर पर पड़ता है। कर्मचारी चाहें तो 50 साल की उम्र से अर्ली पेंशन ले सकते हैं, 58 की उम्र में नॉर्मल पेंशन पा सकते हैं या फिर 58 के बाद इसे टालकर ज्यादा पेंशन हासिल कर सकते हैं। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

₹25,000 सैलरी का गणित कैसे तय होता है?

मानक ईपीएस फॉर्मूले में दो मुख्य चीजें इस्तेमाल होती हैं पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा। मानक नियमों के तहत पेंशन योग्य वेतन पर 15,000 रुपये की कैपिंग लागू होती है।

पेंशन का फॉर्मूला: (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70

2 साल का वेटेज नियम: अगर किसी कर्मचारी ने कम से कम 20 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी की है और वह 58 वर्ष की उम्र में रिटायर होता है, तो उसकी सेवा अवधि में 2 साल का बोनस/वेटेज जोड़ा जाता है।

मान लीजिए एक कर्मचारी की सैलरी ₹25,000 है और उसकी सेवा अवधि 30 साल है। मानक ₹15,000 की सीलिंग के तहत 58 साल की उम्र में पेंशन की गणना इस प्रकार होगी:

कुल सेवा वर्ष = 30 वर्ष + 2 वर्ष (वेटेज) = 32 वर्ष

मासिक पेंशन = (₹15,000 × 32) ÷ 70 = लगभग ₹6,857 प्रति महीना।

अगर 50 साल की उम्र में ही ले ली पेंशन

ईपीएस नियमों के अनुसार, अगर किसी सदस्य ने कम से कम 10 साल की सेवा पूरी कर ली है, तो वह 50 वर्ष की उम्र से ही ‘अर्ली पेंशन’ लेने का हकदार होता है। वैसे, इसका नुकसान यह है कि 58 वर्ष से जितने साल पहले आप पेंशन शुरू करेंगे, प्रति वर्ष 4 प्रतिशत की स्थायी कटौती की जाएगी।

50 साल की उम्र में पेंशन शुरू करने का मतलब है 58 साल की सामान्य उम्र से 8 साल पहले पेंशन लेना।

कुल कटौती = 8 साल × 4% = 32 प्रतिशत की कटौती।

₹6,857 की मूल पेंशन पर 32% की कटौती लागू करने के बाद पेंशन लगभग ₹4,663 प्रति महीना रह जाएगी।

(नोट: अगर 55 साल की उम्र में पेंशन ली जाए तो 12% और 56 की उम्र में 8% की कटौती होगी।)

58 साल की सामान्य उम्र पर पेंशन

ईपीएस के तहत 58 वर्ष की आयु को सामान्य पेंशन योग्य आयु माना जाता है। अगर 30 साल की कुल सेवा अवधि के साथ 15,000 रुपये की मानक सीलिंग पर पेंशन की गणना की जाए, तो 58 साल की उम्र में सदस्य को लगभग ₹6,857 प्रति महीना की पेंशन मिलेगी।

अगर 60 साल तक टाल दी पेंशन

सदस्य के पास 58 वर्ष की आयु के बाद भी पेंशन को टालने का विकल्प होता है। ईपीएस नियमों के तहत, 58 साल के बाद पेंशन टालने पर प्रति पूर्ण वर्ष 4 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ मिलता है।

अगर कोई कर्मचारी 2 पूरे वर्षों के लिए यानी 60 साल की उम्र तक पेंशन टालता है, तो उसे 8 प्रतिशत (2 × 4%) का इजाफा मिलेगा। ऐसे में ₹6,857 की मासिक पेंशन बढ़कर लगभग ₹7,406 प्रति महीना हो जाएगी।

उम्र के हिसाब से पेंशन का तुलनात्मक चार्ट

EPS Pension Calculation उम्र के हिसाब से पेंशन का तुलनात्मक चार्ट

क्यों अलग हो सकती है आपकी वास्तविक पेंशन?

केवल 25,000 रुपये की सैलरी से ही आपकी अंतिम ईपीएस पेंशन तय नहीं होती है। सदस्य का वास्तविक पेंशन योग्य वेतन और कुल सेवा अवधि इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा, जिन पात्र कर्मचारियों ने हायर पेंशन का विकल्प चुना है और उसकी सभी शर्तों को पूरा करते हैं, उनकी पेंशन की गणना 15,000 रुपये की मानक सीलिंग से अलग (उनकी वास्तविक बेसिक सैलरी के आधार पर) की जाती है। इसलिए, अपनी सेवानिवृत्ति की योजना बनाने से पहले ईपीएफओ के रिकॉर्ड में दर्ज अपने पेंशन योग्य वेतन और सेवा विवरण की जांच जरूर कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या ₹25,000 सैलरी पाने वाले कर्मचारी को इसी राशि के आधार पर ईपीएस पेंशन मिल सकती है?

मानक गणना के तहत ऐसा नहीं होता है। सामान्य ईपीएस नियमों में पेंशन योग्य वेतन की सीमा ₹15,000 ही रहती है। हालांकि, हायर पेंशन का विकल्प चुनने वाले पात्र मामलों में नियम अलग होते हैं।

Q2: 58 साल की उम्र में 30 साल की सर्विस पर कितनी पेंशन बनेगी?

₹15,000 के मानक पेंशन योग्य वेतन और 2 साल के वेटेज नियम के आधार पर, 30 साल की सर्विस पर लगभग ₹6,857 प्रति महीना पेंशन मिलेगी।

Q3: 50 साल की उम्र में ईपीएस पेंशन लेने पर क्या होता है?

58 साल की उम्र से जितने साल पहले आप पेंशन लेंगे, हर साल के हिसाब से 4% की स्थायी कटौती होगी। 50 साल की उम्र में लेने पर पेंशन की रकम घटकर लगभग ₹4,663 प्रति महीना रह जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HCL Tech shares Price: Q2 नतीजों के बाद शेयर बना रॉकेट, 5% से ज्यादा चढ़कर बना निफ्टी का टॉप गेनर, एक्सपर्ट्स से जानें अब खरीदें , बेचें या रहे बनें

HCL Tech shares Price: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी एचसीएल टेक (HCLTech) के शेयर में 13 अक्टूबर को जोरदार बढत देखने को मिली। शेयर इंट्राडे में 5 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाते हुए निफ्टी का टॉप गेनर बन गया । IT सर्विस देने वाली इस बड़ी कंपनी के शेयरों में बढ़त की वजह कंपनी द्वारा दूसरी तिमाही में अच्छी कमाई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ और बड़ी डील जीतने के बाद आई है।

कंपनी ने FY27 में रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को भी बढ़ा दिया, हालांकि ब्रोकरेज अभी भी स्टॉक के ऊपर जाने की संभावना को लेकर बंटे हुए हैं। HCLTech के शेयर सोमवार के 1,223 रुपये के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले 5.55 फीसदी चढ़कर 1,288 रुपये पर पहुंच गया। मंगलवार की तेजी के बावजूद, 2026 में अब तक स्टॉक 22.2 फीसदी नीचे है, जबकि निफ्टी 50 में 14.2 फीसदी की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 3.45 लाख करोड़ रुपये रहा।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

HCLTech ने सोमवार को सितंबर तिमाही के लिए 5,132 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट बताया, जो साल-दर-साल 21.2 परसेंट ज़्यादा है, जबकि रेवेन्यू 11.5 परसेंट बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन लगातार 131 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 18.2 परसेंट हो गया।

क्या है शेयर पर ब्रोकरेज फर्मों की राय

नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने HCLTech के आउटलुक के बारे में मिली-जुली राय दी। नोमुरा ने 1,330 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी Buy रेटिंग बनाए रखी, जिसमें मजबूत सर्विस परफॉर्मेंस, बढ़ते AI रेवेन्यू और कंपनी की AI स्ट्रैटेजी में प्रोग्रेस का हवाला दिया गया।

जेफरीज ने HCLTech को अपनी पिछली “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग से अपग्रेड करके “होल्ड” कर दिया है, और इसका प्राइस टारगेट पहले के ₹1,070 से बढ़ाकर ₹1,150 कर दिया है।

HSBC ने भी HCLTech पर अपनी “होल्ड” रेटिंग बनाए रखी है और प्राइस टारगेट ₹1,225 रखा है। इसने कंपनी के आउटलुक कमेंट्री को पॉजिटिव बताया क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में डिमांड में सुधार हुआ है, हालांकि फर्म ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इसका सस्टेनेबिलिटी एक चिंता का विषय है।HSBC ने बताया कि HCLTech अपने कॉम्पिटिटर के मुकाबले मीडियम आउटपरफॉर्मेंस और कम मार्जिन के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन मल्टीपल पर ट्रेड कर रही है।

सिटी ने HCLTech पर ₹1,050 के प्राइस टारगेट के साथ “सेल” करने की सलाह दी है। फर्म ने मार्जिन बीट के बाद अपने फाइनेंशियल ईयर 2027-2029 EPS अनुमानों को भी 1% से 3% तक बढ़ा दिया है। हालांकि, सिटी ने कहा है कि मार्जिन का सस्टेनेबिलिटी अहम होगा क्योंकि HCLTech पहले से ही आम सहमति के अनुमानों के आधार पर TCS और इंफोसिस जैसे अपने कॉम्पिटिटर के मुकाबले 20% से 25% प्रीमियम पर ट्रेड कर रही है।

HCLTech पर 45 एनालिस्ट की कवरेज है, जिनमें से 18 ने स्टॉक को “बाय” रेटिंग दी है, 16 ने “होल्ड” कहा है, और 11 ने स्टॉक को “सेल” रेटिंग दी है। प्राइस टारगेट के आम अनुमानों से पता चलता है कि मौजूदा लेवल से सिर्फ़ 2.1% की बढ़त की संभावना है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: 13 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 11 स्टॉक्स, IRCON से RBL बैंक तक शामिल

Stocks to Watch: मंगलवार, 13 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। इनसे तिमाही नतीजे, नए ऑर्डर और बड़े कारोबारी समझौतों तक कई अहम अपडेट सामने आए हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इन 11 शेयरों पर रहने वाली है।

RBL Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक RBL Bank का सितंबर तिमाही में मुनाफा बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 179 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। नेट इंटरेस्ट इनकम 37.4% बढ़कर 2,131 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, ग्रॉस NPA पिछली तिमाही के 1.30% से घटकर 1.02% पर आ गया।

HCL Tech

आईटी कंपनी HCL Tech ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 2.5% से 4% रखा है। सितंबर तिमाही में कंपनी का मुनाफा पिछली तिमाही के 4,624 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,132 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 3% बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBIT मार्जिन 18.2% दर्ज किया गया।

Karur Vysya Bank

प्राइवेट बैंक Karur Vysya Bank ने Zurich Kotak General Insurance के साथ समझौता किया है। इसके तहत बैंक अपने ग्राहकों को जनरल इंश्योरेंस प्रोडक्ट उपलब्ध कराएगा। इस साझेदारी का मकसद ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से बीमा सेवाएं देना है।

ICICI Prudential AMC

म्यूचुअल फंड कंपनी ICICI Prudential AMC का सितंबर तिमाही में मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 7.8% घटकर 888.9 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, इस दौरान रेवेन्यू 7% बढ़कर 1,676.7 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के बोर्ड ने हर शेयर पर 30 रुपये के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है।

Can Fin Homes

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Can Fin Homes का सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 9.2% बढ़कर 274.61 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी की ऑपरेशंस से नेट इनकम 7.8% बढ़कर 1,131.18 करोड़ रुपये रही। वहीं, प्रति शेयर कमाई (EPS) पिछले साल के 18.88 रुपये से बढ़कर 20.62 रुपये हो गई।

Azad Engineering

प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी Azad Engineering को सरकारी कंपनी BHEL से 52.68 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसके तहत कंपनी भारी गैस टर्बाइन के लिए जरूरी ब्लेड की सप्लाई करेगी। यह कॉन्ट्रैक्ट 9 अक्टूबर 2028 तक चलेगा।

IRCON International

सरकारी रेल कंपनी IRCON International को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 862.46 करोड़ रुपये का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसके तहत सोन नगर-आंडाल प्रोजेक्ट की तीसरी और चौथी रेल लाइन के लिए ट्रैक बिछाने और जोड़ने का काम करना है। कंपनी रेलवे ट्रैक की गिट्टी और दूसरी जरूरी सामग्री की सप्लाई भी करेगी।

Indian Hotels Company

होटल कंपनी Indian Hotels Company Ltd (IHCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 47 नए होटल साइन किए और 20 होटल शुरू किए। इसके साथ ही कंपनी के पोर्टफोलियो में कुल 670 होटल हो गए हैं।

Vikran Engineering

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Vikran Engineering की सब्सिडियरी NOPL Solar Projects ने IREDA के साथ 2,941.19 करोड़ रुपये का लोन एग्रीमेंट किया है। इस रकम का इस्तेमाल महाराष्ट्र में सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत 152 जगहों पर 969 MWac क्षमता का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। इसकी कुल अनुमानित लागत 4,201.70 करोड़ रुपये है।

Bank of India

सरकारी बैंक Bank of India ने Future Enterprises के 575.40 करोड़ रुपये के बकाया खाते को फ्रॉड घोषित कर दिया है। बैंक ने इस मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को दे दी है। बैंक के मुताबिक, यह खाता पहले से ही NPA था। बैंक ने बकाया रकम के बराबर 575.40 करोड़ रुपये का प्रोविजन भी किया है।

Nazara Technologies

गेमिंग कंपनी Nazara Technologies ने मिथुन पदम सचेटी को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और होल-टाइम डायरेक्टर बनाया है। यह नियुक्ति 12 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है, लेकिन इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी है। कंपनी के CFO राकेश शाह ने भी इस्तीफा दे दिया है, जो 15 अक्टूबर से प्रभावी होगा।

Q2 नतीजे घोषित करने वाली कंपनियां

कई कंपनियां 13 अक्टूबर को दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Anand Rathi Share and Stock Brokers, Hero Motors, ICICI Prudential Life Insurance Company और Tata Elxsi शामिल हैं। इसके अलावा, GTPL Hathway भी अपने नतीजे घोषित करेगी।

Q2 Results: हर शेयर पर ₹30 डिविडेंड देगी म्यूचुअल फंड कंपनी, दूसरी तिमाही में ₹889 करोड़ का मुनाफा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब मिलेगी ₹12,500 मंथली पेंशन! वेज सीलिंग हाइक के बाद EPS नियमों पर EPFO ने दिया ये बड़ा अपडेट

EPFO Pension Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ₹12,500 तक की मंथली पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा।

इसी बीच पेंशन पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) की सदस्यता के नए नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।

EPFO ने EPS सदस्यता के लिए क्या नियम तय किए हैं?

EPFO के अनुसार, पेंशन योजना (EPS) में शामिल होने के लिए दो मुख्य शर्तें और नियम तय किए गए हैं:

सैलरी ₹25,000 या उससे कम होने पर: अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो उसके लिए EPS की सदस्यता अनिवार्य है और उसकी सैलरी से पेंशन अंशदान काटा जाएगा।

सैलरी ₹25,000 से अधिक होने पर: अगर किसी नए कर्मचारी का मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक है और वह पहले कभी EPS का सदस्य नहीं रहा है, तो वह EPS का पात्र नहीं होगा और उसके वेतन से EPS के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी।

(नोट: इसका मतलब यह है कि केवल सैलरी का आंकड़ा ही पात्रता तय नहीं करता, बल्कि कर्मचारी का पुराना EPS रिकॉर्ड भी यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि वह पेंशन पाने का हकदार है या नहीं।)

EPF और EPS में कैसे बंटता है एंप्लॉयर का योगदान?

नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए PF और पेंशन दो अलग-अलग घटक हैं। नियम के मुताबिक कंपनी कर्मचारी के वेतन का कुल 12% हिस्सा ईपीएफ फंड में योगदान करती है। इस 12% योगदान को दो भागों में बांटा जाता है:

8.33% हिस्सा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है।

शेष 3.67% हिस्सा: कर्मचारी के भविष्य निधि (EPF) खाते में जमा किया जाता है।

कैलकुलेशन का गणित: अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹25,000 प्रति माह है, तो कंपनी का कुल 12% योगदान ₹3,000 बनता है। इसमें से:

EPS (पेंशन फंड): 8.33% के हिसाब से ₹2,082.50 जाएंगे।

EPF (फंड खाता): बचा हुआ ₹917.50 ईपीएफ खाते में जमा होगा।

EPS अंशदान न कटने या गलत कटने पर क्या करें?

EPFO ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि अगर ₹25,000 या उससे कम सैलरी होने के बावजूद उनका EPS अंशदान नहीं काटा जा रहा है, या अपात्र होने के बाद भी कटौती की जा रही है, तो वे ये कदम उठाएं:

पहले नियोक्ता से संपर्क करें: अपने HR या सैलरी विभाग से संपर्क करके अपनी पिछली EPS सदस्यता हिस्ट्री और पात्रता की जांच करवाएं।

EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: अगर नियोक्ता स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो कर्मचारी ईपीएफओ के आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Avenue Supermarts Share Price: Q2 नतीजों के बाद 4% टूटा शेयर, 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा, एक्सपर्ट्स से जानें खरीदें, बेचें या रहे बनें

Avenue Supermarts Share Price: हाइपरमार्केट चेन DMart की पैरेंट कंपनी Avenue Supermarts Ltd. के शेयरों में सोमवार 12 अक्टूबर को 4% तक की गिरावट आई। यह गिरावट वीकेंड पर आए सितंबर तिमाही के नतीजों के प्रतिक्रिया में आई। शेयर आज ₹3,520 के पिछले क्लोजिंग भाव के मुकाबले ₹3,405 पर खुला और 4.4% गिरकर ₹3,366 के 52-हफ़्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई।

Avenue Supermarts ने तिमाही के दौरान 7.3% का EBITDA मार्जिन दर्ज किया, जो पिछले साल के 7.6% के आंकड़े से कम था और CNBC-TV18 के पोल में अनुमानित 7.7% से भी कम था।कंपनी ने मार्जिन पर दबाव की वजह एंट्री लेवल पर वेतन में बढ़ोतरी के कारण ऑपरेटिंग खर्चों में वृद्धि को बताया।

हालांकि कंपनी के मार्जिन पर दबाव था, लेकिन इसकी ‘लाइक-फॉर-लाइक’ ग्रोथ 9.5% रही, जो CNBC-TV18 के पोल के 7.5% के आंकड़े से काफी बेहतर थी। ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई (EBITDA) ₹1,403.2 करोड़ रही, जो पोल के ₹1,492 करोड़ के अनुमान से कम थी। ₹19,206 करोड़ का रेवेन्यू उम्मीद के मुताबिक था, जबकि ₹803.6 करोड़ का मुनाफा ₹857.6 करोड़ के अनुमान से थोड़ा कम था।

Avenue Supermarts ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 18 स्टोर भी खोले, जिनमें से 15 स्टोर दूसरी तिमाही में ही खोले गए, जिससे कुल स्टोरों की संख्या 518 हो गई।

खरीदें, बेचे या रहे बने

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म सिटी ने Avenue Supermarts पर “Sell” रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹3,250 तय किया है। फर्म का कहना है कि कंपनी का मुनाफा रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले पीछे चल रहा है। क्विक कॉमर्स से कॉम्पिटिशन, कम ‘अन्य आय’ (other income) और ज़्यादा ब्याज खर्चों के कारण पिछले 14 में से 11 तिमाहियों में ऐसा हुआ है।

हालांकि, Bernstein ने Avenue Supermarts पर अपनी “आउटपरफॉर्म” रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹5,000 तय किया है। इसमें कहा गया है कि 9.5% की ‘लाइक-फॉर-लाइक’ (LFL) ग्रोथ, किफायती ग्रॉसरी (value-grocer) बिनेस मॉडल की लगातार अहमियत और मजबूती को दिखाती है।

कंपनी ने यह भी लिखा कि LFL ग्रोथ का यह आंकड़ा इस बहस को खत्म कर देगा कि क्या ‘क्विक कॉमर्स’ मॉडर्न ट्रेड वैल्यू-ग्रॉसर मॉडल को खत्म कर सकता है।

बर्नस्टीन के नोट के अनुसार, DMart के लिए चुनौती लगातार मार्जिन बनाए रखने की है, जिसके लिए दो बातों पर ध्यान देना होगा। नए स्टोर के तेज़ी से बढ़ने की रफ़्तार और बढ़ती लागत को मैनेज करना।

CLSA ने भी Avenue Supermarts पर अपनी “हाई-कनविक्शन आउटपरफॉर्म” रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹5,723 तय किया है, जो इस स्टॉक के लिए मार्केट में सबसे ज़्यादा प्राइस टारगेट है।

दूसरी ओर, जेफरीज (Jefferies) की इस स्टॉक पर “hold” रेटिंग है, लेकिन उसने अपना प्राइस टारगेट ₹4,500 से घटाकर ₹4,000 कर दिया है। हालांकि कंपनी ने हाल की तिमाहियों में मजबूत कस्टमर ट्रैफिक और बेहतरीन LFL आंकड़ों को माना – जिससे तिमाही के दौरान अच्छी मांग का पता चलता है – लेकिन फर्म के अनुसार, कंपनी का मुनाफा निराशाजनक रहा।

जेफरीज ने लिखा कि स्टोर का विस्तार तो ठीक-ठाक रहा, लेकिन प्रोडक्टिविटी कम हुई। यह बात तिमाही के लिए कंपनी के कई तिमाहियों के सबसे निचले यूनिट EBITDA से साफ पता चलती है।

नतीजतन, जेफरीज ने Avenue Supermarts के लिए ‘अर्निंग्स पर शेयर’ (EPS) के अनुमान को 2% से 3% तक घटा दिया है।

32 एनालिस्ट Avenue Supermarts पर नजर रखते हैं, जिनमें से 11 की “buy” (खरीदने की) रेटिंग है, 12 की “hold” रेटिंग है और 9 की “Sell” (बेचने की) रेटिंग है। प्राइस टारगेट के आम अनुमानों से पता चलता है कि मौजूदा लेवल से इसमें 12.8% की बढ़ोतरी की संभावना है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Suzlon Energy Share Price: ये 6 बातें तय करेंगी शेयरों की चाल, समझ लें सुजलॉन में निवेश से पहले

Suzlon Energy Share Price: 8 अक्टूबर को एक साल के निचले स्तर पर आने के बाद से विंट टर्बाईन बनाने वाली सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने शानदार वापसी की है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के बुलिश रुझान से इसे और सपोर्ट मिला और यह 3% से अधिक उछल पड़ा। मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। ओवरऑल इसे कवर करने वाले 12 एनालिस्ट्स में से 10 ने इसे खरीदारी और 2 ने होल्ड रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने इसे बेचने की सलाह नहीं दी है। अब शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.84% की बढ़त के साथ ₹38.27 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.14% उछलकर ₹38.76 तक पहुंच गया था।

Suzlon पर Motilal Oswal को भरोसा क्यों कायम?

तीन महीने में सुजलॉन एनर्जी के शेयर 31% नीचे आए। इस गिरावट के साथ अब यह वित्त वर्ष 2028 की प्रति शेयर कमाई (EPS) के मुकाबले 17.5 गुना पर है जोकि इसके एक साल के औसत फारवर्ड P/E से करीब 20% डिस्काउंट पर है। ऐसे में सुजलॉन का शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक सुजलॉन की कमाई वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक होती रही है और कंपनी के सालाना EBITDA में इसकी 60-65% हिस्सेदारी रहती है। ऐसे में इस बार भी वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में ऐसी ही मजबूती के आसार हैं क्योंकि डिलीवरी पहली छमाही में 1.2 गीगावाट से बढ़कर दूसरी छमाही में 2.1 गीगावाट पहुंच सकती है।

जून तिमाही के आखिरी में सुजलॉन एनर्जी की ऑर्डर बुक 5.9 GW थी, जिससे वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक डिलीवरी की तस्वीर साफ दिख रही है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-2028 के दौरान सुजलॉन एनर्जी का EBITDA सालाना 22% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़ेगा।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में देश की विंड कैपेसिटी 3 गीगावाट बढ़ी और ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक अब तक दूसरी छमाही में पहली की तुलना में डेढ़ गुना इंस्टॉलेशन होता रहा है तो इस बार दूसरी छमाही में करीब 4.5 गीगावाट के इंस्टॉलेशन की उम्मीद है जोकि सुजलॉन जैसी विंड टर्बाईन बनाने वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। सरकार ने इस वित्त वर्ष 2027 में 7.5–8 GW नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया हुआ है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग से विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE (फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी) प्रोजेक्ट्स के जरिए विंड कैपेसिटी बढ़ोतरी को सपोर्ट मिल सकता है और यह सुजलॉन एनर्जी के लिए पॉजिटिव है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन एनर्जी को तीन वजहों- DevCo को अच्छे रिस्पांस, निर्यात और पुराने टर्बाईनों को बदलने के मौके से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। डेवको मॉडल की बात करें तो इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही 600 MW से अधिक के ऑर्डर मिले, जो कुल ऑर्डर का 60% हिस्सा हैं।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन को सरकार के स्थानीय प्रोत्साहन से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 6 नवंबर, 2025 को बीएसई पर यह ₹61.45 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 11 महीने में यह 40.93% टूटकर 8 अक्टूबर 2026 को यह एक साल के निचले स्तर ₹36.30 पर आ गया।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रॉकेट बन सकता है इस आईटी बीपीओ हेल्थकेयर कंपनी का शेयर, नुवामा ने दी खरीदने की सलाह

सैजिलिटी का शेयर रॉकेट बन सकता है। यह कंपनी आईटी बीपीओ हेल्थकेयर सर्विस ऑफर करती है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग यानी खरीदने की सलाह के साथ इस शेयर को कवर करना शुरू किया है। 8 अक्टूबर को यह शेयर 1.86 फीसदी चढ़कर 43.90 रुपये चल रहा था।

करेंट लेवल से करीब 40 फीसदी चढ़ सकता है शेयर 

Nuvama ने Sagility के शेयर के लिए 60 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करेंट लेवल से करीब 40 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने 8 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में कंपनी के बारे में कई बातें बताई हैं। उसने कहा है कि हेल्थकेयर बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) एआई आधारित बदलाव के युग में प्रवेश कर रहा है। अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में इस बिजनेस के लिए बड़े मौके हैं।

अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में कंपनी के लिए बड़े मौके

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि अमेरिका में हेल्थकेयर ऑपरेशंस पर खर्च बढ़कर 2028 के अंत तक 259 अरब डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है। 2023 में यह 201 अरब डॉलर था। नुवामा का मानना है कि आउटसोर्स्ड स्पेंड के इन-हाउस ऑपरेशंस से आगे निकल जाने का अनुमान है। नुवामा ने सैजिलिटी की वैल्यूएशंस FY28-29 के अनुमानित ईपीएस का 18 गुना बताया है। कंपनी के पास क्रॉस-सेल के बड़े मौके हैं।

कर्ज के रीपमेंट से बैलेंसशीट को मिलेगी मजबूती

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्री कैश फ्लो जेनरेशन और डेट रीपेमेंट से सैजिलिटी की बैलेंशशीट को मजबूती मिलेगी। उसका मानना है कि इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक सैजिलिटी नेट कैश कंपनी बन जाएगी। FY26-29 के बीच डॉलर में सैजिलिटी के रेवेन्यू का CAGR 13 फीसदी से ज्यादा रह सकता है। इस दौरान एडजस्टेड EPS का सीएजीआर 19 फीसदी रह सकता है। EBITDA मार्जिन 24-25 फीसदी रह सकता है।

ग्रोथ का गाइडेंस डबल डिजिट में बना रहेगा

सैजिलिटी ग्रुप के सीईओ एवं एमडी रमेश गोपालन ने पिछले महीने बताया था कि अमेरिका में हेल्थकेयर सर्विसेज ऑफर करने वाली कंपनियों पर ज्यादा दबाव है। इससे आउटसोर्सिंग की मांग बढ़ रकही है। उन्होंने यह भी कहा था कि FY27 के लिए ग्रोथ का कंपनी का गाइडेंस लो डबल-डिजिट में होगा।

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कमजोर बाजार में भी शेयरो में तेजी 

सैजिलिटी के शेयरों में 8 अक्टूबर को तब तेजी देखने को मिली, जब शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक दबाव में थे। निफ्टी 1.60 फीसदी यानी 361 अंक गिरकर 22,242 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.45 फीसदी यानी 1,058 अंक गिरकर 71,588 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 0.90 फीसदी की गिरावट दिखी।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।