Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Urban Company Share: BofA ने रेटिंग घटाई, शेयर में तीन दिन की तेजी पर भी ब्रेक लगा

Urban Company Share: टेक्नोलॉजी से जुड़े होम-सर्विस प्लेटफॉर्म Urban Company के शेयर में बुधवार को गिरावट आई। इसके साथ लगातार तीन दिन से चल रही तेजी भी थम गई। इसकी वजह है ग्लोबल ब्रोकरेज Bank of America यानी BofA की नई रिपोर्ट।

BofA ने Urban Company की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरपरफॉर्म’ कर दी है। ब्रोकरेज को शेयर की मौजूदा कीमत ज्यादा लग रही है। कंपनी को घाटा भी हो रहा है। ऊपर से Instant Help कारोबार में मुकाबला बढ़ रहा है।

शेयर 0.69% गिरा

बुधवार को NSE पर Urban Company का शेयर 0.69% गिरकर ₹168.12 पर बंद हुआ। हालांकि, इससे पहले तीन कारोबारी दिनों में शेयर करीब 16% चढ़ चुका था।

जून तिमाही के नतीजों के बाद शेयर करीब 30% ऊपर जा चुका था। इसी तेजी के बाद BofA ने अपना रुख बदला है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट ₹155 रखा है। यानी मौजूदा भाव से करीब 8% नीचे जाने का अनुमान है।

Instant Help कारोबार चिंता बढ़ा रहा

BofA की सबसे बड़ी चिंता Urban Company का Instant Help कारोबार है। कंपनी इस सेगमेंट में तेजी से पैसा लगा रही है। लेकिन अभी यहां घाटा काफी बढ़ गया है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस कारोबार में मुकाबला और बढ़ेगा। इससे कंपनी की कमाई पर दबाव आ सकता है। Urban Company को Snabbit और Pronto जैसी कंपनियों से टक्कर मिल रही है। दोनों ने हाल में पैसा भी जुटाया है। इसका मतलब है कि मुकाबला आगे और तेज हो सकता है।

InstaHelp का घाटा 13 गुना बढ़ा

InstaHelp का EBITDA घाटा तेजी से बढ़ा है। FY26 की पहली तिमाही में यह करीब ₹10 करोड़ था। FY27 की पहली तिमाही में घाटा बढ़कर करीब ₹130 करोड़ हो गया। यानी कंपनी इस कारोबार को तेजी से बढ़ाने के लिए पैसा लगा रही है। लेकिन फिलहाल इसका असर मुनाफे पर नहीं दिख रहा है।

BofA ने इसी वजह से Urban Company के कमाई अनुमान भी घटाए हैं। FY28 के लिए अब उसे प्रति शेयर ₹0.73 का घाटा होने का अनुमान है। पहले यह अनुमान ₹0.59 के घाटे का था। FY29 के लिए EPS अनुमान भी ₹2.27 से घटाकर ₹1.41 कर दिया गया है।

UBS और Emkay की राय अलग

Urban Company पर सभी ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। इससे पहले UBS ने शेयर पर कवरेज शुरू की थी। उसने इसे ‘Buy’ रेटिंग दी थी। UBS का मानना है कि भारत का ऑनलाइन होम सर्विस बाजार तेजी से बढ़ सकता है। UBS ने इस बदलाव को भारत के क्विक कॉमर्स में आए ‘Blinkit मोमेंट’ जैसा बताया था।

इसके बाद Emkay ने भी शेयर पर कवरेज शुरू की। उसने ‘Buy’ रेटिंग दी और ₹190 का टारगेट दिया। Emkay को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के बीच भारत का कंज्यूमर सर्विस मार्केट करीब 19.8% CAGR से बढ़ सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NHC Foods का रेवेन्यू 73% बढ़कर ₹601 करोड़ पहुंचा, एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

एग्री कमोडिटी सेक्टर की कंपनी NHC Foods Ltd ने पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 73% बढ़कर ₹601 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹348 करोड़ था। कंपनी का बिना ऑडिट वाला कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹12 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹21.95 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹16.42 करोड़ था। यानी इसमें 34% की बढ़ोतरी हुई। बेसिक EPS ₹0.20 प्रति शेयर रहा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यम शिरीषचंद्र जोशी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी के मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स को दिखाते हैं। उनके मुताबिक ऑपरेशनल दक्षता और क्वालिटी पर फोकस का असर सीधे वित्तीय प्रदर्शन में दिखा है। उन्होंने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है।

FCCB कन्वर्जन से बढ़ा कैपिटल बेस

कंपनी ने Global Focus Fund को 10.41 करोड़ पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 11 लाख डॉलर के FCCB के आंशिक कन्वर्जन के बाद हुआ। इसके बाद कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़कर ₹76.19 करोड़ हो गई।

एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

कंपनी के बोर्ड ने AgriConnect Solutions Pvt Ltd में प्रस्तावित निवेश और अधिग्रहण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट को मंजूरी दी है। यह कंपनी एग्री कमोडिटीज की सप्लाई और ट्रेडिंग के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि इससे इस सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

कंपनी का बिजनेस क्या है

NHC Foods Ltd एग्री कमोडिटी एक्सपोर्ट और फूड ट्रेडिंग सेक्टर की कंपनी है। यह मसाले, तिलहन, अनाज, दालें, चीनी, चाय, कॉफी और दूसरी कृषि जिंसों की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी B2B मॉडल के जरिए कुछ देशों में फूड प्रोडक्ट्स का निर्यात करती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Cards के शेयर में आएगी 34% तक गिरावट! बर्नस्टीन ने घटाया टारगेट प्राइस

SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड के शेयरों में 21 अगस्त को गिरावट है। दिन में शेयर की कीमत बीएसई पर पिछले बंद भाव से 1.4 प्रतिशत तक टूटकर 637 रुपये के लो तक गई। दरअसल ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने शेयर के लिए प्राइस टारगेट 610 रुपये से घटाकर 430 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। हालांकि ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग को बरकरार रखा है। नया टारगेट शेयर के पिछले क्लोजिंग प्राइस से 33 प्रतिशत कम है।

बर्नस्टीन का कहना है कि रिवॉल्वर्स लेड क्रेडिट कार्ड मॉडल में बड़ा ढांचागत बदलाव हो रहा है, और इस दबाव के कम होने या पलटने के बहुत कम संकेत हैं। इस मॉडल से अर्थ है एक ऐसा कार्ड बिजनेस, जिसमें ग्राहक बिल का कुछ हिस्सा चुकाकर बाकी रकम को आगे बढ़ाते रहते हैं और कंपनी को उस बकाया रकम पर ब्याज से कमाई होती है। चूंकि SBI Cards पूरी तरह से क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी है, इसलिए उसे इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा है।

बर्नस्टीन को अभी भी रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो में और गिरावट से नुकसान का जोखिम दिख रहा है। इसके कारण क्रेडिट कॉस्ट में सुधार के बावजूद नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और कमाई में बढ़ोतरी पर दबाव बना रह सकता है। ब्रोकरेज ने SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज के लिए अर्निंग्स-प्रति-शेयर (EPS) अनुमानों को घटा दिया है।

SBI Cards का रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो घटकर 2.8 प्रतिशत

SBI कार्ड्स के मामले में रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो जून 2026 तिमाही में घटकर 2.8 प्रतिशत रह गया। बर्नस्टीन का कहना है कि इस गिरावट के कारण प्रति यूनिट खर्च पर होने वाले मुनाफे में भारी कमी आई है। अहम बात यह है कि रिवॉल्वर्स में आई गिरावट की भरपाई EMI लोन में बढ़ोतरी से नहीं हो पाई है। हालांकि SBI कार्ड्स ने कम ऑपरेटिंग खर्चों के जरिए कमाई पर पड़ने वाले असर को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन बर्नस्टीन का कहना है कि अब इसका असर फीस/नॉन-इंटरेस्ट इनकम-टू-स्पेंड्स रेश्यो पर पड़ने लगा है।

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शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत कमजोर

SBI Cards का मार्केट कैप 61400 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 25 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 68.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,040.55 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 664.44 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 19,899.63 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 2,166.71 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

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Lincoln Pharmaceuticals Q1 Results: फार्मा कंपनी का मुनाफा 31% बढ़ा, तीन साल में ₹1000 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट

Lincoln Pharmaceuticals Q1 Results: फार्मा कंपनी Lincoln Pharmaceuticals ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 30.9% बढ़कर ₹36.23 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹27.68 करोड़ था।

कंपनी की कुल आय भी 19% बढ़कर ₹201.55 करोड़ पहुंच गई। एक साल पहले यह ₹169.34 करोड़ थी। वहीं, प्रति शेयर आय (EPS) बढ़कर ₹18.09 हो गई।

EBITDA में भी मजबूत बढ़त

Lincoln Pharmaceuticals का EBITDA 32.3% बढ़कर ₹51.70 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹39.08 करोड़ था। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी पहले से बेहतर रही।

FY26 में डिविडेंड की सिफारिश

कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026 में ₹87.89 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। कुल आय ₹704.48 करोड़ रही और EBITDA ₹131.14 करोड़ पहुंच गया। बोर्ड ने FY26 के लिए 18% डिविडेंड यानी ₹10 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹1.80 डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, इसे AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है।

तीन साल में ₹1,000 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य

Lincoln Pharmaceuticals ने अगले तीन साल में ₹1,000 करोड़ रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वह 15-18% सालाना ग्रोथ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी को कार्डियक, डायबिटीज, डर्मेटोलॉजी और ENT सेगमेंट से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

90 देशों तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी

Lincoln Pharmaceuticals अभी 60 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करती है। कंपनी का लक्ष्य अगले 2-3 साल में यह संख्या बढ़ाकर 90 देशों तक पहुंचाने का है।

हाल ही में कंपनी ने कनाडा के बाजार में एंट्री की है। साथ ही उसे ऑस्ट्रेलिया के TGA और यूरोप के EU GMP से मंजूरी भी मिली है। कंपनी का कहना है कि इससे उसके ग्लोबल विस्तार को और रफ्तार मिलेगी।

Lincoln के शेयरों का हाल

कंपनी के शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 1.19% की गिरावट के साथ 612.10 रुपये पर बंद हुए। इस साल अब तक स्टॉक 27.57% का रिटर्न दिया है। वहीं बीते 1 साल के दौरान इसमें करीब 12% की तेजी आई है। कंपनी का मार्केट कैप 1.22 हजार करोड़ रुपये है।

Lincoln Pharmaceuticals दवाइयां बनाने और बेचने वाली भारतीय फार्मा कंपनी है। यह कार्डियक, डायबिटीज, एंटीबायोटिक, डर्मेटोलॉजी, ENT और दर्द निवारक जैसी कई कैटेगरी में दवाइयां बनाती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPFO Higher Pension : ज्यादा पेंशन के लिए आवेदन किया है तो जानिए अब क्या करेगा EPFO, सरकार ने बताए 4 बड़े कदम

EPFO Higher Pension : ज्यादा पेंशन के लिए आवेदन किया है तो जानिए अब क्या करेगा EPFO, सरकार ने बताए 4 बड़े कदम

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EPFO Higher Pension: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत ज्यादा पेंशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सरकार ने अहम जानकारी दी है। लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि EPS के तहत उच्च पेंशन (Higher Pension) के आवेदनों के निपटारे में तेजी लाने के लिए EPFO चार प्रमुख कदम उठा रहा है। हालांकि, सरकार ने सभी लंबित मामलों के निपटारे या बकाया राशि (Arrears) के भुगतान के लिए कोई नई अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की है।

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यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के फैसले के बाद शुरू हुई थी। इस फैसले में पात्र कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निर्धारित शर्तों के अधीन वास्तविक उच्च वेतन के आधार पर पेंशन में योगदान का विकल्प दिया गया था।

 

EPFO क्या कर रहा है? जानिए 4 बड़े कदम

1. ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

 

EPFO ने पात्र कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए Joint Option के Validation हेतु ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू की थी। इसका उद्देश्य उच्च वेतन पर पेंशन के विकल्प की प्रक्रिया को आसान बनाना था।

 

हालांकि, केवल ऑनलाइन आवेदन कर देने का मतलब यह नहीं है कि उच्च पेंशन मंजूर हो गई है। EPFO आवेदन की जांच करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आवेदक निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं।

 

2. आवेदन और रिकॉर्ड की जांच

 

EPFO आवेदनों की जांच लागू नियमों के अनुसार कर रहा है। इसमें कर्मचारी के वेतन, PF योगदान और पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर नियोक्ता से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।

 

अगर वेतन या योगदान के रिकॉर्ड में कोई अंतर है अथवा जानकारी अधूरी है, तो आवेदन के निपटारे में अतिरिक्त समय लग सकता है।

 

3. क्षेत्रीय कार्यालयों को समय पर निपटारे के निर्देश

 

सरकार के मुताबिक, EPFO ने अपने Regional Offices को उच्च वेतन पर पेंशन से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा करने के निर्देश दिए हैं।

 

इसका मतलब है कि लंबित आवेदनों को निपटाने की जिम्मेदारी सिर्फ EPFO मुख्यालय की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों की भी है। इन कार्यालयों में ही आवेदनों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की काफी जांच होती है।

 

4. वीडियो कॉन्फ्रेंस से लगातार निगरानी

 

EPFO उच्च पेंशन के मामलों की प्रगति की Zonal और Regional Offices के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए समीक्षा भी कर रहा है।

 

इसका उद्देश्य लंबित मामलों की स्थिति जानना, रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना और जिन आवेदनों में देरी हो रही है, उन्हें जल्द निपटाना है।

 

99.2 फीसदी से ज्यादा आवेदन हो चुके हैं निपटाए

 

सरकार के मार्च 2026 में लोकसभा में दिए जवाब के मुताबिक, 31 जनवरी 2025 तक करीब 15.24 लाख Joint Options के आवेदन नियोक्ताओं की ओर से EPFO को भेजे गए थे। वहीं, 9 मार्च 2026 तक EPFO को प्राप्त 99.2 फीसदी से ज्यादा आवेदनों का निपटारा किया जा चुका था। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। आवेदन का 'Disposed' होना और वास्तव में बढ़ी हुई पेंशन मिलना एक ही बात नहीं है।

 

आवेदन निपटने के बाद क्या होता है?

 

पात्र आवेदकों को EPFO की ओर से Demand Letter जारी किया जा सकता है। इसके बाद रिटायर्ड आवेदकों को निर्धारित राशि जमा करने और Form 10D सहित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद पात्रता पूरी होने पर Pension Payment Order (PPO) जारी किया जा सकता है। वहीं, जो सदस्य अभी नौकरी में हैं, उन्हें निर्धारित आयु पर पेंशन का दावा करने और जरूरी फॉर्म जमा करने के बाद PPO मिलेगा।

 

क्या सरकार ने नई डेडलाइन घोषित की है?

 

नहीं।

 

उच्च पेंशन के लिए लंबित सभी मामलों को निपटाने या बकाया पेंशन का भुगतान करने के लिए सरकार ने फिलहाल कोई नई देशव्यापी अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की है। सरकार का कहना है कि EPFO सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू कर रहा है और मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।

 

पेंशन का इंतजार कर रहे लोगों को क्या करना चाहिए?

 

अगर आपने Higher Pension के लिए आवेदन किया है तो सिर्फ आवेदन जमा होने के आधार पर यह न मानें कि ज्यादा पेंशन मंजूर हो गई है। आपको अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति, EPFO की ओर से जारी Demand Letter, आवश्यक अतिरिक्त योगदान और Form 10D जैसी औपचारिकताओं की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।

Solar Industries Share Price: शानदार तिमाही नतीजों के बाद 4% टूटा शेयर, ब्रोकरेज ने भी घटाई रेटिंग, आखिर क्या है वजह

Solar Industries Share Price: केमिकल सेक्टर की कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया लिमिटेड (Solar Industries) के शेयरों में 14 अगस्त को गिरावट देखने को मिली। अच्छे तिमाही नतीजों के बाद भी शेयर 4 फीसदी टूटा है। कंपनी के नतीजों के बाद शेयर पर ब्रोकरेज फर्मों की अलग-अलग प्रतिक्रिया आई है। एक तरफ मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है तो दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने बिकवाली की राय दी है।

ओवरवेट’ रेटिंग की राय

मॉर्गन स्टेनली ने सोलर इंडस्ट्रीज़ पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹20,270 तय किया है। इसका मतलब है कि गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस ₹20,325 से इसमें किसी तरह के बढ़त की उम्मीद नहीं है। ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की कमाई उम्मीद से बेहतर रही। रेवेन्यू, EBITDA और एडजस्टेड PAT में क्रमशः 70%, 88% और 93% की बढ़ोतरी हुई।

सभी प्रमुख सेगमेंट में रेवेन्यू ग्रोथ उम्मीद से ज़्यादा रही। डिफेंस रेवेन्यू में 123% की बढ़ोतरी हुई (जबकि मॉर्गन स्टेनली का अनुमान 70% था), इंटरनेशनल एक्सप्लोसिव्स में 65% की बढ़ोतरी हुई (अनुमान 35% था) और घरेलू एक्सप्लोसिव्स में 52% की बढ़ोतरी हुई (अनुमान 19% था)।

ग्रॉस मार्जिन 110 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 49.2% हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 265 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 27.5% हो गया। मॉर्गन स्टेनली ने मार्जिन में सुधार का कारण डिफेंस मिक्स में अनुकूलता, इंटरनेशनल एक्सप्लोसिव्स में बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी और इन्वेंट्री से होने वाले फायदे को बताया।

कंपनी का ऑर्डर बुक लगभग ₹21,350 करोड़ का था, जिसमें डिफेंस बिज़नेस से ₹18,000 करोड़ से ज़्यादा का ऑर्डर शामिल था।FY27 के लिए, मॉर्गन स्टेनली को लगभग ₹14,000 करोड़ के रेवेन्यू और ₹2,050 करोड़ के नियोजित कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) की उम्मीद है। कंपनी Q1 के दौरान कैपेक्स पर पहले ही लगभग ₹450 करोड़ खर्च कर चुकी है।

45% की गिरावट संभव

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ ने सोलर इंडस्ट्रीज पर अपनी ‘Sell’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹11,200 तय किया है। इसका मतलब है कि गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस से इसमें लगभग 45% की गिरावट आ सकती है।

कोटक ने Q1 के शानदार प्रदर्शन को माना। बेहतर काम-काज और प्रॉफिटेबिलिटी के कारण PAT उनके अनुमान से 18% ज़्यादा रहा। डिफेंस, इंटरनेशनल एक्सप्लोसिव्स और घरेलू एक्सप्लोसिव्स में ज़बरदस्त ग्रोथ के कारण रेवेन्यू सालाना आधार पर 70% बढ़कर लगभग ₹3,670 करोड़ हो गया। ब्रोकरेज के अनुसार, EBITDA मार्जिन सालाना आधार पर लगभग 170 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 27.9% हो गया।

हालांकि ₹21,400 करोड़ का ऑर्डर बुक खास तौर पर डिफेंस बिजनेस के लिए मीडियम-टर्म में अच्छी संभावना दिखाता है, लेकिन कोटक ने तिमाही के दौरान बेहतर काम-काज को देखते हुए FY27-29 के लिए EPS अनुमानों को 2-6% तक बढ़ा दिया है।

Solar Ind का Q1 परफॉर्मेंस

Solar Industries ने नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 92.7% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹338.7 करोड़ से बढ़कर ₹652.6 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 71.2% बढ़कर ₹3,688.2 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA 93.6% बढ़कर ₹1,035.2 करोड़ हो गया।

EBITDA मार्जिन पिछले साल की इसी तिमाही के 24.8% से बढ़कर 28.1% हो गया।कंपनी ने FY27 के लिए ₹14,000 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट तय किया है।

मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मनीष नुवाल ने कहा कि कंपनी ने Q1FY27 में अब तक का सबसे ज़्यादा तिमाही रेवेन्यू, EBITDA, PBT और PAT हासिल किया।नुवाल ने कहा कि ₹21,350 करोड़ से ज़्यादा के ऑर्डर बुक के दम पर कंपनी FY27 के लिए ₹14,000 करोड़ के रेवेन्यू गाइडेंस को हासिल करने की राह पर है। कंपनी इस साल कैपेक्स (capex) में ₹2,050 करोड़ निवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें से ₹450 करोड़ Q1 में पहले ही लगाए जा चुके हैं।

Solar Industries India के शेयर शुक्रवार को सुबह 10.33 बजे 3.17% गिरकर ₹19694 पर ट्रे़ड कर रहे है। 2026 में अब तक इनमें 67% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SIP Calculator: SIP की एक किस्त छोड़ दी? यही गलती बाद में लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है

SIP Calculator: SIP शुरू करना आसान है। मुश्किल काम है उसे लगातार जारी रखना। कई बार महीने के आखिर में खर्च बढ़ जाते हैं। बैंक खाते में बैलेंस कम होता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि इस महीने रहने देते हैं, अगले महीने से फिर शुरू कर देंगे।

यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है। SIP में सिर्फ पैसा नहीं बढ़ता, समय भी आपके लिए काम करता है। जितनी जल्दी पैसा निवेश होता है, उतने ज्यादा साल उसे बढ़ने का मौका मिलता है। इसलिए एक किस्त मिस होने का नुकसान सिर्फ उस महीने तक नहीं रहता। कई साल बाद वही रकम बड़ी बन सकती है।

पहले समझिए नुकसान क्यों होता है

SIP की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग है। इसका मतलब है कि आपका पैसा सिर्फ रिटर्न नहीं कमाता, बल्कि उस रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता रहता है। यही वजह है कि शुरुआती सालों की हर किस्त सबसे ज्यादा अहम होती है।

अगर बीच में कोई किस्त नहीं जाती, तो उस पैसे का पूरा बढ़ने वाला सफर रुक जाता है।

₹1,000 की SIP में कितना नुकसान?

मान लीजिए आप हर महीने ₹1,000 की SIP करते हैं। निवेश की अवधि 20 साल है और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

अगर पहले साल की सिर्फ एक किस्त नहीं जाती, तो वह ₹1,000 करीब 20 साल बाद लगभग ₹9,650 बन सकती थी। यानी एक छोटी सी चूक भविष्य के करीब ₹8,650 के मौके को खत्म कर सकती है।

₹2,000 की SIP का हिसाब

यही उदाहरण ₹2,000 की SIP से समझिए। अगर पहले साल की एक किस्त छूट जाती है, तो उसकी संभावित वैल्यू करीब ₹19,300 हो सकती थी। यानी सिर्फ ₹2,000 बचाने के चक्कर में भविष्य के करीब ₹17,300 का नुकसान हो सकता है।

₹5,000 की SIP में असर और बड़ा

अब मान लीजिए आपकी SIP ₹5,000 महीने की है। अगर पहले साल की एक किस्त नहीं जाती, तो वही ₹5,000 करीब ₹48,200 तक पहुंच सकते थे। यानी भविष्य में लगभग ₹43,200 का संभावित अंतर पड़ सकता है।

तीन महीने SIP नहीं गई तो?

अब एक बड़ा उदाहरण देखते हैं। मान लीजिए आपकी SIP ₹5,000 महीने की है। पहले साल लगातार तीन महीने निवेश नहीं हुआ। यानी कुल ₹15,000 निवेश नहीं हो पाया।

अगर यही पैसा 20 साल तक 12% की दर से बढ़ता, तो उसकी संभावित वैल्यू करीब ₹1.45 लाख हो सकती थी। यानी उस वक्त ₹15,000 बचाने का फैसला आगे चलकर लाख रुपये से ज्यादा का फर्क पैदा कर सकता है। अगर शुरुआत में 6 किस्त चूक गए, तो नुकसान करीब 3 लाख तक का हो सकता है।

अलग-अलग SIP में एक किस्त छूटने का असर

मासिक SIP
20 साल बाद 1 छूटी किस्त की संभावित वैल्यू*

₹1,000₹9,650
₹2,000₹19,300
₹5,000₹48,200

*यह अनुमान 20 साल और 12% सालाना रिटर्न के आधार पर है। वास्तविक रिटर्न बाजार के हिसाब से अलग हो सकता है।

पैसे की दिक्कत हो तो क्या करें?

अगर किसी महीने आर्थिक दबाव हो, तो पूरी SIP बंद करना जरूरी नहीं है। कई म्यूचुअल फंड SIP की रकम कम करने की सुविधा देते हैं। ऑटो-डेबिट की तारीख बदलना भी एक आसान विकल्प हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश की आदत बनी रहे।

आखिर याद क्या रखना चाहिए?

SIP में बड़ी दौलत अक्सर बड़ी रकम से नहीं बनती। नियमित निवेश से बनती है। कई लोग ₹1,000, ₹2,000 या ₹5,000 जैसी छोटी SIP से भी अच्छा फंड बना लेते हैं, क्योंकि उन्होंने बीच में रुकना नहीं चुना।

इसलिए अगली बार अगर लगे कि “इस महीने SIP छोड़ देते हैं”, तो एक बार यह हिसाब जरूर याद कर लीजिए। हो सकता है आज की ₹5,000 की बचत भविष्य के ₹48,000 बनने वाले हों।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Rhetan TMT Q1 Results: टीएमटी स्टील बार कंपनी को ₹3.16 करोड़ का मुनाफा, क्षमता बढ़ाने पर बड़ा दांव

Rhetan TMT Q1 Results: अहमदाबाद की टीएमटी स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मुनाफे में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 315.7% बढ़कर ₹3.16 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹76 लाख था। हालांकि, ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹5.04 करोड़ से घटकर ₹4.06 करोड़ रहा।

EBITDA और PBT में भी बड़ी बढ़त

Rhetan TMT का EBITDA 195.5% बढ़कर ₹3.79 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹1.28 करोड़ था। वहीं, टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) 335.5% बढ़कर ₹3.31 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹0.76 करोड़ था। कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) भी बढ़कर ₹0.04 हो गई।

मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रही कंपनी

कंपनी अब कड़ी प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 45,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 75,000 मीट्रिक टन कर रही है। मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि इससे कंपनी को TMT स्टील सेगमेंट में नए अवसरों का फायदा उठाने में मदद मिलेगी।

कंपनी का कहना है कि वह क्षमता बढ़ाने, प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर जोर देने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के जरिए लंबे समय की ग्रोथ पर फोकस बनाए रखेगी।

सोलर प्रोजेक्ट और नए सर्टिफिकेशन का फायदा

Rhetan TMT ने अपने 1 मेगावाट कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट की टेस्टिंग और कमीशनिंग पूरी कर ली है। जल्द ही इससे कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा लागत कम करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D TMT बार्स के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल गया है। इससे वह सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज के कंसोर्टियम को ₹740 करोड़ के प्रोजेक्ट मिले, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का है काम

इंटीग्रेटेड फैसिलिटीज मैनेजमेंट कंपनी Crystal Integrated Services के कंसोर्टियम को महाराष्ट्र सरकार से दो बड़े वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 740.06 करोड़ रुपये है। कंपनी की कंसोर्टियम में 40% हिस्सेदारी है। इस हिसाब से कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 296.03 करोड़ रुपये है।

पुणे और नागपुर में होंगे प्रोजेक्ट

ये दोनों ऑर्डर LC Infra Crystal Consortium को मिले हैं। इसमें LC Infra Projects Private Limited लीड मेंबर है। वहीं Crystal Integrated Services टेक्निकल मेंबर है।

प्रोजेक्ट के तहत पुणे और नागपुर डिवीजन के शहरी निकायों में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सीवर नेटवर्क और इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन सिस्टम शामिल हैं। 5 MLD या उससे ज्यादा क्षमता वाले STP भी बनाए जाएंगे। इन प्रोजेक्ट्स को दो साल में पूरा करना है।

कंपनी की ऑर्डर बुक को मिलेगा सहारा

कंपनी के लिए ये ऑर्डर काफी अहम हैं। इससे सरकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी। कंपनी टेक्निकल मेंबर के तौर पर सीवेज ट्रीटमेंट और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से वेस्टवॉटर मैनेजमेंट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में भी कंपनी की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है।

Q1 में रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा

Crystal Integrated Services ने FY27 की पहली तिमाही में भी ग्रोथ दर्ज की। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 11.65% बढ़कर 360.71 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 323.08 करोड़ रुपये था।

EBITDA 6.76% बढ़कर 22.80 करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा 6.30% बढ़कर 17.36 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 6.32% रहा। बेसिक EPS भी 5.95% बढ़कर 12.46 रुपये पहुंच गया।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर नीता प्रसाद लाड ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार से मिले ये दोनों कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए अहम पड़ाव हैं। उनके मुताबिक, 740 करोड़ रुपये के कुल कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी की 40% हिस्सेदारी से प्रोजेक्ट पाइपलाइन मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि कंपनी सरकारी, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे संस्थागत क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय में टिकाऊ ग्रोथ हासिल करना है।

Manappuram Finance Q1 Results: गोल्ड लोन कंपनी का प्रॉफिट 322% बढ़ा, डिविडेंड का भी ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।