EPF Passbook: क्या आपकी कंपनी हर महीने जमा कर रही है PF? जानिए घर बैठे पासबुक चेक करने का तरीका और नियम

EPF Passbook Checking Rules: अक्सर नौकरीपेशा लोग हर महीने अपनी सैलरी स्लिप में पीएफ कटने की एंट्री देखकर निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सैलरी स्लिप में पीएफ काटना इस बात की 100% गारंटी नहीं है कि आपकी कंपनी ने वह पैसा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में जमा भी कर दिया है?

इसीलिए हर 2-3 महीने में एक बार अपनी ई-पासबुक चेक करना बेहद जरूरी है। पासबुक से यह साफ हो जाता है कि आपके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के तहत कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा समय पर जमा हो रहा है या नहीं।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पासबुक में क्या-क्या चेक करना चाहिए, पैसा जमा होने की समयसीमा क्या है और गड़बड़ी मिलने पर क्या कदम उठाना चाहिए।

अपनी पासबुक में क्या-क्या जांचना जरूरी है?

अपनी सैलरी स्लिप और ई-पासबुक को आमने-सामने रखकर इन चीजों का मिलान करें:

मंथली एंट्री: अगर आपकी अप्रैल महीने की सैलरी से पीएफ कटा है, तो पासबुक में अप्रैल का कंट्रीब्यूशन दिखना चाहिए।

तीनों हिस्से जांचें: पासबुक में केवल अपना अंशदान न देखें, बल्कि कंपनी का अंशदान और पेंशन फंड (EPS) का हिस्सा भी जरूर चेक करें।

गड़बड़ी का नुकसान: अगर अभी कोई गलती रह जाती है, तो आगे चलकर जॉब बदलते समय, पीएफ ट्रांसफर करते समय या रिटायरमेंट के वक्त पेंशन क्लेम करने में बड़ी रुकावट आ सकती है।

महीने की किस तारीख तक जमा होना चाहिए PF का पैसा?

15 तारीख का नियम: नियमानुसार, कंपनियों को कर्मचारियों की सैलरी से काटा गया पीएफ और अपना हिस्सा, महीना खत्म होने के 15 दिनों के भीतर (जैसे अप्रैल का पीएफ 15 मई तक) EPFO के पास जमा कराना अनिवार्य होता है।

तकनीकी देरी: अगर सैलरी आते ही तुरंत पासबुक में एंट्री न दिखे तो घबराएं नहीं। कई बार प्रोसेसिंग या सर्वर की वजह से एंट्री अपडेट होने में कुछ दिनों का समय लग जाता है।

अलर्ट रहें: लेकिन अगर बाद के महीनों की एंट्री दिखने लगे और किसी पुराने महीने की एंट्री गायब रहे, तो समझ जाएं कि कोई गड़बड़ी है।

ऑनलाइन EPF Passbook कैसे चेक करें? (3 आसान तरीके)

आप घर बैठे 3 तरीकों से अपना पीएफ बैलेंस और पासबुक चेक कर सकते हैं:

EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर UAN और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करें और संबंधित मेंबर आईडी चुनकर पासबुक देखें।

Passbook Lite: EPFO ने सदस्यों की सुविधा के लिए ‘पासबुक लाइट’ फीचर भी दिया है, जहां जमा-निकासी और बैलेंस का एक आसान समरी व्यू मिलता है।

UMANG App: अपने स्मार्टफोन में उमंग ऐप डाउनलोड करके भी पासबुक और बैलेंस चेक किया जा सकता है।

इस बात का ध्यान दें कि अगर आपने कई नौकरियां बदली हैं, तो एक ही UAN के तहत आपकी अलग-अलग मेंबर आईडी होंगी। जिस कंपनी का रिकॉर्ड देखना हो, उसी की मेंबर आईडी सिलेक्ट करें।

जॉब बदलते समय UAN और डिटेल्स का रखें ध्यान

नई कंपनी जॉइन करते समय नया UAN बनवाने के बजाय अपना पुराना UAN ही एचआर (HR) को दें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आपके पीएफ रिकॉर्ड में आपका नाम, जन्मतिथि और पहचान से जुड़े दस्तावेज (KYC) पूरी तरह मैच करते हों। इससे पुराना पीएफ बैलेंस नई कंपनी के खाते में आसानी से ट्रांसफर हो जाता है।

अगर पीएफ का पैसा जमा न हुआ हो तो क्या करें?

स्टेप 1: अपनी सैलरी स्लिप चेक करें और थोड़ा प्रोसेसिंग टाइम दें।

स्टेप 2: अगर फिर भी जमा राशि न दिखे, तो अपनी कंपनी के पेरोल या HR विभाग से तुरंत संपर्क करें।

स्टेप 3: अगर कंपनी आपकी सैलरी से पीएफ काट रही है लेकिन EPFO में जमा नहीं कर रही, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ EPFO सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ते वक्त पीएफ का पैसा रुकने से बेहतर है कि आप सतर्क रहें। हर 2-3 महीने में सिर्फ 5 मिनट निकालकर अपनी ई-पासबुक चेक करने की आदत डालें ताकि किसी भी गड़बड़ी को शुरुआती स्टेज में ही ठीक कराया जा सके।

EPF Calculator: पीएफ से भी बनाया जा सकता है एक करोड़ रुपये का फंड! जानिए इसके लिए मंथली कितना करना होगा इन्वेस्टमेंट

एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) की मदद से बड़ा रिटायरमेंट फंड बन सकता है। यह लंबी अवधि का निवेश है, जिससे पैसे को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। लंबे समय तक नियमित रूप से निवेश करने पर ईपीएफ का रिटर्न बहुत अच्छा रहता है। सिर्फ प्राइवेट नौकरी करने वाले एंप्लॉयीज ईपीएफ के दायरे में आते हैं।

हर महीने ईपीएफ में करीब 10,750 रुपये का निवेश करीब 20-25 साल तक करने पर करीब 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाता है। इस कैलकुलेशन में सालाना इंटरेस्ट रेट 8.25 फीसदी माना गया है। अगर एंप्लॉयी हर महीने वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में भी हर महीने 6,000 रुपये का निवेश करता है तो 24-25 साल में करीब 1.58 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो सकता है।

यह ध्यान में रखना जरूरी है कि करियर में ब्रेक होने का असर ईपीएफ के फंड पर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि करियर ब्रेक की वजह से ईपीएफ में हर महीने होने वाला कंट्रिब्यूशन रुक जाता है। इसका असर लंबी अवधि में कंपाउंडिंग के फायदे पर पड़ता है।

ईपीएफओ के नियम के तहत, एंप्लॉयीज ईपीएफ में अपनी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हर महीने कंट्रिब्यूट करता है। एंप्लॉयर भी 12 फीसदी कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयी के ईपीएफ में हर महीने करता है। इसका 8.33 फीसदी एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है और 3.67 फीसदी ईपीएफ में जाता है।

क्लासिस लॉ में एसोसिएट मयंक पराशर ने इसे एक उदाहरण की मतलब से समझाया। उन्होंने कहा कि ऐसा एक एंप्लॉयी है जो लगातार 25 साल तक नौकरी करता है। उसका ईपीएफ में मंथली कंट्रिब्यूशन 10,750 रुपये है। उसका ईपीएफ फंड 24-25 सालों में सालाना 8.25 फीसदी इंटरेस्ट रेट से बढ़कर करीब 1 करोड़ रुपये हो जाएगा। इस कैलकुलेशन में यह माना गया है कि एंप्लॉयी के मंथली कंट्रिब्यूशन में कोई बदलाव नहीं होता है।

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करियर में ब्रेक का असर

पराशर ने कहा, “करियर में ब्रेक का असर ईपीएफ में पहले से जमा फंड पर नहीं पड़ेगा। लेकिन, ब्रेक के दौरान कंट्रिब्यूशन रुकने का असर रिटायरमेंट फंड पर पड़ेगा।” इसका मतलब है कि अगर एंप्लॉयी 3 साल का करियर ब्रेक लेता है तो उस दौरान ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन रुक जाएगा। इसका असर लंबी अवधि में कंपाउंडिंग बेनेफिट पर पड़ेगा।

पराशर ने इसे भी एक उदाहरण की मदद से समझाया। उन्होंने कहा कि हम मान लेतें है कि एंप्लॉयी 25 साल की जगह सिर्फ 22 साल कंट्रिब्यूशन करता है। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में उसका ईपीएफ फंड करीब 76.6 लाख रुपये होगा। इसका मतलब है कि करियर ब्रेक की वजह से फंड करीब 24.9 लाख रुपये घट जाता है।”

उन्होंने कहा कि करियर ब्रेक के दौरान न सिर्फ कंट्रिब्यूशन रुक जाता है बल्कि कंट्रिब्यूशन पर मिलने वाला इंटरेस्ट और कंपाउंडिंग बेनेफिट भी नहीं मिलता है। इसे हम नीचे टेबल की मदद से समझ सकते हैं।

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VPF की मदद से बना सकते हैं बड़ा फंड

एंप्लॉयी के करियर में अगर कोई ब्रेक नहीं होता है और वह अगर वीपीएफ में हर महीने अतिरिक्त 6000 रुपये का कंट्रिब्यूशन करता है तो ईपीएफ में हर महीने का कंट्रिब्यूशन बढ़कर 16,750 रुपये हो जाता है। इससे 25 साल में उसके लिए करीब 1.58 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाता है।

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इस उदाहरण से पता चलता है कि नियमित रूप से कंट्रिब्यूशन होने पर ईपीएफ बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने में मदद कर सकता है। अगर आप वीपीएफ के जरिए अतिरिक्त कंट्रिब्यूशन कर सकते हैं तो आपके लिए और बड़ा फंड तैयार हो जाता है। लेकिन, करियर ब्रेक की वजह से रिटायरमेंट फंड का आकार कम हो जाता है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

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Titan Share Price: 20% अभी ओर चढ़ सकता है शेयर, मोतीलाल ओसवाल ने बताई ये वजह

Titan Share Price: टाटा ग्रुप की कंपनी टाइटन के शेयरों में शुक्रवार 11 सितंबर को दबाव देखने को मिला। जिसके चलते स्टॉक में पिछले 1 महीने से चल रही करेक्शन जारी रही। हालांकि बाजार में अपनी मजबूत स्थिति के कारण टाटा ग्रुप की इस कंपनी के अपने प्रतिस्पर्धियों से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है। यहीं कारण है कि ब्रोकरेज फर्म शेयर पर बुलिश नजर आ रहा है। साथ ही ₹6,000 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस दिया है, जो इसमें 20 फीसदी की अपसाइड दिखाता है।

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सोने की कीमतों में स्थिरता से कंपनी के मार्जिन में सुधार हो सकता है । ज्वेलरी इंडस्ट्री की एक प्रमुख कंपनी, टाइटन, अपने मजबूत पुराने कामकाज के रिकॉर्ड के दम पर टॉप कंपनियों में बनी रहेगी। ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, यह बड़ी ज्वेलरी कंपनी इंडस्ट्री की सकारात्मक ग्रोथ संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

हालांकि टाइटन कंपनी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है, लेकिन बाजार में इसकी हिस्सेदारी केवल 8.5% है। इसका बढ़ता स्टोर नेटवर्क, कई तरह के फॉर्मेट वाला पोर्टफोलियो और स्थापित ब्रांड वैल्यू इसे इस बड़े बदलाव का बहुत अधिक फायदा उठाने में मदद कर सकते हैं। कंपनी की मजबूत स्थिति, ब्रांडेड प्लेयर के तौर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन और सोने की कीमतों में स्थिरता से कंपनी के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

मोतीलाल ओसवाल ने शुक्रवार, 11 सितंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, “हम ज्वेलरी इंडस्ट्री में ग्रोथ को लेकर सकारात्मक हैं, खासकर टॉप कंपनियों के मामले में, जहां टाइटन एक लीडर है और अपने शानदार पुराने कामकाज के रिकॉर्ड के कारण सबसे अच्छी स्थिति में है। हम FY26-29E के दौरान बिक्री में 17% CAGR, EBITDA में 21% और APAT में 23% CAGR का अनुमान लगाते हैं।”

क्या दिया टारगेट प्राइस

मोतीलाल ओसवाल ने इस स्टॉक के लिए ₹6,000 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ Buy की रेटिंग दी है। हम FY26-29E के दौरान बिक्री में 17% CAGR, EBITDA में 21% और APAT में 23% CAGR का अनुमान लगाते हैं। हम सितंबर 2028 के अनुमानित EPS के 60 गुना (60x) के आधार पर ₹6,000 के टारगेट प्राइस (TP) के साथ इस स्टॉक पर अपनी ‘खरीदने’ (BUY) की रेटिंग को दोहराते हैं।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

शुक्रवार को एनएसई पर टाइटन कंपनी का शेयर 0.23% गिरकर ₹5009 प्रति शेयर पर बंद हुआ। शेयर ने ₹5,014.30 प्रति शेयर का इंट्राडे हाई और ₹4,943.75 प्रति शेयर का इंट्राडे लो छुआ।

कंपनी के शेयर का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 35.39% है। पिछले एक महीने में इसके शेयर की कीमत में 2.58% की गिरावट आई है। इस शेयर ने तीन महीनों में 23.8% और एक साल में लगभग 38.99% का रिटर्न दिया है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Insight : अनुज सिंघल से जाने कहां तक गिर सकता है निफ्टी, NSE के IPO में क्या करें

Market Insight : बढ़ती US बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की आग में बाजार झुलसता दिख रहा है। निफ्टी ने इंट्राडे में आज 23250 का अहम लेवल भी तोड़ दिया तो बैंक निफ्टी 1 फीसदी टूटकर 56000 के नीचे चला गया। मिड और स्मॉलकैप में भी भारी बिकवाली आई है। क्रूड 108 डॉलर के पार चला गया है। उधर इंडिया VIX 6 फीसदी उछला है। US में दरे बढ़ने की आशंका से रेट सेंसटिव शेयरों के सेंटिमेंट बिगड़ गए हैं। रियल्टी,ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है। रियल्टी इंडेक्स करीब 4 फीसदी नीचे है। गोदरेज और प्रेस्टीज 5 फीसदी तक गिरे हैं। हालांकि IT शेयर संभलने की कोशिश कर रहे हैं।

US में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी के करीब पहुंचने से मेटल और गोल्ड फाइनेंस कंपनियों पर प्रेशर है। मेटल इंडेक्स करीब 2.5 फीसदी टूटा है। HINDALCO, HIND ZINC, हिंद कॉपर, NALCO 5 फीसदी तक नीचे आए हैं। सोने में गिरावट से मुथूट और मणप्पुरम भी टूटे हैं।

क्या आज होगा टोटल ब्रेक डाउन ?

बाजार पर बात करते हुए CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि उनका लगातार इंडेक्स पर शॉर्ट रहने का नजरिया रहा है। बाजार इस समय एक बड़े मैक्रो दिक्कत में है। इसीलिए निफ्टी और बैंक निफ्टी में बड़ी गिरावट आ रही है। लेकिन ऐसा नहीं है कि बाजार खराब है। मिडकैप,स्मॉलकैप और IPOs में पैसा बन रहा है। आज सुबह-सुबह बॉन्ड बाजार और कच्चे तेल से डराने वाले संकेत मिले हैं। आज शाम को US रिटेल महंगाई डाटा भी आना है। ऐसे में बड़ा सवाल ये कि बाजार दरों में बढ़ोतरी को कितना पचा चुका है और अगर वाकई US में दरों में बढ़ोतरी हुई तो क्या हम और गिरेंगे या ये भाव में शामिल हो चुका है?

निफ्टी: कहां तक गिर सकते हैं हम?

निफ्टी में इस साल 2 बड़े बॉटम बने थे। युद्ध के तुरंत बाद 22,331 और मई में 23,123 (क्लोजिंग लेवल)। क्लोजिंग आधार पर हम 24,774 तक चले थे। मई के स्तर से जो रैली हुई उसका हम 81% गिर चुके हैं। ऐसे में वापस 23,100-23,200 जाने का रिस्क होगा। युद्ध के बाद वाले लो की रैली का भी हम 55% रिट्रेस हो चुके हैं और उसका 61.8% रिट्रेसमेंट लेवल आएगा करीब 23,264 पर। यानी कि कुल मिला कर 23,100-23,300 पत्थर की लकीर है। अगर 23,100-23,300 टूटा तो 22,300 भी रिस्क पर होगा।

बाजार: आज का दांव

आज बैंक और IT दोनों के गिरने के संकेत हैं। निफ्टी IT पर हमने एकदम सही समय पर Bullish नजरिया खत्म किया। इस महीने निफ्टी IT 7% से ज्यादा गिर चुका है और वापस निफ्टी IT में अब पैसा बेच कर बन रहा है। बैंक और NBFCs में आज कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड की दोहरी मार है। HDFC बैंक अब इस साल 30% गिर चुका है। अब तो HDFC बैंक के पक्के निवेशक भी उम्मीद छोड़ रहे हैं। दिक्कत यह है कि ICICI बैंक और SBI भी साथ नहीं दे रहे हैं। आज मेटल की रैली भी बुरी तरह से फेल हो सकती है। गोल्ड फाइनेंस कंपनियों में फिर बड़ी गिरावट का रिस्क रहेगा। हिंद जिंक पर कल हमने इंट्राडे में मुनाफावसूली का नजरिया रखा था। आज बाकी मेटल शेयरों में भी तेज गिरावट आ सकती है। छुपने की जगह इस समय सिर्फ फार्मा और हेल्थकेयर में है। इसके अलावा आज NSE के IPO पर नजर रहेगी।

NSE IPO डिटेल्स

NSE IPO 17-21 सितंबर के बीच खुला रहेगा। इसका प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपए और इश्यू साइज 22,569 करोड़ (पूरी तरह OFS) तय किया गया है। कंपनी का मार्केट कैप 4.42 लाख करोड़ रुपए है। NSE के वैल्युएशन की बात करें तो 1,785 रुपए प्रति शेयर पर वैल्युएशन करीब 42.9x Trailing FY26 P/E होता है। SE का मौजूदा P/E करीब 54x FY26 EPS पर है। NSE के फाइनेंशियल पर नजर डालें तो FY26 में इसकी आय 16,601 करोड़ रुपए, EBITDA मार्जिन 76% और मुनाफा 10,302 करोड़ रुपए रहा।

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NSE में क्या करें?

NSE कैपिटल मार्केट सेक्टर का सबसे बड़ा शेयर है। ध्यान रहे इसमें लगभग 6 महीने तक फ्लोटिंग स्टॉक काफी सीमित रहेगा। प्री-IPO निवेशकों के लिए 6 महीने का Lock In है और 4.5% इश्यू में से करीब 1.5% एंकर निवेशकों का होगा। एंकर निवेशक भी 1 महीने तक नहीं बेच पाएंगे। NSE का असली टेस्ट लिस्टिंग के 6 महीने बाद होगा। NSE का सबसे बड़ा रिस्क है F&O वॉल्यूम का तेजी से नीचे आना और यही कारण है कि BSE अपने हाई से काफी गिर चुका है। NSE भी Unlisted मार्केट में 2200 रुपए तक गया था और वहां से गिरा है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Shankesh Jewellers Q1 Results: लिस्टिंग के बाद पहला रिजल्ट! ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा डबल, रेवेन्यू 55% बढ़ा

Shankesh Jewellers Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी Shankesh Jewellers ने जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹43 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹22 करोड़ था। यानी मुनाफा करीब दोगुना हो गया। ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 55.1% बढ़कर ₹424 करोड़ हो गया। पिछले

EBITDA भी मजबूत रहा। यह 92.4% बढ़कर ₹61 करोड़ हो गया। पिछले साल EBITDA ₹32 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.6% से बढ़कर 14.4% हो गया।

यह लिस्टिंग के बाद कंपनी का पहला तिमाही नतीजा है। Shankesh Jewellers के शेयर 25 अगस्त 2026 को NSE और BSE पर लिस्ट हुए थे।

बोर्ड ने नतीजों को मंजूरी दी

Shankesh Jewellers के बोर्ड की 10 सितंबर को बैठक हुई। इसमें जून तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन नतीजों को मंजूरी दी गई। ऑडिटर V J Shah & Co की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट को भी मंजूरी मिली।

कंपनी की कुल आय ₹423.61 करोड़ रही। पिछले साल यह ₹273.18 करोड़ थी। कुल खर्च बढ़कर ₹365.65 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹244.33 करोड़ था।

कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स ₹57.96 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹28.85 करोड़ था। टैक्स खर्च भी बढ़कर ₹14.73 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹7.25 करोड़ था। कंपनी की बेसिक और डाइल्यूटेड EPS ₹3.68 रही। पिछले साल यह ₹1.84 थी।

IPO से जुटाए ₹274 करोड़

Shankesh Jewellers का IPO जून तिमाही खत्म होने के बाद आया था। इसमें 2.95 करोड़ नए शेयर जारी किए गए। इनका फेस वैल्यू ₹5 था। इश्यू प्राइस ₹93 प्रति शेयर था।

फ्रेश इश्यू से कंपनी ने ₹274.18 करोड़ जुटाए। इसके अलावा प्रमोटर शेयरधारकों ने 1 करोड़ शेयर OFS में बेचे। इससे ₹93 करोड़ जुटाए गए।

शेयर का हाल

Shankesh Jewellers का शेयर 10 सितंबर को NSE पर 0.53% की तेजी के साथ ₹98.45 पर बंद हुआ। यह फिलहाल अपने लिस्टिंग प्राइस से 3.83% ऊपर है। कंपनी का मार्केट कैप 1.45 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Manoj Jewellers Rights Issue: 29 सितंबर को बंद होगा राइट्स इश्यू, ₹17.97 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

चेन्नई की ज्वैलरी कंपनी Manoj Jewellers Limited ने राइट्स इश्यू लॉन्च किया है। यह इश्यू 31 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। अब 29 सितंबर 2026 को बंद होगा। कंपनी इस इश्यू से अधिकतम ₹17.97 करोड़ जुटाना चाहती है।

कंपनी 20 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर 89,85,628 तक पूरी तरह पेड-अप इक्विटी शेयर जारी कर रही है। राइट्स इक्विटी शेयरों को 5 अक्टूबर 2026 को BSE पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है।

1:1 का है राइट्स इश्यू

यह राइट्स इश्यू उन शेयरधारकों के लिए है, जिनके पास 21 अगस्त 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के पूरी तरह पेड-अप शेयर थे। उन्हें हर 1 शेयर के बदले 1 राइट्स इक्विटी शेयर मिलेगा।

शेयर के लिए आवेदन करते समय ही ₹20 प्रति राइट्स इक्विटी शेयर की पूरी रकम देनी होगी। इस इश्यू की रजिस्ट्रार Skyline Financial Services Private Limited है।

₹13.53 करोड़ वर्किंग कैपिटल में लगाएगी कंपनी

Manoj Jewellers इश्यू से मिलने वाली नेट रकम का बड़ा हिस्सा वर्किंग कैपिटल की जरूरतों पर खर्च करेगी। इसके लिए ₹13.53 करोड़ रखे गए हैं।

इसके अलावा ₹4 करोड़ का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट कामों के लिए किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इससे वर्किंग कैपिटल की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, मौजूदा कारोबार की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

प्रमोटर ने क्या कहा?

कंपनी के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार ने कहा कि राइट्स इश्यू से वर्किंग कैपिटल की स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे होलसेल और रिटेल कारोबार की बढ़ती जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।

उन्होंने कहा कि फंड का इस्तेमाल इन्वेंट्री को बेहतर तरीके से मैनेज करने और रोजमर्रा के कारोबार की जरूरतें पूरी करने में किया जाएगा। कंपनी ग्राहकों की बदलती पसंद को देखते हुए नए प्रोडक्ट लाने पर भी काम कर रही है। इसमें हल्का ‘Thanga Kovil Collection’ भी शामिल है।

FY26 में रेवेन्यू 91.5% बढ़ा

Manoj Jewellers Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024-25 के 5,961.81 लाख रुपये से बढ़कर 2025-26 में 11,416.12 लाख रुपये हो गया। यानी इसमें करीब 91.5% की बढ़ोतरी हुई।

इसी दौरान कंपनी का टैक्स के बाद नेट प्रॉफिट 476.49 लाख रुपये से बढ़कर 902.36 लाख रुपये हो गया। यानी यह करीब दोगुना हो गया।

EPS और नेट एसेट वैल्यू भी बढ़ी

Manoj Jewellers की प्रति शेयर कमाई यानी EPS 7.96 रुपये से बढ़कर 10.40 रुपये हो गई। वहीं, प्रति शेयर नेट एसेट वैल्यू 24.28 रुपये से बढ़कर 43.25 रुपये हो गई।

कंपनी सोने, हीरे और चांदी के गहनों के होलसेल और रिटेल कारोबार में है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GE Vernova Share Price : 9% तेजी के साथ वायदा का टॉप गेनर बना स्टॉक, ब्रोकरेज से जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

GE Vernova Share Price : मंगलवार के कारोबारी सेशन में GE Vernova T&D India के शेयरों में लगभग 9 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। ब्रोकरेज फर्मों की ओर से कंपनी के लिए’बुलिश’राय आने के बाद इस शेयर को पंख लग गए हैं। कंपनी के एक बड़ा HVDC प्रोजेक्ट मिल सकता है। इस प्रोजेक्ट की कीमत 13,000 करोड़ रुपये हो सकती है और इससे आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। पावर ट्रांसमिशन उपकरण बनाने वाली इस कंपनी का शेयर फिलहाल 382.30 रुपए यानी 8.75 फीसदी की तेजी के साथ 4748 रुपए के पास दिख रहा है। जिससे आज यह शेयर मिडकैप इंडेक्स में सबसे ज्यादा बढ़त वाला शेयर बन गया है। सोमवार को यह शेयर 1.4 प्रतिशत बढ़कर 4,367.2 रुपये पर बंद हुआ था।

इस हालिया उछाल के साथ 2026 में अब तक इस स्टॉक में लगभग 48 प्रतिशत की बढ़त हुई है। यह निफ्टी 50 के मुकाबले बहुत बेहतर प्रदर्शन है। निफ्टी में इसी दौरान लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट आई है। सोमवार को बाजार बंद होने के समय कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये था।

GE Vernova में शानदार तेजी

पावर ग्रिड से कंपनी को बड़ा ऑर्डर संभव है। कंपनी 6,000 MW प्रोजेक्ट के लिए L-1 बिडर घोषित की गई है। कंपनी ने सोमवार को बताया कि वह पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के 6,000 MW, 800 kV हाई-वोल्टेज डायरेक्ट-करंट ट्रांसमिशन सिस्टम लगाने के प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी या L1 बिडर कंपनी बनकर उभरी है। इस प्रोजेक्ट में राजस्थान के बाड़मेर II और महाराष्ट्र के साउथ कलंब में लाइन-कम्यूटेटेड कनवर्टर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 3,000 MW के दो टर्मिनल स्टेशन बनाने शामिल हैं। GE वर्नोवा T&D इंडिया इस प्रोजेक्ट का डिज़ाइन, सप्लाई और काम पूरा करेगी। इस काम को पूरा करने में कई साल लग सकते हैं।

इस ट्रांसमिशन कॉरिडोर का मकसद राजस्थान से रिन्यूएबल एनर्जी को आगे पहुंचाना है और यह भारत के हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का हिस्सा है। हालांकि GE Vernova ने एक्सचेंज फाइलिंग में कॉन्ट्रैक्ट की कीमत का खुलासा नहीं किया, लेकिन Nomura का अनुमान है कि यह ऑर्डर लगभग 13,000 करोड़ रुपये का है।

GE Vernova पर नोमुरा

GE Vernova पर नोमुरा ने BUY रेटिंग के साथ शेयर का लक्ष्य 6,000 रुपए प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि 13,000 करोड़ रुपए के HVDC ऑर्डर से लॉन्ग टर्म ग्रोथ आउटलुक बेहतर होगा। FY26-29 में 31% सालाना मुनाफा ग्रोथ संभव है। ब्रोकरेज ने FY28/29 के लिए आय अनुमान 4%/9% बढ़ाया है। शेयर में FY29 EPS 111 रुपए के 39 गुना कारोबार हो रहा है।

GE Vernova पर CITI

CITI ने स्टॉक पर BUY रेटिंग के साथ शेयर का लक्ष्य 5,400 रुपए प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि FY29 से इस प्रोजेक्ट का आय में योगदान दिखने लगेगा। FY29 के EBITDA/EPS अनुमान में 25% अपसाइड संभव है।

 

Nifty Trend : निफ्टी पिछले एक महीने में करीब 1000 अंक नीचे गिरा, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

Vedanta Resource ने दी सफाई, लाल हो गए वेदांता और वेदांता एलुमिनियम के शेयर

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Urban Company Share: BofA ने रेटिंग घटाई, शेयर में तीन दिन की तेजी पर भी ब्रेक लगा

Urban Company Share: टेक्नोलॉजी से जुड़े होम-सर्विस प्लेटफॉर्म Urban Company के शेयर में बुधवार को गिरावट आई। इसके साथ लगातार तीन दिन से चल रही तेजी भी थम गई। इसकी वजह है ग्लोबल ब्रोकरेज Bank of America यानी BofA की नई रिपोर्ट।

BofA ने Urban Company की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरपरफॉर्म’ कर दी है। ब्रोकरेज को शेयर की मौजूदा कीमत ज्यादा लग रही है। कंपनी को घाटा भी हो रहा है। ऊपर से Instant Help कारोबार में मुकाबला बढ़ रहा है।

शेयर 0.69% गिरा

बुधवार को NSE पर Urban Company का शेयर 0.69% गिरकर ₹168.12 पर बंद हुआ। हालांकि, इससे पहले तीन कारोबारी दिनों में शेयर करीब 16% चढ़ चुका था।

जून तिमाही के नतीजों के बाद शेयर करीब 30% ऊपर जा चुका था। इसी तेजी के बाद BofA ने अपना रुख बदला है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट ₹155 रखा है। यानी मौजूदा भाव से करीब 8% नीचे जाने का अनुमान है।

Instant Help कारोबार चिंता बढ़ा रहा

BofA की सबसे बड़ी चिंता Urban Company का Instant Help कारोबार है। कंपनी इस सेगमेंट में तेजी से पैसा लगा रही है। लेकिन अभी यहां घाटा काफी बढ़ गया है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस कारोबार में मुकाबला और बढ़ेगा। इससे कंपनी की कमाई पर दबाव आ सकता है। Urban Company को Snabbit और Pronto जैसी कंपनियों से टक्कर मिल रही है। दोनों ने हाल में पैसा भी जुटाया है। इसका मतलब है कि मुकाबला आगे और तेज हो सकता है।

InstaHelp का घाटा 13 गुना बढ़ा

InstaHelp का EBITDA घाटा तेजी से बढ़ा है। FY26 की पहली तिमाही में यह करीब ₹10 करोड़ था। FY27 की पहली तिमाही में घाटा बढ़कर करीब ₹130 करोड़ हो गया। यानी कंपनी इस कारोबार को तेजी से बढ़ाने के लिए पैसा लगा रही है। लेकिन फिलहाल इसका असर मुनाफे पर नहीं दिख रहा है।

BofA ने इसी वजह से Urban Company के कमाई अनुमान भी घटाए हैं। FY28 के लिए अब उसे प्रति शेयर ₹0.73 का घाटा होने का अनुमान है। पहले यह अनुमान ₹0.59 के घाटे का था। FY29 के लिए EPS अनुमान भी ₹2.27 से घटाकर ₹1.41 कर दिया गया है।

UBS और Emkay की राय अलग

Urban Company पर सभी ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। इससे पहले UBS ने शेयर पर कवरेज शुरू की थी। उसने इसे ‘Buy’ रेटिंग दी थी। UBS का मानना है कि भारत का ऑनलाइन होम सर्विस बाजार तेजी से बढ़ सकता है। UBS ने इस बदलाव को भारत के क्विक कॉमर्स में आए ‘Blinkit मोमेंट’ जैसा बताया था।

इसके बाद Emkay ने भी शेयर पर कवरेज शुरू की। उसने ‘Buy’ रेटिंग दी और ₹190 का टारगेट दिया। Emkay को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के बीच भारत का कंज्यूमर सर्विस मार्केट करीब 19.8% CAGR से बढ़ सकता है।

Vedanta Aluminium share Price: मोतीलाल ओसवाल ने दी खरीदने की सलाह, शेयर 3 फीसदी उछला

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NHC Foods का रेवेन्यू 73% बढ़कर ₹601 करोड़ पहुंचा, एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

एग्री कमोडिटी सेक्टर की कंपनी NHC Foods Ltd ने पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 73% बढ़कर ₹601 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹348 करोड़ था। कंपनी का बिना ऑडिट वाला कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹12 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹21.95 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹16.42 करोड़ था। यानी इसमें 34% की बढ़ोतरी हुई। बेसिक EPS ₹0.20 प्रति शेयर रहा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यम शिरीषचंद्र जोशी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी के मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स को दिखाते हैं। उनके मुताबिक ऑपरेशनल दक्षता और क्वालिटी पर फोकस का असर सीधे वित्तीय प्रदर्शन में दिखा है। उन्होंने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है।

FCCB कन्वर्जन से बढ़ा कैपिटल बेस

कंपनी ने Global Focus Fund को 10.41 करोड़ पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 11 लाख डॉलर के FCCB के आंशिक कन्वर्जन के बाद हुआ। इसके बाद कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़कर ₹76.19 करोड़ हो गई।

एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

कंपनी के बोर्ड ने AgriConnect Solutions Pvt Ltd में प्रस्तावित निवेश और अधिग्रहण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट को मंजूरी दी है। यह कंपनी एग्री कमोडिटीज की सप्लाई और ट्रेडिंग के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि इससे इस सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

कंपनी का बिजनेस क्या है

NHC Foods Ltd एग्री कमोडिटी एक्सपोर्ट और फूड ट्रेडिंग सेक्टर की कंपनी है। यह मसाले, तिलहन, अनाज, दालें, चीनी, चाय, कॉफी और दूसरी कृषि जिंसों की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी B2B मॉडल के जरिए कुछ देशों में फूड प्रोडक्ट्स का निर्यात करती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।