Urban Company Share Price : कमजोर नतीजों के बाद आज 8.75% टूटा शेयर, जानिए क्या है ब्रोकरेज की राय

Urban Company Share Price : दूसरी तिमाही में अर्बन कंपनी के नतीजे कमजोर रहे हैं। नतीजों के बाद शेयर में बड़ा एक्सिडेंट दिखा है। सोमवार को इंट्राडे में अर्बन कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा सितंबर तिमाही के कंसोलिडेटेड नेट लॉस में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट जारी करने के बाद यह शेयर दबाव में आ गया है। फिलहाल NSE पर अर्बन कंपनी के शेयर 13.82 रुपए यानी 8.74 फीसदी की गिरावट के साथ 144.30 रुपए पर दिख रहे हैं।

इस होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 182.48 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह नुकसान 59.33 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कामकाजी आय सालाना आधार पर 41.4% बढ़कर 537.29 करोड़ रुपये रही है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 380.03 करोड़ रुपये थी। डिलीवर किए गए ऑर्डर्स की संख्या 15.1 मिलियन तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 103% की बढ़त दिखाता है। जबकि नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) 39% बढ़कर 1,432 करोड़ रुपये हो गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अर्बन कंपनी पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है और इसके टारगेट प्राइस को लगभग 5.3% बढ़ाकर 190 रुपये से 200 रुपये कर दिया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अर्बन कंपनी (UC) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें इंडिया कंज्यूमर सर्विसेज (इंस्टाहेल्प को छोड़कर) (ICS) का NTV, एक ऊंचे बेस के बावजूद, सालाना आधार पर 26.3% बढ़ा है, जबकि इंटरनेशनल NTV में सालाना आधार पर 66.9% की ग्रोथ हुई है। एमके ने आगे कहा कि UC के हर सेगमेंट में विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका लोकल नेटवर्क मजबूत है, कोर बिजनेस में इसका एकाधिकार (मोनोपोली) है और अन्य इंटरनेट कंपनियों की तुलना में इसका मार्जिन भी अधिक है।

जमकर कैश होने के बावजूद कंपनी क्यों जुटा रही है फंड?

स्नैबिट अब कंपनी का बड़ा कंपिटीटर बन रहा है। स्नैबिट भी अब तकरीबन अर्बन कंपनी जैसे ही आंकड़े डिलिवर कर रहा है। इसका मतलब है कि इस इंडस्ट्री में बड़ा कंपिटीशन होगा। इससे निपटने के लिए बोर्ड से इक्विटी के जरिए 2500 करोड़ रुपए जुटाने को मंजूरी दी है। इस बीच अर्बन कंपनी के मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि Q3FY28 में Adj. EBITDA के ब्रेकइवन की उम्मीद है। FY31 में Adj. EBITDA 1,000 करोड़ रुपए के पार जाना संभव है। बोर्ड से नई कैटेगरी रेसिडेंशियल एयर कंडिशनर्स को मंजूरी दी है।

कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर बात करते हुए एमके (Emkay) ने कहा कि 25 अरब रुपये तक की यह फंड जुटाने की योजना कोर और नेटिव (Native) ग्रोत, इंस्टाहेल्प (InstaHelp) के ग्रोथ, और चुनिंदा अधिग्रहणों (acquisitions) में मदद करेगी।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि फंड जुटाने से निवेश क्षमता मजबूत होती है, हालांकि पूंजी का इस्तेमाल और इक्विटी डाइल्यूशन (dilution) ऐसे पहलू हैं जिनका वैल्युएशन के समय ध्यान रखना होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ब्रेक-ईवन के अनुमान और वित्त वर्ष 2031 के लिए 10 अरब रुपये के लक्ष्य को बरकरार रखा है।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Bank Nifty Trend : 19 अक्टूबर को बैंक निफ्टी इंडेक्स में 0.5% की गिरावट आई। एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों के कारण बैंक निफ्टी पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा है। जुलाई-सितंबर तिमाही के मुनाफे के अनुमानों पर खरे न उतरने के बाद प्राइवेट बैंकों में 1.7% की गिरावट आई है। इसमें HDFC बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में 2% और 4.1% की गिरावट आई है।

HDFC बैंक पर ट्रेजरी आय में गिरावट और बैड लोन के लिए किए गए ज्यादा प्रावधान का दबाव दिखा है। जबकि एक्सिस बैंक के ऑपरेटिंग एक्सपेंस अधिक रहे हैं वहीं, अन्य आय कम रही है। दोनों ही बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में गिरावट आई है।

दूसरी ओर पब्लिक सेक्टर बैंकों में आज 2.2% की तेजी आई है। इसमें पंजाब नेशनल बैंक सबसे आगे रहा है। आज इसके शेयरों में 5.4% का उछाल आया है। सरकारी बैंको के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

अरिहंत कैपिटल मार्केट्स में इंस्टीट्यूशनल बिजनेस हेड अनीता गांधी ने कहा कि तिमाही नतीजों के बाद निवेशक साफ तौर पर PSU बैंकों के शेयरों को प्राथमिकता देते दिख रहे हैं। मजबूत FCNR डिपॉजिट का असर निजी बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर पड़ रहा है।

19 अक्टूबर को सुबह 11 बजे, बैंक निफ्टी 0.5% गिरकर 55,571.3 पर ट्रेड कर रहा था। दूसरी ओर, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.5% बढ़कर सबसे ज्यादा बढ़त वाला (टॉप गेनर) इंडेक्स बना हुआ था।

पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में 3-6% की तेजी आई है। PNB के शेयरों में 6% की बढ़त दिख रही है। यह निफ्टी 200 इंडेक्स का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक चंद्र ने शुक्रवार को नतीजों के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिसंबर तिमाही में बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में 6-7 बेसिस पॉइंट्स का सुधार होने की उम्मीद है। सितंबर तिमाही में PNB का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.74% रहा था, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 10 बेसिस पॉइंट्स अधिक था।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बैंक निफ्टी में गुरुवार के 56,065 के हाई के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउ देखने को मिलता है तो इसकी तेजी 56,500 और 56,900 के स्तर तक जा सकती है। ये लेवल 58,706 से 53,785 तक की पूरी गिरावट का 50% और 61.8% रिट्रेसमेंट हैं। हालांकि, अगर यह इस लेवल के ऊपर टिक नहीं पाता है, तो इंडेक्स 54,500–56,000 की रेंज में कंसोलिडेट हो सकता है।

बजाज ब्रोकिंग के पाबित्रो मुखर्जी का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए 54,000-54,500 के स्तर पर एक अहम शॉर्ट-टर्म सपोर्ट है। यह लेवल हाल के निचले स्तर और पिछली बढ़ के अहम रिट्रेसमेंट का संगम है। वीकली चार्ट पर बैंक निफ्टी अपने ‘लोअर हाई’ और ‘लोअर लो’ स्ट्रक्चर को नकार रहा है और पिछले वीक के आई के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जिससे इसमें रिकवरी का रुझान बरकरार है। लगातार 56,000–56,065 के अहम रेजिस्टेंस जोन के ऊपर बने रहने से तेजी का रुख और मजबूत होगा जिससे आगे इसके और ऊपर जाने के रास्ते खुलेंगे।

प्रभुदास लीलाधर की वैशाली पारेख ने कहा कि निवेशकों का भरोसा कायम रखने और आने वाले दिनों में और तेजी के लिए, 56900 के स्तर पर स्थित 200-पीरियड MA (मूविंग एवरेज) के ऊपर एक निर्णायक बढ़त जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, 54000 का जोन एक अहम सपोर्ट का काम करेगा। कुल मिलाकर बाजार का रुख अच्छा बनाए रखने के लिए इस स्तर का कायम रहना जरूरी है।

 

HDFC Bank Share price : Q2 नतीजों के बाद निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हुआ शेयर, जानिए ब्रोकरेज की राय

 

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HDFC Bank Share price : Q2 नतीजों के बाद निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हुआ शेयर, जानिए ब्रोकरेज की राय

HDFC Bank share price : सोमवार को HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई है। यह शेयर आज इंट्राडे में 2 प्रतिशत गिरकर 714 रुपये पर आ गया। Q2 नतीजों के बाद यह शेयर निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल हो गया है। मार्जिन के दबाव और कमाई में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद, ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर अपनी ‘बुलिश’ रेटिंग बरकरार रखी है।

सोमवार, 19 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक के शेयरों में 2 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंक द्वारा वीकेंड में वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए जाने के बाद, यह आज निफ्टी के सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल हो गया है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव और अर्निंग में बढ़त को लेकर बनी चिंताओं का असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज फर्मों ने अभी भी इस शेयर पर बुलिश रुख बनाए रखा है।

आज शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक का शेयर गिरकर 714 रुपये पर आ गया। इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें 27.9 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। इसी दौरान निफ्टी में 11.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 11.02 लाख करोड़ रुपये है।

यह गिरावट बैंकिंग शेयरों में आई बड़ी कमजोरी के बीच हुई। इस गिरावट में बैंक निफ्टी 0.5 प्रतिशत फिसल गया है। सुबह के सेशन मेंसेंसेक्स 100.65 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 74,628.62 पर आ गया, जबकि निफ्टी 26.70 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,119.45 पर पहुंच गया।

अनुमान के मुताबिक रहे HDFC बैंक के Q2 नतीजे

HDFC बैंक ने बताया है कि सितंबर तिमाही में उसके स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत की बढ़त हुई है और यह 19,510 करोड़ रुपये पर रही है। यह आंकड़ा काफी हद तक बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9.7 प्रतिशत बढ़कर 34,619 करोड़ रुपये पर रही है।

बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात पिछली तिमाही के 1.17 प्रतिशत से सुधरकर 1.11 प्रतिशत हो गया, जबकि ग्रॉस एडवांसेज में सालाना आधार पर 16.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। हालांकि, प्रोविजन्स पिछली तिमाही के मुकाबले 18.7 प्रतिशत बढ़कर 3,574 करोड़ रुपये पर आ गए।

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चिंताओं के बावजूद ब्रोकरेज फर्मों का रुख पॉजिटिव

बैंक के नतीजे आने के बाद कई ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर अपनी बुलिश राय बरकरार रखी है, हालांकि जेपी मॉर्गन और सिटी ने अपने टारगेट प्राइस घटा दिए हैं। जेपी मॉर्गन ने अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग तो बनाए रखी, लेकिन मार्जिन पर दबाव और बैलेंस शीट का लचीलापन कम होने का हवाला देते हुए अपना टारगेट प्राइस 990 रुपये से घटाकर 970 रुपये कर दिया है। वहीं, सिटी ने अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन मार्जिन में कमी और ग्रोथ की दिक्कतों को देखते हुए अपना टारगेट प्राइस 970 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया।

बर्नस्टीन ने 1,150 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। इसका मतलब है कि शुक्रवार के 728.85 रुपये के क्लोजिंग भाव से इसमें लगभग 58 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। हालांकि, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि अर्निंग में सुस्त ग्रोथ का सिलसिला जारी है और एसेट्स पर रिटर्न (ROA) घटकर 1.8 प्रतिशत रह गया है।

जेफ़रीज़, नोमुरा और गोल्डमैन सैक्स ने भी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है, और स्टॉक के लिए 880 रुपये, 940 रुपये और 861 रुपये के टारगेट प्राइस तय किए हैं। ब्रोकरेज ने अपने विश्लेषण में एसेट क्वालिटी के मजबूत बने रहने और ऑपरेटिंग परफॉरमेंस में सुधार को हाइलाइट किया गया है, साथ ही उसने निकट अवधि में बैंक के मार्जिन और लिक्विडिटी पर दबाव की बात भी स्वीकार की है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

GEC-III स्कीम को मंजूरी से पावर इंफ्रा स्पेस के शेयरों पर बाजार का फोकस, जानिए इन पर क्या है ब्रोकरेज की राय

पावर इंफ्रा स्पेस में आज काफी एक्शन देखने को मिला है। कल कैबिनेट ने PM-DHARA स्कीम को मंजूरी दी है, जिसके तहत ₹1.86 लाख करोड़ का बड़ा आवंटन किया गया है। वहीं, JM FINANCIAL की रिपोर्ट से भी इंडस्ट्रियल शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। आज के सत्र में पावर ग्रिड और केबल शेयर फोकस में हैं। PM-DHARA स्कीम के तहत राज्यों में इंटर ट्रांसमिशन सिस्टम मजबूत करने पर जोर होगा। इसके तहत 135 GW रिन्यूएबल ट्रांसमिशन और 50 GWh BESS क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। FY33 तक PM-DHARA स्कीम लागू करने का लक्ष्य है। इंटर ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए 1.36 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 50 GWh BESS के लिए `50,000 करोड़ खर्च होंगे।

इंडस्ट्रियल शेयरों पर JM की रिपोर्ट

इंडस्ट्रियल शेयरों पर JM की रिपोर्ट में कहा गया है कि CG पावर ने सितंबर में मोटर्स की कीमतें 5% बढ़ाईं हैं। अगस्त 2025 से CG पावर में कुल प्राइस हाइक 18–30% रहा है। ABB इंडिया ने मोटर्स की कीमतें 20% तक बढ़ाईं हैं। अल्टरनेटर में इससे ज्यादा प्राइस हाइक हुआ है। कमिंस ने जुलाई में डीजल जेनसेट की कीमतें बढ़ाईं हैं। वेस्ट एशिया संकट के बाद कमिंस में कुल 10–12% प्राइस हाइक देखने को मिला है। FY27 से ग्रॉस मार्जिन सामान्य होने की उम्मीद है।

इंडस्ट्रियल शेयरों पर नोमुरा की राय

जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का मानना ​​है कि सरकार के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) से GE वर्नोवा T&D इंडिया, हिताची एनर्जी इंडिया और CG पावर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ब्रोकरेज का कहना है कि इसमें काफी ज्यादा खर्च और क्षमता बढ़ाने के लक्ष्यों से ट्रांसमिशन कैपेक्स साइकल को बढ़ावा मिल सकता है। ब्रोकरेज ने इन तीनों स्टॉक्स पर ‘बाय’ रेटिंग दी है।

नोमुरा ने 30 सितंबर की एक रिपोर्ट में कहा है कि GEC-III के तहत बहुत ज्यादा खर्च,क्षमता बढ़ाने के लक्ष्य,CFA और BESS कंपोनेंट को शामिल करने से ट्रांसमिशन इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों और BESS सॉल्यूशन देने वाली कंपनियों के लिए डिमांड बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।

बताते चलें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को कुल 1.9 लाख करोड़ रुपये के खर्च वाली GEC-III योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मकसद 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी को ट्रांसमिट करना और 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाना है।

इस पर होने वाले कुल खर्च में से 1.4 लाख करोड़ रुपये राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) के लिए दिए जाएंगे,जबकि 0.5 लाख करोड़ रुपये BESS के लिए इस्तेमाल होंगे। इस स्कीम को 541 अरब रुपये की केंद्रीय आर्थिक मदद मिलेगी, जो कुल खर्च का 29% है। इसे FY33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नोमुरा का कहना है कि GEC-III, खर्च के मामले में पिछले चरणों की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है और उम्मीद है कि ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों को जोड़ने का काम काफी ज्यादा होगा।

एलारा सिक्योरिटीज की राय

एलारा सिक्योरिटीज के रेलवे एनालिस्ट हर्षित कपाड़िया का कहना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹1.86 लाख करोड़ की ‘पीएम डेवलपिंग हार्मनी एंड एक्सेलेरेटिंग रिन्यूएबल एनर्जी एक्सेस’ (DHARA) योजना को मंज़ूरी मिलने से ट्रांसमिशन उपकरण बनाने वाली कंपनियों, केबल बनाने वाली कंपनियों और इससे जुड़ी अन्य कंपनियों के लिए कई वर्षों तक विकास के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि इस स्कीम से ट्रांसमिशन सेक्टर की उन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को ज्यादा फायदा होगा जो बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए हाई-वोल्टेज प्रोडक्ट्स सप्लाई करते हैं। इसमें हिताची एनर्जी, सीमेंस एनर्जी, सीजी पावर, पॉलीकैब, केईआई इंडस्ट्रीज और अपार इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां शामिल हैं।

 

 

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Promoter Selling Stock: 6 महीने में 150% चढ़ा EMS कंपनी का स्टॉक, अब प्रमोटर्स बेच सकते हैं 6% हिस्सेदारी

Promoter Selling Stock: इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी EMS कंपनी Avalon Technologies में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। प्रमोटर ग्रुप के Bhaskar Srinivasan, BBS Family Trust और KBS Family Trust कंपनी में 6% तक हिस्सेदारी बेच सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस डील की वैल्यू करीब ₹861.9 करोड़ हो सकती है।

₹2,150 से ₹2,302 हो सकता है भाव

डील के लिए ₹2,150 से ₹2,302 प्रति शेयर का प्राइस बैंड बताया गया है। यह कंपनी के मौजूदा बाजार भाव से अधिकतम करीब 6.6% डिस्काउंट पर हो सकता है। डील में विक्रेताओं के लिए 180 दिन का लॉक-अप पीरियड भी रहेगा। यानी इस दौरान वे आगे शेयर नहीं बेच सकेंगे।

Nomura ने बढ़ाया टारगेट

इसी महीने ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Avalon Technologies पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,211.24 से बढ़ाकर ₹2,767.32 कर दिया है।

यह शुक्रवार के ₹2,196.60 के क्लोजिंग भाव से करीब 26% ज्यादा है। ये टारगेट शेयर को कवर करने वाले सभी ब्रोकरेज में सबसे ज्यादा है।

Zollner के साथ जॉइंट वेंचर

Nomura के मुताबिक Avalon का यूरोप की Zollner के साथ प्रस्तावितजॉइंट वेंचर कंपनी के लिए अहम हो सकता है। इससे यूरोप में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज के कारोबार में कंपनी की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही नए ग्लोबल ग्राहक जुड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज के मुताबिक इस साझेदारी से Avalon को यूरोप में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा। कंपनी हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज और टेस्ट एंड मेजरमेंट जैसे सेगमेंट में भी प्रवेश कर सकती है।

एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई

Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक Avalon Technologies को कवर करने वाले 19 एनालिस्ट्स में 9 ने Buy रेटिंग दी है। वहीं 4 एनालिस्ट्स ने Hold और 6 ने Sell रेटिंग दी है।

यानी शेयर को लेकर ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। कुछ एनालिस्ट्स कंपनी के विस्तार और जॉइंट वेंचर को लेकर पॉजिटिव हैं, जबकि कुछ शेयर पर अलग नजरिया रखते हैं।

Avalon के शेयरों का हाल

Avalon Technologies का शेयर मंगलवार को BSE पर 1.37% की तेजी के साथ ₹2,340 पर बंद हुआ। पिछले महीने में स्टॉक ने करीब 150% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। वहीं बीते 5 साल में यह 479% बढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 15.66 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank Share Price : 3% उछाल के साथ निफ्टी के टॉप गेनर्स में शामिल हुआ शेयर, जानिए स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

HDFC Bank Share Price : 15 सितंबर को शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक के शेयरों में 3 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली और यह Nifty पर सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल हो गया। बैंक ने रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को दो उम्मीदवारों के नाम सौंपकर अपने CEO के उत्तराधिकार की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया है। नोमुरा ने इस स्टॉक पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बनाए रखी है और कहा है कि इस कदम से किसी अंदरूनी व्यक्ति की नियुक्ति या फिर किसी भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार से लीडरशिप को लेकर बनी अनिश्चितता को दूर करने में मदद मिल सकती है।

शुक्रवार को हुई 2.08 प्रतिशत की बढ़त को आगे बढ़ाते हुए यह स्टॉक आज 2.99 प्रतिशत चढ़कर 729.40 रुपये पर पहुंच गया। सुबह करीब 9:30 बजे ब्रॉडर मार्केट में भी अच्छी तेजी देखने को मिल रही थी। सेंसेक्स 440 अंक या 0.59 प्रतिशत बढ़कर 75,222 पर और निफ्टी 50 120 अंक या 0.51 प्रतिशत बढ़कर 23,518 पर कारोबार कर रहा था।

HDFC बैंक ने 12 सितंबर को बताया कि उसके बोर्ड ने RBI को तीन साल के कार्यकाल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO के पद पर नियुक्ति के लिए प्राथमिकता के क्रम में दो उम्मीदवारों के नाम भेजे हैं। बैंक ने उनकी पहचान का खुलासा नहीं किया है।

इस कदम से मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन के अक्टूबर में रिटायर होने से पहले उत्तराधिकार चुनने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ी है। बैंकिंग नियमों के तहत,प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO की नियुक्ति के लिए RBI की मंजूरी जरूरी होती है।

माना जा रहा है कि HDFC बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और लंबे समय से सीनियर एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर रहे कैज़ाद भरूचा इस टॉप पद के लिए दावेदार हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक,बोर्ड की ओर से सुझाए गए दूसरे उम्मीदवार एक अनुभवी प्राइवेट-सेक्टर बैंकर हैं।

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स्टॉक पर नोमुरा की राय

नोमुरा ने HDFC बैंक के लिए अपनी ‘बाय’रेटिंग बनाए रखते हुए 950 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि शुक्रवार को बंद हुए 708.25 रुपये के भाव से इसमें करीब 34 प्रतिशत की बढ़त की गुंजाइश है। ब्रोकरेज का कहना है कि अंदर से ही किसी को नियुक्त करने से कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी और लीडरशिप का बदलाव आसानी से हो सकेगा,जिससे निकट भविष्य में राहत मिल सकती है। साथ ही, भरूचा का HDFC बैंक से पुराना नाता भी उनके पक्ष में काम करेगा।

नोमुरा का कहना है कि हालांकि,बाहर से किसी भरोसेमंद व्यक्ति की नियुक्ति मध्यम अवधि में ज्यादा अहम साबित हो सकती है,क्योंकि इससे एक व्यापक रणनीतिक बदलाव संभव हो सकेगा। HDFC बैंक के स्टॉक का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है,ऐसे में ब्रोकरेज का मानना ​​है कि अगर नई लीडरशिप ग्रोथ,डिपॉजिट जुटाने और मार्जिन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर पाती है तो बैंक की रेटिंग में सुधार की गुंजाइश है।

गौरतलब है कि HDFC बैंक के शेयरों में 2026 में अब तक 28.5% की गिरावट आई है,जो निफ्टी 50 के मुकाबले काफी खराब प्रदर्शन है। इस दौरान निफ्टी में 10.5% की गिरावट आई है। शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय बैंक का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 10.92 लाख करोड़ रुपये था।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Hero Motors IPO: 16 सितंबर को खुलेगा ₹1000 करोड़ का इश्यू, जानिए GMP, प्राइस बैंड समेत पूरी डिटेल

Hero Motors IPO: हीरो ग्रुप की Hero Motors Ltd अपना ₹1,000 करोड़ का IPO ला रही है। इश्यू 16 से 18 सितंबर तक खुलेगा। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹79-84 तय किया है। इस भाव पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹3,815 करोड़ बैठता है।

IPO में ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू है। वहीं ₹400 करोड़ का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) है। OFS में ₹395 करोड़ प्रमोटर O P Munjal Holdings और ₹5 करोड़ Hero Cycles को जाएंगे।

Hero Motors IPO का GMP

ग्रे मार्केट में भी हीरो मोटर्स के आईपीओ को तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इनवेस्टगेन के मुताबिक, इसका लेटेस्ट GMP ₹24 है। यह अपर प्राइस बैंड के हिसाब से 28.57% लिस्टिंग गेन का संकेत है। हालांकि, इसे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं मानना चाहिए क्योंकि ये लगातार बदलता रहता है।

Hero Motors की कारोबारी सेहतर

हीरो मोटर्स फ्रेश इश्यू से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज घटाने और क्षमता बढ़ाने में करेगी। करीब ₹190 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे। वहीं ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर प्लांट में नए उपकरण खरीदने पर खर्च होंगे।

FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹1,188.35 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट 25.5% बढ़कर ₹41.17 करोड़ पहुंच गया। अब कंपनी के सामने बड़ी चुनौती अपनी बढ़ी हुई क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना और इन निवेशों से बेहतर रिटर्न हासिल करना है।

हीरो मोटर्स क्या करती है?

हीरो मोटर्स, पंकज एम. मुंजाल से जुड़ी ऑटो कंपोनेंट और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह सीधे ग्राहकों को बाइक या स्कूटर नहीं बेचती। कंपनी पावरट्रेन सिस्टम, गियर और ई-बाइक ड्राइवट्रेन बनाती है। इसके ग्राहक BMW, Ducati जैसी कंपनियां और दुनिया की कई ई-बाइक कंपनियां हैं।

इसका कारोबार भारत के साथ अमेरिका, यूरोप और ASEAN देशों में भी है। कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर भी तेजी से बढ़ रहा है।

दूसरे ‘हीरो’ कंपनियों से कैसे अलग है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Hero Motors और Hero MotoCorp अलग कंपनियां हैं। Hero MotoCorp बाइक और स्कूटर बनाकर सीधे ग्राहकों को बेचती है। इसके Splendor और Xtreme जैसे ब्रांड हैं। दूसरी ओर, Hero Motors मुख्य रूप से B2B कंपनी है। यानी यह दूसरी ऑटो कंपनियों के लिए कंपोनेंट और टेक्नोलॉजी तैयार करती है।

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Hero Cycles साइकिल कारोबार में है। वहीं, Hero Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाती है। चारों कंपनियां मुंजाल परिवार की अलग-अलग कारोबारी शाखाओं से जुड़ी हैं। इसलिए Hero नाम एक जैसा होने के बावजूद इनके कारोबार और निवेश की कहानी अलग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चिप स्टॉक्स क्रैश होंगे? अल्टमैन और मस्क की बात से निवेशकों की चिंता बढ़ी

AI की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की बात ने टेक कंपनियों के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। इसका असर खासकर चिप कंपनियों और AI से जुड़े शेयरों पर दिख सकता है। हालांकि, बाजार के जानकारों को नहीं लगता कि यह दबाव बहुत लंबा चलेगा।

चिप, बिजली और कंप्यूटिंग पावर की मांग अभी भी काफी मजबूत है। कई जगह मांग सप्लाई से ज्यादा है। ऐसे में शेयरों में कमजोरी आती भी है तो वह थोड़े समय की हो सकती है।

AI कंपनियां क्यों मांग रही सावधानी?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Anthropic के CEO Dario Amodei ने शनिवार को AI डेवलपमेंट की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की अपील की। उन्होंने ज्यादा सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई। कंपनी स्वतंत्र थर्ड पार्टी से अपने AI मॉडल की जांच भी कराएगी। OpenAI के CEO सैम अल्टमैन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। xAI के एलन मस्क ने भी कहा कि Dario सही कह रहे हैं।

इस खबर के बाद निवेशकों की नजर अब AI कंपनियों के खर्च और कमाई पर है। सवाल है कि अगर नए AI मॉडल धीरे बनेंगे तो चिप कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा या नहीं।

टेक शेयर पहले से दबाव में

AI पर कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। निवेशकों को अब चिंता है कि क्या इतनी बड़ी रकम से उतनी कमाई होगी। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, जून के रिकॉर्ड स्तर से Nasdaq 100 करीब 4% नीचे आ चुका है। अमेरिकी चिप शेयरों का इंडेक्स करीब 14% गिरा है। एशियाई टेक शेयर भी करीब 8% नीचे हैं। यानी AI से जुड़े शेयरों पर दबाव पहले से बना हुआ है।

AI की रफ्तार धीमी हुई तो फायदा भी

कुछ निवेशक इसे बुरी खबर नहीं मान रहे। उनका कहना है कि AI मॉडल धीरे विकसित होंगे तो कंपनियों को पहले से बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर से कमाई करने का ज्यादा समय मिलेगा। Global X Management के Billy Leung के मुताबिक, AI की रफ्तार कम होने का मतलब यह नहीं है कि चिप और पावर पर खर्च रुक जाएगा। बल्कि कंपनियां पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं।

चिप कंपनियों को क्यों राहत मिल सकती है?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI का इस्तेमाल कम नहीं हो रहा है। कंप्यूटिंग पावर की जरूरत भी बनी हुई है। इसके अलावा AI की सुरक्षा के लिए साइबर सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग पर खर्च बढ़ सकता है। Saxo Markets की Charu Chanana के मुताबिक, मेमोरी, नेटवर्किंग, कूलिंग और पावर इक्विपमेंट कंपनियों को पहले से चल रहे प्रोजेक्ट से सहारा मिल सकता है।

इसलिए AI डेवलपमेंट की रफ्तार पर बहस जरूर बढ़ी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग खत्म होने वाली है। उल्टा, ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार AI के लिए नया खर्च भी शुरू हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।