इस शुगर कंपनी का शेयर बन सकता है रॉकेट, एक्सपर्ट ने दी खरीदने की सलाह

आप किसी ऐसे शेयर की तलाश में है, जो अगले एक-दो साल में जोरदार रिटर्न दे सकता है तो आप बलरामपुर चीनी मिल्स के बारे में सोच सकते हैं। एलारा सिक्योरिटीज के वाइस-प्रेसिडेंट (इंस्टीट्यूशनल इक्विटी) प्रशांत बियानी का मानना है कि यह शेयर अगले एक से दो साल में 30 फीसदी तक चढ़ सकता है।

Balrampur Chini Mills का शेयर 13 अक्टूबर को 12:15 बजे 0.56 फीसदी गिरकर 696.85 रुपये पर चल रहा था। हालांकि, इस साल शेयर का प्रदर्शन शानदार रहा है। इस दौरान यह करीब 59 फीसदी चढ़ा है। यह अपने 52 हफ्ते के लो से 79 फीसदी ऊपर है। बियानी का मानना है कि बलरामपुर चीनी मिल्स की ग्रोथ तीन से पांच साल में शानदार रह सकती है।

उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। कंपनी का नया पॉलीलेक्टिक एसिड (PLA) प्रोजेक्ट दिसंबर में शुरू हो रहा है। इसका फायदा कंपनी को मिलेगा। पूरे शुगर सेक्टर के लिए आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है, क्योंकि भारत में चीनी की सप्लाई कम रहने के आसार हैं। पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में जबर्दस्त तेजी दिखी है। रॉ शुगर की कीमत 51-55 रुपये के बीच चल रही है। यह एक साल पहले के मुकाबले 15-20 फीसदी ज्यादा है।

नए पेराई सीजन के बाद चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे इसकी कीमतों में नरमी आ सकती है। बियानी ने कहा, “फिलहाल चीनी की सप्लाई कम है। अगले दो सालों के दौरान भी उत्पादन अनुमान से कम रह सकता है, जिसकी वजह मौसम की प्रतिकूल स्थितियां हैं। अगर चीनी का आयात नहीं होता है तो इनवेंट्री को सामान्य लेवल तक लाने में समय लग सकता है।”

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने की कोशिश करेगी। सरकार गन्ने के स्टेट एडवाइस्ड प्राइस (SAP) को बढ़ा सकती है। लेकिन, रेम्यूनरेटिव शुगर प्राइसेज की वजह से इसका ज्यादा असर चीनी मिलों पर नहीं पड़ेगा। हालांकि, शुगर इंडस्ट्री तेजी की नई साइकिल की शुरुआत में है।

बलरामपुर चीनी मिल्स चीनी बनाने वाली देश की बड़ी कंपनियों में शामिल है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 14,832 करोड़ रुपये है। यह शुगर, इथेनॉल और को-जेनेरेटेड पावर का उत्पादन करती है। इस कंपनी में कई म्यूचुअल फंडों ने निवेश किया है। इसका मुकाबला ईआईडी पैरी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और बजाज हिंदुस्तान शुगर जैसी कंपनियों से है।

इस प्राइवेट बैंक के शेयर में आ सकती है तूफानी तेजी, एनालिस्ट ने बताया टॉप पिक

एलारा सिक्योरिटीज ने आईसीआआईसीआई बैंक को अपनी टॉप पिक बताया है। यह देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक है। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 1 अक्तूबर को 2 बजे 0.64 फीसदी गिरकर 1,313.30 रुपये पर चल रहा था। बैंक निफ्टी पर भी दबाव दिखा। यह 0.64 फीसदी नीचे था।

करेक्शन के बाद वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर

Elara Securities का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद ICICI Bank की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है। ब्रोकरेज फर्म के हेड ऑफ रिसर्च बिनो पतिपरामपिल ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में अभी कम रिस्क के साथ स्ट्रॉन्ग ग्रोथ की संभावना दिख रही है। उन्होंने कहा कि अगर अभी निवेश के लिए किसी सेक्टर का चुनाव करना हो तो बैंक सेक्टर को चुना जा सकता है।

प्राइवेट बैंकों के शेयरों में आ सकती है बड़ी तेजी

उन्होंने कहा, “आईसीआईसीआई बैंक टॉप चॉइस बना हुआ है।” अच्छी क्रेडिट ग्रोथ, क्रेडिट की स्ट्रॉन्ग डिमांड और बेहतर एसेट क्वालिटी के बावजूद बीते एक साल में प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन सरकारी बैंकों के मुकाबले कमजोर रहा है। बीते एक साल में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 4.72 फीसदी चढ़ा है, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.98 फीसदी चढ़ा है।

पीएसयू बैंकों के मुकाबले प्राइवेट बैंक शेयरों का प्रदर्शन कमजोर

मार्केट में रिकवरी शुरू होने पर प्राइवेट बैंकों के शेयरों में अच्छी तेजी दिख सकती है। आईसीआईसीआई बैंक सहित कई बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन बीते एक साल में कमजोर रहा है। इस दौरान आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 4.34 फीसदी गिरा है। एचडीएफसी बैंक का शेयर बीते एक साल में करीब 26 फीसदी टूटा है।

जून तिमाही में ICICI Bank का अच्छा प्रदर्शन 

जून तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक का प्रदर्शन अच्छा रहा। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट 14800 करोड़ रुपये रहा। यह एनालिस्ट्स की उम्मीद से ज्यादा था। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 12.7 फीसदी गिरकर 24300 करोड़ रुपये रही। घरेलू लोन की ग्रोथ 19 फीसदी से ज्यादा रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन भी बढ़कर 4.36 फीसदी रहा। बैड लोन के लिए बैंक की प्रोविजनिंग में काफी कमी देखने को मिली।

बाजार में 1 अक्टूबर को भी बड़ी गिरावट 

1 अक्तूबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। निफ्टी 1.71 फीसदी यानी 385 अंक गिरकर 22,232 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.58 फीसदी यानी 1137 अंक गिरकर 71,334 पर चल रहा था। बैंक शेयरों पर भी दबाव दिखा। भारतीय शेयर बाजार का सेंटिमेंट काफी कमजोर है। बाजार के प्रमुख सूचकांक अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ चुके हैं।

GEC-III स्कीम को मंजूरी से पावर इंफ्रा स्पेस के शेयरों पर बाजार का फोकस, जानिए इन पर क्या है ब्रोकरेज की राय

पावर इंफ्रा स्पेस में आज काफी एक्शन देखने को मिला है। कल कैबिनेट ने PM-DHARA स्कीम को मंजूरी दी है, जिसके तहत ₹1.86 लाख करोड़ का बड़ा आवंटन किया गया है। वहीं, JM FINANCIAL की रिपोर्ट से भी इंडस्ट्रियल शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। आज के सत्र में पावर ग्रिड और केबल शेयर फोकस में हैं। PM-DHARA स्कीम के तहत राज्यों में इंटर ट्रांसमिशन सिस्टम मजबूत करने पर जोर होगा। इसके तहत 135 GW रिन्यूएबल ट्रांसमिशन और 50 GWh BESS क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। FY33 तक PM-DHARA स्कीम लागू करने का लक्ष्य है। इंटर ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए 1.36 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 50 GWh BESS के लिए `50,000 करोड़ खर्च होंगे।

इंडस्ट्रियल शेयरों पर JM की रिपोर्ट

इंडस्ट्रियल शेयरों पर JM की रिपोर्ट में कहा गया है कि CG पावर ने सितंबर में मोटर्स की कीमतें 5% बढ़ाईं हैं। अगस्त 2025 से CG पावर में कुल प्राइस हाइक 18–30% रहा है। ABB इंडिया ने मोटर्स की कीमतें 20% तक बढ़ाईं हैं। अल्टरनेटर में इससे ज्यादा प्राइस हाइक हुआ है। कमिंस ने जुलाई में डीजल जेनसेट की कीमतें बढ़ाईं हैं। वेस्ट एशिया संकट के बाद कमिंस में कुल 10–12% प्राइस हाइक देखने को मिला है। FY27 से ग्रॉस मार्जिन सामान्य होने की उम्मीद है।

इंडस्ट्रियल शेयरों पर नोमुरा की राय

जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का मानना ​​है कि सरकार के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) से GE वर्नोवा T&D इंडिया, हिताची एनर्जी इंडिया और CG पावर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ब्रोकरेज का कहना है कि इसमें काफी ज्यादा खर्च और क्षमता बढ़ाने के लक्ष्यों से ट्रांसमिशन कैपेक्स साइकल को बढ़ावा मिल सकता है। ब्रोकरेज ने इन तीनों स्टॉक्स पर ‘बाय’ रेटिंग दी है।

नोमुरा ने 30 सितंबर की एक रिपोर्ट में कहा है कि GEC-III के तहत बहुत ज्यादा खर्च,क्षमता बढ़ाने के लक्ष्य,CFA और BESS कंपोनेंट को शामिल करने से ट्रांसमिशन इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों और BESS सॉल्यूशन देने वाली कंपनियों के लिए डिमांड बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।

बताते चलें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को कुल 1.9 लाख करोड़ रुपये के खर्च वाली GEC-III योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मकसद 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी को ट्रांसमिट करना और 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाना है।

इस पर होने वाले कुल खर्च में से 1.4 लाख करोड़ रुपये राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) के लिए दिए जाएंगे,जबकि 0.5 लाख करोड़ रुपये BESS के लिए इस्तेमाल होंगे। इस स्कीम को 541 अरब रुपये की केंद्रीय आर्थिक मदद मिलेगी, जो कुल खर्च का 29% है। इसे FY33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नोमुरा का कहना है कि GEC-III, खर्च के मामले में पिछले चरणों की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है और उम्मीद है कि ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों को जोड़ने का काम काफी ज्यादा होगा।

एलारा सिक्योरिटीज की राय

एलारा सिक्योरिटीज के रेलवे एनालिस्ट हर्षित कपाड़िया का कहना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹1.86 लाख करोड़ की ‘पीएम डेवलपिंग हार्मनी एंड एक्सेलेरेटिंग रिन्यूएबल एनर्जी एक्सेस’ (DHARA) योजना को मंज़ूरी मिलने से ट्रांसमिशन उपकरण बनाने वाली कंपनियों, केबल बनाने वाली कंपनियों और इससे जुड़ी अन्य कंपनियों के लिए कई वर्षों तक विकास के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि इस स्कीम से ट्रांसमिशन सेक्टर की उन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को ज्यादा फायदा होगा जो बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए हाई-वोल्टेज प्रोडक्ट्स सप्लाई करते हैं। इसमें हिताची एनर्जी, सीमेंस एनर्जी, सीजी पावर, पॉलीकैब, केईआई इंडस्ट्रीज और अपार इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां शामिल हैं।

 

 

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बारिश की कमी चीनी प्रोडक्शन पर डाल सकती है असर, लेकिन यह एक कारण सेक्टर पर आगे बनाए रखेगा फोकस

एलारा सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट-इंस्टीट्यूशनल इक्विटी, प्रशांत बियानी के अनुसार, अगर बारिश को मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो जून में देरी और कम बारिश भारत के शुगर सेक्टर पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि कमजोर मॉनसून और एल नीनो की स्थिति वाले वर्षों में से महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे कमजोर राज्य रहा है, क्योंकि दोनों क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए बारिश पर बहुत अधिक निर्भर हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश अपने नहर सिंचाई नेटवर्क के कारण तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है, हालांकि अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो इसे भी कुछ असर का सामना करना पड़ सकता है।

गन्ने को मॉनसून के खास महीनों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता की आवश्यकता होती है। “महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए, बारिश अच्छी होनी चाहिए।  इसलिए जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के सभी चार महीने महत्वपूर्ण होंगे।”

स्काईमेट वेदर सर्विसेज के अनुसार, पश्चिमी तट पर शुरुआती प्रगति के बाद 8 जून से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून रुका हुआ है, जिससे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश को लेकर चिंता बढ़ गई है। पूरे भारत में बारिश की कमी पहले से ही 32% है, मौसम एजेंसी को उम्मीद है कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो यह आने वाले हफ्ते में 40% तक बढ़ सकती है।

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और झारखंड उन राज्यों में से हैं जिन्हें सबसे ज़्यादा रिस्क है, हालांकि जुलाई और अगस्त के मॉनसून को फिर से शुरू करने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।

इथेनॉल की वजह से यह सेक्टर बना हुआ है आकर्षक 

बारिश और कच्चे तेल की कम कीमतों को लेकर चिंताओं के बावजूद, चीनी इंडस्ट्री के लिए बड़ा आउटलुक अच्छा बना हुआ है। इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के सरकारी उपाय और 100% इथेनॉल इस्तेमाल को सपोर्ट करने वाले फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की मंजूरी इस सेक्टर के लिए लंबे समय तक ग्रोथ के मौके देती रहेगी।

बियानी को उम्मीद है कि इस साल कम प्रोडक्शन के कारण चीनी की कीमतें मजबूत रहेंगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि शेयर की कीमतों पर कुछ दबाव पड़ सकता है क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों से जुड़ी हालिया रैली कम हो रही है।

उनके अनुसार चीनी सेक्टर के एक रेंज में रहने की संभावना है क्योंकि सरकारी दखल से तेज़ उछाल या गिरावट सीमित हो जाती है। कम गन्ने के प्रोडक्शन वाले सालों में, अधिकारी चीनी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए इथेनॉल डायवर्जन पर रोक लगा सकते हैं, जिससे मार्केट को बैलेंस करने में मदद मिलेगी।

इस सेक्टर में, एलारा सिक्योरिटीज बलरामपुर चीनी को अपनी टॉप पिक के तौर पर पसंद करती है।

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