चिप स्टॉक्स क्रैश होंगे? अल्टमैन और मस्क की बात से निवेशकों की चिंता बढ़ी

AI की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की बात ने टेक कंपनियों के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। इसका असर खासकर चिप कंपनियों और AI से जुड़े शेयरों पर दिख सकता है। हालांकि, बाजार के जानकारों को नहीं लगता कि यह दबाव बहुत लंबा चलेगा।

चिप, बिजली और कंप्यूटिंग पावर की मांग अभी भी काफी मजबूत है। कई जगह मांग सप्लाई से ज्यादा है। ऐसे में शेयरों में कमजोरी आती भी है तो वह थोड़े समय की हो सकती है।

AI कंपनियां क्यों मांग रही सावधानी?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Anthropic के CEO Dario Amodei ने शनिवार को AI डेवलपमेंट की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की अपील की। उन्होंने ज्यादा सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई। कंपनी स्वतंत्र थर्ड पार्टी से अपने AI मॉडल की जांच भी कराएगी। OpenAI के CEO सैम अल्टमैन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। xAI के एलन मस्क ने भी कहा कि Dario सही कह रहे हैं।

इस खबर के बाद निवेशकों की नजर अब AI कंपनियों के खर्च और कमाई पर है। सवाल है कि अगर नए AI मॉडल धीरे बनेंगे तो चिप कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा या नहीं।

टेक शेयर पहले से दबाव में

AI पर कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। निवेशकों को अब चिंता है कि क्या इतनी बड़ी रकम से उतनी कमाई होगी। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, जून के रिकॉर्ड स्तर से Nasdaq 100 करीब 4% नीचे आ चुका है। अमेरिकी चिप शेयरों का इंडेक्स करीब 14% गिरा है। एशियाई टेक शेयर भी करीब 8% नीचे हैं। यानी AI से जुड़े शेयरों पर दबाव पहले से बना हुआ है।

AI की रफ्तार धीमी हुई तो फायदा भी

कुछ निवेशक इसे बुरी खबर नहीं मान रहे। उनका कहना है कि AI मॉडल धीरे विकसित होंगे तो कंपनियों को पहले से बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर से कमाई करने का ज्यादा समय मिलेगा। Global X Management के Billy Leung के मुताबिक, AI की रफ्तार कम होने का मतलब यह नहीं है कि चिप और पावर पर खर्च रुक जाएगा। बल्कि कंपनियां पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं।

चिप कंपनियों को क्यों राहत मिल सकती है?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI का इस्तेमाल कम नहीं हो रहा है। कंप्यूटिंग पावर की जरूरत भी बनी हुई है। इसके अलावा AI की सुरक्षा के लिए साइबर सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग पर खर्च बढ़ सकता है। Saxo Markets की Charu Chanana के मुताबिक, मेमोरी, नेटवर्किंग, कूलिंग और पावर इक्विपमेंट कंपनियों को पहले से चल रहे प्रोजेक्ट से सहारा मिल सकता है।

इसलिए AI डेवलपमेंट की रफ्तार पर बहस जरूर बढ़ी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग खत्म होने वाली है। उल्टा, ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार AI के लिए नया खर्च भी शुरू हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दक्षिण कोरिया का बाजार आखिर एक महीने से कम समय में क्यों 20% क्रैश कर गया?

दक्षिण कोरिया के बाजार का प्रमुख सूचकांक जून में ऑल-टाइम हाई पर था। यह इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया था। लेकिन, एक महीने के अंदर बाजार आसमान से जमीन पर आ गया। 8 जुलाई को कोस्पी 5 फीसदी से ज्यादा गिरा। 7 जुलाई को भी यह 8 फीसदी तक गिरा था। इस तरह 22 जून के अपने ऑल-टाइम हाई से 20 फीसदी क्रैश करने के बाद यह बेयर मार्केट में प्रवेश कर गया है।

इन दो शेयरों में गिरावट ने बढ़ाया दबाव

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट की वजह आर्टफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बड़ी बिकवाली है। 8 जुलाई को Samsung Electronics का शेयर 6.3 फीसदी फिसला। SK Hynix के शेयरों में भी 5.7 फीसदी गिरावट आई। बीते कुछ हफ्तों में इन दोनों कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। दोनों की कोस्पी में करीब 60 फीसदी वेटेज है।

SK Hynix बीते एक साल में 636% उछला

आर्टफिशियल इंटेलिजेंस के शेयरों पर दांव लगाने वाले निवेशकों के लिए दक्षिण कोरिया का बाजार पंसदीदा डेस्टिनेशन बन गया था। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से कई कंपनियों खासकर चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयर आसमान में पहुंच गए। Samsung Electronics का शेयर बीते एक साल में 351 फीसदी उछला है। इसका मतलब है कि इसने सिर्फ एक साल में निवेशकों का पैसा तीन गुना से ज्यादा किया है। SK Hynix का शेयर बीते एक साल में 636 फीसदी उछला है। इसने निवेशकों का पैसा एक साल में छह गुना से ज्यादा कर दिया है।

एलजी और ह्यूडंई के शेयरों में भी तेजी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा भी कई शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई। LG Electronics का शेयर बीते एक साल में 166 फीसदी चढ़ा है। Hyundai Motor का शेयर इस दौरान 119 फीसदी उछला है। इन दिग्गज शेयरों में जबर्दस्त उछाल से कोरिया का बाजार बीते एक साल में दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया। अब शेयरों की हाई वैल्यूएशंस को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विदेशी निवेशक भी इन शेयरों में बड़ी बिकवाली कर रहे हैं।

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हाई वैल्यूएशंस को लेकर उठ रहे हैं सवाल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीते एक साल में तेज उछाल के बाद इन शेयरों की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। दूसरा, अमेरिका में भी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा है। इसका मतलब है कि आगे दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिख सकता है। इस वजह से विदेशी निवेशक दक्षिण कोरिया के बाजार में बड़ी बिकवाली कर रहे हैं। इससे बाजार लगातार गिर रहा है।