‘AI में जीतने वाला ही होगा असली विजेता’, ट्रंप बोले- हम चीन को आगे निकलने नहीं दे सकते

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI को लेकर बढ़ती चिंताओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। यह बात ऐसे समय आई है, जब AI इंडस्ट्री के बड़े नाम ही इसकी रफ्तार धीमी करने की बात कर रहे हैं।

ट्रंप ने रविवार को आयरिश ओपन के दौरान पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका AI में चीन से आगे है। वह दुनिया का सबसे एडवांस्ड देश है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को यह बढ़त बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जो AI में जीतेगा, वही विजेता होगा।’

ट्रंप के मुताबिक AI के लिए सुरक्षा नियम बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए गार्डरेल्स लगाए जा सकते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसी चिंताएं उठा रहे हैं, जिन्हें उठाने की जरूरत नहीं है।

AI की रफ्तार धीमी करने की मांग क्यों उठी?

Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने शनिवार को एक लंबा ब्लॉग लिखा। इसमें उन्होंने AI इंडस्ट्री से विकास की रफ्तार धीमी करने की अपील की। अमोडेई ने कहा कि AI के सबसे एडवांस्ड मॉडल तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने इसके लिए इंडस्ट्री और दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच तालमेल की जरूरत बताई। अमोडेई ने अपनी कंपनी के लिए नए सुरक्षा कदमों का भी ऐलान किया। इनमें स्वतंत्र थर्ड पार्टी से AI मॉडल की जांच कराना शामिल है।

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी इस विचार का समर्थन किया। xAI के प्रमुख एलन मस्क ने भी अमोडेई की बात का समर्थन किया। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि AI कंपनियां वास्तव में अपनी रफ्तार कितनी कम करेंगी। खासकर तब, जब उनके सबसे एडवांस्ड AI मॉडल ही कमाई का बड़ा जरिया बन रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन भी सुरक्षा पर कर रहा काम

अमेरिकी नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने भी AI सुरक्षा पर बात की। उन्होंने कहा कि अमोडेई का प्रस्ताव प्राइवेट कंपनियों के लिए एक मॉडल बन सकता है। इसमें स्वतंत्र लोगों को AI मॉडल की जांच का मौका देना शामिल है।

हैसेट ने AI सिक्योरिटी को ऐसी समस्या बताया, जिसका सॉल्यूळशंस निकाला जा सकता है। हालांकि उन्होंने एक बड़ी चिंता भी जताई। उनके मुताबिक AI इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि वह मौजूदा साइबर सिक्योरिटी सिस्टम को भी पीछे छोड़ सकता है। दूसरी तरफ, AI कंपनियां भी नए सुरक्षा उपाय तैयार कर रही हैं।

अमेरिका में AI के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा

AI को लेकर अमेरिका में सिर्फ टेक इंडस्ट्री के भीतर ही बहस नहीं हो रही। आम लोगों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। नए AI डेटा सेंटर बड़ी मात्रा में बिजली और दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।

लोगों को यह भी डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन सकता है। बिजली के बिल बढ़ने की चिंता भी सामने आ रही है। यही वजह है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में AI एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

AI में पैसा लग रहा है, तो कमाई कितनी होगी?

निवेशकों की चिंता सिर्फ AI की सुरक्षा को लेकर नहीं है। बाजार में एक और सवाल चल रहा है। AI और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। लेकिन क्या इस खर्च से उतनी कमाई होगी? यही असली सवाल है।

अगर खर्च बढ़ता गया और रिटर्न उम्मीद के मुताबिक नहीं आया, तो टेक शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर उन कंपनियों पर, जिनकी वैल्यूएशन पहले ही काफी ज्यादा है। फिलहाल ट्रंप का रुख साफ है। वह AI की रफ्तार कम करने के बजाय अमेरिका की बढ़त बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा के उपाय किए जा सकते हैं। लेकिन AI की दौड़ में अमेरिका पीछे नहीं रह सकता।

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Stock Market Holiday: सोमवार 14 सितंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार, अब मंगलवार से होगी ट्रेडिंग

Stock Market Holiday: शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार नहीं होगा। 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के कारण NSE और BSE बंद रहेंगे। इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग नहीं होगी। करेंसी डेरिवेटिव्स मार्केट भी बंद रहेगा। इस छुट्टी के चलते शेयर बाजार में अगला कारोबारी सत्र मंगलवार, 15 सितंबर को होगा।

NSE और BSE में क्या बंद रहेगा?

BSE की 2026 की छुट्टियों की सूची के मुताबिक, सोमवार को इक्विटी सेगमेंट बंद रहेगा। इक्विटी डेरिवेटिव्स में भी कारोबार नहीं होगा।

इसके अलावा करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं होगी। NDS-RST और ट्राई-पार्टी रेपो सेगमेंट भी बंद रहेंगे। यानी शेयर बाजार से जुड़े ज्यादातर प्रमुख सेगमेंट में सोमवार को कारोबार नहीं होगा।

कमोडिटी मार्केट में शाम को ट्रेडिंग

कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स यानी EGR सेगमेंट में स्थिति थोड़ी अलग रहेगी।

इनमें सुबह का सत्र बंद रहेगा। ट्रेडिंग शाम 5 बजे से दोबारा शुरू होगी। यानी कमोडिटी मार्केट में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा। इसके बाद शाम के सत्र में ट्रेडिंग की जा सकेगी।

सितंबर में सिर्फ एक बाजार छुट्टी

  • 2026 की छुट्टियों की सूची के मुताबिक, सितंबर में शेयर बाजार के लिए सिर्फ एक छुट्टी है। यह 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर है।
  • इसके बाद बाजार 2 अक्टूबर को बंद रहेगा। उस दिन महात्मा गांधी जयंती है। अक्टूबर में 20 तारीख को दशहरा के कारण भी बाजार में कारोबार नहीं होगा।
  • नवंबर में 10 नवंबर को दिवाली-बलिप्रतिपदा और 24 नवंबर को प्रकाश गुरुपर्व के कारण बाजार बंद रहेगा। 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी होगी।

बाजार पहले से दबाव में

इस बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है। वैश्विक चिंताओं ने निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर किया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, निफ्टी 50 इस हफ्ते 2% से ज्यादा गिरकर 23,398 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में भी करीब 2.27% की गिरावट रही। यह 74,781 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।

चिप स्टॉक्स क्रैश होंगे? अल्टमैन और मस्क की बात से निवेशकों की चिंता बढ़ी

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AI की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की बात ने टेक कंपनियों के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। इसका असर खासकर चिप कंपनियों और AI से जुड़े शेयरों पर दिख सकता है। हालांकि, बाजार के जानकारों को नहीं लगता कि यह दबाव बहुत लंबा चलेगा।

चिप, बिजली और कंप्यूटिंग पावर की मांग अभी भी काफी मजबूत है। कई जगह मांग सप्लाई से ज्यादा है। ऐसे में शेयरों में कमजोरी आती भी है तो वह थोड़े समय की हो सकती है।

AI कंपनियां क्यों मांग रही सावधानी?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Anthropic के CEO Dario Amodei ने शनिवार को AI डेवलपमेंट की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की अपील की। उन्होंने ज्यादा सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई। कंपनी स्वतंत्र थर्ड पार्टी से अपने AI मॉडल की जांच भी कराएगी। OpenAI के CEO सैम अल्टमैन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। xAI के एलन मस्क ने भी कहा कि Dario सही कह रहे हैं।

इस खबर के बाद निवेशकों की नजर अब AI कंपनियों के खर्च और कमाई पर है। सवाल है कि अगर नए AI मॉडल धीरे बनेंगे तो चिप कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा या नहीं।

टेक शेयर पहले से दबाव में

AI पर कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। निवेशकों को अब चिंता है कि क्या इतनी बड़ी रकम से उतनी कमाई होगी। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, जून के रिकॉर्ड स्तर से Nasdaq 100 करीब 4% नीचे आ चुका है। अमेरिकी चिप शेयरों का इंडेक्स करीब 14% गिरा है। एशियाई टेक शेयर भी करीब 8% नीचे हैं। यानी AI से जुड़े शेयरों पर दबाव पहले से बना हुआ है।

AI की रफ्तार धीमी हुई तो फायदा भी

कुछ निवेशक इसे बुरी खबर नहीं मान रहे। उनका कहना है कि AI मॉडल धीरे विकसित होंगे तो कंपनियों को पहले से बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर से कमाई करने का ज्यादा समय मिलेगा। Global X Management के Billy Leung के मुताबिक, AI की रफ्तार कम होने का मतलब यह नहीं है कि चिप और पावर पर खर्च रुक जाएगा। बल्कि कंपनियां पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं।

चिप कंपनियों को क्यों राहत मिल सकती है?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI का इस्तेमाल कम नहीं हो रहा है। कंप्यूटिंग पावर की जरूरत भी बनी हुई है। इसके अलावा AI की सुरक्षा के लिए साइबर सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग पर खर्च बढ़ सकता है। Saxo Markets की Charu Chanana के मुताबिक, मेमोरी, नेटवर्किंग, कूलिंग और पावर इक्विपमेंट कंपनियों को पहले से चल रहे प्रोजेक्ट से सहारा मिल सकता है।

इसलिए AI डेवलपमेंट की रफ्तार पर बहस जरूर बढ़ी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग खत्म होने वाली है। उल्टा, ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार AI के लिए नया खर्च भी शुरू हो सकता है।

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Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

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IT Stocks : Infosys और TCS करीब 3% भागे, AI खर्च से जुड़ी चिंताएं कम होने से पूरे सेक्टर में आई हरियाली

IT Stocks: बुधवार को भारतीय IT शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। इस तेजी को इन्फोसिस और TCS जैसी बड़ी कंपनियां लीड कर रही हैं। AI पर बहुत ज़्यादा खर्च और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर बनी चिंताओं के कारण निवेशकों ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजों से पहले सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों की ओर रुख कर लिया है। इसका फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को भी मिल रहा है। इसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स आज सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बन गया है। निवेशकों की नजर आज आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले पर बनी हुई है।

फिलहाल निफ्टी IT इंडेक्स 2.47 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है। निफ्टी आईटी बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। निफ्टी में सिर्फ 0.93 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इन्फोसिस 3.37 प्रतिशत बढ़कर निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाले शेयरों में शामिल है। वहीं, TCS में 2.65 प्रतिशत, विप्रो में 1.78 प्रतिशत और HCL टेक्नोलॉजीज में 1.1 प्रतिशत की तेजी आई है। मिडकैप आईटी की बात करें तो कोफोर्ज में 4.42 प्रतिशत, KPIT टेक्नोलॉजीज में 4.07 प्रतिशत और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 2.75 प्रतिशत की तेजी आई है।

एशियाई चिप शेयरो में लगातार बनी कमजोरी के बावजूद भारतीय IT शेयरों में रिकवरी देखने को मिल रही है। दक्षिण कोरियाई चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में भारी गिरावट आई है। AI के ऊंचे वैल्यूएशन,बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा भारी कैपिटल खर्च को देखते हुए निवेशक अब चिप शेयरों से दूरी बना रहे हैं। इसका फायदा सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों को मिल रहा है।

ऐसा लगता है कि निवेशक माइक्रोसॉफ्ट और मेटा के नतीजों से पहले भारतीय सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनियों के शेयर को खरीदने के लिए इनमें आए करेक्शन का फायदा उठा रहे हैं। इन दोनों कंपनियों के नतीजों से AI पर खर्च के ट्रेंड के बारे में नए संकेत मिलने की उम्मीद है।

बाजार की नजर आज आने वाले US फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी के जुड़े ऐलानों पर है। CME फेडवॉच के मुताबिक बाजार यह मान कर चल रहा है कि US फ़ेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना कि दक्षिण कोरियाई चिप शेयरों में आई भारी गिरावट भारत के पक्ष में हो सकती है। यानी दूसरे शब्दों में कहें तो दक्षिण कोरिया में चिप शेयरों में आई भारी गिरावट भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

 

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