Persistent Systems Share Price: Q1 नतीजों के बाद IT कंपनी का शेयर 4% तक फिसला, HSBC को आगे और गिरावट की आशंका

सोमवार, 3 अगस्त को IT कंपनी Persistent Systems Ltd. के शेयरों में दिन में 4 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। बीएसई पर शेयर 5319.75 रुपये के लो तक गया। कंपनी का मुनाफा बढ़ने के बावजूद शेयर में बिकवाली का दबाव है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 13.67 प्रतिशत बढ़कर 483.04 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 424.93 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4,303.22 करोड़ रुपये हो गया, जो जून 2025 तिमाही में 3,333.58 करोड़ रुपये था। सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और उभरते उद्योग क्षेत्र कंपनी के रेवेन्यू में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले बने रहे। इसकी हिस्सेदारी 40.7 प्रतिशत रही। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल रेवेन्यू में 34 प्रतिशत रही। हेल्थकेयर और लाइफसाइंसेज सेक्टर का योगदान 25.3 प्रतिशत रहा।

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के कर्मचारियों की संख्या 30 जून 2026 तक बढ़कर 28,640 हो गई। खर्च 3750.76 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 2832.84 करोड़ रुपये के थे। जून तिमाही में कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही बुकिंग दर्ज कीं। एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ 65 करोड़ डॉलर से ज्यादा की डील के कारण कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) लगभग दोगुनी होकर 1.15 अरब डॉलर हो गई। सालाना कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (ACV) पिछली तिमाही के मुकाबले 20.6 प्रतिशत बढ़कर 53.68 करोड़ डॉलर हो गई।

Persistent Systems पर HSBC ने ‘होल्ड’ रेटिंग रखी बरकरार

जून तिमाही की कमाई सामने आने के बाद ब्रोकरेज फर्म HSBC ने पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर के लिए ₹4,610 के टारगेट प्राइस के साथ ‘होल्ड’ रेटिंग को दोहराया है। यह टारगेट शेयर के पिछले बंद भाव से 17 प्रतिशत कम है। HSBC ने कहा कि कंपनी ने जून 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान से बेहतर रही और रिकॉर्ड डील हासिल की गईं। मजबूत ऑर्डर इनफ्लो काफी हद तक उम्मीदों के मुताबिक था। लेकिन शुद्ध मुनाफा उम्मीदों से कम रहा। ज्यादा डायरेक्ट कॉस्ट और अधिक सेल्स व मार्केटिंग खर्चों ने मुनाफे पर असर डाला। EBIT मार्जिन गिरकर 16% हो गया, जबकि अनुमान लगभग 16.5% का था।

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मार्जिन के दबाव के बावजूद, ब्रोकरेज ने कहा कि Persistent अपने सेक्टर में सबसे तेजी से बढ़ने वाली IT सर्विसेज कंपनियों में से एक बनी हुई है। इसकी 4.1% की कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ TCS, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, Mphasis, Zensar, LTTS और हेक्सावेयर जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों से बेहतर रही।

शेयर एक महीने में 18 प्रतिशत चढ़ा

Persistent Systems का मार्केट कैप 86700 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में 18 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। बीएसई पर 52 सपताह का एडजस्टेड हाई 6,597 रुपये और एडजस्टेड लो 4,242.65 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 30.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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IT Stocks : Infosys और TCS करीब 3% भागे, AI खर्च से जुड़ी चिंताएं कम होने से पूरे सेक्टर में आई हरियाली

IT Stocks: बुधवार को भारतीय IT शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। इस तेजी को इन्फोसिस और TCS जैसी बड़ी कंपनियां लीड कर रही हैं। AI पर बहुत ज़्यादा खर्च और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर बनी चिंताओं के कारण निवेशकों ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजों से पहले सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों की ओर रुख कर लिया है। इसका फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को भी मिल रहा है। इसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स आज सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बन गया है। निवेशकों की नजर आज आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले पर बनी हुई है।

फिलहाल निफ्टी IT इंडेक्स 2.47 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है। निफ्टी आईटी बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। निफ्टी में सिर्फ 0.93 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इन्फोसिस 3.37 प्रतिशत बढ़कर निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाले शेयरों में शामिल है। वहीं, TCS में 2.65 प्रतिशत, विप्रो में 1.78 प्रतिशत और HCL टेक्नोलॉजीज में 1.1 प्रतिशत की तेजी आई है। मिडकैप आईटी की बात करें तो कोफोर्ज में 4.42 प्रतिशत, KPIT टेक्नोलॉजीज में 4.07 प्रतिशत और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 2.75 प्रतिशत की तेजी आई है।

एशियाई चिप शेयरो में लगातार बनी कमजोरी के बावजूद भारतीय IT शेयरों में रिकवरी देखने को मिल रही है। दक्षिण कोरियाई चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में भारी गिरावट आई है। AI के ऊंचे वैल्यूएशन,बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा भारी कैपिटल खर्च को देखते हुए निवेशक अब चिप शेयरों से दूरी बना रहे हैं। इसका फायदा सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों को मिल रहा है।

ऐसा लगता है कि निवेशक माइक्रोसॉफ्ट और मेटा के नतीजों से पहले भारतीय सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनियों के शेयर को खरीदने के लिए इनमें आए करेक्शन का फायदा उठा रहे हैं। इन दोनों कंपनियों के नतीजों से AI पर खर्च के ट्रेंड के बारे में नए संकेत मिलने की उम्मीद है।

बाजार की नजर आज आने वाले US फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी के जुड़े ऐलानों पर है। CME फेडवॉच के मुताबिक बाजार यह मान कर चल रहा है कि US फ़ेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना कि दक्षिण कोरियाई चिप शेयरों में आई भारी गिरावट भारत के पक्ष में हो सकती है। यानी दूसरे शब्दों में कहें तो दक्षिण कोरिया में चिप शेयरों में आई भारी गिरावट भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

 

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