Commodity Market : जानिए आगे हफ्ते कैसी रह सकती है कमोडिटीज की चाल, सोने को कहां मिलेगा सपोर्ट और कहां होगा रेजिस्टेंस

Commodity Market : 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस बॉन्ड की भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिका से लगातार आने वाले कमजोर डेटा के कारण फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों में काफी बदलाव हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार डॉलर 102 के स्तर से ऊपर चला गया। इसमें सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार को आई। ग्लोबल बॉन्ड की बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण US में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.34 प्रतिशत (2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर) तक पहुंच गई और डॉलर भी 102.2 के हाई पर पहुंच गया।

करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं

दो अलग-अलग आंकड़ों ने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला,लेकिन करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। बुधवार को आए कोर PCE के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। वहीं, शुक्रवार को आए सितंबर के पेरोल आंकड़े सिर्फ़ 29,000 पर रहे, जो लगभग 84,000 से 90,000 के अनुमान से काफी कम थे। साथ ही बेरोज़गारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-अगस्त के आंकड़ों में कुल मिलाकर 60,000 नौकरियों की कमी आई।

अमेरिका में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार पड़ी धीमी

वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखा। सितंबर में प्रति घंटा औसत कमाई में सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सालाना बढ़ोतरी धीमी होकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई,जो 2021 के बाद से सबसे कम है। इस जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्याज दरों में बदलाव के अनुमान बदल गए। यूएस फेड की अक्टूबर की बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना,जो एक हफ्ते पहले 60 प्रतिशत से ज़्यादा थी,घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

इन आंकड़ों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई, हालांकि पिछले पांच हफ्तों में ज्यादातर समय डाओ जोन्स और S&P 500 में गिरावट देखने को मिली। जबकि नैस्डक में बढ़त जारी रही।

हफ्ते के आखिर में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 3 प्रतिशत और 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई। डॉलर और यील्ड में बढ़ोतरी का असर ब्याज दरों के अनुमानों पर पड़ा। फेड अधिकारी ज़्यादातर सतर्क रुख अपनाते दिखे। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने कहा कि इस साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है,हालांकि उन्हें इसकी कोई जल्दबाजी नहीं दिखी। जबकि उनके कई सहयोगियों ने महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के जोखिम की ओर इशारा किया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने पर सोने पर बनेगा दबाव

बीते हफ्ते सोने की कीमतों में दो बार तेजी आई। कमजोर जॉब्स और महंगाई के आंकड़ों की वजह से यह कुछ समय के लिए $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया,लेकिन यह अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सका और $4,150 से नीचे बंद हुआ। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हफ्ते में दोनों बार यह $62 प्रति औंस के करीब पहुंची, लेकिन हर बार वापस $60 से नीचे आ गई। इनकी आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉलर और यील्ड काबू में रहते हैं या नहीं। अगर इनमें से किसी में भी दोबारा तेजी आती है,इन मेटल्स पर और दबाव पड़ने की संभावना है।

सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

गोल्ड फ्यूचर्स में कमजोरी का रुख बना हुआ है और ये 20-डे EMA और सुपरट्रेंड (7,3) दोनों के नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि RSI (14) 50 से नीचे है,जो सुस्त मोमेंटम का संकेत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,45,950 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर गोल्ड इस लेवल से नीचे बना रहता है,तो यह ₹1,44,500 के आसपास स्थित अगले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है।

ऊपर की तरफ इसके लिए ₹1,51,100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा हैऔर उसके बाद ₹1,53,000 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार के लिए सोने के लिए लगातार ₹1,53,000 के ऊपर बने रहना जरूरी होगा। कुल मिलाकर इसका टेक्निकल ट्रेंड साइडवेज से लेकर बेयरिश बना हुआ है।

कच्चे तेल पर रहेगी नजर

ईंधन की कीमतों को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के जवाब में G7 देशों ने अगले चार महीनों में 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल तक डीजल और कच्चे तेल के भंडार को कम करने की एक मिली-जुली योजना बनाई है। इस योजना के तहत डीजल भंडार का अधिकांश हिस्सा शुरुआती तीन हफ्तों में ही कम किया जाएगा। इस योजना के दबाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आखिर में गिरकर बंद हुईं।

इसी जॉइंट स्टेटमेंट में ईरान के अपने पड़ोसियों पर हालिया हमलों की निंदा की गई और रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को फिर से दोहराया गया। फिर भी,कच्चे तेल के भाव में सिर्फ 2 प्रतिशत की ही कमी आई। इसकी वजह यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी जोखिम बना हुआ है। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिका का तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है,जिसके नवंबर के आखिर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पूर्व रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत की पेशकश की है। हालांकि कतर ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही है। हालांकि इससे अभी कोई बड़ी सफलता नहीं हासिल हुई है।

सप्लाई के नजरिए से देखें तो पिछले महीने ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू हो गई है। यह पाइपलाइन अभी अपनी पूरी क्षमता के लगभग आधे यानी रोज़ाना 35 लाख बैरल की रफ़्तार से चल रही है। साथ ही,सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की कुल शिपमेंट बढ़कर रोज़ाना 1.63 करोड़ बैरल हो गई है,जो फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से सबसे तेज रफ़्तार है।

बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट

बीते हफ्ते बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। कॉपर 2 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर $14,260 प्रति टन के आसपास बंद हुआ। जबकि जिंक और एल्युमीनियम में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डॉलर के 17 महीने के हाई पर पहुंचने का असर डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़ पर पड़ा,जिससे चीन के आंकड़ों में आए अच्छे सुधार का असर भी बेअसर हो गया।

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी दिखी है। वहीं, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को कवर करने वाला नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स बढ़कर 50.2 पर पहुंच गया है। इन दोनों आंकड़ों में नए स्टिमुलस पैकेज के बाद बढ़त आई है,जिसे 2024 के बाद का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है और जिसका मकसद चीन में 4.5 से 5 प्रतिशत के ग्रोथ टारगेट को हासिल करना है।

हफ़्ते की शुरुआत में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण कॉपर की कीमत $14,400 से ऊपर बनी हुई थी,लेकिन बाद में दूसरी कमोडिटीज की तरह इसमें भी गिरावट आई। नेशनल डे की छुट्टियों के कारण चीन में कमजोर कारोबारी गतिविधि के कारण मेटल्स की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर रहेगी नजर

आने वाले हफ्ते में डेटा कम ही आएगा। मुख्य रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI और US के शुरुआती कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई के अनुमान ही आएंगे। इस हफ्ते के डेटा पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में और अंदाजा लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर बाजार का फोकस रहेगा।

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कॉपर को लेकर एक खास जोखिम

अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं और वे सरकार की अनिवार्य मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। अगर बातचीत विफल रहती है तो सेंटिनेला में 13 अक्टूबर के आसपास कानूनी हड़ताल हो सकती है,जिससे तांबे की फिजिकल सप्लाई पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पनामा की कोब्रे पनामा खदान को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव से भी ज़्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

OPEC से प्रोडक्शन कोटा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं

उम्मीद है कि OPEC प्रोडक्शन कोटा में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, मार्केट G7 के डीजल रिलीज़ और अगर कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो रिज़र्व से और डीजल निकालने के किसी भी संकेत पर नजर रखेगा। सऊदी अरब और हूथी के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे अहम फैक्टर बना हुआ है। इससे सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा खतरा है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Copper News: कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बिग अलर्ट, कॉपर में मई के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट

Copper News: शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ ही है, कमोडिटी मार्केट में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। निफ्टी (Nifty) वीकली लेवल पर लगातार आठ हफ्ते कमजोर हुआ है और इतनी लंबी गिरावट 25 साल बाद दिखी है। अब कमोडिटी मार्केट में बात करें तो कॉपर जो धड़ाधड़ ऊपर भाग रहा था, अब मई के बाद से सबसे बड़ी वीकली गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। शुक्रवार को डॉलर में गिरावट के साथ लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसके फ्यूचर्स प्रति टन $14,300 प्रति टन से ऊपर चले गए, लेकिन फिर भी वीकली लेवल पर हफ्ते की समाप्ति पर इसमें लगभग 2% की गिरावट रहने के आसार हैं।

क्यों फीका पड़ा Copper?

एनर्जी की लागत में बढ़ोतरी और चीन के लड़खड़ाते इंडस्ट्रियल सेक्टर की वजह से मांग कम होने के डर से कॉपर को झटका लगा। एनर्जी की लागत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है, जिससे यह उबल पड़ा और कॉपर को भी इसकी आंच महसूस हुई। इसके अलावा चीन में इंडस्ट्रियल कमजोरी के आंकड़ो ने भी कॉपर पर दबाव बनाया।

अभी कितना टूटेगा भाव?

चीन में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज की कमजोर और कच्चे तेल में उबाल ने कॉपर को नरम किया है लेकिन सप्लाई की कमी के कारण कीमतें ऊपरी लेवल पर बनी हुई है यानी कि इसमें अधिक गिरावट की गुंजाइश नहीं दिख रही है। रिफाइंड मेटल पर अमेरिकी टैरिफ के डर से ट्रेडर्स ने लाखों टन मेटल अमेरिका भेजा है, जिससे दूसरी जगहों पर कमी का खतरा पैदा हो गया है। चिली की एक बड़ी खदान में भी हड़ताल चल रही है।

बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन के एनालिस्ट्स ने अपने नोट में जिक्र किया है कि जब तक पश्चिमी एशिया में युद्ध जारी रहेगा, बेस मेटल्स में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है लेकिन एल्युमीनियम, कॉपर और निकेल की सप्लाई में कमी से कीमतों को सपोर्ट मिलना चाहिए।

अभी अमेरिका में सितंबर महीने का रोजगार डेटा आना है, जिसमें मार्केट का अनुमान है कि हायरिंग में बड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। यह आंकड़ा आज शुक्रवार को आना है। इसमें सुस्ती का असर ये होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त करने की संभावना फीकी होगी, जो कॉपर के लिए पॉजिटिव हो सकता है।

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Commodity Market : 7 हफ्तों के निचले स्तरों पर पहुंचे सोने-चांदी के दाम, क्रूड में फिर बड़ा उछाल

Commodity Market : कारोबारी हफ्ते की शुरुआत सोने-चांदी के लिए भारी गिरावट के साथ हुई। सोने-चांदी की कीमतें 7 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं और 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। MCX पर सोना 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया है। वहीं, MCX पर चांदी 2.27 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे आ गई है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना $4200 के नीचे है। जबकि इंटरनेशनल मार्केट में चांदी $62 के नीचे दिख रही है। इस बीच ब्रेंट क्रूड का भाव $107 के पार निकल गया है। महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर कायम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी तेजी जारी। महंगाई बढ़ने पर फेड दरें बढ़ा सकता है।

वेंचुरा में कमोडिटी और CRM के हेड, एन एस रामास्वामी का कहना है कि हाल की तेजी के बाद सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसकी वजह अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व द्वारा और सख्ती बरतने की बढ़ती उम्मीदें हैं। अमेरिका की 10-साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% के ऊपर पहुंच गई है,जो जून 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। जबकि 30-साल की यील्ड बढ़कर लगभग 5.52% हो गई है, जो 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स मज़बूत हो रहा है और बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। इस बीच अमेरिका के उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों को मज़बूत किया है। सितंबर में कंपोजिट PMI बढ़कर 58.4 हो गई है,जो पांच साल से ज़्यादा समय में सबसे तेज़ रफ़्तार है।

इस हफ़्ते बाजार की नजर कोर PCE महंगाई के आंकड़ों (जो फ़ेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है) और GDP के फाइनल आंकड़ों पर रहेगी। ये दोनों बुधवार को आने वाले हैं। वहीं,नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़े शुक्रवार को आएंगे। इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत पर भी सबकी नजर रहेगी।

आगे सोने की चाल महंगाई की चिंता और ग्लोबल सेंट्रल बैंकों के संभावित एक्शन पर निर्भर करेंगी। फिलहाल इसका ट्रेंड थोड़ा कमजोर बना हुआ है। MCX गोल्ड दिसंबर 149,427 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए तत्काल रेजिस्टेंस 151,000, 153,500 और 155,500 पर है, जबकि सपोर्ट 148,000, 145,000 और 140,000 पर दिख रहा है। COMEX गोल्ड दिसंबर 4,194 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस 4,260 डॉलर और 4,350 डॉलर पर है,जबकि सपोर्ट 4,130, 4,050 और 4,000 डॉलर पर दिख रहा है।

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क्रूड की चाल पर एक नजर

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड में फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। आज कच्चे तेल के दाम करीब 3% चढ़े हैं। ब्रेंट $108 के पार चला गया तो WTI $94 के ऊपर पहुंच गया है। ईरान से बातचीत की उम्मीद के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। ट्रंप ने ईरान का स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और ईरान पर ज्यादा मांग रखने का आरोप लगाया है। उधर, ईरान ने US के साथ भीषण जंग के लिए तैयार रहने की बात कही है। बाजार को सप्लाई संकट गहराने की आशंका है।

इक्विटी मार्केट पर क्या होगा असर?

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ में चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह का कहना है कि बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों,जियोपॉलिटिकल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी चिंताओं की वजह से भारी गिरावट आई है। साथ ही FPI की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना भी बाजार पर भारी पड़ रहा है।

FPI की तरफ से लगातार हो रही निकासी भारतीय इक्विटी पर बिकवाली का दबाव बढ़ा सकती है। डॉलर की मांग के कारण रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है, आयातित महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है और बाजार में कुल लिक्विडिटी और निवेशकों का भरोसा घट सकता है।

बैंक,तेल मार्केटिंग कंपनियां,पेंट,टायर,एयरलाइंस और कच्चे तेल से जुड़े अन्य सेक्टर पर असर पड़ सकता है। डिफेंसिव,फार्मास्यूटिकल्स,हेल्थकेयर और FMCG सेक्टर तुलनात्मक रूप मजबूती दिखा सकते हैं।

निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों,ईरान-अमेरिका के बीच बन रही स्थिति,होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरों,अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड,FPI फ्लो,रुपये की चाल,ग्लोबल मार्केट,घरेलू महंगाई और आने वाली कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर नजर रखनी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Commodity Corner: क्रूड में नरमी, सोने-चांदी में दबाव, आज किन कमोडिटी कहां होगी कमाई

Commodity Corner: 24 सितंबर को कमोडिटी मार्केट में मिला-जुला कारोबार हुआ। पिछले सेशन में 4% की तेजी के बाद तेल की कीमतों में नरमी आई, जबकि एनर्जी की ऊंची कीमतों और मज़बूत US इकोनॉमिक डेटा के बीच सोना दबाव में रहा।

गुरुवार को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। पिछले सेशन में इनमें 4% की बढ़ोतरी हुई थी। ईरान ने कहा कि वह US-ईरान तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत को तैयार है, हालांकि दोनों देशों के बीच इसके तरीकों को लेकर अभी भी काफी मतभेद हैं।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 94 सेंट या 0.9% गिरकर $102.13 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर्स 59 सेंट या 0.7% गिरकर $91.56 पर आ गया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के कड़े बयानों से मध्य पूर्व में महीनों के टकराव के बाद भी दोनों देशों के बीच मौजूद बड़े मतभेदों का पता चलता है। संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए, पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और उन्होंने कई ऐसी शर्तें बताईं जिन्हें ठोस बातचीत फिर से शुरू करने से पहले पूरा करना ज़रूरी होगा।

कीमती धातुओं में, सोने में गिरावट जारी रही। एनर्जी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी और उम्मीद से बेहतर US इकोनॉमिक डेटा ने इस बात की संभावना बढ़ा दी है कि महंगाई से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

एक दिन पहले 1.7% की गिरावट के बाद बुलियन $4,290 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।

पिछले सेशन में 4% की गिरावट के बाद चांदी 0.2% गिरकर $64.31 प्रति औंस पर आ गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी थोड़ी गिरावट आई।

गुरुवार को डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर पर बना रहा। मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग डेटा ने महंगाई की आशंकाओं और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को फिर से हवा दी, जबकि कमज़ोर ट्रेजरी नीलामी से यील्ड में बढ़ोतरी हुई, जिससे US करेंसी को और मज़बूती मिली।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

शेयर, सोना और बैंक एफडी, इनमें निवेश का इनवेस्टर्स का आखिरी मकसद क्या है?

बीते कुछ सालों में शेयरों और गोल्ड में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इनवेस्टर्स के बीच बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का भी अट्रैक्शन बना हुआ है। सवाल है कि क्या इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी  इनवेस्टर्स की अब पसंद नहीं रह गई है? एनारॉक के रियल एस्टेट होमबायर सर्वे से इस सवाल का जवाब मिला है। यह सर्वे इस साल जनवरी से जून के बीच हुआ। इसमें 14 शहरों के करीब 8,320 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनकी उम्र 23 से 77 के बीच थी।

घर खरीदना वित्तीय लक्ष्य में सबसे ऊपर

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि घर खरीदना इनवेस्टर्स के फाइनेंशियल गोल यानी वित्तीय लक्ष्य में सबसे ऊपर था। इसके बाद बिजनेस शुरू करना, इमर्जेंसी फंड बनाना या रिटायरमेंट का नंबर था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 45 फीसदी इनवेस्टर्स या गोल्ड या शेयर में 45 फीसदी इनवेस्ट करने वाले घर के लिए निवेश कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 40 फीसदी लोगों ने रियल एसेट्स को छोड़कर दूसरे एसेट्स को सेलेक्ट किया।

45% लोगों ने घर खरीदने में दिखाई दिलचस्पी

इन लोगों से जब यह पूछा गया कि वे निवेश से तैयार अपने फंड का कहां इस्तेमाल करेंगे, तो घर खरीदना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य था। 45 फीसदी लोगों ने घर खरीदने को अपना पहला गोल बताया। 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे निवेश से तैयार फंड का इस्तेमाल बिजनेस शुरू करने के लिए करेंगे। 17 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इस पैसे से इमर्जेंसी फंड बनाएंगे। 11 फीसदी लोगों ने रिटायरमेंट को अपनी पहली प्राथमिकता बताई। सिर्फ 2 फीसदी ने कहा कि वे इस पैसा का इस्तेमाल सैर-सपाटे के लिए करेंगे।

निवेश के एसेट्स और निवेश के लक्ष्य में हो सकता है फर्क

इस सर्वे के नतीजों से यह भी पता चलता है कि किसी इनवेस्टर के निवेश के एसेट्स और निवेश के लक्ष्य के बीच फर्क हो सकता है। नॉन-रियल एसेट्स में निवेश का मतलब यह नहीं की घरों की डिमांड कमजोर पड़ रही है। हालांकि, अलग-अलग उम्र के लोगों के निवेश के मकसद में फर्क देखने को मिला।

घर खरीदने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी मिलेनियल्स की

मिलेनियल्स यानी 1981 से 1996 के बीच जन्म लेने वाले लोगों में से 71 फीसदी का कहना था कि वे निवेश से तैयार अपने फंड का इस्तेमाल भविष्य में घर खरीदने के लिए करना चाहते हैं। जेनरेशन एक्स यानी 1965 से 1980 के बीच जन्म लेने वाले लोगों में से 44 फीसदी का कहना था कि वे निवेश के पैसे का इस्तेमाल घर खरीदने के लिए करेंगे।

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रियल एसेट्स अब भी निवेश के लिहाज से पहली पसंद 

इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ज्यादातर लोगों के लिए अभी भी रियल एस्टेट सबसे पसंदीदा एसेट क्लास है। यह पूछने पर कि मौजूदा माहौल में कौन सा एसेट क्लास निवेश के लिए सबसे अच्छा है, 60 फीसदी लोगों का जवाब रियल एस्टेट था। 20 फीसदी के साथ स्टॉक मार्केट दूसरे नंबर पर था। 11 फीसदी के साथ सोना तीसरे नंबर पर था। इसके बाद बैंक एफडी का नंबर था।

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में कमजोरी, जानिए कमोडिटी मार्केट में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में आज कमजोरी देखने को मिल रही है। 11.15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर गोल्ड का अक्तूबर वायदा 524 रुपए यानी 0.34 फीसदी की कमजोरी के साथ 152,580 पर नजर आ रहा था। वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा 1,667.00 रुपए यानी 0.70 फीसदी की कमजोरी के साथ 237,820 के लेवल पर नजर आ रहा था। US फेडरल रिजर्व (Fed) का सख्त रुख को सोने-चांदी (जिससे कोई ब्याज नहीं मिलता) पर दबाव डालने वाला एक मुख्य कारण माना जा रहा है।

फेड के अपडेटेड इकोनॉमिक प्रोजेक्शन से पता चलता है कि इस साल कम से कम एक और बार ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद है। इसके अलावा, बोस्टन फेड की प्रेसिडेंट सुसान कॉलिन्स और सेंट लुइस फेड के प्रेसिडेंट अल्बर्टो मुसालेम ने पॉलिसी को और सख्त करने का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि कमोडिटी की कीमतों में अचानक उछाल के कारण महंगाई का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

उधर भारतीय बाजार में सोने की कीमत ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम से ऊपर बनी हुई है और ₹1,42,000 से ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास एक मजबूत आधार बना रही है। बाजार जानकारों के मुताबिक,भारत में सोने की कीमतों में बड़ी बढ़त की उम्मीद है। इसकी वजह त्योहारों का मौसम है,जिससे फिजिकल सोने की मांग बढ़ रही है। उनका कहना है कि जियोपॉलिटिकल तनाव,बढ़ती फिजिकल मांग और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में अस्थिरता जैसे अहम कारण दुनिया भर में सोने की कीमतों को बढ़ा सकते हैं। जेफरीज के फाइनेंशियल एनालिस्ट क्रिस वुड सोने को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उनका मानना ​​है कि लंबे समय में सोने की कीमतें 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। सोने की कीमत का $10,000 प्रति औंस तक पहुंचने का मतलब है कि भारतीय बाजार में इसकी कीमत ₹3 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकती है।

दूसरी कमोडिटीज पर एक नजर

एमसीएक्स पर कॉपर का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 2.10 रुपए यानी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 1,414.55 रुपए पर और क्रूड ऑयर का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 139 रुपए यानी 1.57 फीसदी की बढ़त के साथ 8,974 रुपए पर दिख रहा है। वहीं, नैचुरल गैस का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40 रुपए यानी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 273.40 रुपए पर कारोबार कर रहा है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन। इनको आज GOLD MINI और NICKEL में कमाई के मौके दिख रहे हैं। GOLD MINI अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट में इनकी 152800 रुपए के आसपास, 152200 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 154000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, NICKEL अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट में इनकी 1590 रुपए के आसपास,1578 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 1612 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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Gold Rate Today : कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन। इनको आज GOLD MINI और NICKEL में कमाई के मौके दिख रहे हैं

Stock Market Holiday: सोमवार 14 सितंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार, अब मंगलवार से होगी ट्रेडिंग

Stock Market Holiday: शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार नहीं होगा। 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के कारण NSE और BSE बंद रहेंगे। इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग नहीं होगी। करेंसी डेरिवेटिव्स मार्केट भी बंद रहेगा। इस छुट्टी के चलते शेयर बाजार में अगला कारोबारी सत्र मंगलवार, 15 सितंबर को होगा।

NSE और BSE में क्या बंद रहेगा?

BSE की 2026 की छुट्टियों की सूची के मुताबिक, सोमवार को इक्विटी सेगमेंट बंद रहेगा। इक्विटी डेरिवेटिव्स में भी कारोबार नहीं होगा।

इसके अलावा करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं होगी। NDS-RST और ट्राई-पार्टी रेपो सेगमेंट भी बंद रहेंगे। यानी शेयर बाजार से जुड़े ज्यादातर प्रमुख सेगमेंट में सोमवार को कारोबार नहीं होगा।

कमोडिटी मार्केट में शाम को ट्रेडिंग

कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स यानी EGR सेगमेंट में स्थिति थोड़ी अलग रहेगी।

इनमें सुबह का सत्र बंद रहेगा। ट्रेडिंग शाम 5 बजे से दोबारा शुरू होगी। यानी कमोडिटी मार्केट में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा। इसके बाद शाम के सत्र में ट्रेडिंग की जा सकेगी।

सितंबर में सिर्फ एक बाजार छुट्टी

  • 2026 की छुट्टियों की सूची के मुताबिक, सितंबर में शेयर बाजार के लिए सिर्फ एक छुट्टी है। यह 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर है।
  • इसके बाद बाजार 2 अक्टूबर को बंद रहेगा। उस दिन महात्मा गांधी जयंती है। अक्टूबर में 20 तारीख को दशहरा के कारण भी बाजार में कारोबार नहीं होगा।
  • नवंबर में 10 नवंबर को दिवाली-बलिप्रतिपदा और 24 नवंबर को प्रकाश गुरुपर्व के कारण बाजार बंद रहेगा। 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी होगी।

बाजार पहले से दबाव में

इस बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है। वैश्विक चिंताओं ने निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर किया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, निफ्टी 50 इस हफ्ते 2% से ज्यादा गिरकर 23,398 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में भी करीब 2.27% की गिरावट रही। यह 74,781 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।

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Stock Market Holiday: रक्षाबंधन पर आज खुलेगा या बंद रहेगा शेयर बाजार? यहां देखें ट्रेडिंग का पूरा शेड्यूल

NSE BSE Open or Closed Today: आज देश भर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। इस मौके पर क्या आज देश के प्रमुख शेयर बाजार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) खुले रहेंगे या बंद? इस सवाल को लेकर निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच संशय बना हुआ है। अगर आप भी आज बाजार में ट्रेडिंग की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

रक्षाबंधन पर खुला रहेगा बाजार, सामान्य दिनों की तरह होगी ट्रेडिंग

28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। हालांकि, BSE और NSE की आधिकारिक ट्रेडिंग हॉलिडे लिस्ट 2026 में रक्षाबंधन को अवकाश के रूप में शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि आज दलाल स्ट्रीट में किसी भी तरह की छुट्टी नहीं होगी और शेयर बाजार सामान्य दिनों की तरह ही खुलेगा।

प्री-ओपन सेशन: सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक

रेगुलर ट्रेडिंग सेशन: सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक

इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O), करेंसी डेरिवेटिव्स और डेट सेगमेंट में सामान्य रूप से कामकाज चालू रहेगा।

कमोडिटी मार्केट (MCX) का क्या है शेड्यूल?

इक्विटी मार्केट की तरह ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर भी रक्षाबंधन के अवसर पर कोई ट्रेडिंग ब्रेक नहीं रहेगा। MCX पर दोनों सत्र (सुबह का 9:00 AM से 5:00 PM और शाम का 5:00 PM से रात 11:30/11:55 PM) सामान्य रूप से चालू रहेंगे।

अगली स्टॉक मार्केट छुट्टी कब होगी?

रक्षाबंधन पर बाजार खुला रहने के बाद, अब अगस्त महीने में कोई भी अतिरिक्त ट्रेडिंग हॉलिडे नहीं है। शेयर बाजार की अगली छुट्टी 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर है जब BSE और NSE दोनों में ट्रेडिंग बंद रहेगी।

Stock Market Holiday: रक्षाबंधन पर खुलेगा या बंद रहेगा शेयर बाजार? ट्रेडर्स के लिए ये है बड़ा अपडेट

Raksha Bandhan Stock Market Holiday 2026: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अगर आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग या निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। 28 अगस्त को देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या इस दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कारोबार होगा या छुट्टी रहेगी।

बीएसई और एनएसई के ऑफिशियल ट्रेडिंग हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन शेयर बाजार पूरी तरह खुला रहेगा। इस दिन इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और करंसी सेगमेंट में सामान्य दिनों की तरह ही ट्रेडिंग होगी।

MCX और कमोडिटी मार्केट का क्या है शेड्यूल?

इक्विटी मार्केट के साथ-साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर भी रक्षाबंधन के दिन काम-काज सामान्य रूप से जारी रहेगा। कमोडिटी एक्सचेंज में सुबह और शाम दोनों सेशंस में रेगुलर ट्रेडिंग होगी। चूंकि यह ट्रेडिंग या रेगुलर सेटलमेंट हॉलिडे नहीं है, इसलिए रोलिंग सेटलमेंट साइकिल पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।

बैंकों की छुट्टी का पड़ सकता है असर

हालांकि शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट खुले रहेंगे, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार 28 अगस्त को कई राज्यों और शहरों (जैसे- लखनऊ, कानपुर, अहमदाबाद, जयपुर आदि) में बैंक बंद रहेंगे।

ऐसे में अगर आप इस दिन ट्रेडिंग के लिए बैंक ट्रांसफर या फंड्स ऐड/विड्रॉ करने की योजना बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय बैंक की वर्किंग स्थिति और डिजिटल बैंकिंग ऑप्शन्स की जांच पहले से कर लें।

2026 में शेयर बाजार की अगली छुट्टियां कब हैं?

रक्षाबंधन के बाद अब शेयर बाजार में अगली आधिकारिक छुट्टी सितंबर महीने में होगी। आने वाले महीनों की प्रमुख हॉलिडे लिस्ट इस प्रकार है:

  • 14 सितंबर: गणेश चतुर्थी
  • 2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती
  • 20 अक्टूबर: दशहरा
  • 10 नवंबर: दिवाली (बलिप्रतिपदा)
  • 24 नवंबर: प्रकाश गुरुपर्व (श्री गुरु नानक देव जयंती)
  • 25 दिसंबर: क्रिसमस

(नोट: दीपावली के दिन 8 नवंबर को शेयर बाजार में एक घंटे के लिए पारंपरिक ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सेशन का आयोजन किया जाएगा।)

रक्षाबंधन के दिन यानी 28 अगस्त को शेयर बाजार में किसी भी तरह की बंदी नहीं है। निवेशक सुबह 9:15 बजे से शाम 3:30 बजे तक अपनी ट्रेडिंग सामान्य रूप से कर सकते हैं। हालांकि, बैंक हॉलिडे की वजह से फंड ट्रांसफर से जुड़े काम पहले से प्लान कर लें।

Stock Market Holiday: क्या रक्षाबंधन पर 28 अगस्त को बंद रहेगा शेयर बाजार? जानिए NSE और BSE का आधिकारिक अपडेट

Raksha Bandhan Holiday 2026: रक्षाबंधन का त्योहार इस हफ्ते शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स के मन में यह सवाल है कि क्या 28 अगस्त को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में कारोबार होगा या छुट्टी रहेगी।

अगर आप भी 28 अगस्त को ट्रेडिंग का प्लान बना रहे हैं, तो NSE और BSE की आधिकारिक हॉलीडे लिस्ट का यह अपडेट जरूर जान लें।

क्या 28 अगस्त, रक्षाबंधन को खुला रहेगा शेयर बाजार?

BSE और NSE के आधिकारिक हॉलीडे कैलेंडर के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर शेयर बाजार में कोई छुट्टी नहीं है। बाजार सामान्य रूप से अपने तय समय पर खुला रहेगा और ट्रेडिंग चालू रहेगी।

किन सेगमेंट्स में होगा कारोबार: इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, NDS-RST और ट्राई पार्टी रेपो समेत सभी सेगमेंट्स में सामान्य दिनों की तरह ट्रेडिंग होगी।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के कैलेंडर के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन कमोडिटी मार्केट में भी मॉर्निंग और इवनिंग दोनों सेशंस में कामकाज चालू रहेगा।

साल 2026 के बचे हुए महीनों में कब-कब बंद रहेगा शेयर बाजार?

स्टॉक एक्सचेंज कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 के बाकी बचे महीनों में भारतीय शेयर बाजार में कुल 6 ट्रेडिंग हॉलीडे शेड्यूल हैं:

सितंबर: 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर अगला ट्रेडिंग हॉलीडे रहेगा।

अक्टूबर: 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 20 अक्टूबर को दशहरा पर बाजार बंद रहेगा।

नवंबर: 10 नवंबर को दिवाली-बलिप्रतिपदा और 24 नवंबर को प्रकाश गुरुपर्व श्री गुरु नानक देव जी के अवसर पर छुट्टी रहेगी।

दिसंबर: 25 दिसंबर को क्रिसमस के उपलक्ष्य में बाजार में कारोबार स्थगित रहेगा।

28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन शेयर बाजार पूरी तरह चालू रहेगा। निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए शुक्रवार का दिन सामान्य कारोबारी दिन रहेगा। ट्रेडर अपनी ट्रेडिंग और इनवेस्टमेंट प्लानिंग बिना किसी रुकावट के बना सकते हैं।