Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में हर महीने आने वाला अनुमानित निवेश तेजी से घटा है। मार्च 2026 में यह करीब ₹3,950 करोड़ था। सितंबर में घटकर सिर्फ ₹900 करोड़ रह गया। यानी 6 महीने में करीब 77% की गिरावट आई। हालांकि, फंड में पैसा आना बंद नहीं हुआ है। इसके बावजूद फंड मैनेजर ने नए शेयरों और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाना जारी रखा है।
फंड की कैश होल्डिंग भी काफी घटी है। मार्च में कुल संपत्ति का 18.94% पैसा कैश में था। सितंबर में यह घटकर 9.77% रह गया। इस दौरान फंड को रियल एस्टेट, REITs और चुनिंदा ऑयल एंड गैस कंपनियों में निवेश के मौके मिले।
फंड में निवेश क्यों घटा?
PPFAS Mutual Fund के फंड मैनेजर राज मेहता ने Moneycontrol को बताया कि निवेश में कमी से फंड की रणनीति नहीं बदली है। उनके मुताबिक, फंड में अब भी नया पैसा आ रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। ऐसे में निवेशकों का रुझान भी उनकी तरफ बढ़ा है। अक्सर निवेशक हालिया रिटर्न देखकर अपना पैसा लगाने का फैसला करते हैं।
कैश में पैसा रखने के बजाय कहां निवेश किया?
राज मेहता के मुताबिक, फंड कितना पैसा कैश में रखेगा, यह बाजार के स्तर से ज्यादा निवेश के मौकों पर निर्भर करता है। बाजार में लंबे समय तक खास तेजी न आने और कुछ शेयरों की कीमत घटने से फंड को खरीदारी के मौके मिले। इसलिए उसने कैश घटाकर शेयरों में निवेश बढ़ाया।
सितंबर की फैक्टशीट के मुताबिक, फंड की कुल संपत्ति का 72.06% हिस्सा भारतीय कोर इक्विटी में था। वहीं, 11.90% विदेशी सिक्योरिटीज, IDR और ADR में लगा था। REITs और InvITs में निवेश 6.27% था।
सितंबर में किन शेयरों में बढ़ाया निवेश?
अगस्त के मुकाबले सितंबर में DLF में सबसे ज्यादा नया निवेश किया गया। फंड की कुल संपत्ति का 1.81% हिस्सा इसमें लगाया गया। इसके अलावा Mahindra & Mahindra, Indus Towers, Bharti Airtel और कुछ ऑयल एंड गैस कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया गया।
दूसरी तरफ, फंड ने Great Eastern Shipping Company से अपना निवेश निकाल लिया। अगस्त में इस शेयर में फंड की संपत्ति का 0.11% हिस्सा लगा था।
फंड के पास Embassy Office Parks REIT में 2.49%, Knowledge Realty Trust में 2.18% और Brookfield India Real Estate Trust में 1.60% निवेश था।
फंड का रिटर्न कैसा रहा?
हाल के प्रदर्शन की बात करें तो फंड का रिटर्न कमजोर रहा है। इसके रेगुलर प्लान ने एक साल में 4.14% निगेटिव रिटर्न दिया। वहीं, बेंचमार्क Nifty 500 TRI में 2.03% की गिरावट आई।
हालांकि, तीन, पांच और दस साल की अवधि में फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
आलीशान घर, शानदार लोकेशन, स्विमिंग पूल और प्राइवेट गार्डन लग्जरी घर खरीदते समय लोग आमतौर पर इन्हीं सुविधाओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन हैदराबाद में कुछ लग्जरी होमबायर्स की प्राथमिकताएं अब कुछ अलग नजर आ रही हैं। वे घर पसंद करने से पहले यह भी जानना चाहते हैं कि आसपास किसी बड़े नेता का घर तो नहीं है। वजह घर की कीमत या सुविधाएं नहीं, बल्कि शांति, निजता और रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली संभावित परेशानियां हैं। हैदराबाद के एक रियल एस्टेट कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस दिलचस्प ट्रेंड को चर्चा में ला दिया है।
विला खरीदने पहुंचे ग्राहक ने सबसे पहले पूछा ये सवाल
हैदराबाद के रियल एस्टेट कारोबारी सतीश रेड्डी ने 19 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक प्रीमियम विला प्रोजेक्ट में ग्राहक के साथ जाने पर उन्हें एक दिलचस्प सवाल सुनने को मिला। रेड्डी के मुताबिक, ग्राहक ने सेल्स हेड से सबसे पहले पूछा, “ई विलास लो पेद्दा पॉलिटिशियंस एवरु तीस्कोलेदु कदा?” यानी इन विला में किसी बड़े नेता ने तो घर नहीं खरीदा है?
लग्जरी प्रॉपर्टी खरीदने के दौरान इस तरह का सवाल आमतौर पर सुनने को नहीं मिलता। लेकिन रेड्डी के मुताबिक, यह कोई पहला मौका नहीं था, जब किसी ग्राहक ने आसपास रहने वाले लोगों और उनके प्रभाव के बारे में ऐसी चिंता जताई हो।
बड़े नेताओं के आसपास घर होने से क्या हो सकती है परेशानी?
रेड्डी ने अपनी पोस्ट में बताया कि किसी प्रमुख राजनीतिक हस्ती के आसपास रहने पर कुछ परिस्थितियों में आम निवासियों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। किसी खास घर पर लोगों की आवाजाही बढ़ना, आगंतुकों की भीड़ जुटना और आसपास हलचल बने रहना ऐसी संभावित परेशानियां हैं।
उन्होंने जन्मदिन या अन्य अवसरों पर राजनीतिक समर्थकों की ओर से लगाए जाने वाले बड़े-बड़े बैनरों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कुछ आवासीय परिसरों में ऐसे बैनर कई दिनों तक लगे रह सकते हैं और कभी-कभी लंबे समय तक भी दिखाई देते हैं।
रेड्डी ने इस संदर्भ में हैदराबाद के NCC Urban One का उदाहरण दिया। हालांकि, ये अनुभव और टिप्पणियां उनकी पोस्ट पर आधारित हैं, न कि सभी आवासीय परिसरों की स्थिति का प्रमाण।
Last evening, I was with a client at a premium villa project, and the first question he asked the sales head was:
“Ee villas lo pedda politicians evvaru teesukoledu kada” (No big politicians have bought villas here, right?)
Apart from occasional bursts of visitors and the regular high volume of visitors at certain homes, residents also have to deal with ugly banners put up by sycophants at the entrance and sometimes all along the lanes on birthdays and other occasions.
At some places, like NCC Urban One, these banners remain for days or even most part of the year too.
This is increasingly becoming an important factor for homebuyers looking for privacy, peace and exclusivity.
And this isn’t the first time I’ve heard this. Someone who moved from a community in Financial district to another villa community in Gandipet told me the same thing.
— Satish Reddy | Hyderabad Real Estate & Infra (@HydREGuide) October 19, 2026
फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट से गांडीपेट तक सामने आई ऐसी चिंता
रेड्डी ने बताया कि उन्हें पहले भी ऐसा अनुभव सुनने को मिला था। उनके अनुसार, हैदराबाद के फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट स्थित एक आवासीय समुदाय से गांडीपेट के दूसरे विला समुदाय में शिफ्ट हुए एक व्यक्ति ने भी इसी तरह की चिंता जाहिर की थी।
यह उदाहरण दिखाता है कि प्रीमियम घर खरीदने या बदलने के दौरान कुछ लोगों के लिए सिर्फ प्रॉपर्टी की खूबसूरती और सुविधाएं ही अहम नहीं हैं। वे यह भी देखना चाहते हैं कि वहां रहने के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कितनी शांत और निजी रहेगी।
लग्जरी घर का मतलब सिर्फ महंगी प्रॉपर्टी नहीं
सतीश रेड्डी की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी चर्चा की। कुछ लोगों ने माना कि घर के आसपास का माहौल, लोगों की आवाजाही और निजता किसी प्रॉपर्टी को चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दरअसल, महंगा घर खरीदने वाले कई लोगों के लिए लग्जरी का मतलब केवल बड़ा घर या शानदार सुविधाएं नहीं, बल्कि सुकून से रह पाना भी है। हैदराबाद में सामने आया यह मामला इसी बदलती सोच की ओर इशारा करता है, जहां घर खरीदने से पहले लोग सिर्फ यह नहीं पूछ रहे कि प्रॉपर्टी कितनी शानदार है, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि वहां उनकी निजी जिंदगी कितनी प्रभावित हो सकती है।
Saif Ali Khan: CRE Matrix द्वारा हासिल किए गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार सैफ अली खान ने मुंबई के अंधेरी कुर्ला रोड पर 5,692 वर्ग फुट (RERA कारपेट एरिया) की दो कमर्शियल यूनिट्स को ₹22.76 लाख के मासिक किराए पर दिया है।
दस्तावेजो के मुताबिक ‘लीव एंड लाइसेंस’ समझौता 29 सितंबर 2026 को रजिस्टर किया गया था। यह समझौता 10 मई 2026 से 9 मई 2031 तक, यानी पांच साल की अवधि के लिए है। यह जगह ‘दुर्वा फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड’ को लीज पर दी गई है, जिसका प्रतिनिधित्व कंपनी के डायरेक्टर विकास मोहन सचदेवा कर रहे हैं। वे ही ‘लाइसेंसी’ (लाइसेंस लेने वाले) हैं। वहीं खान ‘लाइसेंसर’ (लाइसेंस देने वाले) हैं, जो अपने अधिकृत प्रतिनिधि (अटॉर्नी) के जरिए यह समझौता कर रहे हैं।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार लीज पर ली गई जगह अंधेरी ईस्ट के चकाला में स्थित ‘कनाकिया वॉल स्ट्रीट’ नामक इमारत की ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कमर्शियल यूनिट्स हैं। समझौते के तहत कुल 5,692 वर्ग फुट जगह के लिए ₹22,76,800 का मासिक किराया तय किया गया है, जो RERA कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹400 प्रति वर्ग फुट प्रति माह बैठता है।
इस समझौते में ₹2.36 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल है, जो शुरुआती मासिक किराए के 10 महीने से भी अधिक के बराबर है। किराएदार को 10 मई 2026 से 9 जुलाई 2026 तक, यानी दो महीने के लिए बिना किराए की अवधि दी गई है। ताकि वे 10 जुलाई 2026 (किराया शुरू होने की तारीख) से पहले अपनी जरूरत के हिसाब से जगह तैयार (फिट-आउट) कर सकें। पांच साल की लीज अवधि के दौरान, मासिक किराए में हर साल 5% की बढ़ोतरी होगी।
समझौते के अनुसार 60 महीने की अवधि में कुल किराया लगभग ₹14 करोड़ से अधिक होगा, जिसमें लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) शामिल नहीं है। पंजीकरण दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि खान ने नवंबर 2025 में ये दो कमर्शियल यूनिट्स खरीदीं। इंडेक्स-II के रिकॉर्ड बताते हैं कि एक यूनिट ₹30 करोड़ से अधिक में खरीदी गई थी, जिससे कुल खरीद मूल्य ₹30.75 करोड़ हो गया। CRE मैट्रिक्स के अनुसार, ये दोनों खरीद 18 नवंबर 2025 को ‘एपिकोर फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड’ से पंजीकृत कराई गई थीं।
जिस इलाके में सैफ अली खान के ये ऑफिस यूनिट्स हैं, वहीं हाल ही में एलन मस्क के सैटेलाइट इंटरनेट वेंचर ‘स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ ने मुंबई के चांदीवली इलाके में 1,294 वर्ग फुट की ऑफिस जगह पांच साल के लिए लीज पर ली है, जिसका कुल किराया ₹2.33 करोड़ है।
सैफ अली खान का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो
सैफ अली खान मुंबई के पॉश इलाके बांद्रा वेस्ट में एक आलीशान अपार्टमेंट में रहते हैं। लगभग एक दशक पहले ‘सतगुरु शरण’ बिल्डिंग में खरीदे गए 24 करोड़ रुपये के फ्लैट के अलावा उनके पास मुंबई में कुछ और प्रॉपर्टी भी हैं। इंडेक्सटैप.कॉम (IndexTap.com) द्वारा हासिल किए गए ‘प्रॉपर्टी इंडेक्स-2’ दस्तावेजों के अनुसार, खान का 6,500 वर्ग फुट से बड़ा यह अपार्टमेंट अप्रैल 2012 में रियल एस्टेट डेवलपर ‘सतगुरु बिल्डर्स’ से 23.50 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।
इस अपार्टमेंट में जाने से पहले सैफ अली खान और करीना बांद्रा के ‘फॉर्च्यून हाइट्स’ अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार 2013 में इस चार मंजिला प्रॉपर्टी की कीमत ₹48 करोड़ थी, जिसमें 3BHK यूनिट्स थीं। जैपकी.कॉम (Zapkey.com) द्वारा हासिल किए गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के मुताबिक अप्रैल 2016 में सैफ अली खान ने मुंबई के बांद्रा स्थित ‘फॉर्च्यून हाइट्स’ में 950 वर्ग फुट से बड़ा एक अपार्टमेंट ₹7 करोड़ में खरीदा था।
Amitabh Bachchan Portfolio: 84 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन आज भी फिल्मों और टीवी दुनिया में सिर्फ सक्रिय ही नहीं हैं, बल्कि व्यस्त भी हैं। कौन बनेगा करोड़पति यानी KBC की तो फिलहाल उनके बिना कल्पना ही नहीं की जा सकती है। फिल्मों में तो उनकी किसी से कोई तुलना ही नहीं हो सकती है। इन सबके बीच अमिताभ बच्चन की निवेश स्ट्रैटेजी भी सुर्खियों में है। रियल एस्टेट में तो उनका काफी निवेश है ही, कंपनियों में भी उन्होंने काफी पैसे लगाए हैं, जिसमें से कुछ लिस्टेड हैं तो कुछ निवेश के बाद आईपीओ लाकर लिस्ट हुई हैं।
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के नियमों के मुताबिक स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनियों को 1% या इससे अधिक की होल्डिगं वाली कंपनियों के नाम का खुलासा करना अनिवार्य होता है। इसका मतलब हुआ कि अगर किसी कंपनी में किसी शेयरहोल्डर की 1% से कम होल्डिंग है तो उसका नाम शेयरहोल्डिंग पैटर्न में नहीं दिखेगा तो इससे कम होल्डिंग में पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि किसी की कितनी हिस्सेदारी है। हालांकि आईपीओ के ड्राफ्ट में डिटेल्स सामने आ सकती है।
अब अमिताभ बच्चन के पोर्टफोलियो की बात करें तो उनका नाम डीपी वायर्स (DP Wires) के जून 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में दिख रहा है। जून तिमाही के आखिरी में उनके पास कंपनी के 2,65,105 शेयर थे जोकि 1.71% इक्विटी होल्डिंग है। एक अहम बात ये है कि उन्होंने 23 जून को प्रति शेयर ₹199.90 के भाव पर डीपी वायर्स के 41,566 शेयर खरीदे, जबकि ₹200.84 के भाव पर 1,23,622 शेयर बेचे थे। इस प्रकार उन्होंने 82,056 शेयरों की नेट सेलिंग से ₹1.64 करोड़ की कमाई की थी। बीएसई पर मौजूद शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक मार्च 2026 के आखिरी में उनके पास कंपनी के 3,27,590 शेयर थे जो कंपनी की 2.11% हिस्सेदारी के बराबर है। शुक्रवार 9 अक्टूबर को बीएसई पर यह 4.15% की बढ़त के साथ ₹224.70 पर बंद हुआ था।
Tracxn पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक अमिताभ बच्चन की पहले पॉलिसीबाजार (Policybazaar) की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक (PB Fintech) में भी हिस्सेदारी थी। इसके अलावा उन्होंने जस्ट डायल में भी पैसे डाले हुए हैं। साथ ही कई और कंपनियों में उनका निवेश है।
Real Estate में भी काफी निवेश
अमिताभ बच्चन ने रियल एस्टेट में भी काफी निवेश किया हुआ है। प्रतीक्षा, जलसा, जनक और वत्स के साथ-साथ मुंबई में अपार्टमेंट और फ्लैट्स के अलावा देश के बाहर दुबई और ल्यूक्स (Luxe) में भी उनके पास प्रॉपर्टी है। हाल ही में उन्होंने अयोध्या में करोड़ों की जमीन खरीदी और अब अयोध्या में उनके पास ₹90-₹100 करोड़ तक की जमीन है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
यदि आप रिटायरमेंट के बाद के लिए अभी प्लानिंग नहीं करेंगे तो बाद में दिक्कत हो सकती है। अगर आप खुद प्लानिंग नहीं कर सकते तो एक्सपर्ट से जान लें कि रिटायरमेंट से पहले किस प्रकार से प्लानिंग करनी चाहिए। इससे रिटायरमेंट के बाद आपकी जिंदगी खुशनुमा माहौल में बीतेगी। अक्सर लोग रिटायरमेंट के नाम से घबरा जाते हैं, लेकिन सही प्लानिंग से यह जीवन का सबसे सुनहरा दौर बन सकता है। ऐसे ही एक रिटायर्ड अधिकारी राम स्वार्थ सिंह ने अपनी सफल प्लानिंग के बारे में बताया।
लक्ष्य तय करना सबसे जरूरी है
राम स्वार्थ सिंह बताते हैं कि मेरे कई लक्ष्य थे और लायबिलिटीजी भी थीं। इसमें एक लड़की और एक लड़के की शादी करनी की जिम्मेदारी शामिल थी। एक जमीन थी शहर में जिस पर मकान नहीं बना था। मैंने सोचा सबसे पहले यह तीन काम करना है। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट से पहले ही उन्होंने अपने तीन मुख्य लक्ष्य तय कर लिए थे।
सही जगह इनवेस्टमेंट करना होगा
सिंह ने कहा, “रिटायरमेंट के बाद यह तीनों काम सफलतापूर्वक पूरे किए। उसके बाद कुछ पैसे उन्होंने LIC और फिक्स डिपॉजिट में इन्वेस्टमेंट किया। वे कहते हैं, “मैंने इस तरीके से प्लानिंग की थी की थी कि लड़की की शादी मैंने अच्छे से की। लड़के की भी शादी बहुत धूमधाम से की। शहर में जो जमीन मेरी खाली पड़ी थी उस पर मैंने दो फ्लोर का मकान भी बनाया। कुछ जमीन भी मैंने खरीदी।”
नौकरी के पहले दिन से प्लानिंग जरूरी
एक्सपर्ट्स के अनुसार, रिटायरमेंट प्लानिंग की शुरुआत नौकरी के पहले दिन से ही कर देनी चाहिए। रिटायरमेंट प्लानिंग के 3 सुनहरे नियम हैं। सबसे पहले लक्ष्य तय करें। बच्चों की शादी, मकान, जैसे बड़े खर्चों के लिए पहले से तैयार रहें। निवेश में विविधता का ख्याल रखें। सारा पैसा एक जगह न लगाएं।
निवेश अलग-अलग एसेट में करना होगा
FD, LIC, म्यूचुअल फंड और जमीन में बांटकर निवेश करें। आखिरी नियम यह है कि कर्ज मुक्त रहें। कोशिश करें कि रिटायरमेंट से पहले सारे लोन खत्म हो जाएं। राम स्वार्थ सिंह की कहानी बताती है कि अगर समय रहते सही योजना बनाई जाए तो रिटायरमेंट के बाद भी जिंदगी आराम और सुकून से कटती है।
Akshaye Khanna: स्क्वायर यार्ड्स द्वारा देखे गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स के अनुसार एक्टर अक्षय विनोद खन्ना ने मुंबई के मालाबार हिल में ₹33.26 करोड़ में एक अपार्टमेंट खरीदा है। इस लग्जरी अपार्टमेंट का कारपेट एरिया 2,341.39 वर्ग फुट है, जिसमें 175.45 वर्ग फुट की बालकनी भी शामिल है। कुल एरिया 2,516.84 वर्ग फुट है। इसमें तीन पार्किंग यूनिट भी मिलती हैं।
स्क्वायर यार्ड्स को मिले डॉक्यूमेंट्स के अनुसार सितंबर 2026 में रजिस्टर हुए इस सौदे पर ₹1.99 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी और ₹30,000 का रजिस्ट्रेशन चार्ज लगा है। हालांकि इस बारे में अक्षय खन्ना की तरफ से कोई बयान नहीं आया है
मालाबार हिल इलाका
मालाबार हिल मुंबई के सबसे पसंदीदा रिहायशी इलाकों में से एक है, जो साउथ मुंबई में अपनी बेहतरीन लोकेशन, प्रीमियम घरों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। अरब सागर के किनारे बसा यह इलाका नेपियन सी रोड, वाल्केश्वर रोड और पेडर रोड जैसी मुख्य सड़कों के जरिए अहम कमर्शियल और लाइफस्टाइल जगहों से जुड़ा हुआ है और यहां से मरीन ड्राइव, नरीमन पॉइंट और कोलाबा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
समय के साथ मालाबार हिल एक खास रिहायशी इलाके के तौर पर विकसित हुआ है, जहां शानदार अपार्टमेंट टावर, आलीशान घर और बसे-बसाए इलाके हैं। नरीमन पॉइंट, फोर्ट और लोअर परेल जैसे बड़े बिजनेस इलाकों के पास होने के कारण, यह सीनियर प्रोफेशनल्स, बिजनेस लीडर्स और बहुत अमीर लोगों के लिए खास तौर पर आकर्षक है।
इस इलाके में बेहतरीन सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर भी है, जिसमें नामी स्कूल, अस्पताल, प्रीमियम रेस्टोरेंट, शॉपिंग की जगहें और मनोरंजन के लिए जगहें शामिल हैं। हैंगिंग गार्डन्स, कमला नेहरू पार्क, बाणगंगा टैंक और वाल्केश्वर मंदिर जैसी मशहूर जगहें इसकी खासियत को और बढ़ाती हैं।
सी व्यू वाले घर, प्रीमियम रियल एस्टेट की सीमित उपलब्धता, पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और एक प्रतिष्ठित पता- इन सब वजहों से यह इलाका दक्षिण मुंबई में खास और लंबे समय तक फायदा देने वाले आलीशान घर खरीदने वालों और निवेशकों की पहली पसंद बन गया है।
अक्षय खन्ना
अक्षय विनोद खन्ना एक बॉलीवुड एक्टर हैं, जिन्होंने अपनी शानदार एक्टिंग और स्क्रीन पर अपनी खास मौजूदगी से हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मशहूर एक्टर विनोद खन्ना के बेटे होने के बावजूद उन्होंने कई दशकों के अपने करियर में अलग-अलग तरह के रोल निभाकर अपनी खुद की पहचान बनाई है।
बीते कुछ सालों में शेयरों और गोल्ड में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इनवेस्टर्स के बीच बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का भी अट्रैक्शन बना हुआ है। सवाल है कि क्या इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी इनवेस्टर्स की अब पसंद नहीं रह गई है? एनारॉक के रियल एस्टेट होमबायर सर्वे से इस सवाल का जवाब मिला है। यह सर्वे इस साल जनवरी से जून के बीच हुआ। इसमें 14 शहरों के करीब 8,320 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनकी उम्र 23 से 77 के बीच थी।
घर खरीदना वित्तीय लक्ष्य में सबसे ऊपर
सर्वे के नतीजे बताते हैं कि घर खरीदना इनवेस्टर्स के फाइनेंशियल गोल यानी वित्तीय लक्ष्य में सबसे ऊपर था। इसके बाद बिजनेस शुरू करना, इमर्जेंसी फंड बनाना या रिटायरमेंट का नंबर था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 45 फीसदी इनवेस्टर्स या गोल्ड या शेयर में 45 फीसदी इनवेस्ट करने वाले घर के लिए निवेश कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 40 फीसदी लोगों ने रियल एसेट्स को छोड़कर दूसरे एसेट्स को सेलेक्ट किया।
45% लोगों ने घर खरीदने में दिखाई दिलचस्पी
इन लोगों से जब यह पूछा गया कि वे निवेश से तैयार अपने फंड का कहां इस्तेमाल करेंगे, तो घर खरीदना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य था। 45 फीसदी लोगों ने घर खरीदने को अपना पहला गोल बताया। 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे निवेश से तैयार फंड का इस्तेमाल बिजनेस शुरू करने के लिए करेंगे। 17 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इस पैसे से इमर्जेंसी फंड बनाएंगे। 11 फीसदी लोगों ने रिटायरमेंट को अपनी पहली प्राथमिकता बताई। सिर्फ 2 फीसदी ने कहा कि वे इस पैसा का इस्तेमाल सैर-सपाटे के लिए करेंगे।
निवेश के एसेट्स और निवेश के लक्ष्य में हो सकता है फर्क
इस सर्वे के नतीजों से यह भी पता चलता है कि किसी इनवेस्टर के निवेश के एसेट्स और निवेश के लक्ष्य के बीच फर्क हो सकता है। नॉन-रियल एसेट्स में निवेश का मतलब यह नहीं की घरों की डिमांड कमजोर पड़ रही है। हालांकि, अलग-अलग उम्र के लोगों के निवेश के मकसद में फर्क देखने को मिला।
घर खरीदने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी मिलेनियल्स की
मिलेनियल्स यानी 1981 से 1996 के बीच जन्म लेने वाले लोगों में से 71 फीसदी का कहना था कि वे निवेश से तैयार अपने फंड का इस्तेमाल भविष्य में घर खरीदने के लिए करना चाहते हैं। जेनरेशन एक्स यानी 1965 से 1980 के बीच जन्म लेने वाले लोगों में से 44 फीसदी का कहना था कि वे निवेश के पैसे का इस्तेमाल घर खरीदने के लिए करेंगे।
इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ज्यादातर लोगों के लिए अभी भी रियल एस्टेट सबसे पसंदीदा एसेट क्लास है। यह पूछने पर कि मौजूदा माहौल में कौन सा एसेट क्लास निवेश के लिए सबसे अच्छा है, 60 फीसदी लोगों का जवाब रियल एस्टेट था। 20 फीसदी के साथ स्टॉक मार्केट दूसरे नंबर पर था। 11 फीसदी के साथ सोना तीसरे नंबर पर था। इसके बाद बैंक एफडी का नंबर था।
MG’s newest SUV has been christened the Hector Tomahawk, but despite the name, it shares nothing with the ICE-powered Hector we’ve known since 2019. The Hector Tomahawk EV and PHEV are the first models on MG’s ADAPT architecture, which will eventually spawn strong hybrids and range-extender hybrids. We drove the Tomahawk EV in sunny Kochi to see how it stacks up in the ever-growing segment.
MG Hector Tomahawk EV Exterior Design and Engineering – 6/10
Let’s talk dimensions first. At 4,745mm long, 1,850mm wide, 1,770mm tall and with a 2,810mm wheelbase, the Tomahawk is larger than the Mahindra XEV 9S in all areas except width. Ground clearance, at 230mm (measured to battery), is also class-best. However, these numbers don’t translate to a particularly imposing stance. Instead, it straddles the line between an MPV and SUV.
Size doesn’t translate to an imposing stance; it straddles the line between an MPV and an SUV.
The design is clean and quite handsome, if a bit uninspiring. The front bumper is squared off with pass-through aero vents on the edges and chunky cladding lower down. Cooling requirements are met by slim slots in the centre section with some chrome detailing, while the conventional grille is blanked off and finished in gloss black. No light bar here, thankfully, but the MG logo does glow and is flanked by rectangular LED headlights with a subtle H-shaped light signature.
Large rectangular LED headlights have a subtle H in them; no light bar, but the MG logo glows.
In profile, it looks quite slab-sided, with sharp creases along the fenders and plastic wheel-arch cladding adding some definition. These, along with the chunky door cladding, attempt to give it a rugged appearance but are let down by 18-inch wheels that look a tad too small. No electric door handles here, just good old-fashioned pull types.
Further back are a set of intricate LED tail-lights that again resist the connected trend. MG’s love for badging is clear though, with four on the powered tailgate. Finishing things off nicely is a sculpted bumper with a grey trim piece and a centre-mounted reverse lamp. Overall, it’s a reasonably pleasing design, but it looks a tad dated and lacks the butch appeal of some rivals.
Overall styling is neatly done but somewhat uninspiring.
MG Hector Tomahawk EV Interior Space and Comfort – 8/10
Inside, the dash features a familiar minimalistic layout with a large touchscreen front and centre. It looks premium and features soft-touch materials on the dash and doors, but lacks a certain wow factor, and the light tan colour palette might not be to all tastes. That said, the light tone and large windows do give it an airy ambience. Look hard, and you will find areas where fit and finish could be improved. The centre console in particular feels poorly textured and finished, which we were told is down to a supplier issue. Speaking of the centre console, the column-mounted drive selector frees up space here for a wireless charger, cupholders, multiple bins as well as a large pass-through cubby lower down, and the door bins are enormous too.
Minimalistic interior looks premium, but the light tan colour palette might not be to all tastes.
It’s easy to get into a comfortable and commanding driving position using the power-operated seats and reach-and-rake adjustment for the steering wheel. The seats themselves are wide, and despite the firm cushioning, they felt comfortable on our full day of driving. They are ventilated too, and the driver’s seat also gets a memory function.
Powered and ventilated front seats are wide and comfortable; driver’s seat gets a memory function.
The Tomahawk has the second-longest wheelbase in class (next only to the Vinfast MPV 7), and it shows in the second row. Legroom is excellent, and while you do sit slightly knees-up, thigh support is adequate too. The seatback reclines pretty far back and features an armrest and three adjustable headrests. Window sunshades, AC vents and Type-C USB ports add to the rear-seat comfort and convenience.
The chauffeur-driven are well taken care of, with a comfy reclining bench, plenty of room all around and sunblinds.
The Tomahawk EV is available in both 5- and 7-seater guises. The latter adds a sliding second row with one-touch tumble to access the third row, as well as more AC vents on the roof and a dedicated fan-speed control. Getting into the last row is surprisingly dignified thanks to a large aperture, but kneeroom depends largely on the middle-row passengers’ generosity, and the low seat means thigh support is non-existent. Headroom is good, though, and for short journeys, adults will be fine back there.
Third row will fit adults but with a slight compromise to the middle-row space.
With the third row up, boot space stands at 192 litres – enough for a couple of carry-on bags – expanding to a generous 528 litres with it stowed. Under the boot floor are a few more storage cubbies, which are handy since there is no frunk – a miss considering there appears to be enough space under the bonnet. A space-saver spare is mounted underneath the car.
MG Hector Tomahawk EV Features and Safety – 8/10
The minimalist interior layout means you reach for the 15.6-inch infotainment screen for most functions. While this can get distracting, physical and swipe-gesture controls together handle most basic HVAC and audio functions with surprising ease. Anything beyond basic, though, will require a deep dive into the screen. While the screen is sharp and snappy and the UI is clean, it can take a while to find your way through the maze of sub-menus. Wireless Android Auto and Apple CarPlay are also present, but using either hides the row of shortcuts at the bottom of the screen. Hardcoding these buttons to always stay on top would improve usability. The screen also often catches glare, which takes away from the otherwise sharp 360-degree camera.
Several functions are baked into the 15.6-inch touchscreen, but gesture controls for essential functions are quite intuitive.
Instrumentation is handled by an 8.8-inch display directly in front of the driver. The screen itself is sharp, but some smaller fonts might have you reaching for your reading glasses. Its real estate could also be better utilised by displaying the blind-view camera feed rather than the current pop-up on the centre screen. Other feature highlights include a sweet-sounding 10-speaker Infinity audio system, a panoramic sunroof that stretches over the second row, 256-colour ambient lighting, connected car tech, an AI assistant and more. It’s worth mentioning that the Tomahawk EV also gets a physical start/stop button, which is absent on the brand’s other EVs.
8.8-inch driver’s display is sharp, but some smaller fonts might have you reaching for your reading glasses.
A Level 2 ADAS suite is also available on the top Essence trim, with functions such as adaptive cruise control, lane keep assist and auto emergency braking. While there isn’t an official crash-test rating yet, the robust standard safety kit, including six airbags, ESP, all-wheel disc brakes and Isofix mounts, provides some confidence.
MG Hector Tomahawk EV Performance and Refinement – 7/10
The Tomahawk EV offers just one powertrain configuration – a 69.2kWh LFP battery pack powering a single motor on the front axle, producing 204hp and 310Nm, good for a claimed 0-100kph time of 8.2 seconds. Its front-wheel-drive layout puts it at a disadvantage against rivals from Tata and Mahindra, who offer either rear- or all-wheel drive and higher power outputs. The front-driven Hyundai Creta Electric or Kia Carens Clavis EV are closer matches, and the Tomahawk EV betters them on power and torque.
First EV on MG’s ADAPT architecture pairs a 69.2kWh battery with a front-mounted motor producing 204hp and 310Nm.
Initial throttle response is mild, making it quite easy to amble around town, but push harder, and you get a power spike resulting in torque steer. In Sport mode, you’ll hear the front tyres protest when made to put all that torque down on a less-than-perfect road. Standard mode dulls response slightly, but it can still catch new drivers off guard. With time, it is possible to drive around this, but the latest crop of rival EVs has mastered a more linear delivery. Eco mode feels a bit tepid and is best saved to counter range anxiety, while a Custom mode lets you customise power output and regen braking in increments of 10 percent. There are also three preset regen modes – Standard, Comfort and Strong – but no paddles to control them or one-pedal mode. Instead, you get an Intelligent setting that uses the ADAS sensors to adjust regen in real time based on the traffic in front of you.
Grip levels and body control are good, but FWD layout struggles to put power down.
Refinement is a bit of a mixed bag. While the motor is fairly muted and there is little wind or tyre noise coming through, you hear the suspension at work on rough patches.
MG Hector Tomahawk EV Range and Efficiency – 7/10
A spirited highway drive from Kochi to Kozhikode covering 192km, resulted in an overall efficiency of 4.85km/kWh.
While the Hector name is often associated with poor fuel efficiency, the new EV and PHEV hope to change that. MG claims an MIDC range of 517km from its 69.2kWh battery pack. On a spirited drive from Kochi to Kozhikode covering 192km, we recorded an overall efficiency of 4.85km/kWh, translating to a real-world range of 336km. This was on a fast highway run, where the Tomahawk’s tall shape won’t do its efficiency any favours. We’ll put it through our standard real-world efficiency test when we have the car for longer.
DC fast charges at 90kW – slower than rivals but enough for a 30 to 80 percent top-up in a claimed 35 minutes.
Topping up the battery from 10 to 100 percent using the 7.4kW charger is said to take around 12.5 hours. It can also DC fast charge at speeds of up to 90kW, which is lower than its immediate rivals but still enough to take the battery from 30 to 80 percent in about 35 minutes.
MG Hector Tomahawk EV Ride Comfort and Handling – 7/10
Rides with more maturity than previous MG EVs, but suspension can be heard working.
The Hector Tomahawk EV makes a big step up in ride and handling compared to the ICE Hector, but there is still some room for improvement. It rides with more maturity than previous MG EVs, comfortably absorbing most of what we threw at it. However, you do hear the suspension working. Sharper bumps reveal an underlying firmness that occasionally comes through to the cabin. Most roads around Kochi were relatively smooth, and we weren’t able to experience it on rippled concrete, so we will reserve full judgement until we have the car for longer.
A big positive is how easy the Tomahawk is to drive for something this large. Visibility all around is excellent, and you can see the bonnet’s edges from the driver’s seat. A light steering also helps, and overall, it feels less intimidating to drive through tight traffic than, say, the XEV 9S.
230mm claimed ground clearance is best in class; wheelbase second only to VF MPV 7.
The steering also weighs up as speeds rise and feels reasonably direct, though the sheer amount of torque going to just the front wheels corrupts the feel. At a quick pace through the twisties, you feel the wheel tugging at your hands as you apply power. Body control is good, and it stays composed through quick direction changes, but a sedate pace is more its element. Braking is strong, with four-wheel discs bringing the heavy SUV to a confident halt.
MGHector Tomahawk EV Value for Money – 7/10
Introductory pricing for the Hector Tomahawk EV starts at Rs 19.49 lakh and tops out at Rs 23.49 lakh. The Battery-as-a-Service (BaaS) scheme lowers the entry barrier to Rs 13.99 lakh, with battery rental set at Rs 4.90 per km. While all these prices are applicable to limited units only, this is quite aggressive pricing from MG.
Practical, comfortable and no-nonsense SUV will appeal to the chauffeur-driven but lacks the dynamic polish of its rivals.
When compared spec-for-spec, it undercuts the competition from Tata and Mahindra while offering a bigger battery and more performance than its Korean rivals. It has a spacious and comfortable cabin, a comprehensive feature set and is surprisingly easy to drive for its size. However, it lacks the dynamic polish of its rivals and therefore doesn’t feel like a latest-generation EV. As such, its Hector name starts to make more sense. It is a practical, comfortable, no-nonsense SUV that will appeal to the chauffeur-driven just like its forebear. Those looking to do the driving, though, are better off looking elsewhere.
Real estate project in UP: उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए यूपी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने 13 नई रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल अनुमानित ₹2,380.04 करोड़ का निवेश होगा। जबकि करीब 4,724 रेजिडेंशियल एवं कमर्शियल यूनिट्स विकसित की जाएंगी। UP RERA की यह मंजूरी उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़ा कदम है। खास तौर पर बाराबंकी में निवेश और लखनऊ में नई यूनिट्स का आंकड़ा सबसे बड़ा है। जबकि गाजियाबाद और नोएडा क्षेत्र में करीब ₹472 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है।
किन जिलों में बनेंगे प्रोजेक्ट?
‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, UP RERA की मंजूरी पाने वाली ये 13 परियोजनाएं बाराबंकी, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और आगरा में विकसित होंगी। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के मुताबिक, इससे आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही इससे निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी।
बाराबंकी में सबसे बड़ा निवेश
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, छोटे शहरों में निवेश के लिहाज से यूपी का बाराबंकी सबसे आगे रहा। यहां दो रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनमें कुल ₹751.42 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के तहत 591 आवासीय यूनिट्स यानी फ्लैट बनाई जाएंगी।
लखनऊ में सबसे ज्यादा यूनिट्स
यूनिट्स की संख्या के मामले में लखनऊ सबसे आगे है। यहां एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए ₹385.76 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट में 1,392 यूनिट्स विकसित की जाएंगी।
वाराणसी में ₹750 करोड़ से ज्यादा का निवेश
वाराणसी में तीन रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनकी अनुमानित लागत ₹750.24 करोड़ है। इनसे 1,189 यूनिट्स विकसित होंगी। निवेश के मामले में वाराणसी दूसरे सबसे बड़े जिलों में शामिल है।
गाजियाबाद में 864 यूनिट्स
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें दो कमर्शियल और एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट शामिल है। इन पर करीब ₹286.27 करोड़ का निवेश होगा। इससे कुल 864 यूनिट्स विकसित की जाएंगी।
नोएडा क्षेत्र में करीब ₹186 करोड़ के प्रोजेक्ट
गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा में एक रेजिडेंशियल और एक कमर्शियल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इन दोनों परियोजनाओं में करीब ₹186 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यहां कुल 564 यूनिट्स विकसित की जाएंगी। गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर को मिलाकर निवेश करीब ₹472 करोड़ बैठता है, जिसे कुछ रिपोर्टों में राउंड ऑफ करके करीब ₹500 करोड़ बताया गया है।
आगरा में भी दो प्रोजेक्ट मंजूर
आगरा में दो रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें करीब ₹20.35 करोड़ का निवेश होगा। इस दौरान 124 यूनिट्स फ्लैट तैयार किए जाएंगे।
212वीं और 213वीं बैठक में मिली मंजूरी
इन सभी परियोजनाओं को UP RERA की 212वीं और 213वीं बैठकों में मंजूरी दी गई। इन बैठकों की अध्यक्षता UP RERA के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने की। अथॉरिटी ने कहा कि रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट का विकास तय नियमों और डेडलाइन के भीतर पारदर्शी तरीके से कराना उसकी प्राथमिकता है।
रियल एस्टेट के साथ रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
UP RERA के मुताबिक, ₹2,380 करोड़ से ज्यादा के इस निवेश से राज्य में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसका असर केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि निर्माण सामग्री, परिवहन, इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी मांग बढ़ने की उम्मीद है। प्राधिकरण का कहना है कि इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
Real Estate vs Investment: करियर की शुरुआत में ही मेट्रो सिटी में अपना घर या 3 BHK फ्लैट खरीदना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जो घर आप रहने के लिए नहीं बल्कि एक ‘इन्वेस्टमेंट’ के रूप में ले रहे हैं, वह आपके लिए कितना बड़ा ‘फाइनेंशियल ट्रैप’ बन सकता है?
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने एक ऐसा केस शेयर किया है जो आपको हैरान कर देगा। समझिए कि क्यों करियर के शुरुआती दिनों में होम लोन की भारी-भरकम EMI में बंधना आपकी वित्तीय आजादी और फ्लेक्सिबिलिटी को हमेशा के लिए छीन सकता है।
₹1.4 करोड़ का फ्लैट और ₹2.21 करोड़ का फाइनल पेमेंट
राहुल ने 2014 में ₹1.4 करोड़ रुपये में 3 BHK फ्लैट खरीदा। गृह प्रवेश से पहले इंटीरियर और फिनिशिंग पर ₹7-8 लाख अतिरिक्त खर्च हुए। उनकी कुल लागत करीब ₹1.48 करोड़ बैठी। खरीदने के एक साल बाद ही राहुल को काम के सिलसिले में परिवार सहित आयरलैंड जाना पड़ा। मजबूरी में उन्होंने फ्लैट ₹19,500 प्रति महीने के किराए पर दे दिया।
हाल ही में जब राहुल ने अपना होम लोन क्लोज किया, तो उन्होंने पाया कि मूलधन, ब्याज और प्री-क्लोजर चार्ज मिलाकर वे बैंक को कुल ₹2.21 करोड़ चुका चुके थे। आज इस फ्लैट से उन्हें लगभग ₹31,000 प्रति महीने का किराया मिल रहा है। जब उन्होंने इसे बेचने की कोशिश की, तो बाजार से ऑफर ₹1.9 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच ही मिल रहे हैं।
राहुल की दिक्कत यह है कि उन्होंने जितना पैसा बैंक को चुकाया है, वे उससे कम में इसे बेचने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ, विदेश में होने और माता-पिता के दूसरे शहर में रहने की वजह से वे इस घर में कभी रह भी नहीं पाएंगे।
प्रॉपर्टी से मिलने वाले रिटर्न का असली गणित
अगर आप प्रॉपर्टी को एक ‘इन्वेस्टमेंट’ की तरह देखते हैं, तो आपको दो प्रमुख बातों पर ध्यान देना होगा:
रेंटल यील्ड: भारत में आवासीय संपत्तियों की रेंटल यील्ड औसतन 2% से 3% ही होती है। यानी ₹1.4 करोड़ के घर पर ₹20,000 से ₹30,000 का किराया मिलना कोई बहुत बड़ी कमाई नहीं है, जबकि बैंक होम लोन पर 8.5% से 9.5% तक का ब्याज वसूलते हैं।
पूंजीगत बढ़त बनाम ब्याज की लागत: अक्सर लोग केवल खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य का अंतर देखते हैं। वे भूल जाते हैं कि 15-20 साल के होम लोन में वे मूलधन का लगभग दोगुना पैसा केवल ब्याज के रूप में बैंक को दे देते हैं।
‘अर्ली ईएमआई ट्रैप’ से कैसे बचें?
करियर के शुरुआती 5-10 सालों में जब तक आपकी नौकरी का स्थान, शहर या विदेश जाने की योजनाएं पूरी तरह स्थिर न हों, भारी लोन लेने से बचें। शुरुआत में किराए के मकान में रहना आपको शहर या देश बदलने की पूरी आजादी देता है। किराए से बचा हुआ पैसा आप म्यूचुअल फंड, इक्विटी या अन्य एसेट क्लास में निवेश कर सकते हैं।
जब आपके पास पर्याप्त लिक्विड फंड जाए, तब अपने रहने के लिए घर खरीदने का फैसला लें। साथ ही अगर आपके पास बैंक में पर्याप्त कैश है, तो रीसेल मार्केट में लाखों ऐसी प्रॉपर्टी उपलब्ध होती हैं जिन्हें आप अच्छे डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।