Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख में पैसा लगाना बंद कर रहे निवेशक? 6 महीने में 77% घटा निवेश

Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में हर महीने आने वाला अनुमानित निवेश तेजी से घटा है। मार्च 2026 में यह करीब ₹3,950 करोड़ था। सितंबर में घटकर सिर्फ ₹900 करोड़ रह गया। यानी 6 महीने में करीब 77% की गिरावट आई। हालांकि, फंड में पैसा आना बंद नहीं हुआ है। इसके बावजूद फंड मैनेजर ने नए शेयरों और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाना जारी रखा है।

फंड की कैश होल्डिंग भी काफी घटी है। मार्च में कुल संपत्ति का 18.94% पैसा कैश में था। सितंबर में यह घटकर 9.77% रह गया। इस दौरान फंड को रियल एस्टेट, REITs और चुनिंदा ऑयल एंड गैस कंपनियों में निवेश के मौके मिले।

फंड में निवेश क्यों घटा?

PPFAS Mutual Fund के फंड मैनेजर राज मेहता ने Moneycontrol को बताया कि निवेश में कमी से फंड की रणनीति नहीं बदली है। उनके मुताबिक, फंड में अब भी नया पैसा आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। ऐसे में निवेशकों का रुझान भी उनकी तरफ बढ़ा है। अक्सर निवेशक हालिया रिटर्न देखकर अपना पैसा लगाने का फैसला करते हैं।

कैश में पैसा रखने के बजाय कहां निवेश किया?

राज मेहता के मुताबिक, फंड कितना पैसा कैश में रखेगा, यह बाजार के स्तर से ज्यादा निवेश के मौकों पर निर्भर करता है। बाजार में लंबे समय तक खास तेजी न आने और कुछ शेयरों की कीमत घटने से फंड को खरीदारी के मौके मिले। इसलिए उसने कैश घटाकर शेयरों में निवेश बढ़ाया।

सितंबर की फैक्टशीट के मुताबिक, फंड की कुल संपत्ति का 72.06% हिस्सा भारतीय कोर इक्विटी में था। वहीं, 11.90% विदेशी सिक्योरिटीज, IDR और ADR में लगा था। REITs और InvITs में निवेश 6.27% था।

सितंबर में किन शेयरों में बढ़ाया निवेश?

अगस्त के मुकाबले सितंबर में DLF में सबसे ज्यादा नया निवेश किया गया। फंड की कुल संपत्ति का 1.81% हिस्सा इसमें लगाया गया। इसके अलावा Mahindra & Mahindra, Indus Towers, Bharti Airtel और कुछ ऑयल एंड गैस कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया गया।

दूसरी तरफ, फंड ने Great Eastern Shipping Company से अपना निवेश निकाल लिया। अगस्त में इस शेयर में फंड की संपत्ति का 0.11% हिस्सा लगा था।

फंड के पास Embassy Office Parks REIT में 2.49%, Knowledge Realty Trust में 2.18% और Brookfield India Real Estate Trust में 1.60% निवेश था।

फंड का रिटर्न कैसा रहा?

हाल के प्रदर्शन की बात करें तो फंड का रिटर्न कमजोर रहा है। इसके रेगुलर प्लान ने एक साल में 4.14% निगेटिव रिटर्न दिया। वहीं, बेंचमार्क Nifty 500 TRI में 2.03% की गिरावट आई।

हालांकि, तीन, पांच और दस साल की अवधि में फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

SIP Calculator: हर महीने ₹1000 की SIP से 20 साल में कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: हर किसी के पास निवेश करने के लिए बड़ी रकम नहीं होती। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप निवेश शुरू ही न करें। अगर आप हर महीने सिर्फ ₹1,000 बचा सकते हैं, तो भी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू कर सकते हैं।

अब सवाल है कि हर महीने ₹1,000 निवेश करने पर 20 साल बाद कितना पैसा मिलेगा? इसका जवाब निर्भर करेगा आपकी SIP पर मिलने वाले रिटर्न पर। म्यूचुअल फंड ने लॉन्ग टर्म में औसतन 12% का रिटर्न दिया है। हालांकि, कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप फंड इससे ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं। इनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा होता है। वहीं, कुछ फंड का रिटर्न 10% के आसपास भी है, जो अमूमन सुरक्षित लगाते हैं।

20 साल में अपनी जेब से कितने पैसे लगाएंगे?

अगर आप हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं, तो सालभर में ₹12,000 जमा होंगे। इसी तरह 20 साल में आप कुल ₹2.40 लाख निवेश करेंगे।

लेकिन 20 साल बाद आपके पास सिर्फ इतने ही पैसे नहीं होंगे। निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आपकी रकम में जुड़ता रहेगा। फिर उस बढ़ी रकम पर भी रिटर्न मिलेगा। इसे कंपाउंडिंग कहते हैं। लंबे समय तक निवेश करने पर इसका असर साफ दिखाई देता है।

10% रिटर्न मिला तो कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए कि आपके निवेश पर हर साल औसतन 10% रिटर्न मिलता है। ऐसे में 20 साल बाद आपके पास करीब ₹7.18 लाख हो सकते हैं। इस दौरान आप अपनी जेब से कुल ₹2.40 लाख लगाएंगे। बाकी करीब ₹4.78 लाख रिटर्न से जुड़ेंगे। यानी आपने हर महीने सिर्फ ₹1,000 निवेश किए, लेकिन लंबे समय में आपका फंड लगाए गए पैसों से काफी बड़ा हो सकता है।

12% रिटर्न पर कितना बनेगा फंड?

अगर सालाना रिटर्न 12% मिलता है, तो? इस हिसाब से 20 साल बाद आपका फंड करीब ₹9.11 लाख हो सकता है। आपका कुल निवेश फिर भी ₹2.40 लाख ही रहेगा। बाकी करीब ₹6.71 लाख रिटर्न से बनेंगे। यहां रिटर्न में सिर्फ 2 प्रतिशत अंक का अंतर है, लेकिन 20 साल बाद बनने वाले फंड में करीब ₹2 लाख का बड़ा फर्क आ जाता है।

15% रिटर्न मिला तो कितनी होगी रकम?

अगर सालाना रिटर्न औसतन 15% रहा, तो 20 साल बाद आपका फंड करीब ₹13.12 लाख हो सकता है। इस दौरान आप कुल ₹2.40 लाख निवेश करेंगे। बाकी करीब ₹10.72 लाख रिटर्न से जुड़ेंगे। हालांकि, लंबी अवधि में 15% रिटर्न मिलना अमूमन मुश्किल होता है। इसके लिए ज्यादा जोखिम उठाने वाले फंड में निवेश करना पड़ सकता है।

₹1,000 की SIP पर रिटर्न का हिसाब

सालाना रिटर्न20 साल बाद कुल फंडकुल निवेशअनुमानित रिटर्न
10%₹7.18 लाख₹2.40 लाख₹4.78 लाख
12%₹9.11 लाख₹2.40 लाख₹6.71 लाख
15%₹13.12 लाख₹2.40 लाख₹10.72 लाख

नोट: यह कैलकुलेशन हर महीने के अंत में ₹1,000 निवेश करने और अनुमानित सालाना रिटर्न के आधार पर है। वास्तविक रिटर्न और अंतिम फंड अलग हो सकते हैं।

कम पैसों से निवेश शुरू करना क्यों जरूरी है?

कई लोग सोचते हैं कि जब कमाई बढ़ेगी, तभी निवेश शुरू करेंगे। लेकिन इस इंतजार में कई साल निकल जाते हैं। दूसरी तरफ, छोटी रकम से शुरुआत करने पर निवेश की आदत बन जाती है।

बाद में कमाई बढ़ने पर आप हर महीने निवेश की रकम भी बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, शुरुआत ₹1,000 से की और फिर इसे ₹1,500 या ₹2,000 महीने तक बढ़ा दिया। इससे लंबे समय में बड़ा फंड बनाने में मदद मिल सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

इस म्यूचुअल फंड ने मंथली ₹10000 के SIP को 15 साल में ₹81 लाख बनाया

म्यूचुअल फंड की कुछ स्कीमें हैं, जिन्होंने निवेशकों को करोड़पति बनाया है। फ्रैंकलिन टेंपलटन इंडिया म्यूचुअल फंड की इस स्मॉलकैप स्कीम ने भी निवेशकों को मालामाल किया है। इसका नाम फ्रैंकलिन इंडिया स्मॉलकैप फंड है। इस फंड में अगर आपने हर महीने 10,000 रुपये का सिप इनवेस्टमेंट 15 साल तक किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 81 लाख रुपये हो गया होता। फ्रैंकलिन टेंपलटन ने अपने इस फंड के प्रदर्शन के बारे में बताया है।

जनवरी 2006 में हुई थी इस फंड की शुरुआत

Franklin India Small Cap Fund का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। फ्रैंकलिन टेंपलटन के कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर आपने इस फंड के शुरू होने के समय इसमें एकमुश्त 10,000 रुपये का निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 1.79 लाख रुपये हो गया होता। इस फंड की शुरुआत जनवरी 2006 में हुई थी। फ्रैंकलिन टेंपलटन ने कहा है कि इस फंड ने शुरुआत से लेकर अब तक अपने बेंचमार्क निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स से ज्यादा रिटर्न दिया है।

15 साल में इस फंड का रिटर्न 19 फीसदी से ज्यादा रहा

5 साल, 15 साल और शुरुआत से अब तक इस फंड का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर रहा है। लेकिन, 3 साल में इसका रिटर्न बेंचमार्क से कम रहा है। इस दौरान बेंचमार्क का रिटर्न 16.15 फीसदी रहा, जबकि इस फंड का रिटर्न 12.82 फीसदी रहा। 10 साल में भी फंड का रिटर्न बेंचमार्क से कम रहा। लेकिन, 15 साल में फंड का रिटर्न 19.03 फीसदी रहा, जबकि बेंचमार्क का 15.75 फीसदी रहा।

मिनिमम 5000 रुपये से किया जा सकता है एकमुश्त निवेश

इस फंड के पोर्टफोलियो मैनेजर अखिल काल्लुरी ने कहा कि फंड का फोकस ऐसी कंपनियों के शेयरों पर होता है, जो बुनियादी रूप से मजबूत होती हैं और जिनकी ग्रोथ की संभावना ज्यादा होती है। इस फंड में निवेश के एक साल के अंदर पैसे निकालने पर 1 फीसदी का एग्जिट लोड लगता है। इस फंड में मिनिमम 5,000 रुपये से एकमुश्त निवेश किया जा सकता है। अतिरिक्त निवेश 1,000 रुपये के मल्टीपल में किया जा सकता है।

स्मॉलकैप फंड में निवेश में ज्यादा रिस्क

यह फंड स्मॉलकैप फंड की कैटेगरी में आता है। यह सिर्फ स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। स्मॉलकैप शेयरों में निवेश में रिस्क ज्यादा होता है। इनका रिटर्न ज्यादा होता है। लेकिन, मार्केट क्रैश करने पर इन शेयरों में गिरावट भी लार्जकैप और मिडकैप स्टॉक्स के मुकाबले ज्यादा आती है। इसलिए सिर्फ ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता वाले इनवेस्टर्स को ही स्मॉलकैप फंड में निवेश करना चाहिए।

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फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह से ले निवेश का फैसला

दूसरा, किसी फंड के पिछले प्रदर्शन को देखकर उसमें निवेश करने का फैसला नहीं करना चाहिए। किसी फंड का अब तक का अच्छा प्रदर्शन भविष्य में उसके अच्छे प्रदर्शन की गारंटी नहीं होता। इनवेस्टर्स को अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह के बाद ही किसी फंड में निवेश का फैसला लेना चाहिए।

Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना।

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

MF Investment : महंगाई के दौर में सिर्फ बचत नहीं,बल्कि स्मार्ट निवेश भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में स्टेप-अप SIP आपकी बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकती है। लेकिन सवाल सिर्फ निवेश बढ़ाने का नहीं,बल्कि बाजार की गिरावट में उस निवेश को बनाए रखने का भी है। तो अतिरिक्त रकम कहां लगानी चाहिए? क्या हर ट्रेंडिंग फंड सही विकल्प है? और बाजार की अस्थिरता में गोल-बेस्ड निवेश कैसे आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है? आज यहा इन्हीं अहम सवालों के जवाब जानेंगे वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी (Hemant Rustagi) से

क्या है स्टेप-अप SIP?

इसमें हर साल SIP की रकम तय परसेंट या तय रकम से बढ़ाई जाती है। हमें इसमें बढ़ती आय के हिसाब से निवेश बढ़ाने की सुविधा मिलती है। छोटी राशि से निवेश की शुरुआत करना आसान होता है। कंपाउंडिंग का लाभ समय के साथ अधिक मिलता है। इससे लंबी अवधि में बड़ा निवेश फंड तैयार करने में मदद मिलती है।

कैसे बढ़ता है रिटर्न ?

सामान्य SIP में निवेश राशि पूरे समय एक जैसी रहती है। स्टेप-अप SIP में हर साल निवेश बढ़ने से ज्यादा रकम निवेश होती है। बढ़े हुए निवेश पर कंपाउंडिंग का असर और ज्यादा मिलता है। लंबी अवधि में रिटर्न सामान्य SIP से काफी ज्यादा हो सकता है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद

स्टेप-अप SIP नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद होती है। इसमें सालाना सैलेरी बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ेगा। निवेश बढ़ाने का अतिरिक्त बोझ एक साथ महसूस नहीं होता। फाइनेंशियल गोल जल्दी हासिल करने में मदद मिलती है। रेग्युलर बचत और निवेश की आदत बनी रहती है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों के अनुसार बेहतर फंड तैयार होता है।

बड़े फाइनेंशियल गोल होंगे हासिल

इससे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फंड तैयार होता है। यह तरीका घर खरीदने के लक्ष्य को आसान बनाता है। रिटायरमेंट के लिए मजबूत कॉर्पस बनाता है।

यह लंबी अवधि के बड़े लक्ष्यों के लिए सही निवेश रणनीति होती है।

कहां लगाएं अतिरिक्त राशि?

स्टेप-अप SIP को सही जगह लगाना निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती है। अतिरिक्त रकम को मौजूदा SIP में बढ़ाना सही कदम होता है। नए सेक्टर,थीमैटिक फंड में अतिरिक्त निवेश में ज्यादा जोखिम होता है। ट्रेंडिंग सेक्टर,थीमैटिक और स्मॉलकैप फंड में निवेश करने में जोखिम होता है। ऐसे फंड Cyclical होते हैं और इनमें गलत समय पर निवेश मुश्किल बढ़ाएगा। रिटेल निवेशकों के लिए इन फंडों पर नजर रखना आसान नहीं होता। जब SIP काफी बढ़ जाए,तब पोर्टफोलियो में मिडकैप या स्मॉलकैप फंड जोड़ें। सही एलोकेशन में आवंटन सेलंबे समय में बेहतर रिटर्न संभव है।

बाजार की अस्थिरता से कैसे निपटें?

बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। गिरावट में डरने की बजाय अनुशासित निवेश बरकरार रखें। गिरावट में लंबी अवधि का नजरिया हमेशा काम आता है। अस्थिर बाजार में SIP से लंबे समय में अच्छे रिटर्न मिलते हैं। गोल बेस्ड निवेश गिरावट में निवेशक को इमोशनल फैसले लेने से रोकता है। यदि पैसा 20–25 साल बाद चाहिए तो आज की गिरावट से क्यों डरना। साफ समय-सीमा से निवेशक का बाजार पर भरोसा बना रहता है। बाजार में जल्दबाजी में डेट या हाइब्रिड फंड में शिफ्ट होने से बचें। इससे लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन पर असर पड़ सकता है।

 

Market this week : इस हफ्ते बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

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SIP Investment: बाजार गिरा, फिर भी लोग SIP में क्यों लगा रहे पैसा? मोतीलाल ओसवाल ने बताई बड़ी वजह

SIP Investment: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। इसके बावजूद रिटेल निवेशक SIP के जरिए लगातार निवेश कर रहे हैं। AMFI के ताजा आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान भी SIP का फ्लो मजबूत बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि निवेशकों की आदत बन चुका है।

मार्केट टाइमिंग नहीं, लंबी अवधि पर फोकस

Motilal Oswal Asset Management Company के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि अब लोग SIP को लंबी अवधि की बचत का जरिया मान रहे हैं। पहले की तरह सिर्फ शॉर्ट टर्म रिटर्न के लिए निवेश नहीं किया जा रहा।

उन्होंने बताया कि भारत में घरेलू संपत्ति का सिर्फ 6% हिस्सा इक्विटी में निवेश है। अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 48% है। इसका मतलब है कि भारत में इक्विटी निवेश बढ़ने की अभी काफी गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सेक्टरों में वैल्यूएशन ऊंचे हैं। लेकिन पूरे बाजार में ओवरवैल्यूएशन जैसी स्थिति नहीं दिख रही।

स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में क्यों आ रहा पैसा?

पिछले कुछ वर्षों में स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में निवेश लगातार बढ़ा है। वैल्यूएशन की चिंता के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

सालस्मॉलकैप फंडथीमैटिक फंड
2023₹43,291 करोड़₹31,744 करोड़
2024₹34,874 करोड़₹1,76,915 करोड़
2025₹52,321 करोड़₹38,145 करोड़

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि निवेशक इन फंड्स के जरिए तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। उनका मानना है कि वैल्यूएशन का आकलन पूरी कैटेगरी के बजाय हर शेयर और सेक्टर के आधार पर करना चाहिए।

छोटे शहरों से बढ़ रहे नए निवेशक

टियर-2 और टियर-3 शहरों से नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक बाजार से जुड़े प्रोडक्ट्स को तेजी से अपना रहे हैं।

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि SIP अब सिर्फ तेजी वाले बाजार का निवेश नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की आदत बनता जा रहा है।

शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम

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