Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख में पैसा लगाना बंद कर रहे निवेशक? 6 महीने में 77% घटा निवेश

Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में हर महीने आने वाला अनुमानित निवेश तेजी से घटा है। मार्च 2026 में यह करीब ₹3,950 करोड़ था। सितंबर में घटकर सिर्फ ₹900 करोड़ रह गया। यानी 6 महीने में करीब 77% की गिरावट आई। हालांकि, फंड में पैसा आना बंद नहीं हुआ है। इसके बावजूद फंड मैनेजर ने नए शेयरों और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाना जारी रखा है।

फंड की कैश होल्डिंग भी काफी घटी है। मार्च में कुल संपत्ति का 18.94% पैसा कैश में था। सितंबर में यह घटकर 9.77% रह गया। इस दौरान फंड को रियल एस्टेट, REITs और चुनिंदा ऑयल एंड गैस कंपनियों में निवेश के मौके मिले।

फंड में निवेश क्यों घटा?

PPFAS Mutual Fund के फंड मैनेजर राज मेहता ने Moneycontrol को बताया कि निवेश में कमी से फंड की रणनीति नहीं बदली है। उनके मुताबिक, फंड में अब भी नया पैसा आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। ऐसे में निवेशकों का रुझान भी उनकी तरफ बढ़ा है। अक्सर निवेशक हालिया रिटर्न देखकर अपना पैसा लगाने का फैसला करते हैं।

कैश में पैसा रखने के बजाय कहां निवेश किया?

राज मेहता के मुताबिक, फंड कितना पैसा कैश में रखेगा, यह बाजार के स्तर से ज्यादा निवेश के मौकों पर निर्भर करता है। बाजार में लंबे समय तक खास तेजी न आने और कुछ शेयरों की कीमत घटने से फंड को खरीदारी के मौके मिले। इसलिए उसने कैश घटाकर शेयरों में निवेश बढ़ाया।

सितंबर की फैक्टशीट के मुताबिक, फंड की कुल संपत्ति का 72.06% हिस्सा भारतीय कोर इक्विटी में था। वहीं, 11.90% विदेशी सिक्योरिटीज, IDR और ADR में लगा था। REITs और InvITs में निवेश 6.27% था।

सितंबर में किन शेयरों में बढ़ाया निवेश?

अगस्त के मुकाबले सितंबर में DLF में सबसे ज्यादा नया निवेश किया गया। फंड की कुल संपत्ति का 1.81% हिस्सा इसमें लगाया गया। इसके अलावा Mahindra & Mahindra, Indus Towers, Bharti Airtel और कुछ ऑयल एंड गैस कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया गया।

दूसरी तरफ, फंड ने Great Eastern Shipping Company से अपना निवेश निकाल लिया। अगस्त में इस शेयर में फंड की संपत्ति का 0.11% हिस्सा लगा था।

फंड के पास Embassy Office Parks REIT में 2.49%, Knowledge Realty Trust में 2.18% और Brookfield India Real Estate Trust में 1.60% निवेश था।

फंड का रिटर्न कैसा रहा?

हाल के प्रदर्शन की बात करें तो फंड का रिटर्न कमजोर रहा है। इसके रेगुलर प्लान ने एक साल में 4.14% निगेटिव रिटर्न दिया। वहीं, बेंचमार्क Nifty 500 TRI में 2.03% की गिरावट आई।

हालांकि, तीन, पांच और दस साल की अवधि में फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

राजीव ठक्कर के पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल! इन सेक्टर्स की कंपनियों में बढ़ाई हिस्सेदारी, जानिए किससे लिया एग्जिट

Parag Parikh Flexi Cap Fund Portfolio Changes: देश की सबसे बड़ी फ्लेक्सी-कैप स्कीम पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड (PPFAS) में नए पैसों का आवक बीते पांच महीनों में काफी सुस्त पड़ा है। मार्च 2026 के मुकाबले अगस्त तक फंड में नया निवेश लगभग 72% तक घट चुका है।

वैसे, राहत की बात यह है कि इनफ्लो में सुस्ती के बावजूद फंड का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च के ₹1.32 लाख करोड़ से बढ़कर अगस्त 2026 तक ₹1.47 लाख करोड़ पहुंच चुका है।

फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) राजीव ठक्कर और उनकी टीम ने ₹1.47 लाख करोड़ के इस विशाल पोर्टफोलियो में कई बड़े री-एलोकेशन और रणनीतिक बदलाव किए हैं।

इनफ्लो में 72% की बड़ी गिरावट और शॉर्ट-टर्म रिटर्न का हाल

ACE MF के आंकड़ों के अनुसार, फंड में हर महीने आने वाला नया निवेश तेजी से कम हुआ है:

मार्च 2026: ₹3,949.93 करोड़

अप्रैल 2026: ₹3,613.57 करोड़

जून 2026: ₹2,360.52 करोड़

जुलाई 2026: ₹1,583.47 करोड़

अगस्त 2026: ₹1,098.94 करोड़

रिटर्न का हाल: हालिया महीनों में सुस्त रिटर्न के चलते नए निवेशकों की रफ्तार धीमी हुई है। अगस्त अंत तक यह फंड YTD आधार पर 6.38% नीचे और पिछले 1 साल में 4.46% की गिरावट में था। हालांकि, 3 साल का सालाना रिटर्न 11.56% रहा है।

कैश पूल में से निकाले पैसे, कोर इक्विटी में बढ़ाई हिस्सेदारी

राजीव ठक्कर ने बाजार के मौकों का फायदा उठाने के लिए रिजर्व रखे गए कैश को बाजार में लगाना शुरू कर दिया है। मार्च में फंड के पास 18.94% पैसा कैश, डेट और आर्बिट्राज में रखा था, जो अगस्त में घटकर 11.58% रह गया। इसमें केवल कैश का आवंटन घटकर 3.42% बचा है। भारतीय शेयरों में कोर इक्विटी एलोकेशन मार्च के 66.75% से बढ़ाकर अगस्त में 71.2% कर दिया गया। वहीं विदेशी इक्विटी में हिस्सेदारी 11% के आसपास स्टेबल बनी हुई है।

रियल एस्टेट और REITs पर बढ़ाया दांव

पोर्टफोलियो में सबसे चौंकाने वाला बदलाव रियल एस्टेट और रीयल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट( REITs) में देखने को मिला है। मार्च में REITs का हिस्सा पूरे पोर्टफोलियो में महज 1.51% था। अगस्त तक यह बढ़कर 6.2% पहुंच गया।

कौन-से शेयर आए, कौन से बाहर?

फंड ने Mindspace Business Parks REIT से पूरी तरह एग्जिट कर लिया है। अब इसके पास Knowledge Realty Trust (2.09%), Embassy Office Parks REIT (2.48%) और Brookfield India REIT (1.60%) में हिस्सेदारी है। जुलाई में रियल एस्टेट दिग्गज DLF में फंड का दांव महज 0.03% था, जो अगस्त में बढ़कर 0.64% हो गया।

IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी

राजीव ठक्कर ने दिग्गज आईटी और बैंकिंग कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी मजबूत की है, जबकि पीएसयू कंपनियों में से फंड निकाला है:

IT सेक्टर्स में खरीदारी: मार्च से अगस्त के बीच HCL Tech (3.11% से बढ़कर 4.15%), Infosys (2.61% से बढ़कर 3.29%) और TCS (2.27% से बढ़कर 2.88%) में हिस्सेदारी बढ़ाई गई है। तीनों बड़ी आईटी कंपनियों की कुल हिस्सेदारी अब 10% से ऊपर है।

बैंकिंग व ऑटो: ICICI Bank का वेटेज 5.03% से बढ़कर 5.67%, Bajaj Holdings का 4.09% से 5.14% और Mahindra & Mahindra का 3.36% से बढ़कर 3.97% हो गया।

किसे दिया झटका?

Power Grid की हिस्सेदारी 7.16% से घटाकर 5.58% और Coal India की 6.11% से घटाकर 5.02% कर दी गई। HDFC Bank हल्का घटकर 7.63% रहने के बावजूद पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा होल्डिंग बना हुआ है।

पोर्टफोलियो में बढ़े शेयर, पर टॉप-10 का दबदबा कायम

अप्रैल में फंड के पोर्टफोलियो में केवल 38 शेयर थे, जो अगस्त तक बढ़कर 59 शेयर हो गए। नए शेयर जुड़ने के बावजूद टॉप-10 शेयरों की कुल हिस्सेदारी 52.27% पर केंद्रित है जो अप्रैल में 51.52% थी। फंड का बड़ा हिस्सा लार्ज कैप (65.29%) में ही बना हुआ है। मिड-कैप में हिस्सेदारी 3.44% और स्मॉल-कैप में 4.35% है। पोर्टफोलियो टर्नओवर करीब 43% पर स्थिर है, जो दर्शाता है कि फंड मैनेजर अपने लॉन्ग-टर्म बाय-एंड-होल्ड फिलॉसफी पर ही कायम हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Property vs REITs: ₹20-30 लाख के बजट में घर खरीदें या REITs में लगाएं पैसा? जानें कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न

REITs vs Rental Flat Investment: प्रॉपर्टी में निवेश करके हर महीने पक्की कमाई पाना हर भारतीय का सपना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना लाखों-करोड़ों की जमीन या फ्लैट खरीदे भी आप रियल एस्टेट से हर महीने रेगुलर इनकम कमा सकते हैं?

रियल एस्टेट में निवेश के दो बड़े रास्ते हैं- पहला, खुद का एक छोटा रेंटल फ्लैट खरीदना और दूसरा, रीट्स (REITs – Real Estate Investment Trusts) के जरिए कमर्शियल प्रॉपर्टीज में पैसे लगाना। अगर आपके पास ₹20 से ₹30 लाख रुपये का बजट है, तो आपके लिए कौन सा जरिया सही रहेगा?

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कमाई, जोखिम और सहूलियत के मामले में दोनों में से कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे बेस्ट है।

REITs: कम बजट में बड़े कमर्शियल प्रॉपर्टी का मालिकाना हक

अगर आपके पास ₹20-30 लाख का बजट है, तो कई बड़े शहरों में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री और ब्रोकरेज मिलाकर एक अच्छा रेंटल फ्लैट खरीदना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में REITs एक शानदार विकल्प है।

क्या है REIT? जैसे म्यूचुअल फंड में कई लोगों से पैसा जुटाकर शेयर बाजार में लगाया जाता है, वैसे ही रीट के जरिए पैसे जुटाकर बड़े-बड़े आईटी पार्क्स, मॉल और ऑफिस कॉम्प्लेक्स जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टीज में निवेश किया जाता है।

कमाई का नियम: सेबी के नियमों के मुताबिक, रीट्स को अपनी कमाई का कम से कम 90% हिस्सा अपने निवेशकों को डिविडेंड या ब्याज के रूप में बांटना अनिवार्य है।

रेंटल फ्लैट: कंट्रोल पूरा, लेकिन सिरदर्दी भी कम नहीं

एक छोटा रेंटल फ्लैट आपको एक ‘भौतिक संपत्ति’ देता है, जो आंखों के सामने होती है।

फायदे: किराएदार कौन होगा, कितना किराया बढ़ाना है और प्रॉपर्टी कब बेचनी है इन सब पर आपका पूरा नियंत्रण रहता है। अगर इलाका तेजी से विकसित होता है, तो प्रॉपर्टी के दाम भी जबरदस्त बढ़ते हैं।

कमियां और मेहनत: भारत में आवासीय संपत्तियों का सालाना रेंटल यील्ड महज 1.5% से 4% के आसपास ही रहता है। इसके अलावा मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, मरम्मत, ब्रोकरेज और किराएदार न मिलने पर खाली पड़े रहने का घाटा अलग से सहना पड़ता है।

लिक्विडिटी और डाइवर्सिफिकेशन: REITs क्यों मारता है बाजी?

Property vs REITs: ₹20-30 लाख का बजट में घर खरीदें या REITs में लगाएं पैसा? जानें कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेहतर?

REITs आपके लिए सही हैं अगर: आप बिना मकान मालिक बने और बिना किसी सिरदर्दी के रियल एस्टेट से कमाई करना चाहते हैं। अगर आपको लिक्विडिटी पसंद है और आप बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव को झेल सकते हैं।

रेंटल फ्लैट आपके लिए सही है अगर: आपके पास पर्याप्त पूंजी है, आपको स्थानीय रियल एस्टेट मार्केट की अच्छी समझ है, और आप लंबे समय तक किरायेदारों व मेंटेनेंस को संभालने के लिए तैयार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या रीट्स (REITs) में रेंटल इनकम की गारंटी होती है?

उत्तर: नहीं, रीट्स में कमाई की कोई फिक्स्ड गारंटी नहीं होती। हालांकि, नियम के तहत इन्हें अपनी 90% कमाई बांटनी होती है, लेकिन यह बिजनेस के प्रदर्शन और ऑक्यूपेंसी रेट पर निर्भर करता है।

Q2: क्या रीट्स रेंटल फ्लैट से ज्यादा सुरक्षित हैं?

उत्तर: दोनों में अलग-अलग तरह का रिस्क है। रीट्स शेयर बाजार से जुड़े होने के कारण उतार-चढ़ाव वाले होते हैं, जबकि एक अकेले फ्लैट में लोकेशन, किराएदार न मिलने और पूरे पैसे एक जगह फंसने का रिस्क होता है।

Q3: क्या मैं दोनों में एक साथ निवेश कर सकता हूं?

उत्तर: बिल्कुल! बेहतर पोर्टफोलियो बनाने के लिए आप अपने पैसों को रीट्स और फिजिकल प्रॉपर्टी दोनों में बांटकर लगा सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

निलेश शाह ने दी घरों में रखे सोना और कैश के इस्तेमाल की सलाह, कहा-इससे बदल जाएगी निवेश की तस्वीर

कोटक एएमसी के एमडी और सीईओ निलेश शाह ने सेबी को एक खास सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि परिवारों को सेविंग्स का पैसा फाइनेंशियल एसेट्स में लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके लिए सेबी को नए प्रोडक्ट स्ट्रक्चर पर विचार करना चाहिए। इनमें गोल्ड लिंक्ड प्रोडक्ट, चेक राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड्स और रीट्स के लिए डेडिकेटेड म्यूचुअल फंड हो सकते हैं।

बड़ी संख्या में लोग घरों में सोना और कैश रखते हैं

शाह ने FICCI के 23वें एनुअल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में इनवेस्टमेंट के बारे में कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग गोल्ड और कैश में पैसा रखते हैं। फाइनेंशियल इंडस्ट्री को ऐसे प्रोडक्ट्स लाने की जरूरत है, जिनमें लोग सेविंग्स का अपना पैसा लगा सकें।

शाह ने सेबी के होल-टाइम मेंबर के सवाल के दिए जवाब

कोटक एएमसी के प्रमुख ने सेबी के होल-टाइम मेंबर अमरजीत सिंह के उस सवाल का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या मौजूदा नियम म्यूचुअल फंड्स को घरेलू सेविंग्स को अट्रैक्ट करने की पूरी छूट नहीं देते और क्या इंडियन मार्केट में प्रोडक्ट स्ट्रक्चर्स मौजूद नहीं हैं।

2005 में गोल्ड-लिंक्ड प्रोडक्ट शुरू करने पर हुआ था विचार

शाह ने एक प्रोडक्ट के बारे में बताया, जिसका प्रस्ताव 2005 में आया था। इस प्रोडक्ट में रिटेल इनवेस्टर के 100 रुपये के निवेश को गोल्ड-लिंक्ड ऑप्शन और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में बांटने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा, “हम रिटेल इनवेस्टर से 100 रुपये लेते और 7 रुपये गोल्ड ऑप्शन में लगाते। बाकी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इनवेस्ट करते।”

रेगुलेशन से जुड़ी चिंता की वजह से बाजार में नहीं आ सका प्रोडक्ट

उन्होंने कहा, “हम ऐसे प्रोडक्ट पर विचार कर रहे थे, जिसमें गोल्ड की कीमतें गिरने पर निवेशकों का पैसा नहीं डूबता। लेकिन, गोल्ड की कीमतें बढ़ने पर उन्हें फायदा होता। इसके अलावा उन्हें अपने पैसे पर सुरक्षा मिलती। इतना ही नहीं, उन्हें कुछ रिटर्न भी मिलता।” लेकिन, रेगुलेटर से जुड़ी चिंता की वजह से यह प्रोडक्ट नहीं आ सका।

चेक-राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट प्रोडक्ट पर भी होना चाहिए विचार

शाह ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट पर हम फिर से विचार कर सकते है, क्योंकि अब देश के फाइनेंशियल मार्केट्स और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क विकसित हो चुके हैं। उन्होंने एक मनी मार्केट फंड का भी प्रस्ताव दिया, जिसमें चेक-राइटिंग फैसिलिटी शामिल हो सकती है।

दुनियाभर में चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड का होता है इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट में बैंक अकाउंट जैसी लिक्विडिटी मिलेगी। साथ ही उतना रिटर्न मिलेगा जितना शॉर्ट टर्म मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश पर मिलता है। उन्होंने कहा, “दुनियाभर में इनवेस्टर्स चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड में निवेश करते हैं और उसका इस्तेमाल पेमेंट के लिए करते हैं।”

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सिर्फ REITs में निवेश करना वाला फंड शुरू करने की सलाह

शाह ने कहा, “सेबी ने रिटेल इनवेस्टर्स को REIT में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काफी कोशिश की है। हमने रिटेल REIT में निवेश की इजाजत दी। क्या हम अब ऐसा फंड बना सकते हैं, जो सिर्फ रिटेल REIT में निवेश करेगा?” उन्होंने यह माना कि REIT की पर्याप्त लिस्टिंग, ट्रेड़िंग और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी के बाद यह प्रोडक्ट अट्रैक्टिव बन सकता है।

Stocks to Watch: 16 स्टॉक्स, Nifty की एक्सपायरी को Paytm, Milky Mist, Baazar Style समेत ये फोकस में

Stocks to Watch: कच्चे तेल में उबाल और अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली के दबावों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 74.50 प्वाइंट्स यानी 0.31% की गिरावट के साथ 24,300 पर है। चूंकि आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज उठा-पटक दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 17 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 281.09 प्वाइंट्स यानी 0.36% की गिरावट के साथ 77,728.16 और निफ्टी 78.35 प्वाइंट्स यानी 0.32% की फिसलन के साथ 24,287.65 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Indo-MIM

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर इंडो-एमआईएम का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 31.6% बढ़कर ₹240.1 करोड़ और रेवेन्यू 9.4% उछलकर ₹1,218.7 करोड़ पर पहुंच गया।

One 97 Communications (Paytm)

सीएनबीसी-टीवी18 की सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के अनुसार विजय शेखर शर्मा की पैरेंट और प्रमोटर कंपनी रेसिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी प्रति शेयर ₹1535 के फ्लोर प्राइस पर पेटीएम में 4.98% तक की हिस्सेदारी बेच सकती है।

SPR Auto Technologies

एसपीआर ऑटो टेक्नोलॉजीज ने 17 अगस्त को अपना QIP इश्यू लॉन्च किया, जिसका फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹4,438.20 तय किया गया है। सूत्रों के हवाले से CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी इसके जरिए लगभग ₹1,000 करोड़ जुटा सकती है।

Netweb Technologies India

नेटवेब टेक्नोलॉजीज इंडिया का क्यूआईपी इश्यू 17 अगस्त को प्रति शेयर ₹4,885.90 के फ्लोर प्राइस पर खुला। सूत्रों के हवाले से CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक इसके जरिए कंपनी लगभग ₹1,200 करोड़ जुटा सकती है।

Jyoti CNC Automation

ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन को राजकोट में मौजूद अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में अगले पांच वर्षों में ₹1,020.65 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत मंज़ूरी मिल गई है। इस स्कीम के तहत कंपनी निवेश पर 25% तक के कैपेक्स इंसेंटिव के लिए एलिजिबल होगी।

Manipal Health Enterprises

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने बेंगलुरु के डोड्डानेकुंडी इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित किंडर हॉस्पिटल के पूरे बिजनेस ऑपरेशन और एसेट्स को ₹130 करोड़ में खरीदने के लिए किंडोरामा हेल्थकेयर के साथ एक बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट साइन किया है।

Highway Infrastructure

हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को तमिलनाडु में ‘पालयम फी प्लाजा’ के ऑपरेशंस के लिए ₹80.17 करोड़ का LoA (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) मिला है। यह LOA (लेटर ऑफ अवार्ड) NHAI ने जारी किया था।

Embassy Office Parks REIT

अमेरिका की प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फर्म बेन कैपिटल ने अपनी सहयोगी कंपनी APAC Company XXIII के जरिए एम्बेसी ऑफिस पार्क्स REIT के 2.67 करोड़ यूनिट्स ₹435.05 के भाव और 2.67 करोड़ यूनिट्स ₹435.01 के भाव पर बेच दिए। इसने कुल मिलाकर 5.63% होल्डिंग ₹2,325.28 करोड़ में बेचे हैं।

Baazar Style Retail

क्युपिड के प्रमोटर आदित्य कुमार हलवासिया ने बाजार स्टाइल रिटेल के प्रमोटर्स- भगवान प्रसाद, सिद्धार्थ सुराना और श्रेयांस सुराना से 45 लाख शेयर (5.91% हिस्सेदारी) ₹162.9 करोड़ में प्रति शेयर ₹362 के भाव पर खरीदे।

LEAP India

सिंगापुर सरकार ने लीप इंडिया के 22.15 लाख शेयर (0.5% हिस्सेदारी) ₹34.39 करोड़ में प्रति शेयर ₹155.28 के भाव पर खरीद लिए।

RPP Infra Projects

दिवा प्रोजेक्ट्स ने आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के अतिरिक्त 8.51 लाख शेयर (1.7% हिस्सेदारी) ₹4.99 करोड़ में प्रति शेयर ₹58.67 के भाव पर खरीदे। वहीं प्रमोटर यगावी एन ए ने 8.95 लाख शेयर (1.8% हिस्सेदारी) ₹5.25 करोड़ में ₹58.68 के भाव पर बेच दी।

Ponni Sugars (Erode)

प्रमोटर शेषशायी पेपर एंड बोर्ड्स ने पोन्नी शुगर्स (इरोड) के 2.9 लाख शेयर (3.37% हिस्सेदारी) ₹10.15 करोड़ में प्रति शेयर ₹350 के भाव पर खरीदे। वहीं इन्वेस्टर अत्यंत कैपिटल इंडिया फंड I ने 3.13 लाख शेयर (3.6% हिस्सेदारी) ₹10.96 करोड़ में प्रति शेयर ₹349.85 के भाव पर बेचे। जून 2026 तक अत्यंत कैपिटल इंडिया फंड की कंपनी में 9.46% हिस्सेदारी थी।

Kesar India

मिनर्वा वेंचर्स फंड ने नागपुर की रियल एस्टेट डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी केसर इंडिया इंडिया के 11.78 लाख शेयर (3.76% होल्डिंग) फोर्ब्स ईएमएफ से ₹149.01 करोड़ में प्रकि शेयर ₹1,265 के भाव पर खरीदे। जून 2026 तक केसर इंडिया में मिनर्वा वेंचर्स फंड की 3.51% और फोर्ब्स ईएमएफ की 4.25% हिस्सेदारी थी।

VISA Chrome

एसेट्स केयर एंड रीकंस्ट्रक्शन एंटरप्राइज ने वीजा क्रोम के 78.93 लाख शेयर ₹30 करोड़ में बेचे। वहीं महा इंवेस्टमेंट फंड पीसीसी-ओनिक्स स्ट्रैटेजी ने 78.94 लाख शेयर ₹30 करोड़ में यानी प्रति शेयर ₹38 के भाव पर खरीदे।

Milky Mist Dairy Food

आईपीओ को 59 गुना बोली मिलने के बाद मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे। इसके शेयर ₹140 के भाव में जारी हुए हैं।

Sham Foam

आईपीओ को 2.40 गुना बोली मिलने के बाद शैम फोम के शेयर ₹130 के भाव पर जारी हुए और अब इसकी बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

इन स्टॉक्स पर भी फोकस

एक्स-डिविडेंड: ECOS (इंडिया) मोबिलिटी एंड हॉस्पिटैलिटी, एलिक्सिर कैपिटल, इंडिया जिलेटिन एंड केमिकल्स, महानगर गैस, NGL फाइन केम, रॉसेल इंडिया, रूट मोबाइल, रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL), सोधानी एकेडमी ऑफ फिनटेक इनेबलर्स, शेषासाई टेक्नोलॉजीज, सन टीवी नेटवर्क, सिर्मा SGS टेक्नोलॉजी, फोर्ब्स प्रिसिजन टूल्स एंड मशीन पार्ट्स, वसुंधरा रसायन

इनकम डिस्ट्रीब्यूशन की एक्स-डेट: सिटियस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट

कैपिटल रिडक्शन की एक्स-डेट: आशुतोष पेपर मिल्स

बाय बैक की एक्स-डेट: इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट

स्प्लिट की एक्स-डेट: किर्लोस्कर न्यूमैटिक कंपनी

F&O Ban: बंधन बैंक, एलआईसी, मणप्पुरम फाइनेंस और SAIL

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: सोमवार, 17 अगस्त को बाजार खुलते ही कई शेयरों में तगड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने मजबूत तिमाही नतीजे दिए हैं, तो कुछ पर बड़े ऑर्डर, ब्लॉक डील और रेगुलेटरी अपडेट का असर रह सकता है। डिफेंस, बैंकिंग, रियल एस्टेट, FMCG और इंजीनियरिंग समेत कई सेक्टर फोकस में रहेंगे। ऐसे में इन 20 शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

Cochin Shipyard

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Cochin Shipyard के नतीजे कमजोर रहे। नेट प्रॉफिट 27.7% घटकर ₹135.8 करोड़ रह गया। रेवेन्यू और EBITDA में भी गिरावट दर्ज हुई। कमजोर प्रदर्शन का असर शेयर पर पड़ सकता है।

Reliance Industries

तेल-टेलीकॉम से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक कारोबार करने वाली Reliance Industries ने ब्रिटेन की एयरोस्पेस कंपनी Rolls-Royce के साथ बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियां भारत के AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने पर काम करेंगी। इसके लिए भारत में एक एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की भी योजना है, जो पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा।

Voltas

एयर कंडीशनर और होम एप्लायंसेस बनाने वाली टाटा ग्रुप की कंपनी Voltas ने मजबूत तिमाही नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹140 करोड़ से बढ़कर ₹214 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 19% बढ़कर ₹4,674 करोड़ पहुंच गया। बेहतर नतीजों से शेयर में हलचल दिख सकती है।

Max Estates

रियल एस्टेट कंपनी Max Estates का पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% घटकर ₹8.35 करोड़ रह गया। रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 0.85% बढ़कर ₹51.91 करोड़ पहुंचा। वहीं, EBITDA 41.6% गिरकर ₹8.12 करोड़ रहा। हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले कंपनी ने घाटे से मुनाफे में वापसी की है।

Texmaco Rail & Engineering

रेलवे और इंजीनियरिंग कंपनी Texmaco Rail & Engineering ने अपनी डिफेंस सब्सिडियरी Texmaco Defence Technologies में ₹200 करोड़ तक के निवेश के लिए समझौता किया है। पहले चरण में ₹100 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करके लगाए जाएंगे। बाकी ₹100 करोड़ इक्विटी, डेट या अन्य वित्तीय साधनों के जरिए निवेश किए जाएंगे।

BEML

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी BEML को मॉरीशस से 6.65 मिलियन डॉलर (करीब ₹63.5 करोड़) का एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी BE220G हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर अफ्रीका के कई देशों में सप्लाई करेगी। ऑर्डर की शुरुआत सिएरा लियोन में पायलट डिप्लॉयमेंट से होगी।

Ather Energy

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ather Energy के शेयरधारकों ने ₹1,200 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दे दी है। इससे पहले कंपनी ₹1,300 करोड़ का QIP भी पूरा कर चुकी है। दोनों को मिलाकर कंपनी ने करीब ₹2,500 करोड़ जुटाए हैं।

NMDC Steel

सरकारी स्टील कंपनी NMDC Steel ने पहली तिमाही में मजबूत ग्रोथ दिखाई। नेट प्रॉफिट 97.6% बढ़कर ₹50.51 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 8.8% बढ़कर ₹3,661.84 करोड़ पहुंचा। बेहतर नतीजों से निवेशकों की नजर रहेगी।

Embassy Office Parks REIT

रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट Embassy Office Parks REIT में Bain Capital की इकाई APAC Company XXIII Limited ने ब्लॉक डील लॉन्च की है। बेस ऑफर के तहत 4.42% हिस्सेदारी वाले 4.19 करोड़ यूनिट करीब ₹1,802 करोड़ में बेचे जाएंगे। अपसाइज विकल्प जोड़ने पर डील का आकार करीब ₹2,298 करोड़ तक पहुंच सकता है।

Patanjali

FMCG कंपनी पंतजलि ने शानदार तिमाही प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा ₹180 करोड़ से बढ़कर ₹336 करोड़ हो गया। इसके साथ FY27 के लिए ₹0.80 और FY26 के लिए ₹1.50 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान भी किया है।

IndusInd Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक IndusInd Bank पर RBI ने ₹59.20 लाख का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नियमों के पालन में कमी के चलते हुई है। बैंक पर ब्याज दर और सिक्योरिटाइजेशन नियमों के उल्लंघन का मामला है।

PhysicsWallah

एडटेक कंपनी PhysicsWallah का घाटा कम हुआ है। नेट लॉस ₹120.5 करोड़ से घटकर ₹77.6 करोड़ रह गया। यानी कंपनी ने घाटे में करीब ₹42.9 करोड़ की कमी दर्ज की है।

PB Fintech

इंश्योरेंस और फिनटेक कंपनी PB Fintech की सब्सिडियरी Policybazaar को IRDAI से शो-कॉज नोटिस मिला है। यह नोटिस पिछले निरीक्षण के दौरान की गई टिप्पणियों से जुड़ा है। कंपनी ने तय समय में जवाब देने की बात कही है।

Dr. Reddy’s Laboratories

फार्मा कंपनी Dr. Reddy’s Laboratories की हैदराबाद स्थित FTO-3 यूनिट का USFDA निरीक्षण पूरा हो गया है। निरीक्षण के बाद अमेरिकी नियामक ने Form 483 जारी किया है। इसमें चार ऑब्जर्वेशन दर्ज किए गए हैं।

BMW Industries

स्टील प्रोसेसिंग कंपनी BMW Industries ने बेहतर तिमाही नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 25.8% बढ़कर ₹19.04 करोड़ हो गया। कुल आय भी 15% बढ़कर ₹176.68 करोड़ पहुंच गई।

NMDC

सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2% बढ़कर ₹2,007 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 2.4% बढ़कर ₹6,795 करोड़ रहा। मजबूत प्रदर्शन से शेयर पर नजर रहेगी।

Jupiter Wagons

रेलवे वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons का मुनाफा 13.6% घटकर ₹28.3 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 46% बढ़कर ₹670.7 करोड़ पहुंचा। EBITDA में भी हल्की बढ़त दर्ज हुई।

Zaggle Prepaid

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid का नेट प्रॉफिट 33% घटकर ₹17.5 करोड़ रह गया। इसके बावजूद रेवेन्यू 27.5% बढ़कर ₹423 करोड़ हो गया। मिले-जुले नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

Borosil

ग्लासवेयर और किचनवेयर कंपनी Borosil का नेट प्रॉफिट 26.4% घटकर ₹13 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 9% बढ़ा, लेकिन EBITDA में गिरावट दर्ज हुई। इससे शेयर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Schneider Electric

इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट कंपनी Schneider Electric के नतीजे कमजोर रहे। नेट प्रॉफिट करीब 70% घटकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू में हल्की बढ़त रही, लेकिन EBITDA और मार्जिन पर दबाव बना रहा।

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निफ्टी 50 में बड़ा बदलाव! विप्रो 3 दशक बाद इंडेक्स से बाहर होगी, BSE को मिलेगी एंट्री

निफ्टी 50 में एक बड़ा बदलाव होने वाला है। इस इंडेक्स में स्टॉक्स एक्सचेंज BSE को दिग्गज आईटी कंपनी Wipro की जगह शामिल किया जाएगा। यह बदलाव 30 सितंबर से लागू होगा। इसके साथ ही बेंगलुरु की आईटी कंपनी Wipro का भारत के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स से करीब तीन दशक पुराना सफर खत्म हो जाएगा।

Wipro असल में Nifty 50 की शुरुआत से ही इसका हिस्सा रही है। हालांकि, अप्रैल से सितंबर 2013 के बीच कंपनी इस इंडेक्स से बाहर रही थी। उस समय Wipro के नॉन-आईटी कारोबार के डीमर्जर की वजह से यह बदलाव हुआ था। इसके बाद कंपनी लगातार Nifty 50 में बनी रही।

Wipro से पैसा निकलने का अनुमान

Nuvama के अनुमान के मुताबिक, Wipro के Nifty 50 से बाहर होने पर इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंड करीब 246 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर सकते हैं। दूसरी ओर, BSE के इंडेक्स में शामिल होने से करीब 741 मिलियन डॉलर का निवेश आने का अनुमान है।

BSE के लिए यह बदलाव काफी अहम है। पिछले पांच साल में कंपनी के शेयर में 2,600% से ज्यादा की तेजी आई है। ट्रेडिंग वॉल्यूम, डेरिवेटिव्स कारोबार और बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से कंपनी को फायदा मिला है।

Nifty 500 में भी बदलाव

Nifty 50 में बदलाव के साथ NSE ने दूसरे प्रमुख इंडेक्स में भी बदलाव किए हैं। Nifty 500 से 3M India, Aditya Birla Fashion and Retail, Aditya Birla Lifestyle Brands, Bayer Cropscience, Blue Dart Express, Chalet Hotels, Go Digit General Insurance, Indegene, Jubilant Pharmova, Latent View Analytics, Sonata Software और Travel Food Services जैसी कंपनियां बाहर होंगी।

वहीं, Nifty 500 में Aether Industries, Avanti Feeds, Azad Engineering, Black Box, Brookfield India REIT, Embassy Office Parks REIT, Fractal Analytics, INOX India, Kirloskar Brothers, MTAR Technologies, Sansera Engineering, Sterlite Technologies और Vedanta Aluminium समेत कई कंपनियां शामिल होंगी।

Stocks to Watch: 11 अगस्त को इन 24 शेयरों पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत में विदेशी निवेश लाने के लिए सरकार ने पेश किया बिल, विदेशी निवेशकों को मिलेगी बड़ी राहत

भारत में विदेशी निवेश लाने के लिए सरकार ने संसद में बिल पेश किया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक विदेशी निवेशकों और ग्लोबल इनवेस्टमेंट फंड को बड़ी राहत दी गई है। REIT और InvIT निवेशकों को भी बड़ा रिलीफ दिया गया है। इस पर ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय ने सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अधार पर कहा कि संसद में टैक्स से जुड़ा Taxation And Other Laws (Amendment) बिल पेश किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक FM की ओर से पेश बिल 3 थीम पर आधारित है। ये तीन थीम हैं FDI, मेक इन इंडिया और ईज ऑफ डूईंग बिजनेस। इसके तहत ग्लोबल इनवेस्टमेंट फंड निवेश शर्तों में कटौती का प्रस्ताव है। केवल दुरुपयोग रोकने के प्रावधान बिल में शामिल है। इसमें FPIs टैक्स से जुड़े स्पष्ट और स्थायी प्रावधान हैं। इसके तहत ग्लोबल फंड मैनेजर भारत में अपना फंड रीलोकेट कर सकेंगे।

इस बिल में REIT और InvIT निवेशकों को बड़ी राहत दी गई है। REIT-InvIT डिविडेंड पर टैक्स छूट जारी रहेगी। नई टैक्स व्यवस्था में भी टैक्स-फ्री डिविडेंड का प्रावधान है। अब टैक्स रिजीम बदलने से निवेशकों पर असर नहीं। सरकार का जोर छोटे निवेशकों के हित की रक्षा पर है। डेटा सेंटर सेक्टर को बड़ी टैक्स राहत देने की तैयारी है। डेटा सेंटर के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान होगी। सरकारी मंजूरी की कई शर्तें खत्म होंगी।

इसके अलावा सरकार ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल के तहत,भारत में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को कैपिटल गुड्स,इक्विपमेंट और टूलिंग सप्लाई करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स छूट को FY31 से FY41 तक एक दशक तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।

इस बिल के जरिए इनकम-टैक्स एक्ट,2025 के शेड्यूल IV में बदलाव किया जाएगा। जिसके तहत कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर को कैपिटल गुड्स,इक्विपमेंट या टूलिंग देने वाली विदेशी कंपनियों को संबंधित इनकम पर टैक्स से छूट मिलती है,बशर्ते कंपनी के बनाए गए प्रोडक्टस भारत में ही इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल हों।