यूक्रेन ने जंग में विस्फोटकों से लैस रोबोट सैनिक उतारे:रूस के 3000 सैनिकों को मारने का दावा; 5 गांव और 3 बस्तियां वापस लीं

रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के मुताबिक, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के तहत रोबोट और ड्रोन की मदद से रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया गया। साथ ही, पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में 5 गांवों और 3 बस्तियों पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया गया। यूक्रेनी सेना के मुताबिक, यह अभियान मई में शुरू हुआ था और सितंबर के आखिरी सप्ताह में पूरा हुआ। सेना ने गुरुवार को इसकी जानकारी सार्वजनिक की। इस दौरान रोबोट ने 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए। ड्रोन से दुश्मन के इलाके में उतारे रोबोट इस ऑपरेशन में चार पहियों वाले ऐसे रोबोट इस्तेमाल किए गए, जिनमें विस्फोटक भरे थे। बड़े ड्रोन इन्हें रूसी सेना की सीमा के 14.5 किमी अंदर तक ले जाकर छोड़ते थे। इसके बाद ये रोबोट जमीन पर चलते हुए रूसी सैनिकों के ठिकानों तक पहुंचते और हमला करते थे। रोबोट में लगे कैमरों से आसपास के इलाके पर नजर रखी जाती थी। इनकी मदद से रूसी सेना के कमांड सेंटर, सैनिकों के ठिकानों, हथियार और सामान रखने की जगहों और नदी पार करने के रास्तों पर हमले किए गए। इस रणनीति का मकसद यूक्रेनी सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना रूसी ठिकानों पर हमला करना था। थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर जनरल आंद्री बिलेत्स्की ने कहा कि यूक्रेन दुनिया में पहली बार ड्रोन से रोबोट को दुश्मन के इलाके में उतारकर हमला कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘दुश्मन को आसमान से हमले का खतरा रहता है, जमीन से नहीं। रूसी सैनिकों को वहां से हमले का सामना करना पड़ा, जहां उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी।’ कैसे काम करते हैं सुसाइड रोबोट? सुसाइड जमीनी रोबोट छोटे वाहन होते हैं, जो पहियों से चलते हैं। इन्हें दूर बैठकर ऑपरेटर रिमोट से चलाता है। इनमें विस्फोटक भरे होते हैं। ये दुश्मन के सैनिकों या ठिकानों तक पहुंचकर धमाका करते हैं। इन रोबोट की मदद से सैनिकों को बारूदी सुरंगों, गोलियों और दुश्मन के हमलों के बीच सीधे जाने का खतरा कम होता है। ड्रोन इन्हें दुश्मन के इलाके में पहुंचाते हैं और रोबोट में लगे कैमरों से ऑपरेटर आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता है। हालांकि, ये रोबोट हर काम अपने आप नहीं करते। इन्हें चलाने और हमले का फैसला लेने में इंसान की भूमिका अहम होती है। रूस और भारत समेत कई देश बना रहे जमीनी रोबॉट यूक्रेन के अलावा रूस, चीन और इजराइल समेत कई देश जंग में इस्तेमाल होने वाले जमीनी रोबॉट बना रहे हैं। रूस इनका इस्तेमाल हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने जैसे कामों में कर रहा है। ची न ऐसे रोबॉट बना रहा है, जो हथियार ले जाने और मिलकर काम करने में सक्षम हों। वहीं, इजराइल भी रोबॉट से चलने वाले लड़ाकू वाहन विकसित कर रहा है। भारत भी इस तकनीक पर काम कर रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चलने वाले रोबॉट और मानवरहित जमीनी वाहन बना रहा है। भारत में ‘एक्सप्लोडर’ नाम का एक ऐसा वाहन विकसित किया गया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकता है। इसका इस्तेमाल निगरानी करने और विस्फोटकों से जुड़े खतरनाक काम करने में किया जा सकता है।

Drone Stocks: भारत अपनी सबसे बड़ी सैन्य ड्रोन खरीद करेगा, जानिए किन स्टॉक्स पर रखनी चाहिए नजर

Drone Stocks: 20 सितंबर को रूस के मॉस्को और दूसरे शहरों पर बड़ी संख्या में ड्रोन से हमले हुए। दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों की नजर इन हमलों पर रही। वजह साफ है। छोटे और कम लागत वाले ड्रोन अब युद्ध का तरीका बदल रहे हैं।

भारत भी इस बदलाव को गंभीरता से देख रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हुआ था। अब भारत अपने पास बड़ा घरेलू सैन्य ड्रोन बेड़ा तैयार करने में जुटा है।

₹20,000 करोड़ से ज्यादा की ड्रोन खरीद

भारत अब तक की सबसे बड़ी सैन्य ड्रोन खरीद करने वाला है। इसके तहत 2 अरब डॉलर यानी ₹20,000 करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर दिए जा सकते हैं।

इनमें कई तरह के ड्रोन शामिल होंगे। इनमें निगरानी वाले टैक्टिकल ड्रोन, सामान पहुंचाने वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन, ऑटोनॉमस सिस्टम और हमला करने की क्षमता वाले ड्रोन शामिल हो सकते हैं। इनकी डिलीवरी अगले 18 से 24 महीनों में होने की उम्मीद है।

यह खरीद हाल की करीब ₹3,000 करोड़ की टैक्टिकल ड्रोन खरीद से काफी बड़ी होगी। इससे भारतीय ड्रोन कंपनियों को आने वाले समय में बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं।

भारत में 600 से ज्यादा ड्रोन कंपनियां

देश में ड्रोन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इस सेक्टर में अब 600 से ज्यादा कंपनियां हैं। इनमें 100 से ज्यादा कंपनियां डिफेंस ड्रोन पर काम कर रही हैं।

Tata Advanced Systems, Adani Defence & Aerospace और ideaForge Technology जैसे बड़े नाम इसमें शामिल हैं। इसके अलावा NewSpace Research & Technologies, Raphe mPhibr और Dhaksha Unmanned Systems जैसे स्टार्टअप भी तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं।

ये कंपनियां सिर्फ सामान्य ड्रोन नहीं बना रही हैं। स्वॉर्म ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी काम हो रहा है।

Tata, Adani और ideaForge को बड़ा फायदा

ड्रोन की इतनी बड़ी खरीद से बड़ी डिफेंस कंपनियों के साथ घरेलू ड्रोन कंपनियों को भी फायदा हो सकता है। Tata Advanced Systems ने एयरोस्पेस और डिफेंस के साथ अनमैन्ड सिस्टम में अपनी क्षमता बढ़ाई है।

अगस्त में Tata Advanced Systems और NIBE को भारतीय सेना से ₹1,577 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। इसमें लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम और 840 म्यूनिशन की सप्लाई शामिल है।

Adani Defence & Aerospace भी UAV और निगरानी सिस्टम में काम कर रहा है। वहीं, ideaForge Technology टैक्टिकल UAV बनाने वाली प्रमुख भारतीय कंपनियों में शामिल है।

Solar Industries भी ड्रोन वॉरफेयर में उतरी

डिफेंस और एक्सप्लोसिव्स सेक्टर की कंपनी Solar Industries India भी अनमैन्ड वॉरफेयर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। कंपनी का डिफेंस कारोबार Nagastra लोइटरिंग म्यूनिशन से जुड़ा है।

Motilal Oswal के मुताबिक, जून 2026 तक कंपनी का डिफेंस ऑर्डर बुक करीब ₹18,000 करोड़ था। इसमें करीब ₹11,000 करोड़ के इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट और ₹6,000 करोड़ का Pinaka ऑर्डर शामिल था।

अब एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी जोर

ड्रोन की बात सिर्फ ड्रोन बनाने तक सीमित नहीं है। युद्ध में ड्रोन को रोकना भी उतना ही जरूरी हो गया है। इसलिए भारत में एंटी-ड्रोन सिस्टम का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है।

सितंबर में पोखरण में भारतीय वायुसेना ने Dronathon आयोजित किया। इसमें निगरानी, टोही, स्वॉर्म, ऑटोनॉमस ऑपरेशन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का परीक्षण किया गया।

DRDO भी 30kW क्षमता वाले काउंटर-ड्रोन लेजर को उत्पादन की दिशा में ले जा रहा है। यह सिस्टम 5 किलोमीटर तक की दूरी पर ड्रोन को निष्क्रिय कर सकता है।

2031 तक 2.23 अरब डॉलर का हो सकता है बाजार

Spherical Insights के अनुमान के मुताबिक, भारत का मिलिट्री ड्रोन बाजार 2026 में करीब 81.14 करोड़ डॉलर का है। 2031 तक इसके 2.23 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यानी इस दौरान करीब 22.4% की सालाना ग्रोथ हो सकती है।

बॉर्डर पर निगरानी और सेना के आधुनिकीकरण से ड्रोन की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा सरकार भी डिफेंस में आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है।

मार्च में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत को स्वदेशी ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने की जरूरत बताई थी। इसके लिए सिर्फ ड्रोन नहीं, बल्कि उनके कंपोनेंट्स, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी का पूरा इकोसिस्टम देश में तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

वायुसेना को मिलेगा तेजस ट्विन सीटर और HTT-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में HAL करने जा रही बड़ा धमाका

Aatmanirbhar Bharat: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कल यानी 18 सितंबर 2026 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना (IAF) को LCA तेजस FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपेगा। इसके अलावा ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड (PHL) को सौंपे जाएंगे। यह कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू की मौजूदगी में होगा।

HAL के अनुसार, यह हैंडओवर भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में HAL और उसके उद्योग साझेदारों की भूमिका को दिखाया किया जाएगा। इन्होंने देश में सैन्य और नागरिक, दोनों क्षेत्रों के लिए उन्नत एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म के डिजाइन, विकास और निर्माण की क्षमता को मजबूत किया है।

वायुसेना और पवन हंस के लिए अहम सौंपे जाएंगे प्लेटफॉर्म

इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को LCA तेजस के FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट मिलेंगे। वहीं, ध्रुव NG हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी पवन हंस लिमिटेड को की जाएगी। कार्यक्रम में चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, HAL के CMD रवि के. सहित रक्षा और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों, वायुसेना, पवन हंस, नियामक एजेंसियों तथा एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर सरकार का जोर

सरकार ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने को उच्च प्राथमिकता दी है। इन प्लेटफॉर्म्स को शामिल करना स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

‘भारत के विजन की आधारशिला है रक्षा क्षेत्र’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भविष्य की लड़ाई में रणनीतिक बढ़त तकनीकी नेतृत्व से तय होगी। उन्होंने कहा कि आज हम जो कल्पना करते हैं। वही कल की सैन्य क्षमता बनेगी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का विजन सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाने के बारे में नहीं है। बल्कि ऐसा भारत बनाने के बारे में है जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित हो।

सिंह ने रक्षा क्षेत्र को इस विज़न की नींव बताया। उन्होंने कहा, “2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल काफी बढ़ाना होगा। रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ाना होगा और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।” रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि सहयोग के बिना इनमें से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच मजबूत साझेदारी होनी चाहिए।

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सिंह ने कहा कि DRDO और इंडस्ट्री के बीच साझेदारी सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। बल्कि इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और पूरी मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन तक फैलाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन, भविष्य की लड़ाई में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस क्षेत्र में तेजी से तकनीकी इनोवेशन करने का आग्रह किया।

Stocks to Watch : 16 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, फिनटेक स्टॉक्स पर भी खास नजर

Stocks to Watch: बुधवार, 16 सितंबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे। Bharat Forge से लेकर BHEL और Sonata Software तक कई कंपनियों ने अहम कारोबारी अपडेट दिए हैं। वहीं, UPI पर MDR लागू होने के बाद Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे फिनटेक स्टॉक्स भी नजर में रहेंगे। आइए जानते हैं 16 सितंबर को किन 13 शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी।

Bharat Forge

डिफेंस और ऑटो सेक्टर की कंपनी Bharat Forge ने RTX की Pratt & Whitney Canada के साथ हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियां DRDO के HALE UAV प्रोग्राम में एडवांस्ड टर्बोप्रॉप इंजन के इस्तेमाल की संभावना तलाशेंगी।

Sonata Software

आईटी सेक्टर की कंपनी Sonata Software ने Amazon Web Services (AWS) के साथ पांच साल का Strategic Collaboration Agreement किया है। कंपनी की घरेलू इकाई Sonata Information Technology Limited इस समझौते पर काम करेगी।

BHEL

सरकारी पावर और इंजीनियरिंग कंपनी BHEL ने Titagarh Rail Systems के साथ ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है। यह JV Vande Bharat Sleeper Trainsets की व्यापक मेंटेनेंस का काम करेगा। दोनों कंपनियां इन ट्रेनों की 35 साल तक देखरेख करेंगी।

Groww

फिनटेक कंपनी Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में ब्लॉक डील की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक Peak XV Partners Investments VI-1 और Sequoia Capital Global Growth Fund III – U.S./India Annex Fund अपने शेयर बेच सकते हैं। इस डील के लिए ₹191.45 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस बताया गया है।

Vedanta

माइनिंग सेक्टर की कंपनी Vedanta 18 सितंबर को कमेटी ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक करेगी। इसमें Non-Convertible Debentures यानी NCDs जारी करने के प्रस्ताव पर विचार होगा। कंपनी इन NCDs को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी करने की तैयारी कर रही है।

NBCC

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) को करीब ₹144.98 करोड़ के नए वर्क ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर की वैल्यू में GST शामिल नहीं है। कंपनी को NEEPCO, SAIL, ED और Damodar Valley Corporation से ये काम मिले हैं।

Blue Star

होम अप्लायंस सेक्टर की कंपनी Blue Star ने बताया कि Oman की W.J. Towell & Co LLC ने Dubai Court of Appeal का रुख किया है। कंपनी ने आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द करने की मांग की है। इस अवॉर्ड में Blue Star के खिलाफ किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया गया था।

Tata Communications

टेलीकॉम सेक्टर की कंपनी Tata Communications की कनाडा स्थित सब्सिडियरी TC Canada और Canada Revenue Agency के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है। यह समझौता टैक्स दावों से जुड़ा है। ये दावे TC Canada की इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज से हुई आय से संबंधित हैं।

GMR Airports

एयरपोर्ट सेक्टर की कंपनी GMR Airports ने अगस्त में अपने एयरपोर्ट पोर्टफोलियो में 94 लाख पैसेंजर मूवमेंट दर्ज किए। वित्त वर्ष 2027 में अब तक पैसेंजर ट्रैफिक 4.897 करोड़ हो गया है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.4% ज्यादा है।

Aurobindo Pharma

फार्मा सेक्टर की कंपनी Aurobindo Pharma ने बताया कि US FDA ने उसकी API मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह यूनिट उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Apitoria Pharma की है। यूनिट-II तेलंगाना में स्थित है।

VIP Industries

लगेज सेक्टर की कंपनी VIP Industries 18 सितंबर को बोर्ड बैठक करेगी। इसमें फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। कंपनी इक्विटी शेयर, डेट सिक्योरिटीज, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, ADRs, GDRs, FCCBs, वारंट और अन्य सिक्योरिटीज जारी करने पर विचार कर सकती है।

Purple Style Labs

फैशन और ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनी Purple Style Labs ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी PSL Retail में ₹420 करोड़ निवेश को मंजूरी दी है। यह निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया जाएगा। Purple Style Labs, Pernia’s Pop-Up Shop की पैरेंट कंपनी है।

India Pesticides

एग्रोकेमिकल सेक्टर की कंपनी India Pesticides को इंटरनेशनल मार्केट में अपने दो पेस्टिसाइड प्रोडक्ट्स के लिए रेगुलेटरी मंजूरी मिली है। कंपनी को ब्रिटेन में एक कीटनाशक के लिए Technical Equivalence अप्रूवल मिला है। वहीं अर्जेंटीना में एक हर्बीसाइड के लिए रजिस्ट्रेशन मिला है।

Fintech Stocks

सरकार की ओर से UPI पर 0.40% MDR तय किया है। इसके बाद Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे फिनटेक स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। नए MDR स्ट्रक्चर का डिजिटल पेमेंट कंपनियों और उनके रेवेन्यू मॉडल पर असर दिख सकता है।

Stock in Focus: BHEL ने वंदे भारत ट्रेन के लिए रेल कंपनी से मिलाया हाथ, 35 साल तक मेंटेनेंस का रहेगा काम

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: डिफेंस कंपनी की HALE ड्रोन के लिए Pratt & Whitney से पार्टनरशिप, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: दिग्गज मेटल फोर्जिंग और डिफेंस कंपनी Bharat Forge ने एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में एक अहम सहयोग किया है। कंपनी अब RTX की Pratt & Whitney Canada के साथ मिलकर काम करेगी। दोनों कंपनियां DRDO के HALE UAV प्रोग्राम में टर्बोप्रॉप इंजन के इस्तेमाल की संभावना तलाशेंगी।

Bharat Forge ने मंगलवार यानी 15 सितंबर को इसकी जानकारी दी। इस प्रोग्राम का मकसद भारत के अगली पीढ़ी के HALE UAV को तैयार करना है। इसके लिए इंजन और ड्रोन के बीच तालमेल की जांच की जाएगी।

इंजन की क्षमता और फिटिंग की होगी जांच

इस सहयोग में सबसे पहले यह देखा जाएगा कि Pratt & Whitney Canada का एडवांस्ड टर्बोप्रॉप इंजन HALE UAV के लिए कितना सही है। इंजन की क्षमता और प्रदर्शन की भी जांच होगी। इसके साथ ही ड्रोन में इंजन लगाने के लिए क्या बदलाव करने होंगे, यह भी देखा जाएगा।

Pratt & Whitney Canada इंजन की परफॉर्मेंस और इंस्टॉलेशन रिक्वायरमेंट्स का आकलन करेगी। वहीं, Bharat Forge इंजन को UAV के एयरफ्रेम के साथ जोड़ने का काम संभालेगी।

Bharat Forge की जिम्मेदारी क्या होगी?

Bharat Forge के हिस्से में इंजन की इंस्टॉलेशन डिजाइन और सिस्टम इंटरफेस से जुड़े काम आएंगे। इसके लिए कंपनी अपनी इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सिस्टम की क्षमता का इस्तेमाल करेगी।

कंपनी के मुताबिक, यह सहयोग भारत में स्वदेशी ड्रोन और दूसरे अनमैन्ड एरियल सिस्टम डेवलप करने की कोशिशों को आगे बढ़ाएगा। यह सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के मुताबिक है।

Bharat Forge ने क्या कहा?

Bharat Forge के वाइस चेयरमैन और ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा, ‘Pratt & Whitney की प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी और Bharat Forge की इंजीनियरिंग व सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता को साथ लाकर एक बेहतर HALE प्लेटफॉर्म तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिल सकती है।’

Pratt & Whitney ने क्या कहा?

Pratt & Whitney के वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया कंट्री हेड आशीष सराफ ने कहा ने कहा कि Pratt & Whitney Canada के टर्बोप्रॉप इंजन कठिन परिस्थितियों में अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुके हैं। उनके मुताबिक, भारत के HALE प्रोग्राम के लिए ऐसी ही क्षमता की जरूरत है।

क्या काम आते हैं HALE UAV?

HALE UAV ऐसे ड्रोन होते हैं जो काफी ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ सकते हैं। इनका इस्तेमाल निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है। इनके जरिए जमीन और समुद्री इलाकों पर सर्विलांस और इंटेलिजेंस जैसे काम किए जा सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में ऐसे ड्रोन लंबे समय तक किसी इलाके पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मंगलवार को Bharat Forge का शेयर BSE पर ₹1,874 पर बंद हुआ। शेयर में ₹66 यानी 3.40% की गिरावट रही।

Stock in Focus: BHEL ने वंदे भारत ट्रेन के लिए रेल कंपनी से मिलाया हाथ, 35 साल तक मेंटेनेंस का रहेगा काम

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BHEL Vacancy 2026: आईटीआई वालों के लिए 380 पदों पर सीधी भर्ती, 10वीं पास भी कर सकते हैं आवेदन

BHEL Vacancy 2026: भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) आईटीआई कर चुके युवाओं के लिए अप्रेंटिस भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत 380 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। बीएचईएल अप्रेंटिस भर्ती 2026 के तहत 10वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत फ्रेशर भी आवेदन कर 12 महीने की ट्रेनिंग के दौरान बीएचईएल जैसी दमदार संस्था में काम करते हुए अच्छा अनुभव ले सकते हैं। बीएचईएल की इस अप्रेंटिसशिप की खास बात यह है कि इसके लिए उम्मीदवारों का चयन मेरिट आधार पर किया जाएगा, कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी।

चयनित उम्मीदवारों के लिए खाने-पीने और हॉस्टल की सुविधा भी दी जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इस ट्रेड अप्रेंटसशिप के लिए ऑनलाइन पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन करने का लिंक खुला हुआ है। इस अप्रेंटिसशिप में इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी अंतिम तिथि 12 सितंबर 2026 तक अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले RDSE (NAPS) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा।

09 ट्रेड में होगी अप्रेंटिस भर्ती

यह अप्रेंटिसशिप फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, टर्नर, मशीनिस्ट, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मोटर मैकेनिक समेत 09 ट्रेड के लिए निकाली गई है। चयन प्रक्रिया में कोई भी लिखित परीक्षा नहीं रखी गई है। क्वालिफाइंग योग्यता में आए नंबरों के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

बीएचईएल अप्रेंटिस भर्ती 2026 के लिए योग्यता

शैक्षिक योग्यता : मान्यता प्राप्त बोर्ड से हाई स्कूल (10वीं) पास की हो। साथ में NCVT/SCVT से फुल टाइम आईटीआई कोर्स किया हो। वेल्डर ट्रेड के लिए केवल NCVT से प्राप्त ट्रेड सर्टिफिकेट ही वैलिड होगा।

उम्र सीमा : उम्मीदवारों की उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 27 वर्ष तक होनी चाहिए। यह उम्र सीमा सामान्य श्रेणी वालों के लिए है। वहीं, एससी/एसटी को 5 साल, ओबीसी (एनसीएल) को 03 साल , पीडब्ल्यूबीडी को 10 साल की नियमानुसार छूट दी जाएगी। आयु सीमा की गणना 1 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी।

बीएचईएल ट्रेड वाइज वैकेंसी और स्टाइपेंड

ट्रेड वैकेंसी स्टाइपेंड (प्रति माह)

फिटर 125 ₹11040

वेल्डर 115 ₹10560

इलेक्ट्रीशियन 30 ₹11040

टर्नर 20 ₹11040

मैकेनिस्ट 20 ₹11040

इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक 12 ₹11040

मैकेनिक R & AC 06 ₹11040

COPA 45 ₹10560

कुल 380

चयन के लिए नहीं होगी लिखित परीक्षा

बीएचईएल तिरुच्चिराप्पल्लि में अप्रेंटिसशिप के लिए उम्मीदवारों का चयन क्वालिफाइंग परीक्षा के जरिए किया जाएगा। मेरिट लिस्ट इन्हीं अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। अगर दो अभ्यर्थियों को टाई की स्थिति बनती है, तो उम्र में बड़े अभ्यर्थी को चुना जाएगा। जो अभ्यर्थी पहले से अप्रेंटिसशिप की ट्रेनिंग ले रहे हैं या पूरी कर चुके हैं, वो आवेदन के योग्य नहीं हैं। चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग के बाद एक साल की ट्रेनिंग दी जाएगी।

रजिस्ट्रेशन कहां करना होगा?

इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को सबसे पहले RDSE (NAPS) पोर्टल www.apprenticeshipindia.gov.in पर पंजीकरण करना होगा। यहां रजिस्ट्रेशन करने के बाद पंजीकरण संख्या नोट कर लें। इसके बाद बीएचईएल त्रिची पोर्टल trichy.bhel.com पर संबंधित रजिस्ट्रेशन नंबर भरकर एप्लिकेशन में अन्य डिटेल्स भी भर दें। साथ ही, जरूरी डॉक्यूमेंट्स, पासपोर्ट साइज कलर फोटोग्राफ, हस्ताक्षर, 10वीं की मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अगर हैं, भी अपलोड करने होंगे। सेलेक्शन और अन्य कोई भी जानकारी के लिए अभ्यर्थियों से ईमेल/एसएमएस के जरिए संपर्क किया जाएगा।

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हिंदुस्तान कॉपर के शेयर में OFS के बाद फिर आ सकती है तेजी, आनंद राठी ने ₹715 का टारगेट दिया

सरकारी कंपनी Hindustan Copper के शेयर में मंगलवार को काफी दबाव देखने को मिला है। इसकी बड़ी वजह सरकार की हिस्सेदारी बिक्री यानी OFS है। इसके बावजूद घरेलू ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹715 का टारगेट प्राइस दिया है। यह मंगलवार के बंद भाव से 34.65% अधिक है। OFS की वजह से स्टॉक 7.45% गिरकर 531.40 रुपये पर बंद हुआ।

Anand Rathi Institutional Equities के वाइस प्रेसिडेंट पार्थिव झोंसा का मानना है कि कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं। बढ़ता प्रोडक्शन, कॉपर की ऊंची कीमत और कमाई में सुधार की उम्मीद शेयर को सपोर्ट कर सकती है।

OFS के बाद दबाव कम हो सकता है

झोंसा के मुताबिक, OFS के बाद कुछ समय तक शेयर में दबाव रह सकता है। लेकिन अगले कुछ महीनों में ₹490-500 के स्तर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।

उनका कहना है कि सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से कंपनी के फंडामेंटल नहीं बदले हैं। कारोबार की बुनियाद अब भी मजबूत है। इसलिए OFS को कंपनी की कमाई या ऑपरेशन में बदलाव के तौर पर नहीं देखना चाहिए।

कॉपर प्रोडक्शन-प्राइस बनेगा बड़ा ट्रिगर

Anand Rathi के मुताबिक, आगे शेयर के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर प्रोडक्शन वॉल्यूम होगा। Hindustan Copper की कमाई पर कॉपर की कीमत का सीधा असर पड़ता है। कॉपर की कीमत मजबूत रहने से कंपनी की कमाई को सपोर्ट मिल सकता है।

इसके अलावा रुपये में कमजोरी भी कंपनी के लिए फायदेमंद हो सकती है। यही वजह है कि ब्रोकरेज को आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई में अच्छी बढ़त की उम्मीद है।

वैल्यूएशन पर क्या कहना है?

Hindustan Copper अभी दो साल के फॉरवर्ड EV/EBITDA के आधार पर करीब 16-18 गुना पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन पहली नजर में ज्यादा लग सकती है।

लेकिन Anand Rathi का कहना है कि दुनियाभर की कॉपर माइनिंग कंपनियां भी कॉपर के मजबूत लॉन्ग टर्म आउटलुक की वजह से ऊंची वैल्यूएशन पर कारोबार कर रही हैं।

सरकार की हिस्सेदारी बड़ी चिंता नहीं

झोंसा को सरकार की बची हुई हिस्सेदारी से ज्यादा परेशानी नहीं दिखती। पूरे OFS के बाद भी सरकार के पास Hindustan Copper की 60% से ज्यादा हिस्सेदारी रहेगी।

वहीं पब्लिक फ्लोट बढ़ने से शेयर में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है। ज्यादा निवेशकों के लिए शेयर में ट्रेडिंग और निवेश करना आसान होगा।

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