Nepal Flash Flood: तबाही के बाद नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा, जारी हुआ अलर्ट

Nepal Flash Flood: नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। बाढ़ में अब तक कम से कम 800 लोगों के मरने की खबर है वहीं हजारों लोग लापता है। अभी लोग इस तबाही से उबर भी नहीं पाए हैं कि नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरे का अलर्ट आने लगा। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकारियों ने रविवार को नई चेतावनी जारी की है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। वहीं, राहत और बचाव टीमें पहले आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं।

लोगों को भेजा जा रहा अलर्ट

रविवार सुबह लोगों के मोबाइल पर बाढ़ को लेकर चेतावनी मैसेज भेजे जा रहे है। इसके बाद से पहले से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई। वहींलगातार मिल रही अलग-अलग चेतावनियों के कारण प्रभावित गांवों के लोगों के बीच भी डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है। इसी बीच राहत और बचाव दल काठमांडू को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे को फिर से खोलने में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

चीन से मिली जानकारी

नेपाल में बाढ़ को लेकर जारी नई चेतावनी चीन से मिली ताजा जानकारी के बाद जारी की गई है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रमुख धर्म राज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाकों में पानी का बहाव बढ़ने की सूचना मिली है। इसके बाद नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, करीब 5.6 किलोमीटर दूर बना एक बड़ा गड्ढा अब भी चिंता का कारण बना हुआ है, जिसमें बड़ी मात्रा में पानी जमा है। अधिकारियों ने इसकी स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है।

लापता लोगों की तलाश जारी

26 अगस्त को आए बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आपदा एजेंसी के अनुसार, देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता हैं। वहीं, चीन की सीमा से लगे प्रभावित क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है, जहां अधिकारियों ने 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। राहत और बचाव अभियान के बीच लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।

ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से आई बाढ़

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद सैकड़ों विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है। इनमें कई लोग नौकरी, पहाड़ों की यात्रा और धार्मिक यात्रा के लिए हिमालयी क्षेत्र में पहुंचे थे। बताया जा रहा कि ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने और बड़ी मात्रा में पानी व मलबा नीचे आने से नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव की चपेट में आने से कई घर, पुल और अन्य ढांचे बह गए, जिससे नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।

Mohan Bhagwat Canada Visit: ‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’, कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

Mohan Bhagwat Canada Visit: ‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’, कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

Mohan Bhagwat Canada Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदू पहचान, विविधता, एकता और भारत की सभ्यतागत सोच पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। हिंदू विचारधारा की मूल भावना अलग-अलग विविधताओं को स्वीकार करने और उनमें मौजूद एकता को पहचानने की है।

मोहन भागवत ने आगे कहा कि हिंदू की पहचान किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवन जीने की शैली से तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि हिंदू विचार सभी को स्वीकार करने और सभी का सम्मान करने की भावना पर आधारित है।

उन्होंने कहा, “जब मैं हिंदू कहता हूं तो हिंदू शब्द को किसी विशेष भाषा, किसी विशेष पूजा या किसी विशेष जीवनशैली से परिभाषित नहीं किया जा सकता।” भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू विचारधारा में ‘सबका सम्मान और सबकी स्वीकृति’ का भाव है।

‘विविधता स्वाभाविक है, एकता वास्तविकता’

RSS प्रमुख ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में जाति, पंथ और भाषाओं की अनेकता हमेशा से रही है। उनके मुताबिक, अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन एकता मूल वास्तविकता है।

उन्होंने कहा, “कई जातियां हैं, कई पंथ हैं, कई भाषाएं हैं। सब कुछ अनेक है। विविधता स्वाभाविक है, जबकि एकता वास्तविकता है।” भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यतागत सोच यह सिखाती है कि विविधता को एकता के लिए खतरा नहीं माना जाना चाहिए। बल्कि उसका सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विविधता एकता की अभिव्यक्ति है। यही विविधता समाज को सुंदर बनाती है।

‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सेवा और मानवता की भावना को भी हिंदू विचार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा जरूरतमंदों की मदद करने की रही है और कई बार भारत ने बिना मांगे भी दूसरों की सहायता की है। उन्होंने कहा, “जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मांगे भी मदद का हाथ बढ़ाया। यही भारत की परंपरा और उसका डीएनए है।”

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि आपने यह बात सुनी होगी कि अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है। भागवत ने कहा कि हिंदू आध्यात्मिक परंपरा लोगों को विविधता के भीतर एकता देखने की सीख देती है। इसमें केवल मनुष्यों ही नहीं। बल्कि जीव-जंतुओं और निर्जीव प्रकृति के साथ भी जुड़ाव की भावना पर जोर दिया जाता है।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ का किया जिक्र

RSS प्रमुख ने अपने भाषण में भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे पूरी दुनिया को एक परिवार मानने वाली सोच बताया। उन्होंने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान रखने वाले लोग इस विचार को स्वीकार करते हैं कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है। भागवत के मुताबिक, इंसानों के बीच बाहरी रूप-रंग को लेकर भले ही अंतर दिखाई दे। लेकिन मूल रूप से सभी एक हैं। इसी सोच से दूसरों की सेवा करने का दायित्व पैदा होता है। उन्होंने कहा, “दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। हमने यह ज्ञान प्राप्त किया है, जो हमें स्थायी खुशी और संतुष्टि देता है।”

‘भारत विश्वगुरु बना, महाशक्ति बनकर नहीं’

मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक प्रभाव की तुलना केवल सैन्य या आर्थिक ताकत से करने के बजाय सेवा और मानवीय मूल्यों से की। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया पर अपना प्रभाव किसी सुपरपावर के रूप में नहीं बनाया, बल्कि अपने चरित्र और दुनिया की सेवा के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। उन्होंने कहा, “कोई भारत को सुपरपावर कह सकता है, लेकिन भारत सुपरपावर नहीं था। उसने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना, ‘महाशक्ति’ नहीं।”

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का उदाहरण

भागवत ने भारत की शरण देने की परंपरा को समझाने के लिए इतिहास के कई उदाहरण दिए। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पोलैंड के लोग युद्ध और संकट के कारण परेशान थे, तब जामनगर के महाराजा ने उन्हें शरण और सुरक्षा दी। उन्हें तब तक संरक्षण दिया गया, जब तक वे सुरक्षित रूप से अपने देश लौटने की स्थिति में नहीं आ गए।

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न्होंने भारत की हालिया मानवीय सहायता का भी उदाहरण दिया। भागवत ने मध्य-पूर्व के एक युद्ध क्षेत्र से भारतीय नागरिकों की निकासी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सैन्य विमानों ने न केवल भारतीयों बल्कि सात अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला।

ट्रंप टैरिफ पर कनाडा का तगड़ा पलटवार, अमेरिकी सामान पर 50% तक ड्यूटी लगाई; ₹5.4 अरब का राहत पैकेज का ऐलान

अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर फिर तेज हो गया है। कनाडा ने अमेरिकी सामान पर नए जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। साथ ही कनाडा सरकार ने प्रभावित कर्मचारियों और कारोबारियों के लिए C$5.4 अरब का राहत पैकेज भी घोषित किया है।

कनाडा की सरकार अमेरिकी सामान पर 15% से 50% तक के जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। ये टैरिफ 8 सितंबर से लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इससे अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित कंपनियों और कर्मचारियों को राहत देने में मदद मिलेगी।

अमेरिका ने कनाडा के सामान पर 50% तक टैरिफ लगाया

अमेरिका ने शनिवार से कनाडा के कई सामान पर 50% तक के नए टैरिफ लागू कर दिए हैं। इससे करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई एक्सपोर्ट पर असर पड़ने का अनुमान है। यह अमेरिका को कनाडा के कुल एक्सपोर्ट का करीब 5.5% है।

अमेरिका के इस कदम के बाद कनाडा ने जवाबी कार्रवाई का फैसला किया है। Oxford Economics के मुताबिक, नए अमेरिकी टैरिफ से कनाडा के अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर प्रभावी टैरिफ रेट 5.1% से बढ़कर 6.9% हो सकता है।

किन सेक्टर पर ज्यादा असर?

इस ट्रेड विवाद का असर कई इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। प्लास्टिक, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लकड़ी और पेपर प्रोडक्ट्स पर इसका बड़ा असर होने की उम्मीद है। Quebec, New Brunswick और Ontario के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ सकता है। कंपनियों के लिए लागत और सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।

ऑटो सेक्टर भी निशाने पर

ट्रेड विवाद अब ऑटो सेक्टर तक भी पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगले साल कनाडा से आने वाली कारों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% किया जा सकता है। फिलहाल गैर-अमेरिकी कंटेंट पर 25% टैरिफ है। इस प्रस्ताव के बाद कनाडाई ऑटो इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ सकता है।

अमेरिका पर कनाडा की बड़ी निर्भरता

कनाडा के लिए यह ट्रेड वॉर इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ कारोबार पर काफी निर्भर है। कनाडा के कुल एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 70% है। वहीं कनाडा इस साल अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा गुड्स ट्रेडिंग पार्टनर है।

विवाद अब सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं

दोनों देशों के बीच तनाव अब ट्रेड से आगे राजनीतिक मुद्दों तक पहुंच गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी वार्ताकारों ने कनाडा के दूसरे देशों के साथ ट्रेड समझौतों और फ्रेंच भाषा व Quebec की संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर भी दबाव बनाया।

ट्रंप ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह कनाडाई लोगों के फ्रेंच बोलने के मामले में कभी दखल नहीं देंगे।

USMCA पर भी नजर

अब दोनों देशों के बीच USMCA यानी US-Mexico-Canada Agreement का भविष्य भी अहम हो गया है। ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह मौजूदा समझौते को उसी रूप में आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।

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‘अमेरिका बदल गया है…’, ट्रंप के टैरिफ से कनाडा नाराज, अब 8 सितंबर से अमेरिका पर लगाएगा जवाबी टैरिफ

US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर यानी व्यापार विवाद और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी समय में हुई बातचीत से कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये) के सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया है। वहीं, जवाब में कनाडा ने भी 8 सितंबर से अमेरिका के खिलाफ इसी तरह के कदम उठाने की घोषणा की है।

बता दें कि अमेरिका के नए टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका को होने वाले सालाना निर्यात के लगभग 5% हिस्से पर पड़ेगा और इसमें हॉकी के सामान, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान सहित कई तरह के उत्पाद शामिल हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि ओटावा ने बातचीत के दौरान कई रियायतें दीं, लेकिन वॉशिंगटन की उन मांगों को ठुकरा दिया जिन्हें उन्होंने जरूरत से ज्यादा बताया।

उन्होंने X पर लिखा, “एक साल से ज्यादा समय से, कनाडा ने अमेरिका के साथ एक नई और व्यापक व्यापार डील पर बातचीत करने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। हमने व्यावहारिक, धैर्यवान और लगातार प्रयास करने वाला रवैया अपनाया है। हमारा मकसद हमेशा कनाडाई लोगों के लिए सबसे अच्छी डील हासिल करना रहा है, न कि किसी भी कीमत पर या किसी भी समय-सीमा में डील करना। कल देर शाम मैंने अपने वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया। हम अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते और न ही हम उनकी मांगी गई चीजें देंगे।”

कनाडा डॉलर-के-बदले-डॉलर के हिसाब से टैरिफ लगाकर जवाब देगा

कार्नी ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ लागू होने के बाद कनाडा भी जवाबी टैरिफ लगाएगा। इन उपायों में स्टील, डेयरी, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प और पेपर, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं।

कार्नी ने कहा, “आने वाले दिनों में हम इन नए टैरिफ उपायों की जानकारी जारी करेंगे, जो लेबर डे के बाद आने वाले मंगलवार से लागू होंगे।”

कनाडा ने बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव भी दिया था कि अगर वॉशिंगटन अपने टैरिफ में काफी कमी करता है, तो वह अमेरिकी स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल पर लगे अपने बाकी जवाबी टैरिफ हटा लेगा। ओटावा ने यह भी संकेत दिया था कि प्रांत अमेरिकी शराब उत्पादों को अपने बाजार में वापस आने की इजाजत दे सकते हैं।

हालांकि, कार्नी ने कहा कि अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव कनाडा की स्वीकार करने की क्षमता से कहीं अधिक थे।

अमेरिका का दावा- कनाडा ने बेहतर डील ठुकराई

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने वॉशिंगटन के रुख का बचाव करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के लिए अहम उत्पादों – जैसे स्टील, ऑटोमोबाइल और लकड़ी – पर रियायतें देने की पेशकश की थी।

ग्रीर ने कहा, “हम ऐसे कदम उठा रहे हैं जो कनाडा की जवाबी कार्रवाई का जवाब देंगे।”

उन्होंने तर्क दिया कि कनाडा को बेहतर शर्तें ऑफर की गई थीं, लेकिन उसने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

आखिरी समय की मांगों की वजह से बातचीत टूट गई

कार्नी के मुताबिक, अमेरिका की आखिरी मांगों में ऐसी शर्तें शामिल थीं जिनसे कनाडा में बनी गाड़ियों पर टैरिफ में मिलने वाली छूट कम हो जाती, दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट करने की कनाडा की क्षमता सीमित हो जाती और भाषा, संस्कृति व संप्रभुता से जुड़ी सुरक्षा पर असर पड़ता।

कार्नी ने इन मांगों को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि कनाडा अब अमेरिका के साथ पहले जैसे रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं जाएगा।

बातचीत टूटने की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही दोनों देशों के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि वे किसी समझौते पर पहुंचने के करीब हैं।

USMCA के भविष्य पर सवाल

बढ़ते विवाद ने यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के भविष्य पर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड पैक्ट इन तीनों देशों के बीच होने वाले व्यापार के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है।

अमेरिका पहले ही मैक्सिको के साथ इस समझौते में बदलाव को लेकर बातचीत शुरू कर चुका है, लेकिन कनाडा के साथ अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता यह विवाद लंबे समय से सहयोगी रहे इन दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। पिछले साल अमेरिका और कनाडा के बीच लगभग 880 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं एक्सचेंज की गईं, जिससे वे व्यापार के लिए एक-दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं।

पुराने सहयोगी देशों के रिश्तों में बढ़ा तनाव

टैरिफ को लेकर यह ताजा विवाद वॉशिंगटन और ओटावा के बीच महीनों से बढ़ते तनाव के बाद शुरू हुआ है। ट्रंप ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बार-बार टैरिफ लगाने पर जोर दिया है और कनाडा के अमेरिका का 51वां राज्य बनने के बारे में विवादित बातें भी कही हैं।

कार्नी ने दोनों देशों के रिश्तों में आ रहे बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि कनाडा ने यह समझ लिया है कि “अमेरिका बदल गया है” और दोनों देश “अपने पुराने रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं लौटेंगे।”

बता दें कि कनाडा अपने सामान का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अमेरिका को निर्यात करता है, इसलिए यह विवाद कनाडाई कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है।

ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कार्नी के जवाब का समर्थन किया है। उन्होंने “टैरिफ के बदले टैरिफ और डॉलर के बदले डॉलर” के आधार पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही और कहा कि “सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।”

ट्रंप ने नए टैरिफ के लिए 1930 के ट्रेड लॉ का इस्तेमाल किया

ये नए टैरिफ US टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 338 पर आधारित हैं। इस नियम के तहत US राष्ट्रपति उन देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 50% तक टैरिफ लगा सकते हैं, जिन्होंने अमेरिकी कारोबारों के साथ भेदभाव किया हो।

यह नियम ‘महामंदी’ (Great Depression) के दौर का है और पहले कभी भी इस तरह से टैरिफ लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया गया है।

इन नए कदमों से वह ट्रेड विवाद और गहरा हो गया है, जिसने दुनिया के सबसे करीबी आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों में से एक पर पहले ही तनाव पैदा कर दिया है। फिलहाल आगे कोई बातचीत तय नहीं है, इसलिए दोनों देश अब टैरिफ विवाद के अगले दौर की तैयारी कर रहे हैं।

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यूजरनेम में छूटा सिर्फ एक अंडरस्कोर, निर्दोष शख्स ने जेल में काट दिए 18 महीने; वजह कर देगी हैरान

कई बार छोटी-सी गलती किसी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है। कनाडा के एक व्यक्ति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां एक मामूली डिजिटल अंतर ने उसे गंभीर कानूनी मुसीबत में डाल दिया। पुलिस ने एक ऑनलाइन यूजरनेम की गलत पहचान के आधार पर उसे आरोपी मान लिया और उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। मामला तब सामने आया जब अपील की प्रक्रिया के दौरान जांच में पता चला कि जिस अकाउंट को पुलिस आरोपी से जोड़ रही थी, वह वास्तव में किसी और का था।

एक अतिरिक्त अंडरस्कोर की वजह से हुई यह गलती इतनी बड़ी बन गई कि एक निर्दोष व्यक्ति को सजा भुगतनी पड़ी। बाद में अदालत ने पूरे मामले की समीक्षा करते हुए उसे बेगुनाह माना। यह घटना डिजिटल जांच में छोटी-सी चूक के गंभीर परिणामों को दिखाती है।

एक छोटे से अंतर ने बना दिया आरोपी

कनाडा के हैलिफैक्स निवासी ब्रैंडन क्लेम को साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था। मामला 2018 में अमेरिका के विस्कॉन्सिन से शुरू हुई एक जांच से जुड़ा था। पुलिस ने ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर जिस व्यक्ति की पहचान की थी, उसका यूजरनेम “fus__ro_dah” था। वहीं, क्लेम का यूजरनेम “fus_ro_dah” था। दोनों में अंतर सिर्फ इतना था कि असली आरोपी के नाम में एक अतिरिक्त अंडरस्कोर (_) था। लेकिन यही छोटी-सी गलती क्लेम के लिए बड़ी परेशानी बन गई।

गलत पहचान के आधार पर हुई सजा

पुलिस ने इसी यूजरनेम को आधार बनाकर क्लेम को आरोपी मान लिया। साल 2023 में डार्टमाउथ प्रांतीय अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और 18 महीने की जेल की सजा सुनाई। उन पर नाबालिग को बहलाने, आपत्तिजनक सामग्री साझा करने और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े आरोप लगाए गए थे।

अपील के दौरान सामने आई बड़ी गलती

क्लेम की कानूनी टीम जब अपील की तैयारी कर रही थी, तब उन्हें इस गलती का पता चला। वकीलों ने पाया कि पुलिस की ओर से भेजे गए सबपोना में गलत यूजरनेम दर्ज था। वकील जेब ब्राउन ने बताया कि अपील की दलील तैयार करते समय यह सवाल उठा कि डिजिटल सबूत क्लेम से कैसे जुड़े, जबकि वह लगातार अपनी बेगुनाही की बात कह रहे थे।

कोर्ट ने माना- व्यक्ति था पूरी तरह निर्दोष

अपील कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने गलत यूजरनेम के आधार पर क्लेम को आरोपी बनाया था। कोर्ट ने साफ कहा कि उन्हें कभी आरोपी बनाया ही नहीं जाना चाहिए था। फैसले में यह भी कहा गया कि क्लेम के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं था जो उन्हें उस लड़की से जोड़ता हो।

18 महीने जेल में बिताने पड़े बेगुनाह शख्स को

क्लेम ने बताया कि पुलिस के एक छोटे से टाइपिंग अंतर ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। उन्होंने कहा कि सबपोना में असली यूजरनेम “fus__ro_dah” की जगह “fus_ro_dah” लिखा गया था, जिससे जांच गलत दिशा में चली गई। यह गलती ट्रायल के दौरान भी सामने नहीं आ सकी।

अब मुआवजे का फैसला बाकी

कोर्ट ने क्लेम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और उनके खिलाफ लगाए गए अतिरिक्त कानूनी आदेश भी रद्द कर दिए। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह जेल में बिताए गए 18 महीनों के लिए मुआवजे की मांग करेंगे या नहीं।

 ‘इन-हैंड सैलरी कितनी मिलेगी?’ बस इतना पूछा और कंपनी ने कर दिया रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

US Tariff: डोनाल्ड ट्रंप ने फिर फोड़ा ‘टैरिफ बम’, कनाडा के सामानों पर थोपा 50% भारी टैक्स, क्या है वजह?

US Tariff on Canada: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर टैरिफ बम फोड़ा है। इस बार उन्होंने कनाडा के कई सामानों पर 50% भारी भरकम टैरिफ लगाने का फैसला किया। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी गाड़ियों, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ गलत बर्ताव करने का आरोप लगाया और इसके बाद यह कदम उठ

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Next-gen BMW M3 likely to retain manual gearbox

Next-gen BMW M3 manual gearbox

In welcome news for enthusiasts, BMW has indicated that the next-gen ICE-powered M3 will continue to offer a manual gearbox. BMW M chief executive officer Frank van Meel stated in a recent interview that the performance division intends to keep the three-pedal option alive “as long as possible” despite tightening regulations and dwindling supplier support.

Manuals offer a way better mechanical connection, says BMW M boss

M2 manual sees particularly strong demand in the automatic-dominated US market

BMW M3 Handschalter manual gear lever. Image used for representative purposes only.

Speaking to Autocar UK, van Meel noted that manual transmissions remain an important part of BMW M’s identity because of the driver engagement they provide. “We want to have this mechanical connection, shifting by yourself. It’s an emotional thing; it’s not just an engineering thing, and it’s still there,” van Meel said.

He pointed to the BMW M2 as proof that demand for manual gearboxes remains strong. In the US – a market where automatic cars vastly outsell manual ones – M2 sales are split roughly 50:50 between the performance coupe’s 6-speed manual and the 8-speed automatic variants. In May 2026, BMW even introduced a limited-run M3 CS Handschalter edition with a 6-speed manual only for the US and Canada.

BMW M Concept Neue Klasse. Image used for representative purposes only.

However, van Meel acknowledged that offering manual gearboxes is becoming increasingly difficult. “The supplier base is getting smaller, and with all the driver-assist systems, it is getting more difficult to disconnect the drivetrain,” he said, before adding that BMW still intends “to keep the manual as long as possible”.

S58 turbo straight-six to live on in next-gen M3

No PHEV setup as BMW upgraded the S58 for Euro 7 compliance

Unlike the new Audi RS5, which uses a V6 plug-in hybrid powertrain in the interest of meeting emission norms, the next-gen ICE M3 will continue using its predecessor’s 3.0-litre ‘S58’ turbo-petrol inline-six engine with no major electric assistance.

Euro 7-compliant BMW S58 engine.

BMW recently upgraded the S58 engine to comply with upcoming Euro 7 emissions regulations, introducing pre-chamber combustion (wherein the air-fuel mixture is ignited right before it enters the cylinder) and new variable-geometry turbochargers. The changes are touted to improve combustion efficiency, reduce emissions and maintain performance without sacrificing the engine’s character.

Enhanced aural experience, but no difference in engine output

According to BMW, the Euro 7-compliant S58 even has throatier induction and exhaust sounds at high revs. However, engine output will remain unchanged from that of the current M3, which churns out 530hp and 650Nm. The BMW M boss added that the automaker is confident it can preserve the engine’s performance despite stricter emissions requirements, although cooling remains one of the biggest engineering challenges.

BMW M Concept Neue Klasse. Image used for representative purposes only.

“If you go on track, of course, temperature is an issue. We improved cooling to counteract; the challenge with the big engines and the big coolers is that they need to be even stronger,” van Meel remarked. Therefore, expect the front end of the new ICE-powered M3 to sport a large open grille with a big intercooler behind it.

ICE and electric M3s to co-exist in similar price ranges

BMW wants to offer buyers the choice between petrol and electric

BMW M Concept Neue Klasse. Image used for representative purposes only.

BMW will sell both ICE and EV versions of the next-generation M3 simultaneously. While the two models will share similar styling inspired by the Vision Neue Klasse M Concept, they will be underpinned by different platforms and use entirely different powertrains.

According to van Meel, BMW wants customers to decide whether they prefer petrol or electric performance rather than forcing either on them: “There might be customers who say ‘I want to have a combustion engine because I like the sound… or I cannot charge.’ That’s fully okay.”

BMW M Concept Neue Klasse. Image used for representative purposes only.

BMW M sales boss Sylvia Neubauer separately told Autocar UK that the ICE and electric M3 will be priced in the “same ballpark” and confirmed that the carmaker will continue offering combustion-powered M cars for enthusiasts who are not ready to switch to electric.

BMW M3 Touring estate to see another generation

Neubauer also confirmed that there will be a Touring estate version of the next-gen M3, as the current one is among BMW M’s strongest-performing models, especially in China. Expect the next-gen M3 Touring to have mechanicals similar to its sedan counterpart.

Harley Davidson Deadwood image gallery

Harley Davidson Deadwood front three quarter

Harley-Davidson has expanded its cruiser line-up with the introduction of the Deadwood, a new factory-built bobber-inspired motorcycle that pays homage to the stripped-down Harley-Davidsons popular in the years following World War II. The Deadwood gets an almost entirely blacked-out finish, with the engine, exhaust, handlebar, fork, wheels and lighting all finished in black. Chrome is limited to the lower rocker covers and pushrod tubes, while Denim Black paint is offered as the sole colour option.

Other styling highlights include a solo ‘tuck-and-roll’ seat, wire-spoke wheels, a chopped windscreen and the absence of saddlebags, leaving the Softail’s hardtail-inspired rear section exposed. 

The Deadwood will make its public debut at the Sturgis Motorcycle Rally on August 7, which is the largest biker gathering globally, drawing over 4.50 lakh riders. It will subsequently go on sale in the US and Canada markets only.

फ्लाइट टिकट के पैसे बचाएं, ट्रेन और क्रूज से पहुंचें भारत के इन छिपे हुए आइलैंड्स पर!

अगर आप आइलैंड की सैर करना चाहते हैं, लेकिन फ्लाइट से ट्रैवल करना पसंद नहीं करते, तो दुनिया में कई ऐसे खूबसूरत आइलैंड हैं जहां सड़क, पुल या फेरी के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। स्कॉटलैंड के मनमोहक आइल ऑफ स्काई से लेकर भारत के ऐतिहासिक पंबन द्वीप तक, ये जगहें प्राकृतिक खूबसूरती और रोमांच का बेहतरीन संगम हैं। आइए जानते हैं ऐसे शानदार आइलैंड के बारे में, जहां बिना हवाई सफर के भी यादगार छुट्टियां बिताई जा सकती हैं:

Mozambique Island, Mozambique (मोजाम्बिक आइलैंड, मोजाम्बिक)

Ilha de Mozambique | Things to do | Crafted Africa

 

मोजाम्बिक के उत्तर में समुद्र के बीच बसा यह छोटा सा आइलैंड मोजाम्बिक आइलैंड ब्रिज से जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचने के लिए पहले नामपुला शहर जाएं, फिर रोड के रास्ते पुल पार करके सीधे द्वीप पहुंच सकते हैं। पुल पार करने का अलग से कोई चार्ज नहीं लगता। यहां पुराने किले, चर्च और पुर्तगाली दौर की इमारतें देखने लायक हैं।

Mackinac Island, Michigan, USA (मैकिनाक आइलैंड, मिशिगन, अमेरिका)

A Michigander's Guide to Mackinac Island | Condé Nast Traveler

यह आइलैंड अमेरिका के मिशिगन राज्य में है। यहां पहुंचने के लिए मैकिना सिटी या सेंट इग्नेस से फेरी लेनी पडती है। फेरी का किराया करीब 35 से 45 डॉलर तक हो सकता है। यहां कार नहीं चलती, इसलिए लोग साइकिल,घोड़ा गाड़ी  या पैदल घूमते हैं। शांत माहौल और पुरानी इमारतें इसकी पहचान हैं।

 

Vancouver Island, Canada (वैंकूवर आइलैंड, कनाडा)

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कनाडा के पश्चिमी हिस्से में बसे इस आइलैंड तक वैंकूवर से बीसी फेरी के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। फेरी का किराया करीब 20 से 70 कनाडाई डॉलर तक हो सकता है। यहां घने जंगल, समुद्र किनारे के नजारे और व्हेल देखने का मजा मिलता है।

 

Key West, Florida, USA (की वेस्ट, फ्लोरिडा, अमेरिका)

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अगर आप रोड ट्रिप के शौकीन हैं तो यह जगह आपके लिए है। मियामी से करीब 4 घंटे की ड्राइव करके ओवरसीज हाईवे के रास्ते की वेस्ट पहुंच सकते हैं। बीच में 42 पुल आते हैं, जिनमें मशहूर सेवन माइल ब्रिज भी शामिल है। इस रास्ते पर अलग से कोई टोल नहीं लगता।

 

 

Isle of Wight, England (आइल ऑफ वाइट, इंग्लैंड)

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इंग्लैंड के दक्षिण में बसे इस आइलैंड तक पोर्ट्समाउथ, साउथेम्प्टन या लाइमिंगटन से फेरी मिल जाती है। फेरी का किराया करीब 20 से 35 पाउंड से शुरू होता है। यहां समुद्र तट, सफेद चट्टानें और छोटे-छोटे खूबसूरत कस्बे देखने लायक हैं।

 

 

 

Miyajima, Japan (मियाजिमा, जापान)

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हिरोशिमा के पास स्थित इस आइलैंड तक मियाजिमागुची से सिर्फ 10 मिनट की फेरी लेकर पहुंच सकते हैं। फेरी का किराया करीब 200 से 300 येन है। यहां का मशहूर तैरता हुआ टोरी गेट, मंदिर और खुले घूमते हिरण पर्यटकों को खूब पसंद आते हैं।

 

 

 

Mont Saint-Michel, France (मोंट सेंट मिशेल, फ्रांस)

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फ्रांस के नॉरमैंडी इलाके में स्थित यह आइलैंड सडक से जुड़ा हुआ है। पेरिस से ट्रेन या कार से यहां पहुंच सकते हैं। गाडी पार्क करने के बाद शटल बस या पैदल द्वीप तक जाया जाता है। पार्किंग का चार्ज देना होता है, लेकिन शटल बस मुफ्त है। यहां का पुराना मठ और समुद्र का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है।

 

 

Prince Edward Island, Canada (प्रिंस एडवर्ड आइलैंड, कनाडा)

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कनाडा का यह खूबसूरत द्वीप कॉन्फेडरेशन ब्रिज से जुड़ा है। आप सीधे कार चलाकर यहां पहुंच सकते हैं। आइलैंड में जाते समय कोई चार्ज नहीं लगता, लेकिन वापस लौटते समय पुल का टोल देना पडता है। यहां लाल रेत वाले बीच, लाइटहाउस और हरियाली देखने लायक है।

 

Isle of Skye, Scotland (आइल ऑफ स्काई, स्कॉटलैंड)

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स्कॉटलैंड के पश्चिम में बसे इस खूबसूरत आइलैंड तक इनवरनेस या ग्लासगो से कार से स्काई ब्रिज पार करके पहुंच सकते हैं। चाहें तो मैलेग से फेरी भी ले सकते हैं। स्काई ब्रिज पर कोई टोल नहीं लगता। यहां की ऊंची पहाडियां, फेयरी पूल्स, ओल्ड मैन ऑफ स्टोर और समुद्र के शानदार नजारे इसे दुनिया के सबसे खूबसूरत आइलैंड में शामिल करते हैं।

 

 

Harley Davidson Deadwood unveiled

Harley Davidson Deadwood unveiled

Harley-Davidson has expanded its cruiser lineup with the introduction of the Deadwood, a new factory-built bobber-inspired motorcycle that pays homage to the stripped-down Harley-Davidsons popular in the years following World War II. The 2026 Deadwood will be sold exclusively in the US and Canada markets, where it is priced at USD 17,999 (around Rs 17.32 lakh, before taxes).

  1. Harley Davidson Deadwood has been unveiled exclusively for the US and Canada markets
  2. It features a blacked out finish and pays homage to stripped down H-Ds of yesteryears 
  3. H-D Deadwood’s, 1,923cc, V-twin engine produces 98hp and 163Nm

Harley Davidson Deadwood: What’s new?

The Deadwood will make its public debut at the Sturgis Motorcycle Rally on August 7

The Deadwood gets an almost entirely blacked-out finish, with the engine, exhaust, handlebar, fork, wheels and lighting all finished in black. Chrome is limited to the lower rocker covers and pushrod tubes, while Denim Black paint is offered as the sole colour option.

Other styling highlights include a solo ‘tuck-and-roll’ seat, wire-spoke wheels, chopped windscreen and the absence of saddlebags, leaving the Softail’s hardtail-inspired rear section exposed. Harley says the 648mm seat height makes it one of the lowest motorcycles in its current line-up.

Power comes from Harley-Davidson’s 1,923cc, Milwaukee-Eight, 117 cubic inches, V-twin engine producing 98hp and 163Nm, mated to a six-speed gearbox. It is paired with a 2-into-1 exhaust and can be upgraded with Harley’s Screamin’ Eagle performance parts.

Despite its retro styling, the Deadwood comes equipped with a comprehensive electronics package that includes cornering ABS, cornering traction control, drag torque slip control, TPMS and riding modes that includes – Road, Sport and Rain.

Other equipment includes all-LED lighting, a 5-inch analogue instrument cluster with an LCD display, USB-C charging, preload-adjustable rear suspension and 49mm front fork.

The Deadwood will make its public debut at the Sturgis Motorcycle Rally on August 7, which is the largest biker gathering globally, drawing over 4.50 lakh riders. It will subsequently go on sale in the United States and Canadian markets.

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