जनगणना के नए नियम पर विवाद क्यों

छह साल की देरी से हो रही जनगणना के लिए इसके नियमों में संशोधन किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले भारत के महापंजीयक कार्यालय ने जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 18 की उपधारा एक के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जनगणना नियम 1990 में कुछ और बदलाव करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इनमें प्रस्तावित बदलावों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस की आपत्तियों पर बात करने से पहले उन दो बदलावों को रेखांकित करने की आवश्यकता है, जो अपनी प्रकृति में बिल्कुल नई हैं। पहला, महापंजीयक कार्यालय ने पहली बार सरकारी स्कूलों व कार्यालयों के कर्मियों के साथ साथ निजी स्कूलों और ट्रस्टों के कर्मियों को भी जनगणना के काम में शामिल करने का प्रस्ताव किया है और दूसरा, किसी सामान्य नागरिक को भी बतौर वॉलंटियर इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है। महापंजीयक कार्यालय की ओर से 16 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, ‘ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन, प्रगणक के रूप में कर्तव्यों का निष्पादन करने के लिए उपयुक्त समझे’ उसे जनगणना के काम में लगाया जा सकता है।

कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति की है। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के लोगों को जनगणना के काम में शामिल करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया है कि इस साल 10 से 12 जुलाई को कर्नाटक के बेलगाम में आरएसएस के कार्यकर्ताओं का एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था, जिसका एकमात्र एजेंडा जनगणना 2027 था। उनका कनहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को देश की बदलती डेमोग्राफी पर सुझाव देने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया था। उस कमेटी में सभी सदस्य आरएसएस हैं और उसके सुझाव पर ही जनगणना के नियमों में बदलाव किया जा रहा है। कांग्रेस को आशंका है कि डेमोग्राफी पर बनी कमेटी और आरएसएस के लोगों को जनगणना में शामिल करके एसआईआर की तरह जनगणना के आंकड़ों में भी खतरनाक तरीके से हेरफेर किया जाएगा। हालांकि खतरनाक रूप से क्या हेराफेरी हो सकती है यह कांग्रेस ने नहीं बताया है। फिर भी कांग्रेस की आशंका को आधारहीन बता कर खारिज नहीं किया जा सकता है। लेकिन सवाल है कि क्या भारत में ऐसी एक व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है, जहां वालंटियर्स यानी स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की मदद से जनगणना, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, सामाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे जैसे काम कराए जाएं?

ध्यान रहे दुनिया भर के देशों में ऐसी व्यवस्था है। पता नहीं कांग्रेस और दूसरी पार्टियों ने कभी इसका अध्ययन करने का प्रयास किया है या नहीं कि अमेरिका में लगभग पूरा चुनाव वालंटियर्स की देखरेख में होता है। वहां भारत के चुनाव आयोग जैसी कोई केंद्रीय संस्था नहीं है। राज्यों में अपनी अपनी संस्थाएं हैं। लेकिन उनमें भी बहुत लंबी चौड़ी वर्क फोर्स नहीं है और न चुनाव कराने के लिए स्कूलों के शिक्षक व सरकारी कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर शामिल किया जाता है। थोड़े से सरकारी कर्मचारी और ढेर सारे वॉलंटियर मिल कर चुनाव कराते हैं। दशकों से ऐसे ही चुनाव होते हैं और डोनाल्ड ट्रंप के आने से पहले किसी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप भी नहीं लगाए थे। भारत में इस तरह की व्यवस्था बनाने की बहुत आवश्यकता है।

भारत में आजादी के बाद से ही तदर्थ प्रक्रिया चल रही है। सरकारी कर्मचारियों को और उसमें भी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को किसी भी तरह की ड्यूटी में लगा दिया जाता है। मतदाता सूची का ‘संक्षिप्त’ या ‘विशेष संक्षिप्त’ या ‘विशेष गहन’ पुनरीक्षण होना है तो सरकारी शिक्षक करेंगे, मतदान कराना है तो सरकारी शिक्षक कराएंगे, मतगणना करनी है तो सरकारी शिक्षक करेंगे, सामाजिक व आर्थिक सर्वे करना हो, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे करना हो, पशुओं की गिनती करनी हो, टीकाकरण करना हो, कोरोना या बाढ़ जैसी कोई महामारी में राहत बांटना हो, सारे काम सरकारी शिक्षकों को करने होते हैं। कुछ दिन पहले ही एक शिक्षक ने सोशल मीडिया में तंज करते हुए कहा कि वह तो अच्छा है कि सरकार कृषि कार्य नहीं कराती है अन्यथा फसलों की बुवाई, कटाई भी सरकारी स्कूल के शिक्षक करते। सचमुच ऐसी ही स्थिति है। इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। अभी एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है तो राजधानी दिल्ली जैसे राज्य में सैकड़ों स्कूल एक एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से ये सब काम कराने से साल के कई महीने तक पढ़ाई, लिखाई का काम लगभग पूरी तरह से ठप्प रहता है।

सरकार ने अब अनुदान प्राप्त और बिना अनुदान वाले निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। इससे वहां भी सरकारी स्कूलों जैसे ही पढ़ाई प्रभावित होगी। ऐसा लग रहा है कि सरकार स्कूली शिक्षा को पूरी तरह से बरबाद करने का संकल्प किए हुए है। वैसे पिछले दिनों आरएसएस से जुड़े रहे एक युवा स्कॉलर के मुंह से सुनने को मिला कि स्कूली शिक्षा को लेकर ‘भाई साहेब’ लोग क्या सोच रहे हैं। एक ‘भाई साहेब’ ने उस युवा स्कॉलर से कहा था कि कॉलेज पहुंचने वाले युवा इतने आंदोलित इसलिए हो रहे हैं क्योंकि देश में आज भी बड़ी संख्या में अच्छे स्कूल चल रहे हैं, जहां से वे पढ़ कर आते हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटीज की पढ़ाई और प्रशासन की व्यवस्था तो पिछले कुछ बरसों में पूरी तरह से बिगाड़ दी गई है। लेकिन चूंकि वे अच्छे स्कूल से आते हैं तो बिगड़े हुई व्यवस्था वाले कॉलेजों में एडजस्ट होने में उनको दिक्कत होती है। सो, इसका उपाय यह है कि स्कूली शिक्षा को भी वैसे ही बरबाद कर दिया जाए जैसे कॉलेज और यूनिवर्सिटीज को किया गया है।

बहरहाल, अगर सरकार गंभीर है तो उसे कांग्रेस की आलोचना की परवाह नहीं करनी चाहिए और देश में ऐसे कामों के लिए वॉलंटियर्स का नेटवर्क तैयार करना चाहिए। इससे देश के युवाओं को सीजनल रोजगार भी मिलेगा और यह बड़ी वर्क फोर्स तैयार होगी। ध्यान रहे देश की आबादी डेढ़ सौ करोड़ है और यहां जनगणना और चुनाव से लेकर अलग अलग तरह के सर्वेक्षण का काम बहुत बड़े पैमाने पर होता है। इसके लिए पढ़े, लिखे बेरोजगार नौजवानों को अगर वालंटियर के तौर पर शामिल किया जाए तो यह योजना ग्रामीण रोजगार की मनरेगा जैसी योजना से बड़ी हो सकती है और इसमें ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकता है। इसके लिए बहुत गहन गंभीर प्रशिक्षण की आवश्यकता भी नहीं होती है। सरकार एक बार प्रशिक्षण की व्यवस्था करके वालंटियर्स की फौज तैयार कर सकती है। यह वर्क फोर्स सरकारी कामकाज तो करेगी ही साथ ही निजी कंपनियों, विज्ञापन एजेंसियों, चुनावी सर्वे करने वाली कंपनियों आदि के लिए भी उपलब्ध रहेगी।

इस मामले में कांग्रेस की आलोचना का कोई खास आधार नहीं है। अगर सरकारी शिक्षक ही जनगणना करेंगे तो क्या गारंटी है कि जयराम रमेश जिस हेरफेर की आशंका जता रहे हैं वह नहीं होगी? आखिर मतदाता सूची का काम तो सरकारी लोग ही कर रहे हैं तो क्या कांग्रेस को उस पर भरोसा है? जयराम रमेश को यह समझना चाहिए सरकारी और निजी शिक्षकों में भी संघ और भाजपा के प्रति रूझान रखने वाले लोग होंगे और कांग्रेस व विपक्ष को पसंद करने वाले भी होंगे। वैसे ही चुनाव कराने या जनगणना के लिए वॉलंटियर नियुक्त होंगे तो उसमें भी हर विचार और राजनीतिक रूझान वाले लोग होंगे। अगर पेशेवर तरीके से कामकाज का वातावरण बनता है, तकनीक का बेहतर इस्तेमाल होता है और निगरानी की ईमानदार व्यवस्था बनती है तो वॉलंटियर वाली व्यवस्था एक साथ भारत की कई समस्याओं का समाधान कर सकती है।

राहुल ने दी केस करने की चुनौती

पणजी। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के जरिए वोट चोरी के आरोपों को दोहराते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वह उनके ऊपर मुकदमा करे। राहुल ने कहा है कि वे लगातार वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे डंके की चोट पर कहते हैं कि और राज्य में कहते हैं कि प्रधानमंत्री वोट चोरी करते हैं। फिर भी उनके ऊपर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता है।

गौरतलब है कि गोवा में चार महीने के बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उससे पहले राज्य के दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं हर राज्य से कहता हूं पीएम वोट चोरी करते हैं। लेकिन मुझ पर कोई केस दर्ज नहीं होता। क्योंकि, ये जानते हैं कि अगर केस हुआ तो मामला लीगल हो जाएगा और ये फंस जाएंगे’। उन्होंने दावा करते हुए कहा, ‘दिल्ली में हम कुछ ही समय में पीएम, गृहमंत्री से निपट लेंगे। काम जारी है। सरकार की एक्सपायरी डेट आने वाली है’। राहुल ने आगे कहा, ‘आपने देखा है कि आजकल पीएम सामने खड़े नहीं हो सकते हैं। क्योंकि ये जानते हैं कि देश का युवा इनके खिलाफ खड़ा हो गया है’।

राहुल गांधी गोवा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान ‘गोय राखोन यात्रा’ में शामिल होने पहुंचे थे। यहा यात्रा 28 दिन चली थी और इसमें राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों को कवर किया गया। राहुल का पिछले चार सालों में यह पहला गोवा दौरा है।

कांग्रेस की यात्रा के समापन कार्यक्रम में राहुल ने कहा, ‘पूरी दुनिया मानती थी कि इंडिया का एजुकेशन सिस्टम नंबर वन मॉडल का था। लेकिन, आज दिल्ली में स्टूडेंट्स को ही मारा जा रहा है। हर एजुकेशनल सिस्टम में इन्होंने बीजेपी और आरएसएस के लोग बैठे हुए हैं’। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बहुत भ्रष्टाचार है और कांग्रेस जीतेगी तो इसे समाप्त करेगी। उन्होंने कहा, ‘हाईटेक करप्शन, जमीन का करप्शन ये यहां करते हैं। जैसे पहले गुजरात में नरेंद्र मोदी का मॉडल था। वैसे ही गोवा में करप्शन का मॉडल है। इसे सिर्फ कांग्रेस ही खत्म कर सकती है’।

राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी गोवा में है। उन्होंने कहा, ‘पहले मास्टर प्लान था, मास्टर प्लान को रद्द कर दिया। इनका यही काम है कि पैसा कैसे बनाए। इनका यही काम है। गोवा की जनता को लूटने का, आपकी जमीन छीनकर अरबपतियों को देने का’। उन्होंने कहा कि गोवा देश में सबसे सुंदर जगह है, सबसे अच्छा कल्चर है। लेकिन यहां भी सरकार लोगों की जमीन छीनकर गोवा के जो बाहर के लोगों को करोड़ों में बेचती है।

मोदी, भागवत पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो शनिवार को जारी किया। इसमें छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस के ऊपर तीखा हमला किया। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, इनका लोकतंत्र मे विश्वास नहीं है।

इस वीडियो में राहुल छात्रों से कह रहे हैं, ‘ऊपर बैठे लोगों में से अधिकांश डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। प्रधानमंत्री, मोहन भागवत, आरएसएस के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते’। उन्होंने देश के संभ्रांत वर्ग पर भी निशाना साथा और कहा, ‘एलीट वर्ग के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। शिक्षा का अनप्राइवेटाइज सिस्टम डेमोक्रेसी का सॉलिड प्रोटेक्टर है’।

इस वीडियो में राहुल ने उन प्रदर्शनकारी छात्रों से बात की, जो पुलिस की कार्रवाई का शिकार हुए थे। राहुल ने वीडियो के साथ एक पोस्ट भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचना और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला, लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों और महिलाओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने शर्मनाक हदें पार कर दी हैं’। इस वीडियो में प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राओं ने अपना अनुभव सुनाया है। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने उनके ऊपर किस तरह से हमला किया। एक छात्रा ने पुलिसकर्मियों द्वारा पिन चुभोने के आरोप भी लगाए।

ज्ञानेश कुमार सरकारी गवाह बनें : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश में ‘वोट चोरी’ करवाई जा रही है इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

श्री गांधी ने शनिवार को अपने पॉडकास्ट में परीक्षाओं में देरी, नियुक्तियां अटकने और बुनियादी सुविधाओं की कमी का जिक्र करते हुए ऐसे मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत बतायी। उन्होंने पिछले एक महीने में इंदौर, नासिक, बालाघाट और दिल्ली में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि छात्रों के सवाल ऐसी व्यवस्था को चुनौती देते हैं।

उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों ने देश के संस्थानों पर कब्जा कर लिया है और आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों को जो सुविधाएं मिलती हैं उनमें कटौती की जा रही है इसलिए इन मामलों में सरकार की ओर से जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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श्री गांधी ने इस पॉडकास्ट में महाराष्ट्र के नासिक में आंदोलनरत आदिवासी विद्यार्थियों, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुपोषण तथा बीमारियों से बच्चों को खोने वाले आदिवासी परिवारों के साथ अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बालाघाट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह लागू करने का आग्रह किया और कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस संदर्भ में पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 729 निवासियों में से 728 के नाम मतदाता सूची से हट गये। इसे मतदान के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला बताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनना चाहिए।

वोट चोरी को संविधान पर हमला बताते हुए श्री गांधी ने 30 सितंबर को यहां इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया और कहा कि उसमें प्रत्येक भारतीय के मतदान के अधिकार की रक्षा पर विचार-विमर्श किया गया है।

उन्होंने परीक्षा में देरी, नियुक्तियां अटकने और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों के साथ ही दिल्ली के सत्य निकेतन की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा बजट में कटौती की वजह से ऐसा हो रहा है और इन सब मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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एसआईआर के बाद परिसीमन सबसे बड़ा उपाय

भाजपा को इतना भरोसा कैसे है कि 2029 में भी राहुल गांधी और उनका गठबंधन चुनाव हारेगा और भाजपा पहले से ज्यादा बहुमत से जीतेगी? इस भरोसे का एक कारण तो भाजपा का अपना संगठन, पार्टी का आधार, समर्पित हिंदू मतदाताओं का वोट, आरएसएस का नेटवर्क, ध्रुवीकरण की राजनीति जैसी पारंपरिक चीजें दिखाई देंगी। लेकिन इन पारंपरिक चीजों से हट कर तीन चीजें ऐसी हैं, जिसने भाजपा को ज्यादा भरोसा दिया है। पहली चीज है मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर। एसआईआऱ के जरिए करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और नए नाम जोड़े जा रहे हैं।

पूरी प्रक्रिया इतनी गोपनीय और नियंत्रित है कि सारी विपक्षी पार्टियां परेशान हैं। सोचें, अभी इस बात का विवाद चल रहा था कि करोड़ों नाम हटाए जा रहे हैं लेकिन खबर है कि अखिलेश यादव मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़े जाने के खिलाफ सड़क पर उतरने वाले हैं। सब कुछ इतने नियंत्रित और केंद्रीकृत तरीके से हो रहा है कि किसी को असली बात का पता नहीं चल रहा है।

एसआईआर से भाजपा को सबसे बड़ा फायदा इस वजह से हुआ है कि देश के ज्यादातर राज्यों में उसकी या उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकार है। सरकार में होना अपने आप में बहुत सारी चीजों को आसान बना देता है। उसमें अगर सरकार में बैठे लोगों को सत्ता के उपकरणों का मनमाना इस्तेमाल यानी दुरुपयोग करने में कोई हिचक नहीं हो तो चीजें और आसान हो जाती हैं। सरकार में होने के कारण भाजपा को पता है कि कहां से कितना नाम कट गया और कहां जुड़ गया। अभी तक की एसआईआर में मृत और फर्जी श्रेणी में चार करोड़ के करीब नाम कटे हैं। शिफ्टेड और अपने पते पर नहीं मिलने वालों की संख्या साढ़े नौ करोड़ के करीब है। पहले भी इन मतों का इस्तेमाल सत्ता में बैठी पार्टियां करती थीं। बोगस वोटिंग में इनका इस्तेमाल होता था। बड़ी संख्या में नए नाम जोड़े जाने की जो चर्चा है उसका इस्तेमाल भी बोगस वोटिंग के लिए ही होगा या तकनीक का इस्तेमाल करके वोट मैनिपुलेट करने के लिए होगा। अब ज्यादातर जगह भाजपा की सत्ता में है तो विपक्ष तो यह काम नहीं कर पाएगा।

एसआईआर के बाद दूसरा सबसे बड़ा हथियार परिसीमन का है। हालांकि इसमें बहुत सारे अगर मगर हैं। अगर समय रहते परिसीमन बिल पास हो गया और समय रहते इस पर काम पूरा हो गया तो इसका लाभ है। लेकिन परिसीमन किस कदर लाभप्रद है इसे जम्मू कश्मीर और असम के उदाहरण से समझा जा सकता है। जम्मू कश्मीर में पहले 87 सीटें थीं। लद्दाख अलग होने के बाद 83 सीटें बचीं। परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़ा कर 90 कर दी गईं। यानी सात सीटों का इजाफा हुआ। इनमें से छह सीटें जम्मू संभाग बढ़ाई गईं। वहां सीटों की संख्या 37 से बढ़ कर 43 हो गई। कश्मीर घाटी में सिर्फ एक सीट बढ़ी। सबको पता है कि भाजपा कश्मीर घाटी में एक भी सीट नहीं जीत सकती है। तभी जम्मू में ज्यादा सीटें बढ़ीं और भाजपा ने उसमें से ज्यादातर सीटें जीत लीं। भाजपा ने परिसीमन के बाद हुए चुनाव में पांच सीटें ज्यादा जीतीं। उसकी सीटों की संख्या बढ़ कर 30 हो गई।

ऐसे ही असम में परिसीमन के बाद पूरा समीकरण बदल गया। इसे कई तरह से बदला गया। सीटों की संख्या 126 ही रखी गई लेकिन एससी और एसटी आरक्षित सीटों की संख्या 24 से बढ़ा कर 28 कर दी गई। ऐसे ही बोडोलैंड स्वायत्त परिषद  के इलाके में सीटों की संख्या 16 से बढ़ा कर 19 कर दी गईं। ककरीब 40 सीटों की भौगोलिक संरचना में इस तरह का बदलाव किया गया कि वहां की पूरा सामाजिक व धार्मिक संरचना बदल गई। इन 40 इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक संख्या होती थी। इसे इस तरह से विभाजित किया गया कि मुस्लिम आबादी करीब 25 सीटों पर बहुत सघन हो गई और बाकी सीटों पर उनकी निर्णायक भूमिका समाप्त हो गई।

इसका लाभ भाजपा को मिला। पहली बार ऐसा हुआ है कि 126 के सदन में भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने में कामयाब रही। उसने 82 सीटें जीत लीं। परिसीमन के असर को इस आंकड़े से भी समझ सकते हैं कि कांग्रेस सिर्फ 19 सीटों पर जीती, जिसमें से 18 मुस्लिम विधायक हैं। लोकसभा चुनाव में भी 14 सीटों में से भाजपा अकेले 10 सीटों पर जीती और दो सीटें उसकी सहयोगी पार्टियों को गईं। सो, असम में परिसीमन ने जादू का काम किया है। इस प्रयोग को पूरे देश में दोहराने की तैयारी है।

लोकसभा चुनाव में अब ढाई साल का समय बचा है क्या इतने कम समय में पूरे देश में परिसीमन का काम हो जाएगा? अगर इससे पहले हुए परिसीमन की बात करें तो उसमें करीब छह साल लगे थे। हालांकि वह मामला प्रशासनिक व राजनीतिक कारणों से उलझा रहा था। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में 12 जुलाई 2002 को चौथे परिसीमन आयोग का गठन किया गया था। इसे 2001 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या 543 बनाए रखते हुए उसको रिस्ट्रक्चर करने की सिफारिश करना था। आयोग ने 2007 के अंत में अपनी सिफारिश सौंपी थी, जिसे फरवरी 2008 में स्वीकार किया गया था। लेकिन उससे पहले तीसरे परिसीमन आयोग ने अपना काम तीन साल में पूरा कर लिया था।

इंदिरा गांधी की सरकार ने 1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के लिए 1973 में तीसरे आयोग का गठन किया था। आयोग ने 1976 में अपनी सिफारिश की। इसकी सिफारिशों के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या 522 से बढ़ा कर 543 कर दी गई। उसी समय इंदिरा गांधी ने परिसीमन के लिए 1971 के आंकड़े और लोकसभा की सीटों की संख्या 25 साल के लिए फ्रीज कर दी थी। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 2001 में सीटों की संख्या पर फ्रीज को 25 साल के लिए बढ़ा दिया था।

बहरहाल, तीसरे और चौथे परिसीमन आयोग ने जो समय लिया हो लेकिन अगर केंद्र सरकार किसी तरह से परिसीमन बिल को पास कराने में कामयाब हो जाती है तो अगले चुनाव से पहले उसकी सिफारिशों को स्वीकार करने और लागू करने का प्रयास होगा। आज तक जनसंख्या के आंकड़ों से लेकर सीटों की भौगोलिक संरचना तक सब कुछ डिजिटल रूप में उपलब्ध है। इसलिए पहले की तरह इस काम में बहुत समय नहीं लगेगा। गौरतलब है कि परिसीमन आयोग का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर जज को बनाया जाता है। उसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त या उनकी ओर से नामित कोई आयुक्त इसका सदस्य होता है। फिर राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारी इसके सदस्य होते हैं। सहयोगी सदस्य के रूप में हर राज्य से पांच लोकसभा सांसद और पांच विधायक नामित किए जाते हैं। चूंकि केंद्र से लेकर ज्यादातर जगहों पर भाजपा या एनडीए की सरकार है। तो नामित सदस्य उसकी पसंद के होंगे और वे कामकाज में ज्यादा अड़चन नहीं डालेंगे।

आबादी की संरचना को समझने या एससी, एसटी आबादी के हिसाब से सीटों की संरचना तय करने और आरक्षित सीटों की सिफारिश करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। समय लगने का काम यह है कि ड्राफ्ट तैयार होने के बाद उसे सार्वजनिक किया जाता है, उस पर आपत्ति मंगाई जाती है और जन सुनवाई आय़ोजित करनी पड़ती है। हालांकि इसमें भी सरकार जो चाहती है वही होता है। ज्यादातर काम दिखावे का ही होता है। इस बार समस्या यह है कि विपक्ष बहुत आंदोलित है और सहयोग करने के मूड में नहीं है। उधर दक्षिण भारत के राज्य भी टकराव के मूड में है। इसलिए वह उस लेवल पर भी काम को अटकाने की कोशिश होगी। सरकार के हाथ में एक अस्त्र यह है कि संविधान के मुताबिक आयोग की अनुशंसा अंतिम मानी जाती है। उसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है और लोकसभा व विधानसभा में भी जब इसे मंजूरी के लिए रखा जाता है तो कोई भी सदन इसमें बदलाव नहीं कर सकता है।

प्रदर्शनकारियों को सामने लाए राहुल

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर रद्द करने को लेकर दिल्ली में कई दिन तक हुए प्रदर्शन में शामिल रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी मीडिया के सामने लेकर आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके खिलाफ बहुत ज्यादती की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि जहां सीसीटीवी कैमरा नहीं था वहां लेकर जाकर पुलिसकर्मियों ने उसे मारा।

गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को सामने लेकर आए थे। बुधवार, 14 अक्टूबर को राहुल ने जिन लोगों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की उनमें कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ घटनाएं बताईं। एक छात्रा ने प्राइवेट पार्ट पर लात मारने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई से उसके एक कान से सुनने की क्षमता चली गई।

राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं के वीडियो और दूसरे सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। राहुल ने केंद्रीय गृह मंत्री को ललकारते हुए कहा, ‘ये हिंदुस्तान है, अमित शाह जी यहां कोई हिंदू, मुस्लिम नहीं है, इनकी कोई जात नहीं है। आप इस आवाज के सामने खड़े नहीं हो सकते। स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं। आप वीडियो बनाकर रखिए। उन सबूतों को हम रखेंगे’। राहुल ने कहा कि जब सब खत्म होगा तो इन सबूतों के आधार पर सबको सजा मिलेगी। चाहे पुलिस वाले हों या ज्ञानेश कुमार हों। ये देश की आवाज हैं। इस आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘केरल की अदिरा की एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है। उस कान पर चोट लगने के कारण वह एक कान से सुन नहीं पा रही है। पिछली बार मैंने आपको एक लड़का दिखाया था, जिसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। अब इस लड़की के एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है’। एनएसयूआई से जुड़ी ऋतु बराला ने अपने साथ हुई बदसलूकी का कहानी सुनाई तो दूसरे प्रदर्शनकारी रमित ने कहा, ‘मैं कंटेंट क्रिएटर हूं, मुझे 11 अक्टूबर को आरएसएस और भाजपा के गुंडों के बोलने के बाद हिरासत में लिया गया। उनके पास डंडे थे। पुलिस ने उनकी बात सुनकर लोगों को हिरासत में लिया और बुरी तरह हमें पीटा।

राहुल का दावा, ज्ञानेश मैसेज करते हैं

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार उनको मैसेज करते हैं और कई बार उनसे बात करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं राहुल ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार अपराधी नहीं हैं। राहुल ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपराध नहीं हैं, उनसे सारे काम करवाए जाते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी राहुल ने ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनने की सलाह दी थी।

राहुल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि, आप लोग चुनाव आयोग की बात करते हैं, आप सीधा ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हैं। क्या कभी उन्होंने आप से बात करने की कोशिश की? इस सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘हां उनके मैसेज आते हैं। ज्ञानेश कुमार यह प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं आप अपराधी नहीं है, आपसे बस करवाया गया है। सबसे आसान रास्ता है कि इस्तीफा दो और रास्ते से हट जाओ’।

राहुल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली को जेल बना दिया गया है। ये पुलिस वाले डिस्टर्ब हैं। ये कह रहे हैं कि हमसे युवाओं को क्यों पिटवाया जा रहा है। वे कह रहे हैं कि युवाओं को रोकने को कहा जा रहा है। आरएसएस के गुंडे महिलाओं को मार रहे हैं। एक तरफ हमसे कहा जा रहा है कि पैलेट गन चलाइए’। राहुल ने आगे कहा, ‘एक दिन हमें पुलिस ने रोका, जंतर मंतर पर पुलिस ने रोका, आज भी रोकेंगे। आपको लगता है कि क्या एक दिन की बात है। ये मत सोचिए कि पांच दिन पहले शुरू हुआ था। सालों से हमें रोका जा रहा है, अब दिख रहा है’।

केंद्र पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा, ‘आप सोच रहे हो कि हमारे लिए मुश्किल है। पुलिस हमें मार रही है। जितना आप थक रहे हो, उतना पुलिस थक रही है। पुलिस कह रही है कि हम ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा रहे हैं। पेशेंस और पर्सीवरेंस, लगे रहना है। हम करेंगे, वे रोकेंगे, हमें लगे रहना है। जितने दिन लगेंगे, एक महीने, दो महीने, साल…हम पीछे नहीं हटेंगे’। राहुल ने आगे कहा, ‘ये हिंदुस्तान की जनता की इन्पॉर्टेंस हैं। देश के हर युवा से कह रहा हूं कि ये आपके फ्यूचर, आपकी इज्जत की लड़ाई है। अगर आप नहीं आ सकते तो शाम को जब सुप्रीम कोर्ट के सामने होंगे, तब हमें सॉलिडेरिटी दिखाइए। जिस भी तरीके से ये कर सकते हैं, अपना एक्सप्रेशन करिए। बताइए कि जो हो रहा है, हम उसके खिलाफ हैं। हम ये नहीं होने देंगे’।

वोट चोरी के खिलाफ जन आंदोलन जारी रहेगा : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनआंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते तथा चुनाव व्यवस्था में सुधार नहीं होता तब तक युवा पीछे नहीं हटेंगे और यह जन आंदोलन चलता रहेगा।

श्री गांधी ने सोमवार को यहां विशेष संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया है और लोगों को राजधानी पहुंचने से रोका जा रहा है, आंदोलनकारी को पीटा जा रहा है और इसे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी भी मौजूदा हालात से परेशान हैं और उनमें से कई विपक्ष के आंदोलन को सही मानते हैं। उनका कहना था कि सच्चाई उनके साथ है और वे न थकेंगे, न रुकेंगे और लड़ते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, जनता और विपक्षी दल एक तरफ हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और ज्ञानेश कुमार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा कर प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के करीब 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तथा विदेश मंत्रालय के भीतर से उन्हें सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकार छीने जाने पर लोग सवाल पूछ रहे हैं।

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श्री गांधी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उन्होंने लोकतंत्र तथा चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब देते हुए याचिका दायर करने को कहा है। इंडिया गठबंधन के नेता अब मिलकर उच्चतम न्यायालय जाकर याचिका दायर करेंगे। लोगों से जन आंदोलन में जुटने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा में विश्वास रखने वाले सभी दलों के लोग इस लड़ाई में शामिल होंगे। जब तक संविधान की रक्षा, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, चुनाव व्यवस्था में सुधार और देश के लोगों को न्याय नहीं मिलता आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले दिन विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग जाते समय रोका गया और बस में बैठाया गया, दूसरे दिन जंतर-मंतर जाते समय भी उन्हें रोका गया और धक्का-मुक्की हुई, जबकि तीसरे दिन विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष उच्चतम न्यायालय जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से हर दिन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई जारी रखने, किसी से डरे बिना आंदोलन से पीछे नहीं हटने का आह्वान किया और कहा कि यह आंदोलन भगवान शिव का तांडव और शिव की बारात की तरह लोक कल्याण के लिए है इसमें कुछ भी पहले से तय नहीं होता और इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।

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सीजेपी का प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी ने ऐलान किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने यह भी कहा है कि उन्होंने प्रदर्शन नहीं करने के किसी भी बॉन्ड पर दस्तखत नहीं किया है। असल में इससे पहले दिल्ली पुलिस ने बताया था कि अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास ने 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की एसईएम कोर्ट में एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार के लिए 50 हजार रुपए का जमानती मुचलका भरा, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।

हालांकि अभिजीत दीपके भले कह रहे हैं कि कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है लेकिन पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बॉन्ड की बात मानी। उन्होंने दिन में अन्य लोगों के साथ प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें कहा, ‘हमसे कहा गया कि एक साल तक शांति भंग नहीं होनी चाहिए, लेकिन शांति भंग करने का काम पीएम मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने किया है’। दास ने कहा, ‘हम पीछे नहीं हटेंगे। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे सड़कों पर उतरें। हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। हमें जहां रोका जाएगा, हम वहीं प्रदर्शन करेंगे’।

सौरव दास ने आरोप लगाया कि पूरे देश में भय का माहौल बनाया गया है और यह सब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार के पास ऐसा कौन सा राज है, जिसकी वजह से सरकार उन्हें पद से नहीं हटा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि आरएसएस भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के पक्ष में है। दास ने सवालिया लहजे में कहा, ‘क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री की जीत में भी ज्ञानेश कुमार की कोई भूमिका थी’?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद आशुतोष रांका ने कहा, ‘हम चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनराई विजयन के आभारी हैं, जो कल सड़कों पर उतरे। हमें उम्मीद है कि सभी संगठन और राजनीतिक दल भविष्य में भी एकजुट होकर यह लड़ाई जारी रखेंगे’। उन्होंने कहा, ‘आज भी सीजेपी के कई साथियों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। पिछले कुछ दिनों में कई छात्रों को भी हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट हुई’।

सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

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श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

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