कांग्रेस अपने कारणों से हारी है

बहुत आदर्श स्थितियों के बावजूद दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन यानी डूसू का चुनाव कांग्रेस हार गई। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को सेंट्रल पैनल की चार में से एक भी सीट नहीं मिली। पिछले साल के चुनाव में एनएसयूआई ने एक सीट जीती थी और उससे पहले दो सीटें मिली थीं। यानी दो से एक पर और फिर शून्य पर आ गई। उपाध्यक्ष के पद पर कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय लड़े दीपांशु शौकीन सबसे ज्यादा वोट पाकर सबसे ज्यादा वोट से जीते। उनको 30 हजार से ज्यादा वोट आए, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार वीर चतरथ को चार हजार से कुछ ज्यादा वोट आया, जो नोटा से भी कम है।

सबसे ज्यादा चर्चा इसी सीट की हो रही है। मीडिया से लेकर राजनीतिक बिरादरी में सब कांग्रेस की और खास कर एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया कुमार की धुनाई कर रहे हैं कि इतने मजबूत उम्मीदवार दीपांशु शौकीन को उन्होंने टिकट नहीं दी, जो निर्दलीय लड़ कर 30 हजार वोट लाया और जिसको टिकट दी उसे चार हजार वोट मिले। सवाल है कि क्या कन्हैया ने वीर चतरथ को टिकट दी? वीर के पिता मनीष चतरथ हैं, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव हैं और कांग्रेस मुख्यालय के प्रभारी हैं। उनके बेटे की टिकट भला कौन रोक सकता था! उपाध्यक्ष की टिकट पहले से तय थी। तभी जब दीपांशु ने उपाध्यक्ष की टिकट मांगी तो कांग्रेस को मना करना पड़ा।

अब सवाल है कि दीपांशु ने उपाध्यक्ष की टिकट क्यों मांगी? यह सचमुच हैरान करने वाली बात है। इतना लोकप्रिय छात्र नेता, जो सत्य निकेतन की बिल्डिंग गिरने के बाद छात्रों की सुरक्षा की गारंटी होने तक खाली पैर घूम रहा हो और अपार समर्थन हासिल कर रहा हो वह उपाध्यक्ष की टिकट क्यों मांगेगा? उसे तो अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहिए! हकीकत यह है कि कांग्रेस ने दीपांशु का अध्यक्ष की ही टिकट ऑफर की थी। लेकिन चूंकि अध्यक्ष पद के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने यश डबास को टिकट दे दी थी इसलिए बताया जा रहा है कि दीपांशु ने यह कहते हुए अध्यक्ष की टिकट से इनकार किया कि यश डबास उसी की गोत्र का जाट है। जाट के खिलाफ जाट कैसे लड़े इसी सोच में दीपांशु ने उपाध्यक्ष की टिकट मांगी और नहीं मिली तो निर्दलीय लड़ा।

दीपांशु के इनकार के बाद कांग्रेस ने विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष की टिकट दी। अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को अध्यक्ष की टिकट देना बड़ा फैसला था। विजय शंकर ने एबीवीपी के यश डबास को कड़ी टक्कर दी और अंतिम फैसला सिर्फ दो हजार वोट से हुआ। कांग्रेस इकोसिस्टम के लोग प्रचार कर रहे हैं कि एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मीणा को टिकट दिलाई। यानी उसमें एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया का रोल नहीं है। सोचें, क्या चुनिंदा व्याख्या है! अध्यक्ष का उम्मीदवार अच्छा लड़ा तो टिकट विनोद जाखड़ ने दिलाई और उपाध्यक्ष का उम्मीदवार, जो कांग्रेस के एक बड़े नेता का बेटा है वह खराब लड़ा तो उसकी टिकट कन्हैया ने कराई! असल में यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की समस्या है, जहां नेताओं के बच्चे लायक हों या नहीं उनको टिकट देने का चलन है। इसलिए वीर चतरथ को टिकट मिली। दूसरे, दिल्ली यूनिवर्सिटी की जाट राजनीति के कारण एनएसयूआई के मजबूत जाट नेता ने टिकट से इनकार किया। अगर कांग्रेस को चतरथ को टिकट देने की मजबूरी नहीं होती और दीपांशु को टिकट देती तो हो सकता है कि वह अध्यक्ष औऱ उपाध्यक्ष दोनों पद जीत जाती।

राहुल ने उठाया हॉस्टल की कमी का मुद्दा

नई दिल्ली। इंदौर में अपने कार्यक्रम के एक दिन बाद रविवार को राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए छात्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने हॉस्टल की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पिछले दिनों छात्रों के एक प्राइवेट हॉस्टल की बिल्डिंग गिर गई थी, जिसमें दब कर पांच छात्रों सहित सात लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद से हॉस्टल का मुद्दा लगातार चर्चा में है।

हॉस्टल की कमी बताते हुए राहुल गांधी ने इंदौर अपने कार्यक्रम के हवाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा कि सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है, हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं’? राहुल ने कहा कि गांव से शहर पढ़ने आने वाली छात्राओं को हॉस्टल नहीं मिलने पर पीजी में रहना पड़ता है। किराए और सुरक्षित रहने का खर्च इतना ज्यादा है कि कई लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं।

सत्य निकेतन हादसा: सिर्फ 10 मिनट में पहुंची Ambulance | Satya Niketan PG Collapse | Blinkit

सत्य निकेतन हादसा: सिर्फ 10 मिनट में पहुंची Ambulance | Satya Niketan PG Collapse |  Blinkit

सत्य निकेतन में हुए हादसे के बीच जब कई छात्र मलबे में फंसे थे, तब मदद का हर मिनट मायने रखता था। ऐसे वक्त में Blinkit की Ambulance सिर्फ 10 मिनट में मौके पर पहुंची और Rescue Team के साथ राहत के काम में जुट गई। जनवरी 2025 में Service शुरू होने के बाद से Blinkit Ambulances ने 4,200+ Emergency Cases में मदद की है। फिलहाल ऐसी सुविधा Gurugram और Delhi-NCR के कुछ हिस्सों में Free उपलब्ध है। क्या आपको लगता है ऐसी Emergency Services को देश के और हिस्सों तक पहुंचना चाहिए?
Comment में अपनी राय बताएं।

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सत्य निकेतन PG हादसा: 18 साल के अर्पित ने गंवाई जान, परिवार ने दान की आंखें | Satya Niketan PG

सत्य निकेतन PG हादसा: 18 साल के अर्पित ने गंवाई जान, परिवार ने दान की आंखें | Satya Niketan PG

Satya Niketan PG, Delhi हादसे में मध्य प्रदेश के 18 वर्षीय अर्पित की जान चली गई! किसी भी माता-पिता के लिए अपने जवान बेटे को खो देने से शायद कोई दुख नहीं होता!
पर इस असहनीय पीड़ा के बीच भी, इस परिवार ने जो किया वह अतुलनीय है!

(18 Year Old Arpit Who Lost His Life In Delhi Satya Niketan PG Building Collapse Donates His Eyes)

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ईंधन की बढ़ती कीमतों की मार! हिंडन से उड़ानों पर IndiGo की कैंची, कोलकाता-नवी मुंबई और वाराणसी की फ्लाइटें घटीं

IndiGo cuts flights: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट से देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने तीन प्रमुख घरेलू रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम कर दी है। विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5.5% बढ़ोतरी को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है। सितंबर में ATF की कीमत बढ़कर ₹121.3 प्रति लीटर हो गई है। इस वजह से इंडिगो अब हिंडन से सिर्फ 5 रूट्स वाराणसी, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और नवी मुंबई पर संचालन कर रही है। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) और ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण एयरलाइंस अपनी कैपेसिटी घटाने पर मजबूर हैं।

एयरलाइन अधिकारियों के मुताबिक, ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत के दबाव में क्षमता को कम किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एयरलाइन की परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40-60% तक हो सकती है। हिंडन एयरपोर्ट पर कमर्शियल उड़ानों के संचालन की शुरुआत जून में हुई थी। जुलाई 2025 में इंडिगो ने यहां से नई उड़ानें शुरू की थीं। हालांकि, एयरपोर्ट पर सुबह से शाम तक संचालन की पाबंदियां और सीमित पार्किंग जैसी दिक्कतें भी एयरलाइनों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

इंडिगो फ्लाइट की संख्या में प्रमुख बदलाव

  • कोलकाता: रोजाना चलने वाली उड़ान अब सप्ताह में केवल 2 दिन (सोमवार और रविवार या बुधवार/रविवार) संचालित होगी।
  • नवी मुंबई: दैनिक (Daily) सेवाओं को घटाकर अब सप्ताह में 4 दिन कर दिया गया है।
  • वाराणसी: सप्ताह में 6 दिन चलने वाली सेवा को घटाकर अब 5 दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार) कर दिया गया है।

हिंडन से अब केवल 5 रूटों पर संचालन

इंडिगो वर्तमान में हिंडन से केवल 5 रूटों पर ही परिचालन कर रही है। इनमें वाराणसी, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और नवी मुंबई शामिल है। इसमें बेंगलुरु के लिए रोजाना उड़ानें जारी हैं। जबकि चेन्नई के लिए सप्ताह में 4 दिन (सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार) उड़ानें चल रही हैं।

ऑपरेशनल चुनौतियां और हिंडन की घटती कनेक्टिविटी

हिंडन टर्मिनल से संबंधित समस्याएं जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के जून में हुए कमर्शियल लॉन्च से भी पुरानी हैं। इंडिगो ने जुलाई 2025 में हिंडन से 8 नए रूट शुरू किए थे। लेकिन अहमदाबाद, इंदौर और पटना जैसे रूट कुछ ही महीनों में बंद कर दिए गए। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी इस टर्मिनल से पूरी तरह हट चुकी है।

हिंडन मूल रूप से भारतीय वायु सेना (IAF) का केंद्र है, जहां सुबह से शाम (dawn-to-dusk) तक ही उड़ान संचालन की अनुमति है। साथ ही यहां कमर्शियल विमानों के लिए सीमित पार्किंग जगह उपलब्ध है। वर्तमान में यहां केवल दो एयरलाइंस इंडिगो और स्टार एयर (नांदेड़ एवं आदमपुर के लिए) ऑपरेट कर रही हैं।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें

  • सितंबर में 5.5% की बढ़ोतरी: सितंबर से ATF की कीमतें 5.5% बढ़कर ₹121.3 प्रति लीटर हो गई हैं।
  • पिछले महीनों का हाल: जुलाई में कीमतें ₹110 प्रति लीटर और अगस्त में ₹115 प्रति लीटर थीं।
  • लागत पर असर: अधिकारियों के अनुसार, एयरलाइन की कुल परिचालन लागत (operating cost) में ईंधन का हिस्सा 40% से 60% तक होता है। घाटे से निपटने के लिए इंडिगो ने अपनी घरेलू क्षमता में 5% से 7% तक की कटौती की है। जबकि एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों में 22% तक की कमी की है।

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El Nino effect: अल नीनो का कहर! जानिए भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में लाखों लोगों के सामने इसने कैसे खड़ा कर दिया जल संकट

El Nino effect: भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलावों के बीच पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजबूत होते अल नीनो, रिकॉर्ड हाई टेंप्रेचर और बारिश की भारी कमी की वजह से श्रीलंका के कई हिस्सों में सूखा और ड्राई मौसम बेहद भीषण रूप ले चुका है। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस मौसमी आपदा की वजह से देश भर में 1 लाख 15 से अधिक लोग पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

अल नीनो का श्रीलंका पर असर

श्रीलंका के मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने जानकारी दी है कि क्षेत्र में अल नीनो का असर रंग दिखा रहा है। ये गर्म मौसम के पैटर्न के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आपको बता दें कि अल नीनो एक ऐसी मौसमी गतिविधि है जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी का के गर्म होने से पैदा होती है। ये पूरे क्षेत्र के तापमान पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चारों तरफ से हिंद महासागर से घिरा होने की वजह से श्रीलंका पर इस अल नीनो का असर अधिक तेज देखने को मिल सकता है। लगातार जारी सूखे के बीच अधिकारी इसके संभावित प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

7 जिलों के 115000 से अधिक लोग प्रभावित, जलाशय सूखे

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अल नीनो मौसम पैटर्न की वजह से श्रीलंका के 25 प्रशासनिक जिलों में से 7 जिलों में 115586 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। भीषण गर्मी और बारिश न होने से कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं। डीएमसी अधिकारी प्रगीत दनांसुरिया के मुताबिक मौजूदा समय में देश के 1 लाख 15 हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि लगभग 3500 एकड़-फिट की क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय का जलस्तर घटकर अब मात्र 1000 एकड़-फिट रह गया है। मध्य क्षेत्र के माटले और उत्तर-पूर्व के नंदीकडाल सहित कई क्षेत्रों में वॉटर बॉडी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

वन्यजीवों, समुद्री जीवन और खेती पर पड़ा बुरा असर

इस लंबे शुष्क मौसम और जल संकट ने श्रीलंका के पारितंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। उत्तर-पूर्व के मुल्लैथिवु लैगून में हजारों की संख्या में छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इन मौतों का कारण समुद्री पानी और मीठे पानी के आपस में मिलने को बताया है। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख रहे हैं। इसकी वजह से जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भटकने के लिए मजबूर हो गए हैं। पानी की कमी की वजह से कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी प्रमुख फसलें पानी न मिलने से नष्ट होने के कगार पर हैं।

सितंबर के अंत से राहत की उम्मीद

मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने उम्मीद जताई है कि सितंबर के अंत से देश में कुछ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में अगर बारिश होती ह तो श्रीलंका को इस भीषण गर्म मौसम, जल संकट और अल नीनो के प्रभाव से राहत मिल सकती है।

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5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

Building collapse deaths in India

Building collapse deaths in India: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर 2026) को हुई दर्दनाक दुर्घटना में पांच मंज़िला इमारत ढहने से सोमवार सुबह तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी हकीकत को सामने लाता है कि किस तरह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में ढिलाई बरती जाती है।

सत्य निकेतन जैसी घटनाएं मीडिया का ध्यान इसलिए खींचती हैं क्योंकि ये छात्रों और युवाओं के पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़ी होती हैं। लेकिन इसके इतर दर्जनों ऐसी छिटपुट घटनाएं हैं जो मिलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दर्जनों और देश भर में सैकड़ों बेकसूरों की जान ले लेती हैं और सुर्खियों से गायब रह जाती हैं।

Building collapse deaths in India

दिल्ली : आबादी के अनुपात में मौतों की गंभीर स्थिति

2024 में मौतों की कुल संख्या (42) के आधार पर दिल्ली देश में 12वें स्थान पर थी, लेकिन जब इन मौतों का विश्लेषण प्रति दस लाख (Per Million) आबादी के अनुपात में किया जाता है, तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है:

  • 2022, 2023 और 2024 तीनों वर्षों में प्रति 10 लाख आबादी पर इमारतें ढहने से हुई मौतों के मामले में दिल्ली देश में दूसरे या तीसरे स्थान पर बनी रही।
  • 2025-2026 की स्थिति : यद्यपि 2025 की आधिकारिक ADSI रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के संकलन के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक 20 से अधिक घटनाओं में कम से कम 70 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया : तात्कालिक हड़बड़ी बनाम ढांचागत सुधार

सत्य निकेतन की घटना के बाद हमेशा की तरह जन-आक्रोश भड़कने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने घोषणा की है कि वह 5-मंज़िला या उससे ऊपर की सभी अवैध इमारतों को “तत्काल सील” करेगा।

क्यों विफल होता है सिस्ट्म?

  1. रिएक्टिव बनाम प्रोएक्टिव : नगर निकाय हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागते हैं। नियमित ऑडिट और भ्रष्टाचार-मुक्त निगरानी का अभाव रहता है।
  2. सस्ते आवास की भारी मांग : दिल्ली जैसे बड़े शहरों में छात्रों और प्रवासियों की आमद लगातार बढ़ रही है। सस्ते आवास (Affordable Housing) की मांग के चलते अवैध और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
  3. सिर्फ सीलिंग समाधान नहीं : अचानक इमारतों को सील करने से किराएदार बेघर हो जाते हैं, लेकिन निर्माण के लिए जिम्मेदार बिल्डर-प्रशासनिक साठगांठ पर स्थायी लगाम नहीं लग पाती।
  4. स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और निगरानी का अभाव: स्थानीय जूनियर इंजीनियरों (JE) और पुलिस की मिलीभगत से अवैध निर्माण बिना रुकावट जारी रहता है। हादसे के बाद सीलिंग ड्राइव (Sealing Drive) चलाई जाती है, जो कि केवल एक रिएक्टिव (प्रतिक्रियात्मक) कदम है, प्रोएक्टिव नहीं।
  5. अपीलीय प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें : निगम द्वारा धारा 343/344 के तहत नोटिस जारी करने के बाद, मामला Appellate Tribunal for MCD (ATMCD) या अदालतों में चला जाता है, जहाँ स्टे (Stay Order) मिलने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही वर्षों तक लटकी रहती है।

ऐसे हादसों को कैसे रोकें : सुधार हेतु आवश्यक कदम (Way Forward)

  • स्ट्रक्चरल ऑडिट का अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण : 15 वर्ष से पुरानी या 3 मंजिल से ऊंची सभी इमारतों के लिए हर 5 साल में थर्ड-पार्टी ऑडिट (Third-Party Audit) अनिवार्य किया जाए और उसका डेटा सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही (Individual Accountability) : यदि किसी इलाके में अवैध निर्माण के दौरान हादसा होता है, तो केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के संबंधित नगर निगम इंजीनियर और बीट कांस्टेबल को भी कानूनी रूप से सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए।
  • सस्ते और सुरक्षित छात्र आवास का नियमन : सरकार को निजी PG और हॉस्टलों के संचालन के लिए एक पारदर्शी और सख्त नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाना चाहिए, ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सस्ते आवास उपलब्ध कराए जा सकें।

हाल ही में हुआ सत्य निकेतन हादसा और देश भर में 5 वर्षों में हुई लगभग 8,000 मौतें यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि भारत में शहरी विकास का ढाँचा और भवन सुरक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है।

भारत में शहरी आवास सुरक्षा नियम, दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बाय-लॉज (Unified Building Bye-Laws) और अवैध निर्माण पर लागू वैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण:

 

Building collapse deaths in India

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MCD के मुख्य बिल्डिंग बाय-लॉज और सुरक्षा मानक

MCD के नियमों के अनुसार किसी भी इमारत के निर्माण से लेकर उसके उपयोग तक निम्नलिखित कड़े नियमों का पालन अनिवार्य है:

(A) फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ऊंचाई की सीमा

  • भूखंड (Plot Size) के आकार के आधार पर यह तय होता है कि उस पर कितना निर्माण हो सकता है।
  • रिहायशी इलाकों में अतिरिक्त मंजिलें (जैसे 3 मंजिल के ऊपर 4था या 5वां फ्लोर बनाना) बिना FAR और स्ट्रक्चरल परमिशन के पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं।

(B) स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट (Structural Safety Certificate)

  • किसी भी इमारत का नक्शा पास कराने के लिए एक पंजीकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर (Structural Engineer) से यह प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है कि इमारत भूकंप, हवा के दबाव और वजन को सहने में सक्षम है।
  • ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) / कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) : निर्माण पूरा होने के बाद MCD इंस्पेक्टर और इंजीनियर मौके का निरीक्षण करते हैं। इसके बिना इमारत में किसी को रहने या किराए (PG) पर देने की अनुमति नहीं होती।

(C) यूसेज परिवर्तन (Commercial vs Residential)

  • आवासीय परिसरों (Residential Plots) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे बिना अनुमति के पेइंग गेस्ट (PG), व्यावसायिक हॉस्टल या कोचिंग सेंटर चलाने के लिए करना बाय-लॉज का सीधा उल्लंघन है।

Building collapse deaths in India

  • धारा 343 (DMC Act, 1957) – ध्वस्तीकरण का आदेश (Order of Demolition) : यदि कोई निर्माण बिना पास नक्शे के या पास नक्शे का उल्लंघन करके किया गया है, तो निगम नोटिस जारी कर निर्माण को गिराने (Demolish) का आदेश दे सकता है।
  • धारा 344 – काम रोकने और सील करने की शक्ति (Stop Work / Sealing Notice) : निगम अधिकारियों को अधिकार है कि वे निर्माणाधीन अवैध इमारत पर 'स्टॉप वर्क' का नोटिस दें या पुलिस बल की मदद से साइट को तुरंत सील कर दें।
  • धारा 348 – खतरनाक इमारतों की मरम्मत या ध्वस्तीकरण (Unsafe Buildings): यदि कोई पुरानी इमारत जीर्ण-शीर्ण (Dilapidated) स्थिति में है और गिरने के कगार पर है, तो निगम मकान मालिक को नोटिस जारी कर उसे खाली कराने, मरम्मत कराने या ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मामला : हादसे की स्थिति में मकान मालिक, बिल्डर और लापरवाह अधिकारियों पर BNS धारा 106 (गैर-इरादतन हत्या/लापरवाही से हुई मौत – पूर्व में IPC धारा 304A) और धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है।

दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या पर सियासी बवाल, राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल

दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या पर सियासी बवाल, राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल

chongtham vikram

दिल्ली के किलोकरी गांव में मणिपुरी संगीतकार सी. विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि उन्होंने डिलीवरी बॉय और ढाबा कर्मचारियों द्वारा घर के बाहर शोर मचाने और शराब पीने का विरोध किया था। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। दिल्ली में पूर्वोत्तर के संगीतकार की हत्या पर बवाल मच गया। राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल? ALSO READ: दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

 

क्या है मामला?

7 सितंबर को सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में GD नंबर 10A के तहत एक PCR कॉल मिली। यह कॉल किलोकारी गांव के रहने वाले 54 वर्षीय सी.विक्रम सिंह के साथ मारपीट के बारे में थी। जब विक्रम सिंह ने नीचे उतरकर उन लोगों को मना किया और आपत्ति जताई तो आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। उनके साथ लात-घूंसों से जमकर मारपीट की गई। बेटे उन्हें अस्तपाल ले गए जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

 

7 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें भरत कुमार, प्रमोद, रमजान खान, दीपांशु, मोहन विश्वकर्मा, विजय और मन्नू शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 19 से 36 साल के बीच है। एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

 

मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते थे सी विक्रम सिंह

विक्रम सिंह पिछले कई वर्षों से किलोकरी में परिवार के साथ रह रहे थे। वह मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले और मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते थे। वह एक संस्थान के लिए संगीतकार के तौर पर काम करते थे। ALSO READ: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

राहुल ने पूर्वोत्तर परिवार की ओर से पूछा सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, मणिपुर के एक प्रतिष्ठित संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह जी घर के बाहर हो रहे शोर को कम करने के लिए नीचे गए थे, और इसके लिए उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया।

 

एक पिता, जिसकी उसके अपने देश की राजधानी में, उसके अपने घर के बाहर हत्या कर दी गई। ऐसी कई घटनाओं के बाद, दिल्ली का हर पूर्वोत्तर परिवार आज यही सवाल पूछ रहा है – क्या हम यहां सुरक्षित हैं? बढ़ती अराजकता, खासकर पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने के लिए शाह का गृह मंत्रालय (MHA) और दिल्ली पुलिस क्या कर रही है?

 

मामले की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। विक्रम जी के परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।

 

क्या बोले मेघालय CM कॉनराड संगमा?

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कहा कि दिल्ली में मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की मारपीट के कारण हुई दुखद मौत की घटना से मैं बहुत आहत हूं। इस घटना ने राजधानी में नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ होने वाले अत्याचारों के दर्दनाक घावों को एक बार फिर ताजा कर दिया है। मैं अधिकारियों और दिल्ली पुलिस से अपील करता हूं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

Delhi building collapse case

दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के मामले अदालत ने आरोपी हरिराम बंसल के बेटे को पुलिस कस्टडी में भेजा। हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

 

सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 लोग मारे गए जबकि 12 लोगों का रेसक्यू किया गया था। हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में हरिराम समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। बिल्डिंग उर्मिला की थी, उसका बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था और उसका मैनेजमेंट बेटा संभालता था।

 

दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामल में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हादसे के लिए सिर्फ पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती। जिम्मेदारी डीयू व एमसीडी की भी है। कोर्ट ने एक पीआईएल पर एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। ALSO READ: Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

 

क्या है CJP की मांग?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। ALSO READ: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

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दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। कोर्ट ने कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी केवल इमारत मालिकों तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।

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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा, अवैध या असुरक्षित निर्माण और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि मलबे में अभी भी कोई व्यक्ति फंसा हो सकता है, इसलिए संभावित लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ उस इमारत के मालिकों की नहीं है जो ढह गई। अदालत ने MCD और DU की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया।  कोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले दूसरे शहरों से आने वाले कई छात्र निजी पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं।

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अदालत ने कहा कि ऐसे छात्रों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध कराने में व्यवस्था की ओर से कमी रही है।

 दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बचाव अभियान में तेजी लाई जाए और मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए पूरी गंभीरता से अभियान चलाया जाए। अदालत की टिप्पणी के बाद अब मामले में सिर्फ बिल्डिंग मालिकों की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि MCD की निगरानी व्यवस्था और DU की छात्र आवास व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है।

 

 

एनडीआरएफ ने कहा- बचाव अभियान अभी भी जारी 

एनडीआरएफ  ने सोमवार को बताया कि दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक दिन पहले इमारत ढहने की घटना के बाद बचाव एजेंसियों ने अब तक मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला है, जबकि मलबे के नीचे फंसे लोगों की सटीक संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है। यह बचाव अभियान सोमवार को भी दिनभर जारी रहने की उम्मीद है।

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एनडीआरएफ के महानिरीक्षक (आईजी) नरेंद्र बुंदेला ने कहा कि केंद्रीय आपदा मोचन बल के पास मलबे के नीचे फंसे लोगों की संख्या को लेकर 'कोई निश्चित आंकड़ा' नहीं है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ घटनास्थल पर लोगों के जिंदा होने के संकेतों की तलाश के लिए कटर, हाइड्रोलिक जैक और प्रशिक्षित श्वान दलों का इस्तेमाल कर रहा है। रविवार से ही एनडीआरएफ की दो तकनीकी टीम घटनास्थल पर तैनात हैं।