Daily Voice : अमेरिकी मध्यावधि चुनाव बाजार के लिए कर सकते हैं ट्रिगर का काम, चुनिंदा आईटी शेयरों पर रहे नजर

Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।

आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत

राजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ ‘ओवरसोल्ड’लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:

मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।

AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।

राजेश कोठारी का मानना ​​है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।

क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?

राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई ‘फास्ट फ्रीक्वेंसी’ डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।

इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

क्या आप आने वाले समय में ‘अल नीनो’ (El Niño) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?

इसके जवाब उन्होंने कहा कि ‘अल नीनो’ एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।

Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?

इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

 

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Barapullah flyover jam: बारापुला फेज-III फ्लाईओवर पर क्यों लग रहा है भारी जाम? अब नए सिरे से डिजाइन पर होगा काम

Barapullah Phase-III flyover traffic jam: राजधानी दिल्ली में गाड़ी चलाने वाले हाल ही में खुले बारापुल्ला फ़ेज़-III एलिवेटेड कॉरिडोर की तरफ न जाएं, क्योंकि सनडायल पार्क मर्जर पॉइंट और सराय काले खां के पास भारी जाम की सूचना है। फ्लाईओवर के तीन लेन वाले हिस्से को दो लेन वाले मौजूदा कॉरिडोर से जोड़ने वाले मर्जर पॉइंट पर कई दिनों से बहुत ज्यादा जाम की समस्या हो रही है। ट्रैफिक पुलिस ने इस डिजाइन को लेकर PWD विभाग से तुरंत बदलाव करने की मांग की है। तीन लेन वाला बारापुला फेज-III फ्लाईओवर सुंदरियाल पार्क के पास दो लेन वाले रूट में मिल रहा है। जबकि दो अन्य तीन लेन वाले रास्तों का ट्रैफिक भी इसी जगह आकर मिल रहा है, जिससे जाम की समस्या बढ़ रही है।

जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव

अधिकारियों ने बताया कि जाम की समस्या को कम करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव दिया है। ट्रैफिक पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) से फेज-तीन फ्लाईओवर के मौजूदा बारापुला मार्ग से जुड़ने वाले स्थान में तत्काल बदलाव करने को कहा है। पुलिस का कहना है कि जंक्शन का तीखा और अचानक बना डिजाइन व्यस्त मार्ग पर जाम की समस्या को और बढ़ा रहा है।

बारापुला फेज-तीन फ्लाईओवर को पिछले सप्ताह लोगों के लिए खोला गया था। लेकिन इसके खुलने के तुरंत बाद जुड़ने वाले नए मार्ग पर ट्रैफिक की स्थिति खराब हो गई। अधिकारियों ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल और सराय काले खां के बीच करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय करने में वाहन चालकों को एक घंटे से अधिक समय लग रहा था।

ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी को भेजे पत्र में कहा कि इस व्यवस्था के कारण भारी जाम लग रहा है। पुलिस द्वारा कराए गए ड्रोन सर्वेक्षण में जंक्शन पर समस्या की स्थिति सामने आई, जहां सीमित सड़क चौड़ाई में कई दिशाओं से आ रहा ट्रैफिक एक ही स्थान पर मिल रहा है।

फ्लाईओवर पर हैं तीन लेन

फेज-तीन फ्लाईओवर पर तीन लेन हैं। इसी स्थान पर सुंदरियाल की ओर से सराय काले खां और रिंग रोड की तरफ आने वाला ट्रैफिक कॉरिडोर में मिलता हैं। इसके अलावा आश्रम और डीएनडी की ओर से आने वाला ट्रैफिक भी मौजूदा बारापुला गलियारे से मिलता है। पत्र में कहा गया है कि इससे ट्रैफिक अचानक एक-दूसरे में मिल जाता है और जंक्शन पर ट्रैफिक का मर्जर पॉइंट बन जाता है।

ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि नया फ्लाईओवर सुंदरियाल के पास मौजूदा फ्लाईओवर से सीधे और तीखे मोड़ के साथ जुड़ रहा है। जबकि यहां सहज घुमाव होना चाहिए था। ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी से फ्लाईओवर के जुड़ने वाले स्थान को फिर से डिजाइन करने को कहा है।

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El Nino Impact: अक्टूबर में क्यों झुलस रही मुंबई-दिल्ली? क्या अल-नीनो है बढ़ती गर्मी की वजह, जानें

देश के कई हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी है। वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में अभी भी भारी बारिश का दौर जारी है। वहीं उत्तर भारत और दक्षिण-पश्चिम से मानसून की विदाई के बाद कुछ जगहों पर जमकर गर्मी पड़ रही है। मानसून की विदाई के बाद मुंबई और आसपास के इलाकों में अक्टूबर की गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं देश की राजधानी दिल्ली का भी ऐसा ही हाल है। दिल्ली में मानसून की विदाई के बाद के उमस भरी गर्मी ने लोगों को काफी परेशान किया है। वहीं आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली की हवा भी खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। आइए जानते हैं क्या अक्टूबर में पड़ रही इस गर्मी के पीछे अल-नीनो वजह है

मुंबई में पड़ेगी और गर्मी

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग ने बताया कि पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है। IMD के मौसमी अनुमान में भी अक्टूबर के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में महाराष्ट्र में भी इस महीने तापमान सामान्य से ऊपर रहने की आशंका है। इसकी वजह से लोगों को गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है। लोगों को तेज गर्मी और मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मुंबई में गर्मी का असर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला और तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के करीब रहा।

दिल्ली में बारिश का अलर्ट

दिल्ली में मानसून की विदाई के बाद से उमस भरी गर्मी से लोग काफी परेशान है। वहीं इसी बीच दिल्ली के लोगों के लिए अच्छी खबर है। आईएमडी ने दिल्ली में 6 अक्टूबर को बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान मूसलाधार बारिश हो सकती है। 6 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने की चेतावनी है। बारिश होने से लोगों को उमस भर्मी से राहत मिलेगी।

क्यों बढ़ा मुंबई का तापमान

रिपोर्ट के मुताबिक, IMD की वैज्ञानिक सुषमा नायर ने बताया कि मुंबई में बढ़ी गर्मी के पीछे कई मौसम संबंधी कारण हैं। उनके अनुसार, मानसून की विदाई, समुद्र से आने वाली हवाओं के देर से चलने और मुंबई के आसपास बने एंटी-साइक्लोनिक सिस्टम की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हुई है। इन स्थितियों के कारण शहर में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा गर्मी महसूस की जा रही है। मुंबई से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो गई, जो इस सदी में दूसरी सबसे जल्दी वापसी है। मानसून के कमजोर पड़ने, बादल कम होने और हवाओं के रुख में बदलाव से मुंबई और कोंकण में गर्मी बढ़ गई है।

अल-नीनो है वजह?

IMD के अनुमान के अनुसार, नवंबर और दिसंबर के दौरान प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है। इसका असर आने वाले समय के मौसम पर पड़ सकता है और तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। वही इस बार सर्दी भी अपेक्षाकृत कम ठंडी रह सकती है। लेकिन, मौसम एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल मुंबई में बढ़ी गर्मी का सीधा कारण एल नीनो नहीं है। मौजूदा तापमान में बढ़ोतरी मुख्य रूप से मानसून की विदाई और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों की वजह से हुई है।

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El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

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कल का मौसम: 9 सितंबर को बिहार-झारखंड संग 9 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने का खतरा! IMD ने दी ये चेतावनी

IMD Heavy Rain Alert: देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसूनी बारिश अपना पूरा रंग दिखा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 9 सितंबरके मौसम को लेकर ताजा चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत देश के 9 प्रमुख राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। इसके साथ ही कई तटीय व मैदानी राज्यों में तेज तूफानी हवाएं चलने और बादलों की कड़क के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत 9 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 9 सितंबर को पूर्वी भारत से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। आईएमडी के मुताबिक 9 सितंबर को बिहार, झारखंड, ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश की आशंका है।

बिजली कड़कने और 30 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज हवाओं और बिजली गिरने से होने वाले नुकसान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है।

रुपिरनुपरकुत

बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और उप-हिमालयी व गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 से 40 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और बिजली गिरने का अनुमान है। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में बादलों की जोरदार गर्जना के साथ बिजली गिरने का खतरा जताया गया है।

आंध्र प्रदेश में तेज सतही हवाएं, केरल में उमस और गर्मी

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे। तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में दिनभर तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में 9 सितंबर को मौसम काफी गर्म और अत्यधिक उमस भरा बना रहेगा।

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इसके अलावा मौसम विभाग ने अरब सागर के तटीय और खुले समुद्री क्षेत्रों में मौसम का मिजाज काफी खराब रहने की आशंका जताई गई है। सोमालिया और ओमान के तटवर्ती क्षेत्रों तथा उससे सटे पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएंचल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। IMD ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न उतरने की सख्त सलाह दी है।

El Nino effect: अल नीनो का कहर! जानिए भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में लाखों लोगों के सामने इसने कैसे खड़ा कर दिया जल संकट

El Nino effect: भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलावों के बीच पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजबूत होते अल नीनो, रिकॉर्ड हाई टेंप्रेचर और बारिश की भारी कमी की वजह से श्रीलंका के कई हिस्सों में सूखा और ड्राई मौसम बेहद भीषण रूप ले चुका है। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस मौसमी आपदा की वजह से देश भर में 1 लाख 15 से अधिक लोग पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

अल नीनो का श्रीलंका पर असर

श्रीलंका के मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने जानकारी दी है कि क्षेत्र में अल नीनो का असर रंग दिखा रहा है। ये गर्म मौसम के पैटर्न के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आपको बता दें कि अल नीनो एक ऐसी मौसमी गतिविधि है जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी का के गर्म होने से पैदा होती है। ये पूरे क्षेत्र के तापमान पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चारों तरफ से हिंद महासागर से घिरा होने की वजह से श्रीलंका पर इस अल नीनो का असर अधिक तेज देखने को मिल सकता है। लगातार जारी सूखे के बीच अधिकारी इसके संभावित प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

7 जिलों के 115000 से अधिक लोग प्रभावित, जलाशय सूखे

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अल नीनो मौसम पैटर्न की वजह से श्रीलंका के 25 प्रशासनिक जिलों में से 7 जिलों में 115586 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। भीषण गर्मी और बारिश न होने से कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं। डीएमसी अधिकारी प्रगीत दनांसुरिया के मुताबिक मौजूदा समय में देश के 1 लाख 15 हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि लगभग 3500 एकड़-फिट की क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय का जलस्तर घटकर अब मात्र 1000 एकड़-फिट रह गया है। मध्य क्षेत्र के माटले और उत्तर-पूर्व के नंदीकडाल सहित कई क्षेत्रों में वॉटर बॉडी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

वन्यजीवों, समुद्री जीवन और खेती पर पड़ा बुरा असर

इस लंबे शुष्क मौसम और जल संकट ने श्रीलंका के पारितंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। उत्तर-पूर्व के मुल्लैथिवु लैगून में हजारों की संख्या में छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इन मौतों का कारण समुद्री पानी और मीठे पानी के आपस में मिलने को बताया है। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख रहे हैं। इसकी वजह से जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भटकने के लिए मजबूर हो गए हैं। पानी की कमी की वजह से कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी प्रमुख फसलें पानी न मिलने से नष्ट होने के कगार पर हैं।

सितंबर के अंत से राहत की उम्मीद

मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने उम्मीद जताई है कि सितंबर के अंत से देश में कुछ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में अगर बारिश होती ह तो श्रीलंका को इस भीषण गर्म मौसम, जल संकट और अल नीनो के प्रभाव से राहत मिल सकती है।

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UP News: सरकारी स्कूलों के रसोइयों की सैलरी में ₹1000 की बढ़ोतरी, 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिड-डे मील’ योजना के तहत काम करने वाली रसोइयों के हित में चार अहम ऐलान किया है। योगी सरकार ने दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव लेने की अनिवार्य दो साल की उम्र-अंतर की शर्त खत्म कर दी है। यानी अब दोनों बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो साल से कम होने पर भी पात्र महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव ले सकेंगी। इसके अलावा करीब 3.5 लाख रसोइयों का मासिक मानदेय सितंबर से 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जो साल में 10 महीने मिलेगा।

साथ ही योगी सरकार ने 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राज्य के मिड-डे मील प्रोग्राम के तहत काम करने वाले 3.54 लाख रसोइयों के लिए कैशलेस मेडिकल कार्ड शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने इस पहल को उनकी सेहत, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि स्कूल की रसोई में खाना बनाना सिर्फ भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह लाखों बच्चों की सेहत, शिक्षा और भविष्य में योगदान देता है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 3.54 लाख मिड-डे मील रसोइयों के लिए रविवार को कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

सीएम योगी ने रविवार को X पर लिखा, “रक्षाबंधन के पहले प्रदेश के रसोइयों हेतु चार उपहार…1- मानदेय में वृद्धि…2- दुर्घटना होने पर परिवार को ₹2 लाख की सहायता…3- प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस उपचार… 4- साड़ी के लिए धनराशि बढ़ाकर ₹1,000।” सीएम योगी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “रसोइयों का मानदेय ₹1,000 से बढ़ाकर अब ₹3,000 कर दिया गया है..।”

मुख्यमंत्री ने ‘पीएम पोषण योजना’ के तहत रसोइयों के तौर पर काम करने वाली महिलाओं की तारीफ की। सीएम योगी ने उन्हें प्रोग्राम की ‘बुनियादी ताकत’ बताते हुए स्कूली बच्चों को खाना खिलाने में उनके योगदान का जिक्र किया।

उनके ट्वीट में लिखा, “हमारी रसोइया माताएं और बहनें, जो अपनी मेहनत और ममता से इस पवित्र काम को पूरा करती हैं, वे पीएम पोषण की असली बुनियादी ताकत हैं।” मंत्रिमंडल ने बुलंदशहर में नए बस अड्डों और अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग को चार लेन करने की संशोधित परियोजना को भी मंजूरी दी है।

जर्जर स्कूलों के वीडियो पर CM योगी का SP पर हमला

योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सोशल मीडिया पर प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों के वीडियो साझा कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इनमें से कई इमारतें 2017 से पहले की हैं, जब प्रदेश में सपा की सरकार थी।

लखनऊ में आयोजित ‘मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पुराने और जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित कर उन्हें नए भवनों से बदलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पुराने भवनों की तस्वीरें और वीडियो दिखाकर मौजूदा सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने कई पुराने और खराब हो चुके स्कूल भवनों को नए भवनों से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जो भवन अभी भी जर्जर स्थिति में हैं, उनकी पहचान की जा रही है और उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था दोनों की स्थिति खराब थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में गरीबों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी हुई तथा प्रदेश में दंगे और अव्यवस्था आम बात थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। सीएम योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षित भवन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है।

3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM Poshan Yojana) के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में काम कर रहे करीब 3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई बड़े ऐलान भी किए। सीएम योगी ने कहा कि मिड-डे मील तैयार करने वाले रसोइये बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकार उनके हितों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल स्कूल भवनों तक सीमित नहीं है। बल्कि छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ उनसे जुड़े कर्मचारियों और रसोइयों के कल्याण पर भी सरकार का ध्यान है।

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El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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El Nino Effect on Monsoon Rain: किसानों पर अल नीनो का प्रहार! इन इलाकों में 50% से ज्यादा बारिश की कमी, कई राज्यों में सूखे जैसे हालात का खतरा

El-Nino Effect on Monsoon Rain: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी प्रगति के कारण बारिश का संकट गहराता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार तक देश में सामान्य से 43 से 50 फीसदी तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि अगले महीने तक मानसून के पूरे देश में फैलने के बाद यह कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पूरे मानसून सीजन के अंत तक 10 फीसदी से अधिक बारिश की कमी रहने की आशंका जताई जा रही है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अल नीनो (El Nino) का प्रभाव मानसून पर साफ दिखाई दे रहा है। आमतौर पर इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की सकारात्मक स्थिति अल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर देती है। लेकिन इस साल ऐसी स्थिति बनने की संभावना कम है। ऐसे में मानसून के कमजोर रहने का खतरा बढ़ गया है।

अल नीनो बढ़ा रहा किसानों की चिंता

विशेषज्ञों के मुताबिक, सकारात्मक IOD अच्छी बारिश की गारंटी नहीं देता। लेकिन यह अल नीनो से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है। अतीत में कई अल नीनो वाले वर्षों में सकारात्मक IOD की वजह से सामान्य के करीब बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, इस बार ऐसी राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। यदि बारिश में कमी बनी रहती है तो इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसके अलावा कई राज्यों में गर्मी और उमस का दौर भी लंबा खिंच सकता है।

दिल्ली में गर्मी का रिकॉर्ड, ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री

बारिश की कमी का असर राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिल रहा है। शनिवार को दिल्ली में अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण ‘फील्स लाइक’ (हीट इंडेक्स) तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक है।

मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 4 डिग्री अधिक था। वहीं, दोपहर 2:30 बजे सापेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity) 45 फीसदी दर्ज की गई। अधिक नमी के कारण लोगों को वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी महसूस हुई।

मानसून की रफ्तार पर टिकी उम्मीदें

मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून के आगे बढ़ने के साथ बारिश की गतिविधियों में तेजी आ सकती है। यदि जुलाई में अच्छी बारिश होती है तो मौजूदा बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि, फिलहाल मौसम के संकेत बताते हैं कि पूरे सीजन में सामान्य से कम बारिश रहने की संभावना बनी हुई है।

मौसम विभाग के अनुसार, 1 से 27 जून के बीच देशभर में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि जुलाई में मानसून पूरे देश में सक्रिय होने के बाद यह कमी कुछ कम हो सकती है। लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि पूरे मानसून सीजन (जून-सितंबर) के अंत तक 10 प्रतिशत से अधिक वर्षा घाटा रह सकता है।

क्या है इंडियन ओशन डाइपोल (IOD)?

इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ (Neutral) रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

अल नीनो क्यों बढ़ा रहा चिंता?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे भारतीय मानसून कमजोर पड़ता है। पिछले कई सालों में जब भी अल नीनो सक्रिय रहा और IOD सकारात्मक नहीं रहा, तब देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। IMD ने भी कहा है कि इस बार अल नीनो के कारण मानसून के कमजोर रहने की आशंका अधिक है।

कई राज्यों में 50% से ज्यादा बारिश की कमी

बारिश के आंकड़ों के अनुसार कई राज्यों में हालात चिंताजनक हैं।

  • बिहार में करीब 82% बारिश की कमी दर्ज की गई।
  • गुजरात में लगभग 68% वर्षा घाटा रहा।
  • छत्तीसगढ़ में 68% कम बारिश हुई।
  • झारखंड में 66% कम बारिश हुई।
  • उत्तर प्रदेश में 65% कम बारिश हुई है।
  • ओडिशा में 63% और मध्य प्रदेश में भी सामान्य से काफी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
  • इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के कई हिस्सों में भी 30 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज हुई है।

कृषि और जल संकट बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है। जलाशयों का जलस्तर घटने, पेयजल संकट बढ़ने और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्यान्न उत्पादन पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

आगे क्या कहता है मौसम विभाग?

IMD का कहना है कि जुलाई में मानसून के पूरे देश में सक्रिय होने के बाद बारिश की स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है। हालांकि फिलहाल मौसम के वैश्विक संकेत बताते हैं कि इस बार अल नीनो का असर पूरे मानसून सीजन पर बना रह सकता है। ऐसे में सामान्य से कम बारिश की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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इकोनॉमी पर भी पड़ेगी कमजोर मानसून की मार, S&P ने कहा- घट सकती है भारत की GDP ग्रोथ

रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6.6% रह सकती है। एजेंसी का मानना है कि गैस-तेल के ऊंचे दाम, कमजोर मानसून और वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.7% रही थी। वहीं FY25 में यह 7.1% थी। S&P का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.6% के अनुमान के बराबर है। महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए S&P को उम्मीद है कि RBI इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

क्यों घट सकती है GDP ग्रोथ?

S&P के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एनर्जी मार्केट दबाव में हैं। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और महंगाई के जोखिम में इजाफा होता है।

एजेंसी ने यह भी कहा कि अल नीनो के असर से मानसून कमजोर पड़ा है। 22 जून तक देश में बारिश सामान्य से 43% कम दर्ज की गई थी। कमजोर मानसून का असर खेती और ग्रामीण मांग दोनों पर पड़ सकता है।

स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के लिए वैकल्पिक फसल योजनाएं तैयार की हैं। इनमें कम बारिश की स्थिति में होने वाली फसलों की सिफारिश की गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

S&P का कहना है कि तेल का दाम बढ़ने से उद्योगों का खर्च बढ़ रहा है। सप्लाई चेन पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। इसके अलावा उर्वरक (Fertiliser) महंगे होने से खेती की लागत बढ़ सकती है। यह फैक्टर खाद्य उत्पादन और खाद्य कीमतों दोनों पर असर डाल सकता है।

एजेंसी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर 5.1% तक पहुंच सकती है। तीसरी तिमाही में महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत अंक तक ज्यादा रह सकती है।

S&P के मुताबिक, कंपनियां तेल के बढ़े दाम का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। हाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी भी महंगाई बढ़ाएगी।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर क्या कहा?

अपनी रिपोर्ट ‘Economic Outlook Asia-Pacific Q3 2026: AI-Exposed Markets To Outperform’ में S&P ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की तस्वीर तीन बड़े फैक्टर से तय होगी। इनमें वैश्विक आर्थिक गतिविधियों की मजबूती, कच्चे तेल का दबाव और AI बेस्ड टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट में तेजी शामिल है।

एजेंसी का कहना है कि फिलहाल भारत समेत पूरे क्षेत्र पर कच्चे तेल की लागत और महंगाई का दबाव बना हुआ है। इसका असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

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