जापान बैकअप कैपिटल बनाने की तैयारी में, क्या भारत में भी दूसरी राजधानी की जरूरत है, दिल्ली के अलावा कौन से ऑप्शन चर्चा में रहे?

Japan second capital: जापान एक बड़े भूकंप जैसी भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान सरकारी कामकाज को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए एक बैकअप राजधानी बनाने पर विचार कर रहा है। इसके बाद भारत में भी एक पुरानी बहस फिर से छिड़ गई है कि क्या भारत को भी अपनी एक दूसरी राजधानी की जरूरत है? जापान में जहां यह चर्चा पूरी तरह से आपदा प्रबंधन और आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों पर केंद्रित है। वहीं भारत में दूसरी राजधानी की मांग ऐतिहासिक रूप से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक पहुंच और राष्ट्रीय सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

यह विचार भारत के लिए नया नहीं है। संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. बी.आर अंबेडकर से लेकर विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया है। उनका तर्क रहा है कि भारत का शासन आज भी काफी हद तक नई दिल्ली में ही केंद्रित है।

डॉ. बीआर. अंबेडकर चाहते थे हैदराबाद बने भारत की दूसरी राजधानी

भारत में दूसरी राजधानी के पक्ष में सबसे शुरुआती और मजबूत तर्कों में से एक डॉ बीआर अंबेडकर का था। अपनी 1955 में प्रकाशित पुस्तक थॉट्स ऑन लिंग्विस्टिक स्टेट्स में उन्होंने तर्क दिया था कि नई दिल्ली भारत की एकमात्र राजधानी के लिए आदर्श जगह नहीं है। अंबेडकर ने तीन प्रमुख चिंताओं की ओर इशारा किया था।

पहली ये कि दिल्ली दक्षिण भारत से काफी दूर है, जिससे दक्षिण के नागरिकों और अधिकारियों को यहां आने-जाने में भारी असुविधा होती है। दूसरा दिल्ली की भीषण गर्मी और अत्यधिक ठंड इसे एक आरामदायक प्रशासनिक केंद्र नहीं बनने देती। अंबेडकर ने चेतावनी दी थी कि दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से निकटता युद्ध के समय इसे बेहद संवेदनशील और असुरक्षित बनाती है।

इसके विकल्प के रूप में उन्होंने हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने हैदराबाद को एक केंद्रीय रूप से स्थित और कॉस्मोपॉलिटन शहर बताया, जो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक स्थायी संतुलन स्थापित कर सकता है।

बेंगलुरु प्रस्ताव ने फिर ताजा की थी बहस

दूसरी राजधानी का यह मुद्दा साल 2018 में तब फिर से चर्चा में आया जब कर्नाटक के तत्कालिक आवास मंत्री एम कृष्णप्पा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बेंगलुरु को भारत की दूसरी राजधानी के रूप में मान्यता देने की मांग की।

इस प्रस्ताव में तर्क दिया गया था कि भारत के टेक्नोलॉजी हब के रूप में बेंगलुरु की स्थिति, वहां का अनुकूल मौसम और मजबूत आर्थिक आधार इसे दक्षिण भारत में एक आदर्श प्रशासनिक केंद्र बनाते हैं। समर्थकों का यह भी मानना था कि इस कदम से देश के शासन ढांचे में दक्षिणी राज्यों का एकीकरण और मजबूत होगा।

दुनिया के कई देशों में हैं एक से अधिक राजधानियां

अगर भारत अपनी प्रशासनिक संस्थाओं को अलग-अलग शहरों में बांटता है तो ऐसा करने वाला वह पहला देश नहीं होगा। दुनिया के कई देशों ने अपनी सरकारी शक्तियों को विभिन्न शहरों में बांट कर रखा हुआ है। दक्षिण अफ्रीका यह मल्टी-कैपिटल मॉडल का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। यहां प्रिटोरिया में कार्यपालिका, केप टाउनमें संसद और ब्लोएमफोनटेन में न्यायपालिका है। इसी तरह मलेशिया ने अपने प्रशासनिक कार्यालयों को पुत्राजया में ट्रांसफर कर दिया है जबकि संसद कुआलालंपुर से ही चलती है।

श्रीलंका की संसद श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे में बैठती है जबकि कोलंबो इसका वाणिज्यिक केंद्र और कई सरकारी संस्थानों का मुख्यालय बना हुआ है। नीदरलैंड एम्स्टर्डम को अपनी संवैधानिक राजधानी मानता है, लेकिन सरकार, संसद और सुप्रीम कोर्ट द हेग में स्थित हैं। बोलीविया की भी दो राजधानियां हैं, जहां ला पाज प्रशासनिक राजधानी है और सुक्रे संवैधानिक राजधानी व न्यायपालिका का केंद्र है।

जापान का प्रस्ताव भारत की बहस से अलग क्यों है?

जापान का बैकअप कैपिटल का प्रस्ताव भारत में चल रही दूसरी राजधानी की बहस से एक बड़े मायने में अलग है। टोक्यो जापान की मुख्य राजधानी बना रहेगा। जापानी सरकार केवल एक आपातकालीन प्रशासनिक केंद्र की संभावनाओं की स्टडी कर रही है ताकि अगर कोई भीषण भूकंप या बड़ी आपदा राजधानी टोक्यो को प्रभावित करती है तो वहां से देश का शासन निर्बाध रूप से चलता रहे। जापान का मुख्य उद्देश्य सरकार का निरंतर संचालन है, न कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व।

क्या भारत को वास्तव में दूसरी राजधानी की जरूरत है?

हालांकि समय-समय पर दूसरी राजधानी का विचार उभरता रहा है, लेकिन दिल्ली में किए गए भारी निवेश (जैसे सेंट्रल विस्टा का पुनर्विकास) को देखते हुए एक नई दूसरी राजधानी बनाना फिलहाल व्यावहारिक नजर नहीं आता। इसके बजाय विशेषज्ञों ने कुछ अधिक व्यावहारिक विकल्प सुझाए हैं। महाराष्ट्र विधानसभा के नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र की तर्ज पर, हर साल संसद का कम से कम एक सत्र दक्षिण भारत के किसी शहर में आयोजित किया जा सकता है।

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक न्याय तक आम जनता की पहुंच आसान बनाने के लिए चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी क्षेत्रीय पीठें स्थापित की जा सकती हैं। फिलहाल नई दिल्ली ही भारत की एकमात्र राजधानी बनी हुई है। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया भर के देश अपने शासन को अधिक लचीला, सुरक्षित और सुलभ बनाने के रास्ते तलाश रहे हैं, भारत में भी कुछ संस्थानों के विकेंद्रीकरण का सवाल समय-समय पर उठता रहेगा।

El Nino Counter: अल-नीनो के खतरे के बीच आई बड़ी खुशखबरी! पॉजिटिव IOD लाएगा झमाझम बारिश, WMO की रिपोर्ट में दावा

India Mansoon Update: मानसून सत्र के दौरान जहां अल-नीनो के असर से सामान्य से कम बारिश का खतरा मंडरा रहा है। वहीं इस बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (Positive IOD) बनने की संभावना जताई गई है। यह पॉजिटिव IOD अल-नीनो के निगेटिव इंपैक्ट को आंशिक रूप से बेअसर कर सकता है, जिससे देश भर में बारिश की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।

क्या है अल-नीनो और पॉजिटिव IOD? समझिए मौसम का गणित

मौसम के इस चक्र और मानसून पर इसके प्रभाव को समझने के लिए दोनों स्थितियों का अंतर जानना जरूरी है। अल-नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह के पानी के गर्म होने का एक जलवायवीय पैटर्न है। भारत में इसका सीधा संबंध कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से होता है। पॉजिटिव IOD उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर (Indian Ocean) के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों की समुद्री सतह के तापमान का अंतर है। जब पॉजिटिव IOD बनता है तो इससे मानसून की हवाएं मजबूत होती हैं जो देश में बेहतर और झमाझम बारिश में मदद करती हैं।

दक्षिण भारत को राहत की उम्मीद, 22% की कमी होगी पूरी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के पूर्वानुमान से उन इलाकों को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है जहां अब तक बारिश की कमी रही है। 1 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की 22% कमी दर्ज की गई है। अब पॉजिटिव IOD के सक्रिय होने से न सिर्फ दक्षिण भारत, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों में भी मानसूनी बारिश की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है।

सुपर अल-नीनो जैसी कोई आधिकारिक कैटिगरी नहीं: सरकार

उधर पिछले दिनों केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में अल-नीनो से जुड़े भ्रम को दूर करते हुए स्थिति स्पष्ट की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि WMO या पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा आधिकारिक तौर पर सुपर अल-नीनो नाम की कोई कैटिगरी परिभाषित नहीं है। भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान की विसंगतियों के आधार पर अल-नीनो घटनाओं को कमजोर, मध्यम, मजबूत या बहुत मजबूत श्रेणियों में बांटा जाता है।

जून में कमजोर, जुलाई में मध्यम हुआ अल-नीनो: IMD का अपडेट

राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक IMD ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल-नीनो स्थितियां विकसित होने की भविष्यवाणी की थी। जून 2026 के दौरान अल-नीनो की स्थिति कमजोर थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर मध्यम स्तर तक पहुंच गई।

अक्टूबर से दिसंबर 2026 के सीजन के दौरान अल-नीनो के और मजबूत होने की संभावना है और यह बहुत मजबूत श्रेणी तक पहुंच सकता है। भारत पर इसका सटीक असर सिर्फ अल-नीनो ही नहीं बल्कि महासागर और वायुमंडल के संयुक्त संबंधों के क्रमिक विकास पर निर्भर करता है।

IMD जारी कर रहा है नियमित चेतावनियां और आईबीएफ रिपोर्ट

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अल-नीनो और अन्य जलवायु घटकों की लगातार निगरानी कर रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ दूसरे स्टेकहोल्डर्स को नियमित रूप से मौसमी, मासिक और विस्तारित सीमा के पूर्वानुमान जारी किए जा रहे हैं।

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इसके अतिरिक्त, आपदा प्रबंधन अधिकारियों, राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों की तैयारियों व त्वरित प्रतिक्रिया में सहायता के लिए IMD दैनिक आधार पर अगले 7 दिनों के लिए प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियां दी जा रही हैं।

IMD की चेतावनी- अल-नीनो की वजह से अगस्त-सितंबर में बारिश को लेकर आया नया अनुमान, मौसम विभाग ने कही चिंता वाली बात

El Nino impact: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे चरण यानी अगस्त और सितंबर महीने को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग ने बताया है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से देश में मानसून के दूसरे छमाही के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगस्त 2026 के लिए बारिश और तापमान के डिटेल अनुमान के साथ-साथ प्रशांत महासागर और हिंद महासागर की मौसमी स्थितियों पर भी अपनी रिपोर्ट साझा की है।

अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) के दौरान देश भर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम यानी सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसी दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होगी।वैसे प्रायद्वीपीय भारत कुछ हिस्सों, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी क्षेत्रों और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।

अगस्त महीने में कैसा रहेगा बारिश का हाल?

अगस्त 2026 के लिए विशेष रूप से जारी पूर्वानुमान में IMD ने बताया कि इस महीने भी देश भर में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम यानी सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। देश के बड़े हिस्से में सूखा या कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है। इस महीने में भी पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों, उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

अगस्त में तापमान का पूर्वानुमान: बढ़ेगी गर्मी और उमस

बारिश में कमी के साथ-साथ अगस्त महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने वाला है। अगस्त 2026 के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। सिर्फ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों और उससे सटे दक्षिणी प्रायद्वीप के छिटपुट इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में रात और सुबह का मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक दर्ज किए जाने की उम्मीद है।

अल-नीनो बना बड़ी चिंता, इसके और मजबूत होने के संकेत

मौसम विभाग ने मानसून के दूसरे चरण में बारिश की कमी की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बने अल-नीनो असर को बताया है। अभी मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। ऐसे में मॉडरेट अल-नीनो देखने को मिल रहा है। मानसून मिशन कपल्ड फॉरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के पूर्वानुमान के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाकी सीजन के दौरान अल-नीनो की यह स्थिति और अधिक मजबूत होने की आशंका है, जो मानसूनी हवाओं और बारिश को प्रभावित कर सकती है।

हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की क्या है स्थिति?

अभी हिंद महासागर में न्यूट्रल इंडियन ओशिनिक डिपोल (IOD) की स्थिति बनी हुई है। MMCFS के मॉडल संकेत देते हैं कि मानसून सीजन के बाकी बचे समय में यह तटस्थ स्थिति जारी रह सकती है। कुछ अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान केंद्रों के जलवायु अनुमानों से संकेत मिलता है कि सितंबर 2026 के दौरान पॉजिटिव आईओडी स्थितियां भी बन सकती हैं। ये मानसून के लिए कुछ हद तक राहतकारी साबित हो सकती हैं।

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