Opinion: Freak accidents are almost always human negligence

Opinion: Freak accidents are almost always human negligence
Opinion: Freak accidents are almost always human negligence

Going by the amount of social media chatter around any NCAP test, you’d think India is one safety-obsessed nation. Awareness is rising, but safety is far from ingrained in our ethos like it is in, say, Japan. We all know the current state of road safety is appalling, but I’m not talking about driving manners or vehicle collisions or crash ratings. Of late, there’s another aspect of road safety that’s really been bothering me; the road itself and everything around it. 

During the rains in Mumbai last month, two girls were electrocuted in a water-logged street. Luckily, timely intervention from a passer-by and medical treatment at a hospital saved them. Last year, an auto-rickshaw driver had his head 

pierced by a falling iron rod from metro construction; thankfully emergency neurosurgery saved him too. Not everyone is so lucky though, if you can even call these accidents lucky. A concrete slab from an under-construction girder bridge fell onto a moving auto-rickshaw and car and resulted in one death and multiple injuries.

You would have read the horrific news of a 25-year-old biker in Delhi who died after his motorcycle plunged into an unbarricaded, 14-foot-deep construction pit dug up and left open. And it’s not just bikes; people have fallen into open manholes, flooded over with water, and lost their lives, and recently a 20-year-old student died after his car plunged into an open drain. Two years ago, a massive illegal billboard blew over and killed 17 people and injured over 75 others during heavy winds in Mumbai. This monsoon season, a tree collapsed onto a school bus and took the life of an 11-year-old child. 

This is the aspect of road safety that has been bothering me recently, not because car crashes and other accidents do not, but because these are all too often termed ‘freak accidents’ or ‘random happenings’. Nonsense! These are not freak incidents, but accidents caused by negligence and unaccountability. So many folks say, ‘oh, his/her time had come’. Again, nonsense. Would you say all those poor kids who died in Africa due to starvation died because their time had come? No. They died because of human action, or inaction. 

So, really, I write this column only to highlight this fact; to remind us all that it isn’t random. As the saying goes, ‘everything happens for a reason’. Here it’s callousness, from those in charge and from us. So, the next time you express outrage over a non-5-star NCAP-rated car, spare some words of outrage for these incidents too.

IMD की चेतावनी- अल-नीनो की वजह से अगस्त-सितंबर में बारिश को लेकर आया नया अनुमान, मौसम विभाग ने कही चिंता वाली बात

El Nino impact: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे चरण यानी अगस्त और सितंबर महीने को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग ने बताया है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से देश में मानसून के दूसरे छमाही के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगस्त 2026 के लिए बारिश और तापमान के डिटेल अनुमान के साथ-साथ प्रशांत महासागर और हिंद महासागर की मौसमी स्थितियों पर भी अपनी रिपोर्ट साझा की है।

अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) के दौरान देश भर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम यानी सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसी दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होगी।वैसे प्रायद्वीपीय भारत कुछ हिस्सों, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी क्षेत्रों और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।

अगस्त महीने में कैसा रहेगा बारिश का हाल?

अगस्त 2026 के लिए विशेष रूप से जारी पूर्वानुमान में IMD ने बताया कि इस महीने भी देश भर में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम यानी सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। देश के बड़े हिस्से में सूखा या कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है। इस महीने में भी पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों, उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

अगस्त में तापमान का पूर्वानुमान: बढ़ेगी गर्मी और उमस

बारिश में कमी के साथ-साथ अगस्त महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने वाला है। अगस्त 2026 के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। सिर्फ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों और उससे सटे दक्षिणी प्रायद्वीप के छिटपुट इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में रात और सुबह का मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक दर्ज किए जाने की उम्मीद है।

अल-नीनो बना बड़ी चिंता, इसके और मजबूत होने के संकेत

मौसम विभाग ने मानसून के दूसरे चरण में बारिश की कमी की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बने अल-नीनो असर को बताया है। अभी मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। ऐसे में मॉडरेट अल-नीनो देखने को मिल रहा है। मानसून मिशन कपल्ड फॉरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के पूर्वानुमान के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाकी सीजन के दौरान अल-नीनो की यह स्थिति और अधिक मजबूत होने की आशंका है, जो मानसूनी हवाओं और बारिश को प्रभावित कर सकती है।

हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की क्या है स्थिति?

अभी हिंद महासागर में न्यूट्रल इंडियन ओशिनिक डिपोल (IOD) की स्थिति बनी हुई है। MMCFS के मॉडल संकेत देते हैं कि मानसून सीजन के बाकी बचे समय में यह तटस्थ स्थिति जारी रह सकती है। कुछ अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान केंद्रों के जलवायु अनुमानों से संकेत मिलता है कि सितंबर 2026 के दौरान पॉजिटिव आईओडी स्थितियां भी बन सकती हैं। ये मानसून के लिए कुछ हद तक राहतकारी साबित हो सकती हैं।

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व्रत और मानसून का डबल असर! सावन में फिट रहने के लिए अपनाएं ये 7 आदतें

सावन (Sawan) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। यह महीना मानसून (monsoon) के बीच आता है, जब मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इंफेक्शन, वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और डाइट में बदलाव करते हैं, इसलिए शरीर की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो आप पूरे सावन भर खुद को फिट और एनर्जेटिक रख सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे जरूरी हेल्थ टिप्स:

Drink clean and boiled water (साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं)

This may contain: several jars filled with different types of fruit and vegetables

सावन (Saawan)और बारिश के मौसम (monsoon season) में दूषित पानी से टाइफाइड (typhoid), डायरिया (diarrhea) और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा फिल्टर या उबला (boiled water) हुआ पानी ही पिएं। घर से बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और रोड साइड मिलने वाले खुले हुए खाने से बचें।

Eat fresh, light, and balanced meals (ताजा, हल्का और संतुलित भोजन)

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बारिश के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) थोड़ा कमजोर हो सकता है। ऐसे में बासी, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचें। घर का ताजा खाना, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ इम्यूनिटी (immunity) भी मजबूत रखने में मदद करता है।

Prevent nutritional deficiencies (व्रत में शरीर में पोषण की कमी न होने दें)

सावन (Saawan) में कई लोग सोमवार का व्रत (fast) रखते हैं। ऐसे में सिर्फ भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, मखाना, मेवे, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (adequate fluid) लें। इससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसी प्रॉब्लम से बचाव होता है।

Yoga, Pranayama or light exercise (रोज योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज)

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो, तब भी घर पर 20–30 मिनट योग, स्ट्रेचिंग (stretching) या प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) बेहतर होता है और इम्यूनिटी (immunity) मजबूत होती है। रेगुलर एक्सरसाइज मेंटल स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है।

Adequate Sleep and Rest (पर्याप्त नींद और शरीर का आराम)

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हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खानपान (nutritious diet)। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होती है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या एक्टिविटीज में बिजी हैं, तो बीच-बीच में आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर पर अधिक थकान न पड़े।

cleanliness and personal hygiene (साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन का ध्यान)

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बारिश के मौसम में बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (viruses) तेजी से फैलते हैं। इसलिए खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें और पैरों को साफ व सूखा रखें, ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।

Protect mosquitoes and infections (मच्छरों और इंफेक्शन से बचे)

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मानसून (monsoon) में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

सांप काटने के तुरंत बाद पड़ सकती है ये गलती भारी, जानिए क्या नहीं करें सांप के काटने पर!

बरसात का मौसम शुरू होते ही सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे गांव के इलाकों में स्नेकबाइट के मामले भी तेजी से सामने आते हैं। ऐसे समय में सही जानकारी और समय पर इलाज किसी की जान बचा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि सांप काटने के बाद घबराने या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना जरूरी है। आइए जानते हैं स्नेकबाइट से बचाव और फर्स्ट एड से जुड़ी जरूरी बातें:

बारिश में बढ़ जाते हैं स्नेकबाइट के केस

Snake Facts: बारिश में दिखने वाले ये 5 सांप नहीं होते जहरीले, काट भी लें तो नहीं होगी मौत, जानें कैसे करें पहचान - News18 हिंदी

बरसात के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, इसलिए वे सेफ और सूखी जगह की तलाश में घरों, खेतों, खलिहानों और पशुशालाओं की ओर निकल आते हैं। इसी वजह से इस मौसम में लोगों का सांपों से सामना ज्यादा होता है और स्नेकबाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

हर सांप जहरीला नहीं होता

बारिश का साइड इफेक्ट! घरों और दफ्तरों में घुस रहे बिन बुलाए मेहमान, मानसून में बढ़ा स्नेकबाइट का खतरा! - jungle news monsoon brings snakes closer to homes as flooded ...

एक्सपर्ट कहते है ज्यादातर सांप में जहरीले नहीं होते हैं और पानी में रहने वाले कई सांप भी जहरीले नहीं होते। हालांकि, यदि यह पता न हो कि काटने वाला सांप जहरीला था या नहीं, तो किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

सांप काटने पर मरीज को शांत रखें

सांप काटने पर यह दें प्राथमिक उपचार, भूलकर भी न लगाएं चीरा, जानें एक्सपर्ट की राय

स्नेकबाइट के बाद मरीज को घबराने न दें और उसे आराम से लिटाकर रखें। बिना कारण चलने-फिरने से बचाएं, क्योंकि इससे यदि जहर मौजूद हो तो वह शरीर में तेजी से फैल सकता है।

चीरा लगाना और कसकर बांधना है खतरनाक

Snake:इन चीजों से सांपों की कांपती है रूह, गंध से भागते हैं दूर, जानिए इनमें आखिर क्या है ऐसा - Effective And Safe Methods To Repel Snakes Without Harming Them - Amar

एक्सपर्ट के मुताबिक, सांप काटने वाली जगह पर ब्लेड या किसी धारदार चीज से चीरा नहीं लगाना चाहिए। इसी तरह रस्सी, कपड़ा या तार कसकर बांधना भी नुकसानदायक हो सकता है और इन्फेक्शन या कम्प्लीकेशन का रिस्क बढ़ सकता है।

बिना देर किए हॉस्पिटल पहुंचाएं

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स्नेकबाइट की कंडीशन में मरीज को तुरंत पास के किसी सरकारी अस्पताल या हेल्थ सेंटर ले जाना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

झाड़-फूंक नहीं, डॉक्टर का इलाज जरूरी

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एक्सपर्ट का कहना है कि झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट लेनी चाहिए। हॉस्पिटल में अवेलेबल एंटी-स्नेक वेनम से समय पर ट्रीटमेंट मिलने पर ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं।

इस तरह स्नेकबाइट की कंडीशन में सही जानकारी और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर साबित हो सकती है, इसलिए हर सिचुएशन में डॉक्टर की एडवाइस और हॉस्पिटल का ट्रीटमेंट ही अपनाएं।