पानी की कमी के लक्षण और उसे दूर करने के 5 असरदार घरेलू तरीके, जानिए पांच मिनट में

ज्यादा पानी पीने के लिए किसी नियम की जरूरत नहीं होती। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, पानी वाली चीजें खाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना सबसे आसान तरीका है। जाने शरीर के लिए पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है, पानी की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है और किन आसान आदतों को अपनाकर पूरे दिन हाइड्रेट रहा जा सकता है।

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कम पानी पीने के नुकसान

पानी शरीर के लगभग हर अंग के सही काम करने के लिए जरूरी है। यह शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल रखता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, पाचन में मदद करता है और किडनी के जरिए शरीर से गंदगी बाहर निकालने में सहायता करता है। पर्याप्त पानी पीने से बॉडी सेल्स भी सही तरीके से काम करती हैं। पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, कब्ज और होंठ सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सही समय

एक्सपर्ट के अनुसार, पानी पीने की आदत धीरे-धीरे बनानी चाहिए। सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं, हर भोजन और स्नैक के साथ पानी लें, हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें और जरूरत हो तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं। सादा पानी पसंद न आए तो उसमें नींबू, खीरा, पुदीना या नेचुरल फ्लेवर मिलाकर पी सकते हैं। इससे पानी पीना आसान हो जाता है।

हाइड्रेटेड फूड्स

हाइड्रेशन सिर्फ पानी पीने से ही नहीं होता, बल्कि कई फूड्स भी इसमें मदद करते हैं। तरबूज, संतरा, खीरा, टमाटर, दही और सूप जैसे फूड्स में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त तरल मिलता है और पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।

डिहाइड्रेशन

यदि शरीर में पानी की कमी होने लगे तो प्यास ज्यादा लगना, मुंह सूखना, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत माना जाता है, जबकि गहरा रंग इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत है।

लक्षण

कई लोग बिजी शेड्यूल, ट्रैवलिंग, बार-बार बाथरूम जाने से बचने की आदत या सादा पानी पसंद न आने की वजह से पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, बुखार, उल्टी, दस्त, ज्यादा पसीना आना, गर्म मौसम और कुछ दवाएं भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मौसम और अपनी फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार पानी का सेवन बढ़ाना जरूरी होता है।

सुरक्षित तरीके से हाइड्रेट

एक्सपर्ट का कहना है कि एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर होता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अपनी उम्र, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार पानी पिएं।

डॉक्टर से सलाह

अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगे, बार-बार डिहाइड्रेशन हो, बहुत कम पेशाब आए, अचानक वजन कम होने लगे, धुंधला दिखाई दे या लगातार कमजोरी और चक्कर महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हार्मोन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

मानसून में सिर्फ मच्छर ही नहीं, सांपों से भी रहें सतर्क! अपनाएं ये उपाय

मानसून के बाद सांप काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, पिछले दिनों में जहरीले सांप के काटने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। लगातार बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण सांप अपने बिल छोड़कर रिहायशी इलाकों की ओर आ रहे हैं और कई बार घरों, भूसे के ढेर, गोहालों या झाड़ियों में छिप जाते हैं, ऐसे में आप मानसून के दौरान सांपों से बचाव के लिए यहां दिए गए आसान और जरूरी उपाय अपना सकते है:

घर के आसपास सफाई रखें (Maintain Regular Cleanliness)

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मानसून में सांप अक्सर ऐसी जगहों पर छिपते हैं जहां झाड़ियां, लंबी घास, लकड़ी, ईंट, भूसा या कबाड़ जमा हो। इसलिए घर के आसपास की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। समय-समय पर झाड़ियों की कटाई करें और बेकार सामान हटाते रहें, ताकि सांपों को छिपने की जगह न मिले।

दीवारों की दरारें बंद करें (Seal Cracks and Gaps)

अगर घर की दीवार, फर्श, आंगन या स्टोर रूम में कहीं बिल, दरार या छेद दिखाई दे, तो उसे सीमेंट, मिट्टी या मटेरियल से बंद कर दें। इससे सांपों के घर के अंदर आने की संभावना काफी कम हो जाती है। खासकर बरसात के मौसम में घर की रेगुलर इंस्पेक्शन करना जरूरी है।

रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें (Use a Torch at Night)

बारिश के मौसम में सांप रात के समय ज्यादा एक्टिव रहते हैं। इसलिए अंधेरे में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का यूज करें। खेत, बगीचे, गोहाल या घर के आसपास कभी भी नंगे पैर न चलें। मजबूत जूते और पूरी लंबाई वाले कपड़े पहनने से सांप के काटने का खतरा कम हो सकता है।

सांप से सुरक्षित दूरी रखें (Safe Distance from Snakes)

अगर घर या आसपास सांप दिखाई दे, तो घबराएं नहीं और उसे मारने या पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें। सही दूरी बनाए रखें और तुरंत वन विभाग , स्थानीय प्रशासन या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें। ऐसा करने से आपकी और सांप दोनों की सेफ्टी बनी रहती है।

 परिवार को जागरूक रखें (Family Awareness)

मानसून के दौरान बच्चों और परिवार के सभी मेंबर को सांपों से जुड़ी जरूरी सावधानियों के बारे में बताएं। उन्हें समझाएं कि झाड़ियों, लकड़ी या भूसे के ढेर में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें और सांप दिखाई देने पर उससे दूर रहें। साथ ही यह भी याद रखें कि अगर किसी को सांप काट ले, तो घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने की बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर इलाज ही जान बचाने का सबसे सेफ तरीका है।

खिड़कियां और दरवाजें बंद (Secure Doors and Windows)

मानसून के दौरान रात में सांप खुले दरवाजों, खिड़कियों या नालियों के रास्ते घर में घुस सकते हैं। इसलिए दरवाजे हमेशा बंद रखें, खिड़कियों पर जाली लगवाएं और पानी निकासी वाली नालियों को भी सुरक्षित रखें। इससे सांपों के घर में आने का खतरा कम हो सकता है।

खाने-पीने की चीजें और कचरा (Keep Food and Garbage Covered)

घर के आसपास कचरा, बचा हुआ खाना या अनाज खुला रखने से चूहे आने लगते हैं, और जहां चूहे होते हैं वहां सांपों के आने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए कूड़ेदान को ढककर रखें, अनाज को बंद डिब्बों में रखें और घर के आसपास सफाई बनाए रखें, ताकि सांपों को अट्रैक्ट करने वाली कंडीशन न बनें।

व्रत और मानसून का डबल असर! सावन में फिट रहने के लिए अपनाएं ये 7 आदतें

सावन (Sawan) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। यह महीना मानसून (monsoon) के बीच आता है, जब मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इंफेक्शन, वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और डाइट में बदलाव करते हैं, इसलिए शरीर की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो आप पूरे सावन भर खुद को फिट और एनर्जेटिक रख सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे जरूरी हेल्थ टिप्स:

Drink clean and boiled water (साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं)

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सावन (Saawan)और बारिश के मौसम (monsoon season) में दूषित पानी से टाइफाइड (typhoid), डायरिया (diarrhea) और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा फिल्टर या उबला (boiled water) हुआ पानी ही पिएं। घर से बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और रोड साइड मिलने वाले खुले हुए खाने से बचें।

Eat fresh, light, and balanced meals (ताजा, हल्का और संतुलित भोजन)

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बारिश के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) थोड़ा कमजोर हो सकता है। ऐसे में बासी, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचें। घर का ताजा खाना, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ इम्यूनिटी (immunity) भी मजबूत रखने में मदद करता है।

Prevent nutritional deficiencies (व्रत में शरीर में पोषण की कमी न होने दें)

सावन (Saawan) में कई लोग सोमवार का व्रत (fast) रखते हैं। ऐसे में सिर्फ भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, मखाना, मेवे, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (adequate fluid) लें। इससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसी प्रॉब्लम से बचाव होता है।

Yoga, Pranayama or light exercise (रोज योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज)

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो, तब भी घर पर 20–30 मिनट योग, स्ट्रेचिंग (stretching) या प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) बेहतर होता है और इम्यूनिटी (immunity) मजबूत होती है। रेगुलर एक्सरसाइज मेंटल स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है।

Adequate Sleep and Rest (पर्याप्त नींद और शरीर का आराम)

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हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खानपान (nutritious diet)। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होती है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या एक्टिविटीज में बिजी हैं, तो बीच-बीच में आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर पर अधिक थकान न पड़े।

cleanliness and personal hygiene (साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन का ध्यान)

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बारिश के मौसम में बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (viruses) तेजी से फैलते हैं। इसलिए खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें और पैरों को साफ व सूखा रखें, ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।

Protect mosquitoes and infections (मच्छरों और इंफेक्शन से बचे)

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मानसून (monsoon) में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

श्रावण मास में शाक खाना क्यों है वर्जित?

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Why Shak is prohibited in Sawan: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने भक्त व्रत, पूजा, जप, दान और सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं। सावन के दौरान खान-पान को लेकर भी कई विशेष नियम बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है शाक यानी हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करना। कई लोग इसे केवल धार्मिक परंपरा मानते हैं, जबकि इसके पीछे धार्मिक, आयुर्वेदिक और व्यावहारिक कारण भी बताए जाते हैं।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

 

श्रावण/ सावन मास में शाक या हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से क्यों बचा जाता है? जानें इसके धार्मिक, आयुर्वेदिक, वैज्ञानिक कारण, चातुर्मास के नियम और सही आहार संबंधी जानकारी।

 

चातुर्मास के नियम

बता दें कि हमारे शास्त्रों में अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में आहार संबंधी नियमों में कुछ भिन्नताएं मिलती हैं। इसलिए स्थानीय परंपरा और अपने गुरु या परिवार की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है। श्रावण मास चातुर्मास का हिस्सा होता है। चातुर्मास में ऋषि-मुनि और साधु-संत भी भोजन में संयम रखते थे। इस अवधि में कुछ खाद्य पदार्थों का त्याग करने की परंपरा बनी, जिसमें कई स्थानों पर शाक का भी उल्लेख मिलता है।

 

1. वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य कारण

कीड़े-मकोड़ों और जीवाणुओं यानी बैक्टिरिया (Bacteria) का बढ़ाव:

सावन का महीना बारिश का मौसम यानी मानसून का समय होता है। इस समय हवा में नमी बहुत अधिक होती है, जिसके कारण हरे पत्तों पर छोटे-छोटे सूक्ष्म जीव, कीड़े और उनके अंडे पनपने लगते हैं। कई बार ये इतने बारीक होते हैं कि अच्छे से धोने पर भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाते, जिससे पेट के संक्रमण यानी Infections का खतरा रहता है।

 

पाचन तंत्र का धीमा पड़ना:

मानसून के दौरान वातावरण में बदलाव के कारण हमारा पाचन तंत्र या पाचन अग्नि (Digestive System, Metabolism) मंद हो जाती है। साग में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिसे पचाने के लिए शरीर को अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है। इस मौसम में साग खाने से गैस, एसिडिटी, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

वात दोष में वृद्धि:

आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर में 'वात दोष' प्राकृतिक रूप से बढ़ता है। हरी पत्तेदार सब्जियां वात को और अधिक बढ़ाती हैं, जिससे जोड़ों में दर्द, वायु विकार और पेट की बीमारियां हो सकती हैं।

 

2. धार्मिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

पित्त और वात का संतुलन: आयुर्वेद के नियम 'ऋतुचर्या' के अनुसार, सावन के महीने में शरीर को हल्का और सुपाच्य भोजन चाहिए होता है।

 

सात्विकता और व्रत: सावन मास शिव जी की भक्ति और सात्विक जीवन शैली का महीना है। इस दौरान शरीर को शुद्ध रखने के लिए उन चीजों के त्याग का विधान है जो पाचन पर भार डालती हैं या बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

प्राचीन समय में आज की तरह सब्जियों को कीटाणुरहित करने के उन्नत साधन नहीं थे। इसलिए हमारे ऋषियों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के इस नियम को धर्म और परंपरा से जोड़ दिया ताकि आम लोग मानसून में बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

 

मानसून में ये 5 सब्जियां बन सकती हैं परेशानी की वजह, जानें बचने के तरीके

बारिश का मौसम आते ही बाजार में ताजी सब्जियों की भरमार दिखाई देने लगती है, लेकिन इस मौसम में बढ़ी हुई नमी कई सब्जियों की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है। गीले वातावरण के कारण कुछ सब्जियों में बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़ों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार सब्जियां बाहर से बिल्कुल ताजी और अच्छी दिखती हैं, लेकिन उनके अंदर गंदगी या कीड़े छिपे हो सकते हैं। खासकर पत्तेदार और ज्यादा नमी वाली सब्जियों को खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

सही तरीके से सफाई और जांच के बिना इन्हें खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए मानसून के दौरान सब्जियां खरीदते समय उनकी ताजगी, सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्वाद के साथ सेहत भी सुरक्षित रहे।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, धनिया, मेथी, लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियां बारिश में जल्दी खराब हो सकती हैं। इनके पत्तों में मिट्टी, कीड़े और नमी छिप सकती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इन्हें इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है।

2. पत्तागोभी

पत्तागोभी की कई परतों के बीच बारिश के मौसम में छोटे कीड़े, गंदगी और नमी जमा हो सकती है। ज्यादा नमी के कारण इसमें फंगस लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। खरीदने से पहले इसकी ताजगी जरूर जांच लें।

3. फूलगोभी

फूलगोभी के छोटे-छोटे फूलों के अंदर कीड़े आसानी से छिप सकते हैं। मानसून में बढ़ी हुई नमी की वजह से इसमें कीड़ों का खतरा ज्यादा रहता है। इसे पकाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है।

4. मशरूम

मशरूम में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह जल्दी खराब हो सकता है। बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से इसमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। इसे हमेशा भरोसेमंद जगह से खरीदें और तुरंत इस्तेमाल करें।

5. बैंगन

बैंगन में मानसून के दौरान कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार बाहर से ताजा दिखने वाला बैंगन अंदर से खराब या कीड़ों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसे काटकर अच्छी तरह जांचने के बाद ही पकाएं।

मानसून में सब्जियां सुरक्षित रखने के आसान तरीके

  • हमेशा ताजी और साफ सब्जियां ही खरीदें।
  • सब्जियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं।
  • इस्तेमाल से पहले नमक वाले पानी या सिरके के घोल में 15-20 मिनट भिगो सकते हैं।
  • बारिश के मौसम में कच्ची सब्जियां खाने से बचें और अच्छी तरह पकाकर खाएं।
  • लौकी, तोरई, कद्दू और पेठा जैसी मौसमी सब्जियां बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

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Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

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Signs of Low Blood Sugar: शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर कम होना एक ऐसी स्थिति है जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। हमारे दिमाग और शरीर को ठीक से काम करने के लिए ग्लूकोज की लगातार जरूरत होती है। जब इसका स्तर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो शरीर तुरंत खतरे के संकेत भेजने लगता है।

 

आमतौर पर यह समस्या मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में अधिक देखी जाती है, लेकिन कई बार लंबे समय तक भूखे रहने, अत्यधिक व्यायाम, कुछ दवाओं के सेवन या अन्य स्वास्थ्य कारणों से गैर-डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है। शुरुआत में हल्की कमजोरी, पसीना आना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर कम होने पर शरीर में क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं, उनके शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए।

 

शरीर में शुगर कम होने पर दिखने वाले लक्षणों को हम इस तरह समझ सकते हैं:ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

 

1. जब शुगर कम होना शुरू होती है, जानें शुरुआती लक्षण

जैसे ही ब्लड शुगर का लेवल गिरता है, शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) हार्मोन बढ़ने लगता है, जिससे ये शुरुआती परेशानियां होती हैं:

 

अचानक तेज भूख लगना: शरीर ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए तुरंत खाने के संकेत देता है।

 

चक्कर आना या कमजोरी: सिर हल्का महसूस होने लगता है और पैर डगमगाने लगते हैं।

 

चिड़चिड़ापन या मूड बदलना: अचानक बिना बात के गुस्सा आना, रोने का मन करना या घबराहट होना।

 

हाथ-पैरों में कंपन या घबराहट: बिना किसी कारण के शरीर में कंपकंपी महसूस होने लगती है।

 

अत्यधिक पसीना आना और ठंड लगना: बिना गर्मी के भी अचानक विशेषकर गर्दन के पीछे ठंडा पसीना आने लगता है।

 

दिल की धड़कन तेज होना: ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत तेजी से धड़क रहा है (Palpitations)।

 

2. जब शुगर बहुत ज्यादा गिर जाएल जानें गंभीर लक्षण

यदि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए और दिमाग को पर्याप्त ग्लूकोज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है:

 

आंखों के सामने धुंधलापन आना: साफ दिखाई न देना या एक की जगह दो चीजें दिखना।

 

भ्रम की स्थिति: बात समझने में दिक्कत होना या लड़खड़ाती आवाज में बोलना या सही से बोल न पाना।

 

नींद न खुलना या सुस्ती: बहुत ज्यादा सुस्ती छा जाना और सोने की इच्छा होना।

 

दौरे पड़ना या बेहोशी: यह सबसे खतरनाक स्थिति है, जहां व्यक्ति अचानक अचेत (Unconscious) हो सकता है।ALSO READ: पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

 

आपातकालीन स्थिति में क्या करें? 

यदि आपको या आपके आस-पास किसी को शुगर कम होने के लक्षण दिखें, तो तुरंत '15:15 का नियम' अपनाएं:

 

1. तुरंत करें ये उपाय

15 ग्राम तुरंत पचने वाला कार्बोहाइड्रेट लें: जैसे ही लक्षण दिखें, मरीज को 3-4 चम्मच चीनी/ग्लूकोज पाउडर, 1/2 कप फ्रूट जूस, या 4-5 टॉफी चूसने के लिए दें। ध्यान रखें: चॉकलेट या बिस्कुट न दें, क्योंकि इनमें मौजूद फैट शुगर को जल्दी बढ़ने नहीं देता।

 

2. 15 मिनट का इंतजार करें

कुछ भी मीठा खिलाने के बाद मरीज को शांत बैठने दें या आराम करने दें और 15 मिनट तक इंतजार करें ताकि शुगर शरीर में एब्जॉर्ब हो सके।

 

3. ब्लड शुगर दोबारा चेक करें

15 मिनट बाद ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल दोबारा मापें। यदि लेवल अभी भी 70 mg/dL से कम है, तो स्टेप 1 को दोबारा दोहराएं।

 

4. नॉर्मल खाना या स्नैक दें

जब शुगर लेवल 70 mg/dL से ऊपर आ जाए, तो मरीज को एक रोटी या बिस्कुट जैसी ठोस चीज खिलाएं ताकि शुगर लेवल दोबारा नीचे न गिरे। यह शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करेंगा।

 

महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो या कुछ भी निगलने की स्थिति में न हो, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी, जूस या चीनी बिल्कुल न डालें। इससे वह उसकी सांस की नली में फंस सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाएं ताकि उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन (IV Fluids) दिया जा सके।

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मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

An image showing the allergic reaction in the skin caused by a mosquito bite

Mosquito Bite Scientific Reason: मच्छर का काटना केवल एक छोटी सी सुई चुभने जैसा होता है, लेकिन उसके कुछ ही सेकंड बाद होने वाली तेज खुजली और लाल निशान हमें परेशान कर देते हैं। अधिकांश मामलों में यह समस्या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन यदि गंभीर एलर्जी, संक्रमण या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।ALSO READ: Monsoon health tips: सावधान! बारिश में बीमारियों के खतरे से कैसे बचाएं खुद को, ये लक्षण दिखें तो ना करें नजरअंदाज

 

आइए इसके पीछे छिपे बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक कारण और इससे राहत पाने के आसान घरेलू व डॉक्टरी उपचारों को समझते हैं।

 

मच्छर का काटना, वैज्ञानिक कारण

जब कोई मादा मच्छर (सिर्फ मादा मच्छर ही खून पीती हैं) हमारी त्वचा पर बैठती है, तो वह खून चूसने के लिए अपनी सूंड (Proboscis) को त्वचा में डालती है। इस प्रक्रिया के दौरान असली कारण शुरू होता है:

 

लार का प्रवेश (Saliva Injection): मच्छर की लार में विशेष प्रकार के प्रोटीन और थक्कारोधी (Anticoagulants) तत्व होते हैं। यह लार खून को जमने से रोकती है ताकि मच्छर बिना किसी रुकावट के आसानी से खून चूस सके। जैसे ही यह बाहरी लार हमारे शरीर में प्रवेश करती है, हमारा इम्यून सिस्टम इसे एक हमलावर मानकर तुरंत सक्रिय हो जाता है। इस लार से लड़ने के लिए हमारा शरीर 'हिस्टामाइन' नाम का एक रसायन छोड़ता है।

 

सूजन और खुजली: हिस्टामाइन के कारण प्रभावित हिस्से के आसपास की रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं। इससे वहां खून का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे त्वचा लाल हो जाती है, सूज जाती है और वहां की नसें मस्तिष्क को खुजली का संकेत भेजने लगती हैं।

 

मच्छर के काटने पर क्या करें और क्या न करें?

सबसे जरूरी नियम: मच्छर के काटने वाली जगह को कभी भी जोर से न खुजलाएं। खुजलाने से त्वचा की ऊपरी परत छिल सकती है, जिससे बैक्टीरिया का संक्रमण यानी इंफेक्शन (Infection) होने का खतरा बढ़ जाता है और निशान भी गहरा हो जाता है।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

 

* खुजली और सूजन दूर करने के आसान उपचार

यदि मच्छर ने काट लिया है और तेज खुजली हो रही है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से तुरंत राहत पा सकते हैं:

 

1. घरेलू उपचार

* बर्फ की सिकाई: प्रभावित जगह पर बर्फ का टुकड़ा कपड़े में लपेटकर 5 से 10 मिनट रखें। ठंडा तापमान नसों को सुन्न कर देता है, जिससे हिस्टामाइन का असर कम होता है और सूजन व खुजली तुरंत शांत हो जाती है।

 

एलोवेरा जेल: एलोवेरा में प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी यानी सूजन रोधी गुण होते हैं। इसे काटने वाली जगह पर लगाने से ठंडक मिलती है।

 

शहद: शहद में प्राकृतिक एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं। इसकी एक बूंद प्रभावित जगह पर लगाने से खुजली कम होती है।

 

बेकिंग सोडा पेस्ट: एक चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा सा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे 10 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें। यह त्वचा के pH स्तर को संतुलित कर आराम देता है।

 

2. मेडिकल उपचार

कैलामाइन लोशन: Calamine Lotion इसे लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और खुजली तुरंत बंद हो जाती है।

 

एंटीहिस्टामाइन क्रीम: यदि खुजली बहुत ज्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह से ओटीसी हाइड्रोकार्टिसोन (Hydrocortisone) या कोई हल्की एंटीहिस्टामाइन क्रीम  (Antihistamine Cream) लगाई जा सकती है जो हिस्टामाइन के प्रभाव को सीधे रोक देती है।

 

डॉक्टर के पास कब जाएं?

आमतौर पर मच्छर के काटने के निशान 2 से 3 दिनों में खुद ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि आपको काटने वाली जगह पर अत्यधिक दर्द, मवाद/ पस, लगातार बढ़ता लाल घेरा, या फिर बुखार, सिरदर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण महसूस हों, तो यह डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

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बरसात में कौन-सी सब्जियां खाएं और किनसे बनाएं दूरी? जानें एक्सपर्ट की सलाह

मानसून की पहली बारिश जहां तपती गर्मी से राहत देती है, वहीं ये मौसम सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे पेट की समस्या, संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में खानपान में थोड़ी सावधानी रखना बेहद जरूरी हो जाता है। खासकर सब्जियों का चुनाव करते समय ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हर सब्जी बारिश के मौसम में शरीर के लिए फायदेमंद साबित नहीं होती।

आयुर्वेद भी इस मौसम में हल्के, ताजे और आसानी से पचने वाले भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देता है। सही सब्जियों का चयन और उन्हें अच्छी तरह साफ करके पकाना मानसून में स्वस्थ रहने का आसान तरीका हो सकता है।

पालक को दें थोड़े दिनों का ब्रेक

डॉ. नितिका कोहली के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार बारिश के मौसम में पालक खाने से पेट से जुड़ी समस्याओं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पालक का सूप, स्मूदी या पालक पनीर फिलहाल टालना बेहतर हो सकता है।

पत्तागोभी में छिप सकते हैं अनचाहे मेहमान

पत्तागोभी की परतों में बारिश के दौरान कीड़े या सूक्ष्म जीव छिपे होने की संभावना बढ़ जाती है। आयुर्वेद इसे भारी और ठंडी तासीर वाली सब्जी मानता है, जो पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है।

शिमला मिर्च भी बन सकती है परेशानी की वजह

नमी वाले मौसम में शिमला मिर्च जल्दी खराब हो सकती है और उसमें फंगस या कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक इसकी ठंडी प्रकृति कुछ लोगों में गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है।

टमाटर हर मौसम में नहीं होता फायदेमंद

हालांकि टमाटर लगभग हर सब्जी का हिस्सा होता है, लेकिन मानसून में इसकी खट्टी तासीर एसिडिटी और पाचन संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकती है। आयुर्वेद इस मौसम में इसका सीमित सेवन करने की सलाह देता है।

फूलगोभी के पकौड़े खाने से पहले सोच लें

बरसात में फूलगोभी की ठंडी और अधिक पानी वाली प्रकृति पाचन अग्नि को कमजोर कर सकती है। इसलिए इसे कम मात्रा में या पूरी तरह पकाकर ही खाना बेहतर माना जाता है।

मशरूम में बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

मशरूम नमी वाली मिट्टी में उगते हैं और बारिश के दौरान इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना अधिक रहती है। सही तरीके से साफ और पकाए बिना खाने पर फूड पॉइजनिंग या पेट की समस्या हो सकती है।

बैंगन खाते समय रखें अतिरिक्त सावधानी

बारिश के मौसम में बैंगन पर कीड़ों और बैक्टीरिया का हमला ज्यादा हो सकता है। कुछ लोगों में यह खुजली, एलर्जी या त्वचा संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

ये सब्जियां बरसात में हो सकती हैं बेहतर विकल्प

लौकी बन सकती है आपकी हेल्दी साथी

लौकी में पानी, फाइबर और जरूरी विटामिन भरपूर होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। हालांकि इसे खरीदते समय कड़वी या खराब लौकी से बचें और हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

खीरा खाना है तो पहले करें सही तैयारी

बारिश में खीरे की सतह पर कीटाणु जमा हो सकते हैं। इसे खाने से पहले 10–15 मिनट गुनगुने पानी में भिगोएं, अच्छी तरह धोएं, छिलका उतारें और फिर सेवन करें।

भिंडी बनाते समय न करें जल्दबाजी

भिंडी के अंदर छोटे कीड़े छिपे हो सकते हैं, इसलिए इसे लंबाई में काटकर अच्छी तरह जांचें। साफ पानी से धोकर पूरी तरह पकाने के बाद ही खाएं, ताकि बैक्टीरिया और फंगस का खतरा कम हो सके।

मानसून में याद रखें ये नियम

आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में हल्का, ताजा, घर का बना और अच्छी तरह पका भोजन सबसे सुरक्षित माना जाता है। सब्जियों को अच्छी तरह धोना, साफ करना और पूरी तरह पकाकर खाना इस मौसम में संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने का आसान तरीका है।

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