ऋषभ पंत की चोट है गंभीर, गेंदबाजी कोच के बयान से टीम और फैंस चिंता में

भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने मंगलवार को कहा कि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को कंधे पर ‘काफी चोट’ लगी है जिससे उनकी मूवमेंट प्रभावित हुई है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह श्रीलंका के खिलाफ यहां चल रहे दूसरे टेस्ट के चौथे दिन मैदान पर लौटेंगे।

पंत ने यहां तीसरे दिन विकेटकीपिंग नहीं की और ध्रुव जुरेल ने उनकी जगह यह जिम्मेदारी निभाई।दूसरे दिन बल्लेबाजी के दौरान कंधे पर चोट लगने के बाद पंत ड्रेसिंग रूम में हाथ में पट्टी बांधकर दिखे।

मोर्कल ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऋषभ के कंधे पर चोट लगी है। इस बारे में कल रात भी चर्चा हुई थी क्योंकि उन्हें काफी चोट लगी है। मुझे लगता है कि आज सुबह वार्मअप करने की कोशिश के दौरान उनकी मूवमेंट सीमित थीं।’’उन्होंने कहा, ‘‘अब हम रातभर उनकी स्थिति पर नजर रखेंगे और उम्मीद है कि कल वह हमारे लिए विकेटों के पीछे मौजूद होंगे। उनका वहां होना महत्वपूर्ण है क्योंकि खेल को समझने की उनकी क्षमता असाधारण है।’’

मोर्कल ने कहा कि अगर कुलदीप यादव दूसरे टेस्ट से पहले वायरल बुखार की चपेट में नहीं आए होते तो चयन के लिए उनके नाम पर विचार किया जाता।उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, चयन मेरे हाथ में नहीं है। मुझे लगता है कि पहले टेस्ट के लिए उन्हें कुछ निश्चित भूमिकाएं निभाने को कहा गया था जो थोड़ा मुश्किल टेस्ट था। लेकिन मेरे हिसाब से वह अंतिम चयन के दावेदारों में जरूर होते।’’

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज मोर्कल ने कहा कि भारत बुधवार को जल्द से जल्द श्रीलंका के बचे हुए दो विकेट हासिल करके बढ़त अपने पक्ष में बनाए रखना चाहेगा। श्रीलंका की ओर से सोनल दिनुशा, केशरा नुवंता और लाहिरू कुमारा ने संघर्षपूर्ण पारियां खेलीं। मोर्कल ने कहा कि क्रिकेट में ऐसे दौर आते रहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आप जितनी जल्दी हो सके मैदान से बाहर आना चाहते हैं, हमेशा यही योजना होती है। लेकिन यह खेल का हिस्सा है। कभी-कभी कूकाबूरा गेंद थोड़ी नरम हो जाती है और पिच से गेंद को अतिरिक्त तेजी दिलाना काफी मुश्किल होता है।’’मोर्कल ने कहा, ‘‘मुझे लगा कि उन्होंने (श्रीलंका ने) काफी अच्छी बल्लेबाजी की और वहां अच्छी साझेदारी बनाई। मुझे नहीं लगता कि उन्हें गेंदबाजी करने में हमें कोई परेशानी हुई, यह सिर्फ खेल की प्रकृति है।’’

Delhi-NCR में H1N1 और डेंगू का बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताया किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

दिल्ली-NCR के अस्पतालों में इन दिनों बुखार, फ्लू और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में इनकी संख्या काफी ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि पिछले कुछ हफ्तों में इन्फ्लूएंजा A या H1N1 के मामलों में तेजी से उछाल आया है।

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि मॉनसून के दौरान ज्यादा नमी और रुक-रुक कर होने वाली बारिश, साथ ही भीड़-भाड़ वाली बंद जगहें और फ्लू का टीका लगवाने वालों की कम संख्या इस बढ़ोतरी की वजह हैं।

हालांकि, ज्यादातर मरीज घर पर आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मौसम और घर के अंदर भीड़-भाड़ की वजह से बढ़ीं बीमारियां

दिल्ली के BLK-Max सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड और वाइस चेयरमैन डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में, पूरे इलाके में तेज बुखार वाली बीमारियों के लिए आउटपेशेंट (OPD) आने वालों और इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने कहा कि मामलों में रेस्पिरेटरी वायरस इन्फेक्शन और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का मिला-जुला असर दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा, “मौसम का बदलना, ज्यादा नमी और बीच-बीच में होने वाली बारिश से कम्युनिटी में पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले कीटाणु) के जिंदा रहने और फैलने की रफ्तार काफी बढ़ जाती है।”

सिंघल ने कहा कि H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी तीन वजहों से हो रही है: पहला, नमी वाला गर्म मौसम, जिससे इन्फेक्शन वाली बूंदें हवा में ज्यादा देर तक बनी रहती हैं। दूसरा, ” लोगों का बंद और एयर कंडीशन वाले कमरों में ज्यादा समय बिताना जहां हवा का बहाव ठीक नहीं होता और वायरस तेजी से फैलता है। और तीसरा, “फ्लू का सालाना वैक्सीनेशन कम होना और साफ-सफाई की आदतों में लापरवाही बरतना, जिससे बहुत से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।”

दिल्ली में H1N1 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अर्जुन खन्ना ने हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस साल दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग छह गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण शुरू में हल्का लग सकता है, लेकिन कमजोर मरीजों में यह निमोनिया, खून में ऑक्सीजन का खतरनाक स्तर तक गिरना और कभी-कभी फेफड़ों के गंभीर रूप से फेल होने जैसी स्थिति में बदल सकता है।

खन्ना ने कहा, “बात साफ है: हर बार बुखार होने पर घबराएं नहीं, लेकिन इन्फ्लूएंजा को हल्के में भी न लें।” उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसे बहुत से मरीज देख रहे हैं जिन्हें तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, खांसी, गले में खराश और बहुत ज्यादा थकान है। हमें चिंता है कि कुछ मरीजों की हालत उतनी तेजी से बिगड़ रही है, जितनी आम वायरल बुखार में उम्मीद नहीं की जाती।”

खन्ना ने बढ़ते मामलों के पीछे मानसून का मौसम, स्कूलों, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में खराब वेंटिलेशन और फ्लू वायरस में लगातार होने वाले बदलाव को जिम्मेदार बताया। उनका मतलब है कि पिछले संक्रमण या वैक्सीन से मिली सुरक्षा हमेशा के लिए नहीं रहती।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में रेस्पिरेटरी मेडिसिन और रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के HOD, डॉ. विकास मौर्य ने भी कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल H1N1 पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की संख्या में “भारी उछाल” आया है। उन्होंने बताया कि फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में से लगभग 70-80% H1N1 पॉजिटिव पाए जा रहे हैं, और इसके बाद इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन और रेस्पिरेटरी वायरस का नंबर आता है।

मौर्य ने कहा, “मानसून के दौरान होने वाला हर बुखार H1N1 की वजह से नहीं होता। हम अन्य वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी देख रहे हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन जैसे H3N2 के साथ-साथ राइनोवायरस, एडेनोवायरस और COVID-19 जैसे इन्फेक्शन शामिल हैं। चिंता की एक और बात वे वायरस हैं जिनकी पहचान अभी उपलब्ध टेस्ट से नहीं हो पाती, लेकिन मरीज के लक्षणों से लगता है कि यह वायरल इन्फेक्शन है।”

लक्षण और खतरे के संकेत

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि H1N1 का असर आम सर्दी-जुकाम की तुलना में अचानक और ज्यादा गंभीर होता है। इसमें तेज बुखार और कंपकंपी, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान, सूखी खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं। बच्चों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

खन्ना ने कहा, “सिर्फ 102 या 103 डिग्री बुखार खतरनाक नहीं है। खतरे के संकेत तब होते हैं जब इसके साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में बेचैनी, असामान्य रूप से बहुत ज्यादा नींद आना, उलझन या ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखें।”

उन्होंने कहा, “ऐसे में इसका इलाज घर पर नहीं किया जाना चाहिए।”

खन्ना ने आगे कहा कि अगर कोई मरीज ठीक होता हुआ दिखे और फिर अचानक उसे दोबारा तेज बुखार आ जाए और खांसी बढ़ जाए, तो इसे निमोनिया या किसी दूसरी गंभीर समस्या का संभावित संकेत मानकर इलाज किया जाना चाहिए।

किन्हें और कब टेस्ट करवाना चाहिए?

डॉ. सिंघल के अनुसार, हल्के मामलों में फ्लू के लिए रूटीन टेस्टिंग की जरूरत नहीं होती, लेकिन ज्यादा जोखिम वाले ग्रुप्स के लिए इसकी पुरजोर सलाह दी जाती है — जैसे 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और डायबिटीज, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, अस्थमा, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी (जैसे कैंसर के इलाज या ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वजह से) वाले लोग।

ऐसे लोगों के लिए भी टेस्टिंग की सलाह दी जाती है जिनकी हालत बिगड़ रही हो, जैसे सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऐसा बुखार जो ठीक न हो रहा हो।

खन्ना ने अस्पताल में भर्ती 29,000 से ज्यादा H1N1 मरीजों पर हुई एक बड़ी स्टडी का भी जिक्र किया, जिसमें पाया गया कि एंटीवायरल दवाएं जल्दी शुरू करने से मौतें कम हुईं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बहुत ज्यादा बीमार और ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में टेस्ट के नतीजे आने से पहले ही एंटीवायरल इलाज शुरू कर सकते हैं।

सिंघल ने कहा कि ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब उन्हें लक्षण शुरू होने के 48 घंटों के अंदर शुरू किया जाए।

मानसून के दौरान डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल ने कहा, “हमारी OPD सेवाओं में हर दिन डेंगू या H1N1 के शक वाले 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इनमें से 2 से 3 मरीजों को गंभीर पेट दर्द, लगातार उल्टी या ब्लड प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे गंभीर लक्षणों के कारण भर्ती करना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा कि बाकी मरीजों का इलाज OPD में ही हो जाता है, जिसमें वे खुद अपनी सेहत पर नजर रखते हैं और ओरल रिहाइड्रेशन (मुंह से तरल पदार्थ लेना) का तरीका अपनाते हैं।

अग्रवाल ने कहा, “हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, मच्छर भगाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें, साफ-सफाई बनाए रखें और लगातार बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।”

डॉक्टरों की सलाह और सावधानियां

डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से बचने के लिए सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है, खासकर ज्यादा जोखिम वाले लोगों और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए। इसके साथ ही, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने, कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने, और बिना बुखार की दवा लिए बुखार उतरने के कम से कम 24 घंटे बाद तक घर पर रहने की भी सलाह दी गई है।

उन्होंने खुद से एंटीबायोटिक्स लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी है, क्योंकि ये फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन पर असर नहीं करतीं और भविष्य में होने वाले इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल बना सकती हैं। जब तक डॉक्टर खास तौर पर एंटीवायरल दवा न लिखें, तब तक पैरासिटामोल जैसी बुखार कम करने वाली दवाएं लेना और खूब तरल पदार्थ (fluids) लेना पहला कदम होना चाहिए।

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होमवर्क नहीं किया तो टीचर की पिटाई से 6 साल के बच्चे की मौत, CCTV आया सामने

विशाखापत्तनम के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल के बच्चे की मौत से हड़कंप मच गया है। परिवार का आरोप है कि होमवर्क पूरा नहीं करने पर टीचर ने उसे पीटा था। बच्चे की पहचान प्रणय तेजा के तौर पर हुई है।

बताया जा रहा है कि ‘वन टाउन’ इलाके में मौजूद ‘लिटिल गार्डन स्कूल’ में क्लास के दौरान उसकी तबीयत खराब हो गई। बाद में उसे किंग जॉर्ज हॉस्पिटल (KGH) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का आरोप है कि टीचर ने उसकी डंटे से पीटाई की थी, जिसके बाद वह गिर पड़ा था।

फिलहाल, पुलिस और रेवेन्यू अधिकारी मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। उम्मीद है कि पोस्टमार्टम से मौत की सही मेडिकल वजह का पता चल जाएगा।

मौत की खबर मिलने के बाद परिवार के सदस्य और रिश्तेदार अस्पताल में जमा हुए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

परिवार के मुताबिक, प्रणय गुरुवार सुबह घर से निकला था और बिल्कुल ठीक-ठाक लग रहा था। उसके पिता ने बताया कि बच्चे ने ही उस दिन स्कूल जाने की जिद की थी।

बच्चे के पिता ने दी जानकारी

पिता ने दुखद घटना से पहले की बातें बताते हुए कहा, “सुबह करीब 8:00 बजे मेरा बेटा उठा और उसने कहा कि वह स्कूल जाना चाहता है। उसने स्कूल जाने की जिद की।”

परिवार ने शुरू में उसे तुरंत नहीं भेजा, लेकिन परीक्षा पास होने की वजह से वे आखिरकार मान गए।

पिता ने कहा, “हमने सोचा, ‘ठीक है, परीक्षाएं जल्द ही होने वाली हैं, तो उसे जाने देते हैं।’ उसने कहा, ‘ठीक है डैड, मैं जा रहा हूं,’ और स्कूल चला गया।”

स्कूल जाते समय बच्चा ठीक था

परिवार ने बताया कि जब बच्चा घर से निकला था, तो उसमें कोई असामान्य बात नहीं दिखी थी। लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें परेशान करने वाली खबर मिली।

पिता ने बताया कि दोपहर के समय उन्हें एक फोन कॉल आया जिसमें बताया गया कि उनके बेटे के साथ कुछ हुआ है, हालांकि यह कॉल सीधे स्कूल से नहीं आया था।

उन्होंने कहा, “स्कूल से किसी ने मुझे फोन नहीं किया। मेरे जीजाजी के घर के पास काम करने वाले स्थानीय रसोइयों ने फोन करके मुझे जानकारी दी।”

जब बच्चे को किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, तो परिवार को बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है।

CCTV से खुला राज

पिता ने बताया कि बाद में परिवार ने स्कूल के अंदर हुई घटना के बारे में जानकारी मांगी और उन्हें CCTV फुटेज दिखाया गया, जिसमें उनके अनुसार टीचर बच्चे को मारती हुई दिख रही थी।

पिता ने आरोप लगाया, “जब हमने स्कूल में CCTV फुटेज देखी, तो पता चला कि टीचर ने उसे डराया था। उन्होंने उसे डंडे से मारा और सदमे व डर के कारण वह वहीं गिर पड़ा।”

उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टर ने परिवार को जानकारी दी थी कि अस्पताल पहुंचने से कुछ समय पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।

उन्होंने कहा, “डॉक्टर ने हमें बताया कि अस्पताल पहुंचने से आधे घंटे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।”

NDTV को मिली CCTV फुटेज में टीचर बच्चे को मारती हुई दिख रही हैं। कुछ ही पल बाद, बच्चा गिर पड़ता है।

पिता ने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि स्कूल जाने से पहले उनका बेटा बीमार था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके बेटे को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी, तो उन्होंने कहा, “कोई समस्या नहीं थी। वह कल रात खुशी-खुशी खेल रहा था और आज सुबह ठीक-ठाक उठा था। उसे कोई वायरल बुखार या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या नहीं थी।”

परिवार का आरोप है कि बच्चे के साथ मारपीट की यह कोई अकेली घटना नहीं थी। उनका दावा है कि स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ भी मारपीट की गई है। परिवार ने कहा कि अगर ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर (RDO) दिलीप चक्रवर्ती भी अस्पताल पहुंचे।

RDO ने कहा, “मुझे इस घटना के बारे में पता चला कि स्कूल से 6 साल के एक बच्चे को मृत अवस्था में KGH लाया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी विभाग घटना के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर रहा है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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मानसून में ये 5 सब्जियां बन सकती हैं परेशानी की वजह, जानें बचने के तरीके

बारिश का मौसम आते ही बाजार में ताजी सब्जियों की भरमार दिखाई देने लगती है, लेकिन इस मौसम में बढ़ी हुई नमी कई सब्जियों की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है। गीले वातावरण के कारण कुछ सब्जियों में बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़ों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार सब्जियां बाहर से बिल्कुल ताजी और अच्छी दिखती हैं, लेकिन उनके अंदर गंदगी या कीड़े छिपे हो सकते हैं। खासकर पत्तेदार और ज्यादा नमी वाली सब्जियों को खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

सही तरीके से सफाई और जांच के बिना इन्हें खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए मानसून के दौरान सब्जियां खरीदते समय उनकी ताजगी, सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्वाद के साथ सेहत भी सुरक्षित रहे।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, धनिया, मेथी, लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियां बारिश में जल्दी खराब हो सकती हैं। इनके पत्तों में मिट्टी, कीड़े और नमी छिप सकती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इन्हें इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है।

2. पत्तागोभी

पत्तागोभी की कई परतों के बीच बारिश के मौसम में छोटे कीड़े, गंदगी और नमी जमा हो सकती है। ज्यादा नमी के कारण इसमें फंगस लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। खरीदने से पहले इसकी ताजगी जरूर जांच लें।

3. फूलगोभी

फूलगोभी के छोटे-छोटे फूलों के अंदर कीड़े आसानी से छिप सकते हैं। मानसून में बढ़ी हुई नमी की वजह से इसमें कीड़ों का खतरा ज्यादा रहता है। इसे पकाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है।

4. मशरूम

मशरूम में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह जल्दी खराब हो सकता है। बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से इसमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। इसे हमेशा भरोसेमंद जगह से खरीदें और तुरंत इस्तेमाल करें।

5. बैंगन

बैंगन में मानसून के दौरान कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार बाहर से ताजा दिखने वाला बैंगन अंदर से खराब या कीड़ों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसे काटकर अच्छी तरह जांचने के बाद ही पकाएं।

मानसून में सब्जियां सुरक्षित रखने के आसान तरीके

  • हमेशा ताजी और साफ सब्जियां ही खरीदें।
  • सब्जियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं।
  • इस्तेमाल से पहले नमक वाले पानी या सिरके के घोल में 15-20 मिनट भिगो सकते हैं।
  • बारिश के मौसम में कच्ची सब्जियां खाने से बचें और अच्छी तरह पकाकर खाएं।
  • लौकी, तोरई, कद्दू और पेठा जैसी मौसमी सब्जियां बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

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