Dengue Vaccine: जापान के ताकेदा फार्मा के साथ डील के बाद भारत में 2027 से बिकेगी डेंगू वैक्सीन, भारत के दवा नियामक ने जुलाई में दी थी मंजूरी

Dengue Vaccine: भारत में काफी समय से डेंगू के टीका की चर्चा हो रही है। लेकिन अब इस टीके के लिए लोगों को और इंतजार नहीं करना होगा। जापान के ताकेदा फार्मास्युटिकल के साथ करार के बाद मच्छरों के काटने से होने वाली इस बीमारी का टीका अगले साल से उपलब्ध होगा। ताकेदा की क्यूडेंगा डेंगू वैक्सीन जुलाई में भारत के दवा नियमक द्वारा मंजूर की गई पहला ऐसा टीका था। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह वैक्सीन भारत में 2027 के पहले छह महीनों में उपलब्ध होने की उम्मीद है।

डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने जापानी दवा बनाने वाली कंपनी ताकेदा फार्मास्युटिकल के साथ एक अहम करार किया है, जिसके तहत वह भारत में अपनी क्यूडेंगा डेंगू वैक्सीन का प्रचार और वितरण करेगी। ताकेदा फार्मास्युटिकल ने जुलाई में कहा, “हम 2030 तक हर साल 10 करोड़ डोज की वैश्विक विनिर्माण क्षमता तक पहुंचने के अपने लक्ष्य के बहुत करीब होंगे।” ताकेदा का कहना है कि पिछले दो दशकों में भारत में डेंगू के मामले 11 गुना बढ़ गए हैं।

क्या है क्यूडेंगा?

ताकेदा फार्मास्युटिकल के अनुसार, क्यूडेंगा को चार से 60 साल की उम्र के लोगों में डेंगू को रोकने के लिए दिया जाएगा। इसे सभी चार डेंगू वायरस सीरोटाइप से बचाने के लिए विकसित किया गया है। इस साल की शुरुआत में एक लेट-स्टेज ट्रायल में इस टीके की दूसरी डोज के एक साल बाद डेंगू से बचाव में 80.2% तक कारगर है। इसने 18 महीने बाद डेंगू से जुड़े हॉस्पिटलाइजेशन संबंधी खतरे के खिलाफ 90.4% असरदार साबित हुई है। क्यूडेंगा टीके की 0.5 मिली इंजेक्शन के तौर पर तीन महीने के अंतर पर दो डोज दर जाती है। यह टीका उन लोगों को भी लगाया जा सकता है, जिन्हें पहले डेंगू नहीं हुआ हो। इसस प्री-वैक्सीनेशन टेस्टिंग की जरूरत खत्म हो जाती है।

भारत में डेंगू का संकट

भारत में डेंगू के मामले आमतौर पर मानसून के दौरान और उसके बाद ज्यादा होते हैं। जमा हुआ पानी एडीज मच्छरों के पनपने की जगह बनाता है। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (NCVBDC) के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2025 में डेंगू के 1,13,450 मामले और 95 मौतें दर्ज की गईं।

मानसून में ये 5 सब्जियां बन सकती हैं परेशानी की वजह, जानें बचने के तरीके

बारिश का मौसम आते ही बाजार में ताजी सब्जियों की भरमार दिखाई देने लगती है, लेकिन इस मौसम में बढ़ी हुई नमी कई सब्जियों की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है। गीले वातावरण के कारण कुछ सब्जियों में बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़ों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार सब्जियां बाहर से बिल्कुल ताजी और अच्छी दिखती हैं, लेकिन उनके अंदर गंदगी या कीड़े छिपे हो सकते हैं। खासकर पत्तेदार और ज्यादा नमी वाली सब्जियों को खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

सही तरीके से सफाई और जांच के बिना इन्हें खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए मानसून के दौरान सब्जियां खरीदते समय उनकी ताजगी, सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्वाद के साथ सेहत भी सुरक्षित रहे।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, धनिया, मेथी, लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियां बारिश में जल्दी खराब हो सकती हैं। इनके पत्तों में मिट्टी, कीड़े और नमी छिप सकती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इन्हें इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है।

2. पत्तागोभी

पत्तागोभी की कई परतों के बीच बारिश के मौसम में छोटे कीड़े, गंदगी और नमी जमा हो सकती है। ज्यादा नमी के कारण इसमें फंगस लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। खरीदने से पहले इसकी ताजगी जरूर जांच लें।

3. फूलगोभी

फूलगोभी के छोटे-छोटे फूलों के अंदर कीड़े आसानी से छिप सकते हैं। मानसून में बढ़ी हुई नमी की वजह से इसमें कीड़ों का खतरा ज्यादा रहता है। इसे पकाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है।

4. मशरूम

मशरूम में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह जल्दी खराब हो सकता है। बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से इसमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। इसे हमेशा भरोसेमंद जगह से खरीदें और तुरंत इस्तेमाल करें।

5. बैंगन

बैंगन में मानसून के दौरान कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार बाहर से ताजा दिखने वाला बैंगन अंदर से खराब या कीड़ों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसे काटकर अच्छी तरह जांचने के बाद ही पकाएं।

मानसून में सब्जियां सुरक्षित रखने के आसान तरीके

  • हमेशा ताजी और साफ सब्जियां ही खरीदें।
  • सब्जियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं।
  • इस्तेमाल से पहले नमक वाले पानी या सिरके के घोल में 15-20 मिनट भिगो सकते हैं।
  • बारिश के मौसम में कच्ची सब्जियां खाने से बचें और अच्छी तरह पकाकर खाएं।
  • लौकी, तोरई, कद्दू और पेठा जैसी मौसमी सब्जियां बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

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