शारदीय नवरात्रि व्रत 2026: रोज-रोज साबूदाने की खिचड़ी खाने के 6 नुकसान

शारदीय नवरात्रि व्रत 2026: रोज-रोज साबूदाने की खिचड़ी खाने के 6 नुकसान

sabudana ki khichdi khane ke nuksan

शारदीय नवरात्रि के व्रत में साबूदाने की खिचड़ी सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा फलाहार मानी जाती है। स्वाद और पेट भरने के लिहाज से यह बेहद बढ़िया विकल्प है, लेकिन नवरात्रि के दौरान इसका रोजाना और अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

 

1. वजन बढ़ना और मोटापा

हाई कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी: साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जबकि इसमें प्रोटीन और फाइबर बेहद कम होता है।

अतिरिक्त वसा का जमाव: खिचड़ी बनाते समय इसमें मूंगफली, घी या तेल और आलू का इस्तेमाल होने से शरीर में फैट तेजी से जमा होता है, जिससे मोटापा बढ़ता है।

अन्य बीमारियों का खतरा: अत्यधिक वजन बढ़ने और मोटापे के कारण हृदय संबंधी समस्याएं, रक्तचाप, पथरी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

 

2. ब्लड शुगर लेवल में तेजी से बढ़ोतरी

उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स: साबूदाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी अधिक होता है, जिससे इसे खाते ही शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए हानिकारक: अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन ब्लड शुगर स्पाइक कर सकता है। मधुमेह से पीड़ित या प्री-डायबिटिक लोगों को इसे अपने दैनिक डाइट रूटीन में शामिल न करने या डॉक्टर की सलाह के बाद ही बेहद सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है।

 

3. पाचन संबंधी समस्याएं और कब्ज

फाइबर की कमी: साबूदाने में फाइबर न के बराबर होता है और यह स्वभाव से काफी स्टार्चयुक्त तथा चिपचिपा होता है।

पेट की परेशानियां: लगातार साबूदाना खाने से पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है, जिससे पेट में गैस, भारीपन, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

 

4. हृदय, मस्तिष्क और श्वसन तंत्र पर प्रभाव

अंगों पर असर: साबूदाने का अत्यधिक सेवन मस्तिष्क और हृदय के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

सांस लेने में दिक्कत: अधिक मात्रा में इसके सेवन से सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है।

 

5. गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) में हानिकारक

पथरी की समस्या बढ़ना: यदि किसी को किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) की समस्या है, तो साबूदाने की खिचड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह इस समस्या को और अधिक बढ़ा सकता है।

 

6. अन्य शारीरिक समस्याएं

अन्य लक्षण: बहुत अधिक मात्रा में साबूदाने की खिचड़ी खाने से उल्टी, सिर दर्द, सीने में दर्द, रक्त विकार और थायराइड जैसी कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer): चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

हरियाणवी युवक की स्पेन में मौत:इकलौता बेटा 11 साल पहले गया था विदेश, परिवार जल्द शादी की तैयारी में था; पिता जर्मनी में

हरियाणा में करनाल के रहने वाले एक युवक की स्पेन में अचानक मौत हो गई। सीने में दर्द होने के बाद उसके साथी उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार को फोन पर उसकी मौत की सूचना मिली। महमल थ्रोटा गांव निवासी रविंद्र (28) इकलौता बेटा था। वह 11 साल पहले स्पेन गया था। वहां उसकी परमानेंट रेजिडेंसी (PR) होने वाली थी। परिवार उसकी शादी के बारे में भी सोच रहा था। रविंद्र के पिता गुरमुख सिंह भी जर्मनी में रहते हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह जर्मनी से स्पेन के लिए रवाना हो गए हैं। 2015 में 12 लाख रुपए खर्च कर विदेश भेजा था गुरमीत सिंह ने बताया कि परिवार ने वर्ष 2015 में करीब 12 लाख रुपए खर्च करके रविंद्र को विदेश भेजा था। वहां कागजी दिक्कतों के कारण उसे पहले पुर्तगाल जाना पड़ा। कुछ दिनों बाद वह स्पेन चला गया। रविंद्र स्पेन में एक रेस्टोरेंट में काम करता था और अपना खर्च चलाता था। उसे वहां किसी तरह की परेशानी नहीं थी। स्पेन में उसके कागज की प्रक्रिया चल रही थी और परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही वह वहां स्थायी हो जाएगा। दोस्तों ने अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया रविंद्र के चाचा गुरमीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को रविंद्र को अचानक सीने में दर्द हुआ था। इसके बाद उसके साथी उसे अस्पताल लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने रविंद्र को मृत घोषित कर दिया। शाम करीब 6 बजे रविंद्र के मामा के बेटे का फोन आया। वह भी स्पेन में रविंद्र के पास ही रहता है। उसने परिवार को बताया कि रविंद्र की मौत हार्ट अटैक से हुई। रविंद्र के पिता जर्मनी से स्पेन रवाना चाचा के मुताबिक, रविंद्र के पिता गुरमुख सिंह पिछले कई सालों से जर्मनी में रह रहे हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह जर्मनी से स्पेन के लिए रवाना हो गए। रविंद्र के शव को भारत लाने के लिए कागजी कार्रवाई की जा रही है। गांव में रविंद्र की मां और छोटी बहन रहती हैं। जल्द ही रविंद्र की शादी के लिए लड़की देखने की तैयारी थी। बेटे के भविष्य और शादी को लेकर परिवार ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं, उसकी अचानक मौत से वे भी टूट गईं। परिवार ने सरकार से शव भारत लाने में मदद मांगी रविंद्र के चाचा गुरमीत सिंह ने सरकार से शव जल्द भारत लाने में मदद करने की अपील की है, ताकि परिवार उसे अंतिम विदाई दे सके। अचानक हुई मौत से परिवार सदमे में है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें :- करनाल के युवक की जर्मनी में संदिग्ध मौत:11 साल पहले रोजगार के लिए गया था; परिजनों को शव भारत आने का इंतजार करनाल के रहने वाले 32 वर्षीय रिंकू की जर्मनी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। करीब 11 साल पहले बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर विदेश गया रिंकू अब कभी घर नहीं लौटेगा। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजन शव के भारत पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

विश्व हृदय दिवस 2026: दिल के संकेतों को अनदेखा न करें- डॉ. वत्सल कयाल

विश्व हृदय दिवस 2026: दिल के संकेतों को अनदेखा न करें- डॉ. वत्सल कयाल

Heart Attack

इंदौर। विश्व हृदय दिवस 2026 के अवसर पर यूनिक हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वत्सल कयाल ने लोगों से दिल की बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचानने और उन पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है।

 

डॉ. कयाल ने कहा, “दिल का दौरा कभी समय देखकर नहीं आता। मैंने अपने अनुभव में कई लोगों को इलाज में देरी करते देखा है। किसी को लगा कि तकलीफ अपने आप ठीक हो जाएगी, किसी ने उसे एसिडिटी समझा, तो किसी को लगा कि इस उम्र में दिल की बीमारी नहीं हो सकती। मेरा संदेश स्पष्ट है- दिल की तकलीफ को समय रहते पहचानें और उस पर तुरंत ध्यान दें।”

 

इस वर्ष विश्व हृदय दिवस का मुख्य संदेश “Don’t Miss a Beat” है। यह संदेश दिल की बीमारी के उन लक्षणों की ओर ध्यान दिलाता है जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। दिल के दौरे के दौरान सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो सकता है। इसके साथ ही सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, जी मिचलाना अथवा बांह, पीठ और जबड़े में दर्द या खिंचाव भी हो सकता है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। यदि ऐसी कोई तकलीफ नई हो, लगातार बनी रहे या चिंता बढ़ा रही हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें; घर पर बैठकर इसके खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतज़ार न करें।

 

डॉ. कयाल ने आगे बताया कि दिल की देखभाल किसी आपात स्थिति के आने से बहुत पहले ही शुरू हो जाती है। उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह (शुगर) और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ाते रहते हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, अपनी जांच रिपोर्ट को समझें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें—भले ही आप पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हों।

 

हमारी दिनचर्या और आदतें भी दिल की सेहत पर गहरा असर डालती हैं। तंबाकू के किसी भी रूप से दूर रहें और दैनिक शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालें। अपने भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें तथा नमक और पैकेटबंद (प्रोसेस्ड) भोजन का सेवन कम करें। सभी बदलाव एक साथ करना आवश्यक नहीं है; रोज़ टहलना, खान-पान में एक अच्छा सुधार करना और समय पर स्वास्थ्य जांच कराना जैसी छोटी-छोटी शुरुआत भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।

 

विश्व हृदय दिवस के इस अवसर पर डॉ. कयाल ने परिजनों की सेहत का भी ध्यान रखने की सलाह दी। अपने प्रियजनों को ब्लड प्रेशर जांचने के लिए प्रेरित करें, तंबाकू छोड़ने में उनकी मदद करें और दिल के दौरे के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सीय कदम उठाएं।

 

अंत में डॉ. कयाल ने कहा, “दिल की सेहत रोज़मर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों से बनती है, और किसी ख़तरे का संकेत मिलने पर समय पर लिया गया सही फैसला किसी की जान बचा सकता है।”

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

World Heart Day 2026

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम है-  “दिल की धड़कन को न चूकें,”। 2022 में हृदय रोग से 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी। वर्तमाान में कोरोना काल के बाद अचानक से हृदय गति रुक जाने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में  जानिए कि किस तरह लाइफ स्टाइल बदलकर प्राकृतिक तरीके से हार्ट अटैक  से खुद को बचा सकते हैं।

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हदय रोग के कारण:

  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • मधुमेह
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
  • मोटापा या शरीर का अतिरिक्त वजन
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • अत्यधिक कफ बना रहना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • दीर्घकालिक तनाव
  • हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
  • बड़ी हुई उम्र
  • नींद की खराब गुणवत्ता या अनुपचारित स्लीप एपनिया
  • नमक, चीनी और संतृप्त या ट्रांस वसा से भरपूर अस्वास्थ्यकर आहार
  • दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी और कुछ सूजन संबंधी स्थितियाँ

 

हृदय रोग के लक्षण

  • सीने में दर्द , दबाव, जकड़न या बेचैनी
  • सांस फूलना, खासकर गतिविधि के दौरान या आराम करते समय
  • सांस फूलने या सीने में तकलीफ के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होना।
  • अस्पष्ट थकान या कमजोरी
  • दर्द जो हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है
  • दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित होना ( धड़कन का अनियमित होना)
  • चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बेहोशी
  • पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
  • ठंडे पसीने आना, मतली या उल्टी होना, खासकर सीने में तकलीफ के साथ

 

हृदय रोग का प्राकृतिक इलाज:

  1. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नमक, चीनी और तेल का त्याग करना।
  2. हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  3. उपवास नहीं कर सकते हैं तो भोजन के बीच कम से कम 10 घंटे काअंतराल रखें।
  4. नियमित योगासन करें या अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  5. डॉक्टर की सलाह पर रोज एक अखरोट खाएं।
  6. शुद्ध सात्विक और प्राकृतिक भोजन ही करें। सलाद का सेवन करें। 

 

कौन सी सब्जियां कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल?

कुछ खास सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ सब्जियों के बारे में:

 

लहसुन: लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

प्याज: प्याज में भी एलिसिन पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

बैंगन: बैंगन में नियासिन नामक विटामिन होता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है।

पालक: पालक में विटामिन K और फोलेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
 

कोलेस्ट्रॉल कम करने के अन्य उपाय

स्वस्थ आहार: फाइबर से भरपूर आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और साबुत अनाज।

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें।

मोटापे को कम करें: अगर आप मोटे हैं तो अपना वजन कम करें।

धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।

तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आराम करने की तकनीक का अभ्यास करें।

 

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में उपरोक्त बताई गई सब्जियों को शामिल करके आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं और दिल की बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।

 

ध्यान रखें

  • आप अपने डॉक्टर से पूछकर अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
  • नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।

 

‘द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व ‘एंथोसायनिन’ का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

देहरादून में स्वाइन फ्लू और कोरोना का बढ़ता कहर, H1N1 के 105 मामले, 5 मरीजों की मौत

देहरादून में स्वाइन फ्लू और कोरोना का बढ़ता कहर, H1N1 के 105 मामले, 5 मरीजों की मौत

swine flue

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्वाइन फ्लू (Influenza H1N1) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में सोमवार को 24 नए स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए। इसके साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 105 हो गई है। अब तक इस संक्रमण से 5 मरीजों की मौत हो चुकी है।

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खबरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के साथ-साथ कोरोनावायरस (Covid-19) के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। रविवार को एम्स ऋषिकेश में 1 और श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 2 नए कोविड मामले दर्ज किए गए। देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में सामने आए कुल 105 मामलों में 71 मरीज देहरादून जिले के, जबकि 34 मरीज दूसरे राज्यों और जिलों से हैं।

 

देहरादून में 36 एक्टिव केस

 

सीएमओ के मुताबिक, सोमवार को सामने आए 24 नए मामलों में 16 देहरादून और 8 अन्य राज्यों व जिलों से हैं। फिलहाल जिले में 36 एक्टिव केस हैं।

 

इनमें से 22 मरीज श्री महंत इंदिरेश अस्पताल, 7 मरीज एम्स ऋषिकेश, 4 मरीज हिमालयन अस्पताल, 1 मरीज कैलाश अस्पताल, 1 मरीज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (GDMC) अस्पताल और 1 मरीज ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती है।

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3-4 दिन से बुखार तो तुरंत कराएं जांच

 

डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को तीन से चार दिनों तक लगातार बुखार रहता है और इसके साथ सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होती है, तो उसे तुरंत स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए।

 

उन्होंने लोगों से संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

 

कोरोना के मामलों पर भी नजर

 

देहरादून में स्वाइन फ्लू के साथ कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है।

Delhi-NCR में H1N1 और डेंगू का बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताया किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

दिल्ली-NCR के अस्पतालों में इन दिनों बुखार, फ्लू और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में इनकी संख्या काफी ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि पिछले कुछ हफ्तों में इन्फ्लूएंजा A या H1N1 के मामलों में तेजी से उछाल आया है।

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि मॉनसून के दौरान ज्यादा नमी और रुक-रुक कर होने वाली बारिश, साथ ही भीड़-भाड़ वाली बंद जगहें और फ्लू का टीका लगवाने वालों की कम संख्या इस बढ़ोतरी की वजह हैं।

हालांकि, ज्यादातर मरीज घर पर आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मौसम और घर के अंदर भीड़-भाड़ की वजह से बढ़ीं बीमारियां

दिल्ली के BLK-Max सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड और वाइस चेयरमैन डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में, पूरे इलाके में तेज बुखार वाली बीमारियों के लिए आउटपेशेंट (OPD) आने वालों और इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने कहा कि मामलों में रेस्पिरेटरी वायरस इन्फेक्शन और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का मिला-जुला असर दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा, “मौसम का बदलना, ज्यादा नमी और बीच-बीच में होने वाली बारिश से कम्युनिटी में पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले कीटाणु) के जिंदा रहने और फैलने की रफ्तार काफी बढ़ जाती है।”

सिंघल ने कहा कि H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी तीन वजहों से हो रही है: पहला, नमी वाला गर्म मौसम, जिससे इन्फेक्शन वाली बूंदें हवा में ज्यादा देर तक बनी रहती हैं। दूसरा, ” लोगों का बंद और एयर कंडीशन वाले कमरों में ज्यादा समय बिताना जहां हवा का बहाव ठीक नहीं होता और वायरस तेजी से फैलता है। और तीसरा, “फ्लू का सालाना वैक्सीनेशन कम होना और साफ-सफाई की आदतों में लापरवाही बरतना, जिससे बहुत से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।”

दिल्ली में H1N1 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अर्जुन खन्ना ने हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस साल दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग छह गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण शुरू में हल्का लग सकता है, लेकिन कमजोर मरीजों में यह निमोनिया, खून में ऑक्सीजन का खतरनाक स्तर तक गिरना और कभी-कभी फेफड़ों के गंभीर रूप से फेल होने जैसी स्थिति में बदल सकता है।

खन्ना ने कहा, “बात साफ है: हर बार बुखार होने पर घबराएं नहीं, लेकिन इन्फ्लूएंजा को हल्के में भी न लें।” उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसे बहुत से मरीज देख रहे हैं जिन्हें तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, खांसी, गले में खराश और बहुत ज्यादा थकान है। हमें चिंता है कि कुछ मरीजों की हालत उतनी तेजी से बिगड़ रही है, जितनी आम वायरल बुखार में उम्मीद नहीं की जाती।”

खन्ना ने बढ़ते मामलों के पीछे मानसून का मौसम, स्कूलों, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में खराब वेंटिलेशन और फ्लू वायरस में लगातार होने वाले बदलाव को जिम्मेदार बताया। उनका मतलब है कि पिछले संक्रमण या वैक्सीन से मिली सुरक्षा हमेशा के लिए नहीं रहती।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में रेस्पिरेटरी मेडिसिन और रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के HOD, डॉ. विकास मौर्य ने भी कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल H1N1 पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की संख्या में “भारी उछाल” आया है। उन्होंने बताया कि फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में से लगभग 70-80% H1N1 पॉजिटिव पाए जा रहे हैं, और इसके बाद इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन और रेस्पिरेटरी वायरस का नंबर आता है।

मौर्य ने कहा, “मानसून के दौरान होने वाला हर बुखार H1N1 की वजह से नहीं होता। हम अन्य वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी देख रहे हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन जैसे H3N2 के साथ-साथ राइनोवायरस, एडेनोवायरस और COVID-19 जैसे इन्फेक्शन शामिल हैं। चिंता की एक और बात वे वायरस हैं जिनकी पहचान अभी उपलब्ध टेस्ट से नहीं हो पाती, लेकिन मरीज के लक्षणों से लगता है कि यह वायरल इन्फेक्शन है।”

लक्षण और खतरे के संकेत

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि H1N1 का असर आम सर्दी-जुकाम की तुलना में अचानक और ज्यादा गंभीर होता है। इसमें तेज बुखार और कंपकंपी, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान, सूखी खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं। बच्चों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

खन्ना ने कहा, “सिर्फ 102 या 103 डिग्री बुखार खतरनाक नहीं है। खतरे के संकेत तब होते हैं जब इसके साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में बेचैनी, असामान्य रूप से बहुत ज्यादा नींद आना, उलझन या ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखें।”

उन्होंने कहा, “ऐसे में इसका इलाज घर पर नहीं किया जाना चाहिए।”

खन्ना ने आगे कहा कि अगर कोई मरीज ठीक होता हुआ दिखे और फिर अचानक उसे दोबारा तेज बुखार आ जाए और खांसी बढ़ जाए, तो इसे निमोनिया या किसी दूसरी गंभीर समस्या का संभावित संकेत मानकर इलाज किया जाना चाहिए।

किन्हें और कब टेस्ट करवाना चाहिए?

डॉ. सिंघल के अनुसार, हल्के मामलों में फ्लू के लिए रूटीन टेस्टिंग की जरूरत नहीं होती, लेकिन ज्यादा जोखिम वाले ग्रुप्स के लिए इसकी पुरजोर सलाह दी जाती है — जैसे 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और डायबिटीज, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, अस्थमा, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी (जैसे कैंसर के इलाज या ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वजह से) वाले लोग।

ऐसे लोगों के लिए भी टेस्टिंग की सलाह दी जाती है जिनकी हालत बिगड़ रही हो, जैसे सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऐसा बुखार जो ठीक न हो रहा हो।

खन्ना ने अस्पताल में भर्ती 29,000 से ज्यादा H1N1 मरीजों पर हुई एक बड़ी स्टडी का भी जिक्र किया, जिसमें पाया गया कि एंटीवायरल दवाएं जल्दी शुरू करने से मौतें कम हुईं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बहुत ज्यादा बीमार और ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में टेस्ट के नतीजे आने से पहले ही एंटीवायरल इलाज शुरू कर सकते हैं।

सिंघल ने कहा कि ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब उन्हें लक्षण शुरू होने के 48 घंटों के अंदर शुरू किया जाए।

मानसून के दौरान डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल ने कहा, “हमारी OPD सेवाओं में हर दिन डेंगू या H1N1 के शक वाले 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इनमें से 2 से 3 मरीजों को गंभीर पेट दर्द, लगातार उल्टी या ब्लड प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे गंभीर लक्षणों के कारण भर्ती करना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा कि बाकी मरीजों का इलाज OPD में ही हो जाता है, जिसमें वे खुद अपनी सेहत पर नजर रखते हैं और ओरल रिहाइड्रेशन (मुंह से तरल पदार्थ लेना) का तरीका अपनाते हैं।

अग्रवाल ने कहा, “हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, मच्छर भगाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें, साफ-सफाई बनाए रखें और लगातार बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।”

डॉक्टरों की सलाह और सावधानियां

डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से बचने के लिए सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है, खासकर ज्यादा जोखिम वाले लोगों और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए। इसके साथ ही, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने, कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने, और बिना बुखार की दवा लिए बुखार उतरने के कम से कम 24 घंटे बाद तक घर पर रहने की भी सलाह दी गई है।

उन्होंने खुद से एंटीबायोटिक्स लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी है, क्योंकि ये फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन पर असर नहीं करतीं और भविष्य में होने वाले इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल बना सकती हैं। जब तक डॉक्टर खास तौर पर एंटीवायरल दवा न लिखें, तब तक पैरासिटामोल जैसी बुखार कम करने वाली दवाएं लेना और खूब तरल पदार्थ (fluids) लेना पहला कदम होना चाहिए।

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नॉर्मल ECG के बाद भी हो सकती है दिल की बीमारी! इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज

सिर्फ नॉर्मल ECG रिपोर्ट देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि आपका दिल पूरी तरह हेल्दी है। ECG दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी और धड़कन से जुड़ी कई जरूरी जानकारी देता है, लेकिन इससे दिल की हर बीमारी का पता नहीं चलता। डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट डिजीज के कई संकेत शुरुआत में काफी हल्के होते हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे में नॉर्मल ECG होने के बावजूद डॉक्टर से सलाह लेकर टेस्ट करवाना जरूरी है।

 

 कौन से टेस्ट करवाएं?

ECG दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है और डॉक्टरों को दिल की धड़कन और उसके काम करने के तरीके के बारे में जानकारी देता है। लेकिन सामान्य ECG का मतलब यह नहीं है कि दिल में कोई बीमारी या समस्या नहीं है। कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज है या नहीं, इसका पता केवल ECG से नहीं लगाया जा सकता। इसलिए लक्षण होने पर दूसरे जरूरी टेस्ट भी डॉक्टर की सलाह से करानी चाहिए।

 

दिल की बीमारी के लक्षण

दिल की बीमारी हमेशा तेज सीने के दर्द के साथ ही सामने आए, यह जरूरी नहीं है। कई बार शरीर पहले से छोटे-छोटे संकेत देने लगता है। सीढ़ियां चढ़ने पर पहले से ज्यादा सांस फूलना, बिना ज्यादा काम के थकान महसूस होना या आराम करते समय अचानक दिल की धड़कन बढ़ना ऐसे संकेत हो सकते हैं। इन्हें सिर्फ कमजोरी, तनाव या कम फिटनेस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

ECG की नॉर्मल रिपोर्ट

कई लोग नॉर्मल ECG रिपोर्ट आने के बाद यह मान लेते हैं कि उनका दिल पूरी तरह स्वस्थ है। इसी वजह से वे शरीर में दिखने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान नहीं देते। डॉक्टर के मुताबिक, अगर कोई परेशानी बार-बार हो रही है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रही, तो टेस्ट करवाना जरूरी है। नॉर्मल रिपोर्ट के बावजूद लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

जरुरी चेकअप

डॉ. चंदोला के अनुसार, दिल की बीमारी के शक में ECG और लिपिड प्रोफाइल शुरुआती जांच हो सकती हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए सिर्फ ये टेस्ट काफी नहीं होते। डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और हार्ट डिजीज के रिस्क को देखकर दूसरी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इनमें कोरोनरी कैल्शियम स्कोर, कोरोनरी आर्टरी की जांच, नींद की क्वालिटी और परिवार में पहले की दिल की बीमारी को भी देखा जा सकता है।

 

समय पर ध्यान दें

दिल से जुड़े लक्षणों को गंभीर होने का इंतजार करके नहीं छोड़ना चाहिए। अगर बार-बार सांस फूल रही है, लगातार थकान रहती है, धड़कन अचानक तेज होती है या शरीर के किसी हिस्से में असामान्य बेचैनी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय पर परेशानी की पहचान होने से सही इलाज शुरू किया जा सकता है और गंभीर स्थिति का रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है।