Keralam organ transplant hospital: 30 महीने के अंदर केरलम में बनेगा ऑर्गन ट्रांसप्लांट हॉस्पिटल, 271 करोड़ रुपये आएगी लागत

Keralam organ transplant hospital: देश को बहुत जल्द ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट हॉस्पिटल मिलेगा। यह स्टेट-ऑफ-द-आर्ट संस्थान 30 महीने के अंदर कोझिकोड में बनाया जाएगा। केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन शनिवार को केरल हार्ट केयर सोसाइटी के सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य बीमारी की रोकथाम और डायग्नोसिस के लिए बड़े कैंपेन भी चलाएगा।

ऑर्गन ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी सेवाएं होंगी एक ही छत के नीचे

उन्होंने कहा कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट सर्जरी से जुड़ी सभी सर्विस एक ही छत के नीचे मिलने से इलाज का खर्च मौजूदा खर्च का एक-तिहाई रह जाएगा। सतीशन ने कहा कि चेवयूर गोल्फ लिंक रोड पर 20 एकड़ जमीन पर 271 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह इंस्टीट्यूट स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सुविधाएं देगा।

350 बेड के हॉस्पिटल में होंगे 10 ऑपरेशन थिएटर

उन्होंने कहा कि नए हॉस्पिटल कॉम्प्लेक्स में 350 बेड और 10 ऑपरेशन थिएटर होंगे। उन्होंने कहा कि चेवयूर में उसी कैंपस में 35 करोड़ रुपये की लागत से एक पूरी तरह से इक्विप्ड स्किन डिज़ीज़ हॉस्पिटल भी बनाया जाएगा। सतीशन ने कहा कि इस इंस्टीट्यूट को एक बड़े रिसर्च सेंटर के तौर पर प्लान किया गया है, जिसका मकसद हर साल 1,100 कॉर्नियल, 520 किडनी, 50 हार्ट, 40 लंग और 120 बोन मैरो ट्रांसप्लांट सर्जरी करना है।

एक हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के तौर पर डेवलप होगा केरल

उन्होंने कहा कि केरल को एक हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के तौर पर डेवलप किया जाएगा, जो अपने मौसम और दूसरी अच्छी कंडीशन का फायदा उठाकर घरेलू और विदेशी दोनों तरह के मरीजों को अट्रैक्ट करेगा। इस इनिशिएटिव के तहत वेलनेस और रिहैबिलिटेशन सेंटर और स्ट्रोक समेत बीमारियों का होलिस्टिक इलाज देने वाली फैसिलिटी बनाई जाएंगी।

6 दिन के मेगा हेल्थ कैंप से गाजीपुर पहुंचीं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं, डॉक्टरों की 35000 मरीजों की जांच और 346 सर्जरियां की गईं

Jr NTR: जाह्नवी कपूर के एआई मॉर्फ्ड वीडियो को देख भड़के जूनियर एनटीआर, लीगल एक्शन लेने की चेतावनी दी

Jr NTR: एक बार फिर से जान्हवी कपूर को ‘देवरा’ फिल्म के उनके गाने ‘चुट्टामल्ले’ के एक परेशान करने वाले AI-जनरेटेड वीडियो के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें वह जूनियर NTR के साथ नजर आई थीं। वायरल हो रहा यह AI वीडियो एक्ट्रेस के लुक का मॉर्फ्ड वर्जन है, जिसे डिजिटल रूप से बदलकर ऐसे अश्लील सीन बनाए गए हैं जो ओरिजिनल गाने का हिस्सा कभी नहीं थे।

जूनियर NTR ने X पर ऐसे भद्दे वीडियो बनाए जाने की कड़ी आलोचना की और साफ कहा कि वह इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने लिखा, “यह दिमागी रूप से बीमार लोगों का घिनौना और बेशर्मी वाला काम है। जिस देश में महिलाओं को मां और देवी के रूप में पूजा जाता है, जहां ‘मातृदेवो भव’ सिर्फ एक कहावत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है, वहां कुछ लोग इतने नीचे गिर गए हैं कि वे AI का इस्तेमाल करके किसी महिला का बेहद अपमानजनक तरीके से अनादर कर रहे हैं। AI का इस्तेमाल करके ऐसी घिनौनी चीज बनाना शब्दों से परे शर्मनाक है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस मॉर्फ्ड ‘चुट्टामल्ले’ वीडियो के पीछे जो घटिया लोग हैं, मैं उनमें से किसी को नहीं बख्शूंगा। इसे बनाने वालों और इसे फैलाने वालों के खिलाफ मैं हर संभव कानूनी कार्रवाई करूंगा। कृपया ऐसे कंटेंट को न देखें, न शेयर करें और न ही उस पर कोई प्रतिक्रिया दें। आज यह किसी और के साथ हुआ है। कल यह आपकी मां, बहन, पत्नी या बेटी के साथ भी हो सकता है।”

एक्टर ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है और मैं सभी राज्य सरकारों और भारत सरकार से अपील करता हूं कि वे AI के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कदम उठाएं और कड़े नियम बनाएं।”

देवरा के बारे में

‘चुट्टामल्ले’ एक रोमांटिक गाना है, जो मुख्य किरदारों के बीच की केमिस्ट्री को दिखाता है। यह गाना जंगल और समुद्र बीच के शानदार बैकग्राउंड पर फिल्माया गया है और इसे जान्हवी कपूर द्वारा निभाए गए फीमेल लीड किरदार के नजरिए से दिखाया गया है। इसे अनिरुद्ध रविचंदर ने कंपोज़ किया है और रामाजोगाया शास्त्री ने लिखा है। शिल्पा राव ने अपनी आवाज दी है और बोस्को मार्टिस ने कोरियोग्राफी की है। ‘चुट्टामल्ले’ तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज किया गया था।

इस फिल्म में जूनियर एनटीआर के साथ जान्हवी कपूर, सैफ अली खान, प्रकाश राज, श्रीकांत मेका, टॉम शाइन चाको और नारायण जैसे कई बड़े कलाकार शामिल थे। यह फिल्म 27 सितंबर, 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में जूनियर एनटीआर ने दोहरी भूमिका निभाई है – देवरा और वरधा दोनों की। जसुधा आर्ट्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को साराजू हरि कृष्णा और सुधाकर मिक्किलीनेनी ने प्रोड्यूस किया था और नंदमुरी कल्याण राम ने इसे पेश किया था। यह फिल्म तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी सहित कई भाषाओं में रिलीज हुई थी।

18 हजार फीट पर हिना खान! क्या आपके पास हैं वो 7 चीजें जो इतनी ऊंचाई पर काम आती हैं?

लद्दाख (Ladakh) की ऊंची पहाड़ियों पर घूमने का अपना अलग मजा है। यहां मौसम पल-पल बदल सकता है। ठंड, तेज हवा और धूप का असर भी ज्यादा रहता है। ऐसे में सिर्फ गर्म कपड़े लेकर निकलना काफी नहीं है। ट्रिप में कुछ दूसरी जरूरी चीजें भी साथ रखना जरूरी होता है।

एक्ट्रेस हिना खान ने हाल ही में लद्दाख ट्रिप की फोटोज और वीडियो शेयर किए। इस दौरान वह खारदुंग ला (Khardung La) भी पहुंचीं। यह जगह समुद्र तल से करीब 17,582 फीट की ऊंचाई पर है। लेह से करीब 40 किलोमीटर दूर यह दर्रा बाइकर्स और रोड ट्रिप करने वालों के बीच काफी पॉपुलर है।

इन जरूरी चीजों के साथ हिना खान ने की अपनी ट्रिप पूरी

1. फोन के साथ GPS का ऑप्शन रखें

पहाड़ों में हर जगह फोन का नेटवर्क नहीं मिलता। ऐसे में GPS वाली घड़ी रास्ता ढूंढने में मदद कर सकती है। इससे अपनी जगह का भी पता चलता रहता है।

2. पावर बैंक भी साथ रखें

लद्दाख जैसे इलाकों में हर जगह फोन चार्ज करने की फैसिलिटी नहीं मिलती। फोन का इस्तेमाल मैप, फोटो और जरूरी कॉल के लिए होता है। इसलिए पावर बैंक बैग में जरूर रखें।

3. अच्छी जैकेट रखें

पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदल सकता है। तेज हवा और बारिश से बचने के लिए वॉटरप्रूफ जैकेट काम आती है। इससे ठंड में शरीर को गर्म रखने में भी मदद मिलती है।

4. मजबूत जूते पहनें

लद्दाख में कई जगह रास्ते पथरीले और ऊबड़-खाबड़ होते हैं। ऐसे रास्तों पर ऑर्डिनरी जूते परेशानी दे सकते हैं। अच्छी फिटिंग और पैरों को सपोर्ट देने वाले जूते पहनना सही रहेगा।

5. धूप से आंखों को बचाएं

ऊंचाई पर धूप और उसकी चकाचौंध तेज हो सकती है। इसलिए UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस जरूर रखें। ये आंखों को तेज रोशनी से बचाने में मदद करते हैं।

6. छोटा बैग रखें

दिनभर घूमने के लिए 25 लीटर के आसपास का बैग काम आ सकता है। इसमें पानी, स्नैक्स, जैकेट, सनग्लासेस और दूसरी जरूरी चीजें रखी जा सकती हैं। इससे जरूरत का सामान साथ रखना आसान रहेगा।

7. पानी की बोतल जरूर रखें

ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। इसलिए एक अच्छी इंसुलेटेड बोतल साथ रखें। इससे जर्नी में पानी आसानी से अपने पास रखा जा सकता है।

ऊंचाई पर जाने से पहले ये बातें रखें ध्यान

खारदुंग ला से लेह, नुब्रा और श्योक घाटियों तक जाया जा सकता है। यह जगह करीब 18,000 फीट की ऊंचाई पर है। इतनी ऊंचाई पर जाने से पहले तैयारी जरूर कर लें।

हर किसी पर ऊंचाई का असर अलग हो सकता है। इसलिए वहां के मौसम और ऊंचाई के हिसाब से शरीर को ढलने का समय दें। कोई बीमारी है तो ट्रिप से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Insurance Claim: एलआईसी ने क्लेम किया रिजेक्ट, फोरम ने लगाई फटकार, अब चुकाने होंगे ₹10 लाख

Insurance Claim:  बढ़ती बीमारी के डर और मेडिकल खर्चों के बोझ से बचने के लिए अब लाइफ इंश्योरेंस करवाना लोगों की पसंद बन रही है। परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए लाइफ इंश्योरेंस काफी करवाते हैं, लेकिन ऐसे में अगर किसी व्यक्ति ने लाइफ इंश्योरेंस करवाया हो और पॉलिसीधारक की मौत हो जाए। फिर इंश्योरेंस कंपनी क्लेम खारिज कर दें तो ऐसी स्थिति में परिवार क्या करेगा? कुछ ऐसा ही मामला गाजियाबाद से सामने आया है। जहां पर जिला उपभोक्ता आयोग ने लाइफ इंश्योरेंस LIC ऑफ इंडिया को पॉलिसीहोल्डर के नॉमिनी को 30 दिनों के भीतर 10 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से मिली खबर के मुताबिक गाजियाबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने LIC ऑफ इंडिया को आदेश दिया है कि वह पॉलिसीहोल्डर के नॉमिनी को 30 दिनों के भीतर 10 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिया है। इस रकम में डेथ क्लेम के तौर पर 9.9 लाख रुपये और मानसिक परेशानी व कानूनी खर्च के लिए मुआवजे के तौर पर 5,000 रुपये शामिल हैं।

दरअसल, गाजियाबाद की रहने वाली नीलम मारवाह ने 3 जनवरी, 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य शैलजा सचान व आरपी सिंह को बताया कि उनके पति पवनीश मारवाह ने 27 नवंबर, 2013 को बीमा कंपनी से 9.95 लाख रुपये की सम एश्योर्ड वैल्यू वाली पॉलिसी खरीदी थी।

5 दिसंबर, 2014 को उनके पति बीमार पड़ गए और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई। ऐसे में बीमा कंपनी में पॉलिसी क्लेम करने के बाद LIC ने क्लेम का निपटारा करने से इनकार कर दिया। कंपनी ने नीलम को एक पत्र में बताया कि क्लेम इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि उनके पति ने पॉलिसी लेते समय अपनी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी छिपाई थी।

LIC के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता का क्लेम मिलने पर बीमा कंपनी ने कागजात की जांच की और बीमा पॉलिसी की शर्तों के आधार पर क्लेम खारिज कर दिया। साथ ही, 30 मार्च, 2016 को क्लेम खारिज करने का नोटिस भी भेजा गया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर कानपुर में बीमा कंपनी के क्षेत्रीय कार्यालय में अपील की गई, लेकिन 30 जुलाई, 2016 को उसे भी खारिज कर दिया गया।

पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी न देने के आरोप को बेबुनियाद बताते हुए शिकायतकर्ता ने आयोग से राहत की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज़ों को देखने के बाद गाजियाबाद आयोग ने कहा कि बीमा अनुबंध पूरी ईमानदारी (utmost good faith) का अनुबंध होता है, लेकिन बीमा कंपनी केवल इसी सिद्धांत के आधार पर मनमाने ढंग से किसी क्लेम को खारिज नहीं कर सकती।

आयोग ने कहा, “जब कोई बीमा कंपनी यह आरोप लगाती है कि बीमा कराने वाले व्यक्ति ने स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी बातें छिपाई थीं, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसी कंपनी की होती है कि बताई गई बीमारी असल में थी और पॉलिसी लेते समय वह बीमारी अहम थी और उससे जोखिम पर असर पड़ता था। कंपनी को यह भी साबित करना होगा कि बीमा कराने वाले व्यक्ति को उस बीमारी के बारे में पता था, उसने जान-बूझकर और धोखाधड़ी से ये बातें छिपाई थीं, और बताई गई बीमारी का व्यक्ति की मौत या बीमा से जुड़े जोखिम से अहम और सीधा संबंध था।” आयोग ने आगे कहा कि LIC पेश किए गए दस्तावेज़ों के आधार पर इन बातों को साबित करने में नाकाम रही है।

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