‘कोई पाकिस्तानी कश्मीर नहीं है’; PoK हिंसा पर भ्रामक हेडलाइन के लिए भारत ने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को लगाई लताड़

PoK Unrest: अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार (29 जुलाई) को अमेरिका के एक प्रमुख अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर की हेडलाइन को भ्रामक और गलत करार देते हुए कहा कि ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ जैसी कोई चीज नहीं है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में प्रकाशित खबर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी हिंसक झड़पों पर आधारित थी। भारतीय दूतावास ने कहा, “न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर का शीर्षक गलत और गुमराह करने वाला है। कोई पाकिस्तानी कश्मीर नहीं है, सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर है।”

दूतावास ने कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और रहेंगे। भारतीय दूतावास ने कहा, “पाकिस्तान ने इन केंद्र-शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। अब वह कब्जे वाले इलाकों के लोगों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।”

स्थानीय अधिकारियों और स्वतंत्र एजेंसियों के हवाले से प्रकाशित खबर में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने कहा कि जून में शुरू हुई हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का संयुक्त मंच ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पीओके की तथाकथित विधानसभा की 12 विवादित सीट को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

जेएएसी का आरोप है कि सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए करता है। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी व्यापक जन प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण, वहां के लोगों को मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और उसके प्रशासनिक दमन का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।

पाकिस्तानी सेना की बर्बर कार्रवाई

पिछले दो दिनों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई में 30 से अधिक नागरिक मारे गए और 33 से अधिक घायल हो गए। पीओके में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) इन प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही है।

पीओके में पिछले महीने से महंगाई, प्रशासनिक उदासीनता, राजनीतिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत ने मंगलवार को पीओके में कराए जा रहे स्थानीय निकाय चुनाव को पाकिस्तान की ओर से अपने अवैध कब्जे पर पर्दा डालने और क्षेत्र में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश बताया था।

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सूत्रों ने बताया कि रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक जेएएसी के ‘लॉन्ग मार्च’ के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल प्रयोग किया। स कार्रवाई में 30 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई और 33 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मरने वालों में उस्मान नजीर भी शामिल है, जो जेएएसी की केंद्रीय समिति के सदस्य उमर नजीर का भाई था।

लद्दाख के हीरो- बचाईं कंबल और जाल से 47 Snow Leopards की जान | Khenrab Phuntsog | Ladakh

बर्फ से ढके पहाड़ों में रहने वाला Snow Leopard सिर्फ एक खूबसूरत जानवर नहीं, बल्कि पूरे हिमालय के संतुलन के लिए बहुत ज़रूरी है। लेकिन Climate Change, कम होते प्राकृतिक आवास और इंसानों के साथ बढ़ते टकराव की वजह से आज इनका अस्तित्व खतरे में है।
ऐसे समय में खेनरब फुंत्सोग जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति की रक्षा सिर्फ जंगलों में नहीं, बल्कि हमारी सोच से भी शुरू होती है। एक व्यक्ति का समर्पण कई बार उन ज़िंदगियों को बचा लेता है, जिनकी आवाज़ हम तक कभी पहुंच ही नहीं पाती।
अगर हम इंसान और वन्यजीव साथ मिलकर जीना सीख जाएं, तो आने वाली पीढ़ियां भी हिमालय की वादियों में Snow Leopard की दहाड़ सुन सकेंगी।

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20 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयत, दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को पुलिस अस्पताल लेकर गई। लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत को लेकर काफी चिंता जताई जा रही थी। पुलिस द्वारा वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी वहां से हटाया जा रहा है। बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वहीं, पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट में वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर हुई सुनवाई के बाद की गई। दो दिन पहले, कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे इस क्लाइमेट एक्टिविस्ट की रोजाना क्लिनिकल जांच करें। साथ ही यह भी कहा था कि “किसी भी नागरिक की जान कीमती होती है” और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने के साथ जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता दी जानी चाहिए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना जारी होने वाले मेडिकल बुलेटिन में लगातार वांगचुक की हालत को लेकर चिंता जताई गई थी। दो दिन पहले जारी एक अपडेट में डॉक्टरों ने बताया था कि भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन 8 किलोग्राम से ज्यादा घट गया है और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है।

दिल्ली पुलिस ने दी जानकारी 

वहीं, अब दिल्ली पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, क्योंकि उनके अनशन के 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।

पुलिस ने एक बयान में कहा, “माननीय हाई कोर्ट के आदेशों और एक्सपर्ट मेडिकल सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया है। माननीय हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जब उन्हें ले जाया जा रहा था, तो प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी अफरातफरी मची। हालांकि, पुलिस ने बहुत संयम बरता और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया।”

वहीं, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे अपना आंदोलन खत्म कर जंतर-मंतर स्थल को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से खाली कर दें।

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