हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

Hathini Kund Barrage Accident

हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज में स्पेशल फोर्स के जवानों की ट्रेनिंग के दौरान मंगलवार शाम बड़ा हादसा हो गया। यमुना में अभ्यास के दौरान जवानों को ले जा रही मोटर बोट अचानक बंद हो गई। इसी बीच तेज बहाव के चलते बोट बहने लगी और उसमें सवार 5 जवान नदी के पानी में गिर गए। हादसे के बाद 3 जवान किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि दो जवानों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

 

मीडिया खबरों के अनुसार, स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग 30 अगस्त से चल रही थी और मंगलवार को इसका आखिरी दिन था। शाम करीब 5 बजे यमुना की अपस्ट्रीम में जवानों का अभ्यास कराया जा रहा था। ट्रेनिंग के दौरान जवान हेलिकॉप्टर से एक-एक कर यमुना में मौजूद मोटर बोट पर उतर रहे थे। जवानों के बोट पर पहुंचने के बाद अचानक मोटर बोट स्टार्ट नहीं हुई। इसी दौरान तेज पानी के बहाव ने बोट को अपनी चपेट में ले लिया और वह बहने लगी। बोट पर सवार जवान पानी में गिर गए।

तेज बहाव में तैरकर निकले 3 जवान 

हादसे के बाद तीन जवानों ने पश्चिमी यमुना नहर की ओर तैरकर सुरक्षित निकलने की कोशिश की। उस वक्त नहर में करीब 14,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। तेज बहाव के बीच तीनों जवानों ने करीब 600 मीटर तक तैरकर नहर के खुले गेट से बाहर निकलने में सफलता हासिल की। हालांकि, दो जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। उनके पानी में बह जाने की आशंका को देखते हुए सेना और रेस्क्यू टीम ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

 

जवानों की तलाश जारी

2 जवानों के लापता होने की सूचना मिलते ही सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। कर्नल योगेंद्र के नेतृत्व में सेना की टीम यमुना और पश्चिमी यमुना नहर के संभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। रेस्क्यू टीम रस्सियों और अन्य जरूरी उपकरणों की मदद से नदी और नहर में लापता जवानों की तलाश कर रही है। फिलहाल अभियान जारी है और सेना की टीम दोनों जवानों को खोजने में जुटी हुई है।

Nepal Flood News: नेपाल की उस लड़की की कहानी जिसके घर के 17 लोग विनाशकारी बाढ़ में मारे गए

Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।

एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया

कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।

वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!

कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।

राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर

बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।

कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।

13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी

नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।

इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती

इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।

CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।

मृतकों की संख्या 1,100 के पार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।  नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।

Viral Video: नेपाल की बाढ़ में बहकर भारत पहुंचे हाथी, पानी में फंसा देख लोगों का पसीजा दिल

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। अचानक आए सैलाब ने बस्तियों, सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया, वहीं बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने और कई लोगों के लापता होने की खबर है। इस भयावह स्थिति के बीच अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में कुछ हाथी तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में फंसे नजर आ रहे हैं। ये बेजुबान जानवर पानी की लहरों के बीच खुद को बचाने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि नेपाल से आए बाढ़ के पानी के कारण हाथी बहकर उत्तर प्रदेश के बहराइच के पास पहुंच गए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स हाथियों की सलामती को लेकर चिंता जता रहे हैं और उनके सुरक्षित रेस्क्यू की उम्मीद कर रहे हैं।

बाढ़ के पानी में फंसे 4-5 हाथी

वायरल वीडियो में कई हाथी तेज बहाव वाले पानी में फंसे नजर आ रहे हैं। वे लगातार खुद को पानी की सतह से ऊपर रखने और बहाव के बीच आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। वीडियो रिकॉर्ड कर रहा एक शख्स बताता है कि नेपाल की तरफ से आए बाढ़ के पानी में बहकर ये हाथी उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित कैलाशपुरी बैराज के आसपास पहुंच गए हैं। उसके मुताबिक, पानी में करीब चार से पांच हाथी फंसे हुए थे और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही थी।

नेपाल से आए सैलाब में बहकर पहुंचे हाथी

बताया जा रहा है कि नेपाल में आई बाढ़ का पानी कर्णाली नदी में पहुंचा, जिसे उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी के नाम से भी जाना जाता है। तेज बहाव के साथ हाथी भी बहकर भारतीय क्षेत्र की तरफ आ गए।हालात की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीमें हाथियों को बचाने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गईं। अधिकारी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के साथ-साथ प्रभावित वन्यजीवों पर भी नजर रख रहे हैं।

‘इंसानों के साथ जानवर भी झेल रहे हैं तबाही’

हाथियों का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए। लोगों ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी त्रासदियों में अक्सर यह भूल जाता है कि जानवर भी उतनी ही तकलीफ झेलते हैं। एक अन्य यूजर ने हाथियों के लिए चिंता जताते हुए कहा कि इन बेजुबान जानवरों का अच्छी तरह ख्याल रखा जाना चाहिए। वहीं, एक व्यक्ति ने लिखा कि इतने सारे जानवरों को बाढ़ में फंसा देखकर उसका दिल टूट गया और आपदा की भयावहता का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

नेपाल में कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

जानकारी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ की शुरुआत करीब सुबह 9 बजे हुई, जब तिब्बत की तरफ से पानी का तेज बहाव भोटे कोशी नदी में पहुंचा। इसके बाद बाढ़ का पानी नेपाल के रसुवा जिले के कई इलाकों में फैल गया। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में सैलाब ने भारी तबाही मचाई। पानी के तेज बहाव ने रास्तों, बस्तियों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।

रेस्क्यू टीमों की नजर अब हाथियों पर

एक तरफ राहत और बचाव दल बाढ़ में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं वन विभाग की टीमें हाथियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। वायरल वीडियो ने यह भी दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जंगल और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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चमोली में हाइड्रो प्रोजेक्ट पर बड़ा हादसा, सुरंग में गले तक भरा पानी और गाद, 7 मजदूरों की मौत, 6 लापता

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट साइट पर बन रही सुरंग में पानी और मलबा घुसने से सात मजदूरों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, अभी 6 लापता मजदूरों की तलाश जारी है।

शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, पिपलकोटी इलाके में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर कुल 22 मजदूर फंस गए थे। बाद में सभी 22 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात की मौत की पुष्टि हुई है और 11 घायल हैं। फिलहाल, घायल मजदूरों का इलाज पास के अस्पताल में चल रहा है।

वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट का निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) कर रही है।

रेस्क्यू टीमों ने ऑपरेशन तेज किया

घटना के बाद पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और दूसरी एजेंसियां ​​मौके पर पहुंचीं। ऑपरेशन में मदद के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस और सेना की टीमों को भी तैनात किया गया।

NDRF इंस्पेक्टर अमृत लाल मीणा ने बताया कि सुरंग में पानी काफी ज्यादा भरा हुआ था और पानी का स्तर छाती तक पहुंच गया था। बचाव दल के सदस्य सुरंग के अंदर गए और उन शवों को बाहर निकाला जो पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे।

मीणा ने मीडिया को बताया, “हम पानी के बीच से गुजरे और टीम के कुछ सदस्यों के पास पानी के अंदर ऑपरेशन करने के लिए खास उपकरण थे। चारों शव पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे, इसलिए हम अंदर गए और घटना स्थल से चारों शवों को बाहर निकाला।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर चिंता जताई। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए।

आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटरों से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी।

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Mumbai Landslide: मुंबई के घाटकोपर में लैंडस्लाइड! चॉल पर गिरा मलबा, हादसे में 5 की मौत

Mumbai Ghatkopar Landslide: मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के भूस्खलन के कारण एक चॉल पर पहाड़ का हिस्सा गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में करीब 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। वहीं, इस घटना के बाद कई एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया है।

बता दें कि यह भूस्खलन सुबह करीब 3:48 बजे कुर्ला के चिराग नगर में राठौड़ मेडिकल के पास स्थित गौसिया चॉल में हुआ। बताया जा रहा है कि पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक नीचे ढह गया, और इसका मलबा पास की चॉल के दो से तीन कमरों पर जा गिरा।

हालांकि, मलबे से दो लोगों को बाहर निकाला गया, जिनकी पहचान 28 वर्षीय साहिल अंसारी और 14 वर्षीय मोहम्मद समीर के रूप में हुई है। उन्हें राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शुरुआत में खबर थी कि मलबे में 3 से 4 लोग फंसे हो सकते हैं, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों ने बताया कि 6 से 8 लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।

वहीं, मुंबई फायर ब्रिगेड ने सुबह करीब 4:32 बजे इस घटना को लेवल-2 इमरजेंसी घोषित किया और तुरंत राहत-बचाव अभियान शुरू कर दिया। फिलहाल करीब 50 BMC कर्मचारी और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मिलकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार, मलबे को हटाने और उसके नीचे फंसे लोगों को खोजने के लिए खास बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

DCP ने दी जानकारी

DCP गणेश शिंदे ने बताया कि अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान अभी भी जारी है।

अधिकारी ने कहा, “बारिश के कारण घाटकोपर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अशोकनगर इलाके में भूस्खलन हुआ है। अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान चल रहा है।”

इस घटना में घायल हुए दो अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर है। इनकी पहचान 18 वर्षीय सोहेल अंसारी (सिर में चोट) और 14 वर्षीय मोहम्मद अंसारी (पीठ में चोट) के तौर पर हुई है।

राहत और बचाव कार्य जारी

DCP शिंदे ने कहा, “बचाव कार्य जारी है और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें व स्थानीय अधिकारी घटनास्थल पर लगातार कोशिशें कर रहे हैं। हालांकि अभी सही संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी तीन से चार लोग फंसे हो सकते हैं।”

बता दें कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शवों को आगे की प्रक्रिया के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में कानूनी कार्रवाई और जांच आगे जारी रहेगी।

वहीं, मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस और NDRF की टीमें घटनास्थल पर तैनात की गई हैं, जबकि BMC के वार्ड कर्मचारी और अन्य इमरजेंसी कर्मी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं।

BMC मेयर ने किया घटनास्थल का दौरा

BMC की मेयर रितु तावड़े और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (ईस्टर्न सबर्ब्स) अविनाश ढकने ने भी हालात का जायजा लेने के लिए घाटकोपर में प्रभावित जगह का दौरा किया।

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रियल लाइफ हीरो हैं ‘अन्ना’128 महिलाओं को दिलाई आज़ादी | Suniel Shetty | The Better India Hindi

हम अक्सर सुनील शेट्टी को उनकी फिल्मों, डायलॉग्स और “अन्ना” वाली पहचान के लिए जानते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय उन्होंने ऐसी 128 महिलाओं की मदद की, जो मानव तस्करी के जाल में फंसी हुई थीं।
शायद यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान मानते हैं।
रील लाइफ में हीरो बनना आसान है। असल चुनौती रियल लाइफ में किसी के लिए उम्मीद बनना है। सुनील शेट्टी की यह कहानी याद दिलाती है कि इंसान की असली पहचान उसके काम, उसके दिल और उन जिंदगियों से बनती है जिन्हें वह छू जाता है।
इसीलिए आज करोड़ों लोगों के लिए वह सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि हमारे अपने “अन्ना” हैं। :heart:
क्या आपको सुनील शेट्टी की यह कहानी पहले पता थी?

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Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में जर्जर इमारत गिरने से 9 लोगों की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार रात चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और आशंका है कि मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं। फिलहाल, अभी बचाव कार्य जारी है और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमें और स्थानीय पुलिस मौके पर मौजूद हैं।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत का बड़ा हिस्सा उस समय गिरा जब वहां काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कमजोर और खराब हालत के कारण इमारत को पहले ही खाली करा लिया गया था, लेकिन आशंका है कि कुछ मजदूर हादसे के समय अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए।

NDRF की टीम ने शुरुआत में मलबे से एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने का काम लगातार जारी है।

अधिकारी खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि मलबे के नीचे और भी लोग दबे हो सकते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की बात कही गई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया, यह संख्या 9 तक पहुंच गई।

देवेंद्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया

अब इस घटना पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तुरंत FIR दर्ज करने और सक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने ‘X’ पर एक ट्वीट में कहा, “भिवंडी में इमारत गिरने से हुई लोगों की मौत की घटना बेहद दुखद है। मैं उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। हम इन परिवारों के दुख में शामिल हैं। म्युनिसिपल कमिश्नर को इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। घायलों का इलाज किया जा रहा है। मैं ईश्वर से उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।”

पीएम मोदी ने मुआवजे का किया ऐलान

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हों।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल्डिंग की पहचान कोहिनूर अपार्टमेंट के तौर पर हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के नगर निगम ने इसे पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया था।

शहर के मेयर नारायण चौधरी ने कहा, “भिवंडी में ऐसी कई इमारतें हैं जिन्हें खतरनाक घोषित किया गया है। हम फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं ऐसी इमारतों में रहने वाले लोगों को सलाह दूंगा कि वे तुरंत इन्हें खाली कर दें।”

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लद्दाख के हीरो- बचाईं कंबल और जाल से 47 Snow Leopards की जान | Khenrab Phuntsog | Ladakh

बर्फ से ढके पहाड़ों में रहने वाला Snow Leopard सिर्फ एक खूबसूरत जानवर नहीं, बल्कि पूरे हिमालय के संतुलन के लिए बहुत ज़रूरी है। लेकिन Climate Change, कम होते प्राकृतिक आवास और इंसानों के साथ बढ़ते टकराव की वजह से आज इनका अस्तित्व खतरे में है।
ऐसे समय में खेनरब फुंत्सोग जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति की रक्षा सिर्फ जंगलों में नहीं, बल्कि हमारी सोच से भी शुरू होती है। एक व्यक्ति का समर्पण कई बार उन ज़िंदगियों को बचा लेता है, जिनकी आवाज़ हम तक कभी पहुंच ही नहीं पाती।
अगर हम इंसान और वन्यजीव साथ मिलकर जीना सीख जाएं, तो आने वाली पीढ़ियां भी हिमालय की वादियों में Snow Leopard की दहाड़ सुन सकेंगी।

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पाकिस्तान की इस साइकिल एंबुलेंस का उड़ाया जा रहा मजाक लेकिन इसके पीछे की असली वजह जानकर बदल जाएगी राय

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर वीडियो की कहानी वैसी नहीं होती, जैसी पहली नजर में दिखाई देती है। इन दिनों पाकिस्तान के कराची से सामने आया एक वीडियो इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोर रहा है, जिसमें एक साइकिल एंबुलेंस सड़क पर दौड़ती नजर आती है। वीडियो देखते ही कई लोगों ने इसे आधुनिक मेडिकल तकनीकों से जोड़कर मजाक बनाना शुरू कर दिया और तरह-तरह के मीम्स शेयर किए। हालांकि, इस पहल के पीछे की वजह महज दिखावा नहीं, बल्कि शहर की एक बड़ी समस्या का समाधान तलाशना है।

कराची जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में ट्रैफिक जाम और संकरी गलियों के कारण पारंपरिक एंबुलेंस अक्सर समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में यह साइकिल एंबुलेंस आपात स्थिति में शुरुआती इलाज पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल का हिस्सा है, जिसने अब सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

नया नहीं, पहले से चल रहा है यह प्रोजेक्ट

वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि कराची के मेयर ने हाल ही में इस साइकिल एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की है। हालांकि, यह दावा सही नहीं है। यह सेवा कोई नई पहल नहीं है, बल्कि 2025 से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित की जा रही है।

ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए निकाला गया समाधान

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत Sindh Integrated Emergency and Health Services (SIEHS-1122) यानी Rescue 1122 ने की थी। कराची में भारी ट्रैफिक और संकरी गलियों के कारण कई बार सामान्य एंबुलेंस समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पातीं। इसी समस्या को देखते हुए साइकिल एंबुलेंस का इस्तेमाल शुरू किया गया।

छोटी साइकिल, लेकिन जरूरी मेडिकल सुविधाओं से लैस

यह कोई साधारण साइकिल नहीं है। इसमें प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी मेडिकल किट, ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइज़र और ब्लड शुगर जांच उपकरण जैसे जरूरी सामान मौजूद रहते हैं। प्रशिक्षित रेस्पॉन्डर सबसे पहले मरीज तक पहुंचकर प्राथमिक उपचार देते हैं और मरीज की स्थिति संभालते हैं, जब तक सामान्य एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच जाती।

महिला वॉलंटियर्स संभाल रही हैं जिम्मेदारी

इस पहल की एक खास बात यह भी है कि इसे प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवकों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य न सिर्फ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है, बल्कि महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा देना है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर इसे लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक तरफ कई लोगों ने इसका मजाक उड़ाया, वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने इसे भीड़भाड़ वाले इलाकों के लिए एक व्यावहारिक और कम लागत वाला समाधान बताया। उनका कहना है कि जहां बड़ी एंबुलेंस पहुंचने में समय लेती है, वहां साइकिल एंबुलेंस शुरुआती इलाज देकर मरीज की जान बचाने में मदद कर सकती है।

मीम्स से आगे, जरूरत पर पहल

भले ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर हंसी-मजाक का कारण बन गया हो, लेकिन साइकिल एंबुलेंस का उद्देश्य तेज और आसान आपातकालीन सहायता पहुंचाना है। भीड़भाड़ वाले शहरों में ऐसी पहल कई बार मरीजों तक समय पर पहुंचने का प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।

सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा!भूस्खलन के बाद 7 मजदूरों की मौत, कई फंसे, गैस रिसाव से बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण

Sikkim Tunnel Collapse Latest Update: सिक्किम के नामची जिले के समरदुंग (Samardung) क्षेत्र में निर्माणाधीन सुरंग में हुए दर्दनाक हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कई मजदूर अभी भी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है। सोमवार 20 जुलाई की दोपहर हुए भूस्खलन के कारण सुरंग का एंट्री गेट पूरी तरह बंद हो गया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल सके। हादसे के बाद शुरू किए गए राहत एवं बचाव अभियान को सुरंग के भीतर मीथेन गैस के रिसाव ने और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, गैस के प्रभाव के कारण कई बचावकर्मियों को सुरंग के अंदर चक्कर आने लगे और कुछ बेहोश भी हो गए, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, जिला प्रशासन ने सात लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है। मृतकों के शवों को सिंगतम जिला अस्पताल, गंगटोक स्थित एसटीएनएम अस्पताल और नामची जिला अस्पताल भेजा गया है।

नामची जिला प्रशासन, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिक्किम पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज, एनएचपीसी और अन्य विभागों की टीमें भी मौके पर तैनात हैं।

जिला कलेक्टर अनूप तमलिंग ने बताया कि सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की सटीक संख्या का अभी सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मीथेन गैस, संकरी सुरंग और कम विजिबिलिटी के कारण बचाव अभियान लगातार कठिन होता जा रहा है। फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

27 मजदूर फंसे

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, निर्माणाधीन सड़क सुरंग का एंट्री गेट बंद हो गया, जिससे उसके भीतर कम से कम 27 मजदूर फंस गए। अधिकारियों के मुताबिक, भूस्खलन के कारण भूमिगत चट्टानों और भू-स्तरों में बदलाव आने से प्राकृतिक रूप से मीथेन गैस का रिसाव शुरू हुआ है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए घटनास्थल पर एंबुलेंस तैनात हैं। गैस मास्क सहित विशेष सुरक्षा उपकरणों से लैस बचाव दल लगातार सुरंग के भीतर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

तमलिंग ने कहा कि इस समय प्राथमिकता फंसे हुए मजदूरों को बचाना है, जिसके बाद घटना की विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है। जबकि गैस मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों से लैस बचावकर्मी फंसे हुए मजदूरों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।

अब तक सात की मौत की पुष्टि

नामची में NHPC तीस्ता स्टेज VI प्रोजेक्ट की एक सुरंग दुर्घटना में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। शवों को पास के अस्पतालों में भेजा गया है। जबकि बचाव दल निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे हुए कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि समरडुंग सुरंग में फंसे मजदूरों की सही संख्या की अभी भी पुष्टि की जा रही है। यह संख्या मौजूदा अनुमान से कम या ज्यादा हो सकती है। पुलिस ने बताया कि भूस्खलन के कारण समरदुंग सुरंग के अंदर संदिग्ध गैस रिसाव भी हुआ है।

पुलिस ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि भूस्खलन के कारण भूमिगत परतों या चट्टानों की संरचना में हलचल होने से यह गैस प्राकृतिक रूप से निकल रही है। यह टनल NHPC के तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के लिए पटेल इंजीनियरिंग द्वारा ADIT के हिस्से के तौर पर बनाई जा रही थी।