Delhi Weather: दिल्ली में झमाझम बारिश से बदला मौसम, AQI 116 दर्ज; जानें अगले 6 दिन कैसा रहेगा हाल?

Delhi Weather: दिल्ली में हफ्ते की शुरुआत जोरदार बारिश के साथ हुई। सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में भारी बारिश और आंधी-तूफान का दौर चला। जिसे देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक आंधी-तूफ़ान जारी रहने की संभावना है।

IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, बारिश के इस दौर के बाद अगले छह दिनों तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना कम है। हालांकि, अभी हो रही भारी बारिश के बावजूद, आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 12 अक्टूबर को सुबह 6 बजे दिल्ली के आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगभग 116 था, जिसमें मुख्य प्रदूषक PM 10 की मात्रा सबसे ज्यादा रही।

बारिश की बात करें तो इससे इलाके में ठंडक बढ़ गई है और आसमान में बादल छाए रहने से मौसम में काफी बदलाव आया है। हालांकि, इस भारी बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया है, खासकर करोल बाग के पास झंडेवालान मंदिर इलाके में।

13-17 अक्टूबर तक कैसा रहेगा मौसम?

रविवार शाम को जारी IMD के सात दिनों के मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 13 अक्टूबर को दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, 14 अक्टूबर को अधिकतम तापमान बढ़कर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, 15 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। वहीं, 16 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। इन सभी दिनों में आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है।

इसके अलावा, 17 अक्टूबर की बात करें तो दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस दिन भी आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है।

IMD  ने ट्रैफिक को लेकर दी चेतावनी

IMD ने ट्रैफिक में रुकावट की चेतावनी भी दी है और लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी मंजिल के लिए निकलने से पहले ट्रैफिक जाम की स्थिति देख लें। इस दौरान गाड़ी दुर्घटनाओं की ज्यादा संभावना और निचले इलाकों में पानी भरने को लेकर लोगों के लिए चिंता जताई गई है। विभाग ने लोगों से ट्रैफिक से जुड़ी सलाह मानने और पानी भरने वाले इलाकों से बचने की अपील की है।

बता दें कि पिछले 24 घंटों में, IMD ने दिल्ली में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थिर रहा। अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि राजधानी में बारिश का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर लगातार पड़ रहा है, इसलिए लोगों से सतर्क रहने और मौसम में और बदलावों के लिए तैयार रहने की अपील की गई है।

यह भी पढ़ें: Nepal Flood Video: नेपाल में बाढ़-लैंडस्लाइड से फिर भारी तबाही! बूढ़ी गंडकी नदी में बह गए 36 मकान और पुल, बिहार में भी हाई अलर्ट

Video: नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी का रौद्र रूप, उफनती नदी में बहा ऐतिहासिक पुल? खौफनाक वीडियो वायरल

नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी के उफान ने आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। आरुघाट क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और नदी के किनारों से दूर रहने की सलाह दी है। हालात को देखते हुए आरुघाट से त्रिशूली दोभान तक विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ऐतिहासिक सेती पुल के बाढ़ में बहने का दावा किया जा रहा है। नदी के तेज बहाव और लगातार बढ़ते पानी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने भी संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे पानी का स्तर कम होने तक नदी के आसपास न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें। हालांकि, पुल के बहने की खबर की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।

बूढ़ी गंडकी में बढ़ता पानी, किनारे रहने वालों की बढ़ी चिंता

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने नदी में संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की है। प्राधिकरण के मुताबिक, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 की ओर से बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ का पानी आ रहा है। इसके कारण आरुघाट से त्रिशूली दोभान तक नदी के आसपास खतरा बढ़ सकता है।

प्रशासन ने लोगों को साफ तौर पर सलाह दी है कि पानी का बहाव कम होने और हालात सामान्य होने तक नदी के किनारे जाने से बचें। खासकर नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक पानी बढ़ने से लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का समय भी कम मिल सकता है।

वीडियो में दिखा खतरनाक मंजर, पुल को लेकर चिंता

बूढ़ी गंडकी नदी के उफान से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। रिपोर्ट में ऐतिहासिक सेती पुल के बहने का दावा किया गया है। अगर इसकी पुष्टि होती है, तो यह स्थानीय संपर्क और आवागमन के लिहाज से बड़ा नुकसान हो सकता है।

नदी में तेज बहाव के दौरान पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने से आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है। लोगों को वीडियो देखने के लिए भी नदी के किनारे जाने या जोखिम उठाने से बचना चाहिए।

पिछली बाढ़ की यादें, नेपाल में फिर बढ़ी सतर्कता

नेपाल में पहले आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त के अंत में हुई आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत और 6,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि और संदर्भ की जांच जरूरी है। उस आपदा का असर रसुवा से लेकर नुवाकोट और धादिंग जैसे जिलों तक पहुंचा था। बाढ़ ने घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया था। इसी पृष्ठभूमि में बूढ़ी गंडकी का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का विषय है।

लोगों से अपील: नदी से दूरी रखें, चेतावनी पर दें ध्यान

फिलहाल सबसे जरूरी है कि स्थानीय लोग प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। नदी के पास जाने, तेज बहाव को पार करने या पुलों पर खड़े होकर वीडियो बनाने से बचना चाहिए। मौसम और जलस्तर में बदलाव के बीच सतर्कता ही जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है।

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Nepal Flood Video: नेपाल में बाढ़-लैंडस्लाइड से फिर भारी तबाही! बूढ़ी गंडकी नदी में बह गए 36 मकान और पुल, बिहार में भी हाई अलर्ट

Nepal Flood alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड से हाहाकार मच गया है। गोरखा जिले में रविवार (11 अक्टूबर) तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ से 35 से अधिक मकान और पुल नदी में बह गए। घटना के बाद प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और ऊंचाई वाले इलाकों में शरण लेने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि उन्हें रविवार तड़के करीब 4:35 बजे बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना मिली।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, बाढ़ चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर आई और नदी के किनारे स्थित बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और जमीनी रास्ते से भेजा गया है। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका लैंडस्लाइड की चपेट में आ सकता है।

36 मकान और पुल बहे

‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड संख्या तीन के अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में वार्ड को जोड़ने वाला एक पुल भी बह गया। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शुरुआती खबरों के अनुसार, सिउरीबास के ऊपरी इलाके में लैंडस्लाइड हुआ था।

उन्होंने कहा कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह बाधित हो गया होगा, जिससे बाढ़ आई। अधिकारियों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से उत्तरी गोरखा के कई इलाकों में 35 से अधिक मकान बह गए।

लैंडस्लाइड से रास्ता बंद होने के बाद आई बाढ़

मुख्य जिला अधिकारी मिश्रा के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्टों में सिउरीबास के ऊपर लैंडस्लाइड होने की बात सामने आई है। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का रास्ता बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया। प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हुआ हो सकता है।

कई लोग लापता

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ में कई पुल बह गए हैं। फिलहाल, चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली सेना उनकी तलाश कर रही है। न्यूज पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ ने उन्हें रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद दिला दी। उन्होंने कहा, “बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिला दी। इसमें दर्जनों मकान बह गए हैं। फिलहाल नुकसान का सही आकलन करना संभव नहीं है।”

जगत में 5 से 7 मकान बहने की सूचना

गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, जगत इलाके में नदी के तल के पास बने पांच से सात मकान बाढ़ के पानी में बह गए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि नदी के निचले हिस्सों में कुछ अन्य मकान भी बह गए हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे की जानकारी का इंतजार है।

नेपाल की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “बुढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और ज़मीनी रास्ते से भेजा गया। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। काठमांडू में तैनात कम्पोजिट क्विक रिएक्शन टीम को भी हवाई जहाज से इसी इलाके में भेजा गया है।”

बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे रहने वालों को चेतावनी

बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है। अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी के जलस्तर में तेज बदलाव से पैदा होने वाले खतरे को उजागर किया है।

ऐसे क्षेत्रों में भूस्खलन से जलधारा का रास्ता अवरुद्ध होने पर पानी जमा हो सकता है। बैरिकेट्स टूटने या पानी का रास्ता बदलने से अचानक तेज बहाव पैदा हो सकता है। फिलहाल, गोरखा जिले में बाढ़ से हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।

NDRRMA ने जारी किया अलर्ट

सुबह 6:40 बजे, नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने अपने बाढ़ पूर्वानुमान विभाग से एक SMS अलर्ट भेजा। इसमें लोगों से कहा गया कि वे बाढ़ का पानी उतरने तक नदी के पास न जाएं। खासकर त्रिशूली दोभान तक के इलाके में बिल्कुल न जाएं। ऊंची जगहों पर ही रहें। अधिकारी अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पानी का स्तर अचानक क्यों बढ़ा और उसमें मिट्टी और गाद क्यों बहकर आई।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और इसके बहाव की आवाज दूर से ही सुनी जा सकती थी। चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नारायण सपकोटा ने यह जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि जिला कार्यालय जमीनी स्तर से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्थिति का हवाई जायजा लेने के लिए नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर भेजने की तैयारी चल रही है।

बिहार में भी बाढ़ का खतरा

बूढ़ी गंडकी नदी में भयानक बाढ़ आने से भारतीय राज्य बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है। फिर आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं।

इससे पहले नेपाल में 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। उस बाढ़ में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों लोग लापता बताए गए थे। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की बाढ़ में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी और 5,285 लोग लापता थे।

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असम की बाढ़ से बचाई 6000+ बेजुबानों की जान | Manoj Gogoi | 6000+ Animals Rescued | Assam Kaziranga

असम की बाढ़ से बचाई  6000+ बेजुबानों की जान | Manoj Gogoi | 6000+ Animals Rescued | Assam Kaziranga

महीने की कमाई भले ही सिर्फ़ ₹1500 थी, लेकिन उनका दिल हर दिन बेजुबानों के लिए धड़कता था। Tip में मिले थोड़े-से पैसों से भी वो इन बेजुबानों का ख्याल रखते थे— क्योंकि उनके लिए हर जान अनमोल थी।
आज वही जुनून 6000+ जानें बचा चुका है। शायद इसी को कहते हैं—कम साधनों में भी बड़ा दिल रखना।
बेजुबानों के इस फ़रिश्ते की कहानी ज़रूर देखें और शेयर करें, ताकि इनकी इंसानियत की मिसाल और लोगों तक पहुँच सके।
@manojgogoiwildlife

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असम की बाढ़ से बचाई 6000+ बेजुबानों की जान | Manoj Gogoi | 6000+ Animals Rescued | Assam Kaziranga | Assam Flood

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Mahindra Scorpio Getaway: Lifestyler, I am your father

Mahindra Scorpio Getaway: Lifestyler, I am your father
Mahindra Scorpio Getaway

This is the story of a 1,50,000km-old Mahindra Scorpio Getaway that has lived the life it was designed for.

My name is Ouseph Chacko, and I am part-owner of this Getaway because it is my company car. As a partner of an off-road motorcycle school and adventure touring company, I can tell you that if we didn’t have the Getaway from when we started out, it would have taken us a lot longer to get here. We would have been a fair bit lighter of wallet too.

To tell this story properly, I need to rewind a bit – pickup trucks by their very nature are designed to be versatile, and that’s the story of this Getaway. Back in 2016, my business partner Rish was big into long-distance cycling, kayaking and camping tours and needed a vehicle that could accommodate his expensive cycles, carry a couple of kayaks and have the ability to lug around enough gear to make camping, glamping.

The Getaway offered power steering, power windows, power mirrors, air conditioning, front seat armrests and a rear defogger! It also had the electronic shift-on-the-fly four-wheel-drive system and was the most powerful pickup truck on offer.

First things first

While the Getaway looked as lifestyle as could be for pickup trucks back then, it still looked more BRO than Special Forces (no disrespect to the BRO but you get the picture), it needed upgrades.

Who needs drones when you have a roof carrier?

To ensure Rish got stuck further down the trail, a Lamda cable-operated locking differential found its way into the rear axle, while the front axle got manual locking hubs (the factory-fitted auto-locking hubs were prone to breaking under heavy load). The engine was left untouched, but to allow adequate wheel arch clearance for the planned high-profile fat tyres, a two-inch body-lift kit was installed. When you lift it, you need to stance it, and so, the vanilla factory wheels made way for off-road -30 off-set steel wheels and faux wheel arch extensions that muscled up the looks but also let us squeeze in fatter tyres without alerting the RTO.

A canopy was added to cover the pickup bed, custom bicycle mounts were welded onto the floor of the bed, a roof-mounted tent, a side awning, solar panels on the roof, an AC-to-DC converter to run devices off the solar panels, a roof carrier, a snorkel, the legendary Warn M8000 winch, metal off-road bumpers, nine auxiliary lamps. Kitchen sink? Pah! There was no space left!

Life has other plans

The snorkel allows some river crossing, but the Brahmaputra had to be crossed on this raft.

For reasons beyond the scope of this story, the Getaway spent most of its first two years parked up with no place to go. It preened, posed, went for the occasional camping trip and lent itself to all the mall crawler memes you can think of.

Then came August 2018. The skies over Kerala opened up. Rivers breached banks, houses were flooded up to the first floor in some places, and parts of middle Kerala were unreachable unless you had a boat or a vehicle with a snorkel. The official rescue teams quickly found themselves overwhelmed, so the Getaway, along with all of Kerala’s 4×4 community, stepped in to assist. The need of the hour was clean bedsheets, towels, underwear, drinking water, easy-to-reheat food and a way to get these supplies to people stranded in homes surrounded by flood waters or cut off by landslides. We loaded the Getaway’s pickup bed to the sky and drove through bonnet-deep water for about three days, handing out generously donated essentials. We stopped only when the rains subsided and when one of the people we thought needed help asked if we were carrying blue underwear. His favourite colour apparently!

Extremely useful as a backup car for our business because it can carry a mechanic, medic, tools, medical kit and motorcycles, with room to spare.

Soon after the rains subsided, the Motor Vehicles Department in Kerala started a serious clampdown run on modified vehicles, and we figured it was time to strip the Getaway of everything but the essentials. The School Of Dirt  – our off-road motorcycling school – was in full swing by then, and the Getaway was the backup car because it could carry a mechanic, medic and two broken motorcycles at a go. We kept the winch, the snorkel and the mud-terrain tyres. We added new features like the comprehensive tool kit for off-road trail fixes and an exhaustive medical kit for when things go wrong far from a hospital. This thing can carry a lot!

We’ve had a few heart-in-mouth moments, but the Getaway always got us home safe.

The next eight years were when the Getaway really pulled its own weight in gold. Most notably, the two 8,000km Kottayam-to-Kohima round trips, mostly with a 250kg Tiger 1200 strapped to its back, and about 1,10,000km criss-crossing South India with us and paraphernalia in it. It has been our hotel room and our home away from home when the adventure motorcycle thrill started booming. More than anything, it has been as reliable as a hammer and didn’t need much more than a full tank of diesel and some duct tape to get to the next destination.

Wear and tear on big bikes is expensive. Getaway helps mitigate that expense.

We figured a long time ago that using its ‘certified’ 600kg payload capacity to carry a motorcycle is a huge cost saving for a startup business. Ever since all nice and fast things became sin goods in the eyes of the government, carrying the bike to the start of the trip and using it only at the event became a much more economical proposition than riding it all the way. An example? A proper load- and speed-rated rear tyre on the Tiger 1200 costs Rs 25,000, and with the way I ride the bike, I obliterate that poor tyre in just 3,500km. That and the expensive mechanical wear and tear on these big bikes ultimately meant it was cheaper to load the bike on the back of the Getaway and transport it to the event.

Spare a thought

This being a Mahindra and based largely on the Scorpio, parts are available everywhere in India, and mechanics know their way around the Getaway’s Scorpio bloodline despite the pickup’s rarity. We run the car on a preventive maintenance schedule because we really work it hard, and no matter what, it gets fresh air, oil and diesel filters every 5,000km. The engine and transmission oil get changed at the same time, the leaf springs at the back are realigned and reshaped every 15,000km and the torsion bar front suspension gets re-adjusted every time we notice it starting to sag. We don’t have a bed liner for the pickup bed, so once a year, we check it in to a paint spa for a fresh coat to prevent rusting from all the scratches. That’s it.

Easily repaired because it shares a lot of parts with the Scorpio.

The engine has never needed an overhaul, and it is helpful that the bomb-proof 2.6 CRDe engine will run on anything that resembles diesel. The weak link in the mechanical package is the clutch – if you’re not reasonably careful every time you start off on a slope, it’ll vaporise fast. Still, the clutch pack along with the clutch release bearing works out to something like Rs 6,000, so apart from the inconvenience of being stranded, it really doesn’t hurt the wallet.

Also, because of our carelessness, we’ve chewed through three rear differentials in the course of the last decade (sometimes the cable-operated Lamda differential doesn’t fully disengage thanks to a corroded cable, and if you are not careful, you end up driving with a partially locked differential on the road). The rear differential turned out to be one of the most expensive spares on the Getaway, working out to around Rs 40,000 a pop, and even that is not too bad considering a broken tail-lamp on a Hilux will set you back Rs 30,000. We’ve since discarded the locking differential and keep fingers crossed that the winch will yank us out when the time comes. Also, don’t break the rear windshield – it is harder to source than a Ferrari 250 GTO!

With a full load, the Getaway still runs around 10 kilometres for every litre of diesel consumed, and that, along with its 60-litre fuel tank, gives it a useful range of 600km.

1,50,000km of highways and trails, and it is still going strong!

The Getaway doesn’t seem to lose much on resale value either. Back in 2016, Rish bought it for Rs 11 lakh and some spare change (on road!). Because every other new lifestyle pickup truck in the market is considerably more expensive, I think people are coming around to the sweet spot of utility, value and comfort that the Getaway hits. It is a reasonably simple vehicle with zero electronics (no ABS even!) and so lends itself to hard work and easy fixes happily. Still, well-maintained Getaways are few and far between and their owners (like us) are loathe to let them go. The ones you find on used-car portals are bad. Trust me, I’ve looked.

What next?

No one is more excited about the launch of the Getaway’s replacement than I am. The new Lifestyler (weird name) looks very cool, and the more powerful engines will definitely make fully loaded cross-country trips effortless. The expected base price is positively tasty, and I hope it will come with maintenance costs to match.

It does seem a bit too fancy, though, and I worry about the interiors that are no longer the hose-down kind. I hope Mahindra will offer a more pared-down version that will allow people like me to use it with dirty boots and greasy gloves guilt-free. 
In the mountaineering world, when someone successfully summits a peak, you ask, “Who’s your sherpa” The Getaway has been The School Of Dirt’s unfailing sherpa. The Lifestyler has its work cut out.

बिहार की बाढ़ में सैकड़ों लोगों का सहारा बना प्रशांत का Floating Station | Bihar Flood Relief

बिहार की बाढ़ में सैकड़ों लोगों का सहारा बना प्रशांत का Floating Station | Bihar Flood Relief

बिहार की बाढ़ में जब रास्ते डूब गए, तब प्रशांत कुमार ने मदद का रास्ता तैरता बना दिया।
उनका Floating Water Station बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैकड़ों लोगों तक पानी, दवाइयाँ और ज़रूरी सामान पहुँचा रहा है, इसमें लगा Water Purification System हर दिन 4,000 लीटर साफ़ और सुरक्षित पानी उपलब्ध करा सकता है।
एक Engineer की सोच, जो बाढ़ के बीच सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद बन गई।
आइए, प्रशांत की इस सोच का साथ दें, ताकि ऐसे innovative solutions और ज्यादा लोगों तक मदद पहुँचा सकें और बाढ़ के बीच किसी जरूरतमंद तक ज़रूरी सुविधाएँ पहुँचने से न रुकें।

@param_shant
@centreofresilience

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Delhi Building Collapse: ‘मलबे के अंदर से फोन कर रहे छात्र’, दिल्ली बिल्डिंग हादसे की हैरान कर देने वाली कहानी आई सामने

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक पीजी इमारत के अचानक गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत गिरने के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस घटना में अब तक एक व्यक्ति की मौत की खबर है, वहीं कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल ने अब तक छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सत्य निकेतन में हुए हादसे पर चिंता जताई। वहीं BJP विधायक अनिल शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। BJP विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि, इस बिल्डिंग में कई छात्र PG के तौर पर रह रहे थे। इस हादसे के समय कुछ स्टूडेंट्स बिल्डिंग के अंदर मौजूद थे।

‘अंदर से कर रहे फोन’

BJP विधायक ने आगे कहा कि, फिलहाल ये बताना मुश्किल है कि इमारत के अंदर कितने लोग फंसे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि, मलबे में फंसे कुछ छात्र अभी भी फोन के जरिए संपर्क कर रहे थे। इससे आशंका है कि हादसे के बाद भी कई लोग अंदर फंसे हो सकते हैं। राहत और बचाव टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। शर्मा ने कहा, “कुछ स्टूडेंट्स अभी भी अंदर से फोन कर रहे हैं। इससे लगता है कि कुछ और लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं, इसलिए बचाव अभियान लगातार जारी है।”

 

‘छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए’

विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इमारत के मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मौके पर पूरी टीम भेजी है और सरकार इस घटना को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा, “हम भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मौके पर पूरी टीम भेजी है। पूरी सरकार इस घटना को लेकर चिंतित है और हमारा सबसे बड़ा मकसद यही है कि अंदर फंसे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए।”

40-50 साल पुरानी है इमारत

दिल्ली पुलिस ने बताया कि, साउथ कैंपस थाने में दोपहर करीब 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली थी। जानकारी मिलते ही पुलिस, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और DDMA की टीमें फायर टेंडर और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। वहीं जांच के दौरान सामने आया कि सत्य निकेतन की यह इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी और इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं। बिल्डिंग का इस्तेमाल PG के रूप में किया जा रहा था और हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।

Bihar Flood Crisis: पटना में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बिहार में हाई अलर्ट, निचले इलाकों में बाढ़ से 19 लाख लोग प्रभावित

Bihar Flood Crisis: पटना में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बिहार में हाई अलर्ट, निचले इलाकों में बाढ़ से 19 लाख लोग प्रभावित

Bihar Flood Crisis: बिहार के 11 जिलों में 19 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। राजधानी पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर बाढ़ के खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद अधिकारियों ने रविवार (6 सितंबर) को निचले इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर बाढ़ के अहम हाईएस्ट फ्लड लेवल (HFL) से ऊपर चला गया है। इसलिए अगले एक से तीन दिनों में राज्य की राजधानी में हाथीदह और उसके बाद के रेलवे स्टेशन के प्रभावित होने की आशंका है।

19.57 लाख लोग प्रभावित

अधिकारियों ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि राज्य में कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया सहित 11 जिलों के 330 ग्राम पंचायतों में लगभग 19.57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। जल संसाधन विभाग (WRD) की ओर से जारी लेटेस्ट एडवाइजरी के मुताबिक, हथीदह में गंगा का जलस्तर अपने पिछले एचएफएल को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

एडवाइजरी जारी

सरकार की तरफ से जारी एक आधिकारिक एडवाइजरी में कहा गया है, “अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और जरूरत के हिसाब से सावधानी बरतते हुए जल-स्तर, तटबंधों, संवेदनशील जगहों और निचले इलाकों पर नियमित नजर रखें।” इसमें कहा गया, “इंजीनियरों से बाढ़ से निपटने से संबंधित संसाधन और मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है। प्रभावित इलाकों के लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी के पास न जाएं और सतर्क रहें।”

पटना समेत 14 जिलों में हालात गंभीर

बिहार की प्रमुख नदियों जैसे गंगा, गंडक और कोसी में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। पटना समेत 14 जिलों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार, पटना में गंगा नदी खतरे के निशान से लगभग दो मीटर ऊपर बह रही है। विभाग ने अनुमान लगाया है कि गांधी घाट गेज साइट पर बाढ़ का नया उच्चतम स्तर दर्ज किया जा सकता है। विभाग ने संबंधित ज़िलों को बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

गंगा का जलस्तर कितना बढ़ा?

स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे नावों के संचालन पर नजर रखें, क्षमता से अधिक लोगों को नावों पर सवार नहीं होने दें। साथ ही लोगों को हालात के बारे में जानकारी देते रहें। डब्ल्यूआरडी के मुताबिक, पटना के गांधी घाट पर रविवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर था, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम जलस्तर 50.52 मीटर से 0.05 मीटर अधिक है। बयान के मुताबिक, पटना जिले के पंडारक में रविवार सुबह छह बजे गंगा नदी का जलस्तर 43.92 मीटर था, जो 16 अगस्त 2021 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम जलस्तर 43.73 मीटर से 0.19 मीटर अधिक है।

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9 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे संजय साह, ‘हरे कृष्णा’ के जाप ने बचाई जान, जन्माष्टमी पर मिला नया जीवन

9 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे संजय साह, 'हरे कृष्णा' के जाप ने बचाई जान, जन्माष्टमी पर मिला नया जीवन

sanjay shah rescue operation

नेपाल के त्रिशूली में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद फंसे दो मजदूरों को 9 दिन बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है। 'हरे कृष्णा' का जाप करने वाले फोरमैन संजय साह ने जन्माष्टमी के दिन जीवन मिलने की रोमांचक कहानी साझा की है। ALSO READ: नेपाल में चमत्कार; बाढ़ के 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकाले गए 2 लोग, अभी भी फंसे हैं सैकड़ों वर्कर
 

मधेस प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कर्मचारी संजय साह ने बताया कि इन नौ दिनों के हर एक पल में उन्होंने मौत को बहुत करीब से देखा, लेकिन उनका भरोसा नहीं डगमगाया।

संजय शाह पर थी सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी

संजय साह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फोरमैन के तौर पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि आपदा के वक्त जब अफरा-तफरी मची और बाकी लोग जान बचाकर भागने लगे, तब भी वे कंट्रोल रूम में ही डटे रहे। उनके कंधों पर सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। उन्होंने साथी कर्मचारियों से तुरंत वहां से भागने का आग्रह किया, लेकिन जब तक वे सुरक्षित बाहर निकल पाते, तब तक मेरे लिए बाहर निकलने के रास्ते बंद हो चुके थे और बहुत देर हो चुकी थी।

 

अंधेरी और बंद सुरंग के भीतर फंसे होने के दौरान संजय ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने बताया कि पिछले नौ दिनों से वे लगातार 'हरे कृष्णा' महामंत्र का जाप कर रहे थे। उनका अटूट विश्वास था कि उन्हें बचाने कोई जरूर आएगा। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मिला जीवनदान

कुदरत का करिश्मा देखिए कि लगातार 'हरे कृष्णा' का जाप करने वाले संजय साह को ठीक कृष्ण जन्माष्टमी के पवित्र दिन पर ही सुरंग से जीवित बाहर निकाला गया। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के दिन मिले इस जीवनदान को हर कोई किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मान रहा है।

 

लगातार एक हफ्ते से ज्यादा समय तक चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, संजय साह की हालत बिल्कुल स्थिर है और उन्हें किसी प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है। एहतियात के तौर पर उन्हें त्रिशूली के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

हालांकि, संजय के मुताबिक, सुरंग के और अंदर, विशेषकर पावरहाउस के आसपास कुछ और लोग भी फंसे हो सकते हैं, क्योंकि आपदा के समय हर कोई वक्त रहते बाहर निकलने में सफल नहीं हो पाया था। फिलहाल, प्रशासन यहां राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

Nepal Flood Alert: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, दारचुला में लैंडस्लाइड से चौलानी नदी का रास्ता रुका; हाई अलर्ट पर प्रशासन

Nepal Flood: नेपाल 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि अब एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। नेपाल के दारचुला जिले में बड़े लैंडस्लाइड के बाद चौलानी नदी का बहाव कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने अचानक पानी बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने को कहा है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के पास जाने से बचें और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित जगह पर चले जाएं।

भट्टर इलाके में हुआ लैंडस्लाइड

नेपाल के दारचुला जिले के अपी हिमाल रूरल म्युनिसिपैलिटी के भट्टर इलाके में लैंडस्लाइड की वजह से बड़ी मात्रा में मलबा चौलानी नदी में जा गिरा है। इससे नदी का पानी कुछ समय के लिए रुक गया है। प्रशासन को आशंका है कि अगर आगे और लैंडस्लाइड हुआ तो नदी का रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है। ऐसे में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। प्रशासन ने चौलानी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सुरक्षा कर्मियों को भी संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है, ताकि लोगों को समय पर जानकारी दी जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

प्रशासन रखें है नजर

सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है। प्रशासन ने बाढ़ या किसी अन्य आपदा की स्थिति में लोगों की मदद के लिए इमरजेंसी फोन नंबर भी जारी किए हैं। आर्म्ड पुलिस फोर्स के मुताबिक, फिलहाल चौलानी नदी का पानी नॉर्मल लेवल पर बह रहा है। इसके बावजूद सुरक्षा टीम को बलांच इलाके में तैनात किया गया है, ताकि नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और खतरा बढ़ने पर आसपास के लोगों को समय रहते जानकारी दी जा सके।

प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव काम जारी

चौलानी नदी को चमेलिया नदी के नाम से भी जाना जाता है। यह अपी हिमाल क्षेत्र से निकलकर आगे महाकाली नदी में जाकर मिलती है, जो नेपाल और भारत की सीमा का हिस्सा है। नेपाल के कई हिस्से पहले से ही बाढ़ और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित हैं। हाल की बारिश और बाढ़ के कारण कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और जान-माल का भी नुकसान हुआ है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम अभी जारी है। ऐसे में चौलानी नदी के बहाव में आई रुकावट ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर फिर से तेज बारिश होती है तो नदी का पानी अचानक बढ़ सकता है और स्थिति गंभीर हो सकती है।