Nepal Flood Video: नेपाल में बाढ़-लैंडस्लाइड से फिर भारी तबाही! बूढ़ी गंडकी नदी में बह गए 36 मकान और पुल, बिहार में भी हाई अलर्ट

Nepal Flood alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड से हाहाकार मच गया है। गोरखा जिले में रविवार (11 अक्टूबर) तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ से 35 से अधिक मकान और पुल नदी में बह गए। घटना के बाद प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और ऊंचाई वाले इलाकों में शरण लेने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि उन्हें रविवार तड़के करीब 4:35 बजे बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना मिली।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, बाढ़ चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर आई और नदी के किनारे स्थित बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और जमीनी रास्ते से भेजा गया है। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका लैंडस्लाइड की चपेट में आ सकता है।

36 मकान और पुल बहे

‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड संख्या तीन के अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में वार्ड को जोड़ने वाला एक पुल भी बह गया। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शुरुआती खबरों के अनुसार, सिउरीबास के ऊपरी इलाके में लैंडस्लाइड हुआ था।

उन्होंने कहा कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह बाधित हो गया होगा, जिससे बाढ़ आई। अधिकारियों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से उत्तरी गोरखा के कई इलाकों में 35 से अधिक मकान बह गए।

लैंडस्लाइड से रास्ता बंद होने के बाद आई बाढ़

मुख्य जिला अधिकारी मिश्रा के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्टों में सिउरीबास के ऊपर लैंडस्लाइड होने की बात सामने आई है। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का रास्ता बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया। प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हुआ हो सकता है।

कई लोग लापता

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ में कई पुल बह गए हैं। फिलहाल, चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली सेना उनकी तलाश कर रही है। न्यूज पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ ने उन्हें रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद दिला दी। उन्होंने कहा, “बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिला दी। इसमें दर्जनों मकान बह गए हैं। फिलहाल नुकसान का सही आकलन करना संभव नहीं है।”

जगत में 5 से 7 मकान बहने की सूचना

गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, जगत इलाके में नदी के तल के पास बने पांच से सात मकान बाढ़ के पानी में बह गए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि नदी के निचले हिस्सों में कुछ अन्य मकान भी बह गए हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे की जानकारी का इंतजार है।

नेपाल की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “बुढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान के लिए हवाई और ज़मीनी रास्ते से भेजा गया। इस टुकड़ी ने जगत इलाके से 6 लोगों को हवाई रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह इलाका भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। काठमांडू में तैनात कम्पोजिट क्विक रिएक्शन टीम को भी हवाई जहाज से इसी इलाके में भेजा गया है।”

बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे रहने वालों को चेतावनी

बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है। अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी के जलस्तर में तेज बदलाव से पैदा होने वाले खतरे को उजागर किया है।

ऐसे क्षेत्रों में भूस्खलन से जलधारा का रास्ता अवरुद्ध होने पर पानी जमा हो सकता है। बैरिकेट्स टूटने या पानी का रास्ता बदलने से अचानक तेज बहाव पैदा हो सकता है। फिलहाल, गोरखा जिले में बाढ़ से हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।

NDRRMA ने जारी किया अलर्ट

सुबह 6:40 बजे, नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने अपने बाढ़ पूर्वानुमान विभाग से एक SMS अलर्ट भेजा। इसमें लोगों से कहा गया कि वे बाढ़ का पानी उतरने तक नदी के पास न जाएं। खासकर त्रिशूली दोभान तक के इलाके में बिल्कुल न जाएं। ऊंची जगहों पर ही रहें। अधिकारी अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पानी का स्तर अचानक क्यों बढ़ा और उसमें मिट्टी और गाद क्यों बहकर आई।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और इसके बहाव की आवाज दूर से ही सुनी जा सकती थी। चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नारायण सपकोटा ने यह जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि जिला कार्यालय जमीनी स्तर से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्थिति का हवाई जायजा लेने के लिए नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर भेजने की तैयारी चल रही है।

बिहार में भी बाढ़ का खतरा

बूढ़ी गंडकी नदी में भयानक बाढ़ आने से भारतीय राज्य बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है। फिर आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं।

इससे पहले नेपाल में 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। उस बाढ़ में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों लोग लापता बताए गए थे। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की बाढ़ में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी और 5,285 लोग लापता थे।

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कभी भी टूट सकती है झील: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चीन ने दी चेतावनी

Nepal Flood Alert: नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा उस भीषण फ्लैश फ्लड के सिर्फ चार दिन बाद सामने आया है, जिसमें देश के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चेतावनी दी है कि ऊपर की ओर बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है।

चीन के अधिकारियों ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस बारे में जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि झील में कुछ बदलाव देखे गए हैं, जिसमें पानी का रंग लगातार गहरा होना शामिल है। बीजिंग ने यह भी कहा है कि उसके मॉडल के मुताबिक, अगर झील को रोकने वाले प्राकृतिक बांध का कुछ हिस्सा टूटता है, तो नदी में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी आ सकता है। इससे नेपाल के कई इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

नई चेतावनी किस वजह से जारी की गई?

चीनी अधिकारियों ने झील के बदलते रूप को संभावित चेतावनी का संकेत बताया है।

नेपाल को भेजे गए संदेश में कहा गया, “परसों बननी शुरू हुई झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है। इसका मतलब है कि यह फट सकती है।”

चीन ने कहा कि झील में अभी पानी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है। उसने यह भी कहा कि अगर रुकावट टूटती है, तो नदी के निचले बहाव में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है।

फिलहाल, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कितना पानी जमा हुआ है?

ग्लेशियर के ढहने से मलबे की एक प्राकृतिक रुकावट बन गई, जिससे ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी हिस्से में एक अस्थायी झील बन गई है। कहा जा रहा है कि इसी घटना के कारण इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी।

यह झील चीन की तरफ चोचेन नदी और नेपाल की तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुक्रवार तक लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

चीनी अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है।

अगर प्राकृतिक रुकावट टूट जाए तो क्या होगा?

चीन ने इस बात का अंदाजा लगाने के लिए बाढ़ की मॉडलिंग की है कि अगर अस्थायी रुकावट का कोई हिस्सा टूटता है, तो कितना पानी नीचे की ओर बह सकता है। चीनी संदेश में कहा गया, “अगर बांध का कोई हिस्सा टूटता है, तो पानी का अधिकतम बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है। यह नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा।”

अधिकारी ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल करके भी इलाके पर नजर रख रहे हैं।

झील से पानी पहले ही बहने लगा है

शुक्रवार को झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहने लगा। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, दोपहर तक इस बहाव से होने वाले तुरंत खतरे को काबू में माना जा रहा था।

हालांकि, इस आकलन के बावजूद, झील के टूटने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल अभी भी बुधवार को आई अचानक बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है।

बाढ़ की तबाही से अब भी जूझ रहा नेपाल

नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी नदी के ऊपरी हिस्से में भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। नेपाल में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

ताजा चेतावनी के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारी अब अस्थायी झील में पानी के स्तर के साथ-साथ उसे रोकने वाले प्राकृतिक बांध की मजबूती पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।

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