Weather Update: यूपी, बिहार, झारखंड समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-मुंबई में भी बरेसेंगे बादल, IMD ने जारी किया अपडेट

Weather Update: मंगलवार, 1 सितंबर को देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, मुंबई और कोलकाता में भी बारिश हो सकती है, जबकि दिल्ली में दोपहर और शाम के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक होने की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगस्त महीने में देश में औसत से 16 फीसदी कम बारिश हुई।

दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में बारिश का दिन

दिल्ली में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और दोपहर व शाम के समय कई जगहों पर हल्की बारिश के साथ आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की संभावना है। रात में तापमान 25°C से 27°C और दिन में 34°C से 36°C के बीच रहने का अनुमान है।

आने वाले दिनों में भी दिल्ली में बारिश जारी रह सकती है। IMD ने 3 से 5 सितंबर के बीच दिल्ली और पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब में व्यापक बारिश का अनुमान लगाया है।

मुंबई में भी बारिश जारी रहने की संभावना है, क्योंकि कोंकण और गोवा क्षेत्र में 6 सितंबर तक व्यापक बारिश का अनुमान है। IMD को उम्मीद है कि मंगलवार को भी इस क्षेत्र में बारिश जारी रहेगी। हालांकि, बुलेटिन में मुंबई के लिए अलग से कोई खास अनुमान नहीं दिया गया है।

वहीं, कोलकाता और गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में मंगलवार को भारी बारिश हो सकती है। IMD ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में भारी बारिश और क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज हवाएं चलने का भी अनुमान लगाया है।

देश के बाकी हिस्सों का मौसम

मंगलवार को भुवनेश्वर और ओडिशा के दूसरे इलाकों में भारी बारिश का सबसे ज्यादा खतरा है। IMD ने ओडिशा में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है। बता दें कि जैसे-जैसे मौसम का सिस्टम जमीन की ओर बढ़ेगा, राज्य में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी बारिश भी हो सकती है।

हैदराबाद और तेलंगाना के दूसरे हिस्सों में छिटपुट बारिश हो सकती है, साथ ही आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। हवा की रफ्तार 30-40 किमी/घंटा हो सकती है और झोंके 50 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं।

मंगलवार को बेंगलुरु में छिटपुट बारिश होने की संभावना है, क्योंकि दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में आम तौर पर हल्की लेकिन लगातार बारिश का दौर जारी है।

चेन्नई और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में 2 सितंबर तक छिटपुट बारिश हो सकती है, साथ ही आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। हवा की रफ्तार 40-50 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है और कुछ इलाकों में हवा के झोंके और भी तेज हो सकते हैं।

मध्य और पूर्वी भारत में भारी बारिश का दायरा बढ़ा

मंगलवार को सबसे ज्यादा चिंता ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश को लेकर है। IMD ने इन इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 5 सितंबर तक बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं, छत्तीसगढ़ पर खास तौर पर ज्यादा खतरा है, क्योंकि वहां 1 सितंबर को कहीं-कहीं बहुत ज्यादा बारिश होने का अनुमान है।

भारी बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव हो सकता है, निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है और संवेदनशील जगहों पर सड़क व रेल यातायात में रुकावट आ सकती है। IMD ने अगले 24 घंटों में छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ (flash floods) का कम से मध्यम खतरा भी बताया है।

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Nepal Flood: कैलाश मानसरोवर गए 21 भारतीयों की जान एक साड़ी ने बचाई! नेपाल में जल प्रलय के बीच इस कपल ने किया गजब का रेस्क्यू

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज बहाव में कई घर, सड़कें और पुल बह गए। वहीं बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई और कई लोग लापता हैं। नेपाल में आए इस विनाशकारी बाढ़ में तमिलनाडु से गए 21 तीर्थयात्रियों भी फंसे हुए थे। वहीं इस मुसीबत के समय में एक कपल की समझदारी ने कई लोगों को जान बचाई। नेपाल में अचानक आई बाढ़ में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री तिमुरे इलाके के पास फंस गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी दौरान एक कपल ने सूझबूझ दिखाते हुए साड़ी की मदद से महिलाओं को सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। महिलाओं को कीचड़ भरी और खड़ी ढलान से ऊपर खींचने के लिए साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया गया। इस मुश्किल वक्त में कपड़े के एक साधारण टुकड़े ने लोगों को सुरक्षित निकलने में बड़ी मदद की।

कैसे बची जान

26 अगस्त को माउंट कैलाश की यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री नेपाल के तिमुरे इलाके के पास फंस गए। इस दौरान भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड की स्थिति बन गई। उनकी गाड़ी एक सुरक्षित जगह पर रुक गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आसपास पानी और मलबा तेजी से बह रहा था, जिसके बाद सभी यात्री गाड़ी से बाहर निकलकर सुरक्षित ऊंचाई पर जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन कीचड़ और फिसलन की वजह से पहाड़ी पर चढ़ना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा था।

साड़ी से कैसे की मदद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझाली किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गए, लेकिन उन्होंने नीचे फंसी दूसरी महिलाओं को मुश्किल में देखा तो उनकी मदद करने का फैसला किया। पूंगुझाली ने अपना स्वेटर पहना, साड़ी उतारी और उसे नीचे की ओर पहुंचाया। महिलाओं ने साड़ी और वहां मौजूद लोहे की केबल का सहारा लिया, जबकि ऊपर मौजूद लोगों ने उन्हें धीरे-धीरे खींचकर सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। इस तरह साड़ी ने मुश्किल हालात में फंसे तीर्थयात्रियों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

दो दिनों तक रहा काफी मुश्किल

बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड के बाद तीर्थयात्रियों को करीब दो दिनों तक काफी मुश्किल हालात में रहना पड़ा। इस दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें थोड़ा-बहुत राशन और पीने का पानी उपलब्ध कराया, जिससे उन्होंने किसी तरह समय बिताया। वहीं, अधिकारी लगातार उनके संपर्क में रहे। बाद में भारतीय दूतावास, नेपाल आर्मी और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और फंसे हुए लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाने की व्यवस्था की।

अब तक 42 हजार से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। सोमवार तक इस आपदा में 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार अलग-अलग इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और गोरखा समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान अभी भी जारी है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है।

Nepal Flood: 600 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता…तबाही के बीच नेपाल में अब भी मंडरा रहा सैलाब का खतरा

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इस आपदा में अबतक मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 पहुंच गई है। वहीं 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।  इसमें 320 भारतीय भी शामिल है। हालात को देखते हुए बचाव और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर बनी अस्थिर बैरियर झीलों की वजह से दुबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी हो रही है।

नेपाल में बाढ़ का खतरा

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भयानक आपदा की शुरुआत ग्लेशियर के अचानक टूटने और ढहने से हुई। इसके बाद हिमालय से निकलने वाली नदियों में बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबा बहने लगा, जिसने निचले इलाकों में तबाही मचा दी। इस तेज बहाव ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया।

रोकना पड़ा बचाव काम

शुक्रवार को पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया। मलबे से बनी एक झील का पानी लहेंडे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बढ़ रहा था। वहीं, तिब्बत की तरफ बांध टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने बचाव दलों को तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी। खतरा कम होने और हालात सुधरने के बाद नेपाल में बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया। चीन ने भी ग्यिरोंग इलाके में कुछ समय के लिए राहत कार्य रोका था। बाद में चीन के सरकारी चैनल CCTV ने हालात सामान्य होने की जानकारी दी, जिसके बाद बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।

नेपाल में अभी भी बाढ़ का खतरा

नेपाल में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों की नजर पहाड़ी इलाके में बनी दो बैरियर झीलों पर बनी हुई है, क्योंकि इनमें जमा पानी किसी भी समय नीचे की ओर बह सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक झील का आकार लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और पानी बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। इससे दबाव बढ़ने और दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। वहीं, चीनी एक्सपर्ट ने भी आगाह किया है कि क्षेत्र में मौजूद 100 से अधिक ग्लेशियल झीलें आने वाले समय में खतरा पैदा कर सकती हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जो भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा त्रिशूली-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, चीन की ओर से 149 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ करीब 400 चीनी नागरिक चीन में सुरक्षित जगहों पर हैं और उन्हें वहां से निकालने में भारतीय दूतावास मदद कर रहा है।

अब तक कितने भारतीय लापता

बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था खराब होने से करीब 320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस आपदा में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा कई ट्रेकर्स और तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने अपनी लापता लोगों की सूची में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारियों को शामिल किया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

Nepal flash floods: नेपाल पर फिर मंडराया विनाशकारी बाढ़ का खतरा! तिब्बत में झील का बांध टूटा, नेपाली पुलिस ने जारी किया अलर्ट

Nepal flash floods alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस सप्ताह के शुरु में नेपाल में जो स्थान अचानक आई बाढ़ की चपेट में आया था वहां जलस्तर बढ़ने के बाद नेपाल प्रशासन ने एक बार फिर बाढ़ की चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी शुक्रवार (28 अगस्त) को जारी की गई। अधिकारियों ने इलाके के लोगों और बचाव कर्मियों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। नेपाल के त्रिशूली में पुलिस अधिकारी पी. चौधरी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि बचाव कार्य रोक दिए गए हैं

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा के पास पहले आई प्राकृतिक आपदा से जमा हुए मलबे के कारण बनी एक झील का पानी शुक्रवार (28 अगस्त) को बढ़कर बहने लगा। इसके बाद नेपाली अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में मौजूद रेस्क्यू टीमों और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया।

नेपाल पुलिस ने तत्काल अलर्ट जारी करते हुए बताया कि उसे सूचना मिली है कि तिब्बत की ओर पानी रोकने वाला एक नेचुरल बैरियर (Natural Barrier) टूट गया है। इस खबर के बाद पहले से बाढ़ की मार झेल रहे इलाकों में एक बार फिर खतरे की स्थिति बन गई है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि उसी स्थान पर जलस्तर बढ़ने से इलाके में एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

कीचड़ वाले पानी का स्तर बढ़ा

यह चेतावनी बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद जारी की गई है। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है और बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्राधिकरण ने एक नए नोटिस में कहा, “जिस जगह पर अचानक बाढ़ आई थी वहां कीचड़ वाले पानी का स्तर बढ़ गया है और इलाके में फिर से बाढ़ आने का खतरा है।”

NDRRMA ने खोज एवं बचाव अभियान में शामिल लोगों और अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी एवं त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से कहा है कि वे बहुत सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने भी अलर्ट जारी किया है।

तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूटा

नेपाल पुलिस ने Xपर एक पोस्ट में कहा, “ऐसी सूचना है कि तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूट गया है।” नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार को नेपाल-चीन सीमा के पास एक नयी झील बनने के बाद भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में बाढ़ के नए खतरे की चेतावनी दी थी।

चीनी अधिकारियों ने नेपाल को बताया था कि झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया है और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी आ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। यह झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये नदियां तिब्बत से निकलती हैं और भोटे कोशी नदी की सहायक नदियों के तौर पर नेपाल में बहती हैं।

दो दिन पहले तबाही, अब फिर नया खतरा!

यह नया संकट उस विनाशकारी घटना के महज दो दिन बाद सामने आया है, जब हिमालयी सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के ढहने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस आपदा के दौरान बड़ी मात्रा में चट्टान, मिट्टी, बर्फ और अन्य मलबा जमा हो गया था। इसी मलबे के कारण ऊपरी इलाके में एक झील जैसी संरचना बन गई। लगातार पानी जमा होने के कारण शुक्रवार को यह झील ओवरफ्लो होने लगी। इससे उन इलाकों पर फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जो बुधवार की फ्लैश फ्लड में पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।

25 लाख घन मीटर से ज्यादा हुआ झील में पानी

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार तक झील में पानी की मात्रा 25 लाख घन मीटर से अधिक हो चुकी थी। इससे एक दिन पहले इंजीनियरिंग टीम ने झील में करीब 15 से 20 लाख घन मीटर पानी होने का अनुमान लगाया था। यानी बहुत कम समय में झील में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ी, जिससे अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई। अगर इस तरह बनी झील का प्राकृतिक या मलबे से बना बांध अचानक टूटता है, तो बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से पहुंच सकता है। इससे पहले से प्रभावित इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

रेस्क्यू ऑपरेशन भी करना पड़ा अस्थायी रूप से बंद

झील से जुड़े इस नए खतरे के कारण प्रभावित क्षेत्र में चल रहा बचाव अभियान भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। सुरक्षा को देखते हुए रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम वाले क्षेत्रों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों को संभावित बाढ़ की चपेट में आने से बचाना और स्थिति पर लगातार नजर रखना है।

नेपाल को चीन से मिली झील टूटने की सूचना

हालांकि, नेपाली अधिकारियों ने शुरुआत में यह स्पष्ट किया कि झील के पूरी तरह टूटने या फटने की सूचना की नेपाल की तरफ से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी। रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय के सहायक मुख्य जिला अधिकारी और सूचना अधिकारी द्रुबा प्रसाद अधिकारी के मुताबिक, नेपाली अधिकारियों को चीनी अधिकारियों की ओर से इस संबंध में जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से सूचना मिली है कि एक झील टूट सकती है। लेकिन नेपाली पक्ष अभी तक इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाया है।

प्रभावित क्षेत्र में बढ़ी चिंता

लगातार दो प्राकृतिक आपदाओं के बाद सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों और राहत-बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है। पहले बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी थे। लेकिन अब मलबे से बनी झील के ओवरफ्लो होने की खबर ने एक और संभावित बाढ़ की आशंका पैदा कर दी है। अधिकारियों की नजर झील में पानी के स्तर और प्राकृतिक अवरोध की स्थिति पर बनी हुई है।

स्थिति बिगड़ने की स्थिति में संवेदनशील इलाकों से लोगों को और अधिक सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। यानी दो दिन पहले आई तबाही के बाद नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में संकट अभी टला नहीं है। मलबे से बनी झील में तेजी से बढ़ता पानी और उसके ओवरफ्लो होने की स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से मची तबाही, किश्तवाड़ में फ्लैश फ्लड, 3 जिलों के स्कूल बंद

जम्मू-कश्मीर के चेनाब घाटी क्षेत्र में शनिवार तड़के हुई तेज बारिश और चत्रू इलाके में बादल फटने से हालात बिगड़ गए। अचानक आई बाढ़ के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों के सभी स्कूल बंद कर दिए। अधिकारियों के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे चत्रू इलाके में बादल फटा। इसके बाद तेज पानी के साथ कीचड़, पत्थर और मलबा बाजार में आ गया, जिससे मुख्य बाजार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ की वजह से किश्तवाड़-चत्रू-सिंथन राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो गया, जिससे लोगों की आवाजाही रुक गई।

फिलहाल किसी के घायल होने या मौत की सूचना नहीं है। हालांकि, बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। कई घरों और दुकानों में पानी भर गया, जबकि नाले के किनारे खड़ी कम से कम दो गाड़ियां तेज बहाव में बह गईं।

बाढ़ से आकलन का किया जा रहा है नुकसान 

अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन प्रभावित इलाकों का सर्वे कर रहा है, ताकि नुकसान का सही पता लगाया जा सके। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन दुकानदारों और कारोबारियों को इस आपदा में नुकसान हुआ है, उन्हें सरकार के राहत नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर हालात की जानकारी ली और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। जितेंद्र सिंह ने पिछले साल चसोती में बादल फटने की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें 63 लोगों की जान चली गई थी। इनमें ज्यादातर श्रद्धालु थे। उन्होंने कहा कि उस हादसे के बाद आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत किया गया है। अब किश्तवाड़ और मचैल में समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा, पैडर इलाके में एक ऑटोमैटिक मौसम केंद्र भी स्थापित किया गया है, ताकि खराब मौसम की सटीक जानकारी समय पर मिल सके और राहत-बचाव कार्य तेजी से किए जा सकें।

 बंद हैं सभी स्कूल 

एहतियात के तौर पर प्रशासन ने किश्तवाड़ जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल पूरे दिन बंद रखने का फैसला किया। भारी बारिश, फिसलन भरी सड़कें, भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया। वहीं, पड़ोसी डोडा और रामबन जिलों में भी स्कूल बंद रहे और छात्रों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए गए। लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटना से पूरे चेनाब घाटी क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगह संपत्ति को नुकसान पहुंचा, जबकि सड़कें बंद होने से यातायात भी ठप हो गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रशासन के अनुसार इस घटना में किसी की जान नहीं गई है।