Nepal Flood Alert: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, दारचुला में लैंडस्लाइड से चौलानी नदी का रास्ता रुका; हाई अलर्ट पर प्रशासन

Nepal Flood: नेपाल 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि अब एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। नेपाल के दारचुला जिले में बड़े लैंडस्लाइड के बाद चौलानी नदी का बहाव कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने अचानक पानी बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने को कहा है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के पास जाने से बचें और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित जगह पर चले जाएं।

भट्टर इलाके में हुआ लैंडस्लाइड

नेपाल के दारचुला जिले के अपी हिमाल रूरल म्युनिसिपैलिटी के भट्टर इलाके में लैंडस्लाइड की वजह से बड़ी मात्रा में मलबा चौलानी नदी में जा गिरा है। इससे नदी का पानी कुछ समय के लिए रुक गया है। प्रशासन को आशंका है कि अगर आगे और लैंडस्लाइड हुआ तो नदी का रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है। ऐसे में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। प्रशासन ने चौलानी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सुरक्षा कर्मियों को भी संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है, ताकि लोगों को समय पर जानकारी दी जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

प्रशासन रखें है नजर

सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है। प्रशासन ने बाढ़ या किसी अन्य आपदा की स्थिति में लोगों की मदद के लिए इमरजेंसी फोन नंबर भी जारी किए हैं। आर्म्ड पुलिस फोर्स के मुताबिक, फिलहाल चौलानी नदी का पानी नॉर्मल लेवल पर बह रहा है। इसके बावजूद सुरक्षा टीम को बलांच इलाके में तैनात किया गया है, ताकि नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और खतरा बढ़ने पर आसपास के लोगों को समय रहते जानकारी दी जा सके।

प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव काम जारी

चौलानी नदी को चमेलिया नदी के नाम से भी जाना जाता है। यह अपी हिमाल क्षेत्र से निकलकर आगे महाकाली नदी में जाकर मिलती है, जो नेपाल और भारत की सीमा का हिस्सा है। नेपाल के कई हिस्से पहले से ही बाढ़ और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित हैं। हाल की बारिश और बाढ़ के कारण कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और जान-माल का भी नुकसान हुआ है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम अभी जारी है। ऐसे में चौलानी नदी के बहाव में आई रुकावट ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर फिर से तेज बारिश होती है तो नदी का पानी अचानक बढ़ सकता है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम में की छड़ी पूजा, प्रदेशवासियों के लिए मांगी सुख-समृद्धि

सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम में की छड़ी पूजा, प्रदेशवासियों के लिए मांगी सुख-समृद्धि

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को उज्जैन स्थित वाल्मीकि धाम आश्रम पहुंचे। उन्होंने भुजरिया पर्व के अवसर पर यहां विधि-विधान से छड़ी पूजन भी किया। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की और शुभकामनाएं दीं। 

 

इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आज भुजरिया पर्व के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित बाबा महाकाल की नगरी से भगवान जाहरवीर गोगादेव जी महाराज के ध्वज-चिह्न की शोभायात्रा निकलेगी। उज्जैन की पावन धरती से पूरे देश में सामाजिक समरसता और एकता का संदेश जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज हम अपने गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को पुनः जीवंत कर रहे हैं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और इसके साथ ही आध्यात्मिक चेतना का भी विस्तार हो रहा है। भुजरिया पर्व हमारी लोक परंपराओं, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मेरी ओर से समस्त प्रदेशवासियों को भुजरिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए, यही कामना है।

अक्षय खन्ना शादी और बच्चों को ‘लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव’ मानते हैं, बोले- ‘मैं अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं’

मशहूर स्टार अक्षय खन्ना ने खुलकर बताया है कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की। उनका कहना है कि बात कमिटमेंट की नहीं, बल्कि शादी के बाद जैसी ज़िंदगी जीनी पड़ती है, उसकी है। 2019 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा था कि उन्हें अपनी पर्सनल ज़िंदगी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना पसंद है और वे इसे छोड़ना नहीं चाहते।

अक्षय खन्ना ने बताया कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की

जब अक्षय से पूछा गया कि क्या वे भविष्य में शादी करने के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे उस तरह की जिंदगी के लिए सही हैं। उन्होंने कहा कि शादी का मतलब होगा अपनी मौजूदा जीवनशैली में बड़े बदलाव करना और अपनी जिंदगी का कंट्रोल किसी और के साथ शेयर करना।

“मैं खुद को शादी करते हुए नहीं देखता, मैं शादी के लिए सही इंसान नहीं हूं। मैं उस तरह की ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। यह एक कमिटमेंट है, लेकिन जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव भी है। शादी सब कुछ बदल देती है। मैं अपनी ज़िंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं। जब आप किसी और के साथ अपनी ज़िंदगी शेयर करते हैं, तो आपका पूरा कंट्रोल नहीं रहता। आपको बहुत सारा कंट्रोल छोड़ना पड़ता है। आप एक-दूसरे की ज़िंदगी शेयर करते हैं।”

एक्टर से यह भी पूछा गया कि क्या शादी का फैसला उनके निजी स्वभाव की वजह से लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके इस फैसले के पीछे कोई खास घटना या वजह नहीं थी और वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं, बचपन से ही।

उन्होंने बच्चे गोद लेने की बात भी खारिज कर दी

अक्षय से पूछा गया कि अगर वे शादी नहीं करते हैं तो क्या वे बच्चे गोद लेने के बारे में सोचेंगे। उन्होंने वैसा ही जवाब दिया, यह कहते हुए कि वे बच्चों की परवरिश के साथ आने वाली जीवनशैली में बदलाव भी नहीं चाहते। “मैं उस ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। अपनी ज़िंदगी शेयर करने के लिए। चाहे शादी हो या बच्चे। वह भी आपकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल देता है।

आपके लिए जो चीजें ज़रूरी होती हैं, वे कम जरूरी हो जाती हैं, क्योंकि बच्चा सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। उस तरह के बदलाव ज़िंदगी में आते हैं… और अपनी ज़िंदगी में उस तरह के बदलाव करना मैं नहीं चाहता। मैं समझौता करने को तैयार नहीं हूं। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मैं ऐसा करने को तैयार होऊंगा।”

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के बाद, अक्षय खन्ना ‘इक्का’ में नज़र आए। उनका अगला प्रोजेक्ट ‘महाकाली’ है, जो प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स का हिस्सा है। अक्षय इसमें शुक्राचार्य का किरदार निभा रहे हैं और इसकी पहली झलक 24 अगस्त, 2026 को दिखाई जाएगी।

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

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कभी-कभी किसी छोटी-सी परेशानी का हल ऐसी जगह से मिल जाता है, जिसके बारे में हमने सोचा भी नहीं होता। उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने गए शुभांग बोरकर का जूता गूम गया। सामने 1000 से ज्यादा जूते चप्पल थे। ऐसे में उसके लिए अपना जूता खोजना बेहद मुश्किल भरा था। इस पर उसने AI की मदद से और कुछ ही देर में उसका जूता मिल भी गया।

 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो को Shubhang borkar नाम के शख्स ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में वो उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाहर दिखाई देने वाले जूतों के ढेर के बीच अपना जूता ढूंढने की कोशिश करते नजर आते हैं। यहां इतने ज्यादा जूते रखे हुए थे कि यह समझना मुश्किल था कि इनमें उनका जूता आखिर कौन सा है?

जूते की फोटो लेकर ChatGPT से मांगी मदद

शुभांग ने अपने जूतों की फोटो और जूतों के ढेर की तस्वीर ChatGPT के साथ शेयर की। उन्होंने AI को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह उज्जैन के महाकाल मंदिर आए हैं और बाहर रखे ढेर सारे जूतों में से अपना जूता पहचानना मुश्किल हो रहा है।

 

वीडियो के मुताबिक, ChatGPT ने जूतों की तस्वीर को देखकर उनसे कुछ सवाल पूछे। जूते के रंग, डिजाइन और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर AI ने तस्वीर में उनके जूते को पहचानने में मदद की। 

 

आमतौर पर लोग ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब जानने, लिखने-पढ़ने, जानकारी हासिल करने या किसी काम में मदद लेने के लिए करते हैं। बहरहाल जूता ढूंढने जैसे रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी हैरान हैं।

 

‘फूलों का तारों का…,’ गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

'फूलों का तारों का...,' गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवरा को प्रेम के अलग ही रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने मैहर जिले में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहनों को विख्यात गाना 'फूलों का तारों का सबका कहना है..,' सुनाया और उनके खातों में 2148 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस तरह राज्य की 1.25 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1500 रुपये के साथ-साथ राखी का 250 रुपये का शगुन भी मिला। 

इसके अलावा सीएम डॉ. मोहन यादव ने 256 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने लाड़ली बहनों पर पुष्प वर्षा भी की और हितग्राहियों को हितलाभ वितरिए किया। उन्होंने यहां कई विभागों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। दूसरी ओर, जनअभियान परिषद की सखियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विशाल राखी भेंट की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई घोषणाएं भी कीं। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार हर महीने बहनों को लाड़ली बहना योजना की राशि प्रदान करती है। राखी त्योहार तो साल में एक बार आता है, लेकिन हम हर महीने इस उत्सव को मनाते हैं। आज लाड़ली बहनों के प्रेम को देखकर, उनकी संख्या देखकर आनंद आ रहा है। मैहर मां शारदा का अद्भुत स्थान है। बड़े लड़ैया महुआ वाले, जिनकी मार सही न जाए, एक को मारे दो मर जाए, तीसरा धौंस खाए मर जाए। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मां शारदा के अनन्य भक्त आला की अमरता की कहानी आज भी जीवंत है। जब तक आला दर्शन नहीं कर लेते, मां को भी आनंद नहीं आता। सनातन संस्कृति भी अपने आप में अद्भुत है।

उन्होंने कहा कि हमारे तीज-त्योहारों की वजह से हमारे कुटुम्ब जीवित हैं। हमारी संस्कृति में पूरी वसुधा को परिवार माना गया है। हम अपने पेड़-पौधे-नदी-पहाड़, सबको परिवार का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़ा है। पिछले साल आतंकवादियों ने माताओं-बहनों के सिंदूर पर हाथ डालने का प्रयास किया, उस वक्त हमारे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना ने दुश्मन के घर में घुसकर मारने का रिकॉर्ड बनाया। हमारी सेना हर तरह से दुश्मन से निपटने में सक्षम है।

बहनों को दिया अतिरिक्त उपहार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज मेरे दोनों हाथों में प्रेम का धागा है। मैं सौभाग्यशाली हूं। आज मैं मन में क्या महसूस कर रहा हूं, बताना मुश्किल है। मेरी सरकार और आपका जो संबंध है, वो अद्भुत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग दुर्भावना रखते हैं। हम जब भी लाड़ली बहनों को योजना की राशि ट्रांसफर करते हैं, तब कांग्रेसी हमें टोकते हैं। कांग्रेसी कहते हैं कि लाड़ली बहनों के खातों में पैसे मत डालो, ये शराब पी जाती हैं। कांग्रेसियों को डूब मरना चाहिए। सीएम डॉ. मोहन ने बहनों से अपील की, कि कांग्रेस की इस बात को गांठ बांधकर रखना। जिस दिन चुनाव आए, उस दिन कांग्रेस को बताना कि उसने क्या अपराध किया है। उनका हिसाब चुकता करना। लाड़ली बहनों का अपमान कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि हमने चुनाव के पहले जो वादा किया और अभी तक हम महीने आपके खातों में राशि आ रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी एक बार जो वचन देती है, उसे निभाती है। आज मुझे वो गीत याद आ रहा है, 'फूलों का तारों का कहना है, सबका कहना है, एक हजार में मेरी बहना है….'। हमारी सरकार को 1.25 करोड़ बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। आज हमारी सरकार ने नियमित राशि के अलावा 250 रुपये अतिरिक्त सावन के महीने का उपहार दिया है। 

 

बहनें परिवार को बांधे रखती हैं-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से निवेदन किया कि ये राशि जब आपको मिले, तो अपने भाइयों को मिठाई खिलाना और टीका करना। मैं समझूंगा कि टीका मुझे लगा। मुझे आपका आशीर्वाद मिल गया। हमारी माताओं-बहनों में जो हिम्मत है, वो पुरुष में नहीं है। वे अपना परिवार छोड़कर अंजान परिवार को अपना भविष्य समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि एक बार विश्व हिंदू परिषद का सम्मेलन विदेश में हुआ। उस समय मार्गरेट थ्रेचर वहां की प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि भारत और लंदन में सबसे बड़ा अंतर कुटुम्ब परंपरा का है। आपके ऋषि-मुनियों ने परिवार की जो परंपरा खड़ी की है, इसकी धुरी माता है। माता अपने सारे बच्चों से जिस प्रकार प्रेम करती है, वह अद्भुत है। मां अपना पेट काटकर बच्चों की सारी मांग पूरी करती है। घर में भले कमाने वाला एक हो, लेकिन मां सबकी पूर्ति करती है। हमको खिलाते-खिलाते मां का पेट भर जाता है। यह संस्कृति केवल भारत में ही है। हमारी संस्कृति त्याग-परिवार की परंपरा को लेकर चलती है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार विकास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 के बाद महाकाल लोक का लोकार्पण किया। उससे हमारा पूरा जिला बदल गया। हमने देव स्थान को धार्मिक स्थल बनाने का फैसला किया है। हमारी सरकार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने का काम कर रही है। हमने फैसला किया है कि जो भी उद्योग बहनों को मौका देगा, वहां सरकार उसे प्रति बहन 5 हजार रुपये देगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के लिए स्लोगन है, सच्चा वादा पक्का काम-प्रेम से बोलो सीताराम। चित्रकूट में हमने 3 हजार करोड़ से ज्यादा के काम मंजूर किए हैं। अब मां मैहर के लोक के पहले फेज का भूमि-पूजन आज यहां हुआ है। कल कैबिनेट में हमने फैसला किया कि लाड़ली बहनों को आने वाले 5 साल तक राशि देंगे। बहनें इस राशि से सिलाई मशीन खरीदती हैं, ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। बहने इस राशि से परिवार की पूर्ति करती हैं। 

 

कांग्रेस को लिया आड़े हाथ-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहले नक्सलियों को खत्म किया, और अब नशा विरोधी अभियान चला रहे हैं। हमारी सरकार ने 19 धार्मिक शहरों में शराब की दुकानें बंद की हैं। भविष्य की पीढ़ियों को बचाने के लिए, हर तरह के नशे के खिलाफ लड़ने के लिए हमारी सरकार संकल्पबद्ध है। परिवार के परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आप बच्चों को पढ़ाओ-लिखाओ, बड़ा अधिकारी बनाओ, लेकिन नशे के मामले में उसे सावधान करो। उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि मां नर्मदा विंध्याचल पर्वत की तरह आ नहीं सकती है, उसे लाने के लिए नहर बनाई जा रही थी। जिस मशीन से नहर बन रही थी, वह कंपनी ही बंद हो गई। मशीनें खराब हो गईं। यह योजना बंद होने के कगार पर थी। लेकिन, हमने कहा कि खुशहाली के लिए इस इलाके में पानी आना जरूरी है। 2 हजार करोड़ की योजना 800 करोड़ से शुरू हुई। हमने कहा कि इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब वो नहर पूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र के हर गांव में नर्मदा का पानी पहुंचेगा। हमने फैसला किया कि किसानों को खाते पलटाने नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा आने वाली फसल के समय सरकार दिन में बिजली देगी। जिन-जिन गरीबों के मकान रह गए हैं, उनका मकान बनेगा। मैहर में कलेक्टर सहित 16 बड़े पदों पर बहने हैं। 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगर कांग्रेसी अनुचित आचरण नहीं करते, तो विधानसभा में भी बहनों के लिए 33 फीसदी का आरक्षण हो जाता। कांग्रेस को पता नहीं किस बात का डर है। अगर माताएं-बहनें लोकसभा-विधानसभा में आएंगी तो क्या गलत हो जाएगा।    

 

सीएम ने की ये प्रमुख घोषणाएं

– मैहर में 25 करोड़ की लागत से आधुनिक स्टेडियम बनेगा।

– लिलजी जलाशय का 50 करोड़ की लागत से नवीकरण किया जाएगा। 

– मैहर में बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा।

– मैहर में 5000 गौवंश क्षमता की बड़ी गौशाला बनेगी।

– मैहर में आईटीआई संस्थान बनेगा, स्कूलों का उन्नय किया जाएगा।

– आल्हा गायकों की समितियों को 25-25 हजार रुपए देने की घोषणा।

महाकाल के दरबार से खूबसूरत नजारों तक की सैर! IRCTC लाया 5 दिन का खास एयर टूर पैकेज

सितंबर 2026 में घूमने के साथ धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के लिए IRCTC का यह हवाई टूर पैकेज अच्छा ऑप्शन हो सकता है। 4 रात और 5 दिन के इस पैकेज में ट्रैवलर को मध्य प्रदेश के कई प्रसिद्ध शहरों और टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सैर कराई जाएगी। इसमें दार्शनिक स्थल और कुछ शहरों में घूमने का मौका मिलेगा। यात्रा में आने-जाने की व्यवस्था फ्लाइट से की गई है।

इस टूर में धार्मिक स्थलों के साथ ऐतिहासिक और खूबसूरत जगहों को भी शामिल किया गया है। ट्रैवलर को उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर समेत कई मंदिरों के दर्शन कराए जाएंगे। इसके अलावा कुछ प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर होगी। पैकेज में तीन सितारा होटल में ठहरने और खाने की व्यवस्था भी शामिल है, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान रहने और खाने की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

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टूरिस्ट डेस्टिनेशन

इस 5 दिन के टूर में ट्रैवलर को मध्य प्रदेश की कई पॉपुलर डेस्टिनेशन पर ले जाया जाएगा। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर, चिंतामन गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर और मंगलनाथ मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। इसके बाद ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन होंगे। महेश्वर में अहिल्याबाई किला और महल, अखिलेश्वर मंदिर, सहस्त्रधारा और नर्मदा घाट घूमने का मौका मिलेगा। वहीं मांडू में जहाज महल और हिंडोला महल की सैर कराई जाएगी। यात्रा के दौरान इंदौर में पितृ पर्वत और गणपति मंदिर खजराना भी घूमने का मौका मिलेगा।

 

 

 

फ्लाइट और होटल फैसिलिटीज

IRCTC के इस पैकेज में ट्रैवलर के आने-जाने की सुविधा फ्लाइट से रखी गई है। यात्रा की शुरुआत लखनऊ से इंदौर के लिए होगी और वापसी में इंदौर से लखनऊ लाया जाएगा। यानी ट्रैवलर को लंबी ट्रेन यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी। पैकेज में थ्री स्टार होटल में ठहरने की व्यवस्था भी शामिल है। इसके साथ यात्रा में खाने की फैसिलिटी दी जाएगी, जिससे ट्रैवलर को अलग से होटल और भोजन की व्यवस्था करने की परेशानी कम होगी।

 

 

 

पैकेज की कीमत

इस टूर पैकेज की कीमत अलग-अलग तरीके से रखी गई है। अगर कोई सोलो ट्रैवलर पैकेज लेता है, तो प्रति व्यक्ति 48,500 रुपये किराया देना होगा। दो लोग एक साथ पैकेज लेते हैं, तो प्रति व्यक्ति 42,500 रुपये का खर्च आएगा। वहीं तीन लोगों के साथ ठहरने पर प्रति व्यक्ति 40,300 रुपये किराया होगा। माता-पिता के साथ बच्चे के ठहरने पर बेड सहित 36,100 रुपये और बिना बेड 19,500 रुपये प्रति बच्चे का पैकेज मूल्य रखा गया है।

 

 

ऐसे करें बुकिंग

IRCTC के अनुसार इस टूर की बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के बेस पर की जाएगी। ट्रैवलर अपनी बुकिंग के लिए पर्यटन भवन, गोमती नगर, लखनऊ में IRCTC ऑफिस से कांटेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग IRCTC टूरिज्म की वेबसाइट पर की जा सकती है। पैकेज से जुड़ी ज्यादा जानकारी या बुकिंग के लिए 8287930912, 8287930902, 9236391909 और 9236391911 नंबरों पर कांटेक्ट किया जा सकता है।

भारत से सीमा विवाद के बीच नेपाल का बड़ा कबूलनामा! क्या गायब हो गए 210 साल पुरानी सुगौली संधि के असली कागज?

India-Nepal Sugauli Treaty: भारत और नेपाल के बीच जारी सीमा विवाद के बीच नेपाल सरकार की ओर से एक हैरान करने वाला कबूलनामा सामने आया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में स्वीकार किया है कि सरकार को इस बात की पक्की जानकारी नहीं है कि उसके पास 1816 की ऐतिहासिक सुगौली संधि और 1950 की नेपाल-भारत संधि के मूल दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। ब्रिटिश भारत के साथ नेपाल की सीमा तय करने वाली यह संधि दोनों देशों के सीमांकन का मुख्य आधार रही है।

नेपाल की प्रतिनिधि सभा में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार के पास 1816 की संधि से जुड़े दस्तावेजों के रिकॉर्ड तो मौजूद हैं, लेकिन उनमें से कोई आधिकारिक मूल संधि पत्र है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

नेपाल की संसद में विदेश मंत्री बोले- नेशनल आर्काइव्स में हैं रिकॉर्ड, पर मूल दस्तावेज स्पष्ट नहीं

विदेश मंत्री खनाल ने स्पष्ट किया कि वैसे तो देश के नेशनल आर्काइव्स में कुछ कागजात संरक्षित हैं लेकिन तमाम सरकारी विभागों में की गई व्यापक खोजबीन के बाद भी हस्ताक्षर युक्त स्पष्ट और मूल संधि पत्र का पता नहीं चल सका है। संसद में बोलते हुए खनाल ने कहा कि नेपाल सरकार के पास इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि हमारे पास आधिकारिक संधि दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। रिकॉर्ड दिखाते हैं कि कुछ संधियों से संबंधित दस्तावेज नेशनल आर्काइव्स में रखे गए हैं। लेकिन क्या वे वास्तव में आधिकारिक और मूल संधियां हैं, इसे लेकर हमारे पास स्पष्ट जानकारी नहीं है।

आपको बता दें कि 1814-1816 के एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद नेपाल साम्राज्य और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1816 में सुगौली की संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि ने नेपाल के क्षेत्र को काफी हद तक कम कर दिया था और इसकी आधुनिक सीमाओं की रूपरेखा तय की थी।

लिपुलेख दर्रे पर भारत-चीन व्यापार और नए विवाद की वजह

नेपाल सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच व्यापार फिर से शुरू होने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नेपाल ने इस व्यापार मार्ग का विरोध करते हुए दावा किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

मौजूदा सीमा विवाद मुख्य रूप से काली (या महाकाली) नदी की व्याख्या पर केंद्रित है, जिसे 1816 की सुगौली संधि ने नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में स्थापित किया था। नेपाल का तर्क है कि इस नदी का उद्गम लिंपियाधुरा से होता है। इस व्याख्या के आधार पर लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा नदी के पूर्व में स्थित हैं और इसलिए वे नेपाल का हिस्सा हैं।

भारत ने नेपाल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से उसके प्रशासनिक नियंत्रण में रहा है। भारत ने अपने रुख के समर्थन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और नक्शों का भी हवाला दिया है।

गायब दस्तावेजों की पुरानी पहेली: 1950 की संधि के कागजात भी नदारद

मूल संधियों के गायब होने या न मिलने की यह अनिश्चितता नई नहीं है। साल 2016 में भी नेपाल को तब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था जब दोनों देशों के बीच बने प्रबुद्ध व्यक्ति समूह द्वारा 1950 की नेपाल-भारत शांति और मित्रता संधि की समीक्षा या उसे बदलने पर विचार किया जा रहा था। उस समय भी नेपाल सरकार 1950 की संधि की मूल प्रति खोजने में असमर्थ रही थी।

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद हुई एक संसदीय जांच में सरकारी दफ्तरों, अभिलेखागारों, संग्रहालयों और दूसरे भंडारों में काफी तलाशी ली गई थी, लेकिन सुगौली संधि और 1950 की संधि की मूल प्रतियां नहीं मिल सकी थीं।

इसके बाद साल 2019 में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने भी स्वीकार किया था कि नेपाल के पास दोनों समझौतों की प्रतियां (कॉपी) तो हैं लेकिन वे मूल प्रतियां हैं या नहीं, यह स्थापित नहीं किया जा सका है। तब ज्ञावली ने कहा था कि हमारे पास दोनों संधियां मौजूद हैं, लेकिन हमें फोरेंसिक रूप से यह सत्यापित करना होगा कि ये प्रतियां ओरिजनल हैं या नहीं।

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Palamu Jyotirlinga Temple: झारखंड के इस मंदिर में एक साथ कर सकते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, उज्जैन की मिट्टी से बनी है महाकाल की प्रतिमूर्ति

Palamu Jyotirlinga Temple: शिव भक्तों के लिए महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा बेहद पावन और पवित्र यात्रा है। लेकिन, इनमें से कुछ बेहद दुर्गम स्थानों पर स्थित हैं, जहां हर किसी के लिए पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद, हर शिवभक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा अपने मन में जरूर रखता है। शायद झारखंड के पलामू स्थिति भगवती भवन मंदिर का निर्माण भी इसी सोच के साथ किया गया होगा। इस मंदिर के परिसर में एक ही छत के नीचे सभी 12 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। यानी श्रद्धालु एक यात्रा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का पुण्य पा सकते हैं।

उज्जैन की मिट्टी से बनी महाकाल की प्रतिमूर्ति

अपनी इस अनोखी विशेषता के कारण यह शिवभक्तों के बीच दिलचस्पी का केंद्र है। खासतौर से उन भक्तों के लिए, जो कम भीड़-भाड़ वाली धार्मिक जगहों पर घूमना पसंद करते हैं। भगवती भवन मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों प्रतिरूप होने के साथ ही यहां स्थित महाकाल की प्रतिमूर्ति भी है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित ने लोकल18 को बताया कि यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति को उज्जैन से लाई गई मिट्टी से बनाया गया है। पारंपरिक रूप से, भक्त 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करते हैं। हालांकि, भगवती भवन में, इन पवित्र रूपों का अनुभव एक ही परिसर में किया जा सकता है।

प्रकृति की गोद में बसा है झारखंड का पलामु

शिव भक्तों के लिए, भगवती भवन एक अलग तरह का तीर्थ अनुभव देता है। कई राज्यों में घूमने के बजाय, श्रद्धालु एक ही जगह पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। पलामू अपने जंगलों, जंगली जानवरों और खूबसूरत नजारों के लिए ज्यादा जाना जाता है। हालांकि इस इलाके में कई धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें भी हैं। जिला प्रशासन के अथक प्रयासोंक की बदौलत यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक जगहों के साथ-साथ अन्य टूरिस्ट आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

कैसे पहुंचें पलामु

पलामू का जिला हेडक्वार्टर मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) है, जो सड़क और रेल से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सबसे पास का एयरपोर्ट रांची में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, जो मेदिनीनगर से लगभग 165 km दूर है।

ट्रेन से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए डाल्टनगंज रेलवे स्टेशन जिले का मुख्य रेलवे स्टेशन है। यहां पर रेगुलर पैसेंजर और एक्सप्रेस सर्विस हैं, जिनमें नई दिल्ली, कोलकाता, रांची और पटना जैसे शहरों के लिए सीधे ट्रेनें शामिल हैं।

पलामू रांची, पटना, वाराणसी और आस-पास के दूसरे शहरों से सड़क के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि डाल्टनगंज रांची से लगभग 165 km दूर है, और रांची और झारखंड के दूसरे बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों से रेगुलर बस सर्विस उपलब्ध हैं।

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