अर्जुन रामपाल ने ‘अर्जुन नागा’ की शूटिंग शुरू की

अभिनेता अर्जुन रामपाल ने अपनी अगली फिल्म ‘अर्जुन नागा’ की शूटिंग शुरू कर दी है। अनिल शर्मा के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में रामपाल खलनायक की भूमिका में नजर आएंगे। ‘राजनीति’, ‘डॉन’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके रामपाल ने शूटिंग शुरू होने पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सोमवार को एक तस्वीर साझा की।

तस्वीर में अभिनेता जीन्स और टी-शर्ट पहने फिल्म के पोस्टर वाले गेट के सामने खड़े नजर आ रहे हैं, साथ ही तस्वीर में लिखा है अनिल शर्मा और उत्कर्ष शर्मा के साथ ‘अर्जुन नागा’ के पहले दिन की शुरुआत। ‘अर्जुन नागा’ शुरू।

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फिल्म में ‘द राजा साब’ की अभिनेत्री निधि अग्रवाल और निर्देशक के बेटे उत्कर्ष शर्मा सहित अन्य कलाकार भी हैं। इससे पहले अनिल और उत्कर्ष 2023 में रिलीज हुई ‘गदर 2’ और 2024 की फिल्म ‘वनवास’ में साथ काम कर चुके हैं।

‘अर्जुन नागा’ के अलावा रामपाल प्राइम वीडियो की सीरीज ‘बिलिनेयर’ में भी नजर आएंगे। हंसल मेहता और रॉबी ग्रेवाल के निर्देशन में बन रही इस सीरीज में वह एक प्रभावशाली कारोबारी की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने इसकी शूटिंग भी शुरू कर दी है।

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प्रधानमंत्री जीत तय मानता है, जनता धोखा देती है!

यह दिल्ली की सत्ता की पुरानी बीमारी है। सत्ता में बैठ कर प्रधानमंत्री को धीरे-धीरे विश्वास होने लगता है कि उसने भारत को समझ लिया है। जनता को पढ़ लिया है। किसे राशन चाहिए, किसे आरक्षण, किस जाति को क्या चाहिए, किस धर्म को किससे डराना है, किस लाभार्थी को कितने रुपये देने हैं और किस नारे से चुनाव जीतना है, इसका हिंसाब लगातार पकाया जाता है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह तो यों भी चौबीसों घंटे हिसाब बनाते है। इनकी सर्वे टीम, लगातार काम करती है। पार्टी, संघ संगठन अलग से सर्वे, फीडबैक देते है। दरबारी पूजा करते ही है तो प्रचारतंत्र से पूरे देश को मीडिया, सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम चौबीसों घंटे, सातों दिन खुद मोदी बताते है कि वे लोगों की भलाई के लिए कैसे दीन-रात अपना खून सूखा रहे है!

जवाहरलाल नेहरू को छोडकर हर प्रधानमंत्री भारत के मतदाताओं के साथ इसी विश्वास में जीया है कि जब इतना कर रहे है तो लोग उन्हे बदले में उन्हे ही वोट देंगे। न कि लोहिया की भीड, जनसंघ के नारों और समाजवाद को कोसने वाले स्वतंत्र पार्टी के उधमियों को। बावजूद इसके नेहरू के बाद हर प्रधानमंत्री को जनता ने तब भी सत्ता से बेदखल किया जब वे शाईनिंग इंडिया जैसी बातों में झूमते-झूमाते हुए थे।

ऐसा इंदिरा गांधी के साथ हुआ। राजीव गांधी, नरसिंह राव के साथ हुआ तो अटलबिहारी वाजपेयी के साथ भी हुआ। फिर दस वर्ष की मनमोहन सिंह सरकार के साथ हुआ। वजह हर बार एक नहीं थी। कहीं आंदोलन था, कहीं भ्रष्टाचार मुद्दा था, कहीं विपक्ष एक हुआ, कहीं महंगाई और स्थानीय असंतोष था। लेकिन हर बड़ी चुनावी हार में एक समानता जरूर थी। सत्ता को अपने बनाए गणित पर चुनावी मतगणना तक भरोसा था कि वे जीत रहे है। और मुझे पता है सरकारी खुफिया एजेंसियां भी ऐसे ही हिसाब, ऐसे मुगालतों में रही है।

सोचें, इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में क्या बाकी छोड़ा था? विपक्ष जेल में, प्रेस पर सेंसरशिप, प्रशासन सरकार के हाथ और प्रधानमंत्री की सत्ता अपने चरम पर। मगर 1977 में जब चुनाव हुआ तो कांग्रेस 154 सीटों पर रह गई। वही लावारिस जनता पार्टी ने 295 सीटें जीती। स्वयं इंदिरा गांधी रायबरेली, संजय गांधी अमेठी हार गए। जिस सत्ता के सामने देश खामोश दिखाई देता था, उसी खामोशी ने मतपेटी में उसका फैसला किया।

और राजीव गांधी! दिसंबर 1984 में किसे कल्पना थी कि नौजवान प्रधानमंत्री का चक्रवर्ती जनादेश पांच वर्ष भी नहीं टिकेगा? उन्होने 1984-85 में 414 सीटें जीती थीं। 1989 में उनकी कांग्रेस 197 सीटों पर रह गई।

भारत में हर बडी चुनावी हार सरकार, सत्ता के हर तरह के दुरूपयोग, आंतक, चुनावी धांधलियों, शाईनिंग इंडिया जैसे ढिढोरों के बावजूद हुई है। सोचे, किसने सोचा शाईनिंग नेतृत्व, शाईनिंग इंडिया के बावजूद प्रधानमंत्री वाजपेयी 2004 में सोनिया गांधी के आगे हारेंगे? कोई माने या न माने अन्ना, केजरीवाल के आंदोलनों, अपनी भारी-भरकम वर्चुअल कैंपेनिंग के बावजूद नरेंद्र मोदी को भी भरोसा नहीं था कि हिंदीभाषी इलाके में उनकी आंधी जैसे चुनाव परिणाम होंगे!

आगे 2024 के चुनाव में जो हुआ वह सामान्य नहीं था। ध्यान रहे ये चुनाव अयोध्या में राममंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के बाद हुए थे। बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस उत्तरप्रदेश में भी कम सीटे मिली जहां रामजी का नगाड़ा घर-घर गूंजा था। भाजपा 303 से घटकर 240 सीटों पर सिमटी। गठबंधन से जरूर बहुमत बचा, लेकिन भाजपा अपना अकेला बहुमत तो खो बैठी थी।

तभी से नरेंद्र मोदी- अमित शाह मतदाताओं की सूचियों को सुधारने के नाम पर उन्हे कैसे मनमाफिक बनवाने के अभियान में जुटे है, इसके ढेरों किस्से, साक्ष्य अब जगजाहिर है। जीतने की ऐसी हठ से स्वभाविक सवाल है कि मोदी के रहते कुल मतदाताओं की संख्या में क्या संघ परिवार-भाजपा पचास प्रतिशत से ऊपर की संख्या वफादार वोटों, भक्तों की बनवा लेगै? आखिर इसके बिना तो लगातार चुनाव को गारंटीनुमा जीतना संभव नहीं है? क्या लोग ऐसा होने देंगे? गली-गली, घऱ-घर में किसी के नाम होने, किसी के कटे होने की वासत्विकताओं में क्या लोगों को जाहिर नहीं होगा कि वोटर लिस्ट की ऐसी गडबडी किसलिए? नतीजतन वही वही मौन सत्ता पलट क्रांति होगी जैसे इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ हुई थी।

मगर प्रधानमंत्री ऐसे नहीं सोचता। वह सत्ता है तो मुमकिन के विश्वास में जीता होता है।

ऐसा आत्मविश्वास मैंने लालू यादव के समय के बिहार में देखा था तो एनटी रामराव, वीपीसिंह (राजा ने बांधी गांठ, पिछड़ा पावे सौ में साठ)। या कांसीराम-मायावती का हुंकारा-जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। सोचे वीपीसिंह, मायवती, लालू-राबडी यादव का गणित आधारित चक्रवर्तीय शासन कितनी पीड़ी फला-फूंला?

पुराने नेताओं और नरेंद्र मोदी की गणित में एक बुनियादी फर्क है। नरेंद्र मोदी ने अजैविक, दैवीय जन्म के विश्वास में हिंदुओं में अपना भक्ति आंदोलन बनाया है। बावजूद इसके जरा गौर करे कि इन कथित भगवानजी को भी चुनाव आयोग के जरिए वोटरलिस्ट का पुर्नलेखन करवाना पड रहा है। उसी बूते तो भगवानजी को विश्वास है, संघ-भाजपा के सत्ताभोगियों की तैयारियां है कि 2047 तक तो उनका राज पक्का है। 2034 तक मोदी, 2034 से 2043 तक अमित शाह और 2043 -2047 के सौ वर्षीय भारत के युगप्रवर्तक प्रधानमंत्री होंगे योगी आदित्यनाथ! कल्पना करें तब तक एक नंबर बन चुके चीन के आगे भारत के नेतृत्वकर्ता के चेहरे पर।

हां, गांठ बांधे रखे मोदी है तो सब संभव है। दरअसल हजार साला गुलामी में जीया हुआ, धड़कता हुआ भक्त हिंदू ऐसे ही सोचा करता है। यही हिंदू राष्ट्र का सत्य है और भविष्य की खामोख्याली है।

इसलिए उन बातों, उन वीडियों को नहीं देखे जो दो अक्टूबर को मुंबई में नौजवानों के विशाल हूजुम में मौजूद है या दिल्ली में मौजूद था। नौजवान जंतर-मंतर पर बैठ कर भले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले या ज्ञानेश कुमार का। प्रदर्शन कॉकरोचों का हो, आम आदमी-वामपंथियों का हो या कांग्रेस-ममता बनर्जी और विपक्षी गठजोड़ का, इन सबका नमोदी- शाह पर रत्ती भर असर नहीं होना है!

नोट रखे भारत में सत्ता प्रदर्शन नहीं देखती। स़डक का गुस्सा नहीं समझती। सत्ता हमेशा अपने आंकड़े देखती होती है। दिल्ली की सत्ता की खूबी है जो प्रधानमंत्री और उसके अनुचरों को सौ टका विश्वास दिलाए रहती है कि आप प्रधानमंत्री नहीं, भारत भाग्य विधाता हैं। हम जनता के लिए इतना कुछ तो कर रहे हैं। भारत अब शाइनिंग इंडिया है। आप माईबाप, हुजूर सभी को रोटी खिला रहे हैं। राशन दे रहे है। घर दिया। शौचालय दिया। गैस दी। राशन दिया। खाते में पैसा दिया। रामजी की ऊंगली पकड़ उन्हे राममंदिर में प्रतिष्ठित किया। भारत का दुनिया में डंका बजा हुआ है। औरतें भी कह रही हैं, हमने नमक खाया है तो मोदीजी को ही वोट देंगे। इं

दिरा गांधी ने भी सब किया था। वाजपेयी, उनके साथी धुरंधरों, प्रमोद महाजन, वेंकेया, जेतली, सुषमा जैसे ढेरों नाम शाईनिंग इंडिया से देश गुंजाते हुए थे। ध्यान रहे दंगों के बाद की हिंदू राजनीति के पीक के बावजूद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने प्रदेश गुजरात में 26 सीटों में से 14 सीटे ही भाजपा को जीता पाए थे।

और हर बार वही कहानी। चुनावी मतगणना के दिन ही सत्ता को मालूम होता है अरे यह क्या! सो नोट रखे भारत का मतदाता भी कभी किसी प्रधानमंत्री की स्थायी संपत्ति नहीं हुआ। भक्तों की भी आस्था के भगवान समय अनुसार चुपचाप बदलते रहते है!

Aditya Dhar-Yami Gautam: आदित्य धर-यामी गौतम ने छोड़ा मुंबई, हिमाचल प्रदेश में शिफ्ट हुआ कपल!

Aditya Dhar-Yami Gautam: ‘फ्री प्रेस जर्नल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यामी गौतम धर और फिल्ममेकर आदित्य धर ने अपना स्थायी ठिकाना हिमाचल प्रदेश में बना लिया है। उन्होंने मुंबई की लगातार पब्लिक अटेंशन से दूर एक शांत जिंदगी चुनी है। यह कपल अब काम के सिलसिले में ही मुंबई आता जाता रहता है।

यामी गौतम और आदित्य धर का हिमाचल कनेक्शन

यामी के लिए हिमाचल प्रदेश लंबे समय से सिर्फ घूमने-फिरने की जगह से कहीं ज्यादा रहा है। शादी से पहले एक्ट्रेस ने मंडी के गोहर में 25 एकड़ जमीन पर बना 100 साल पुराना हेरिटेज घर खरीदा था, जो उनके परिवार और बचपन की यादों से गहराई से जुड़ा हुआ है। जून 2021 में वहां शादी करने के बाद यह प्रॉपर्टी कपल के लिए और भी खास हो गई। हिमाचल में उनका घर लकड़ी और पत्थर से बना है और इसके चारों ओर बगीचे हैं, जहां सेब, आलू, आलूबुखारा और अदरक उगाए जाते हैं।

खबरों के मुताबिक धर परिवार ने इस प्रॉपर्टी को किसी बड़े सेलिब्रिटी होम में बदलने के बजाय इसे सादा ही रखना पसंद किया है। वे फिल्मों पर काम न करने के दौरान लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं। बॉलीवुड के जाने-माने कपल्स में से एक होने के बावजूद, यामी और आदित्य अपनी पर्सनल जिंदगी को शायद ही कभी पब्लिक चर्चा का हिस्सा बनाते हैं। वे ज्यादातर फिल्म शूट, प्रमोशन और इंडस्ट्री के जरूरी इवेंट्स में ही नजर आते हैं।

‘धुरंधर’ के बाद आदित्य ने पब्लिक में अपनी मौजूदगी काफी कम रखी है। इस साल की शुरुआत में उन्हें मुख्य रूप से प्रोफेशनल कामों के सिलसिले में ही पब्लिक में देखा गया, जिसमें गुजरात के एकता नगर में हाल ही में हुआ नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह भी शामिल है, जहां उन्हें और यामी को ‘आर्टिकल 370’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिले। आदित्य को प्रोड्यूसर के तौर पर सम्मानित किया गया, जबकि यामी ने लीड एक्ट्रेस के तौर पर अपनी परफॉर्मेंस के लिए अवॉर्ड जीता।

मुंबई वाले घर का ‘धुरंधर’ से कनेक्शन है

हिमाचल प्रदेश में अपना स्थायी ठिकाना बनाने से पहले, यामी और आदित्य मुंबई के खार वेस्ट में एक बड़े किराए के अपार्टमेंट में रहते थे। आदित्य ने 2025 के आखिर में अपनी ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइजी के पहले हिस्से के प्रमोशन के दौरान उस पते के बारे में मजाक भी किया था। उस इवेंट में उन्होंने कहा-“मेरा घर चित्रकार धुरंधर मार्ग पर है। खबरों के मुताबिक यह अपार्टमेंट उस कपल ने लंबे समय के लिए किराए पर लिया था, हालांकि बाद में ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद उन्होंने इसे खरीद लिया था।

बेटे वेदाविद को भी लाइमलाइट से दूर रखा

माता-पिता बनने के बाद से यामी गौतम और आदित्य धर के लिए प्राइवेसी अहम हो गई है। यामी और आदित्य मई 2024 में अपने बेटे वेदाविद के माता-पिता बने, लेकिन उन्होंने जान-बूझकर उसका चेहरा लोगों की नजरों से दूर रखा है। सितंबर 2025 में यामी ने वेदाविद के साथ एक तस्वीर शेयर की, लेकिन उसका चेहरा छिपाकर ही रखा।

Drishyam 3 Box Office Collection Day 2: अजय देवगन की फिल्म ने मचाई धूम, शनिवार को 115 करोड़ का आंकड़ा पार किया

Drishyam 3 Box Office Collection Day 2: अजय देवगन की ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ 2 अक्टूबर को रिलीज हुई और थिएटर्स में रिलीज होने के सिर्फ दो दिनों के अंदर ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ की कमाई के करीब पहुंच रही है। गांधी जयंती के मौके पर रिलीज हुई इस फिल्म ने शानदार शुरुआत की और किसी भी हिंदी फिल्म के लिए ओपनिंग डे पर चौथा सबसे ज्यादा एडवांस बुकिंग कलेक्शन दर्ज किया।

शुक्रवार को ‘दृश्यम 3’ ने अजय देवगन के लिए रिकॉर्ड ओपनिंग की। ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ की एडवांस बुकिंग 27 सितंबर को शुरू हुई थी और फिल्म ने रिलीज से पहले ही ₹27 करोड़ कमा लिए थे। दिन के आखिर तक फिल्म ने पूरे भारत में ₹66.75 करोड़ (नेट) की कमाई कर ली थी। यह किसी हिंदी फिल्म की अब तक की तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग है और अजय देवगन के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग है।

Sacnilk की ताजा जानकारी के अनुसार ‘दृश्यम 3’ दूसरे दिन भी जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। रात 10 बजे तक फिल्म ने कुल 11,212 शो से ₹53.50 करोड़ की कमाई कर ली है। इससे अब तक की कुल कमाई ₹115.50 करोड़ हो गई है। ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ ने दो दिनों में ही ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है और सलमान खान की ‘सिकंदर’ (₹104 करोड़) की लाइफटाइम कमाई को पीछे छोड़ दिया है।

यह इस साल किसी हिंदी फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग है, जो सिर्फ ‘धुरंधर: द रिवेंज’ से पीछे है। बॉलीवुड के इतिहास में भी यह तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग है, जो सिर्फ ‘धुरंधर 2’ और ‘जवान’ से पीछे है। इसने रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ (₹30 करोड़), शाहरुख खान की ‘पठान’ (₹57 करोड़) और रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ (₹63 करोड़) को पीछे छोड़कर यह मुकाम हासिल किया है।

‘दृश्यम 3’ में अजय देवगन का विजय सलगांवकर वाला किरदार वापस ले कर आए हैं, साथ ही तब्बू, श्रिया सरन, रजत कपूर, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव और कमलेश सावंत भी नजर आएंगे। सौरभ शुक्ला भी दूसरे पार्ट वाले अपने किरदार में एक कैमियो रोल में दिखेंगे।

‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ को स्टार स्टूडियोज और पैनोरमा स्टूडियोज ने सपोर्ट किया है और अभिषेक पाठक तीसरे पार्ट को डायरेक्ट कर रहे हैं। उन्होंने आमिल कीयन खान और परवेज़ शेख के साथ मिलकर फिल्म की कहानी भी लिखी है। आलोक जैन, अजीत अंधारे, कुमार मंगत पाठक और अभिषेक पाठक इस फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं।

हिंदी ‘दृश्यम’ फ्रैंचाइजी की शुरुआत 2015 में मोहनलाल की मलयालम थ्रिलर के रीमेक के साथ हुई थी। फिल्म ने जल्द ही दर्शकों का दिल जीत लिया और दुनिया भर में लगभग ₹110 करोड़ की कमाई की, जिससे विजय सलगांवकर फैंस के पसंदीदा बन गए। 2022 में आई ‘दृश्यम 2’ ने इसे आगे बढ़ाया और यह और भी बड़ी हिट साबित हुई, जिसने दुनिया भर में लगभग ₹342 करोड़ की कमाई की थी।

Drishyam 3 Box Office Day 1: 66 करोड़ की कमाई के साथ ‘दृश्यम 3’ ने बनाए ये दो बड़े रिकॉर्ड, बॉलीवुड की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर बनी फिल्म

Drishyam 3 Box Office Day 1: ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ भारतीय सिनेमा की सबसे पॉपुलर थ्रिलर फ्रैंचाइजी में से एक हैं। इसका आखिरी चैप्टर शुक्रवार 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गया। लॉन्ग वीकेंड के चलते और फिल्म को लेकर क्रेज ने रिलीज होते ही रिकॉर्ड कायम कर लिया। 66 करोड़ के इंडियन नेट कलेक्शन के साथ ‘दृश्यम 3’ बॉलीवुड की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर फिल्म बन गई है।

टॉप 5 बिग ओपनर फिल्म में हुई शामिल

अजय देवगन स्टारर रिलीज से पहले ही काफी चर्चा थी और शुरुआती रिएक्शन ने इसे सही साबित किया है। दर्शक अजय देवगन की एक्टिंग, अहलावत के साथ उनकी टक्कर, कोर्टरूम के सीन और क्लाइमेक्स की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं, हालांकि कुछ लोगों को फिल्म का पहला हाफ धीमा लगा। ओपनिंग के मामले में भी यह फिल्म बॉलीवुड की ‘ऑल-टाइम टॉप 5 डे-1 ओपनिंग’ लिस्ट में शामिल हो गई है, जिसमें यह सिर्फ ‘धुरंधर : द रिवेंज’ से पीछे है।

66 करोड़ का ओपनिंग नेट कलेक्शन

‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ ने पहले दिन यानी शुक्रवार को 15,759 शोज में ₹66.75 करोड़ (नेट) की कमाई की। इसकी कुल ऑक्यूपेंसी 60.1% रही और लगभग 26.53 लाख लोगों ने इसे देखा। भारत में इसकी ग्रॉस कमाई ₹80.10 करोड़ रही। शुरुआती ट्रेंड्स के मुताबिक, ओवरसीज ग्रॉस कमाई ₹15.00 करोड़ है, जिससे शुरुआती वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई ₹95.10 करोड़ हो जाती है। फिल्म ने एक ही दिन में ₹50 करोड़ (नेट) का आंकड़ा भी पार कर लिया है।

हाउसफुल रहे सारे शोज

15,759 शो में दिखाई गई इस फिल्म ने रिलीज के पहले दिन हर शो से लगभग ₹42,000 कमाए हैं। गांधी जयंती की छुट्टी की वजह से परिवारों के बीच फिल्म को ‘फ़ुल-हाउस’ ओपनिंग मिली। मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन, दोनों जगहों पर मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स से पता चलता है कि फ्रैंचाइजी का क्रेज किस लेवल का है। अब वीकेंड आने वाला है, इसलिए सबकी नजरें इस बात पर हैं कि फिल्म शनिवार और रविवार को कैसा प्रदर्शन करती है।

पहले दिन ये रिकॉर्ड बनाया

रिलीज के पहले ही दिन ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। पहला रिकॉर्ड ये रहा कि बॉलीवुड की अब तक की ‘पहले दिन की टॉप 5 फिल्मों’ की लिस्ट में शामिल हो गई है। दूसरा एक ही दिन में ₹50 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।

सबसे ज्यादा ओपनिंग करने वाली टॉप 5 बॉलीवुड फिल्में

66.75 करोड़ की नेट कमाई के साथ ‘दृश्यम 3’ बॉलीवुड की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर बन गई है। पहले नंबर पर अभी रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ 99 करोड़ के कलेक्शन के साथ नंबर वन पर है। तीसरे नंबर पर शाहरुख खान की ‘जवान’ (₹66 करोड़) और चौथे नंबर पर शाहरुख खान की पठान (55 करोड़ ) है। 5वें नंबर पर 55 करोड़ कलेक्शन के साथ रणबीर कपूर स्टारर एनिमल फिल्म है।

हिंदी 2D ऑक्यूपेंसी

हिंदी 2D वर्शन ने पहले दिन कुल मिलाकर 67.08% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। दिन भर ऑक्यूपेंसी बढ़ती गई। मॉर्निंग शो 46.38% से शुरू हुए, दोपहर के शो 70.15% तक पहुंचे, शाम के शो 75.31% तक पहुंचे और नाइट शो 76.46% के साथ सबसे अच्छे रहे। यानी पहले शो से लेकर आखिरी शो तक लगातार बढ़ोतरी हुई, जो दिन भर लोगों के खुद से आने (वॉक-इन) और लोगों की अच्छी बातों (वर्ड-ऑफ-माउथ) से मिले सपोर्ट का संकेत है।

बात करें फिल्म की तो अजय देवगन ने विजय सलगांवकर के रोल में वापसी की है। ‘दृश्यम 2’ के डायरेक्टर अभिषेक पाठक ही इसके डायरेक्टर और को-राइटर हैं। तब्बू, श्रिया सरन, रजत कपूर और इशिता दत्ता भी वापस आए हैं और इस बार उनके साथ जयदीप अहलावत और प्रकाश राज भी शामिल हैं।

Sanjay Gupta: एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का क्या? संजय गुप्ता ने रणबीर कपूर, रणवीर सिंह से लेकर विक्की कौशल के स्मोकिंग वाले पोस्टर्स पर उठाए सवाल

Sanjay Gupta: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने बॉलीवुड में हीरो की ऑन-स्क्रीन इमेज और खासकर पोस्टर्स में स्मोकिंग के लगातार इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। रविवार को डायरेक्टर ने संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर, आदित्य धर की ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह और संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में विक्की कौशल के पोस्टर्स शेयर किए, जिनमें तीनों एक्टर्स अपने-अपने लुक्स में स्मोकिंग करते हुए दिख रहे हैं।

X पर उन्होंने क्या कहा

संजय ने रविवार को X पर तीनों एक्टर्स का एक कोलाज शेयर किया। उनकी पोस्ट में उन एंटी-स्मोकिंग मैसेज पर सवाल उठाया गया, जो दर्शकों को थिएटर में फिल्मों से पहले और फिल्म के दौरान दिखाए जाते हैं, जबकि पोस्टर्स पर स्मोकिंग की इजाजत होती है। उन्होंने पूछा, “जब फिल्मों के पोस्टर्स ऐसे होते हैं तो फिल्मों से पहले और बीच में दिखाए जाने वाले उन बुरे एंटी-स्मोकिंग रील्स का क्या मतलब है, जिन्हें हमें झेलना पड़ता है?”

इस पोस्ट के बाद कमेंट्स में चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने गुप्ता की 2002 की फिल्म ‘कांटे’ का जिक्र किया और फिल्म के एक गाने की ओर इशारा किया, जिसमें स्मोकिंग का जिक्र है। यूजर ने लिखा, “हैरानी की बात है कि यह बात ‘कांटे’ फिल्म के डायरेक्टर कह रहे हैं, जिसकी एक फिल्म में गाना है – ‘सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाकर, कॉलर को थोड़ा सा ऊपर चढ़ाकर’… कितनी अजीब बात है।”

उन्होंने सीधे उस कमेंट का जवाब देते हुए कहा कि उस समय स्मोकिंग से जुड़े नियम और लोगों तक पहुंचाए जाने वाले मैसेज अलग थे। उन्होंने लिखा, “तब स्मोकिंग न करने वाले विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस।”

इंटरनेट पर चर्चा हो गई शुरू

कई अन्य यूजर्स भी चर्चा में शामिल हुए और फिल्मों में स्मोकिंग के इस्तेमाल को लेकर फिल्ममेकर की चिंता से सहमत दिखे। एक व्यक्ति ने इस स्थिति की तुलना स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखते समय दर्शकों को दिखाई जाने वाली वॉर्निंग से की और लिखा, “यह एक मजाक है, यह नेटफ्लिक्स और एप्पल पर शो देखने और शराब पीने के बारे में वॉर्निंग मिलने जैसा है।”

एक अन्य यूजर ने भारतीय सिनेमा में सिगरेट और मर्दानगी के बीच बार-बार दिखाए जाने वाले संबंध पर सवाल उठाया। कमेंट में लिखा था, “क्योंकि इन लोगों को लगता है कि सिगरेट ही वो चीज है जो किसी आदमी को मर्दाना दिखाती है। यह क्रिएटिविटी की कमी है। भारत की सभी फिल्म इंडस्ट्रीज ‘मर्दानगी की चापलूसी’ का शिकार हैं। कंटेंट, कहानी और क्रिएटिविटी भाड़ में जाए।” एक और यूजर ने उनकी बात का समर्थन करते हुए लिखा, “पूरी तरह सहमत हूं, बिल्कुल सही बात है।”

CBFC के नए नियम

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब फिल्मों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर नियम कड़े किए जा रहे हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने स्क्रीन पर क्या दिखाया जा सकता है और कुछ विषयों को कैसे दिखाया जाना चाहिए, इसके लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर को सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत इन नए नियमों की घोषणा की। इन नियमों के तहत, नशीले पदार्थों को दिखाने वाली फिल्मों में ड्रग्स के ख़िलाफ चेतावनी दिखाना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही, हिंसा, संवेदनशील विषयों और ऐसे कंटेंट पर पाबंदियों को भी दोहराया गया है, जो दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं। ये बदलाव केंद्र सरकार द्वारा 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड के साथ CBFC के पुनर्गठन के साथ ही किए गए हैं।

सबसे बड़े बदलावों में से एक है उन फिल्मों के लिए जरूरी चेतावनी का नियम, जिनमें नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी को दिखाया जाता है। ऐसे दृश्यों में अब स्क्रीन पर यह संदेश दिखाना होग-: “अवैध नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ ने कमाया 18,200% मुनाफा, 4 लोगों के बीच बंटेगी कमाई, निर्देशक को मिलेंगे इतने करोड़

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ 2026 की सबसे बड़ी सरप्राइज हिट फिल्म बन गई है। ‘धुरंधर 2’ और ‘बॉर्डर 2’ के बाद यह इस साल की तीसरी सबसे बड़ी हिट फिल्म है जो पिछले सात हफ्तों से सिनेमाघरों में डटी है। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन इसके कुछ वीक और लगे रहने की तरफ इशारा कर रहा है। हाल में ही अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में फिल्म की प्रोड्यूसर में से एक अनुप्रिया नागर ने बताया था कि फिल्म 1.5 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा के बजट में बनी थी। उन्होंने फिल्म में 50 लाख रुपये लगाए हैं। साथ ही डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म बनाने के दौरान फीस के तौर पर एक पैसा नहीं लिया था। लेकिन अब फिल्म से होने वाला मुनाफा चारों पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।

डायरेक्टर को मिलेंगे 50 करोड़

‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने बताया कि इस फिल्म को डायरेक्ट करने के लिए विशाल चतुर्वेदी ने फीस नहीं ली थी। उन्होंने एक पैसा नहीं लिया था। अब प्रोफिट में से उन्हें हिस्सा दिया जाएगा। खबरों के मुताबिक विशाल को 50 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि ये पुष्ट आंकड़ा नहीं है।

4 लोगों में बांटे जाएंगे इतने करोड़!

ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक फिल्म ने 47 दिनों में कुल 366.45 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। जब उनसे रिटर्न को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘मुझे मुनाफे का एक-चौथाई हिस्सा दिया जाएगा। सबसे पहले डिस्ट्रीब्यूटर को हिस्सा दिया जाएगा। फिर हम बाकी खर्चों और टैक्स को पे करेंगे। इसके बाद जितना भी पैसा बचेगा वह 4 लोगों में बांट दिया जाएगा।

अनुप्रिया को दिए जाएंगे 50 करोड़

अनुप्रिया से जब सवाल किया गया कि उन्हें कितने पैसे मिलने वाले हैं तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें कम से कम 50 करोड़ रुपये की उम्मीद है। इतना अमाउंट तब है, जब फिल्म ओटीटी पर नहीं आई है। मेकर्स ने अभी तक OTT, सैटेलाइट या म्यूजिक में से कोई डील नहीं की है। उन्होंने बताया कि ‘अभी तक तो मेरा अनुमान है कि 50 करोड़ रुपये कमा लूंगी। लेकिन पक्का नहीं कह सकती हूं। हमें अभी OTT, म्यूजिक और सैटेलाइट डील भी करनी है, तो ये संख्या बढ़ भी सकती है।

अनुप्रिया ने बताया आगे का प्लान

जब उनसे 50 करोड़ रुपये का वह अब वह क्या करने वाली हैं। इस सवाल पर वह मुस्कुराईं और उन्होंने कहा, ‘मुझे तो यह भी नहीं पता कि इतने सारे पैसे कैसे संभालूं। मुझे लगता है कि इसे सोसाइटी को वापस कर दिया जाना चाहिए।’ अनुप्रिया ने बताया कि वह अपना प्रोडक्शन हाउस बनाना चाहती हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि वह ऐसी और कहानियां पर्दे पर लाएंगी। रीजनल फिल्में और वेब सीरीज बनाना चाहेंगी, लेकिन उनका बजट कम होगा।

Dhurandhar: ‘धुरंधर को 14 सदस्यों वाली जूरी से सिर्फ 4 वोट मिले’, विवेक वासवानी ने बताया रणवीर सिंह स्टारर को ऑस्कर में क्यों नहीं मिली एंट्री

Dhurandhar: जैसे ही मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर घोषित किया गया, सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा शुरू हो गई। लोगों का कहना था कि कैसे इस फिल्म ने रणवीर सिंह की बॉक्स-ऑफिस पर धूम मचाने वाली फिल्म ‘धुरंधर’ को पीछे छोड़कर भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री का स्थान हासिल किया। अब ‘फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया’ की जूरी के सदस्य विवेक वासवानी ने बताया है कि उस फिल्म को क्यों नहीं चुना गया।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘गोंधल’ को 33 फिल्मों में से चुना गया था। इन 33 फिल्मों में 14 हिंदी, चार मराठी, चार तेलुगु, तीन गुजराती, तीन तमिल, एक मलयालम, एक नेपाली और नागालैंड की एक फिल्म शामिल थी। जूरी ने जिन तीन फिल्मों को फाइनल राउंड के लिए चुना था, वे थीं – ‘गोंधल’, ‘अंग’ और ‘मैं वापस आऊंगा’। इनमें से मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को 2027 के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया।

‘धुरंधर’ भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री क्यों नहीं बनी?

NDTV से बात करते हुए विवेक से पूछा गया कि जब जूरी को भारत से एक फिल्म चुनकर अंतिम फैसला लेना था तो ‘धुरंधर’ किस पायदान पर थी। उन्होंने जवाब दिया, “कुछ लोगों को यह पसंद आई, लेकिन हमें नहीं लगा कि यह ऑस्कर के लायक फिल्म थी।” विवेक ने यह भी बताया कि ‘धुरंधर’ फिल्म भारतीय संस्कृति को उस तरह से नहीं दिखाती थी, जैसा जूरी भारत की आधिकारिक एंट्री चुनते समय चाहती थी। जब उनसे पूछा गया कि जूरी के 14 सदस्यों में से कितने लोगों ने फिल्म के पक्ष में वोट दिया तो विवेक ने जवाब दिया, “चार।”

‘गोंधल’ के बारे में

संतोष दवखर की लिखी और निर्देशित फिल्म ‘गोंधल’ एक थ्रिलर है। इसकी कहानी महाराष्ट्र की पारंपरिक आधी रात की रस्म और लोक-प्रदर्शन शैली पर आधारित है, जिससे इसे अपना नाम मिला है। फ़िल्म का सांस्कृतिक परिवेश और भारतीय संस्कृति को जिस तरह से दिखाया गया है, उसने जूरी का ध्यान खींचा।

इस फिल्म ने इंटरनेशनल फेस्टिवल सर्किट में भी अपनी पहचान बनाई है। दवखर ने 2025 में 56वें ​​इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में ‘बेस्ट डायरेक्टर’ का सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड जीता। फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर और अनुज प्रभु ने काम किया है। इसका संगीत मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने तैयार किया है।

‘धुरंधर’ फिल्मों के बारे में

आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइजी में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं। पहली फिल्म ‘धुरंधर’ दिसंबर 2025 में रिलीज हुई थी और इसके बाद मार्च 2026 में ‘धुरंधर द रिवेंज’ आई। ये दोनों फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर बहुत सफल रहीं और इस फ्रैंचाइजी ने दुनिया भर में लगभग ₹3,000 करोड़ की कमाई की।

Oscars 2027: मराठी थ्रिलर ने ‘धुरंधर 2’ को पीछे छोड़ा, ‘गोंधल’ का ऑस्कर में भारत की आधिकारीक एंट्री के तौर पर हुआ सिलेक्शन

Oscars 2027: फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार को बताया कि मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री होगी। इस दौड़ में शामिल अन्य फिल्मों में नागा फिल्म ‘अंग’ और तमिल फिल्म ‘डोरोथी’ भी थीं।

संतोष दवाखर द्वारा निर्देशित यह फिल्म 99वें एकेडमी अवार्ड्स समारोह में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर’ कैटेगरी में देश का प्रतिनिधित्व करेगी। फिल्म निर्माता ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) 2025 में सिल्वर पीकॉक अवार्ड जीता था। जूरी पैनल में पी. शेषद्रि, विजय पाटकर, हुतु कनोडिया, शांति कुमार, संदीप पराशर, संजय पाटिल, साबू जोसेफ, अनिल थॉमस, विवेक वासवानी, बिजोन दासगुप्ता, हासन, वासन और तनिष्ठा चटर्जी शामिल थे।

कुल 33 फिल्में सबमिट की गई थीं, जिनमें से 14 हिंदी में, चार-चार मराठी, तेलुगु और गुजराती में, तीन तमिल में और एक-एक मलयालम, कोन्याक और नेपाली भाषा में थीं। इनमें एक साइलेंट फिल्म भी शामिल थी।

महाराष्ट्र की पारंपरिक ‘गोंधल’ रस्म और लोक-प्रदर्शन शैली पर आधारित ‘गोंधल’ फिल्म सुमन नाम की एक शादीशुदा महिला की कहानी है। उसकी जिंदगी में तब एक ऐसा मोड़ आता है जब रिश्ते, इच्छा और धोखे आपस में टकराने लगते हैं। रोजमर्रा के रिश्तों से शुरू होने वाली यह कहानी धीरे-धीरे एक थ्रिलर में बदल जाती है। सुमन खुद को मुश्किल हालात में फंसा हुआ पाती है और उनसे बाहर निकलने की कोशिश करती है।

सुमन के सफर के जरिए, यह फिल्म प्यार, इच्छा, धोखे और उन तरीकों को दिखाती है, जिन्हें लोग तब अपनाते हैं जब वे खुद को किसी मुश्किल स्थिति में फंसा हुआ महसूस करते हैं। साथ ही ‘गोंधल’ महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा को भी सामने लाती है और सदियों पुरानी इस प्रदर्शन शैली और आज के समाज में इसके महत्व को दिखाती है।

इस फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर, अनुज प्रभु और अन्य कलाकार हैं, और इसका संगीत अनुभवी संगीतकार इलैयाराजा ने तैयार किया है। ‘गोंधल’ को बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी पहचान मिली। यह फिल्म 14 नवंबर, 2025 को रिलीज हुई थी।

Nusrat Fateh Ali Khan: ‘मिर्जापुर द मूवी’ से लेकर ‘धुरंधर’ तक, देखें बॉलीवुड का नुसरत फतेह अली खान के लिए ऑब्सेशन

Nusrat Fateh Ali Khan: ‘शहंशाह-ए-कव्वाली’ का खिताब उस्ताद नुसरत फतेह अली खान जैसे शानदार कलाकार के लिए बिल्कुल सही है। आज के दौर में जब हर तरफ रीमिक्स और बेतुके बोल वाले गाने सुनने को मिलते हैं। लेकिन नुसरत फतेह अली खान एक चमकते हुए सितारे की तरह हैं। उनकी जबरदस्त आवाज और नए एक्सपेरिमेंट करने की सोच ने सूफी संगीत की सदियों पुरानी परंपरा – कव्वाली – को पाकिस्तान के छोटे-छोटे गांवों से लेकर पश्चिमी देशों के बड़े-बड़े म्यूजिक फेस्टिवल और इंटरनेशनल स्टेज तक पहुंचाया।

नुसरत साहब के सदाबहार गानों ने कई पीढ़ियों को अपना दीवाना बनाया है। आज भी उनके गाने मशहूर फिल्मों में नए अंदाज में पेश किए जाते हैं या उनके कुछ हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे वे फिर से हमारे बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। या यूं कहें कि उनकी क्रिएशन किसी भी सीन को और भी यादगार बना देती हैं।

नुसरत फतेह अली खान के गाने का हालिया जादू

हाल ही में तब जादू देखने को मिला जब उनके गाने ‘सांसों की माला’ ने ‘मिर्जापुर द फिल्म’ में एक अलग ही जोश भर दिया। यह आपको फिल्म देखने पर पता चलेगा – यहां कोई स्पॉइलर नहीं दिया जा रहा है। नुसरत फतेह अली खान की ओरिजिनल आवाज को गायक मधुर शर्मा और वैभव पानी की नई गायकी के साथ बहुत खूबसूरती से मिलाया गया है। यह गाना ‘मिड-क्रेडिट सीक्वेंस’ में एक अहम भूमिका निभाता है, जिसमें बीना त्रिपाठी (रसिका दुगल) और उनके अतीत का एक पन्ना दिखाया गया है।

इससे दर्शकों को यह भी याद आ सकता है कि यह धुन पहले 90 के दशक की मशहूर फिल्मों जैसे ‘जीत’ (1996) और ‘कोयला’ (1997) में सुनी गई थी, जिनमें माधुरी दीक्षित और शाहरुख खान ने काम किया था। यह कोई पहली फिल्म नहीं है जिसमें ऐसा हुआ हो।

साल 2026 की शुरुआत में रिलीज हुई आदित्य धर की सुपरहिट फिल्म ‘धुरंधर 2’ का गाना ‘जान से गुजरते हैं’ ने भी खूब धूम मचाई है। ये भी नुसरत फतेह अली खान की ही एक और कव्वाली है। इसे 1977 के क्लासिक गाने ‘दिल पे जख्म खाते हैं’ से लिया गया है। इस नए वर्जन को शाश्वत सचदेव ने नए अंदाज में तैयार किया था और इसमें खान साहब और शाश्वत सचदेव की आवाजें थीं।

यह गाना आदित्य धर की उस जबरदस्त कहानी में कितनी अच्छी तरह फिट बैठा, जो हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे धमाकेदार ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बन गई है। प्यार, धोखे और अटूट जज्जबाती मजबूती की बात करें तो नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली ने उस तनाव को और बढ़ा दिया जो ‘धुरंधर’ की मुख्य थीम थी।

इन दो फिल्मों से पहले भी कई बार नुसरत फतेह अली खान के गाने बॉलीवुड में हो चुके हैं यूज

हालिया गानों ने हमें पुरानी यादों में खोने और उनके कुछ ऐसे सदाबहार गानों को याद करने का मौका दिया, जिन्होंने पिछली और मौजूदा पीढ़ियों के म्यूजिक कलेक्शन और स्पॉटिफाई लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। उनके सबसे बेहतरीन क्लासिक गानों में से एक था ‘मेरे रश्के कमर’, जिसे नुसरत ने ही कंपोज किया और गाया था और इसके बोल फना बुलंदशहरी ने लिखे थे।

यह गजल-कव्वाली आज भी कॉन्सर्ट में लोगों की पसंदीदा है। इसका असर ही कुछ अलग होता है। इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि 2017 की फिल्म ‘बादशाहो’ के लिए तनिष्क बागची ने इसे नए अंदाज में तैयार किया और राहत फतेह अली खान ने इसे अपनी आवाज दी।

सूफी संगीत की पहचान उस रोमैंटिक अंदाज से और मजबूत होती है, जिसे सदियों से कई सिंगर्स ने अपनाया है। नुसरत फतेह अली खान ने अपनी अब तक की सबसे रोमैंटिक गजलों में से एक – ‘ये जो हल्का-हल्का सुरूर है’ – में इस अंदाज को बनाए रखा। बाद में इसे कई बॉलीवुड गानों के मिक्स (मेडले) में इस्तेमाल किया गया, जैसे 2016 के गाने ‘हल्का-हल्का’ में और फिर 2018 की फिल्म ‘फन्ने खान’ में भी इसे कुछ बदलावों के साथ शामिल किया गया, जिसमें इसके नशे जैसे धुन वाले बीट्स को बरकरार रखा गया।

इस लिस्ट में रणवीर सिंह और सारा अली खान की फिल्म ‘सिम्बा’ का गाना ‘तेरे बिन नहीं लगदा’ शामिल है। इस फिल्म के लिए ‘तेरे बिन’ गाने में उस सूफी गीत को शामिल किया गया, जिसे उनके भतीजे राहत फतेह अली खान और असीस कौर ने मिलकर गाया था।

‘सानू इक पल चैन ना आवे’ गाना 2018 की फिल्म ‘रेड’ के नए मॉडर्न वर्जन में शामिल किया गया था। उसी फिल्म का एक और गाना था ‘नित खैर मंगा’ – यह एक प्रेयर सॉन्ग था, जिसे हल्के म्यूजिक (अकॉस्टिक) वाले बॉलीवुड स्टाइल में ढाला गया और राहत फतेह अली खान ने इसे फिर से गाया। उस्ताद के लिखे और गाए गए गाने ‘किन्ना सोहना तेनू रब ने बनाया’ को आमिर खान और करिश्मा कपूर की फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ (1996) और ‘मरजावां’ (2019) में इस्तेमाल किया गया।

8वीं सदी के पंजाबी सूफी सिंगर बाबा बुल्ले शाह द्वारा लिखा गया गाना ‘मेरा पिया घर आया’ नुसरत फतेह अली खान की वजह से बहुत मशहूर हुआ था। इसे 1995 की फिल्म ‘याराना’ के लिए फिर से बनाया गया, जिसमें अनु मलिक ने कमर्शियल जैज़ का तड़का लगाया और कविता कृष्णमूर्ति ने इसे गाया। यह माधुरी दीक्षित के लिए एक यादगार डांस गाना बन गया।

हर पीढ़ी के लिए नुसरत फतेह अली खान का कोई न कोई गाना मौजूद रहा है। हर उम्र के लोगों को उस्ताद की कोई न कोई कव्वाली पसंद आती है, जिसमें मॉडर्न बीट और टेम्पो का मेल होता है – और यह कभी निराश नहीं करती।