Teacher’s Day 2026: ‘आदर्श बाल विद्यालय’ से ‘एस्पिरेंट्स’ तक, ओटीटी की 10 ऐसी सीरीज जो बताती हैं बेहतरीन शिक्षक सिर्फ क्लासरूम में नहीं होते

Teacher’s Day 2026: टीचर्स डे अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड और रिपोर्ट कार्ड तक सीमित नहीं रह गया है। हमें कई यादगार शिक्षक और मार्गदर्शक म्यूजिक स्कूल, कोचिंग सेंटर, कोर्टरूम, गांवों और जिंदगी के मुश्किल दौर में भी मिले हैं। ये किरदार सिर्फ हमें कोई विषय नहीं सिखाते, बल्कि हमारी जिंदगी को आकार देते हैं, हमारी सोच को चुनौती देते हैं और ऐसी सीख देते हैं जो फिल्म या सीरीज खत्म होने के बाद भी हमारे साथ रहती है।

इस टीचर्स डे पर नजर डालते हैं ओटीटी के उन टाइटल्स पर, जिनमें मेंटर्स, गाइड्स और ऐसे किरदार नजर आते हैं जो अनोखे अंदाज में शिक्षक की भूमिका निभाते हैं।

1. जगमे संगीतथम् (प्राइम वीडियो)

‘जगमे संगीत’ संगीत के जरिए गुरु और शिष्य के बीच के हमेशा बने रहने वाले रिश्ते को दिखाता है। वैकुंठपुरम की पृष्ठभूमि में बनी यह सीरीज शास्त्रीय परंपराओं को दिखाती है। इसमें शास्त्री (प्रकाश राज) अपने पोते का मार्गदर्शन करते हैं, जिसका किरदार अक्षय लगुसानी ने निभाया है। यह कहानी बताती है कि एक गुरु और शिष्य का रिश्ता सिर्फ प्रतिभा तक सीमित नहीं होता, बल्कि अनुशासन, विरासत और भरोसे पर भी टिका होता है।

2. बंदिश बैंडिट्स (प्राइम वीडियो)

‘बंदिश बैंडिट्स’ की कहानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कला को पहुंचाने के बारे में है। पंडित राधेमोहन राठौड़ (नसीरुद्दीन शाह) की कड़ी ट्रेनिंग से लेकर राधे (ऋत्विक भौमिक) के अपनी खुद की पहचान और आवाज तलाशने तक, यह सीरीज खूबसूरती से दिखाती है कि अच्छे शिक्षक हमें हमारी क्षमता पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं।

3. कोटा फैक्ट्री (नेटफ्लिक्स)

बहुत कम शोज ने शिक्षक की भूमिका को ‘कोटा फैक्ट्री’ जितने अलग अंदाज में दिखाया है। जीतू भैया सिर्फ फिजिक्स के शिक्षक नहीं हैं, बल्कि छात्रों के मेंटर, काउंसलर और भावनात्मक सहारे भी हैं। वह छात्रों को उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

4. एस्पिरेंट्स (प्राइम वीडियो)

यूपीएससी की तैयारी सिर्फ परीक्षा देने तक सीमित नहीं है और ‘एस्पिरेंट्स’ हमें यही याद दिलाता है। संदीप भैया, अभिलाष के ऐसे मेंटर बन जाते हैं, जिसकी उन्होंने खुद भी उम्मीद नहीं की थी। इस पूरी कहानी में मेंटर और एक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र का रिश्ता दिखाता है कि मुश्किल रास्ते पर साथ चलने वाले लोगों से हमें मार्गदर्शन के साथ-साथ कई बार मतभेद और टकराव भी मिलते हैं।

5. रॉकेट बॉयज (सोनीलिव)

कुछ शिक्षक सिर्फ एक क्लासरूम को प्रभावित करते हैं, जबकि कुछ पूरे देश को आकार देते हैं। ‘रॉकेट बॉयज़’ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के जरिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन की कहानी दिखाता है। यह बताता है कि कैसे सोच, जिज्ञासा और नेतृत्व की भावना आने वाली पीढ़ियों के इनोवेटर्स को प्रेरित कर सकती है।

6. क्रिमिनल जस्टिस: अ फैमिली मैटर (जियोहॉटस्टार)

माधव मिश्रा भले ही एक वकील हैं, लेकिन हर केस उनके लिए सहानुभूति, न्याय और इंसानियत की एक नई सीख लेकर आता है। शो में शिवानी को मेंटर करने के दौरान माधव का किरदार साबित करता है कि जिंदगी की सबसे मुश्किल परिस्थितियां ही कई बार हमारी सबसे बड़ी शिक्षक बन जाती हैं।

7. मिथ्या (ज़ी5)

‘मिथ्या’ में हुमा कुरैशी और अवंतिका दसानी के किरदारों के बीच एक प्रोफेसर और छात्रा का रिश्ता दिखाया गया है, जो आगे चलकर एक अप्रत्याशित मोड़ लेता है। यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर दिखाती है कि ताकत, प्रभाव और मार्गदर्शन का रिश्ता किस तरह खतरनाक स्थिति में बदल सकता है। यही वजह है कि यह ओटीटी पर शिक्षक और छात्र के रिश्ते की सबसे अलग कहानियों में से एक है।

8. आदर्श बाल विद्यालय (प्राइम वीडियो)

हाल के समय में बहुत कम शोज ने स्कूल की जिंदगी को ‘आदर्श बाल विद्यालय’ जितनी गर्मजोशी और सच्चाई से दिखाया है। इसके शिक्षक और छात्र हमें याद दिलाते हैं कि शिक्षा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दयालुता, आत्मविश्वास और एक-दूसरे का साथ देना भी उतना ही जरूरी है। इस कहानी में प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी और छात्रों का रिश्ता खास तौर पर देखने लायक है।

9. हाफ सीए (प्राइम वीडियो)

बड़े होने के दौरान हमें ऐसे मेंटर्स की जरूरत होती है जो किताबों से आगे जाकर हमारी परेशानियों को समझ सकें। ‘हाफ सीए’ उन युवाओं की कहानी है जो चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे हैं और पढ़ाई, उम्मीदों और खुद पर होने वाले संदेह के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। यह उन शिक्षकों और मार्गदर्शकों की अहमियत को दिखाता है जो इस सफर को थोड़ा आसान बना देते हैं।

10. 13th: सम लेसन्स आरंट टॉट इन क्लासरूम्स (सोनीलिव)

यह प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री साबित करती है कि शिक्षा सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। ‘13th सम लेसन्स आरंट टॉट इन क्लासरूम्स’ दर्शकों को इतिहास, व्यवस्था और समाज पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित करती है। यही वजह है कि टीचर्स डे पर देखने के लिए यह एक सोचने पर मजबूर करने वाली डॉक्यूमेंट्री है।

इस टीचर्स डे पर ये कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि सबसे प्रभावशाली शिक्षक हमेशा ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े नहीं होते। कई बार वे मेंटर, माता-पिता, दोस्त, प्रोफेशनल्स या खुद जिंदगी होती है, जो हमें ऐसी सीख देकर जाती है जो हमेशा हमारे साथ रहती है।

OTT Releases This Week: इस हफ्ते होगा मनोरंजन का धमाका, गांधारी, धमाल 4, तक ये फिल्में-शो होने वाले हैं रिलीज

OTT Releases This Week: सितंबर की शुरुआत कई तरह की दिलचस्प स्ट्रीमिंग फिल्मों और सीरीज के साथ हो रही है। इनमें एक मां की अपने खोए हुए बच्चे की तलाश और इंटरनेशनल गैंग वॉर, घटनाओं की जांच और कोल्ड वॉर के समय के सर्वाइवल एडवेंचर तक शामिल हैं। तापसी पन्नू ‘गंधारी’ में एक ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी बेटी को खोजने की बेताब कोशिश में बच्चों की तस्करी करने वाले नेटवर्क की जड़ों तक पहुंच जाती है।

वहीं, अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी ‘धमाल 4’ में खजाने की तलाश के मजेदार हंगामे के लिए फिर से साथ आ रहे हैं। साथ ही, थियो जेम्स और काया स्कोडेलेरियो ‘द जेंटलमैन’ के दूसरे सीज़न में हॉर्नमैन-ग्लास क्रिमिनल नेटवर्क को ब्रिटेन से बाहर ले जा रहे हैं।

पीरियड रोमांस और कोर्टरूम ड्रामा से लेकर कर्नाटक संगीत, हॉरर-कॉमेडी और डॉक्यूमेंट्री तक, यहां 1 सितंबर से 6 सितंबर के बीच रिलीज़ होने वाली प्रमुख OTT फिल्में और सीरीज दी गई हैं।

‘गंधारी’- नेटफ्लिक्स, 3 सितंबर

तापसी पन्नू इस डार्क एक्शन थ्रिलर में बानी का किरदार निभा रही हैं, जो एक ऐसी मां है जिसकी लाइफ तब तहस-नहस हो जाती है जब उसकी छोटी बेटी अचानक एक भीड़ भरे रेलवे स्टेशन से गायब हो जाती है। बच्ची को ढूंढने की उसकी बेताब कोशिशें तब और भी खौफनाक मोड़ ले लेती हैं। पन्नू के साथ इशवाक सिंह, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ और जतिन सरना अहम भूमिकाओं में हैं।

धमाल 4 – नेटफ्लिक्स, 4 सितंबर

खजाना वापस आ गया है, और जाहिर है, उसे खोजने के लिए पागलपन से भरे लोग भी वापस आ गए हैं। इंद्र कुमार की स्लैपस्टिक फ़्रैंचाइज़ी अपनी चौथी किस्त के साथ लौट रही है, जिसमें गुड्डू, लल्लन, आदि और मानव एक बार फिर रातों-रात अमीर बनने की उम्मीद में उलझते-भटकते नजर आएंगे। ‘टोटल धमाल’ के बाद अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी फिर से एक साथ आ रहे हैं, साथ ही रवि किशन, संजय मिश्रा, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद भी इस बड़ी स्टार कास्ट का हिस्सा हैं।

द जेंटलमैन सीजन 2 – नेटफ्लिक्स, 3 सितंबर

रे विंस्टन, डैनियल इंग्स, जोली रिचर्डसन, विनी जोन्स, जियानकार्लो एस्पोसिटो, जैस्मीन ब्लैकबोरो और पियर्स क्विगली की वापसी हो रही है। इस बढ़ते हुए क्रिमिनल यूनिवर्स में ह्यू बॉनविले, बेंजामिन क्लेमेंटाइन, बेनेडेट्टा पोरोकारोली, मिशेल मोरोन, सर्जियो कास्टेलिटो और अमरा मल्लासी भी शामिल हो रहे हैं, साथ ही बॉक्सर क्रिस यूबैंक जूनियर और टेलीविज़न प्रेजेंटर माया जामा भी नजर आएंगे।

लवसिक – नेटफ्लिक्स, 2 सितंबर

1910 के दशक में सेट इस सात-एपिसोड वाले मैक्सिकन पीरियड ड्रामा में उलझनों के बीच रोमांस की कहानी दिखाई गई है। रेनाटा वाका ने वियोलेटा का किरदार निभाया है, जो एक ताकतवर परिवार में पैदा हुई यंग महिला है। उसके सामाजिक रुतबे के साथ वफादारी, शादी और भविष्य को लेकर कुछ तय उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

बिग बॉस 20- JioHotstar, 6 सितंबर 2026

सलमान खान के होस्ट वाला पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 20 अपने नए सीजन के साथ कमबैक कर रहा है। शो में नए कंटेस्टेंट्स, टास्क, विवाद और अलग-अलग गेम डायनामिक्स देखने को मिलने वाले हैं।

Lust Stories 3: नेटफ्लिक्स इंडिया की ‘लस्ट स्टोरीज’ की होने जा रही वापसी, प्रीमियर डेट लॉक की गई

Lust Stories 3: ‘लस्ट स्टोरीज’ अपने तीसरे चैप्टर के साथ वापसी कर रही है। बॉलीवुड हंगामा को खास तौर पर पता चला है कि ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ का प्रीमियर 18 सितंबर को नेटफ्लिक्स इंडिया पर होगा। इंटरनेशनल एमी के लिए नॉमिनेट हुई इस एंथोलॉजी सीरीज़ के नए सीजन को विक्रमaditya मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज ने डायरेक्ट किया है।

चार नई, छोटी लेकिन भावनाओं से भरपूर शॉर्ट फ़िल्मों के ज़रिए, यह एंथोलॉजी एक बार फिर लस्ट, प्यार, रिश्तों और दबी हुई इच्छाओं को दिखाएगी। उम्मीद है कि इसका ट्रेलर सितंबर के पहले हफ़्ते में रिलीज़ किया जाएगा। ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार शामिल हैं।

विक्रमादित्य मोटवाने की फ़िल्म में राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी हैं, जबकि अली फ़ज़ल और राधिका मदान शकुन बत्रा के सेगमेंट में नज़र आएंगे। असल ज़िंदगी की जोड़ी सिद्धार्थ और अदिति राव हैदरी विशाल भारद्वाज की कहानी में मुख्य भूमिका में हैं, वहीं किरण राव की फ़िल्म में गुरफ़तेह पीरज़ादा और नए कलाकार सना थम्पी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

अलग-अलग और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियों के ज़रिए महिलाओं की कामुकता को बेबाकी से दिखाने के लिए सराही गई ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’, नेटफ़्लिक्स इंडिया की पहली ऐसी एंथोलॉजी होगी जिसके तीन सीजन होंगे। नया सीज़न intimacy के सभी विरोधाभासों – जैसे शॉफ्टनेस, असहजता, सबर – को भी दिखाने का वादा करता है।

फ़रवरी 2026 में इस एंथोलॉजी की घोषणा करते हुए मेकर्स ने कहा था, “हर फ़िल्म इंसानी जुड़ाव को एक अलग नज़रिए से देखती है और दिखाती है कि कैसे इच्छा और रिश्ते हालात, खामोशी और कमज़ोरी (vulnerability) से बनते हैं। ये कहानियाँ मिलकर प्यार और चाहत के बारे में बातचीत को आगे बढ़ाती हैं और दर्शकों को जुड़ाव के मायने समझने का एक ईमानदार और आज के दौर का नज़रिया देती हैं।”

Alpha OTT release: सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी पर दस्तक देने जा रही ‘ऐल्फा’, जानें कब और कहां देख सकेंगे फिल्म

Alpha OTT release: आलिया भट्ट और शरवरी की फिल्म ‘ऐल्फा’ आखिरकार OTT पर आ रही है, जिससे फ़ैन्स को घर बैठे इस एक्शन-पैक्ड स्पाई थ्रिलर को देखने का एक और मौका मिलेगा। YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-प्रधान फ़िल्म, ‘ऐल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के बाद नेटफ़्लिक्स पर प्रीमियर होगी। शिव रवैल के निर्देशन में बनी ‘ऐल्फा’ 3 जुलाई, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इसमें आलिया और शरवरी ने दो ऐसी जासूसों की भूमिका निभाई थी जो एक बड़े और अहम मिशन में फंसी हुई थीं। यह मिशन बड़ी स्पाई फ़्रैंचाइज़ी से जुड़ा हुआ था। हालांकि, बॉक्स ऑफ़िस पर फ़िल्म का प्रदर्शन औसत रहा और कहानी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

कहां और कब देखें

नेटफ्लिक्स ने 27 अगस्त को कन्फर्म किया कि यह एक्शन फ़िल्म 28 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। प्लेटफ़ॉर्म पर लिखे कैप्शन में कहा गया, “ऐल्फा गैंग में शामिल होने के लिए तैयार हो जाइए। 28 अगस्त को रिलीज़ हो रही ‘ऐल्फा’ को नेटफ्लिक्स पर देखें!”

कहानी क्या है?

शिव रवैल की डायरेक्ट की हुई फ़िल्म ‘ऐल्फा’ में आलिया भट्ट और शरवरी, YRF स्पाई यूनिवर्स के केंद्र में हैं। आलिया ने सीता का रोल किया है, जो एक काबिल R&AW एजेंट है और जिसे ‘ऐल्फा’ सोल्जर बनने की ट्रेनिंग दी गई है। वहीं, शरवरी ने दुर्गा कौल का रोल किया है, जो सीता की जुड़वां बहन है, लेकिन उससे अलग हो गई है।

बॉबी देओल फ़िल्म के विलेन, कर्नल फतेह सिंह लखावत का रोल निभा रहे हैं। ‘ऐल्फा’ नाम के एक ताकतवर सीरम पर उनके एक्सपेरिमेंट से ही कहानी शुरू होती है। सीता को किडनैप कर लिया जाता है और उनकी देखरेख में बड़ी होती है, और आखिर में एक सुपर-सोल्जर बन जाती है।

फ़िल्म की कहानी का ऑफिशियल सारांश कुछ इस तरह है: “बदले की आग में जल रही एक लड़की अपने रास्ते में आने वाले हर किसी को खत्म कर देती है, जब तक कि उसकी यात्रा उसे अपनी ज़िंदगी के छिपे हुए सच का पता नहीं लगा देती। वह निडर और बेबाक है, और किसी भी हद तक जा सकती है, रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकती है।”इस फ़िल्म में अनिल कपूर भी हैं और इसमें ‘वॉर’ फ़्रैंचाइज़ी के ऋतिक रोशन के किरदार ‘कबीर’ की एक छोटी सी भूमिका (कैमियो) भी है।

बॉक्स ऑफ़िस पर प्रदर्शन

YRF स्पाई यूनिवर्स की एक बड़ी फ़िल्म होने के बावजूद, ‘ऐल्फा’ का बॉक्स ऑफ़िस पर प्रदर्शन औसत रहा। लगभग ₹100 करोड़ के बजट में बनी इस फ़िल्म ने भारत में करीब ₹58.86 करोड़ की नेट कमाई की।

फ़िल्म ने विदेशी बाज़ारों से लगभग ₹29.05 करोड़ कमाए, जिससे इसकी कुल वर्ल्डवाइड कमाई ₹99.10 करोड़ हो गई। यह 2026 की आठवीं सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फ़िल्म के तौर पर सिनेमाघरों से उतरी और YRF स्पाई यूनिवर्स की सबसे कम कमाई करने वाली फ़िल्म बनी हुई है।

YRF स्पाई यूनिवर्स से कनेक्शन

‘ऐल्फा’, YRF स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फ़िल्म है। इस यूनिवर्स की शुरुआत 2012 में सलमान खान की फ़िल्म ‘एक था टाइगर’ से हुई थी। इसके बाद इस फ़्रैंचाइज़ी में ‘टाइगर ज़िंदा है’ (2017), ‘वॉर’ (2019), ‘पठान’ (2023), ‘टाइगर 3’ (2023) और ‘वॉर 2’ (2025) जैसी फ़िल्में आईं।

20 साल बाद ‘जॉनी गद्दार’ की यादें होंगी ताजा, श्रीराम राघवन बना रहे हैं उसी अंदाज की नई थ्रिलर

मैचबॉक्स शॉट्स ने अपनी नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर दिया है। कंपनी के अनुसार, मशहूर फिल्ममेकर श्रीराम राघवन उनके लिए कई नई कहानियों पर काम कर रहे हैं। इनमें एक अनटाइटल्ड थ्रिलर भी शामिल है, जिसका अंदाज उनकी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ जैसा होगा। साल 2027 में ‘जॉनी गद्दार’ की रिलीज को 20 साल पूरे होने वाले हैं।

फाउंडर संजय राउत्रे ने कहा, “श्रीराम ने मैचबॉक्स को उसकी पहली फिल्म और पहला सबक दिया था कि अगर किसी कहानी को पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ बताया जाए, तो उसे हमेशा अपना दर्शक मिल जाता है। ‘जॉनी गद्दार’ की 20वीं सालगिरह के साल उसी अंदाज की थ्रिलर विकसित करना हम दोनों के लिए एक तरह से घर वापसी जैसा है।”

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब नेटफ्लिक्स के लिए मैचबॉक्स शॉट्स की बनाई वॉर सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ दुनियाभर में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। नॉन-इंग्लिश कंटेंट की ग्लोबल रैंकिंग में यह सीरीज दूसरे नंबर पर है, जबकि भारत में नंबर एक पर बनी हुई है। यह लगातार दूसरी नेटफ्लिक्स सीरीज है, जिसे मैचबॉक्स ने बनाया और जिसने ग्लोबल चार्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है। इससे पहले ‘IC 814: द कंधार हाईजैक’ भी ग्लोबल स्तर पर नंबर दो पर डेब्यू कर चुकी है।

200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट में बनी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ मैचबॉक्स शॉट्स की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। सीरीज के लिए काम कर रहे एयरबेस पर फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ शूटिंग की गई और करीब 450 लोगों की टीम ने बेहद कठिन हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में सेट पर काम किया।

हालांकि, कंपनी का सफर इतने बड़े स्तर से शुरू नहीं हुआ था। श्रीराम राघवन की ‘अंधाधुन’ मैचबॉक्स शॉट्स की पहली प्रोडक्शन थी। करीब 16 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया और 2018 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल रही। मैचबॉक्स के सफर में एक चीज लगातार बनी रही है—कहानी और कहानीकार पर भरोसा, साथ ही लागत पर नियंत्रण।

इसी सोच के बीच कंपनी ने अलग-अलग जॉनर और स्केल की कई परियोजनाएं की हैं, जिनमें ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’, ‘थ्री ऑफ अस’, ‘स्कूप’, ‘मेरी क्रिसमस’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्में और सीरीज शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग तरह की कहानियों में निवेश करना शुरुआत में एक क्रिएटिव फैसला था, जो धीरे-धीरे बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदल गया। इससे कंपनी किसी एक तरह के दर्शक या किसी एक फॉर्मेट पर निर्भर नहीं रहती।

संजय राउत्रे के साथ पार्टनर्स सरिता पाटिल और दीक्षा राउत्रे भी कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। मैचबॉक्स का मानना है कि किसी प्रोजेक्ट की सफलता सिर्फ उसकी ओपनिंग से तय नहीं होती। सरिता पाटिल के मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या लोग सालों बाद भी किसी फिल्म को देख रहे हैं और दूसरों को उसकी सिफारिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, दर्शकों का ऐसा प्यार खरीदा या किसी रणनीति से हासिल नहीं किया जा सकता।

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की ग्लोबल सफलता के बाद जहां कंपनी अपनी स्ट्रीमिंग स्लेट का विस्तार कर रही है, वहीं थिएट्रिकल फिल्मों को लेकर भी उसकी प्रतिबद्धता कायम है। कंपनी का कहना है कि हर फॉर्मेट की अपनी अर्थव्यवस्था और अपनी ऑडियंस होती है और हर कहानी को उसी हिसाब से विकसित किया जाता है। कुछ कहानियां सिनेमाघर में अजनबियों से भरे अंधेरे हॉल में देखने के लिए होती हैं, जबकि कुछ घर के आराम में ज्यादा बेहतर अनुभव देती हैं। दोनों अनुभव कंपनी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

मैचबॉक्स शॉट्स की नई स्लेट में श्रीराम राघवन के अलावा हंसल मेहता, वासन बाला और जस्मीत रीन जैसे फिल्ममेकर्स के साथ भी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंपनी का विस्तार सिर्फ फिल्मों और सीरीज तक सीमित नहीं है। मैचबॉक्स ने ‘द गुरुग्राम स्कूल मर्डर’ और ‘द जॉनसन एंड जॉनसन फाइल्स’ समेत कई किताबों के अधिकार भी हासिल किए हैं। इसका उद्देश्य अपनी कहानियों पर ज्यादा नियंत्रण रखना और तैयार स्क्रिप्ट्स के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय खुद मजबूत आईपी तैयार करना है।

संजय राउत्रे ने कहा कि बाहर से देखने पर मैचबॉक्स की स्लेट भले ही अलग-अलग तरह की नजर आती हो, लेकिन अंदर से हर प्रोजेक्ट के पीछे एक ही सवाल होता है—क्या यह कहानी अस्तित्व में आने लायक है और क्या इसे ऐसी लागत में बनाया जा सकता है, जिसे दर्शक सही ठहरा सकें?

उनके मुताबिक, कम बजट में बनाई गई ‘थ्री ऑफ अस’ जैसी शांत फिल्म कंपनी के लिए उतनी ही संतोषजनक हो सकती है, जितनी 200 करोड़ रुपये की ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ जैसी बड़ी फिल्म। उनके शब्दों में, “फिल्म का बड़ा होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि उसका गणित सही हो।”

मैचबॉक्स शॉट्स खुद को एक बुटीक प्रोडक्शन हाउस के रूप में देखता है, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा इससे कहीं बड़ी है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय तक चलने वाले आईपी तैयार करना, क्रिएटर्स के साथ मजबूत और स्थायी साझेदारी बनाना और थिएट्रिकल, स्ट्रीमिंग के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट में भी काम करना है।

आखिरकार, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ एक और हिट फिल्म या सीरीज बनाना नहीं है। असली लक्ष्य यह साबित करना है कि अनुशासन और सही बिजनेस मॉडल के साथ क्वालिटी कंटेंट को लंबे समय तक सफल कारोबार में बदला जा सकता है।

नोएडा का ये OTT स्टार्टअप हरियाणवी-भोजपुरी कंटेंट के दम पर चमका! 2 साल में 6.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

STAGE OTT Platform: भारत में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बात होती है, तो ज्यादातर लोग नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम का नाम लेते हैं। लेकिन इस बीच देश के रीजनल ‘बोली आधारित’ ओटीटी प्लेटफॉर्म STAGE ने चुपके से एक ऐसा बड़ा मार्केट कब्जा लिया है, जिसे बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘निश’ (Niche) समझकर छोड़ देते थे।

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY24 से FY26 के बीच STAGE के रेवेन्यू में 6.3 गुना का जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 150% रहा है।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल वीडियो और ओटीटी मार्केट में बड़े दिग्गजों के बीच STAGE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारतीय ओटीटी मार्केट में STAGE की हिस्सेदारी 1.6% पर पहुंच गई है। STAGE ने अपनी शुरुआत हरियाणवी और राजस्थानी बोलियों से की थी, लेकिन अब यह मॉडल 6 भाषा क्षेत्रों में फैल चुका है।

STAGE के सह-संस्थापक और सीईओ विनय सिंघल ने कहा, ‘भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और 1,900 से ज्यादा बोलियां हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने सिर्फ 5-6 भाषाओं के लिए कंटेंट बनाया। बाकी सबको ‘निश’ कह दिया गया। जबकि देश में ओटीटी पर आधा कंटेंट क्षेत्रीय भाषाओं में देखा जा रहा है। हमने सिर्फ देश की असली संस्कृति को सम्मान देकर प्लेटफॉर्म बनाया है।’

99% कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से, विज्ञापन का कोई चक्कर नहीं

जहाँ कई ऐप्स विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वहीं STAGE पूरी तरह से ‘सब्सक्रिप्शन-ओनली’ मॉडल पर काम करता है। FY26 में कंपनी की कुल कमाई का 99.2% हिस्सा केवल यूजर सब्सक्रिप्शन से आया है। Q1 FY27 में कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 80.3% हिस्सा पुराने यूजर्स के रिन्यूअल और रिएक्टिवेशन से आया है। FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 30.4% था, जो दिखाता है कि यूजर्स को इसका कंटेंट बेहद पसंद आ रहा है।

AI के इस्तेमाल से कंटेंट बनाना हुआ सस्ता

STAGE ने अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है। एआई की मदद से ओरिजिनल शोज और मूवीज का प्रोडक्शन टाइम और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। इससे उन भाषाओं/बोलियों में भी कंटेंट बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो गया है, जहां पहले पारंपरिक तरीके से काम करना नामुमकिन माना जाता था।

Cristiano Ronaldo: कभी सेल्सगर्ल का करती थीं काम…आज हजारों करोड़ की मालकिन, कौन है क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पत्नी जॉर्जीना रोड्रिगेज?

फुटबॉल स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अपनी लंबे समय से पार्टनर जॉर्जिना रोड्रिग के साथ शादी कर ली है। दोनों ने 11 अगस्त 2026 को पुर्तगाल के कास्केस में एक प्राइवेट सिविल समारोह में शादी की। इस खास मौके पर सिर्फ उनके करीबी परिवार के लोग मौजूद रहे और शादी को पूरी तरह प्राइवेट रखा गया। क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर अपनी शादी की जानकारी दी है। इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीर में दोनों के हाथ में शादी की अंगूठी नजर आ रही है। इस फोटो के कैप्शन में लिखा “C G” है।

शादी की खबर सामने आने के बाद फैंस उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं। इसके साथ ही लोगों में रोनाल्डो की पत्नी जॉर्जिना रोड्रिग को लेकर भी काफी दिलचस्पी बढ़ गई है और फैंस उनके बारे में जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं कौन है क्रिस्टियानो रोनाल्डो की वाइफ जॉर्जिना रोड्रिग

कौन है जॉर्जिना रोड्रिग

खबरों के मुताबिक, जॉर्जिना रोड्रिग का जन्म अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ था। उनके पिता जॉर्ज रोड्रिग अर्जेंटीना से थे, जबकि उनकी मां स्पेन की रहने वाली थीं। जॉर्जिना ने अपने बचपन के कुछ साल अर्जेंटीना में बिताए और बाद में अपनी मां के साथ स्पेन चली गईं। मनीकंट्रोल इंग्लिश की रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्जिना रोड्रिग को बचपन से ही डांस का शौक था और उन्होंने सिर्फ चार साल की उम्र में बैले सीखना शुरू कर दिया था। लेकिन, परिवार की आर्थिक परेशानियों के कारण उन्हें कुछ समय बाद डांस की ट्रेनिंग छोड़नी पड़ी।

 

गुच्ची स्टोर में हुई थी मुलाकात

18 साल की उम्र में जॉर्जिना मैड्रिड चली गईं, जहां उन्होंने हफ्ते के दिनों में रिटेल स्टोर में काम किया और वीकेंड पर एक बार में नौकरी की। कुछ समय बाद जॉर्जिना रोड्रिग को मैड्रिड के एक गुच्ची स्टोर में सेल्स असिस्टेंट की नौकरी मिल गई। यहीं करीब 2016 में उनकी मुलाकात क्रिस्टियानो रोनाल्डो से हुई। गुच्ची स्टोर में हुई ये मुलाकात आगे चलकर जॉर्जिना की निजी जिंदगी के साथ-साथ उनके करियर के लिए भी एक अहम मोड़ साबित हुई। मुलाकात के बाद दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगीं और कुछ समय बाद वे साथ में सार्वजनिक जगहों पर भी नजर आने लगे। उस समय रोनाल्डो फुटबॉल की दुनिया के बड़े सितारों में शामिल हो गए थे।

जनवरी 2017 में ज्यूरिख में हुए बेस्ट FIFA फुटबॉल अवॉर्ड्स के दौरान दोनों ने साथ में एक अहम सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद रोनाल्डो ने सोशल मीडिया पर जॉर्जिना के साथ तस्वीर शेयर कर अपने रिश्ते को खुलकर सामने रखा।

बिजनेसवुमन के तौर पर बना चुकी है पहचान

आज जॉर्जिना रोड्रिग एक मशहूर मॉडल, सोशल मीडिया पर्सनैलिटी और बिजनेसवुमन के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वह नेटफ्लिक्स की रियलिटी सीरीज ‘आई एम जॉर्जिना’ में भी नजर आईं, जिसमें उनकी निजी जिंदगी, परिवार और रोजमर्रा की लाइफस्टाइल को दिखाया गया। इस सीरीज में उन्हें प्रोड्यूसर के तौर पर भी क्रेडिट मिला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्जिना रोड्रिग की कुल संपत्ति करीब 10 मिलियन डॉलर आंकी जाती है, जो भारतीय मुद्रा में 90 करोड़ रुपये से अधिकहै।

IND vs SL: आखिरी बार टेस्ट सीरीज खेलने श्रीलंका कब गई थी टीम इंडिया? विराट कोहली की कप्तानी में रचा था इतिहास

OTT Releases This Week: ‘कॉकटेल 2’, ‘भारत भाग्य विधाता’, ‘रीचर 4’ और बहुत कुछ…, सिर्फ आपके फेवरिट ओटीटी चैनल्स पर

OTT Releases This Week: अगस्त के दूसरे हफ़्ते में Netflix, Prime Video, JioHotstar, Lionsgate Play और दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर कोर्टरूम ड्रामा, उलझे हुए रोमांस, राजनीतिक साज़िशें, सच्ची क्राइम कहानियाँ, साइकोलॉजिकल हॉरर और पसंदीदा शो की वापसी देखने को मिलेगी। सबसे आगे हैं ‘कॉकटेल 2’, जिसमें शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना एक रोमांटिक एक्सपेरिमेंट में शामिल होते हैं जो बुरी तरह बिगड़ जाता है; ‘भारत भाग्य विधाता’, जो 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान सर्वाइवल ड्रामा पर आधारित है; और ‘रीचर सीज़न 4’, जिसमें फ़िलाडेल्फ़िया सबवे पर एक परेशान करने वाली घटना के बाद एलन रिचसन एक और बड़ी साज़िश में फंस जाते हैं।

फ़ुटबॉल मैनेजमेंट में दो दशकों के सफ़र पर जोस मोरिन्हो की नज़र से लेकर ‘आख़िरी सवाल’ में एक युवा स्कॉलर का अपने मशहूर मेंटर को सबके सामने चुनौती देने तक, यहां 10 अगस्त से 14 अगस्त के बीच आने वाली OTT रिलीज़ की पूरी और बदली हुई लिस्ट दी गई है।

कॉकटेल 2 – 14 अगस्त (नेटफ्लिक्स)

‘कॉकटेल 2’ होमी अदजानिया की 2012 की रोमांटिक ड्रामा फ़िल्म का सीक्वल है। यह फ़िल्म कुणाल, दिया और एली के इर्द-गिर्द घूमती है। ये तीनों लोग यह महसूस करते हैं कि कैसे एक मासूम सा रिलेशनशिप एक्सपेरिमेंट उनके बीच के इमोशनल बैलेंस को कितनी तेज़ी से बिगाड़ सकता है। शाहिद कपूर ने कुणाल का रोल किया है, जो एक शेफ है और आर्किटेक्ट दिया (रश्मिका मंदाना) के साथ लंबे समय से रिलेशनशिप में है। शादी के बढ़ते दबाव को नज़रअंदाज़ करते हुए यह कपल छुट्टी मनाने सिसिली जाता है, जहां उनकी मुलाक़ात दिया की आज़ाद ख्यालों वाली यूनिवर्सिटी की दोस्त एली (कृति सेनन) से होती है। इसके बाद जो होता है, उसकी शुरुआत लगभग एक मज़ाक के तौर पर होती है। दिया, एली से कुणाल की वफ़ादारी परखने के लिए उससे फ़्लर्ट करने को कहती है। समस्या तब शुरू होती है जब एली सचमुच कुणाल को पसंद करने लगती है और फ़्लर्टिंग महज़ दिखावा नहीं रह जाती। जिस चीज़ का मकसद दिया को भरोसा दिलाना था, वह असल में इनसिक्योरिटी, आकर्षण और उन असहज सवालों को सामने ले आती है कि जिस रिश्ते को बचाने में उन्होंने सालों लगाए हैं, उस पर उन्हें असल में कितना भरोसा है।

भारत भाग्य विधाता – 14 अगस्त (ZEE5)

मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर बनी ‘भारत भाग्य विधाता’ बड़े जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) परिदृश्य से ध्यान हटाकर उन आम मेडिकल कर्मचारियों पर फोकस करती है, जो अचानक खुद को युद्ध जैसी स्थिति में पाते हैं। यह सर्वाइवल ड्रामा कामा और एल्ब्लेस हॉस्पिटल की नर्सों और दूसरे स्टाफ सदस्यों पर केंद्रित है, जब उनके आस-पास हिंसा भड़क उठती है। मरीज़ों, साथियों और आम नागरिकों की उन पर निर्भरता के कारण, मेडिकल कर्मचारियों को अपना काम जारी रखना पड़ता है, भले ही उन्हें पता हो कि उनकी अपनी जान को तुरंत खतरा है। यह फिल्म अपने किरदारों को पारंपरिक एक्शन हीरो में बदले बिना साहस को दिखाती है। इसके बजाय, यह उन पल-भर में लिए गए फैसलों, डर और ज़िम्मेदारी की भावना को उजागर करती है, जिसने आम प्रोफेशनल्स को हमले के दौरान सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के लिए प्रेरित किया।

रीचर सीजन 4 – 12 अगस्त (प्राइम वीडियो)

एलन रिचसन, ली चाइल्ड के 13वें ‘रीचर’ नॉवेल ‘गॉन टुमॉरो’ पर आधारित सीज़न में जैक रीचर के रोल में लौट रहे हैं। जहाँ किताब की कहानी न्यूयॉर्क में सेट है, वहीं सीरीज़ में कहानी को फिलाडेल्फिया ले जाया गया है, जहां सबवे में एक अचानक हुई मुलाकात रीचर को एक और साज़िश में फंसा देती है। जब वह ट्रेन में एक परेशान महिला को देखते हैं, तो रीचर को अंदाज़ा हो जाता है कि कुछ गड़बड़ है। इसके बाद जो होता है, वह उन्हें एक ऐसी जाँच में खींच लेता है जिसके नतीजे सिर्फ़ एक यात्री या एक घटना से कहीं ज़्यादा गहरे हैं। जैसे-जैसे वह मामले की गहराई में जाते हैं, यह केस ऐसे ताकतवर लोगों की ओर इशारा करने लगता है जो पर्दे के पीछे से घटनाओं को बदलने की ताकत रखते हैं। मारिया स्टेन ‘नीग्ली’ के रोल में लौट रही हैं, जबकि सिडेल नोएल, एग्नेज़ मो, अंगगुन, केविन कॉरिगन, मार्क ब्लूकास, कैथलीन रॉबर्टसन और क्रिस्टोफर मार्क्वेट चौथे सीज़न की कास्ट में शामिल हो रहे हैं।

आखिरी सवाल – 14 अगस्त (लायंसगेट प्ले)

नमाशी चक्रवर्ती ने विक्की हेगड़े का किरदार निभाया है, जो एक होनहार लेकिन गुस्सैल स्कॉलर है। अपने मेंटर के साथ उसका एकेडमिक झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि यह देश भर में चर्चा का विषय बन जाता है। संजय दत्त ने प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी का रोल किया है, जो एक जाने-माने इंटेलेक्चुअल हैं और RSS पर विक्की की थीसिस को खारिज कर देते हैं। इसके जवाब में विक्की, नाडकर्णी पर संस्थागत भेदभाव का सार्वजनिक आरोप लगाता है। यूनिवर्सिटी के अंदर का यह मामूली झगड़ा टीवी नेटवर्क और राजनीतिक समूहों के हाथ लग जाता है, जिससे मेंटर और स्टूडेंट टीवी पर होने वाली वैचारिक लड़ाई में एक-दूसरे के विरोधी बन जाते हैं। लेकिन विक्की का यह टकराव सिर्फ़ एकेडमिक निराशा की वजह से नहीं है। जैसे-जैसे उसके तीखे सवाल सार्वजनिक बहस की परतें खोलते हैं, एक बहुत ही निजी मकसद सामने आता है, जो आखिरकार रिसर्चर पल्लवी मेनन के रहस्यमय तरीके से गायब होने से जुड़े दशकों पुराने राज़ की ओर ले जाता है। इसमें अमित साध, समीरा रेड्डी, त्रिधा चौधरी और नीतू चंद्रा श्रीवास्तव भी हैं।

माई ब्रिलियंट करियर – 13 अगस्त (नेटफ्लिक्स)

माइल्स फ्रैंकलिन के 1901 के मशहूर ऑस्ट्रेलियाई नॉवेल पर पहली बार टेलीविज़न सीरीज़ बन रही है। इससे पहले 1979 में इस पर एक फ़िल्म बनी थी, जिसमें जूडी डेविस और सैम नील ने काम किया था। फिलिपा नॉर्थईस्ट ने सिबिला मेल्विन का किरदार निभाया है, जो 20वीं सदी की शुरुआत में ग्रामीण ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक समझदार और बेहद आज़ाद-ख्याल युवा महिला है। उसका परिवार शादी को ही उसके लिए सबसे सही भविष्य मानता है, लेकिन सिबिला लेखिका बनने के लिए पक्का इरादा कर चुकी है और दूसरों की तय की गई ज़िंदगी को चुपचाप स्वीकार करने से इनकार कर देती है। अमीर पड़ोसी हैरी बीचम (क्रिस्टोफर चुंग) के आने से उसकी यह सोच उलझन में पड़ जाती है। यह सीरीज़ सिर्फ़ करियर और रोमांस के बीच चुनाव की बात नहीं करती, बल्कि यह दिखाती है कि ऐसी दुनिया में, जहां महत्वाकांक्षा के बजाय आज्ञाकारिता को इनाम मिलता है, एक महिला के लिए आज़ाद होने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है।

मोरिन्हो – 11 अगस्त (नेटफ्लिक्स)

यह तीन-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री तब रिलीज़ हुई जब जोस मोरिन्हो ने रियल मैड्रिड में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया। इसमें फुटबॉल के सबसे मशहूर, आक्रामक और चर्चा में रहने वाले मैनेजरों में से एक के दो दशकों से ज़्यादा के करियर की कहानी दिखाई गई है। दो साल तक शूट की गई यह सीरीज़ 2004 में FC पोर्टो की शानदार चैंपियंस लीग जीत से शुरू होती है और फिर मोरिन्हो के चेल्सी, इंटर मिलान, रियल मैड्रिड, मैनचेस्टर यूनाइटेड, टोटेनहम, रोमा और फेनरबाहचे के साथ बिताए समय को दिखाती है। यह कहानी सिर्फ़ मोरिन्हो के नज़रिए से ही नहीं, बल्कि उन फुटबॉल हस्तियों के ज़रिए भी बताई गई है जिन्होंने उनके साथ काम किया, उनके खिलाफ़ खेले या उन्हें करीब से देखा। सर एलेक्स फर्ग्यूसन, जॉन टेरी, इकर कैसिलास, डिडियर ड्रोग्बा, ज़्लाटन इब्राहिमोविच, मार्सेलो, सैमुअल एटो, जेवियर ज़ानेटी, फ्रैंक लैम्पार्ड और पेट्र चेक जैसे लोग इस डॉक्यूमेंट्री में शामिल हैं।

द ट्रेटर्स सीज़न 2 – 13 अगस्त (प्राइम वीडियो)

करण जौहर धोखे, हेराफेरी और रणनीतिक संदेह से भरे एक और सीज़न की मेज़बानी करने लौट रहे हैं, जहां 20 प्रतिभागी एक ऐसे खेल में प्रवेश करते हैं जहाँ सहयोग अनिवार्य है, भले ही विश्वासघात खेल का अभिन्न अंग हो। प्रतिभागी आपस में संबंध बनाते हैं, आरोप लगाते हैं और अंतिम पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए दैनिक निष्कासन से बचने का प्रयास करते हैं। कोई भी दूसरे खिलाड़ी की वफादारी को हल्के में नहीं ले सकता, और हर बातचीत रणनीति का काम कर सकती है। दूसरा सीज़न एक बार फिर सामाजिक अवलोकन को खेल के केंद्र में रखता है, यह परखते हुए कि क्या प्रतिभागी गलत भरोसे के कारण घर भेजे जाने से पहले धोखे को पहचान सकते हैं।

पहली एंट्री सफलता की गारंटी नहीं; Google, Netflix और Facebook आए लेट लेकिन बदल दी कहानी

मार्केट में पहली एंट्री का शुरुआती फायदा मिल सकता है लेकिन बिजनेस हिस्ट्री के हिसाब से यह इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सबसे पुराना ही मार्केट में लंबे समय तक राज करेगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट सर्च से लेकर सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट तक कई कंपनियों ने बाद में इंडस्ट्री में एंट्री की और लीडर बन गए। उन्होंने तेजी से अपने को बढ़ाया और ग्राहकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से अपनाया। इंडस्ट्री में पहली बार जिस कंपनी की एंट्री हुई, वे नए बाजार बनाते है या मौजूदा मार्केट को बदलते हैं लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि बाद में आने वाली कंपनियों ने शानदार प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाकर मार्केट लीडर बन जाते हैं। यहां ऐसे ही पांच उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती मार्केट लीडर को पछाड़ दिया

Android vs Apple’s iOS

जून 2007 में जब एपल (Apple) ने आईफोन (iPhone) लॉन्च किया, तो उसने स्मार्टफोन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी। इसने मॉडर्न टचस्क्रीन डिवाइस और ऐप-बेस्ड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। इसके 18 महीने से भी कम समय बाद अक्टूबर 2008 में गूगल ने एंड्रॉयड को एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया। एपल के इंटीग्रेटेड हार्डवेयर अप्रोच के विपरीत इसने सैमसंग (Samsung), एचटीसी (HTC) और मोटोरोला (Motorola) जैसी कई हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की। इससे एंड्रायड को अलग-अलग प्राइस रेंज और इलाकों में तेजी से फैलने में मदद मिली। साल 2010 के आखिर तक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका था और आगे भी बना रहा। आज भी लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ यह दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बना हुआ है।

Facebook vs Yahoo

मायस्पेस (MySpace) अगस्त 2003 में आया और जल्द ही सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बन गया। इसके लाखों यूजर्स बने और इसने अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की। फिर फरवरी 2024 में फेसबुक ने मार्केट में एंट्री की। शुरुआत में तो यह सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए था और सितंबर 2006 में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। साफ-सुथरे इंटरफेस, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, अधिक दिलचस्प न्यूज फीड और कम स्पैम के जरिए इसने खुद को दूसरों से अलग बनाया। आम लोगों के लिए खुलने के लगभग 20 महीने बाद अप्रैल 2008 में फेसबुक ने ग्लोबल मंथली विजिटर्स के मामले में मायस्पेस को पीछे छोड़ दिया और 2009 तक इसने यूएस ट्रैफिक में भी पछाड़ दिया। यह सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।

Google vs Yahoo

गूगल से पहले इंटरनेट सर्च और वेब डायरेक्टरी पर 1994 में लॉन्च हुई याहू (Yahoo), 1994 में लॉन्च हुई लाइकोस (Lycos) और 1995 में लॉन्च हुई अल्टाविस्टा (AltaVista) जैसी कंपनियों का दबदबा था। फिर गूगल ने साल 1998 में पेज-रैंक (PageRank) के साथ मार्केट में एंट्री की। यह एक ऐसा सर्च एल्गोरिदम था जो सिर्फ वेबसाइटों की लिस्ट बनाने की बजाय, उनकी महत्ता यानी रेलेवेंस के आधार पर पेजों को रैंक करता था। इसने एक तेज़ और साफ-सुथरा होमपेज भी पेश किया, जो पोर्टल-स्टाइल वाले कॉम्पिटिटर्स से बिल्कुल अलग था। यही सादगी लोगों को भा गया। साल 2000 तक गूगल याहू का सर्च प्रोवाइडर बन गया और तेजी से एक प्रमुख सर्च इंजन के तौर पर उभरा। आगे चलकर ऑनलाइन सर्च का पर्यायवाची बन गया।

Netflix vs Blockbuster

ब्लॉकबस्टर ने 80 के दशक के आखिरी से हजारों फिजिकल स्टोर के जरिए दुनिया के सबसे बड़े वीडियो रेंटल बिजनेस में से एक खड़ा किया। साल 1997 में नेटफ्लिक्स ने ‘मेल के जरिए डीवीडी’ सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ डीवीडी रेंटल मार्केट में एंट्री की। इसमें लेट फीस हटा दी गई और फिर साल 2007 में इसने सब्सक्रिप्शन-बेस्ड वीडियो स्ट्रीमिंग में कदम रखा। एक तरफ ब्लॉकबस्टर कर्ज और स्टोर पर ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रहा था, वहीं नेटफ्लिक्स नए डिलीवरी मॉडल और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करती रही। ब्लॉकबस्टर ने साल 2010 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी, तो नेटफ्लिक्स दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।

Nintendo vs Atari

मैग्नावॉक्स (Magnavox) ने 1972 में पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था, लेकिन अटारी ने 1970 के दशक के आखिरी में अटारी 2600 के साथ इस कैटेगरी को मशहूर कर दिया। हालांकि सॉफ्टवेयर की गिरती क्वालिटी और मार्केट में जरूरत से अधिक सप्लाई की वजह से साल 1983 में वीडियो गेम इंडस्ट्री क्रैश हो गई। इसके बाद निनटेंडो ने अक्टूबर 1985 में निनटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम के साथ नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में एंट्री की। इसने गेम डेवलपर्स के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया और एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी में भारी निवेश किया, जिससे इसका इकोसिस्टम मजबूत हुआ। साल 1988 तक नॉर्थ अमेरिकन कंसोल मार्केट के अधिकतर हिस्से पर निनटेंडो का कब्जा हो गया, जिससे इंडस्ट्री को फिर से खड़ा करने में मदद मिली और साथ ही अटारी का हार्डवेयर बिजनेस कमजोर पड़ गया।

The Last House Advertising: ‘द लास्ट हाउस’ का प्रमोशन देख लोगों के उड़े होश, नेटफ्लिक्स ने क्रिटविटी की सारी हदें की पार

The Last House Advertising: ‘द लास्ट हाउस’ (The Last House) को प्रमोट करने के लिए नेटफिलिक्स ने बेहद अनोखा तरीका खोजा है। लॉस एंजिल्स के सनसेट बुलेवार्ड पर एक बेहद यूनिक और लाइव आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन लगाया गया है। खास बात ये हैं कि इस लाइव एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग कैंपेन में कुछ ऐसा जोड़ा गया है, जिसे देख हर कोई हैरान है।

दरअसल लाइव आउट-ऑफ-होम में जमीन से 30 फीट ऊपर एक बिलबोर्ड लगा है।, जिसमें एक लिविंग रूम में बनाया गया है। इतना ही नहीं इसके अंदर एक परफॉर्मर को रहने के लिए छोड़ दिया गया है। वह समय-समय पर आते जाते लोगों को क्रिएटिव स्लोगन वाले बोर्ड दिखाता है। कभी कॉफी पीता दिखता है।

बिलबोर्ड के अंदर रह रहा व्यक्ति आपको किताबें पढ़ता दिखता है, ताश खेलता नजर आता, दूरबीन से देखता है और नीचे से गुजरने वाले लोगों से बातचीत करता भी नजर आएगा। यह अनोखा विज्ञापन फिल्म की कहानी को दिखाता है, जिसमें एक परिवार अचानक अपने ही घर के अंदर फंस जाता है और सालों तक बाहर नहीं आ पाता है।

बिलबोर्ड पर आप “द लास्ट हाउस आप कब तक जिंदा रह सकते हैं?” (The Last House How long can you survive?) लिखा देख सकते हैं। यह लाइव प्रमोशन कैंपेन 6 अगस्त से 8 अगस्त 2026 तक चलने वाला है, जो फिल्म के प्रीमियर होते ही बंद कर दिया जाएगा।

कास्ट और डायरेक्टर की बात करें तो इस फिल्म का निर्देशन लुई लेटेरियर (Louis Leterrier) ने किया है। वहीं इसमें ग्रेटा ली (Greta Lee) व वैगनर मौरा (Wagner Moura) लीड रोल में हैं। फिल्म 7 अगस्त 2026 से Netflix पर स्ट्रीम की जा रही है।