Teacher’s Day 2026: ‘आदर्श बाल विद्यालय’ से ‘एस्पिरेंट्स’ तक, ओटीटी की 10 ऐसी सीरीज जो बताती हैं बेहतरीन शिक्षक सिर्फ क्लासरूम में नहीं होते

Teacher’s Day 2026: टीचर्स डे अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड और रिपोर्ट कार्ड तक सीमित नहीं रह गया है। हमें कई यादगार शिक्षक और मार्गदर्शक म्यूजिक स्कूल, कोचिंग सेंटर, कोर्टरूम, गांवों और जिंदगी के मुश्किल दौर में भी मिले हैं। ये किरदार सिर्फ हमें कोई विषय नहीं सिखाते, बल्कि हमारी जिंदगी को आकार देते हैं, हमारी सोच को चुनौती देते हैं और ऐसी सीख देते हैं जो फिल्म या सीरीज खत्म होने के बाद भी हमारे साथ रहती है।

इस टीचर्स डे पर नजर डालते हैं ओटीटी के उन टाइटल्स पर, जिनमें मेंटर्स, गाइड्स और ऐसे किरदार नजर आते हैं जो अनोखे अंदाज में शिक्षक की भूमिका निभाते हैं।

1. जगमे संगीतथम् (प्राइम वीडियो)

‘जगमे संगीत’ संगीत के जरिए गुरु और शिष्य के बीच के हमेशा बने रहने वाले रिश्ते को दिखाता है। वैकुंठपुरम की पृष्ठभूमि में बनी यह सीरीज शास्त्रीय परंपराओं को दिखाती है। इसमें शास्त्री (प्रकाश राज) अपने पोते का मार्गदर्शन करते हैं, जिसका किरदार अक्षय लगुसानी ने निभाया है। यह कहानी बताती है कि एक गुरु और शिष्य का रिश्ता सिर्फ प्रतिभा तक सीमित नहीं होता, बल्कि अनुशासन, विरासत और भरोसे पर भी टिका होता है।

2. बंदिश बैंडिट्स (प्राइम वीडियो)

‘बंदिश बैंडिट्स’ की कहानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कला को पहुंचाने के बारे में है। पंडित राधेमोहन राठौड़ (नसीरुद्दीन शाह) की कड़ी ट्रेनिंग से लेकर राधे (ऋत्विक भौमिक) के अपनी खुद की पहचान और आवाज तलाशने तक, यह सीरीज खूबसूरती से दिखाती है कि अच्छे शिक्षक हमें हमारी क्षमता पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं।

3. कोटा फैक्ट्री (नेटफ्लिक्स)

बहुत कम शोज ने शिक्षक की भूमिका को ‘कोटा फैक्ट्री’ जितने अलग अंदाज में दिखाया है। जीतू भैया सिर्फ फिजिक्स के शिक्षक नहीं हैं, बल्कि छात्रों के मेंटर, काउंसलर और भावनात्मक सहारे भी हैं। वह छात्रों को उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

4. एस्पिरेंट्स (प्राइम वीडियो)

यूपीएससी की तैयारी सिर्फ परीक्षा देने तक सीमित नहीं है और ‘एस्पिरेंट्स’ हमें यही याद दिलाता है। संदीप भैया, अभिलाष के ऐसे मेंटर बन जाते हैं, जिसकी उन्होंने खुद भी उम्मीद नहीं की थी। इस पूरी कहानी में मेंटर और एक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र का रिश्ता दिखाता है कि मुश्किल रास्ते पर साथ चलने वाले लोगों से हमें मार्गदर्शन के साथ-साथ कई बार मतभेद और टकराव भी मिलते हैं।

5. रॉकेट बॉयज (सोनीलिव)

कुछ शिक्षक सिर्फ एक क्लासरूम को प्रभावित करते हैं, जबकि कुछ पूरे देश को आकार देते हैं। ‘रॉकेट बॉयज़’ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के जरिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन की कहानी दिखाता है। यह बताता है कि कैसे सोच, जिज्ञासा और नेतृत्व की भावना आने वाली पीढ़ियों के इनोवेटर्स को प्रेरित कर सकती है।

6. क्रिमिनल जस्टिस: अ फैमिली मैटर (जियोहॉटस्टार)

माधव मिश्रा भले ही एक वकील हैं, लेकिन हर केस उनके लिए सहानुभूति, न्याय और इंसानियत की एक नई सीख लेकर आता है। शो में शिवानी को मेंटर करने के दौरान माधव का किरदार साबित करता है कि जिंदगी की सबसे मुश्किल परिस्थितियां ही कई बार हमारी सबसे बड़ी शिक्षक बन जाती हैं।

7. मिथ्या (ज़ी5)

‘मिथ्या’ में हुमा कुरैशी और अवंतिका दसानी के किरदारों के बीच एक प्रोफेसर और छात्रा का रिश्ता दिखाया गया है, जो आगे चलकर एक अप्रत्याशित मोड़ लेता है। यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर दिखाती है कि ताकत, प्रभाव और मार्गदर्शन का रिश्ता किस तरह खतरनाक स्थिति में बदल सकता है। यही वजह है कि यह ओटीटी पर शिक्षक और छात्र के रिश्ते की सबसे अलग कहानियों में से एक है।

8. आदर्श बाल विद्यालय (प्राइम वीडियो)

हाल के समय में बहुत कम शोज ने स्कूल की जिंदगी को ‘आदर्श बाल विद्यालय’ जितनी गर्मजोशी और सच्चाई से दिखाया है। इसके शिक्षक और छात्र हमें याद दिलाते हैं कि शिक्षा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दयालुता, आत्मविश्वास और एक-दूसरे का साथ देना भी उतना ही जरूरी है। इस कहानी में प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी और छात्रों का रिश्ता खास तौर पर देखने लायक है।

9. हाफ सीए (प्राइम वीडियो)

बड़े होने के दौरान हमें ऐसे मेंटर्स की जरूरत होती है जो किताबों से आगे जाकर हमारी परेशानियों को समझ सकें। ‘हाफ सीए’ उन युवाओं की कहानी है जो चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे हैं और पढ़ाई, उम्मीदों और खुद पर होने वाले संदेह के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। यह उन शिक्षकों और मार्गदर्शकों की अहमियत को दिखाता है जो इस सफर को थोड़ा आसान बना देते हैं।

10. 13th: सम लेसन्स आरंट टॉट इन क्लासरूम्स (सोनीलिव)

यह प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री साबित करती है कि शिक्षा सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। ‘13th सम लेसन्स आरंट टॉट इन क्लासरूम्स’ दर्शकों को इतिहास, व्यवस्था और समाज पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित करती है। यही वजह है कि टीचर्स डे पर देखने के लिए यह एक सोचने पर मजबूर करने वाली डॉक्यूमेंट्री है।

इस टीचर्स डे पर ये कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि सबसे प्रभावशाली शिक्षक हमेशा ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े नहीं होते। कई बार वे मेंटर, माता-पिता, दोस्त, प्रोफेशनल्स या खुद जिंदगी होती है, जो हमें ऐसी सीख देकर जाती है जो हमेशा हमारे साथ रहती है।

भास्कर अपडेट्स:दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा घेरा हटाया गया

दिल्ली में भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स और ट्रैफिक बोलार्ड्स हटा दिए हैं। इन बैरिकेड्स से पहले हाई कमीशन के आसपास बाहरी सुरक्षा घेरा बना हुआ था। आज की अन्य बड़ी खबरें… केन्या में हेलिकॉप्टर क्रैश, 7 की मौत; 5 अमेरिकी नागरिक और इक्वाडोर के खुफिया प्रमुख भी मारे गए केन्या के सांबुरु काउंटी में बुधवार सुबह हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई। इनमें 5 अमेरिकी नागरिक और इक्वाडोर की खुफिया एजेंसी के प्रमुख मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी शामिल हैं। हेलिकॉप्टर माउंट ओलोलोक्वे के पास क्रैश हुआ था। यह लोइसाबा वाइल्डलाइफ कंजर्वेंसी से एवासो न्गिरो नदी की ओर जा रहा था। इक्वाडोर के खुफिया प्रमुख मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी के साथ उनकी पत्नी स्टेफनी सेंसी भी हादसे में मारी गईं। स्टेफनी फैशन डिजाइनर थीं। स्पेनिश टीवी नेटवर्क टेलीमुंडो के एग्जीक्यूटिव जोसे सुआरेज के भी मारे जाने की खबर है। हेलिकॉप्टर ऑपरेटर के मुताबिक, हादसे की वजह अभी पता नहीं चली है। केन्या रेड क्रॉस ने बताया कि हादसे वाली जगह पर आग और मुश्किल रास्ते के कारण राहत और शव निकालने के काम में परेशानी हुई। केन्या के परिवहन मंत्रालय ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। राहुल गांधी ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी को दी श्रद्धांजलि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पिता राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित किए। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- मंदिरों में भेदभाव की कोई जगह नहीं, कांचीपुरम के मंदिर का मामला मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि भगवान की नजर में सभी जीव समान हैं और भगवान किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। कोर्ट ने साफ किया कि मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों में भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है। कोर्ट ने भगवद् गीता के अध्याय 9 के श्लोक 29 का हवाला देते हुए कहा कि मैं सभी जीवों के प्रति समान भाव रखता हूं। न मैं किसी का पक्ष लेता हूं, न किसी से द्वेष करता हूं। जो भक्तिभाव से मेरी पूजा करते हैं, वे मुझमें हैं और मैं उनमें हूं। मामला कांचीपुरम के अरुलमिगु देवराज स्वामीगल मंदिर, खासकर श्री मनवाला मामुनिगल श्राइन से जुड़ा था। यहां के एक निवासी ने याचिका में आरोप लगाया था कि गैर-ब्राह्मण भक्तों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि मनवाला मामुनिगल श्राइन में दो प्रवेश द्वार हैं- एक मुख्य और दूसरा साइड एंट्री। आरोप था कि गैर-ब्राह्मण भक्तों को मुख्य प्रवेश से जाने नहीं दिया जाता, जो साफ भेदभाव है। पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुलिस की मंजूरी, 30 शर्तें पुणे पुलिस ने राहुल गांधी के 22 अगस्त को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। हालांकि, पुलिस ने इसके लिए 30 शर्तें तय की हैं। आयोजकों को आपत्तिजनक तस्वीरें या बैनर लगाने से रोकने के साथ यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। कार्यक्रम शहर के RTO चौक के पास SSPMS कॉलेज ग्राउंड में शाम 4:30 से रात 9:30 बजे तक होगा। पुलिस के मुताबिक, इसमें 8,000 से 10,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। मणिपुर में 3 दिन स्कूल-कॉलेज बंद, कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का फैसला मणिपुर सरकार ने राज्य में 20 से 22 अगस्त तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का आदेश दिया है। सरकार ने यह फैसला मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिया है। इस दौरान बोर्ड से जुड़े सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी सभी संस्थानों पर लागू होगा। दरअसल, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर JFD ग्रुप ने 48 घंटे की हड़ताल बुलाई है। बुधवार को हड़ताल के दूसरे दिन घाटी के कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने नेताओं के पुतले जलाए और रैलियां निकालीं।

मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

13 साल की लक्ष्मी अपनी हिम्मत और मेहनत से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। शरीर से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपने स्कूल का काम पूरा करने का रास्ता खुद खोज लिया। वह पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और हर दिन यह साबित कर रही हैं कि मुश्किल हालात भी किसी के हौसले को रोक नहीं सकते।

सरकारी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली स्टूडेंट का जज्बा उन बच्चों के लिए भी इंस्पिरेशन है, जो किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ने का एक जरिया है। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, कोशिश जारी रखी जाए तो रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।

 

1. लक्ष्मी का डेली रूटीन

लक्ष्मी का स्कूल का रोज काम करने का तरीका काफी अलग है। वह अपने स्कूल बैग के पास बैठकर सबसे पहले उसे खोलती हैं और अपने पैरों की मदद से बैग के अंदर रखा सामान बाहर निकालती हैं। वह नोटबुक और पेन को सावधानी से निकालती हैं, फिर कॉपी को अपने सामने सही जगह पर रखती हैं। इसके बाद वह पन्ने पलटकर अपना काम शुरू कर देती हैं। आम बच्चों के लिए ये छोटे-छोटे काम बहुत आसान होते हैं, लेकिन लक्ष्मी को इन्हें करने के लिए ज्यादा मेहनत और ध्यान लगाना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने काम खुद करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने धीरे-धीरे इस तरीके को अपना डेली रूटीन बना लिया है।

 

2. पढ़ाई के प्रति लगन

लक्ष्मी की पढ़ाई के प्रति लगन उनकी सबसे खास बात है। वह अपने पैरों से पेन पकड़कर कॉपी में लिखती हैं और इसी तरह अपना स्कूल का काम पूरा करती हैं। वीडियो में वह बिना किसी जल्दबाजी के पूरे ध्यान से लिखती हुई दिखाई देती हैं। उनके लिए लिखना और कॉपी संभालना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया है। जिस काम के लिए दूसरे बच्चों को हाथों का सहारा मिलता है, उसके लिए लक्ष्मी अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए उन्हें रोज अभ्यास और मेहनत करनी पड़ती होगी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पढ़ाई के बीच रुकावट नहीं बनने दिया। उनका शांत तरीके से अपने काम पर ध्यान देना दिखाता है कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर कितनी गंभीर हैं।

 

3. बनी आम जनता की प्रेरणा

लक्ष्मी की लोगों ने उनकी मेहनत और हिम्मत की जमकर तारीफ की। कई लोगों को उनकी एकाग्रता और पढ़ाई के प्रति लगन काफी पसंद आई। लोगों ने उनके लिए अच्छे भविष्य, खुशी और सफलता की कामना करते हुए रियेक्ट किया। किसी ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें बहुत हिम्मती बताया, तो किसी ने उनके जज्बे को देखकर इंस्पिरेशन मिलने की बात कही। यही कारण है कि उनकी छोटी सी कोशिश कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गयी।

 

4. आगे बढ़ने का तरीका

लक्ष्मी की कहानी सिर्फ उनके स्कूल का काम करने या पैरों से लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देने की जरूरत भी दिखाती है। दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसा माहौल होना जरूरी है, जहां वे अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ाई कर सकें और बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। उनकी कहानी हमें यह समझाती है कि हर बच्चे के सीखने और आगे बढ़ने का तरीका अलग हो सकता है।

13 साल की लक्ष्मी की यह कहानी पढ़ाई के प्रति लगन को दिखाती है। पैरों से लिखकर स्कूल का काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। जो हमें सिखाती है कि सही मौका, सहयोग और मजबूत इरादे मिलें तो मुश्किल रास्ते भी आसान किए जा सकते हैं।

आलिया भट्ट का सेल्फ हीलिंग मंत्र हुआ वायरल, मुश्किल वक्त में हर किसी के आ रहा काम!

जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी सब कुछ आसानी से चलता है, तो कभी अचानक ऐसी मुश्किलें सामने आ जाती हैं, जिनसे संभलना मुश्किल लगता है। ऐसे समय में अपने लोगों का साथ, अपने काम का मकसद और खुद पर भरोसा आगे बढ़ने की ताकत देता है। आलिया भट्ट की कही बात भी यही बताती है कि मुश्किल रास्ते से घबराने के बजाय आगे बढ़ते रहना चाहिए।

 

 

परिवार एक ताकत

मुश्किल समय में परिवार और अपने लोगों का साथ बहुत बड़ी ताकत बन सकता है। आलिया भट्ट ने बताया कि जब उनकी एनर्जी कम फील होती है, तो अपनी बेटी को देखकर उन्हें फिर से नई एनर्जी मिलती है। इसलिए परेशानी के समय खुद को अकेला रखने के बजाय अपनों के करीब रहना मन को सुकून दे सकता है।

 

 

अपने फैसले और जिम्मेदारियां

जिंदगी में कई जिम्मेदारियां ऐसी होती हैं जिन्हें खुद अपनी इच्छा से चुना जाता है। काम, परिवार, करियर या कोई नया सपना, हर चुनाव के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी आती हैं। आलिया ने भी अपने एक्टर, प्रोड्यूसर, एंटरप्रेन्योर और मां बनने जैसे अलग-अलग रोल खुद चुने हैं। इसलिए शिकायत करने के बजाय याद रखें कि अपनी जिंदगी का फैसला खुद ही लिया गया था।

 

 

जिंदगी के उतार-चढ़ाव

जिंदगी का रास्ता हमेशा सीधा और आसान नहीं होता। कभी काम में परेशानी आती है, कभी रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते हैं और कभी अचानक ऐसी सिचुएशन बन जाती है जिसकी उम्मीद नहीं होती। इन मुश्किलों से हमेशा बच पाना संभव नहीं है। ऐसे समय में परेशानी के कारण रुकने के बजाय धीरे-धीरे रास्ता निकालकर आगे बढ़ना जरूरी होता है।

 

 

खुद पर भरोसा

मुश्किल समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना बहुत जरूरी है। जब हालात सही नहीं होते, तब कई बार लगता है कि चीजें कभी ठीक नहीं होंगी। लेकिन ऐसे समय में अपने फैसलों और अपनी मेहनत पर विश्वास रखना चाहिए। छोटी-छोटी परेशानियों से घबराने के बजाय एक-एक कदम आगे बढ़ते रहना बेहतर होता है।

 

हिम्मत रखें

मुश्किल हालात में बार-बार यह सोचने से कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों हुआ, परेशानी कम नहीं होती। कोई अपना, कोई सपना या जिंदगी का कोई खास मकसद आगे बढ़ने की वजह बन सकता है। जब मन थकने लगे, तो खुद को संभालकर आगे बढ़ना जरूरी है।

 

 

जिंदगी में मुश्किल समय सभी के सामने आता है। ऐसे समय में घबराने के बजाय खुद को संभालना और आगे बढ़ते रहना जरूरी है। अपनों का साथ मुश्किल समय में हिम्मत देता है। हर चीज हमारे हिसाब से नहीं चल सकती, लेकिन परेशानी का सामना कैसे करना है, यह हमारे हाथ में होता है।