लोगों ने काजोल की Disability देखी, विकास ने उनका पूरा व्यक्तित्व | Love Story of Disabled Woman

लोगों ने काजोल की Disability देखी, विकास ने उनका पूरा व्यक्तित्व  | Love Story of Disabled Woman

काजोल बचपन से Physical Disability के साथ जी रही हैं। लेकिन उनकी Disability कभी उनकी पहचान की सीमा नहीं बनी। 2010 में विकास से दोस्ती हुई, 2018 में प्यार और फिर परिवार की हिचक के बीच दोनों ने एक-दूसरे का साथ चुना। जानिए कैसे Vikas के प्यार और परिवार की Acceptance ने इस रिश्ते को एक खूबसूरत मुकाम तक पहुँचाया !

@i_am_kajol7

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लोगों ने काजोल की Disability देखी, विकास ने उनका पूरा व्यक्तित्व | inspiring love story of disabled woman

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भारत ने इंग्लैंड को 118 रनों से हराया, लॉर्ड्स गैलरी पर फिर दिखा गांगुली का जश्न (Video)

sourav ganguly

साल 2002 में नेटवेस्ट फाइनल में जीत के बाद सौरव गांगुली लॉर्ड्स की बालकनी में अपने जज्बात काबू में नहीं रख पाए थे और अपनी शर्ट उतार कर बालकनी में लहरा दी थी। 24 साल बाद वैसा ही जश्न  लॉर्ड्स की बालकनी में फिर दिखा लेकिन इस बार गांगुली नहीं बल्कि पूरी भारतीय टीम ने ऐसा कारनामा किया।

दरअसल भारत की मिक्स्ड डिसएबिलिटी क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड को 118 रनों से हरा दिया और बालकनी में पहुंचकर गांगुली के अंदाज में जश्न मनया। इस जश्न की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

दोनों टीमों के बीच में 7 मैचों की सीरीज हुई जिसमें अंतिम मुकाबले लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर खेला जाना था। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 206 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड की पूरी पारी महज 88 रनों के मामूली स्कोर पर आउट हो गई।भले ही लॉर्ड्स में भारतीय टीम जीती हो लेकिन इस सीरीज को इंग्लैंड ने 4-3 से जीता।

गांगुली ने नेटवेस्ट ट्रॉफी एकदिवसीय टूर्नामेंट के फाइनल में भारत की जीत का जश्न मनाने के लिए अपनी शर्ट उतार दी थी और यह आज तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे नाटकीय क्षणों में से एक है।दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में अपनी जीत उसी दिन दर्ज की जिस दिन उसने 2019 में एकदिवसीय विश्व कप फाइनल में स्कोर बराबर रहने के बाद बाउंड्री काउंट-बैक के आधार पर न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत हासिल की थी।

मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

13 साल की लक्ष्मी अपनी हिम्मत और मेहनत से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। शरीर से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपने स्कूल का काम पूरा करने का रास्ता खुद खोज लिया। वह पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और हर दिन यह साबित कर रही हैं कि मुश्किल हालात भी किसी के हौसले को रोक नहीं सकते।

सरकारी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली स्टूडेंट का जज्बा उन बच्चों के लिए भी इंस्पिरेशन है, जो किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ने का एक जरिया है। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, कोशिश जारी रखी जाए तो रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।

 

1. लक्ष्मी का डेली रूटीन

लक्ष्मी का स्कूल का रोज काम करने का तरीका काफी अलग है। वह अपने स्कूल बैग के पास बैठकर सबसे पहले उसे खोलती हैं और अपने पैरों की मदद से बैग के अंदर रखा सामान बाहर निकालती हैं। वह नोटबुक और पेन को सावधानी से निकालती हैं, फिर कॉपी को अपने सामने सही जगह पर रखती हैं। इसके बाद वह पन्ने पलटकर अपना काम शुरू कर देती हैं। आम बच्चों के लिए ये छोटे-छोटे काम बहुत आसान होते हैं, लेकिन लक्ष्मी को इन्हें करने के लिए ज्यादा मेहनत और ध्यान लगाना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने काम खुद करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने धीरे-धीरे इस तरीके को अपना डेली रूटीन बना लिया है।

 

2. पढ़ाई के प्रति लगन

लक्ष्मी की पढ़ाई के प्रति लगन उनकी सबसे खास बात है। वह अपने पैरों से पेन पकड़कर कॉपी में लिखती हैं और इसी तरह अपना स्कूल का काम पूरा करती हैं। वीडियो में वह बिना किसी जल्दबाजी के पूरे ध्यान से लिखती हुई दिखाई देती हैं। उनके लिए लिखना और कॉपी संभालना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया है। जिस काम के लिए दूसरे बच्चों को हाथों का सहारा मिलता है, उसके लिए लक्ष्मी अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए उन्हें रोज अभ्यास और मेहनत करनी पड़ती होगी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पढ़ाई के बीच रुकावट नहीं बनने दिया। उनका शांत तरीके से अपने काम पर ध्यान देना दिखाता है कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर कितनी गंभीर हैं।

 

3. बनी आम जनता की प्रेरणा

लक्ष्मी की लोगों ने उनकी मेहनत और हिम्मत की जमकर तारीफ की। कई लोगों को उनकी एकाग्रता और पढ़ाई के प्रति लगन काफी पसंद आई। लोगों ने उनके लिए अच्छे भविष्य, खुशी और सफलता की कामना करते हुए रियेक्ट किया। किसी ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें बहुत हिम्मती बताया, तो किसी ने उनके जज्बे को देखकर इंस्पिरेशन मिलने की बात कही। यही कारण है कि उनकी छोटी सी कोशिश कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गयी।

 

4. आगे बढ़ने का तरीका

लक्ष्मी की कहानी सिर्फ उनके स्कूल का काम करने या पैरों से लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देने की जरूरत भी दिखाती है। दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसा माहौल होना जरूरी है, जहां वे अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ाई कर सकें और बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। उनकी कहानी हमें यह समझाती है कि हर बच्चे के सीखने और आगे बढ़ने का तरीका अलग हो सकता है।

13 साल की लक्ष्मी की यह कहानी पढ़ाई के प्रति लगन को दिखाती है। पैरों से लिखकर स्कूल का काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। जो हमें सिखाती है कि सही मौका, सहयोग और मजबूत इरादे मिलें तो मुश्किल रास्ते भी आसान किए जा सकते हैं।