हर बात पर रिएक्ट करने से पहले ऐश्वर्या राय की ये 5 सीख जान लें!

आज के दौर में लोग किसी के कुछ कहने पर तुरंत जवाब देने लगते है, लेकिन हर बात पर रियेक्ट देना जरूरी नहीं होता। कई बार चुप रहना, लोगों की बातों को नजरअंदाज करना और अपनी सोच पर कायम रहना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। ऐश्वर्या राय बच्चन का एक पुराना विचार भी इसी बात को सामने रखता है कि शोर मचाना और अपनी बात साबित करने की कोशिश करना आसान है, लेकिन बिना कुछ कहे शांत रहना और खुद पर भरोसा रखना असली हिम्मत है।

उनका यह विचार सिर्फ सेलिब्रिटी की लाइफ में ही नहीं, बल्कि आम जिंदगी में भी काफी काम आ सकता है। हर बहस का जवाब देना, हर अफवाह पर सफाई देना मानसिक रूप से थका सकता है। कई बार समय के साथ सच खुद सामने आ जाता है और ऐसे में शांत रहना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी और सेल्फ-कॉन्फिडेंस को दिखाता है।

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1. खुद पर भरोसा रखें

इस विचार की सबसे बड़ी सीख यही है कि हर किसी की राय को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। यदि आपको अपने डिसीजन और अपनी सच्चाई पर भरोसा है, तो हर व्यक्ति को समझाने की जरूरत नहीं होती। ऐश्वर्या की बात यह संदेश देती है कि छोटी-छोटी बातों में उलझने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना अच्छा है।

 

 

 

2. खामोशी को बनाये ताकत

ऐश्वर्या राय बच्चन ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि चुप रहने में बहुत ताकत होती है। उनका मानना था कि गुस्से में तुरंत बोल देना या अपनी बात जोर-जोर से रखना आसान है, लेकिन किसी सिचुएशन में शांत रहना ज्यादा मुश्किल होता है। जब कोई दूसरों की बातों के बावजूद खुद पर भरोसा रखता है, तो उसे बार-बार सफाई देने की जरूरत महसूस नहीं होती।

 

 

 

3. हर बात पर रियेक्ट न करें

लोगों की राय, अफवाहों या आलोचना का सामना हर किसी को करना पड़ सकता है। ऐसी सिचुएशन में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बात और बढ़ सकती है। ऐश्वर्या की कही बात यह समझाती है कि हर आरोप या चर्चा का जवाब देना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी चुप रहकर समय को अपना काम करने देना बेहतर होता है। इससे बेवजह का स्ट्रेस कम होता है।

 

 

 

4. समय खुद देगा जवाब

हर बात का जवाब शब्दों से देना जरूरी नहीं होता। कई बार शांत रहकर अपने काम पर ध्यान देना ही सबसे बेहतर जवाब बन जाता है।बेवजह की बहस या लोगों को समझाने में अपनी एनर्जी खर्च करने के बजाय धैर्य रखना और अपने काम से खुद को साबित करना ज्यादा बेहतर हो सकता है।

 

 

 

5. पर्सनल लाइफ प्राइवेट रखें

फिल्म इंडस्ट्री में रहने के कारण ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से लोगों और मीडिया की नजरों में रही हैं। उनकी प्राइवेट लाइफ और करियर को लेकर भी कई तरह की बातें होती रही हैं। उनकी सोच यह बताती है कि अपनी प्राइवेट लाइफ को हर किसी के सामने साबित करने या समझाने की जरूरत नहीं है। कई बार अपने तक रखना ही सही होता है।

 

 

 

ऐश्वर्या राय बच्चन की इस बात की सीख यही है कि हर सिचुएशन में बोलना या खुद को सही साबित करना जरूरी नहीं होता। कई बार शांत रहना और कम बोलना ज्यादा बेहतर होता है। इसलिए अगली बार जब कोई बात आपको परेशान करे, तो तुरंत रियेक्ट देने के बजाय थोड़ा रुकें, सोचें और जरूरत हो तो चुप रहना चुनें।

मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

13 साल की लक्ष्मी अपनी हिम्मत और मेहनत से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। शरीर से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपने स्कूल का काम पूरा करने का रास्ता खुद खोज लिया। वह पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और हर दिन यह साबित कर रही हैं कि मुश्किल हालात भी किसी के हौसले को रोक नहीं सकते।

सरकारी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली स्टूडेंट का जज्बा उन बच्चों के लिए भी इंस्पिरेशन है, जो किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ने का एक जरिया है। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, कोशिश जारी रखी जाए तो रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।

 

1. लक्ष्मी का डेली रूटीन

लक्ष्मी का स्कूल का रोज काम करने का तरीका काफी अलग है। वह अपने स्कूल बैग के पास बैठकर सबसे पहले उसे खोलती हैं और अपने पैरों की मदद से बैग के अंदर रखा सामान बाहर निकालती हैं। वह नोटबुक और पेन को सावधानी से निकालती हैं, फिर कॉपी को अपने सामने सही जगह पर रखती हैं। इसके बाद वह पन्ने पलटकर अपना काम शुरू कर देती हैं। आम बच्चों के लिए ये छोटे-छोटे काम बहुत आसान होते हैं, लेकिन लक्ष्मी को इन्हें करने के लिए ज्यादा मेहनत और ध्यान लगाना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने काम खुद करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने धीरे-धीरे इस तरीके को अपना डेली रूटीन बना लिया है।

 

2. पढ़ाई के प्रति लगन

लक्ष्मी की पढ़ाई के प्रति लगन उनकी सबसे खास बात है। वह अपने पैरों से पेन पकड़कर कॉपी में लिखती हैं और इसी तरह अपना स्कूल का काम पूरा करती हैं। वीडियो में वह बिना किसी जल्दबाजी के पूरे ध्यान से लिखती हुई दिखाई देती हैं। उनके लिए लिखना और कॉपी संभालना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया है। जिस काम के लिए दूसरे बच्चों को हाथों का सहारा मिलता है, उसके लिए लक्ष्मी अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए उन्हें रोज अभ्यास और मेहनत करनी पड़ती होगी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पढ़ाई के बीच रुकावट नहीं बनने दिया। उनका शांत तरीके से अपने काम पर ध्यान देना दिखाता है कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर कितनी गंभीर हैं।

 

3. बनी आम जनता की प्रेरणा

लक्ष्मी की लोगों ने उनकी मेहनत और हिम्मत की जमकर तारीफ की। कई लोगों को उनकी एकाग्रता और पढ़ाई के प्रति लगन काफी पसंद आई। लोगों ने उनके लिए अच्छे भविष्य, खुशी और सफलता की कामना करते हुए रियेक्ट किया। किसी ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें बहुत हिम्मती बताया, तो किसी ने उनके जज्बे को देखकर इंस्पिरेशन मिलने की बात कही। यही कारण है कि उनकी छोटी सी कोशिश कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गयी।

 

4. आगे बढ़ने का तरीका

लक्ष्मी की कहानी सिर्फ उनके स्कूल का काम करने या पैरों से लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देने की जरूरत भी दिखाती है। दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसा माहौल होना जरूरी है, जहां वे अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ाई कर सकें और बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। उनकी कहानी हमें यह समझाती है कि हर बच्चे के सीखने और आगे बढ़ने का तरीका अलग हो सकता है।

13 साल की लक्ष्मी की यह कहानी पढ़ाई के प्रति लगन को दिखाती है। पैरों से लिखकर स्कूल का काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। जो हमें सिखाती है कि सही मौका, सहयोग और मजबूत इरादे मिलें तो मुश्किल रास्ते भी आसान किए जा सकते हैं।

जिंदगी के हर मोड़ पर आएंगी काम, ये 6 किताबें सिखाएंगी जीने का हुनर!

जिंदगी की बड़ी सीख किसी एक्सपीरियंस से नहीं मिलती। कई बार रोज की छोटी-छोटी बातें, लोगों से मिलना, रिश्ते और घटनाएं भी बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कुछ किताबें ऐसी ही आम जिंदगी और छोटे पलों की कहानियां बताती हैं, जिनसे खुशी, रिश्तों, उम्मीद और खुद को समझने की सीख मिलती है।

 

 

द हाउस ऑन मैंगो स्ट्रीट – सैंड्रा सिस्नेरोस

THE HOUSE ON MANGO STREET by CISNEROS, SANDRA: (1983) | JOHN LUTSCHAK BOOKS

सैंड्रा सिस्नेरोस की यह किताब एस्पेरांजा नाम की एक लड़की की कहानी है। जो बड़ी हो रही है और धीरे-धीरे खुद को समझने की कोशिश करती है। उसके आसपास रहने वाले लोग, परिवार और रोज होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं उसके सोच को बदलती हैं। कहानी यह समझाती है कि जिस जगह और माहौल में इंसान बड़ा होता है, उसका असर उसकी सोच और पहचान पर पड़ता है।

 

 

ऐन ऑफ ग्रीन गेबल्स – एल.एम. मोंटगोमरी

Anne of Green Gables Vintage Illustrated Hardcover Book - Etsy Australia

एल.एम. मोंटगोमरी की यह कहानी ऐन शर्ली नाम की एक बहुत ही कल्पनाशील लड़की की है। ऐन को लंबे समय तक ऐसा लगता है कि उसे कोई नहीं चाहता, लेकिन बाद में उसे एक घर और अपनेपन का एहसास मिलता है। वह छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी ढूंढ लेती है। प्रकृति, दोस्ती और रोज के अनुभव उसके लिए खास बन जाते हैं। यह किताब सिखाती है कि खुशी सिर्फ बड़ी चीजों से नहीं मिलती। सही सोच, उम्मीद, दया और छोटी खुशियों की कद्र करने से भी जिंदगी खूबसूरत बन सकती है।

 

 

अ मैन कॉल्ड ओवे – फ्रेडरिक बैकमैन

A Man Called Ove: The global bestselling phenomenon : Buy Online at Best Price in KSA - Souq is now Amazon.sa: Backman, Fredrik, Koch, Henning: Books

फ्रेडरिक बैकमैन की यह कहानी ओवे नाम के एक अकेले और थोड़े गुस्सैल व्यक्ति की है। ओवे को जिंदगी में बदलाव बिल्कुल पसंद नहीं होता। लेकिन जब उसके नए पड़ोसी उसके जीवन में आते हैं, तो धीरे-धीरे उसकी दुनिया बदलने लगती है। उसके व्यवहार के पीछे छिपी अच्छाई सामने आने लगती हैं। कहानी बताती है कि कई बार कठोर दिखने वाले लोगों में भी प्यार और अपनापन छिपा होता है।

 

 

द स्टोरीड लाइफ ऑफ ए.जे. फिक्री – गैब्रिएल जेविन

गैब्रिएल जेविन की यह किताब ए.जे. फिक्री नाम के एक बुकस्टोर मालिक की कहानी है। वह अकेला रहता है और उसकी जिंदगी बहुत शांत तरीके से चल रही होती है।लेकिन अचानक होने वाली घटनाओं से उसका नजरिया बदलने लगता है। धीरे-धीरे उसे रिश्तों, दोस्ती और अपनेपन की अहमियत समझ आती है। यह कहानी बताती है कि जिंदगी में नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती।

 

 

द लिटिल प्रिंस – एंटोनी डी सेंट एक्सुपरी

एंटोनी डी सेंट-एक्सुपरी की ‘द लिटिल प्रिंस’ देखने में बच्चों की कहानी लगती है, लेकिन इसमें बड़ों के लिए भी बहुत सी जरूरी बातें छिपी हैं। कहानी में लिटिल प्रिंस अलग-अलग लोगों से मिलता है और उनके जरिए प्यार, दोस्ती, जिम्मेदारी और अकेलेपन को समझता है। यह किताब बताती है कि बड़े होने के बाद भी जिंदगी में छोटी चीजों को लेकर उत्सुकता और खुशी बनाए रखनी चाहिए।

 

 

ट्यूजडेज विद मॉरी -मिच एल्बम

मिच एल्बम की यह किताब राइटर और उनके पुराने प्रोफेसर मॉरी श्वार्ट्ज के बीच होने वाली मुलाकातों पर बेस्ड है। मॉरी बताते हैं कि लोग कई बार पैसा, काम और सफलता पाने की दौड़ में उन चीजों को भूल जाते हैं जो सच में खुशी देती हैं। वह रिश्तों को समय देने और अपने परिवार के साथ प्यार से रहने की बात करते हैं। इस किताब में जिंदगी की बड़ी सीख को आम बातचीत से समझाया गया है।

 

 

रोज की जिंदगी से सीख

इन सभी किताबों की कहानियां अलग हैं, लेकिन इनका मेसेज काफी हद तक एक जैसा है। जिंदगी की खुशी हमेशा बड़ी सफलता या बड़ी घटना में नहीं होती। परिवार के साथ बिताया समय, दोस्ती, किसी की मदद करना, छोटी खुशियों को महसूस करना और मुश्किल समय में उम्मीद बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।