JLR opens bookings for Range Rover Electric with up to 600km range

JLR opens bookings for Range Rover Electric with up to 600km range
Range Rover Electric

Bookings for the Range Rover Electric have commenced in India from today. Order books are open for Range Rover Electric standard wheelbase in Autobiography and long-wheelbase in SV, SV Ultra and SV Black versions. The company is also accepting bookings for the standard wheelbase Range Rover Electric First Edition. 

The Range Rover Electric is Jaguar Land Rover’s (JLR) second EV after the Jaguar I-Pace. However, unlike the contract-manufactured Jaguar I-Pace, the Range Rover Electric is the first EV to be fully developed and built in-house at JLR.

Skoda opens bookings for second batch of Octavia RS

Skoda opens bookings for second batch of Octavia RS
Skoda Octavia RS India launch

Having sold out the Octavia RS’s first batch comprising 100 units last year, Skoda has now announced a second batch for the model in India. The Octavia RS has quite a loyal fan base in our market, which means many enthusiasts were left disappointed, despite its high asking price. The Octavia RS will return this year with another allocation of 50 units, the deliveries of which are expected around the upcoming festive season. However, the car will continue to be a full import, which means prices can be expected to be quite steep. 

  1. Existing bookings from the previous year will be honoured first 
  2. Octavia RS is powered by a 265hp 2.0-litre turbo-petrol engine 
  3. The new Octavia RS batch will be available in three colour options

Skoda Octavia RS second batch details 

Speaking to Autocar India last year, Ashish Gupta, brand director for Skoda India, had said, “I will definitely be working on getting more cars to India. Apart from the ones already allocated, the remaining people are on our communications list. We will be in touch with them, and our endeavour will be to get more cars early next year.”

Skoda Octavia RS Front Left Three Quarter

Gupta had then said the brand had amassed nearly 350 bookings. The company will be honouring the existing bookings first before opening the order books to new customers. For reference, the first batch of the Octavia RS was launched at an ex-showroom price of Rs 49.99 lakh. 

Skoda Octavia RS powertrain details 

The inbound batch of the Octavia RS will continue to be powered by a 265hp, 370Nm 2.0-litre 4-cylinder turbo-petrol engine. Transmission duties are handled by a 7-speed DSG automatic gearbox, and power is sent to the front wheels. Skoda claims a 0-100kph time of 6.4 seconds and an electronically limited top speed of 250kph. The same engine is also found under the hood of the Volkswagen Golf GTI, a second batch of which is also expected to arrive here. The new Octavia RS batch will be available in three colour options: Mamba Green, Velvet Red and Magic Black.  

Skoda Octavia RS Front Right Three Quarter

The Octavia RS has always enjoyed a cult status in India. Even the previous-generation Octavia RS 245 launched in 2020 (limited to 200 units) was sold out in a little over a month. 

This announcement comes alongside the debut of the Slavia facelift as well as the confirmation of the Superb’s return to India, importantly in diesel guise, marking the return of a diesel engine to the Volkswagen Group in India after 2020. While all other manufacturers have practically given up on sedans, Skoda will have quite an expansive sedan line-up ranging from mass-market to the premium segments.

कम होंगे बैंकर्स के लिए अदालतों के चक्कर! बदला 135 पुराना बैंकिंग कानून, ये है 5 बड़ी बातें

संसद ने इस महीने की शुरुआत में बैंकर्स बुक एविडेंस बिल 2026 (Bankers’ Books Evidence Bill 2026) पारित किया। इसका लक्ष्य बैंक रिकॉर्ड से जुड़े 135 साल पुराने कानून को बदलना और पारंपरिक बैंकिंग रिकॉर्ड को डिजिटल दौर के अनुरूप बनाना है। इससे जुड़ा कानून पहली बार वर्ष 1891 में उस समय पास किया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड्स मुख्य रूप से कागजी रूप में रखे जाते थे। अब नए कानून में बैंक के डिजिटल रूप को अधिक महत्ता दी गई है और इससे कोर्ट-कचहरी के मामले में बैंकिंग रिकॉर्ड को हासिल करने तथा इस्तेमाल करने के तरीके में बदलाव होगा। यहां इस कानून से जुड़े पांच अहम पहलू दिए गए हैं। हालांकि इससे ग्राहकों के डेटा की प्राइवेसी को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है।

डिजिटल बैंक रिकॉर्ड्स को सबूत के तौर पर मान्यता

सबसे बड़े बदलावों में से एक इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स को बैंकर्स बुक्स के तौर पर मान्यता देना है। साल 1891 का कानून फिजिकल बुक्स, लेजर्स और दूसरे ट्रेडिशनल रिकॉर्ड्स को ध्यान में रखकर बनाया गया था। नए बिल के मुताबिक बैंकों को अधिकतर ट्रांजैक्शन और अकाउंट्स की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखनी ही होगी। इसका मतलब है कि बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड किसी कानूनी मामले में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

असली रिकॉर्ड की जगह सर्टिफाइड कॉपी का इस्तेमाल

नए बैंकिंग कानून में मौजूदा नियम को बनाए रखा गया है, जिसके तहत बैंक रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी या उनके किसी हिस्से को सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है। यह इसलिए अहम है क्योंकि बैंकों के पास भारी-भरकम ट्रांजैक्शन डेटा होता है। हर कानूनी मामले के लिए मूल रिकॉर्ड पेश करने बहुत समय लग सकता है। हालांकि अब नई व्यवस्था के तहत असली बैंकर बुक के बजाय सर्टिफाइड कॉपी से काम चल जाएगा, जिससे अदालतों के लिए बैंक ट्रांजैक्शन की जांच करना आसान हो जाएगा। हालांकि इसमें ऐसे प्रावधान भी किया गया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिकॉर्ड भरोसेमंद हैं।

कानूनी एजेंसियों की ग्राहकों के खातों की जानकारी मांगना

इस बिल में एक प्रावधान है जिसे लेकर बहस छिड़ सकती है। इसके तहत लॉ एंफोर्समेंट एजेंसियां किसी ग्राहक के बैंक अकाउंट की जानकारी मांग सकते हैं। इस बिल में कुछ खास रैंक के पुलिस अधिकारियों को बिना किसी अदालती आदेश के सीधे बैंक से ही बैंकिंग अकाउंट की जानकारी हासिल करने का अधिकार मिला है। कुछ मामलों में बैंकों को इसके बारे में ग्राहकों को भी बताना होगा लेकिन किसी जांच, वित्तीय अपराध या नेशनल सिक्योरिटीज से जुड़े मामले में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

बैंक अधिकारियों को बार-बार कोर्ट में पेश होने से राहत

नए बिल में बैंक अधिकारियों को ऐसी स्थितियों में राहत दी गई है, जब उनके इंस्टीट्यूशंस किसी कानूनी कार्यवाही में सीधे तौर पर शामिल न हों। किसी अधिकारी को बैंक के रिकॉर्ड पेश करने या उनमें शामिल लेन-देन को साबित करने के लिए कोर्ट में पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। हालांकि रिकॉर्ड की सत्यता पर संदेह या जांच के आदेश का पालन नही होने की स्थिति में कोर्ट रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दे सकता है। इसका लक्ष्य बैंक अधिकारियों पर रूटीन बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कोर्ट केस में बार-बार पेश होने का बोझ कम करना है।

फाइनेंस सेक्टर की दूसरी एंटिटीज तक बढ़ा दायरा

नए बिल से केंद्र सरकार को इसके प्रावधान फाइनेंशियल सेक्टर दूसरी एंटिटीज या क्लास ऑफ एंटिटीज जैसे कि NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज), पेंशन फंड्स, बीमा कंपनियां इत्यादि पर लागू करने का अधिकार मिलता है। इन एंटिटीज पर कानून लागू करते समय शर्तें, छूट या बदलाव भी तय कर सकती है।

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Independence Day 2026: भारतीय आजादी, साहस और कर्तव्य पर बेस्ड ये 5 किताबें जरूर पढ़नी चाहिए

Independence Day 2026: हर साल अगस्त में भारत स्वतंत्रता दिवस के लिए सज-धज कर तैयार होता है। बालकनियों पर झंडे दिखाई देते हैं, स्कूलों की सभाओं में देशभक्ति के गीत गूंजते हैं और टीवी चैनलों पर भाषणों को दोबारा दिखाया जाता है। लेकिन, आजादी सिर्फ एक सुबह के समारोह से कहीं ज़्यादा की हकदार है।

अगर आप सच में समझना चाहते हैं कि आज़ादी का क्या मतलब है, तो कभी-कभी स्क्रीन बंद कर दें, फ़ोन रख दें और कोई किताब खोलें। सही किताब इतिहास को निजी अनुभव जैसा बना सकती है। इसलिए, इस आज़ादी के दिन, कुछ “ज़रूरी” पढ़ने के दबाव को भूल जाएं। कुछ ऐसा पढ़ें जो आपको थोड़ा बेचैन करे, आपमें गर्व की भावना जगाए और फिर आपको सोचने पर मजबूर करें।

यहां 5 ऐसी किताबें हैं जो आपको चुनौती देती हैं, उकसाती हैं और कभी-कभी ऐसे सवाल आपके सामने रखती हैं, जिनसे आप शायद बचना चाहेंगे।

जवाहरलाल नेहरू की ‘द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’

नेहरू की जेल की सज़ा के दौरान लिखी गई यह व्यापक किताब इतिहास, संस्कृति, राजनीति और दर्शन के नज़रिए से भारत को देखती है। यह आज़ादी का कोई मैनुअल नहीं, बल्कि खुद देश के साथ एक बातचीत है।

महात्मा गांधी की ‘द स्टोरी ऑफ़ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ’

गांधी खुद को एक बेदाग़ हीरो के तौर पर पेश नहीं करते। इसके बजाय, वे अपनी नाकामियों, शक, प्रयोगों और मान्यताओं की पड़ताल करते हैं, जिससे साहस कम वीरतापूर्ण और कहीं ज़्यादा मानवीय लगता है।

बिपन चंद्र की ‘इंडियाज़ स्ट्रगल फ़ॉर इंडिपेंडेंस’

जो लोग सोचते हैं कि आज़ादी सिर्फ़ इसलिए मिली क्योंकि गांधी ने मार्च का नेतृत्व किया, उनके लिए यह किताब एक ज़रूरी सुधार है। यह 1857 से 1947 तक के आंदोलन को लोगों, राजनीति और प्रतिरोध के ज़रिए दिखाती है।

बी.आर. अंबेडकर की ‘एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट’

अंबेडकर हमें एक असहज सच का सामना करने पर मजबूर करते हैं- जब सामाजिक असमानता बनी रहती है, तो राजनीतिक आज़ादी का कोई खास मतलब नहीं रह जाता। समानता के लिए उनकी ज़बरदस्त दलील इस किताब को आज भी उतना ही प्रासंगिक बनाती है।

रामचंद्र गुहा की ‘इंडिया आफ्टर गांधी’

1947 में आज़ादी मिलने से भारत की समस्याएं जादुई रूप से हल नहीं हो गईं। यह किताब उसके बाद के मुश्किल दशकों का ब्यौरा देती है और हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र के लिए धैर्य, असहमति, ज़िम्मेदारी और कोशिश करते रहने के साहस की ज़रूरत होती है।

रामचंद्र गुहा की ‘इंडिया आफ्टर गांधी’

1947 में आज़ादी मिलने से भारत की समस्याएं जादुई रूप से हल नहीं हो गईं। यह किताब उसके बाद के मुश्किल दशकों का ब्यौरा देती है और हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र के लिए धैर्य, असहमति, ज़िम्मेदारी और कोशिश करते रहने के साहस की ज़रूरत होती है।

जिंदगी के हर मोड़ पर आएंगी काम, ये 6 किताबें सिखाएंगी जीने का हुनर!

जिंदगी की बड़ी सीख किसी एक्सपीरियंस से नहीं मिलती। कई बार रोज की छोटी-छोटी बातें, लोगों से मिलना, रिश्ते और घटनाएं भी बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कुछ किताबें ऐसी ही आम जिंदगी और छोटे पलों की कहानियां बताती हैं, जिनसे खुशी, रिश्तों, उम्मीद और खुद को समझने की सीख मिलती है।

 

 

द हाउस ऑन मैंगो स्ट्रीट – सैंड्रा सिस्नेरोस

THE HOUSE ON MANGO STREET by CISNEROS, SANDRA: (1983) | JOHN LUTSCHAK BOOKS

सैंड्रा सिस्नेरोस की यह किताब एस्पेरांजा नाम की एक लड़की की कहानी है। जो बड़ी हो रही है और धीरे-धीरे खुद को समझने की कोशिश करती है। उसके आसपास रहने वाले लोग, परिवार और रोज होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं उसके सोच को बदलती हैं। कहानी यह समझाती है कि जिस जगह और माहौल में इंसान बड़ा होता है, उसका असर उसकी सोच और पहचान पर पड़ता है।

 

 

ऐन ऑफ ग्रीन गेबल्स – एल.एम. मोंटगोमरी

Anne of Green Gables Vintage Illustrated Hardcover Book - Etsy Australia

एल.एम. मोंटगोमरी की यह कहानी ऐन शर्ली नाम की एक बहुत ही कल्पनाशील लड़की की है। ऐन को लंबे समय तक ऐसा लगता है कि उसे कोई नहीं चाहता, लेकिन बाद में उसे एक घर और अपनेपन का एहसास मिलता है। वह छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी ढूंढ लेती है। प्रकृति, दोस्ती और रोज के अनुभव उसके लिए खास बन जाते हैं। यह किताब सिखाती है कि खुशी सिर्फ बड़ी चीजों से नहीं मिलती। सही सोच, उम्मीद, दया और छोटी खुशियों की कद्र करने से भी जिंदगी खूबसूरत बन सकती है।

 

 

अ मैन कॉल्ड ओवे – फ्रेडरिक बैकमैन

A Man Called Ove: The global bestselling phenomenon : Buy Online at Best Price in KSA - Souq is now Amazon.sa: Backman, Fredrik, Koch, Henning: Books

फ्रेडरिक बैकमैन की यह कहानी ओवे नाम के एक अकेले और थोड़े गुस्सैल व्यक्ति की है। ओवे को जिंदगी में बदलाव बिल्कुल पसंद नहीं होता। लेकिन जब उसके नए पड़ोसी उसके जीवन में आते हैं, तो धीरे-धीरे उसकी दुनिया बदलने लगती है। उसके व्यवहार के पीछे छिपी अच्छाई सामने आने लगती हैं। कहानी बताती है कि कई बार कठोर दिखने वाले लोगों में भी प्यार और अपनापन छिपा होता है।

 

 

द स्टोरीड लाइफ ऑफ ए.जे. फिक्री – गैब्रिएल जेविन

गैब्रिएल जेविन की यह किताब ए.जे. फिक्री नाम के एक बुकस्टोर मालिक की कहानी है। वह अकेला रहता है और उसकी जिंदगी बहुत शांत तरीके से चल रही होती है।लेकिन अचानक होने वाली घटनाओं से उसका नजरिया बदलने लगता है। धीरे-धीरे उसे रिश्तों, दोस्ती और अपनेपन की अहमियत समझ आती है। यह कहानी बताती है कि जिंदगी में नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती।

 

 

द लिटिल प्रिंस – एंटोनी डी सेंट एक्सुपरी

एंटोनी डी सेंट-एक्सुपरी की ‘द लिटिल प्रिंस’ देखने में बच्चों की कहानी लगती है, लेकिन इसमें बड़ों के लिए भी बहुत सी जरूरी बातें छिपी हैं। कहानी में लिटिल प्रिंस अलग-अलग लोगों से मिलता है और उनके जरिए प्यार, दोस्ती, जिम्मेदारी और अकेलेपन को समझता है। यह किताब बताती है कि बड़े होने के बाद भी जिंदगी में छोटी चीजों को लेकर उत्सुकता और खुशी बनाए रखनी चाहिए।

 

 

ट्यूजडेज विद मॉरी -मिच एल्बम

मिच एल्बम की यह किताब राइटर और उनके पुराने प्रोफेसर मॉरी श्वार्ट्ज के बीच होने वाली मुलाकातों पर बेस्ड है। मॉरी बताते हैं कि लोग कई बार पैसा, काम और सफलता पाने की दौड़ में उन चीजों को भूल जाते हैं जो सच में खुशी देती हैं। वह रिश्तों को समय देने और अपने परिवार के साथ प्यार से रहने की बात करते हैं। इस किताब में जिंदगी की बड़ी सीख को आम बातचीत से समझाया गया है।

 

 

रोज की जिंदगी से सीख

इन सभी किताबों की कहानियां अलग हैं, लेकिन इनका मेसेज काफी हद तक एक जैसा है। जिंदगी की खुशी हमेशा बड़ी सफलता या बड़ी घटना में नहीं होती। परिवार के साथ बिताया समय, दोस्ती, किसी की मदद करना, छोटी खुशियों को महसूस करना और मुश्किल समय में उम्मीद बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।

जिंदगी के मुश्किल दौर में ये 5 किताबें आपकी कर सकती हैं मदद, यहां देखें पूरी लिस्ट

ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं होती। अगर इसमें अच्छे पल आते हैं, तो कई मुश्किल दौर का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन मुश्किलों के समय हमें असल में क्या करना चाहिए? मुश्किलों का सामना करना एक बात है, लेकिन हिम्मत और सब्र के साथ उनसे पार पाना दूसरी बात है। ऐसे समय में कुछ किताबें बहुत काम आ सकती हैं। वे न सिर्फ़ आपको एक अलग नज़रिया देती हैं, बल्कि आपको हिम्मत भी देती हैं और मुश्किल दौर से निकलने में मदद करती हैं।

पेमा चोड्रोन की ‘व्हेन थिंग्स फॉल अपार्ट’

जब ज़िंदगी मुश्किल और अनिश्चित हो जाती है, तो हममें से कई लोग अपनी भावनाओं का सामना करने से बचते हैं। लेकिन लेखिका हमें अपनी भावनात्मक बेचैनी को सहानुभूति के साथ स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती हैं। यह किताब याद दिलाती है कि निराशा ज़िंदगी का हिस्सा है और हमें इसे तुरंत ठीक करने की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।

जेब्रान खलील जेब्रान की ‘द प्रॉफेट’

इस किताब में ऐसे काव्यात्मक निबंध हैं जो रोज़मर्रा के इंसानी अनुभवों पर गहरी सोच पेश करते हैं। चाहे प्यार हो, शादी हो, बच्चे हों या काम—इस बेहतरीन रचना से मिली समझ हमें ज़िंदगी को उस नज़रिए से अलग देखने में मदद करती है जैसा हमें अब तक बताया गया है।

रयान हॉलिडे की ‘द ऑब्सटेकल इज़ द वे’

चुनौतियों का सामना करते समय हम बाधाओं को आगे बढ़ने के मौकों के तौर पर नहीं देख पाते, और यह किताब हमें इसी ओर ले जाती है। यह हमें मुश्किलों को मज़बूती और चरित्र के विकास के लिए ज़रूरी मानने के लिए प्रेरित करती है।

थिच न्हात हान की ‘नो मड, नो लोटस: द आर्ट ऑफ़ ट्रांसफॉर्मिंग सफ़रिंग’

ज़ेन गुरु थिच न्हात हान इस किताब के ज़रिए गहरी समझ देते हैं और हमें खुशी और दुख को आपस में जुड़ा हुआ मानने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार, जैसे कमल को खिलने के लिए कीचड़ की ज़रूरत होती है, वैसे ही खुशी और शांति के लिए ज़िंदगी की चुनौतियों और संघर्षों को स्वीकार करना ज़रूरी है।

शेरिल स्ट्रेयड की ‘टाइनी ब्यूटीफुल थिंग्स’

यह किताब सलाह देने वाले कॉलम का संग्रह है, जिसमें लेखिका ने अपनी कमज़ोरियों, पुरानी गलतियों, दुख और नाकामियों के बारे में बताया है। यह हमें उन कई तरह की भावनाओं को समझने का मौका देती है जिन्हें हम महसूस करते हैं, और ज़िंदगी की कमियों से जूझने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सिखाती है।