हैकर ग्रुप ने SBI के 3.75 लाख रिकॉर्ड चोरी होने का दावा किया, ग्राहकों की निजी जानकारी और लोन दस्तावेज लीक होने की आशंका

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों का डेटा चोरी होने का दावा किया गया है। Siriusim नाम के एक अज्ञात हैकर ग्रुप का कहना है कि उसके पास बैंक से जुड़े ग्राहकों के गोपनीय रिकॉर्ड हैं। इनमें निजी जानकारी, घर के पते, लोन एप्लीकेशन और खाता खोलने से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

साइबर सिक्योरिटी पर नजर रखने वाले CyberPulse56 ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। अकाउंट के मुताबिक, हैकर ग्रुप के पास कथित तौर पर CSV फॉर्मेट में 3.75 लाख रिकॉर्ड और 2,722 PDF दस्तावेज हैं।

चोरी का डेटा सही हुआ तो?

हालांकि, SBI का डेटा चोरी होने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अभी यह भी साफ नहीं है कि डेटा कहां से आया और क्या यह सीधे SBI के सिस्टम से जुड़ा है। रिकॉर्ड की संख्या से यह भी पता नहीं चलता कि कितने अलग-अलग ग्राहक प्रभावित हुए हैं।

CyberPulse56 ने 16 अक्टूबर को पहली बार इस दावे की जानकारी दी थी। वहीं, The Economic Times के मुताबिक, 20 अक्टूबर तक SBI ने उसकी ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया था।

अगर यह डेटा असली साबित होता है, तो इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। साइबर अपराधी ग्राहकों की पहचान चुराने, वित्तीय धोखाधड़ी करने, फर्जी लोन आवेदन देने और फिशिंग के जरिए बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

20 वित्तीय संस्थानों पर साइबर हमले

यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारतीय वित्तीय संस्थानों पर साइबर हमलों की खबरें सामने आई हैं। The Economic Times ने 15 अक्टूबर को बताया था कि इसी महीने करीब 20 बैंक, NBFC और फिनटेक कंपनियां साइबर हमलों का शिकार हुई थीं। इन हमलों में कथित तौर पर चोरी किए गए लॉगिन क्रेडेंशियल और पेमेंट API की कमजोरियों का फायदा उठाया गया।

CERT-In ने 9 अक्टूबर को वित्तीय संस्थानों को ऐसे हमलों को लेकर चेताया था। हालांकि, इन घटनाओं और SBI से जुड़े दावे के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

RBI के नियम क्या कहते हैं?

RBI के जुलाई 2026 में जारी निर्देशों के मुताबिक, बैंकों को साइबर घटना का पता चलने के छह घंटे के भीतर DAKSH प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करना होगा। CERT-In को भी इसकी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, बैंकों को सुरक्षा में सेंध की जांच करनी होगी और ऐसी घटनाएं दोबारा रोकने के उपाय करने होंगे।

CERT-In के 2022 के निर्देशों में भी तय श्रेणी की साइबर घटनाओं की जानकारी छह घंटे के भीतर देने का प्रावधान है।

SBI ने ग्राहकों को क्या सलाह दी है?

SBI अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कहता है कि उसके डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म अनधिकृत पहुंच से बचाव के लिए ऑथेंटिकेशन कंट्रोल, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और दूसरे सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करते हैं।

बैंक ग्राहकों को यह भी सलाह देता है कि वे अपना पासवर्ड, PIN और OTP किसी के साथ साझा न करें। बैंकिंग से जुड़ी जानकारी मांगने वाले संदिग्ध मैसेज का जवाब देने से भी बचें। फिलहाल, Siriusim के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी साफ नहीं है कि कथित डेटा असली है या इससे SBI के किसी ग्राहक की जानकारी वास्तव में उजागर हुई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bajaj Finance Q2 Results: बजाज की कंपनी को ₹6367 करोड़ का मुनाफा, NII में 23% का उछाल

Bajaj Finance Q2 Results: दिग्गज नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने 19 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। ब्याज से होने वाली कमाई और लोन के कारोबार में बढ़ोतरी से नतीजों को मजबूती मिली।

ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ी

बजाज फाइनेंस की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) दूसरी तिमाही में 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹10,785 करोड़ थी। वहीं, कंपनी की कुल नेट इनकम भी 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ हो गई।

AUM बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हुआ

30 सितंबर 2026 तक कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 26% बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हो गया। AUM का मतलब है कि कंपनी ने कुल कितने पैसे का लोन दे रखा है या मैनेज कर रही है। सितंबर तिमाही में इसमें ₹37,680 करोड़ जुड़े।

इस दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन बांटे। यह एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा है। तिमाही में 44.2 लाख नए ग्राहक भी जुड़े। इसके साथ ही कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या बढ़कर 12.885 करोड़ हो गई। इसमें सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी हुई।

लोन की वसूली कैसी रही?

सितंबर के अंत में बजाज फाइनेंस का ग्रॉस NPA 1.06% रहा। जून तिमाही में यह 0.96% था। वहीं, नेट NPA 0.39% से बढ़कर 0.42% हो गया। यानी पिछली तिमाही के मुकाबले खराब लोन का अनुपात थोड़ा बढ़ा। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले स्थिति बेहतर रही। तब ग्रॉस NPA 1.24% और नेट NPA 0.60% था।

लोन के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने ₹2,166 करोड़ का प्रोविजन किया। यह पिछले साल से 4% ज्यादा है। इसमें आर्थिक जोखिमों को देखते हुए ₹337 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान भी शामिल है। इसे हटा दें तो लोन लॉस और प्रोविजन 12% घटकर ₹1,829 करोड़ रह जाते हैं।

आगे कंपनी की क्या योजना है?

Bajaj Finance को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में वह 6 करोड़ से 6.2 करोड़ नए लोन बांटेगी। कंपनी 1.8 करोड़ से 2 करोड़ नए ग्राहक जोड़ने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, वित्त वर्ष के दौरान 150 से 175 नई लोकेशन खोलने का लक्ष्य है।

दूसरी तिमाही में कंपनी के लिए फंड जुटाना भी सस्ता हुआ। फंड की लागत 9 बेसिस पॉइंट घटकर 7.31% रह गई। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के दौरान कुल नेट इनकम के मुकाबले ऑपरेटिंग खर्च का अनुपात 25 से 40 बेसिस पॉइंट तक सुधर सकता है।

नतीजों से पहले शेयर गिरा

सोमवार को नतीजे आने से पहले Bajaj Finance का शेयर 2.5% गिरकर ₹957.35 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 1.6% नीचे है। वहीं, पिछले 12 महीनों में इसमें 11% से ज्यादा की गिरावट आई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 103% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 103.7% बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 376.3 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 50.2% बढ़कर 2,161 करोड़ रुपये पहुंच गई। ये वो कमाई है, जो कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और उधार पर चुकाए जाने वाले ब्याज के अंतर से होती है। कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 38% बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।

गोल्ड लोन कारोबार में 90% की ग्रोथ

IIFL Finance की ग्रोथ में गोल्ड लोन कारोबार की बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट का AUM सालाना आधार पर 90% बढ़कर 65,729 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। गोल्ड लोन में ग्रॉस NPA 0.90% रहा।

होम लोन का AUM पिछली तिमाही के मुकाबले 4% बढ़कर 43,070 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस सेगमेंट में ग्रॉस NPA घटकर 1.38% रह गया। वहीं, छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले सिक्योर्ड MSME लोन का AUM 11% बढ़कर 11,948 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी बिना गारंटी वाले लोन में अपना जोखिम घटा रही है।

बैड लोन की स्थिति में सुधार

सितंबर तिमाही में IIFL Finance का ग्रॉस NPA 1.5% रहा। यह पिछली तिमाही से 0.07 प्रतिशत अंक कम है। हालांकि, नेट NPA 0.05 प्रतिशत अंक बढ़कर 0.9% हो गया। कंपनी का प्रोविजन कवरेज रेशियो 91% रहा। मतलब कंपनी ने खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त रकम अलग रखी है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 23.5% और लिक्विडिटी 13,805 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20.1% रहा।

AI के इस्तेमाल पर जोर

IIFL Finance लोन की जांच, कलेक्शन और ग्राहकों से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बदले छोटे और मझोले कारोबारियों को दिए जाने वाले लोन के 85% से ज्यादा आवेदनों के क्रेडिट असेसमेंट में AI का इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी ने गोल्ड लोन ब्रांचों में भी AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम अब तक सोने के गहनों की 11 लाख से ज्यादा तस्वीरों का एनालिसिस कर चुका है। कंपनी बैंकिंग पार्टनरशिप बढ़ाकर भी अपना कारोबार मजबूत करना चाहती है।

शेयर में हल्की तेजी

IIFL Finance का शेयर 15 अक्टूबर को NSE पर 0.53% बढ़कर 598 रुपये पर बंद हुआ। आगे कंपनी का फोकस सिक्योर्ड लोन बढ़ाने, खराब कर्ज पर नियंत्रण रखने और बैंकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।

कंपनी इक्विटी के जरिए नया फंड जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जुलाई 2026 में शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अगले साल कितनी होगी सैलरी हाइक? Aon सर्वे में आया ये आंकड़ा, जानिए किन सेक्टरों में होगी बंपर बढ़ोतरी

Salary Hike Projection: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड रिस्क के बावजूद भारत में कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Aon plc के ‘Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27’ के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश में औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 9% से मामूली रूप से ज्यादा है। मजबूत घरेलू खपत और निरंतर निवेश के कारण देश में बिजनेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है।

किन सेक्टरों में मिलेगी सबसे ज्यादा सैलरी हाइक?

सर्वे के अनुसार, सभी सेक्टरों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ खास सेक्टर्स टैलेंट की मांग और ग्रोथ के चलते सबसे आगे रहने वाले हैं:

NBFC: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 10.1% की सबसे ऊंची सैलरी ग्रोथ के साथ सूची में सबसे आगे रहेंगी।

एनर्जी: ऊर्जा सेक्टर में वेतन वृद्धि औसतन 9.9% तक रहने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर: इस क्षेत्र में कर्मचारियों को 9.8% तक की सैलरी हाइक मिल सकती है।

एट्रिशन रेट और टैलेंट की जंग

कंपनियों के बजट स्थिर होने के बावजूद कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला बढ़ा है। ओवरऑल एट्रिशन रेट बढ़कर 2026 में 18% पर पहुंच गया है, जो कि 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था। इससे यह साफ होता है कि कुशल और अनुभवी टैलेंट को अपने पास रोके रखने के लिए कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा बना हुआ है।

AI स्किल्स और अपस्किलिंग का दौर: मिल रहा है तगड़ा प्रीमियम

डे-टू-डे वर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की गहरी पैठ और तेजी से बदलते ट्रेंड्स का असर सैलरी और रिक्रूटमेंट पर साफ दिख रहा है। रूटीन कामकाज में एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां 2025 के 46.1% से बढ़कर 56% हो गई हैं। करीब 60% एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के प्रोफेशनल्स के लिए कंपनियां सामान्य से लगभग 10% अधिक पे-प्रीमियम दे रही हैं।

वेज कोड और पेरोल कॉस्ट का असर

सर्वे के मुताबिक, 65.4% एंप्लॉयर पूरी तरह से नए वेज कोड का पालन कर रहे हैं, जबकि 20.9% कंपनियां अगले छह महीनों में इसके अनुपालन की उम्मीद कर रही हैं। वैसे लगभग 42.8% कंपनियों को अंदेशा है कि इससे उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% तक बढ़ सकती है, जिसके लिए उन्हें अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर को समझदारी से री-अलाइन करना होगा।

Mobikwik Share Price: बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने खरीदे ₹11 करोड़ के शेयर, कीमत 8% तक उछली

डिजिटल पेमेंट्स फर्म ‘वन मोबिक्विक सिस्टम्स’ के शेयर में 9 अक्टूबर को अच्छी तेजी है। शेयर की कीमत पिछले बंद भाव से 8 प्रतिशत तक उछली। BSE पर शेयर 263.90 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। One MobiKwik Systems को मोबिक्विक भी कहा जाता है। एक दिन पहले खबर आई कि बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने ओपन मार्केट ट्रांजेक्शंस के जरिए कंपनी के 10.78 करोड़ रुपये में 4.48 लाख इक्विटी शेयर खरीदे।

ये शेयर कंपनी की 0.57 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। ट्रांजेक्शन 240.48 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर हुआ। कुछ दिन पहले वन मोबिक्विक सिस्टम्स ने शेयर बाजारों को बताया था कि प्रमोटर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर उपासना टाकू ने खुले बाजार में लेनदेन के जरिए कंपनी के 1.07 लाख इक्विटी शेयर खरीदे हैं। डील की वैल्यू करीब 2.12 करोड़ रुपये रही। इस खरीद के बाद कंपनी में टाकू की हिस्सेदारी बढ़कर 10.24 प्रतिशत हो गई है। टाकू ने 28 सितंबर 2026 को 1.04 करोड़ रुपये में कंपनी के 52,000 इक्विटी शेयर खरीदे।

इसके बाद 29 सितंबर को 1.09 करोड़ रुपये में अतिरिक्त 55,000 इक्विटी शेयर खरीदे। दोनों लेनदेन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर हुए। MobiKwik दिसंबर 2024 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 572 करोड़ रुपये का था। उपासना टाकू ने दिसंबर 2024 में आए कंपनी के IPO के बाद से कुल 294,177 इक्विटी शेयर खरीदे हैं।

Mobikwik का शेयर एक सप्ताह में 30 प्रतिशत मजबूत

कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 290.35 रुपये और एडजस्टेड लो 151.95 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 40 प्रतिशत चढ़ा है। एक सप्ताह में कीमत 30 प्रतिशत मजबूत हुई है। अप्रैल 2026 में मोबिक्विक को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से मंजूरी मिली थी। इसके बाद कंपनी के लिए एक नई डिवीजन मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (MFSPL) शुरू करने का रास्ता साफ हो गया। इससे ग्रुप को अपनी रेगुलेटेड लेंडिंग क्षमताएं बढ़ाने, नए-नए क्रेडिट प्रोडक्ट्स तैयार करने, और ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों और मर्चेंट्स को ज्यादा कुशलता और बेहतर नियंत्रण के साथ सेवाएं देने में मदद मिलेगी।

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कंपनी ने कहा था कि NBFC का कामकाज तभी शुरू होगा, जब कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद RBI से ‘सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन’ (COR) मिल जाएगा। इसकी सर्विसेज पूरे भारत में उपलब्ध होंगी, लेकिन मुख्य रूप से फोकस टीयर 2 और टीयर 3 ​शहरों पर होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का लोन जल्दी चुकाने से ₹69000 का ब्याज बचेगा, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना काफी आसान है, लेकिन उसका ब्याज जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब लोन की अवधि लंबी हो। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपके पास पैसा आ जाए तो लोन को जल्दी खत्म करना कितना फायदेमंद है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। ब्याज दर 12% सालाना है और लोन की अवधि 5 साल यानी 60 महीने है।

5 साल तक चलाया तो कितना ब्याज देंगे?

5 लाख रुपये के इस लोन पर 12% ब्याज के हिसाब से आपकी EMI करीब 11,122 रुपये बनेगी। आप 60 महीने तक यह EMI चुकाते हैं तो बैंक को कुल करीब 6.67 लाख रुपये देने होंगे।

यानी 5 लाख रुपये की मूल रकम के ऊपर करीब 1.67 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चला जाएगा।

3 साल में लोन खत्म किया तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आप इसी 5 लाख रुपये के लोन को 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने का फैसला करते हैं। इस स्थिति में आपकी EMI बढ़कर करीब 16,607 रुपये हो जाएगी

हालांकि, लोन की अवधि कम होने से कुल ब्याज काफी घट जाएगा। 36 महीने में आप बैंक को करीब 5.98 लाख रुपये चुकाएंगे। इसमें ब्याज करीब 97,858 रुपये होगा। यानी 5 साल की जगह 3 साल में लोन खत्म करने पर करीब 69,476 रुपये का ब्याज बच सकता है।

लोन की अवधिEMIकुल ब्याज
5 सालकरीब ₹11,122करीब ₹1.67 लाख
3 सालकरीब ₹16,607करीब ₹97,858
ब्याज में बचत—करीब ₹69,476

लेकिन EMI बढ़ाना हर किसी के लिए सही नहीं

यहां एक बात समझना जरूरी है। लोन जल्दी खत्म करने का मतलब है कि आपको हर महीने ज्यादा रकम EMI में लगानी होगी। इसलिए फैसला सिर्फ ब्याज बचत देखकर नहीं करना चाहिए।

अगर आपकी आमदनी स्थिर है और 16-17 हजार रुपये की EMI आसानी से संभाल सकते हैं, तो छोटी अवधि वाला लोन ब्याज के लिहाज से बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर ज्यादा EMI से आपका बाकी खर्च या इमरजेंसी फंड प्रभावित होता है, तो जल्दबाजी ठीक नहीं होगी।

दूसरे चार्ज का ध्यान रखना भी जरूरी

अगर आप पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक या NBFC के प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज भी जरूर देख लें। इन चार्ज की वजह से वास्तविक बचत अलग हो सकती है।

इस उदाहरण में 12% ब्याज दर और बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के हिसाब से 5 लाख रुपये का लोन 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने पर करीब 69 हजार रुपये का ब्याज बचता है। यानी सिर्फ लोन जल्दी खत्म करने से ही आपकी जेब में अच्छी-खासी रकम बच सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:  आज का मिड-वीक सेशन निफ्टी बुल्स के लिए इस हफ़्ते का सबसे अहम सेशन हो सकता है, क्योंकि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया कुछ ही घंटों में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का फ़ैसला सुनाने वाला है। हालांकि आम राय यही है कि सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा, लेकिन बाज़ार की नज़र उनके रुख, ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों के साथ-साथ आगे के रास्ते पर गवर्नर की टिप्पणी पर भी होगी।

निफ्टी में राहत वाली तेज़ी (रिलीफ़ रैली) लगातार दूसरे दिन भी जारी है और बुल्स उम्मीद करेंगे कि अगर ब्याज दरें बढ़ती भी हैं, तो बढ़ोतरी कम हो और रेट हाइक का साइकल भी छोटा रहे। मंगलवार के सेशन के बाद निफ्टी 22,800 के आस-पास है और तेल की कीमतें स्थिर होने के कारण, बुल्स चाहेंगे कि वे इस लेवल के ऊपर जाएं और टिके रहें, ताकि 23,000 के मार्क को फिर से हासिल करने का रास्ता खुल सके।

आज बैंक, NBFC और रियल एस्टेट जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टर फ़ोकस में रहेंगे। बिज़नेस अपडेट्स भी आ रहे हैं और टाइटन, उत्कर्ष SFB जैसे स्टॉक्स पर इनका असर दिख रहा है। निफ्टी बैंक के लिए ऊपर की तरफ़ 55,500 के लेवल पर नज़र रखें, जबकि 54,750 का ज़ोन सपोर्ट का काम कर सकता है। निफ्टी को 22,500 पर सपोर्ट मिल सकता है।

Physicswallah Share Price: एडटेक कंपनी का शेयर 5% तक उछला, लेंडिंग बिजनेस पर एक अपडेट के बाद बढ़ी खरीद

एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्सवाला के शेयर में 5 अक्टूबर को दिन में 5.5 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 126.80 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 36500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। कंपनी ने 4 अक्टूबर को अपनी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेगमेंट की लेंडिंग स्ट्रैटेजी को रीस्ट्रक्चर करने और डायरेक्ट लेंडिंग से हटने की घोषणा की। कंपनी अपने 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी FinZ Finance Private Limited के जरिए यह कारोबार करती है।

एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि FinZ Finance ने RBI-रजिस्टर्ड NBFC ऑक्सिलो फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड के साथ 95.79 करोड़ रुपये के लोन पोर्टफोलियो की बिक्री, ट्रांसफर और असाइनमेंट के लिए एक एग्रीमेंट किया है। ऑपरेशनल ट्रांजीशन प्रक्रिया 60 दिनों के अंदर पूरी होने की उम्मीद है।

चूंकि FinZ Finance का मुख्य काम लोन देना है, इसलिए इस प्रस्तावित ट्रांजेक्शन से इसके लोन देने के कामकाज में काफी कमी आएगी और उम्मीद है कि इससे इसके लोन देने के कामकाज आंशिक रूप से या धीरे-धीरे बंद हो जाएंगे। इस कदम का मकसद कंपनी को अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस करने में मदद करना है।

शेयर 6 महीनों में 40 प्रतिशत मजबूत

फिजिक्सवाला के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। यह BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी की शुरुआत 2016 में एक YouTube चैनल के तौर पर हुई थी। कंपनी नवंबर 2025 में लिस्ट हुई थी। IPO 3480 करोड़ रुपये का था। शेयर 6 महीनों में लगभग 40 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 71.27 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 162.05 रुपये और एडजस्टेड लो 77.75 रुपये है।

D-Mart Share Price: Q2 में अच्छे बिजनेस के बावजूद शेयर 6% तक फिसला, क्या अभी भी खरीदने लायक है स्टॉक

सितंबर महीने में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने फिजिक्सवाला के शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया था। टारगेट प्राइस 200 रुपये प्रति शेयर रखा था। वहीं बुल केस में टारगेट प्राइस 220 रुपये प्रति शेयर दिया था। बेयर केस सिनेरियो में मोतीलाल ओसवाल ने 110 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया। ब्रोकरेज ने कंपनी के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ना, ऑफलाइन कामकाज और सेंटर्स के इस्तेमाल में कमजोरी, फैकल्टी के ज्यादा संख्या में नौकरी छोड़ने से छात्रों के नतीजों और ब्रांड की इमेज पर असर; कोचिंग संस्थानों, विज्ञापन या डेटा प्राइवेसी से जुड़े नियमों में प्रतिकूल बदलावों को मुख्य जोखिमों में शामिल किया है।

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