टाटा ट्रस्ट ने Tata Sons के लिस्ट होने की बात खारिज की, नोएल टाटा ने भी अनलिस्टेड रखने का रुख दोहराया

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) को शेयर बाजार में लिस्ट कराने को लेकर Tata Trusts ने अपना रुख साफ किया है। Trusts ने कहा कि उसने कंपनी को पब्लिक करने पर सहमति नहीं दी है। चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने भी यही बात दोहराई है। उनका कहना है कि 100 साल से ज्यादा पुराने टाटा ग्रुप की मौजूदा संरचना को बचाए रखना जरूरी है।

Tata Sons बोर्ड ने क्या कहा?

Tata Trusts के मुताबिक, 17 सितंबर की बैठक में Tata Sons के बोर्ड ने RBI के कम्युनिकेशन पर चर्चा की। बोर्ड ने कहा कि सिर्फ लिस्टिंग पर ही फैसला नहीं होना चाहिए। सभी उपलब्ध विकल्पों को देखा और समझा जाना चाहिए।

बोर्ड ने कहा कि इन सभी विकल्पों का तुरंत आकलन किया जाएगा। इसके बाद उनकी रिपोर्ट और सिफारिशें बोर्ड के सामने रखी जाएंगी।

Noel Tata ने लिस्टिंग पर क्या कहा?

नोएल टाटा ने कहा कि लिस्टिंग के मुद्दे पर बोर्ड पहले ही फैसला ले चुका है। हालांकि, ऐसे मामले में जल्दबाजी ठीक नहीं है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज, जानकारी और कानूनी सलाह जुटानी होगी। इसके बाद बोर्ड को पूरी जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि RBI के आदेश में लिस्टिंग की बात नहीं कही गई है। आदेश में कोई खास कदम उठाने को भी नहीं कहा गया है। साथ ही, RBI ने यह नहीं कहा कि Tata Sons ने कोई नियम तोड़ा है।

नोएल टाटा के मुताबिक, RBI के आदेश का कानूनी असर क्या है और कंपनी को कब तक क्या करना है, इस पर बोर्ड ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।

लिस्टिंग क्यों नहीं चाहते Noel Tata

नोएल टाटा ने लिस्टिंग को लेकर अपनी चिंता भी बताई। उनका कहना है कि कंपनी के लिस्ट होने के बाद Tata Sons को संस्थागत और विदेशी शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा।

इन निवेशकों का मुख्य लक्ष्य आर्थिक रिटर्न होता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वे किसी मुश्किल में फंसी Tata Group की कंपनी को बचाने के लिए पैसा लगाने को तैयार होंगे।

इसी तरह, अगर कोई नया प्रोजेक्ट शुरू किया जाता है और उसका रिटर्न 15 साल बाद मिलने की उम्मीद है, तो क्या शेयरधारक उसमें पैसा लगाने की मंजूरी देंगे? नोएल टाटा के मुताबिक, यही बड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि यह शेयरधारकों की आलोचना नहीं है। उनकी जिम्मेदारी ही फाइनेंशियल रिटर्न देखना है। लेकिन Tata Group के मामले में बात इससे आगे की है। यहां ग्रुप की पहचान और उसकी मौजूदा संरचना भी जुड़ी है।

Tata Sons पर RBI के नियम लागू होंगे

यह मामला RBI के फैसले के बाद और अहम हो गया है। RBI ने कुछ दिन पहले Tata Sons की Core Investment Company (CIC) के तौर पर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी।

इसके बाद 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में Tata Sons ने RBI के लागू नियमों का पालन करने की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि वह RBI, Tata Trusts और दूसरे हितधारकों से भी जरूरी अनुपालन को लेकर सलाह लेगी।

Tata Sons पिछले दो साल से ज्यादा समय से RBI के इस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। अब बोर्ड के ताजा फैसले से कंपनी के रुख में बदलाव दिख रहा है।

Tata Trusts का पुराना फैसला भी कायम

Tata Trusts ने अपने पुराने फैसले का भी जिक्र किया। Trusts के मुताबिक, रतन टाटा के समय Tata Sons को अनलिस्टेड रखने पर सर्वसम्मति से फैसला हुआ था।

इसके बाद जुलाई 2025 में Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust ने भी Tata Sons को अनलिस्टेड रखने के पक्ष में प्रस्ताव पास किए थे। इन फैसलों की जानकारी Tata Sons को भी दी गई थी। Tata Trusts ने कहा कि तब से उसका रुख वही है।

इससे पहले Moneycontrol ने रिपोर्ट किया था कि Tata Sons के बोर्ड ने 17 सितंबर की बैठक में एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाने का फैसला किया है। हालांकि, नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Sons IPO: टाटा संस को IPO लाना ही होगा? RBI से राहत नहीं मिली, अपर लेयर NBFC लिस्ट में बरकरार

Tata Sons IPO: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की नई लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस का नाम बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि RBI ने अभी तक टाटा संस को NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है।

RBI ने कहा कि कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए टाटा संस ने जो आवेदन दिया है, वह अभी जांच के दौर में है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि अपर लेयर लिस्ट में टाटा संस को शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि उसकी डीरजिस्ट्रेशन अर्जी खारिज हो गई है। उस पर अलग से फैसला लिया जाएगा।

अपर लेयर NBFC क्या है?

RBI ने कहा कि अपर लेयर में उन NBFC को रखा जाता है, जिन पर ज्यादा नियामकीय निगरानी की जरूरत होती है। फिलहाल इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट सीमा तय है। हालांकि, RBI समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा करता है और हर तीन साल में इसे दोबारा देखा जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि अगर कोई NBFC एक बार अपर लेयर में आ जाती है, तो उसे कम से कम 5 साल तक इसी श्रेणी के कड़े नियमों का पालन करना होगा। भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों पर खरी न उतरे।

किन कंपनियों के नाम हैं लिस्ट में?

नई लिस्ट में REC, PFC, IRFC, PNB Housing Finance, Sammaan Capital समेत कुल 17 NBFC शामिल हैं। RBI ने पहले नियमों में बदलाव करते हुए सरकारी मालिकाना हक वाली योग्य NBFC को भी अपर लेयर में शामिल करने की अनुमति दी थी।

हालांकि, सरकारी NBFC के लिए एक राहत है। उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी नहीं होगा। लेकिन निजी कंपनियों को अपर लेयर NBFC बनने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है।

टाटा संस के लिए यह मामला क्यों अहम?

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस एक Core Investment Company (CIC) के रूप में रजिस्टर्ड है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की एसेट थीं। यानी यह RBI की तय सीमा से काफी ऊपर है।

टाटा संस ने अपना CIC लाइसेंस रद्द कराने के लिए आवेदन किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर कंपनी NBFC नहीं रहती, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।

टाटा संस लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है?

टाटा संस को 2022 में पहली बार अपर लेयर NBFC में शामिल किया गया था। नियमों के मुताबिक, उसे 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। इसी वजह से कंपनी ने CIC लाइसेंस रद्द करने का आवेदन दिया था।

जून में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने RBI को पत्र लिखकर संभावित लिस्टिंग का विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो इससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का लंबी अवधि स्वरूप बदल सकता है। साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर भी असर पड़ सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।