शरद पवार की सरकार से अलग लाइन

शरद पवार ने सारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। कम से कम अभी कुछ दिन के लिए यह चर्चा थम गई है कि पवार अपनी पार्टी का विलय सुनेत्रा पवार की पार्टी में कर सकते हैं। उन्होंने कहा है कि वे अपनी पार्टी का विलय नहीं करेंगे और किसी को जरुरत है तो वह आकर उनकी पार्टी में विलय करे। यानी अगर सुनेत्रा पवार को परिवार की एकजुटता की चिंता है तो वे अपनी पार्टी का विलय शरद पवार की पार्टी में करें। हालांकि ऐसा होने की संभावना नहीं है क्योंकि सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार को अलग और स्वतंत्र राजनीति रास आ रही है। उनको अकेले मराठा राजनीति करनी है। लेकिन शरद पवार की इस घोषणा से यह तय हो गया कि अभी वे विलय नहीं कर रहे हैं और न एनडीए के साथ जा रहे हैं।

सवाल है कि ऐसा कैसे हो गया? कुछ दिन पहले तक लग रहा था कि अगर शरद पवार विलय नहीं करते हैं या एनडीए के साथ नहीं जाते हैं तो पार्टी टूट जाएगी। उनकी पार्टी के 10 में से सात या आठ विधायकों और आठ में से कम से कम छह सांसदों के टूटने की खबर थी। हालांकि तब भी यह खबर आई थी कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से यह मैसेज किया गया है कि शरद पवार का ख्याल रखना है। पवार ने न सिर्फ विलय से इनकार किया है, बल्कि उससे पहले खुल कर टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा का समर्थन किया। उन्होंने टाटा संस की लिस्टिंग के मामले में नोएल टाटा का साथ दिया। माना जा रहा है कि सरकार की शह पर टाटा संस की लिस्टिंग की तैयारी हो रही है। तभी ऐसा लग रहा है कि राजनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर शरद पवार ने सरकार से अलग लाइन तय की है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी बिल्कुल फ्लैट नजर आ रहा है। एशियाई बाजारों में दबाव दिख रहा है। 10 साल की US बॉन्ड यील्ड 5.25% तक उछलने से अमेरिकी बाजार के सेंटिमेंट भी बिगड़े हैं। इधर कच्चा तेल भी 105 डॉलर के ऊपर कायम है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

कल भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की। भारी बिकवाली के बीच निफ्टी इंट्राडे में 22,800 के नीचे फिसल गया,जिससे लगातार सातवें हफ्ते भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा।

जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी,बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कमजोर ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड यील्ड,FII की लगातार बिकवाली और US-Iran शांति वार्ता में गतिरोध के बाद बढ़ी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बाजार पर दबाव बनाने वाली मुख्य वजहें रहीं। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 22,834 के आसपास सपाट ट्रेड कर रहा था,जिससे घरेलू इक्विटी मार्केट में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

एशियाई बाजार

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार गिरावट के साथ खुले। जापान का निक्केई 1 प्रतिशत और टॉपिक्स इंडेक्स 1.68 प्रतिशत नीचे था। वहीं, कोस्पी में 0.56 फीसदी की और ताइवान के बाजार में 0.06 फीसदी की गिरावट नजर आ रही थी।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट आई। तेल की कीमतें और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने बाजार पर दबाव बनाया। निवेशक ईरान युद्ध से जुड़ी शांति वार्ता की संभावनाओं और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की चाल पर नजरे बनाए हुए हैं।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 347.11 अंक या 0.67% गिरकर 51,481.51 पर आ गया,S&P 500 में 59.72 अंक या 0.77% की गिरावट के साथ यह 7,683.69 पर बंद हुआ और नैस्डैक कम्पोजिट 248.34 अंक या 0.92% गिरकर 26,820.38 पर आ गया। S&P में आई यह गिरावट 20 अगस्त के बाद से एक दिन में प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट थी।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार होता दिख रहा है। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बहत में गिरावट दिख रही है,जबकि फिलीपीन्स के पेसो और मलेशियाई रिंगित में बढ़त हुई है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.42% गिरा है। जबकि थाई बहत में 0.09% और ताइवान डॉलर में 0.11% की गिरावट आई है। सिंगापुर डॉलर 0.05% कमजोर हुआ है,जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन मामूली गिरावट (0.04%) के साथ लगभग सपाट दिख रहा है।

दूसरी ओर फिलीपीन पेसो में 0.22% की बढ़त नजर आई है। इसके बाद मलेशियाई रिंगित में 0.07% और जापानी येन में 0.05% की बढ़ोतरी हुई है। चीनी रेनमिनबी में 0.02% की बढ़त हुई है।

सोना $4200 के नीचे

मजबूत डॉलर और US में अगले 1 साल में 3 रेट हाइक की आशंका से सोने-चांदी में तेज गिरावट आई है और यह $4200 के नीचे फिसल गया है। वहीं, चांदी $61 के नीचे आ गई है। US में अक्टूबर में दरें बढ़ने की 70% संभावना है।

ईरान को प्रतिबंधों में ढील की खबर फर्जी: ट्रंप

ईरान को प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज किए गए फंडों को रिलीज करने की खबरों को ट्रंप ने खारिज करते हुए कहा है कि Axios की खबर फर्जी और कोरी अफवाह हैं। इधर ईरान ने नवंबर में US चुनाव के बाद युद्ध और भड़कने की आशंका जताई है।

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए बड़ा कदम

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए टाटा ट्रस्ट का बड़ा कदम सामने आया है। Tata Electronics, Tata Consulting Engineers का टाटा संस में मर्जर का प्रस्ताव रखा गया है। इसके कंपनी के NBFC और CIC कैटेगरी से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। ट्रस्ट ने कहा है कि रीस्ट्रक्चरिंग शेयरहोल्डर्स के हित में होगी।

कल निफ्टी में होगा बड़ा बदलाव

कल निफ्टी में बड़ा बदलाव होगा। करीब 3 दशक बाद विप्रो निफ्टी से बाहर होगा। वहीं, BSE इसमें शामिल होगा। BSE में 650 मिलियन डॉलर का इनफ्लो हो सकता है। वहीं, विप्रो से करीब 200 मिलियन डॉलर निकलेंगे।

होनासा कंज्यूमर में ब्लॉक डील संभव, Cube Highways Trust में भी बड़े सौदे संभव

आज ब्लॉक डील्स पर नजर रहेगी । सूत्रों के मुताबिक 2.73 परसेंट हिस्से के लिए होनासा कंज्यूमर में 400 Cr रुपए की ब्लॉक डील संभव है। करीब साढ़े 3 परसेंट डिस्काउंट पर 450 रुपए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस तय की गई है। साथ ही Cube Highways Trust में भी करीब पौने 700 करोड़ के बड़े सौदे हो सकते हैं।

कोफोर्ज: अखिल कुमार गुप्ता बने नए चेयरमैन

कोफोर्ज आज फोकस में होगा। अखिल कुमार गुप्ता नए चेयरमैन बने हैं। ये ओपी भट्ट के पद छोड़ने के बाद जिम्मेदारी संभालेंगे। इनका कार्यकाल 5 साल का होगा।

अगस्त IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8%

देश के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में तेजी आई है। अगस्त में IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8% रही है। जुलाई IIP ग्रोथ 6.7% से रिवाइज होकर 7.4% हो गई है। मैन्युफैक्चरिंग,इलेक्ट्रिसिटी और इंटरमीडिएट गुड्स ग्रोथ में तेजी देखने को मिली है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

28 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 5,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस सेशन के दौरान लगभग 5,189 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ वे नेट बायर बने रहे।

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए टाटा ट्रस्ट का बड़ा कदम, दो कंपनियों के मर्जर का प्रस्ताव रखा

टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को टालने के लिए बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत Tata Electronics Systems Solutions Private Limited (TESS) और Tata Consulting Engineers (TCE) का Tata Sons में मर्जर किया जाएगा।

इसका मकसद Tata Sons को NBFC और कोर इनवेस्टमेंट कंपनी यानी CIC की नियामकीय कैटेगरी से बाहर लाना है। प्रस्ताव को Tata Sons के बोर्ड और RBI की मंजूरी मिलना जरूरी है।

Tata Sons को क्या फायदा होगा?

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है। ट्रस्ट ने कंपनी के बोर्ड से इस प्रस्ताव को मंजूरी देने और RBI से जरूरी NOC लेने के लिए आवेदन करने को कहा है।

अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो Tata Sons अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी बनी रह सकेगी। यह इसलिए अहम है क्योंकि RBI ने इसी महीने Tata Sons की CIC के तौर पर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी।

अपर लेयर NBFC के तौर पर Tata Sons पर कई अतिरिक्त नियम लागू होते हैं। इसमें कंपनी की शेयर मार्केट में अनिवार्य लिस्टिंग भी शामिल है।

दो कंपनियों के विलय से क्या बदलेगा?

यह Tata Sons का ब्रेकअप या डीमर्जर नहीं है। इसके उलट दो ऑपरेटिंग कंपनियों को Tata Sons में मिलाया जाएगा।

Tata Trusts के मुताबिक, 31 मार्च 2026 के आंकड़ों के आधार पर विलय के बाद Tata Sons की ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,05,043 करोड़ होता। वहीं, फाइनेंशियल एसेट्स से इनकम ₹40,072 करोड़ होती।

इस तरह कुल इनकम में ऑपरेटिंग रेवेन्यू की हिस्सेदारी 64.3% होती। Tata Trusts का कहना है कि इस स्थिति में टाटा संस RBI के प्रिंसिपल बिजनेस क्राइटेरिया के तहत NBFC नहीं होगी।

CIC की कैटेगरी से भी बाहर आएगी

इस प्रस्ताव का दूसरा मकसद Tata Sons को CIC की परिभाषा से बाहर लाना है। मर्जर के बाद कंपनी की कुल नेट एसेट्स ₹2,00,158 करोड़ होंगी। इसमें ₹1,77,120 करोड़ यानी करीब 88.5% हिस्सा ग्रुप कंपनियों में निवेश का होगा।

CIC के लिए 90% की सीमा लागू होती है। प्रस्तावित ढांचे में यह अनुपात 90% से नीचे रहेगा। इसलिए Tata Trusts के मुताबिक, Tata Sons CIC की कैटेगरी में नहीं आएगी।

Tata Sons फिर सीधे कारोबार करेगी

मर्जर के बाद Tata Sons सिर्फ होल्डिंग कंपनी नहीं रहेगी। वह सीधे कारोबार भी करेगी। Tata Trusts का कहना है कि इससे Tata Sons अपने पुराने मॉडल की तरफ लौटेगी। कंपनी के करीब 100 साल के इतिहास में लगभग 80 साल तक Tata Sons के पास अपने ऑपरेटिंग बिजनेस और रेवेन्यू थे।

इसी रेवेन्यू से ग्रुप के नए कारोबारों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती थी। Tata Consultancy Services यानी TCS भी 2004 में अलग कंपनी बनने से पहले Tata Sons की ही एक डिविजन थी।

RBI की मंजूरी जरूरी

इस प्रस्ताव को लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए RBI की मंजूरी जरूरी है। ऑपरेटिंग और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों का NBFC के साथ विलय होने की वजह से RBI के Non-Banking Financial Companies-Voluntary Amalgamation Directions, 2025 के नियम लागू होंगे।

Tata Sons को पहले RBI से NOC लेना होगा। मर्जर पूरा होने के बाद अगर कंपनी CIC की कैटेगरी में नहीं रहती है तो उसे अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करना होगा।

Tata Trusts ने क्या कहा?

Tata Trusts का कहना है कि यह रीस्ट्रक्चरिंग टाटा ग्रुप और उसके शेयरहोल्डर्स के हित में है। ट्रस्ट के मुताबिक, इससे Tata Sons को अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी के तौर पर बनाए रखने का रास्ता खुल सकता है।

ट्रस्ट ने जुलाई 2025 में Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust के बोर्ड से पास हुए प्रस्तावों का भी जिक्र किया है। दोनों ट्रस्ट के बोर्ड ने Tata Sons का अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी का दर्जा बनाए रखने के लिए हर मुमकिन प्रयास करने की बात कही थी।

Tata Trusts के मुताबिक, इस बदलाव से टाटा ग्रुप की करीब 100 साल पुरानी संरचना बनी रहेगी। साथ ही, लंबे समय के निवेश, राष्ट्र निर्माण और परोपकारी कामों पर ग्रुप का फोकस भी जारी रहेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नोएल टाटा के पक्ष में उतरे शरद पवार, टाटा ग्रुप की विरासत को प्रोटेक्ट करने को लेकर कही बड़ी बात

टाटा संस के चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के प्रेसिडेंट शरद पवार ने सोशल मीडिया मीडियम X पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में टाटा ग्रुप के संगठनात्मक ढ़ाचे पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा कि टाटा ग्रुप की परंपरा और टाटा ट्रस्ट्स के सामाजिक प्रतिबद्धता को बचाकर रखना चाहिए।

शरद पवार ने 22 सितंबर को टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहे विवाद पर अपनी राय रखते हुए नोएल टाटा के रुख का समर्थन किया और महाराष्ट्र व भारत के विकास में टाटा ग्रुप की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने जमशेदजी टाटा के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि टाटा परिवार ने इंडस्ट्री को समाज सेवा की दिशा दी है। उन्होंने लिखा कि इस सोच का मूल यह है कि इंडस्ट्री से पैदा हुई संपत्ति का इस्तेमाल समाज के हित के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी एक सोचा-समझा स्ट्रक्चर है। इस ओनरशिप स्ट्रक्चर की वजह से ही टाटा ग्रुप के बिज़नेस से मिलने वाले डिविडेंड का इस्तेमाल हेल्थ,एजुकेशन,रिसर्च और ग्रामीण इलाकों की रोज़ी-रोटी जैसे सामाजिक कल्याण के कामों के लिए किया जाता है।

टाटा ग्रुप की विरासत को बचाकर रखना आज की जरूरत

शरद पवार ने अपने एक्स पोस्ट में कहा है कि टाटा ग्रुप की लीडरशिप के बारे में फैसले लेते समय इंस्टीट्यूशनल प्रोसेस और टाटा ट्रस्ट की भूमिका का सम्मान किया जाना चाहिए। टाटा ग्रुप का देश और खासकर महाराष्ट्र के विकास से पुराना नाता रहा है। इसलिए, टाटा ग्रुप के अंदर के झगड़ों को बातचीत और सही कानूनी प्रक्रिया से सुलझाने की जरूरत है। इसके लिए शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा करते हुए कंपनी के बायलॉज में बताए गए प्रोसेस का सम्मान करना जरूरी है।

बताते चलें कि 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने एन.चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से अपॉइंट करने का फैसला लिया था। यह फैसला 4 के मुकाबले 1 वोट से हुआ था। उसी मीटिंग में टाटा संस को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करने का भी फैसला किया गया।

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के दोबारा अपॉइंटमेंट का विरोध किया था। हालांकि,ट्रस्ट के दूसरे नॉमिनेटेड डायरेक्टर,वेणु श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है और कहा है कि ट्रस्ट के नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स की भूमिका पर कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन के मुताबिक ठीक से विचार किया जाना चाहिए।

टाटा ग्रुप की विरासत को संजोना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

शरद पवार ने यह भी कहा कि अगर टाटा ट्रस्ट्स की सामाजिक और संस्थागत भूमिका कमजोर होती है तो इसका असर हेल्थ,एजुकेशन और रिसर्च सेक्टर के अलग-अलग संस्थाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल,TIFR और TISS जैसी प्रतिष्ठित संथाओं के ज़रिए लंबे समय तक सामाजिक क्षेत्र में काम किया है। इसलिए,यह सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम इस ग्रुप के संस्थागत स्वरूप और मूल्य आधारित परंपरा को बचाकर रखें,जिसने खुद को भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया है।

Top News 21 September: केरल में बारिश से तबाही, टाटा में चंद्रशेखरन पर घमासान; क्या ट्रंप बदलेंगे AI का नाम?

Top News 21 September: केरल में बारिश से तबाही, टाटा में चंद्रशेखरन पर घमासान; क्या ट्रंप बदलेंगे AI का नाम?

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Top News 21 September: केरल में भारी बारिश से तबाही। टाटा संस में चेयरमैन पद पर एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट ने उठाए सवाल। ट्रंप बदल सकते हैं एआई का नाम। ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात तय। जॉर्जिया मेलोनी स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाएगी। 21 सितंबर की बड़ी खबरें : 

 

केरल में भारी बारिश से तबाही

केरल में भारी बारिश से भारी तबाही हुई। वर्षा जन्य हादसों में 5 लोगों की मौत हो गई। मलप्पुरम, इडुक्की और कोट्टायम में बारिश से हाल बेहाल है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने राज्य के हालात का हर घंटे आकलन करने का निर्देश दिया है।

 

एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट का सवाल

Tata Trusts ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है। ट्रस्ट ने कहा कि उनकी पुनर्नियुक्ति के समर्थन में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जो व्याख्या दी जा रही है, वो सही नहीं है। Tata Trusts ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर दी जा रही दलीलों को भी खारिज किया है। ALSO READ: Tata Trust ने एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, खारिज किया बोर्ड का फैसला, री-अपॉइंटमेंट को दी चुनौती

 

क्या ट्रंप बदल देंगे AI का नाम?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के नाम को बदलने की चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक ऑनलाइन पोल शुरू किया और लोगों से एआई के लिए नया नाम चुनने को कहा। ट्रंप ने सुपीरियर इंटेलिजेंस, एक्सट्रीम इंटेलिजेंस और सुप्रीम इंटेलिजेंस तीन विकल्प दिए हैं। ALSO READ: डोनाल्‍ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, अमेरिका में बनेगी एआई फोर्स, क्‍या अब बदलेंगे AI का नाम?

 

ट्रंप-जेलेंस्की की मुलाकात तय

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। जेलेंस्की ने इसे बेहद अहम बातचीत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की और अब न्यूयॉर्क में मुलाकात करने पर सहमति बनी है।

 

बुर्के-नकाब पर मेलोनी का बड़ा फैसला

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इसके तहत इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित की जाएगी।

Dividends Stocks: इस हफ्ते डिविडेंड की बहार! जानिए IRCTC, Dixon और BEML जैसी कंपनियों की रिकॉर्ड डेट

Dividends, Stock Splits, Bonus this week: इस हफ्ते 170 से ज्यादा कंपनियों के शेयर डिविडेंड, स्टॉक स्प्लिट और बोनस जैसे कॉरपोरेट एक्शन के चलते फोकस में रहेंगे। इनमें IRCTC, Dixon Technologies और BEML समेत कई कंपनियां शामिल हैं। रिकॉर्ड डेट 21 से 25 सितंबर के बीच है।

कॉरपोरेट एक्शन का फायदा लेने के लिए रिकॉर्ड डेट पर शेयर डीमैट अकाउंट में होना जरूरी है। यह लिस्ट अस्थायी है। हफ्ते के दौरान कुछ और कंपनियां भी रिकॉर्ड डेट घोषित कर सकती हैं।

अगले हफ्ते स्टॉक स्प्लिट

तीन शेयर अगले हफ्ते एक्स-स्प्लिट होंगे। इनमें TAAL Tech, Naturite Agro Products और Midwest Energy शामिल हैं।

TAAL Tech 1:5 स्टॉक स्प्लिट करेगा। ₹10 फेस वैल्यू वाला एक शेयर पांच शेयरों में बंटेगा। नई फेस वैल्यू ₹2 होगी। रिकॉर्ड डेट 22 सितंबर है।

Naturite Agro Products 1:2 और Midwest Energy 1:10 स्टॉक स्प्लिट करेगा। दोनों की रिकॉर्ड डेट 25 सितंबर है। इसके बाद Naturite की फेस वैल्यू ₹5 और Midwest Energy की ₹1 हो जाएगी।

सोमवार, 21 सितंबर

करीब 55 कंपनियों की रिकॉर्ड डेट सोमवार को है। Maharashtra Scooters ₹160 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी। Bajaj Holdings and Investments ₹65 और Southern Gas ₹60 प्रति शेयर देगी।

Monte Carlo Fashions और KJMC Financial Services ₹20 प्रति शेयर का डिविडेंड देंगी। Dixon Technologies ₹10, Bharat Dynamics ₹0.40 और CONCOR ₹1 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी।

मंगलवार, 22 सितंबर

50 से ज्यादा कंपनियां मंगलवार को एक्स-डिविडेंड होंगी। GOCL Corporation ₹30 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी। BEML ₹12.28 और National Peroxide ₹7 प्रति शेयर देगी।

IRCTC ₹0.50 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

बुधवार, 23 सितंबर

40 से ज्यादा कंपनियां बुधवार को एक्स-डिविडेंड होंगी। GMDC ₹9.50 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। Tyche Industries ₹3.50 प्रति शेयर देगी।

Goodluck India और Talbros Engineering ने ₹3 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

गुरुवार, 24 सितंबर

गुरुवार को सिर्फ दो कंपनियों की रिकॉर्ड डेट है। Engineers India ₹2.50 प्रति शेयर और Adtech Systems ₹1.10 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

शुक्रवार, 25 सितंबर

शुक्रवार को छह शेयर अलग-अलग कॉरपोरेट एक्शन के लिए एक्स-डेट होंगे। Sri Lotus Developers and Realty ₹0.50 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी।

LGT Global Hospitality और Shreeji Global FMCG ₹0.25 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देंगी। Noble Polymers ₹0.05 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।

टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर निशाना साधा, कहा- 100 साल पुराने ढांचे से छेड़छाड़ ठीक नहीं

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर निशाना साधा, कहा- 100 साल पुराने ढांचे से छेड़छाड़ ठीक नहीं

टाटा ग्रुप में अंदरूनी विवाद गहरा गया है। Tata Trusts ने Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का खुलकर विरोध किया है। 20 सितंबर को जारी बयान में ट्रस्ट ने कहा कि उनकी पुनर्नियुक्ति के समर्थन में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जो व्याख्या दी जा रही है, वो सही नहीं है।

ट्रस्ट ने कहा कि 100 साल पुराने टाटा ग्रुप ढांचे को सिर्फ एक कथित कमी दूर करने के लिए बदलना ठीक नहीं होगा। उसने इसे ‘छोटी समस्या के लिए बहुत बड़ा हथौड़ा चलाने’ जैसा बताया।

Tata Trusts ने कहा कि Tata Sons कॉरपोरेट गवर्नेंस के मामले में पहले से ऊंचे मानकों का पालन करती है। ऐसे में आर्टिकल्स की ऐसी व्याख्या के आधार पर चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति का दावा करना उचित नहीं है।

Tata Sons की लिस्टिंग पर भी सवाल

Tata Trusts ने Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर दी जा रही दलीलों को भी खारिज किया है। ट्रस्ट ने कहा कि लिस्टिंग से गवर्नेंस बेहतर होने की बात कहने का मतलब यह है कि Tata Sons में गवर्नेंस की कमी है। ट्रस्ट के मुताबिक ऐसा नहीं है।

Tata Trusts का कहना है कि Tata Sons कई साल से उन नियमों का पालन करती रही है, जो आम तौर पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू होते हैं। कंपनी भले ही खुद शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं है।

Tata Sons के आर्टिकल्स में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति का प्रावधान है। कंपनी में ऑडिट कमेटी और नामांकन एवं पारिश्रमिक कमेटी भी है। संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन को लेकर भी नियम हैं। निदेशकों के बारी-बारी से रिटायर होने की व्यवस्था भी मौजूद है।

कंपनी ने अंदरूनी कारोबार पर रोक लगाने के लिए कोड ऑफ कंडक्ट भी बना रखा है। Tata Trusts के मुताबिक, इन सभी व्यवस्थाओं का जिक्र कंपनी की सालाना रिपोर्ट और कॉरपोरेट गवर्नेंस रिपोर्ट में होता रहा है।

ट्रस्ट ने कहा कि ये नियम मौजूदा विवाद शुरू होने से काफी पहले ही Tata Sons ने खुद अपनाए थे। इसका मकसद पारदर्शिता और बेहतर गवर्नेंस था।

विवाद सिर्फ गवर्नेंस का नहीं

Tata Trusts ने कहा कि पूरा मामला सिर्फ गवर्नेंस के नियमों तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट के मुताबिक, असली सवाल यह है कि Tata ग्रुप के ढांचे में उन लोगों की आवाज कौन उठाएगा, जिनके लिए Tata Trusts 130 साल से ज्यादा समय से काम करता आया है।

ट्रस्ट ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि Tata Sons को कौन सा गवर्नेंस मॉडल बेहतर तरीके से चलाएगा। सवाल यह है कि लाखों जरूरतमंद और वंचित भारतीयों के हितों की बात कौन करेगा।

चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर क्या विवाद है?

विवाद 17 सितंबर को हुई Tata Sons की बोर्ड बैठक के बाद और बढ़ गया। इस बैठक में चंद्रशेखरन को चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव पर विचार हुआ था।

Tata Trusts ने इस प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाया है। ट्रस्ट का कहना है कि कंपनी के आर्टिकल्स के मुताबिक, इस नियुक्ति के लिए Tata Trusts के नामित निदेशकों का जरूरी समर्थन मिलना चाहिए।

Tata Sons के बोर्ड में Tata Trusts के दो नामित निदेशक हैं। ट्रस्ट का तर्क है कि दो सदस्यों में बहुमत का मतलब दोनों का समर्थन होना चाहिए। लेकिन एक नामित निदेशक ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

इसी वजह से Tata Trusts का कहना है कि जरूरी समर्थन नहीं मिला। ट्रस्ट ने इस प्रस्ताव को वैध नहीं माना है।

चेयरमैन के निर्णायक वोट पर भी विवाद

Tata Trusts ने चेयरमैन के निर्णायक वोट को लेकर भी अपनी स्थिति साफ की है। ट्रस्ट का कहना है कि यह वोट तभी इस्तेमाल किया जा सकता है, जब पूरे बोर्ड में वोट बराबर हों।

उसके मुताबिक, निर्णायक वोट का इस्तेमाल Tata Trusts के नामित निदेशकों से जरूरी समर्थन नहीं मिलने की स्थिति को दूर करने के लिए नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर Tata Trusts का कहना है कि Chandrasekaran की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव सही तरीके से पास नहीं हुआ। ट्रस्ट ने इसे शुरू से ही अमान्य बताया है और कहा है कि इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है।

Tata Sons की लिस्टिंग भी बना मुद्दा

Chandrasekaran की पुनर्नियुक्ति के अलावा Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर भी खींचतान चल रही है। Tata Trusts का कहना है कि गवर्नेंस सुधारने के लिए लिस्टिंग को जरूरी बताना सही नहीं है।

ट्रस्ट के मुताबिक, Tata Sons पहले से ही कई ऐसे गवर्नेंस नियमों का पालन करती है, जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू होते हैं। इसलिए सिर्फ शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से गवर्नेंस में कोई बड़ी कमी दूर होगी, ऐसा मानने का आधार नहीं है।

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टाटा समूह में छिड़ा घमासान

मुंबई। देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक टाटा समूह में घमासान छिड़ गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को ऐलान किया कि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन पांच साल और पद पर रहेंगे। बोर्ड ने उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया। इसके तुरंत बाद टाटा समूह के प्रमुख नोएल टाटा ने फैसले को गैरकानूनी बताया। असल में टाटा संस लिमिटेड को बोर्ड ने एक वोटिंग के जरिए 4-1 से चंद्रशेखर के पक्ष में फैसला किया और उनको चेयरमैन बनाए रखने की ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि उन्होंने अगस्त में चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था।

अब बोर्ड के फैसले को लेकर घमासान छिड़ा है। नोएल टाटा ने उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने को गैरकानूनी करार दिया है। नोएल टाटा ने कहा है कि उन्होंने चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाए रखने के खिलाफ वोट किया था। उनका वोट बोर्ड के अंदर वीटो की हैसियत रखता है। इसका अर्थ है कि बाकी लोग कुछ भी कहें अंतिम फैसला नोएल टाटा माना जाएगा। उनका कहना है कि एक गलत कानूनी राय के आधार पर उनके वीटो को खारिज कर दिया गया।

जानकार सूत्रों का कहना है कि यह विवाद आगे बढ़ने वाला है। बताया जा रहा  है कि टाटा समूह की आम सभा यानी एजीएम की बैठक में नोएल टाटा चेयरमैन पद से चंद्रशेखरन को हटाने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि टाटा संस की सालाना बैठक पिछले दिनों टाल दी गई थी। लेकिन 31 दिसंबर से पहले यह बैठक करानी होगी। उसमें चंद्रशेखरन को हटाने का प्रयास हो सकता है।

बहरहाल, इससे पहले बोर्ड ने गुरुवार को चंद्रशेखर के तीसरे कार्यकाल की मंजूरी दी। इसके साथ ही कंपनी को शेयर मार्केट में उतारने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ध्यान रहे अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। उससे पहले उन्होंने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। कहा गया था कि नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है। अब उनको तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो उसकी मंजूरी एजीएम में लेनी होगी। उसमें टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी 66 फीसदी है। वहां पर नोएल टाटा चंद्रशेखरन की नियुक्ति को रोक सकते हैं।

अगर चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की नियुक्ति मिलती है तो टाटा ग्रुप में पहली बार कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की नीति के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका नया कार्यकाल फरवरी 2027 से शुरू होगा और 2032 में खत्म होगा। गौरतलब है कि चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया।