राहुल ने दी केस करने की चुनौती

पणजी। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के जरिए वोट चोरी के आरोपों को दोहराते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वह उनके ऊपर मुकदमा करे। राहुल ने कहा है कि वे लगातार वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे डंके की चोट पर कहते हैं कि और राज्य में कहते हैं कि प्रधानमंत्री वोट चोरी करते हैं। फिर भी उनके ऊपर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता है।

गौरतलब है कि गोवा में चार महीने के बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उससे पहले राज्य के दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं हर राज्य से कहता हूं पीएम वोट चोरी करते हैं। लेकिन मुझ पर कोई केस दर्ज नहीं होता। क्योंकि, ये जानते हैं कि अगर केस हुआ तो मामला लीगल हो जाएगा और ये फंस जाएंगे’। उन्होंने दावा करते हुए कहा, ‘दिल्ली में हम कुछ ही समय में पीएम, गृहमंत्री से निपट लेंगे। काम जारी है। सरकार की एक्सपायरी डेट आने वाली है’। राहुल ने आगे कहा, ‘आपने देखा है कि आजकल पीएम सामने खड़े नहीं हो सकते हैं। क्योंकि ये जानते हैं कि देश का युवा इनके खिलाफ खड़ा हो गया है’।

राहुल गांधी गोवा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान ‘गोय राखोन यात्रा’ में शामिल होने पहुंचे थे। यहा यात्रा 28 दिन चली थी और इसमें राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों को कवर किया गया। राहुल का पिछले चार सालों में यह पहला गोवा दौरा है।

कांग्रेस की यात्रा के समापन कार्यक्रम में राहुल ने कहा, ‘पूरी दुनिया मानती थी कि इंडिया का एजुकेशन सिस्टम नंबर वन मॉडल का था। लेकिन, आज दिल्ली में स्टूडेंट्स को ही मारा जा रहा है। हर एजुकेशनल सिस्टम में इन्होंने बीजेपी और आरएसएस के लोग बैठे हुए हैं’। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बहुत भ्रष्टाचार है और कांग्रेस जीतेगी तो इसे समाप्त करेगी। उन्होंने कहा, ‘हाईटेक करप्शन, जमीन का करप्शन ये यहां करते हैं। जैसे पहले गुजरात में नरेंद्र मोदी का मॉडल था। वैसे ही गोवा में करप्शन का मॉडल है। इसे सिर्फ कांग्रेस ही खत्म कर सकती है’।

राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी गोवा में है। उन्होंने कहा, ‘पहले मास्टर प्लान था, मास्टर प्लान को रद्द कर दिया। इनका यही काम है कि पैसा कैसे बनाए। इनका यही काम है। गोवा की जनता को लूटने का, आपकी जमीन छीनकर अरबपतियों को देने का’। उन्होंने कहा कि गोवा देश में सबसे सुंदर जगह है, सबसे अच्छा कल्चर है। लेकिन यहां भी सरकार लोगों की जमीन छीनकर गोवा के जो बाहर के लोगों को करोड़ों में बेचती है।

UPESSC PRT Recruitment 2026: प्राइमरी टीचर भर्ती के लिए आवेदन की तारीख बढ़ी, जानें 12,405 पदों के लिए कब तक कर सकते हैं अप्लाई

UPESSC PRT Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने असिस्टेंट टीचर प्राइमरी भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 28 अक्टूबर, 2026 कर दी है। जिन उम्मीदवारों ने अभी तक अपना आवेदन जमा नहीं किया है, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

पहले आवेदन की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर, 2026 तय की गई थी। एक्सटेंशन के बाद, उम्मीदवारों के पास अपने जमा किए गए आवेदन फॉर्म में करेक्शन करने के लिए अतिरिक्त समय भी होगा। आयोग द्वारा जारी शॉर्ट नोटिस के अनुसार, आवेदन विवरण में बदलाव करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर, 2026 है। इस भर्ती प्रक्रिया का मकसद उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट टीचर की 12,405 वैकेंसी को भरना है। इसमें उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत प्राइमरी स्कूल और उससे जुड़े नॉन-गवर्नमेंट एडेड प्राइमरी स्कूल शामिल हैं।

UPESSC PRT भर्ती 2026: पदवार बंटवारा

आयोग ने प्राथमिक शिक्षक के पोस्ट की दो श्रेणी में 12,405 पदों की घोषणा की है। कुल पदों में से 11,508 उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत शहरी प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर के लिए हैं। बाकी 897 पोस्ट लड़कों और लड़कियों के लिए मान्यता प्राप्त एडेड प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर के लिए हैं। श्रेणी के हिसाब से बंटवारा इस तरह है:

पोस्ट कैटेगरी वैकेंसी

यूपी बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत शहरी प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर 11,508

लड़कों और लड़कियों के लिए एफिलिएटेड नॉन-गवर्नमेंट एडेड प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर 897

कुल 12,405

विज्ञापित पदों के लिए पे स्केल लेवल 6 है, जो Rs 35,400 से Rs 1,12,400 तक है। उम्मीदवारों को लागू योग्यता आवश्यकताओं, चयन प्रक्रिया और दूसरी सेवा शर्तों के लिए विस्तृत भर्ती नोटिफिकेशन देखना चाहिए।

UPESSC PRT भर्ती 2026: जरूरी तारीखें

जानकारी पिछली तारीख बढ़ी हुई तारीख

अप्लाई करने की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर, 2026 28 अक्टूबर, 2026

एप्लीकेशन में सुधार की आखिरी तारीख दी गई जानकारी में नहीं बताई गई है 31 अक्टूबर, 2026

UPESSC PRT भर्ती 2026: अप्लाई करने के स्टेप्स

  • ऑफिशियल वेबसाइट, upessc.up.gov.in पर जाएं।
  • विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत असिस्टेंट टीचर प्राइमरी भर्ती 2026 लिंक खोलें।
  • रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन पढ़ें और एलिजिबिलिटी शर्तें चेक करें।
  • अगर जरूरी हो, तो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करें।
  • आवेदन फॉर्म में बताई गई पर्सनल, एजुकेशनल और दूसरी जानकारी भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स बताए गए फॉर्मेट में अपलोड करें।
  • अगर लागू हो, तो ऑफिशियल नोटिफिकेशन में बताए अनुसार एप्लीकेशन फीस भरें।
  • भरी गई डिटेल्स देखें और आवेदन फॉर्म जमा करें।
  • आगे के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड या प्रिंट करें।

अपना आवेदन जमा कर चुके उम्मीदवारों को अपना फॉर्म चेक कर लेना चाहिए। अगर उसमें किसी सुधार की जरूरत है, तो बदलाव करने की विंडो 31 अक्टूबर, 2026 को बंद हो जाएगी।

UPESSC PRT लिखित परीक्षा 3 और 4 दिसंबर को होगी

असिस्टेंट टीचर प्राइमरी भर्ती 2026 के लिए लिखित परीक्षा 3 और 4 दिसंबर, 2026 को होगी। एप्लीकेशन की आखिरी तारीख बढ़ने के साथ, जिन कैंडिडेट्स ने अभी तक अप्लाई नहीं किया है, उन्हें 28 अक्टूबर, 2026 तक प्रोसेस पूरा कर लेना चाहिए।

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नौकरी नहीं मिली तो परेशान थे, अब बिना अप्लाई किए रोज आ रहे ऑफर, वायरल हुई शख्स की पोस्ट

जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि जिस चीज की हमें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसे हासिल करना उतना ही मुश्किल लगता है। नौकरी चाहिए तो कंपनियां जवाब नहीं देतीं और पढ़ाई के लिए लोन मांगो तो बैंक पीछे हट जाते हैं। लेकिन वक्त बदलते ही तस्वीर भी बदल जाती है। गोवा के एक फाउंडर अक्षत श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर अपना ऐसा ही अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि अब जब उन्हें नौकरी या लोन की जरूरत नहीं है, तो दोनों के ऑफर लगातार मिल रहे हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

जब 100 कंपनियों से किया संपर्क

अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि आज उन्हें लिंक्डइन पर रोजाना करीब दो जॉब ऑफर मिलते हैं, जबकि वह नौकरी की तलाश में भी नहीं हैं। लेकिन जब वह खुद नौकरी पाने के लिए कोशिश कर रहे थे, तब हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय उन्होंने करीब 100 कंपनियों से संपर्क किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ दो कंपनियों की तरफ से जवाब आया। यह अनुभव बताता है कि नौकरी की तलाश में मेहनत करने के बावजूद मनचाहा मौका मिलना हमेशा आसान नहीं होता।

विदेश में पढ़ाई के लिए लोन लेना भी था मुश्किल

अक्षत ने अपनी पोस्ट में एजुकेशन लोन का किस्सा भी साझा किया। विदेश में एमबीए करने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने कई बैंकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने वाला लोन मिलना मुश्किल होगा। वहीं, अब जब उन्हें कर्ज की जरूरत नहीं है, तो उनके मुताबिक, उन्हें रोजाना करीब पांच लोन ऑफर मिल रहे हैं। इसी विरोधाभास ने उनके अनुभव को चर्चा का विषय बना दिया है।

जरूरत के वक्त ही क्यों नहीं मिलते मौके?

अक्षत की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी में खुश होता है, तब रिक्रूटर्स उसे नौकरी के ऑफर देते हैं। लेकिन जैसे ही वह नौकरी तलाशना शुरू करता है, कंपनियों की तरफ से जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों ने इस स्थिति को जिंदगी का अजीब संयोग बताया, जबकि अन्य ने इसके पीछे व्यावहारिक वजहें तलाशने की कोशिश की।

‘काबिलियत बढ़ाओ, कामयाबी खुद पीछे आएगी’

एक यूजर ने इस अनुभव को किस्मत से जोड़ने के बजाय व्यक्ति की योग्यता और विश्वसनीयता से जोड़ा। उसके मुताबिक, कंपनियां उम्मीदवार की क्षमता, अनुभव और उपलब्धियों को देखकर फैसला करती हैं। इसी तरह बैंक भी कर्ज देने से पहले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

अपनी बात समझाने के लिए यूजर ने फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर डायलॉग भी याद दिलाया, “काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।”

अक्षत का अनुभव हर किसी की जिंदगी पर लागू हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन उनकी पोस्ट ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है: क्या सफलता के लिए सिर्फ मौके तलाशना काफी है, या खुद को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है?

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अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत:इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला

अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। CNN के मुताबिक, हमलावर को एक स्थानीय नागरिक ने गोली मार दी, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर की उम्र करीब 16 साल थी। एजुकेशन वीक की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल में गोलीबारी का यह इस साल का 26वां मामला है। गोलीबारी के बाद की 3 तस्वीरें मारे गए बच्चे 5 से 11 साल के थे एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, मारे गए बच्चों की उम्र 5, 8 और 11 साल थी। मरने वालों में एक शिक्षक भी शामिल है। इनके परिवारों को जानकारी दे दी गई है। गोलीबारी में घायल 7 साल के एक बच्चे और 54 साल के शिक्षक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस प्रमुख माइक क्रांट्ज ने बताया कि हमलावर बेंड का रहने वाला था। उसने स्कूल के बंद दरवाजों पर गोली चलाकर अंदर घुसने का रास्ता बनाया था। FBI की टीम भी जांच में जुटी FBI के निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया पर बताया कि एजेंसी की टीम घटनास्थल पर मौजूद है। फिलहाल जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या हमलावर पहले कभी इस स्कूल में पढ़ा था। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। आने वाले दिनों में घटना से जुड़ी और जानकारी जारी की जाएगी। स्कूल में करीब 450 छात्र पढ़ते हैं रॉयटर्स के मुताबिक, सिल्वर रेल एलीमेंट्री स्कूल में किंडरगार्टन से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 450 छात्र और 40 कर्मचारी हैं। ओरेगन की गवर्नर टीना कोटेक ने हमलावर को रोकने वाले स्थानीय नागरिक से भी बात की। गवर्नर ने उस नागरिक की तारीफ करते हुए कहा कि उसने बहादुरी से लोगों की जान बचाई। इस साल हुई गोलीबारी की बड़ी घटनाएं 19 अप्रैल, लुइसियाना: श्रेवपोर्ट में गोलीबारी में 8 बच्चों की मौत हुई। इनमें हमलावर के 7 बच्चे शामिल थे। 9 अक्टूबर, पेंसिल्वेनिया: एरी में एक व्यक्ति ने परिवार के 7 सदस्यों और एक परिचित की हत्या कर दी। बाद में उसने खुदकुशी कर ली। 9 अक्टूबर, जॉर्जिया: डगलस में एक व्यक्ति ने परिवार के 4 सदस्यों की गोली मारकर हत्या की और फिर खुदकुशी कर ली। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से 35 की मौत: इनमें 34 बच्चे, 1 महिला टीचर पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक प्राइवेट स्कूल की छत गिरने से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 35 हो गया है। इनमें 34 छात्र और एक महिला टीचर शामिल हैं। सभी बच्चों की उम्र 13 साल या उससे कम है। हादसे के बाद निजी स्कूल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

India exam reforms 2026: देश में बदलेगा प्रवेश परीक्षाओं का पैटर्न, पेपर लीक के बाद कंप्यूटर आधारित परीक्षा ढांचा तैयार करने पर जोर

India exam reforms 2026: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रलहाद जोशी ने कहा कि भारत प्रौद्योगिकी और बड़े क्वेश्चन बैंक का इस्तेमाल करके अपनी परीक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करेगा। सरकार पेपर लीक और नकल के आरोपों से सामने आई कमियों को दूर कर रही है, जिनकी वजह से हाल के समय में बड़े पैमाने पर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। बुधवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के मौके पर अपने विचार व्यक्त किए।

जोशी ने एक इंटरव्यू में जोशी ने कहा, “हम इसे और ज्यादा टेक्नोलॉजी पर आधारित बना रहे हैं, इसे अधिक निष्पक्ष बना रहे हैं, उन सभी कमियों को हम अभी दूर कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार जल्द से जल्द कंप्यूटर-बेस्ड एग्जाम सहित “सिस्टम में पूरा बदलाव” चाहती है। जोशी ने कहा कि भारत के सबसे जाने-माने टेक फाउंडर, इंफोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक और अध्यक्ष नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाला एक पैनल सिस्टम में सुधारों की जांच कर रहा है और उसने सरकार के साथ अपने प्लान पर चर्चा की है।

उन्होंने कहा कि पैनल को अभी अपनी रिपोर्ट देनी है, लेकिन उसकी सिफारिशों पर “बहुत, बहुत सकारात्मक और गंभीरता से” विचार किया जाएगा। हाल के वर्षों में भारत में परीक्षा पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों की बाढ़ आ गई है, जिसमें मेडिकल स्कूलों के लिए अत्यंत प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा से जुड़ी दिक्कतें भी शामिल हैं। इन नाकामियों की वजह से जुलाई में बड़े पैमाने पर छात्रों के प्रदर्शन हुए और दुनिया की कुछ सबसे बड़ी परीक्षाएं कराने वाली व्यवस्था की कमियां सामने आईं। इस अशांति के बीच पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

जोशी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को कुशल कर्मियों के कौशल और नियोक्ताओं की जरूरत के बीच के अंतर को कम करने के लिए जरूरी बताया। साथ ही कहा कि स्कूल वोकेशनल ट्रेनिंग, इनोवेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत को अपनी बड़ी युवा आबादी को एक स्किल्ड वर्कफोर्स में बदलने की जरूरत है जो उसके मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों को पूरा कर सके।

Tripura Civic Polls: स्थानीय निकाय चुनाव के लिए त्रिपुरा SEC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, नवंबर में होंगे अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव

Neha Bora: प्रोटेस्ट में पुलिस को खूब छकाने के बाद देशभर में चर्चा का केंद्र बनीं नेहा बोरा JNU से कर रही हैं कैसी पढ़ाई?

Neha Bora Qualification: राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की छात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग पार करने, पुलिसकर्मियों से बचते हुए आगे बढ़ने और हिरासत में लिए जाने से जुड़ी उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसके बाद उनकी एजुकेशन क्वालीफिकेशन, पारिवारिक बैकग्राउंड और छात्र राजनीति में उनके सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

प्रदर्शन के बाद भारत समेत दुनियाभर में नेहा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई और उत्तराखंड से छात्र राजनीति तक के सफर के बारे में भी जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं कि नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फिलहाल क्या पढ़ाई कर रही हैं और वह राजनीति में कैसे आईं…

कहां की रहने वाली हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सेना में तैनाती के कारण परिवार को अलग-अलग शहरों और सैन्य छावनियों में रहना पड़ा। इसी वजह से नेहा का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता।

कहां से की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई?

हमारे सहयोगी ‘News18 हिंदी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा बोरा ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से पूरी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के दिनों में ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक विचारों में बढ़ने लगी थी। इसी दौरान उन्होंने कम्युनिस्ट एवं क्रांतिकारी विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा लेखन में दिलचस्पी ली।

बताया जाता है कि उनके शुरुआती वैचारिक अनुभवों ने सामाजिक मुद्दों और राजनीति के प्रति उनकी समझ विकसित करने में भूमिका निभाई।

DU से ग्रेजुएशन, अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स

नेहा बोरा ने देश की राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर, कला, अभिव्यक्ति और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का स्टडी किया जाता है। नेहा की परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर और सामाजिक विषयों की अहम भूमिका रही है।

JNU में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में कर रहीं PhD

ग्रेजुएशन और मास्टर्स के बाद नेहा बोरा ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एडमिशन लिया। वह फिलहाल JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय में PhD कर रही हैं। वह अभी यूनिवर्सिटी में डॉक्टोरल स्कॉलर हैं। इस तरह उनकी शैक्षणिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरू होकर अंबेडकर यूनिवर्सिटी और फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी तक पहुंची। पढ़ाई के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों और छात्र राजनीति में भी लगातार एक्टिव रहीं।

थिएटर से भी जुड़ी रही हैं नेहा

नेहा बोरा की पहचान केवल एक छात्र नेता के तौर पर नहीं है। वह लंबे समय तक थिएटर से भी जुड़ी रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह ‘संगवारी’ के साथ काम किया है। स्ट्रीट थिएटर के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी नेहा के लिए सामाजिक सवालों पर संवाद करने और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम रही।

CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

नेहा बोरा की छात्र राजनीति में सक्रियता 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तेजी से बढ़ी। उस समय देश के कई यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इसी दौर में नेहा की सामाजिक मुद्दों, कैंपस चर्चाओं और थिएटर से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के साथ छात्र राजनीति में सक्रियता भी बढ़ी। बाद में वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं। AISA एजुकेशन, छात्र अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अभियान चलाने वाला छात्र संगठन है। नेहा आगे चलकर इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

प्रदर्शन के बाद फिर चर्चा में क्यों आईं?

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद नेहा बोरा एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी एजुकेशन और छात्र राजनीति में भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नेहा की यात्रा में उच्च शिक्षा, थिएटर और छात्र आंदोलनों के तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं। उत्तराखंड से निकलकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और फिर छात्र संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का उनका सफर अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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भूकंप के मलबे में फोटोशूट करवाने वाली ये मॉडल इंटरनेट पर हो गईं वायरल, कौन हैं ग्रेसी बोन?

सोशल मीडिया पर कभी-कभी कुछ तस्वीरें ऐसी सामने आती हैं, जो लोगों का ध्यान खींचने के साथ विवाद भी खड़ा कर देती हैं। इन दिनों मॉडल ग्रेसी बोन (Gracie Bon) अपनी कुछ तस्वीरों को लेकर चर्चा में हैं। भूकंप से प्रभावित इलाके में मलबे के बीच उनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके फोटोशूट के तरीके पर सवाल उठाए, तो ग्रेसी ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी। आखिर कौन हैं ग्रेसी बोन और उनकी तस्वीरों को लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है? आइए जानते हैं।

मलबे के बीच तस्वीरें शेयर कर चर्चा में आईं ग्रेसी बोन

पिछले हफ्ते आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई जगहों पर इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचा। इसी बीच ग्रेसी बोन ने रविवार को भूकंप प्रभावित इलाके की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। इनमें वह मलबे के बीच पोज देती नजर आईं।

तस्वीरों के साथ उन्होंने अपने देश के हालात पर दुख जताया। ग्रेसी ने लिखा कि भौतिक चीजों को दोबारा हासिल किया जा सकता है, लेकिन जिंदगी अनमोल है। उन्होंने लोगों से वर्तमान के लिए आभारी रहने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील भी की।

आखिर कौन हैं ग्रेसी बोन?

ग्रेसी बोन एक मॉडल और सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं, जो अपनी तस्वीरों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों का ध्यान खींचती हैं। इस बार उनकी चर्चा किसी फैशन शूट के कारण नहीं, बल्कि भूकंप से प्रभावित इलाके में खिंचवाई गई तस्वीरों की वजह से हो रही है।

उनकी पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित जगह पर इस तरह पोज देकर तस्वीरें शेयर करना कितना सही है। कुछ लोगों को उनका यह अंदाज असंवेदनशील लगा, क्योंकि भूकंप से प्रभावित परिवार उस समय मुश्किलों का सामना कर रहे थे।

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वायरल तस्वीरों पर ग्रेसी बोन ने क्या कहा?

आलोचनाओं के बीच ग्रेसी ने एक वीडियो साझा कर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वह प्रभावित इलाके में केवल तस्वीरें खिंचवाने नहीं गई थीं, बल्कि परिवारों को जरूरी सामान देने और उनकी जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने में मदद करना चाहती थीं।

ग्रेसी के मुताबिक, तस्वीरें साझा करने का उद्देश्य लोगों का ध्यान प्रभावित परिवारों की ओर खींचना और अपने फॉलोअर्स को मदद के लिए प्रेरित करना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद आपदा की गंभीरता को नजरअंदाज करना नहीं था।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

ग्रेसी बोन की तस्वीरों को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने उनके फोटोशूट के तरीके की आलोचना की, जबकि उनकी सफाई के मुताबिक, वह प्रभावित लोगों की मदद के लिए जागरूकता फैलाना चाहती थीं।

देश की प्रोटेस्ट पोस्टर गर्ल बनीं नेहा बोरा खुद कितना पढ़ी-लिखी हैं? उनकी JNU में आने तक की एजुकेशन जर्नी कुछ ऐसी है

September CPI : सितंबर में रिटेल महंगाई 23 महीने के हाई पर आई, खाने-पीने की चीजों ने दिया सबसे तगड़ा झटका

September CPI : सितंबर में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज़ में यह पहली बार है जब महंगाई दर 5 प्रतिशत के स्तर से ऊपर गई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का इस बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान रहा है, जिससे परिवारों का खर्च काफी बढ़ गया है। आज 12 अक्टूबर को आए आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी, जिसमें बढ़ोतरी हुई है। यह मार्च के बाद से सालाना महंगाई दर में लगातार छठी मासिक बढ़ोतरी है।

इस बढ़ोतरी के साथ महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली गई, हालांकि यह केंद्रीय बैंक की 2-6 प्रतिशत की स्वीकार्य सीमा के भीतर ही रही है।

खाने-पीने की चीजो की महंगाई सबसे ज्यादा बढ़ी

कंज्यूमर फ़ूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के हिसाब से, खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई अगस्त में 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई। प्याज़ की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त में इसकी महंगाई दर 48.78 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई दर 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत हो गई, जबकि नींबू की कीमतों में 36.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले महीने 15.15 प्रतिशत थी।

हालांकि, कुछ सब्जियों में राहत मिली। आलू की कीमतों में सालाना 11.50 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि टमाटर की कीमतें 8.62 प्रतिशत कम हुईं। चांदी के गहनों में महंगाई दर 87.80 प्रतिशत के बहुत ऊंचे स्तर पर बनी रही, हालांकि अगस्त में यह 106.81 प्रतिशत थी। सितंबर में पान-तंबाकू की महंगाई 4.71% से बढ़कर 4.8% पर रही। वहीं, फूड एंड बेवरेजेज महंगाई 5.66% से बढ़कर 7.36% पर रही।

ग्रामीण इलाकों में महंगाई 6 प्रतिशत के पार

ग्रामीण भारत में महंगाई में ज़्यादा तेज़ी देखी गई। सितंबर में ग्रामीण भारत की खुदरा महंगाई अगस्त के 5.24 प्रतिशत से बढ़कर 6.08 प्रतिशत हो गई। शहरी इलाकों में महंगाई 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.88 प्रतिशत हो गई। इसके चलते ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच का अंतर बढ़कर 1.20 प्रतिशत हो गया, जबकि अगस्त में यह 0.93 प्रतिशत था।

बड़े राज्यों में, तमिलनाडु की रिटेल महंगाई दर 6.81 प्रतिशत दर्ज की गई, इसके बाद ओडिशा में 6.70 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 6.68 प्रतिशत, तेलंगाना में 6.64 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 6.29 प्रतिशत रही।

कीमतों का दबाव सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ों तक ही सीमित नहीं

ताज़ा आंकड़ों से कई तरह की सेवाओं और खाने-पीने से जुड़ी चीज़ों के अलावा अन्य कैटेगरी में भी महंगाई बढ़ने का पता चलता है। पर्सनल केयर, मिसिलेनियस महंगाई घटकर 13.75% पर रही है। वहीं, रेस्टोरेंट,एकॉमडेशन सर्विस महंगाई बढ़कर 9.36% पर रही है। एजुकेशन सर्विसेस महंगाई 3.73% से बढ़कर 3.94% पर रही है।

सितंबर में रिक्रिएशन, स्पोर्ट & कल्चर महंगाई बढ़कर 2.16 प्रतिशत पर आ गई। वहीं, इंफो, कम्युनिकेशन महंगाई 2.01 प्रतिशत से बढ़कर 2.44 प्रतिशत पर रही। सितंबर रिटेल महंगाई दर 23 महीने के ऊपरी स्तर पर रही है। ट्रांसपोर्टेशन महंगाई दर 4.60 प्रतिशत से बढ़कर 5.01 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं, हेल्थ महंगाई दर 1.34 प्रतिशत से बढ़कर 1.40 प्रतिशत पर रही है। फर्निशिंग, घरेलू उपकरण महंगाई दर 3.11 न पर रही है। हाउसिंग यूटिलिटी महंगाई 2.61प्रतिशत से बढ़कर 2.74 प्रतिशत पर रही है। वहीं, कपड़ा, जूता चप्पल महंगाई 3.56 प्रतिशत से बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर रही है।

मॉनेटरी पॉलिसी पर असर

सितंबर में महंगाई के आंकड़े RBI के लिए एक चुनौती हैं, क्योंकि मार्च से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण हेडलाइन महंगाई दर, RBI की तय सीमा (टॉलरेंस बैंड) के ऊपरी स्तर के करीब पहुंच गई है।

इन दबावों का बने रहना RBI के भविष्य के पॉलिसी फैसलों के लिए अहम होगा। अब यह देखना होगा कि क्या खाने-पीने की चीजों की महंगाई में बढ़ोतरी कुछ समय के लिए है या यह आम कंज्यूमर कीमतों पर भी इसका असर दिखने लगा है। RBI एमपीसी की अगली बैठक दिसंबर में होगी।

 

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 13 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

रांची में 65 करोड़ की लागत से बन रही हाई-टेक लाइब्रेरी, एक साथ 500 लोगों के पढ़ने की होगी सुविधा

रांची में झारखंड सरकार और सीसीएल की मदद से 65 करोड़ की लागत से सेमराबादी में लाइब्रेरी बन रही है। यह लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, जिसमें टेक्नोलॉजी का काफी इस्तेमाल होगा। सीनियर सिटीजंस से लेकर बच्चों तक के लिए अलग रीडिंग रूम होंगे। लाइब्रेरी में 6 लिफ्ट, हर फ्लोर पर रीडिंग रूम, ई लाइब्रेरी जैसे कई आधुनिक सुविधाएं होंगी। लाइब्रेरी में एक साथ 500 से अधिक लोग पढ़ सकेंगे।

एक फ्लोर महान हस्तियों के लिए

रांची के सांसद संजय सेठ ने बताया कि हमने लाइब्रेरी के निर्माण कार्य का जायजा लिया है। काम काफी तेजी से चल रहा है। इस लाइब्रेरी की खास बात यह है कि इसका एक पूरा फ्लोर महान हस्तियों और परमवीर चक्र जैसे बड़े सम्मान पाने वालों के लिए रखा गया है। इस फ्लोर पर इन हस्तियों को जानने और समझने का मौका इस लाइब्रेरी में मिलेगा।

कैफेटेरिया और 6 लिफ्ट की सुविधा

ग्राउंड फ्लोर पर कैफेटेरिया होगी ताकि बच्चों को पढ़ाई के बीच रिफ्रेशमेंट की सुविधा मिल सके। कैफेटेरिया में हेल्दी फूड के विकल्प होंगे। लोगों खासकर बुजुर्ग लोगों को ध्यान में रखकर लाइब्रेरी में 6 लिफ्ट लगाई जा रही हैं। इससे एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर पर आने-जाने में काफी आसानी होगी। लाइब्रेरी में वाई-फाई की भी सुविधा होगी।

सीनियर सिटीजन, बच्चों के लिए खास एरिया

सेठ ने बताया कि एक फ्लोर पूरी तरह से सिटीजंस और बच्चों को समर्पित होगा। सीनियर सिटीजंस की जरूरत को ध्यान में रखते हुए स्पिरिचुअलिटी से जुड़ी किताबों की व्यवस्था की जा रही हैं। ये किताबें हिन्दी, अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में होंगी। बच्चों के लिए कॉमिक्स से लेकर फिक्सन स्टोरी, पजल्स बुक जैसे कई वेरिएंट की किताबें उपलब्ध होंगी।

मोराबादी बनेगा एजुकेशन हब

मोराबादी में कई सारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी हैं। इन संस्थानों के स्टूडेंट्स को भी लाइब्रेरी से फायदा होगा। इस क्षेत्र की पहचान पहे से ही एक बड़े एजुकेशन हब के रूप में बन रही है। आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट्स का लाइब्रेरी में खास ध्यान रखा जाएगा। उन्हें मुफ्त में लाइब्रेरी एक्सेस की फैसिलिटी दी जाएगी। सामान्य कैटेगरी के स्टूडेंट्स से फीस ली जाएगी। अभी फीस तय नहीं की गई है।

(रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट)

अब आयुष डॉक्टरों को मिलेगी इमरजेंसी और वेलनेस की स्पेशल ट्रेनिंग, भारत-UK मिलकर जानिए क्या करेंगे

भारत और UK के बीच हेल्थकेयर सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए एक नई पहल की घोषणा की गई है। इस पहल के तहत, आयुष डॉक्टरों को अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने, इमरजेंसी प्रबंधन और बीमारी की रोकथाम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर मारिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और BAPIO ट्रेनिंग एकेडमी ने इस पहल को शुरू करने की घोषणा की। इसका मकसद डॉक्टरों की क्लिनिकल स्किल्स को बेहतर बनाना और मरीजों की देखभाल में उनकी भूमिका को मजबूत करना है। यह घोषणा 9 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली में हुए इंडो-UK हेल्थकेयर कॉन्क्लेव के दूसरे एडिशन में की गई। इस इवेंट का उद्घाटन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। दो दिन के इस कॉन्क्लेव में भारत और UK के हेल्थकेयर एक्सपर्ट, डॉक्टर, एकेडमिक्स और पॉलिसीमेकर्स एक साथ आए।

6 महीने के होंगे दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम

इस पहल के तहत, आयुष ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों के लिए छह महीने के दो सर्टिफिकेट प्रोग्राम बनाए गए हैं। पहला प्रोग्राम एक्यूट केयर और इमरजेंसी सपोर्ट के लिए है, और दूसरा लाइफस्टाइल हेल्थ और वेल-बीइंग काउंसलिंग और प्रैक्टिस के लिए है। ये प्रोग्राम अस्पतालों में स्पेशलिस्ट की देखरेख में एकेडमिक और प्रैक्टिकल दोनों तरह की ट्रेनिंग देंगे। पहला प्रोग्राम इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर की जरूरतों पर फोकस करेगा। डॉक्टरों को हालत बिगड़ने के शुरुआती लक्षणों को पहचानने, सीनियर स्पेशलिस्ट को तुरंत बताने और जरूरत पड़ने पर मरीजों को सही इलाज के लिए रेफर करने जैसी स्किल्स सिखाई जाएंगी। इसके अलावा, मरीज की सुरक्षा, मेडिकल रिकॉर्ड बनाए रखने, हेल्थकेयर वर्कर्स के साथ कोऑर्डिनेट करने और अस्पताल में इमरजेंसी से जुड़े कामों में मदद करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

बीमारियों से बचाव और लाइफस्टाइल पर भी फोकस

दूसरा सर्टिफिकेट प्रोग्राम लोगों को हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए जागरूक करने पर फोकस करेगा। इसमें डाइट, रोजाना की फिजिकल एक्टिविटी, अच्छी नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट और हेल्थ चेकअप जैसे टॉपिक शामिल होंगे। यह प्रोग्राम डॉक्टरों को मरीजों को सही हेल्थ जानकारी देने और उनकी आदतों में जरूरी बदलाव करने में गाइड करने के लिए ट्रेन करेगा। यह जरूरत पड़ने पर मरीजों को संबंधित स्पेशलिस्ट के पास रेफर करने पर भी फोकस करेगा। इस ट्रेनिंग का मकसद हॉस्पिटल के वेलनेस डिपार्टमेंट, बीमारी से बचाव के प्रोग्राम और कम्युनिटी हेल्थ सर्विस में डॉक्टरों की भूमिका को बेहतर बनाना है।

मरीजों की देखभाल बेहतर बनाने पर जोर

यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट AYUSH, प्रतापराव गणपतराव जाधव ने कहा कि भारत के पास पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था में बहुत अनुभव है, जबकि UK के पास मरीज सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता और सिस्टमैटिक हॉस्पिटल प्रोसेस में विशेषज्ञता है। दोनों देशों के बीच सहयोग से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकती हैं।

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO डॉ. राजीव सिंघल के मुताबिक, इस साझेदारी का मेन मकसद ट्रेनिंग और जानकारी के आदान-प्रदान के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। BAPIO ट्रेनिंग एकेडमी के CEO प्रो. पराग सिंघल ने कहा कि दोनों देशों के बीच शेयर्ड ट्रेनिंग और असेसमेंट से डॉक्टरों की स्किल्स को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इस पहल से हॉस्पिटल्स में ट्रेनिंग, एजुकेशन और क्लिनिकल काम से जुड़े अनुभव शेयर किए जाएंगे। इसका मकसद डॉक्टरों की काबिलियत को बढ़ाना और पेशेंट्स को सेफ और एफिशिएंट हेल्थकेयर देने में कंट्रीब्यूट करना है।

दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट

रेलवे को भारी पड़ी रिजर्व कोच से यात्री के सामान की चोरी, दिल्ली के कंज्यूमर कमिशन ने सुनाया 1.45 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश