नौकरी नहीं मिली तो परेशान थे, अब बिना अप्लाई किए रोज आ रहे ऑफर, वायरल हुई शख्स की पोस्ट

जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि जिस चीज की हमें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसे हासिल करना उतना ही मुश्किल लगता है। नौकरी चाहिए तो कंपनियां जवाब नहीं देतीं और पढ़ाई के लिए लोन मांगो तो बैंक पीछे हट जाते हैं। लेकिन वक्त बदलते ही तस्वीर भी बदल जाती है। गोवा के एक फाउंडर अक्षत श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर अपना ऐसा ही अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि अब जब उन्हें नौकरी या लोन की जरूरत नहीं है, तो दोनों के ऑफर लगातार मिल रहे हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

जब 100 कंपनियों से किया संपर्क

अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि आज उन्हें लिंक्डइन पर रोजाना करीब दो जॉब ऑफर मिलते हैं, जबकि वह नौकरी की तलाश में भी नहीं हैं। लेकिन जब वह खुद नौकरी पाने के लिए कोशिश कर रहे थे, तब हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय उन्होंने करीब 100 कंपनियों से संपर्क किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ दो कंपनियों की तरफ से जवाब आया। यह अनुभव बताता है कि नौकरी की तलाश में मेहनत करने के बावजूद मनचाहा मौका मिलना हमेशा आसान नहीं होता।

विदेश में पढ़ाई के लिए लोन लेना भी था मुश्किल

अक्षत ने अपनी पोस्ट में एजुकेशन लोन का किस्सा भी साझा किया। विदेश में एमबीए करने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने कई बैंकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने वाला लोन मिलना मुश्किल होगा। वहीं, अब जब उन्हें कर्ज की जरूरत नहीं है, तो उनके मुताबिक, उन्हें रोजाना करीब पांच लोन ऑफर मिल रहे हैं। इसी विरोधाभास ने उनके अनुभव को चर्चा का विषय बना दिया है।

जरूरत के वक्त ही क्यों नहीं मिलते मौके?

अक्षत की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी में खुश होता है, तब रिक्रूटर्स उसे नौकरी के ऑफर देते हैं। लेकिन जैसे ही वह नौकरी तलाशना शुरू करता है, कंपनियों की तरफ से जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों ने इस स्थिति को जिंदगी का अजीब संयोग बताया, जबकि अन्य ने इसके पीछे व्यावहारिक वजहें तलाशने की कोशिश की।

‘काबिलियत बढ़ाओ, कामयाबी खुद पीछे आएगी’

एक यूजर ने इस अनुभव को किस्मत से जोड़ने के बजाय व्यक्ति की योग्यता और विश्वसनीयता से जोड़ा। उसके मुताबिक, कंपनियां उम्मीदवार की क्षमता, अनुभव और उपलब्धियों को देखकर फैसला करती हैं। इसी तरह बैंक भी कर्ज देने से पहले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

अपनी बात समझाने के लिए यूजर ने फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर डायलॉग भी याद दिलाया, “काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।”

अक्षत का अनुभव हर किसी की जिंदगी पर लागू हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन उनकी पोस्ट ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है: क्या सफलता के लिए सिर्फ मौके तलाशना काफी है, या खुद को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है?

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ट्रम्प ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी को हटाया:वकील होने के दावे पर सवाल उठे, पहली ब्रीफिंग में जुबान लड़खड़ाईं थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

सैम अल्टमैन की कंपनी OpenAI में बड़ी सेंधमारी! सऊदी का इंजीनियर अब्दुलरहमान टॉयलेट पेपर में रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपा क्या कर रहा था?

OpenAI Saudi Engineer Spy Case: दुनिया की सबसे प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI में एक सनसनीखेज सुरक्षा सेंधमारी का मामला सामने आया है। अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) और FBI ने कंपनी में कार्यरत 35 वर्षीय सऊदी मूल के इंजीनियर अब्दुलरहमान अल्फोजान को गिरफ्तार किया है। अल्फोजान पर आरोप है कि उसने कंपनी के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में सीक्रेट रूप से ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाया था, ताकि ‘सुपरइंटेलिजेंस’ टेक्नोलॉजी से जुड़ी संवेदनशील मीटिंग्स को रिकॉर्ड किया जा सके।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर AI और अत्याधुनिक तकनीक को लेकर टेक कंपनियों और सरकारों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है।

टॉयलेट पेपर में छिपाया अंगूठे के आकार का जासूसी डिवाइस

FBI की शिकायत के मुताबिक, जासूसी का यह मामला 30 सितंबर को सामने आया, जब सैन फ्रांसिस्को स्थित OpenAI की इमारत के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे यूएसबी पोर्ट में लगा एक छोटा रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। यह अंगूठे के आकार का एक कस्टमाइज्ड डिवाइस था, जिसमें माइक्रोफोन लगा हुआ था और जिसे कैमरे से भी जोड़ा जा सकता था।

इस डिवाइस को टॉयलेट पेपर में लपेटकर टीवी के पीछे यूएसबी पोर्ट में छिपाया गया था। जांच के अनुसार, इसे 28 सितंबर के आसपास लगाया गया था। हालांकि, इसमें स्टोर डेटा एन्क्रिप्टेड था। एफबीआई जांच अधिकारियों को बाद में अल्फोजान के व्यक्तिगत बैग से भी इसी तरह का एक और कस्टमाइज्ड जासूसी डिवाइस बरामद हुआ।

OpenAI ने खुद के AI मॉडल से पकड़ा आरोपी

OpenAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उसने जासूसी करने वाले व्यक्ति की पहचान करने और डिवाइस के स्रोत का पता लगाने के लिए अपने ही इंटरनल AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि आरोपी कर्मचारी के पास ऑफिस के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी और रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाने की योजना के सबूत मिले हैं। वैसे कंपनी ने राहत की बात यह बताई कि आरोपी कर्मचारी सोर्स कोड, मॉडल वेट्स या कस्टमर डेटा तक पहुंचने या उन्हें लीक करने में कामयाब नहीं हो पाया था। OpenAI ने आरोपी इंजीनियर को तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर एफबीआई को मामला सौंप दिया।

कौन है आरोपी इंजीनियर अब्दुलरहमान अल्फोजान?

प्रोफेशनल बैकग्राउंड: अब्दुलरहमान अल्फोजान जुलाई 2025 से OpenAI में बतौर इंजीनियर कार्यरत था। उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उसने प्रसिद्ध संस्थान एमआईटी (MIT) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से पढ़ाई की है। इससे पहले वह मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में भी काम कर चुका है।वह सितंबर 2020 से अमेरिका का लीगल परमानेंट रेजिडेंट है।

एफबीआई निदेशक काश पटेल ने बयान जारी कर बताया कि आरोपी ने कमरे के कैलेंडर और मीटिंग डिटेल्स हासिल करने के लिए करीब एक महीने तक AI प्रॉडक्टिविटी एजेंट का भी इस्तेमाल किया था। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो अल्फोजान को 5 साल तक की जेल, $250,000 (लगभग ₹2.1 करोड़) का जुर्माना और 3 साल की निगरानी की सजा हो सकती है।

ओपनएआई के अंदर बढ़ते सुरक्षा खतरे और विवाद

यह घटना केवल एक जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि OpenAI में हाल के दिनों में सुरक्षा नियमों को लेकर आंतरिक हलचल भी तेज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर में सुरक्षा कमियों को ढूंढने वाली स्टार्टअप कंपनी ‘Trail of Bits’ को खरीदने के लिए शुरुआती बातचीत कर रही है, ताकि अपने सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर सके।

हाल ही में OpenAI ने संवेदनशील जानकारी के रख-रखाव से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर अपने तीन शोधकर्ताओं- जैस्मीन वांग, तोमेक कोरबैक और मिकिता बालेस्नी को बर्खास्त कर दिया। निष्कासित शोधकर्ताओं ने एक खुला पत्र लिखकर कहा है कि इस तरह की अचानक कार्रवाई से सुरक्षा चिंताओं को उठाने वाले कर्मचारियों में डर का माहौल बन सकता है।

इजराइली PM बोले- भारतीय पायलट की बहादुरी को सलाम:वह असली हीरो, 174 लोगों की जान बचाई; चाकू हमले के बावजूद विमान क्रैश रोका

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विमान क्रैश रोकने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है। नेतन्याहू ने X पर पोस्ट में लिखा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने हमलावर का सामना किया। वह सच्चे हीरो हैं। इजरायली PM ने कहा- कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिससे यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू कर लिया। कैप्टन की वजह से 174 लोगों की जान बची। इनमें इजरायली नागरिकों के साथ दूसरे देशों के लोग भी शामिल थे। दरअसल, बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लायदुबई की फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के दौरान भारतीय पायलट स्मित पर उनके को-पायलट ने चाकू से हमला कर दिया। फिर विमान का कंट्रोल हाथ में लेकर इसे क्रैश कराने की कोशिश की। लेकिन, पायलट स्मित ने हार नहीं मानी और संघर्ष करते हुए साजिश को नाकाम कर दिया। ट्रम्प बोले- प्लंबर ने भी बचाई लोगों की जान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी भारतीय पायलट स्मित मच्छार की तारीफ की। उन्होंने कहा- घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए आवाज लगाई। इके बाद एक यात्री भी कॉकपिट में पहुंचा। ट्रम्प के मुताबिक, वह पेशे से प्लंबर था और उसने कभी विमान नहीं उड़ाया था। यात्री ने को-पायलट को सीट से खींचकर पीछे किया। इसके बाद दूसरे यात्रियों ने मिलकर उसे काबू किया। ट्रम्प ने बताया कि इस यात्री ने टीवी शो ‘एयर डिजास्टर्स’ देखकर विमान उड़ाने की कुछ बातें सीखी थीं। हालांकि, ट्रम्प ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नेतन्याहू और कुछ अन्य सूत्रों से मिली है। उन्होंने कहा कि वह इन बातों की खुद पुष्टि नहीं कर सकते। चाकूबाजी से पहले दोनों पायलटों में हाथापाई हुई थी फ्लाईदुबई की फ्लाइट में यह घटना बुधवार सुबह करीब 9 बजे हुई। विमान में 174 यात्री सवार थे, जिनमें 27 बच्चे शामिल थे। ज्यादातर इजराइली पैसेंजर्स थे। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले से पहले दोनों पायलटों के बीच हाथापाई हुई थी। इसके बाद को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला किया। इस दौरान विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से अचानक 17 हजार फीट नीचे आ गया। एक यात्री और क्रू मेंबर किसी तरह कॉकपिट तक पहुंचने में कामयाब हुए। इसके बाद दूसरे क्रू मेंबर भी कॉकपिट में पहुंचे और विमान की सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि यात्री और क्रू मेंबर फ्लायदुबई के कॉकपिट में कैसे घुसे, क्योंकि कॉकपिट के दरवाजे जबरन खोलने की कोशिशों को रोकने के लिए मजबूत बनाए जाते हैं। आमतौर पर उड़ान के दौरान कॉकपिट का दरवाजा सुरक्षा कारणों से लॉक रहता है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद यह विमान सुरक्षा का नियम बन गया। दोनों पायलट घायल, कैप्टन स्मित की हालत स्थिर एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पायलट घायल हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कैप्टन स्मित की हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के कई वीडियो भी सामने आए हैं। एक वीडियो में विमान तेजी से हिलता दिखा। वहीं दूसरे वीडियो में हमलावर पर काबू पाने के बाद विमान में बैठे पैसेंजर्स ताली बजाकर खुशी मनाते दिखे। इजराइली अधिकारियों ने बताया कि जिस साथी पायलट ने स्मित पर हमला किया, वह ओमान का नागरिक था। इजराइल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि पायलट की हिम्मत ने बड़ी घटना टाल दी। वरना 2001 में हुए अमेरिका के 9/11 जैसी घटना हो सकती थी। इजराइली डेंटिस्ट ने कैप्टन स्मित की मदद की विमान में सवार यात्रियों को कुछ देर के लिए लगा कि वे जिंदा नहीं बचेंगे। एक यात्री ने AFP को बताया कि, “सभी को लगा कि अब हम मरने वाले हैं।” विमान में मौजूद कुछ लोगों ने भी सूझबूझ दिखाई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। विमान में सिविल ड्रेस में 2 रिलीफ पायलट मौजूद थे जिन्होंने बाद में प्लेन को संभाला। जबकि यात्रियों ने हमलावर को कॉकपिट से दूर करने में मदद की। वहीं कैप्टन स्मित की मदद विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट ने की। उन्होंने घायल पायलट का विमान में ही इलाज किया और उनकी जान बचाई। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है। इसके अलावा वे पायलटों की ट्रेनिंग, उनकी जांच और उन्हें काम के दौरान गाइड करने का काम भी करते थे। पॉडकास्ट बताया- पढ़ाई के दौरान पायलट बनने का ख्याल आया पिछले साल अक्टूबर में कैप्टन स्मित ने CS जलक मेहता नाम के यूट्यूब चैनल के साथ पॉडकास्ट किया था। इस दौरान उन्होंने कहा, स्कूलिंग के बाद फैमिली बिजनेस संभालने के लिए मैंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की। लेकिन इसी दौरान मैं एविएशन से जुड़े एक सेमिनार में गया, वहीं मैंने पहली बार पायलट बनने का सोचा। आगे उन्होंने बताया, ‘मेरी पहली कमर्शियल फ्लाइट बेंगलुरु से दिल्ली के लिए थी।’ 10 पॉइंट्स में जानिए विमान में क्या-क्या हुआ ———————- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल जा रही फ्लाइट क्रैश कराने की कोशिश: पायलट को चाकू मारा, 17 हजार फीट नीचे आया विमान; फाइटर जेट की निगरानी में इमरजेंसी लैंडिंग दुबई से तेल अवीव जा रही एक फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की कोशिश हुई। पूरी खबर पढ़ें…

भारतीय पायलट ने विमान क्रैश होने से बचाया:चाकू मार रहे हमलावर से लड़े, 180 पैसेंजर्स सवार थे; इजराइल बोला- 9/11 जैसे हमले की साजिश थी

दुबई से इजराइल जा रही फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की कोशिश हुई। इस दौरान जिस पायलट ने अपने को-पायलेट से लड़कर ऐसा होने से रोका वह भारतीय मूल का है। कैप्टन स्मित मच्छर कॉकपिट में हुई झड़प के दौरान घायल हो गए। ओमानी मूल के को-पायलट ने उन्हें चाकू मारा और प्लेन को क्रैश कराने में लग गए। लेकिन कैप्टन स्मित और यात्रियों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद प्लेन की सफल इमरजैंसी लैंडिग हुई। इस दौरान फ्लाइट में 180 यात्री सवार थे। इजराइल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि बहुत बड़ी अनहोनी होने से बच गई। अगर पायलट पर समय रहते काबू नहीं पाया होता तो यह 2001 में हुए अमेरिका के 9/11 जैसी घटना हो सकती थी। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चूके है कैप्टन स्मित स्मित पहले स्पाइसजेट में पायलट थे। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। वे यहां डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के तौर पर शामिल हुए थे। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है। फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। वहां वे सीनियर कमांडर और बाद में लाइन ट्रेनिंग कैप्टन रहे। स्पाइसजेट में उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। वे पायलटों की ट्रेनिंग, उनकी जांच और उन्हें काम के दौरान गाइड करने का काम भी करते थे। उनके प्रोफाइल में क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट, फ्लाइट स्टैंडर्ड, नियमों का पालन और बोइंग 737 ऑपरेशन में उनकी विशेषज्ञता का भी जिक्र है। पॉडकास्ट में कैप्टन बोले- मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान पायलट बनने का ख्याल आया पिछले साल अक्टूबर में कैप्टन स्मित ने CS जलक मेहता नाम के यूट्यूब चैनल के साथ पॉडकास्ट किया था। इस दौरान उन्होंने कहा, स्कूलिंग के बाद टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कोर्स किया था फैमिली बिजनेस को संभालने के लिए, उसके बाद मैंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की। लेकिन इसी दौरान मैं एविएशन से जुड़े एक सेमिनार में गया, वहीं मैंने पहली बार पायलट बनने का सोचा। आगे उन्होंने बताया, ‘मेरी पहली कमर्शियल फ्लाइट बेंगलुरु से दिल्ली के लिए थी। उस वक्त बोइंग मार्केट में सबसे बड़ा विमान था, मेरा सपना बोइंग विमान उड़ाना था।’ 10 पॉइंट्स में जानिए विमान में क्या-क्या हुआ ———————-

कौन हैं IIT Bombay के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला? छात्र की मौत के बाद क्यों गई डीन की कुर्सी

शुक्रवार को IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एक छात्र के सुसाइड मामले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला जांच के दायरे में आ गए हैं, जिस वजह से संस्थान ने उनसे डीन का पद छीन लिया है। बताया जा रहा है कि BTech के इस द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत से ठीक पहले हुई घटना के समय डूला ही इंस्ट्रक्टर और परीक्षा के इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे।

खबरों के मुताबिक, IIT बॉम्बे ने सोमवार को सूर्यनारायण डूला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़ी अपनी पहले की कुछ बातों को वापस ले लिया।

IIT बॉम्बे ने यह भी माना कि जांच पूरी होने से पहले मौत की परिस्थितियों को लेकर कुछ बातें कही गई थीं। संस्थान ने इन दावों के लिए माफी भी मांगी है।

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला?

LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, डूला पावर सिस्टम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के रिसर्चर हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे में 17 साल से ज्यादा समय बिताया है।

उनका एकेडमिक काम स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, पावर-सिस्टम कंट्रोल और डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स के इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

उनकी प्रोफाइल में बताई गई रिसर्च की मौजूदा रुचियों में स्मार्ट ग्रिड और माइक्रोग्रिड, कन्वर्टर टोपोलॉजी और कंट्रोल, पावर सिस्टम के लिए कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल, डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स का ग्रिड इंटीग्रेशन, और पावर सिस्टम ऑपरेशन और कंट्रोल शामिल हैं।

सूर्यनारायण डूला के प्रोफाइल में बताया गया है कि उनका एकेडमिक बैकग्राउंड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर सिस्टम्स पर आधारित है।

IIT बॉम्बे में 17 साल

डूला सितंबर 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर IIT बॉम्बे से जुड़े और मार्च 2015 तक इस पद पर रहे। इसके बाद, मार्च 2015 से जुलाई 2019 तक वे एसोसिएट प्रोफेसर रहे।

उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, जुलाई 2019 से वे IIT बॉम्बे में फुल-टाइम प्रोफेसर हैं।

उन्होंने मार्च 2023 से जुलाई 2026 तक डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के तौर पर भी काम किया। जुलाई 2026 में उन्होंने डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स का पद संभाला। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, वे अभी भी इस पद पर हैं।

इस तरह, डूला IIT बॉम्बे में शिक्षण और रिसर्च के साथ-साथ कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।

एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड

IIT बॉम्बे में शामिल होने से पहले, डूला ने जनवरी से सितंबर 2009 के बीच ‘पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ में पावर-सिस्टम कंसल्टिंग का काम किया।

इससे पहले, उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच ‘मशीन 2 मशीन’ में आर्किटेक्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने 2002-03 में एलुरु के CRR कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया।

डूला की एकेडमिक क्वालिफिकेशन भी पावर और एनर्जी सिस्टम के क्षेत्र में ही हैं। उन्होंने 2004 से 2006 के बीच IIT दिल्ली से पावर सिस्टम में PhD पूरी की। उससे पहले, उन्होंने 2000 से 2002 के बीच IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स एंड इंजीनियरिंग में M.Tech किया।

उन्होंने 1996 से 2000 के बीच बीच आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।

विवाद के केंद्र में क्यों हैं डूला?

डूला इस विवाद के केंद्र में इसलिए आए क्योंकि वे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के बयान में कहा गया है कि उन्होंने एक छात्र को बिना इजाजत स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था।

फैकल्टी फोरम ने बताया कि डूला 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक परीक्षा की निगरानी कर रहे फोरम के मुताबिक, उन्होंने जिस घटना को शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया, उसे देखने के बाद उन्होंने संस्थान के नियमों के अनुसार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद फोरम ने डूला का समर्थन करते हुए कहा कि वे संस्थान की सीनेट द्वारा मंजूर शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

बता दें कि IIT बॉम्बे के पहले के बयान में कहा गया था कि छात्र ने कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और जवाब पाने के लिए प्रश्न-पत्र को ChatGPT पर अपलोड किया।

बाद में संस्थान ने इस बात के लिए माफी मांगी कि उसने जांच की सही प्रक्रिया से पुष्टि होने से पहले ही ये विवरण सार्वजनिक कर दिए थे।

प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस केस दर्ज

वहीं, छात्र के माता-पिता की ओर से उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह विवाद बढ़ गया।

इसके बाद डूल्ला को आरोपी बनाते हुए एक FIR दर्ज की गई। आरोपों में यह भी शामिल था कि उन्होंने तीन महीने तक छात्र के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

फिलहाल, मामले को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। डूल्ला पर लगे आरोप अभी चल रही जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अभी तक तथ्य के तौर पर साबित नहीं किया गया है।

बता दें कि यह घटनाक्रम कैंपस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और संस्थान से जवाबदेही की बढ़ती मांगों के बीच सामने आया। इसके बाद IIT बॉम्बे ने डूल्ला की डीनशिप सस्पेंड कर दी और साथ ही घटनाओं के बारे में अपनी पिछली बात भी वापस ले ली।

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एआई का भारत में मजाक चल रहा है

वह तो भला हो गलगोटिया वालों का कि उन्होंने भारत में हुए एआई समिट में चीन का रोबोटिक कुत्ता अपना आविष्कार बता कर पेश कर दिया, जिस पर पूरी दुनिया में हंसी उड़ी अन्य़था उस सम्मेलन के बाद तो भारत को एआई में विश्वगुरू घोषित किए जाने की तैयारी थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भारत का एआई समिट दो कारणों से चर्चा में रहा। एक चीन के रोबोटिक कुत्ते को भारत की एक यूनिवर्सिटी द्वारा अपना कह कर बताने। दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एआई के दिग्गजों के हाथ उठा कर चुनावी रैली जैसा प्रदर्शन करने के कारण।

वह तस्वीर दुनिया भर में वायरल हुई थी। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो आमोदेई दोनों को मोदी के जोर देने पर एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाना पड़ा, जबकि दोनों एक दूसरे से बात करना तक पसंद नहीं करते। दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाते समय बहुत असहज दिख भी रहे थे। लेकिन मोदी को उसकी परवाह नहीं थी। उन्हें तो दिखाना था कि वे दुनिया के एआई दिग्गजों के साथ मिल कर भारत में एआई क्रांति का ऐलान कर रहे हैं।

खैर, उसके बाद भारत में एआई की चर्चा दूसरे ही संदर्भों में होने लगी। उस समय जो मजाक बना उसके बाद मान लिया गया कि एआई से मजाक ही बन सकता है। तभी भारत में एआई का इस्तेमाल राजनीतिक दल एक दूसरे का मजाक बनाने, एक दूसरे को कमजोर बताने और एक दूसरे को अपमानित करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका में भी भले प्रौद्योगिकी के दिग्गज एआई के क्षेत्र में बड़े काम कर रहे हैं और इसकी प्रगति को लेकर चिंतित भी हैं। लेकिन वहां भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता एआई का इस्तेमाल अपना मजाक बनवाने और दूसरे का मजाक बनाने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप ने एआई से बना कर दर्जनों मीम्स सोशल मीडिया में शेयर किए। किसी में वे ग्रीनलैंड पर कब्जा कर रहे होते हैं तो किसी में कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बना रहे होते हैं तो किसी में ईरान को नष्ट कर रहे दिखते हैं। एआई का जैसा इस्तेमाल राष्ट्रपति ट्रंप कर रहे हैं वैसी ही इस्तेमाल भारत के नेता भी कर रहे हैं। सिर्फ एआई का ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत में ऐसे ही कामों के लिए किया जा रहा है।

भारत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का भी ऐसा ही इस्तेमाल है तो फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन आदि का भी इसी तरह का इस्तेमाल हो रहा है। सभी पार्टियों ने सैकड़ों या हजारों फर्जी अकाउंट बना रखे हैं। भाजपा के तो ‘भाजपा इजराइल’ और ‘भाजपा फिलस्तीन’ के नाम से भी अकाउंट बने हैं। हालांकि पार्टी कहेगी कि इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। लेकिन असल में वहां से वह काम सारे काम हो रहे हैं, जो पार्टी अपने आधिकारिक हैंडल से नहीं कर सकती है। वहां जिस तरह का ऑफेंसिव कंटेंट डाला जाता है, उसकी इजाजत किसी भी सभ्य समाज में नहीं हो सकती है। बात बात में कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश देने वाली सरकार इन मामलों में चुप रहती है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा ऐसा कर रही है। भाजपा का स्केल थोड़ा बड़ा है। वैसे भी आजकल प्रधानमंत्री अपने लगभग हर भाषण में स्केल और स्पीड की बात कर रहे हैं। तो विपक्षी पार्टियों के लिए अपमानजनक कंटेंट तैयार करके सोशल मीडिया में उसे शेयर करने के मामले में भी भाजपा की स्पीड और स्केल बड़ा है। लेकिन कांग्रेस और दूसरी पार्टियां भी पीछे नहीं हैं। अगर भाजपा समर्थकों के हैंडल से सोनिया गांधी से मिलती जुलती शक्ल वाली महिला की तस्वीर और वीडिया बना कर बार बाला नाम से पोस्ट किया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी से मिलते जुलते शक्ल वाले व्यक्ति को वडनगर रेलवे स्टेशन पर जेबतराशी करते दिखाया जा रहा है। भाजपा समर्थकों की ओर से अखिलेश यादव को टोंटी चोरी के रूप में दिखाया जा रहा है तो सपा समर्थक अखिलेश को हीरो और योगी आदित्यनाथ को विलेन बता कर फिल्मी अंदाज में पेश कर रहे हैं।

भारत के नेताओं के लिए एआई का कोई सार्थक या सकारात्मक इस्तेमाल नहीं है। यह प्रचार सामग्री तैयार करने और विपक्ष के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा अपमानजनक कंटेंट तैयार करने में इस्तेमाल हो रहा है। पहले पार्टियों के कार्यकर्ता हाथ से पोस्टर और बैनर तैयार करते थे। तब उनमें सार्थक और समय की वास्तविकताओं को बताने वाले नारे लिखे होते थे। बाद में प्रिटिंग प्रेस में पोस्टर, बैनर छपने लगे। तब पोस्टर के साथ प्रेस का नाम लिखना होता था। इसलिए कोई प्रेस वाला अपमानजनक सामग्री नहीं छापता था। बाद में कंप्यूटर ने इस काम को बहुत आसान बना दिया। कंप्यूटर से तैयार करके बिना प्रिटिंग प्रेस गए अपने प्रिंटर से पोस्टर, पैम्फलेट आदि बनाए जाने लगे। तब नेताओं के लिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालना बहुत आसान हो गया। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एआई ने मिल कर इस काम को बहुत बड़े स्तर पर पहुंचा दिया है। अब आइडिया भी एआई जेनरेट कर रहा है, तस्वीरें और वीडियो भी वही तैयार कर रहा है और उससे कंटेंट भी वही बना रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट बना कर उस पर एआई से तैयार कंटेंट शेयर करना और उसे वायरल कराना आज की राजनीति का और प्रचार का भी सबसे बड़ा सत्य है। भारत में कम से कम नेता और पार्टियां एआई का इस्तेमाल इसके लिए ही कर रही हैं।

‘5 साल बाद क्या करूंगी, पता नहीं’ कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ कंटेंट क्रिएशन में आईं महिला, अब टीवी और वेब सीरीज में मिल रही मौके!

आज के समय में ज्यादातर युवा कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं। वहीं हाल में नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन शुरू करने वाली महिला की कहानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। डेलॉइट की एक पूर्व कर्मचारी ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन को अपना करियर चुना। उनके इस फैसले ने एक भारतीय फाउंडर को 5 और 10 साल के करियर प्लान की सोच पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया। लिंक्डइन पर ये कहानी जया शक्ति कन्नन ने शेयर की है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

डेलॉइट की नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन शुरू करने वाली ऐश्वर्या जीपी की कहानी चर्चा में है। चेन्नई की फाउंडर जया शक्ति कन्नन ने बताया कि ईश्वर्या 5 साल का प्लान बनाने के बजाय अगले 6 महीनों पर फोकस कर रही हैं। लिंक्डइन पर ऐश्वर्या की शेयर की गई कहानी में उन्होंने बताया कि, एक बातचीत के दौरान उन्होंने ऐश्वर्या से पूछा था कि वह अगले पांच सालों में क्या करना चाहती हैं। ऐश्वर्या का जवाब उम्मीद से अलग था। उन्होंने कॉर्पोरेट करियर की तय राह पर आगे बढ़ने के बजाय कंटेंट क्रिएशन को अपना करियर बनाने का फैसला किया था।

अगले 5 साल का प्लान किसे पता

कन्नन ने बताया कि ऐश्वर्या ने कंटेंट क्रिएटर बनने के लिए डेलॉइट की नौकरी छोड़ दी थी। इस पर उन्होंने ऐश्वर्या से पूछा, “अगले 5 सालों के लिए आपका क्या प्लान है?” ऐश्वर्या ने जवाब दिया, “मुझे कोई आइडिया नहीं है।” उन्होंने कहा कि आज वह जिस रास्ते पर हैं, उसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। कन्नन ने ईश्वर्या के हवाले से बताया, “एक साल पहले मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कंटेंट क्रिएटर बनूंगी। ऐसे में मैं कैसे बता सकती हूं कि पांच साल बाद मैं क्या कर रही होऊंगी।” पांच साल का कोई तय करियर प्लान बनाने के बजाय ईश्वर्या फिलहाल अगले छह महीनों पर ध्यान दे रही हैं।

कितने महीने का हैं प्लान

कन्नन के मुताबिक, ईश्वर्या के इस तरीके से उन्हें कंटेंट क्रिएशन के अलावा भी कई नए मौके मिले हैं। इनमें फिल्मों, होस्टिंग, टीवी और वेब सीरीज से जुड़े काम शामिल हैं। ईश्वर्या पांच साल का लंबा और तय करियर प्लान बनाने के बजाय अगले छह महीनों पर ध्यान दे रही हैं। कन्नन ने कहा कि ईश्वर्या के नजरिए ने उन्हें करियर प्लानिंग की आम सोच पर दोबारा विचार करने पर मजबूर किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या करियर के लिए पहले से लंबा प्लान बनाना जरूरी है। उन्होंने लिखा, “इसके बजाय, ईश्वर्या अगले छह महीनों पर ध्यान दे रही हैं। वह अपना बेस्ट देना चाहती हैं, नई चीजें सीखना चाहती हैं, अलग-अलग चीजों को आजमाना चाहती हैं और जब भी कोई मौका मिले, उसे अपनाना चाहती हैं।”

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हम 5-10 साल का क्यों करते हैं प्लान

कन्नन ने आगे कहा, “हम अक्सर 5 या 10 साल का एक तय प्लान बना लेते हैं और बिना दूसरी तरफ देखे उसी रास्ते पर चलते रहते हैं। लेकिन क्या हो अगर आगे बढ़ने का कोई आसान और छोटा रास्ता मौजूद हो?” उन्होंने कहा, “जैक मा, अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर, विजय और रीड हेस्टिंग्स जैसे लोगों को देखिए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक काम से की, लेकिन आगे चलकर कुछ और किया और आखिर में उस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की, जिसके बारे में उन्होंने शुरुआत में शायद सोचा भी नहीं था।”

किसे पता कौन कहां जाएगा

कन्नन ने कहा कि, करियर की प्लानिंग करते समय यह जरूरी नहीं है कि किसी व्यक्ति को पहले से पता हो कि वह कई साल बाद ठीक कहां पहुंचेगा। उन्होंने कहा, “शायद हमें यह जानने की जरूरत नहीं है कि हम 5 साल बाद बिल्कुल कहां होंगे।” उन्होंने कहा, “एक दिशा तय करें। अगले 6 महीनों की योजना बनाएं। अपनी आंखें खुली रखें। सही मौकों का फायदा उठाएं और आगे बढ़ते रहें।”

उन्होंने आखिर में कहा, “आपने करियर की शुरुआत जिस कदम से की है, जरूरी नहीं कि वही आपकी आखिरी मंजिल तय करे। कई बार अनचाहा रास्ता ही आपको किसी ऐसी जगह पहुंचा देता है, जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होता।” कन्नन ने अपनी पोस्ट के अंत में ईश्वर्या जीपी को उनके आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने लिखा, “आगे के सफर के लिए ईश्वर्या जीपी को मेरी शुभकामनाएं!”

सोशल मीडिया यूजर ने दिया रिएक्शन

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने कहा, “यह बात सच में समझ में आती है। कई बार हम अगले 5 साल को लेकर खुद पर इतना दबाव बना लेते हैं कि आज क्या अच्छा किया जा सकता है, इस पर ध्यान देना भूल जाते हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “6 महीने का माइंडसेट काफी मायने रखता है। आप आने वाले हर मौके का पहले से अंदाजा नहीं लगा सकते, लेकिन आप यह जरूर तय कर सकते हैं कि अभी क्या सीखना है, क्या बनाना है और अपना काम कितनी अच्छी तरह करना है। कई बार यही चीज आपके करियर का अगला रास्ता तय करती है।” उन्होंने ईश्वर्या के आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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बिना किसी बड़े स्टार और PR के नीम करोली बाबा पर मूवी बना 60 करोड़ पार! जानिए कौन हैं हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी

राइटर-डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ 2026 की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफ़िस सरप्राइज़ फ़िल्मों में से एक बनकर उभरी है। 7 अगस्त को सिर्फ़ 10 लाख रुपये की ओपनिंग के बावजूद, यह स्पिरिचुअल ड्रामा फ़िल्म – जिसे लगभग 2 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया था – भारत में 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई करने में सफल रही।

इस फ़िल्म ने 41,245 शो में कुल मिलाकर 72.97 करोड़ रुपये और नेट कलेक्शन के तौर पर 61.88 करोड़ रुपये कमाए हैं। अपने 26वें दिन, ‘हनुमान अंश’ ने 8.50 करोड़ रुपये (नेट) कमाए, जिससे इसने यश की फ़िल्म ‘टॉक्सिक’ की 8.20 करोड़ रुपये की कमाई का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

फ़िल्म की लगातार अच्छी रफ़्तार को देखते हुए अब यह सवाल तेज़ी से उठ रहा है कि क्या ‘हनुमान अंश’ 100 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच पाएगी। इस बड़ी हिट के बाद, फ़ैंस यह जानना चाहते हैं कि विशाल चतुर्वेदी कौन हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के अनुसार, विशाल चतुर्वेदी एक फ़िल्ममेकर और ‘स्वंभू मीडिया नेटवर्क’ के फ़ाउंडर हैं।

उन्हें कंटेंट प्रोडक्शन, फ़िल्ममेकिंग और पाक कला (culinary arts) में 14 साल से ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने ‘सेतु’ (2023) और ‘रब करे तू भी’ (2021) में राइटर के तौर पर काम किया है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित है, जिसे चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है।

लोगों के बीच फ़िल्म की तारीफ़ (word-of-mouth) ने 10 लाख रुपये की ओपनिंग वाली इस फ़िल्म की किस्मत बदल दी और आख़िरी हफ़्तों में इसकी कमाई में ज़बरदस्त उछाल आया। यह फ़िल्म इस साल की सबसे चौंकाने वाली थिएटर सक्सेस स्टोरीज़ में से एक है और चौथे हफ़्ते में इसका प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, अब ‘हनुमान अंश’ को ‘होम्बले फ़िल्म्स’ द्वारा दुनिया भर में रिलीज़ किया जा रहा है। यह फ़िल्म अब 11 सितंबर को दुनिया भर में रिलीज़ होगी।