बेंगलुरु के इस कैफे में लैपटॉप खोलकर बैठना पड़ेगा महंगा! 99 रुपये प्रति घंटे लगेगा वर्कस्पेस चार्ज

बेंगलुरु के एक कैफे का नोटिस इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कैफे में लगे नोटिस में लिखा है कि कि अगर कोई कस्टमर्स उस जगह को ऑफिस या वर्कस्पेस की तरह इस्तेमाल करता है, तो उससे 99 रुपये प्रति घंटे का शुल्क लिया जाएगा। इस फैसले को लेकर लिंक्डइन पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ लोग कैफे के फैसले को सही बता रहे हैं, वहीं कई लोगों के मुताबिक इससे असली समस्या का समाधान नहीं होगा। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

बेंगलुरु के कार्तिक सुरोजू ने इंदिरानगर के एक कैफे में लगे नोटिस की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। नोटिस में लिखा था, “वर्कस्पेस रेंटल चार्ज: 99 रुपये प्रति घंटा।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरोजू ने कहा कि ये नियम उन ग्राहकों को ही दूर कर सकता है, जिनके लिए ऐसी जगहें अक्सर आकर्षण का केंद्र होती हैं।

कैफे ने किया चॉर्ज

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “वहां कोई भी बैठकर काम नहीं कर रहा था। एक भी व्यक्ति नहीं था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि यह साइन उस समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहा है, जो असली समस्या ही नहीं है। यह सही है कि कैफे में कोई एक कॉफी लेकर पांच घंटे तक नहीं बैठ सकता, लेकिन इस तरह के चार्ज वाला बोर्ड लगाने से ग्राहक आने के बजाय दूर हो सकते हैं।”

कैफे के रिव्यू है अच्छे

इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स का मानना था कि कैफे ने ये नियम इसलिए बनाया जिससे कस्टमर लंबे समय तक एक ही टेबल पर बैठकर उसे ऑफिस की तरह इस्तेमाल न करें और दूसरे ग्राहकों के लिए भी जगह उपलब्ध रहे। एक यूजर ने कमेंट किया, “हो सकता है कैफे यही चाहता हो। शायद वे नहीं चाहते कि लोग 150 रुपये की एक कॉफी लेकर घंटों तक टेबल घेरकर बैठे रहें।” इस पर कार्तिक सुरोजू ने जवाब देते हुए कहा, “हो सकता है।” उन्होंने ये भी बताया कि कैफे के रिव्यू अच्छे हैं और वहां का खाना-पीना भी पसंद किया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह दोबारा कैफे जाकर मालिक से इस नियम के पीछे की वजह जानने की कोशिश करेंगे।

2-3 घंटे तक करते हैं काम

वहीं कई लोगों ने कैफे के इस फैसले का खुलकर सपोर्ट भी किया। एक यूजर ने लिखा, “मैं इस कैफे के फैसले के पूरी तरह समर्थन में हूं। मेरे पसंदीदा कैफे में कई बार ऐसा हुआ कि कुछ लोगों ने पूरी टेबल को अपना वर्कस्टेशन बना लिया, जिसकी वजह से खाना खाने आए ग्राहकों के लिए बहुत कम सीटें बचती हैं।” कार्तिक सुरोजू ने कहा कि कैफे में बैठकर काम करने वाले सभी लोग परेशानी नहीं बनते। उन्होंने लिखा, “ज्यादातर लोग 2-3 घंटे तक काम करते हैं और इस दौरान इतना ऑर्डर भी करते हैं कि उनका वहां बैठना उचित लगता है। असली दिक्कत उन लोगों से होती है, जो पूरे दिन सिर्फ एक कॉफी लेकर बैठे रहते हैं।” उनके मुताबिक, कई छोटे कैफे ऐसे ग्राहकों को कुछ कहने से भी बचते हैं, क्योंकि उन्हें खराब रिव्यू या अपनी छवि पर असर पड़ने का डर रहता है।

कुछ यूजर्स के मुताबिक, इस समस्या का समाधान प्रति घंटे शुल्क लेने के बजाय साफ नियम बनाकर किया जा सकता है। एक यूजर ने लिखा, “अगर असली परेशानी यह है कि कुछ लोग कम ऑर्डर देकर घंटों तक टेबल घेरकर बैठे रहते हैं, जिससे नए ग्राहकों को जगह नहीं मिलती, तो नोटिस में सीधे उसी व्यवहार का जिक्र होना चाहिए।”

Samsung ने अमेरिका में मचाया कहर, इस कारण कई एंप्लॉयीज की कर दी छुट्टी

Samsung Lays Off: सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने अमेरिका में अपने एंप्लॉयीज को तगड़ा शॉक दिया है। कंपनी ने अमेरिका मपने डिस्प्ले, मोबाइल फोन और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस से कुछ एंप्लॉयीज को बाहर किया है और इसकी मार मुख्य रूप से न्यू जर्सी और टेक्सास में पड़ी है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी कंपनी के डॉक्यूमेंट्स और मामले से परिचित दो सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसमें कितने एंप्लॉयीज की नौकरी गई है, ये तो नहीं पता चल सका लेकिन डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक यूनिट ने 30 जून को कुछ एंप्लॉयीज को पूरी कंपनी में छंटनी के बारे में जानकारी दी थी और कहा था कि इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।

दक्षिण कोरियाई कंपनी ने रविवार को बताया कि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका (SEA) के हेडक्वार्टर को टेक्सास ले जाने की योजना से न्यू जर्सी के एंगलवुड क्लिफ्स में 739 एंप्लॉयीज की नौकरी पर असर पड़ा है। इसमें से अधिकतर को नई जगह काम करने का ऑफर दिया गया तो कुछ की छुट्टी कर दी गई है। SEA का फोकस कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स पर है और इसमें चिप्स का बिजनेस शामिल नहीं है। न्यूज एजेंसी रायटर्स को सूत्रों ने बताया कि टेक्सास के प्लानो में एसईए के ऑफिस में करीब 100 वर्कर्स की छुट्टी की गई है जिसमें से कुछ मोबाइल डिविजिन के थे।

Samsung के भीतर बिजनेस की अलग-अलग तस्वीरें

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में यह जो छंटनी हुई, वह हेडक्वार्टर शिफ्ट होने के चलते हुई है लेकिन यह कंपनी के अलग-अलग बिजनेस की स्थिति को भी दिखाता है। एक तरफ कंपनी का चिप बिजनेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के कारण रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसके मोबाइल, टीवी और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस पर चिप की बढ़ती लागत और कॉम्पटीशन का दबाव बना हुआ है।

सैमसंग पहले ही संकेत दे चुकी है कि एआई से जुड़ी चिप्स की मजबूत मांग के चलते दूसरी तिमाही का मुनाफा 19 गुना तक बढ़ सकता है और पिछले महीने ही कंपनी ने नए चिप प्लांट्स में सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश की योजना का भी ऐलान किया था। वहीं दूसरी तरफ कंपनी का मोबाइल बिजनेस पहली बार घाटे में जा सकता है। इसे एपल के साथ-साथ चीन की कंपनियों- टीसीएल और हिसेंसे से टीवी और घरेलू उपकरणों के बाजार में कड़ी चुनौती मिल रही है। इसके अलावा एआई बूम के कारण चिप्स की लागत बढ़ी है जिससे कंपनी के सभी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा है।

चौंकाने वाला है फैसला

हेडक्वार्टर शिफ्ट करने का सैमसंग का फैसला चौंकाने वाला है क्योंकि न्यू जर्सी में इसके एंप्लॉयीज एक साल से भी कम समय पहले नए ऑफिस में शिफ्ट हुए थे। सितंबर में नए ऑफिस के उद्घाटन के मौके पर अमेरिकी सांसद जॉश गॉटहाइमर भी मौजूद थे और उनकी प्रेस रिलीज के मुताबिक एसईए न्यू जर्सी में करीब 1200 एंप्लॉयीज हैं। रायटर्स ने कुछ लिंक्डइन पोस्ट को रिव्यू कर पाया कि टेक्सास और न्यू जर्सी में सीनियर सेल्स और मार्केटिंग ऑफिशियल्स समेत 30 से अधिक वर्कर्स पिछले दो हफ्ते में या तो कंपनी छोड़ चुके हैं या उनकी छंटनी हुई है। साल 2025 के आखिर तक चिप डिविजन मिलाकर अमेरिका में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के 11,770 एंप्लॉयीज थे।

अभी और हो सकती है छंटनी?

टेस्ला, ओरेकल और दूसरी टेक कंपनियों की तरह ही सैमसंग भी अपने हेडक्वार्टर या बड़े ऑपरेशन्स को कम टैक्स और आसान नियमों के लिए मशहूर टेक्सास ले जाने वाली कंपनियां में शामिल हो गई है। हालांकि इसके चलते एंप्लॉयीज की नौकरी पर असर पड़ा है। अब सैमसंग के एंप्लॉयीज आगे भी छंटनी को लेकर परेशान हैं। एसईए के एक एंप्लॉयी के मुताबिक कंपनी चिप पर फोकस बढ़ा रहा है तो एंप्लायंस, होम एंटरटेनमेंट और मोबाइल डिवीजनों को एक साथ ला सकती है जिससे छंटनी हो सकती है।

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‘अमीर दिखना पड़ता है महंगा’, बेंगलुरु के प्रोफेशनल ने बताया पैसे बचाने का अनोखा तरीका, वायरल हुआ पोस्ट

बेंगलुरु के एक प्रोफेशनल का सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब चर्चा में है। पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि, साधारण लाइफस्टाइल अपनाकर और महंगे गैजेट्स व लग्जरी चीजों से दूरी बनाकर वह कई जगहों पर पैसे बचा लेते हैं। उन्होंने बताया कि इसी वजह से उन्होंने iPhone और MacBook का इस्तेमाल छोड़ दिया और आज भी 10 साल पुरानी हैचबैक कार चलाते हैं। उनका मानना है कि अमीर दिखने की कोशिश कई बार लोगों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ डाल देती है। उनकी ये सोच सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

अपनी लिंक्डइन पोस्ट में मीनांक मिन्नू ने बताया कि, वह जानबूझकर सादगी भरी लाइफस्टाइल अपनाते हैं। उनका कहना कि, ऐसा करने से उन्हें खरीदारी के दौरान बेहतर दाम पर सामान मिल जाता है। उन्होंने लिखा, “मैं हमेशा गरीब दिखने की कोशिश करता हूं। इससे मुझे मोलभाव करने में ज्यादा मुश्किल होती है।” मिन्नू ने बताया कि उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में भी इसी सोच के मुताबिक बदलाव किए। उन्होंने कहा, “मैंने अपना iPhone बेच दिया और उसकी जगह Vivo फोन खरीद लिया। MacBook भी बेच दिया और ASUS का लैपटॉप ले लिया। आज भी मैं 10 साल पुरानी हैचबैक कार चलाता हूं, जो मुश्किल से E20 फ्यूल पर चलती है।”

ऐसा करना कोई मजबूरी नहीं

उन्होंने ये भी साफ किया कि ऐसा करना उनकी मजबूरी नहीं थी। उनके मुताबिक, “क्या मैं नई कार खरीद सकता हूं? बिल्कुल खरीद सकता हूं। लेकिन मेरी सोच ये है कि जैसे ही लोग आपको अमीर समझने लगते हैं, कई चीजें अपने आप महंगी हो जाती हैं।” मीनांक मिन्नू के मुताबिक, भारत में किसी व्यक्ति की बाहरी छवि कई बार उसके साथ होने वाले व्यवहार को प्रभावित करती है। उन्होंने अपनी बात समझाते हुए लिखा, “20 रुपये किलो मिलने वाले आलू 28 रुपये किलो हो जाते हैं। 500 रुपये का ट्रैफिक चालान किसी तरह 1,500 रुपये तक पहुंच जाता है। iPhone होने की वजह से 200 रुपये का मोबाइल कवर 700 रुपये में मिलता है। लोग आपसे उधार मांगने से भी बचते हैं, जिसे शायद कभी लौटाना ही न हो।”

अतिरिक्त खर्च से बचना है

मिन्नू ने आगे कहा, “लोग सिर्फ आपको देखकर राय नहीं बनाते, बल्कि उसी हिसाब से आपकी कीमत भी तय कर देते हैं।” उन्होंने ये भी बताया कि इसका मतलब सस्ते प्रोडक्ट खरीदना नहीं था। उन्होंने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि मेरा Vivo फोन iPhone से भी महंगा है और मेरा ASUS लैपटॉप MacBook से ज्यादा कीमत का है। मेरा मकसद पैसे बचाने के लिए सस्ती चीजें खरीदना नहीं था, बल्कि ‘अमीर दिखने’ की वजह से लगने वाले अतिरिक्त खर्च से बचना था।”

उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में भारत में कारोबार करने के तरीके पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, “भारत में बिजनेस कुछ इसी तरह चलता है।” आगे उन्होंने कहा, “भारत के कई बड़े और अमीर लोग स्टारबक्स जैसी जगहों पर नहीं, बल्कि पुराने कैफे में बैठकर करोड़ों की डील करते हैं। गुमनाम रहना भी एक बड़ी ताकत है। अपने काम से काम रखो, कम दिखावा करो, शांति से जियो और ‘ध्यान आकर्षित करने’ की कीमत किसी और को चुकाने दो।”

लोगों ने दिए रिएक्शन

सोशल मीडिया पर लिंक्डइन पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने पोस्ट की तारीफ करते हुए लिखा, “पोस्ट का आखिरी हिस्सा मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया। कई बार जितना कम हम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं, उतने ही सच्चे अनुभव मिलते हैं। बहुत अच्छी सीख।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “मैं अमीर दिखने से ज्यादा अमीर बनना पसंद करूंगा। सादगी ही सबसे बड़ी खूबसूरती है।”

वहीं एक यूजर ने लिखा, “MacBook ज्यादातर मामलों में Asus से बेहतर है। मैं अपनी जरूरत और काम के हिसाब से प्रोडक्ट खरीदता हूं। लोग मुझे अमीर समझें या गरीब, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” एक अन्य यूजर ने अपनी उलझन जाहिर करते हुए लिखा, “मुझे यह बात समझ नहीं आई, माफ कीजिए।”

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Jennifer-William Marriage: विलियम इश्माएल के साथ शादी के बंधन में बंधी जेनिफर विंगेट, शादी की तस्वीरें आईं सामने

Jennifer Winget-William Ishmael Marriage: टीवी एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियां में हैं। टीवी एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट ने ब्रिटेन में एक निजी समारोह में बिजनेसमैन विलियम इश्माएल के साथ शादी कर ली है। जेनिफर ने अपनी शादी की जानकारी सोशल मीडिया पर एक खूबसूरत वीडियो शेयर करके दी है। इस वीडियो में शादी के खास पलों की झलक देखने को मिली। जेनिफर ने पहली बार अपने पति को अपने फैंस से आधिकारिक तौर पर परिचित भी कराया है। शादी का खबर सामने के बाद से फैंस जेनिफर को लगातार बधाई दे रहे हैं।

18 जुलाई को जेनिफर विंगेट ने इंस्टाग्राम पर अपनी शादी का एक खास वीडियो शेयर किया। वीडियो में वह व्हाइट कलर के ब्राइडल गाउन में बेहद खूबसूरत दिखीं और अपने पति विलियम इश्माएल के साथ नई जिंदगी की शुरुआत का जश्न मनाती नजर आईं।

जेनिफर पोस्ट कर दी जानकारी

वीडियो शेयर करते हुए जेनिफर ने कैप्शन में लिखा, “…और आखिरकार हमारे सितारे एक हो गए! विलियम इश्माएल” वहीं वीडियो में एक इमोशनल मैसेज भी शामिल था, जिसमें उन्होंने लिखा, “आधिकारिक तौर पर आप सभी को मेरे जीवनसाथी, मेरे पति विल से मिलवा रही हूं।” जेनिफर विंगेट ने पहली बार सोशल मीडिया पर अपने पति को आधिकारिक तौर पर अपने फैंस से मिलवाया। शादी के वीडियो में समारोह के कई भावुक और खूबसूरत पल शामिल थे। वीडियो में न्यूलीवेड कपल हाथों में हाथ डालकर वेडिंग चैपल से बाहर निकलता नजर आया, वहीं परिवार और दोस्तों ने उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर उनका स्वागत किया। इस कपल ने क्रिश्चियन रीति-रिवाज से शादी की है।

 

जेनिफर के लुक लोगों को आ रहा पसंद

शादी में जेनिफर विंगेट का ब्राइडल लुक भी लोगों को काफी पसंद आया। उन्होंने डिजाइनर कार्लियो का तैयार किया हुआ खास व्हाइट वेडिंग गाउन पहना था। स्ट्रैपलेस डिजाइन और स्वीटहार्ट नेकलाइन वाले इस गाउन पर मोतियों की बारीक कारीगरी और सुंदर धागों की कढ़ाई की गई थी। उनका ये सादगी भरा और खूबसूरत ब्राइडल अंदाज सोशल मीडिया पर लोगों का खूब ध्यान खींच रहा है। वहीं विलियम ब्लू कोर्ट-पैंट में नजर आ रहे हैं। शादी से पहले जेनिफर विंगेट की वेडिंग ड्रेस तैयार होने का एक बिहाइंड-द-सीन्स वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

क्या करते हैं विलियम

रिपोर्ट्स के अनुसार, विलियम इश्माएल सिंगापुर के एक बिजनेसमैन हैं। वह MHC डिजिटल ग्रुप में बिजनेस डेवलपमेंट और ट्रेडिंग के डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वह अक्टूबर 2022 से इस कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं।

जेनिफर की दूसरी शादी है ये

टीवी एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट की ये दूसरी शादी है। इससे पहले उन्होंने अभिनेता करण सिंह ग्रोवर से शादी की थी, लेकिन साल 2014 में दोनों अलग हो गए थे। जेनिफर टीवी के लोकप्रिय शो सरस्वतीचंद्र, बेहद और बेपनाह से घर-घर में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी शादी की खबर सामने आने के बाद फैंस और मनोरंजन जगत के कई सितारे सोशल मीडिया पर उन्हें नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।

IIT की डिग्री और हाई पैकेज के बाद भी क्यों छोड़ी नौकरी? पत्नी संग पहाड़ों में रहने लगा शख्स

कभी बड़े शहरों की भागदौड़ और कॉर्पोरेट करियर का हिस्सा रहे IIT कानपुर के पूर्व छात्र अर्जव मोदी ने अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया। अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई और शहर की सुविधाओं के बीच भी उन्हें एक अलग तरह के संतुलन की तलाश थी। इसी तलाश ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के छोटे से पहाड़ी कस्बे बीर तक पहुंचाया, जहां उन्होंने अपनी पत्नी सिमरन चौधरी के साथ एक अलग जीवनशैली अपनाई।

यहां की शांत वादियां, धीमी रफ्तार और प्रकृति के करीब रहने का अनुभव उनके लिए किसी बदलाव से कम नहीं रहा। अर्जव और सिमरन की यह कहानी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग करियर, खुशी और जिंदगी की प्राथमिकताओं को लेकर नए सिरे से सोच रहे हैं।

कम कमाई लेकिन ज्यादा खुशी का एहसास

शहरों में अच्छी कमाई और सुविधाओं के बावजूद अर्जव को महसूस हुआ कि जीवन में संतुष्टि की कमी है। अब वह फ्रीलांस राइटिंग और कंटेंट का काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी रिमोट जॉब जारी रखे हुए हैं। दोनों की संयुक्त आय पहले से आधी से भी कम हो गई है, लेकिन उनका कहना है कि वे अब ज्यादा खुश और संतुष्ट हैं।

95 किलो से 72 किलो तक, बदली सिर्फ जिंदगी नहीं सोच भी

अर्जव ने लिंक्डइन पर अपने सफर को साझा करते हुए बताया कि 2021 में IIT से निकलने के बाद वह बेंगलुरु में तेज-तर्रार कॉर्पोरेट लाइफ जी रहे थे। उस समय उनका वजन 95 किलो था। 2026 में वह पहाड़ों में सादा जीवन जी रहे हैं, वजन करीब 72 किलो है और कम कमाई के बावजूद खुद को ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं।

पहाड़ों ने सिखाया ‘घर’ का असली मतलब

सिमरन ने बताया कि बीर में रहने के बाद उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। वे ज्यादातर खाना घर पर बनाते हैं, कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं और प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल लगभग छोड़ चुके हैं। उनके अनुसार, पहाड़ों ने सिखाया कि घर सिर्फ खूबसूरत जगह या महंगे सामान से नहीं बनता, बल्कि उस जगह से जुड़ने और उसमें योगदान देने से बनता है।

शहर की दौड़ बनाम पहाड़ों की शांति

अर्जव ने अपनी पोस्ट में दो तरह की जिंदगी की तुलना की। एक तरफ महानगर में रहने वाला युवा प्रोफेशनल है, जिसकी कमाई ज्यादा है, लेकिन लगातार दूसरों से तुलना, करियर का दबाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है।

दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में रहने वाला व्यक्ति है, जिसकी आय कम हो सकती है, लेकिन वह प्रकृति, रिश्तों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेता है।

पहाड़ों में चले जाओ’ नहीं, सोच बदलने की बात

अर्जव ने साफ किया कि उनका मकसद सभी को शहर छोड़कर पहाड़ों में बसने की सलाह देना नहीं है। उनका संदेश सिर्फ इतना है कि जिंदगी की खुशी केवल ज्यादा कमाई या दूसरों से आगे निकलने में नहीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं को समझने और संतुलन बनाने में भी है।

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Apple ने दो पूर्व एंप्लॉयीज और OpenAI पर किया केस, ट्रेड सीक्रेट चुराने का आरोप

आईफोन (iPhone) बनाने वाली एपल (Apple) ने शुक्रवार को चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई (OpenAI) और अपने दो पूर्व एंप्लॉयीज के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। एपल का आरोप है कि ओपनएआई ने उसके ट्रेड सीक्रेट्स का गलत तरीके से इस्तेमाल किया, ताकि यह एआई फोन या अन्य डिवाइस जैसे कंज्यूमर हार्डवेयर के अपने कारोबार को तेजी से आगे बढ़ा सके। एपल का आरोप है कि ओपनएआई ने उसके पूर्व एंप्लॉयीज की भर्ती, सप्लायर नेटवर्क और अन्य जरियों का इस्तेमाल करके उसकी गोपनीय तकनीकी जानकारी हासिल करने और उसका फायदा उठाने की बड़ी योजना बनाई। हालांकि ओपनएआई ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसे दूसरी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट्स में कोई दिलचस्पी नहीं है बल्कि नई तकनीक बनाने पर ध्यान है।

Apple vs OpenAI: मुकदमे का क्या असर?

एआई तकनीक की दौड़ तेज होने के साथ ही एपल और ओपनएआई के बीच कॉम्पटीशन बढ़ गई है। दोनों कंपनियां टैलेंट एंप्लॉयीज और नई तकनीकों के लिए मुकाबला कर रही हैं। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पीपी फोरसाइट के एनालिस्ट पाओलो पेस्काटोर (Paolo Pescatore) का मानना है कि एपल अब ओपनएआई को सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि आने वाले समय के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रही है। वहीं ओपनएआई आईफोन पर अपनी निर्भरता कम करके सीधे ग्राहकों तक पहुंचना चाहता है।

अब एपल के मुकदमे को लेकर उनका कहना है कि अगर आरोप सही नहीं भी साबित होते हैं तो इस मुकदमे से ओपनएआई की हार्डवेयर योजनाओं में देरी हो सकती है और दोनों कंपनियों की साझेदारी और कमजोर हो सकती है। दोनों कंपनियों के बीच साझेदारी की बात करें तो साल 2024 में एपल ने एपल इंटेलिजेंस लॉन्च किया था और सीरी समेत अपने सभी ऐप से इसे लैस किया। साथ ही अपने डिवाइसेज में ओपनएआई के चैटबॉट चैटजीपीटी को भी जगह दी।

Apple vs OpenAI: क्या और किन पर हैं आरोप

एपल के मुताबिक उसके 400 से अधिक एंप्लॉयीज अब ओपनएआई में काम कर रहे हैं और इनमें से कुछ की इस्तेमाल एपल की गोपनीय जानकारियां हासिल करने के लिए हो रहा है। एपल का कहना है कि उसके पूर्व एंप्लॉयीज के पास एपल की गोपनीय जानकारी होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ओपनएआई उन जानकारियों का इस्तेमाल अपने हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है।

एपल ने अपने एक पूर्व सीनियर सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर चांग लियू (Chang Liu) और आईफोन और एपल वॉच के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट (प्रोडक्ट डिजाइन) टैंग यू टैन (Tang Yew Tan) पर आरोप लगाया है। एपल का आरोप है कि चांग ने कंपनी का लैपटॉप वापस नहीं किया और बाद में एक ऑथेंटिकेशन बग का फायदा उठाकर एपल के इंटर्नल नेटवर्क में सेंध लगाकर हार्डवेयर से जुड़ी दर्जनों गोपनीय फाइलें डाउनलोड की।

वहीं एपल ने टैंग पर कंपनी छोड़ने से पहले सप्लायर्स से जुड़ी जानकारी, इटर्नल इंडस्ट्री रिपोर्ट और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपने प्राइवेट ईमेल पर भेजने का आरोप लगाया है। टैंग के लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने 24 साल तक एपल में काम किया और अधिकतर समय वह आईफोन प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे।

एपल का यह भी आरोप है कि टैंग ने कुछ एंप्लॉयीज से ओपनएआई के इंटरव्यू में एपल के हार्डवेयर पार्ट्स लाने के लिए कहा था ताकि उन्हें “Show and Tell” सेशन में दिखाया जा सके। मुकदमे में ऐसे ही एक कैंडिडेट का कथित बयान भी शामिल है, जिसमें उसका कहना है कि उसे तो यह भी नहीं पता था कि वे ये चीजें ऑफिस से बाहर ले जा सकते हैं।

एपल ने मुकदमे में ओपनएआई फाउंडेशन, ओपनएआई की कमर्शियल इकाई ओपनएआई ग्रुप पीबीसी और आईओ प्रोडक्ट्स पर आरोप लगाया है। बता दें कि आईओ प्रोडक्ट्स को एपल के पूर्व डिजाइनर जॉनी आइव ने शुरू किया था और इसे ओपनएआई ने $650 करोड़ में खरीदा है ताकि वह सॉफ्टवेयर के साथ-साथ एआई हार्डवेयर की फील्ड में भी एंट्री कर सके। हालांकि एपल ने मुकदमें में जॉनी आइव को आरोपी नहीं बनाया है।

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नौकरी से पहले ही रख दीं सारी शर्तें, कैंडिडेट का WhatsApp मैसेज देख HR भी हैरान

आज के समय में नौकरी पाना जितना चुनौतीपूर्ण हो गया है, उतना ही बदल गया है नौकरी तलाशने का तरीका भी। अब उम्मीदवार सिर्फ अपनी योग्यता ही नहीं, बल्कि अपनी अपेक्षाओं को भी खुलकर सामने रखने लगे हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया, जहां एक जॉब सीकर का WhatsApp मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज ने लोगों को हैरान भी किया और हंसने पर भी मजबूर कर दिया। किसी ने इसे जबरदस्त आत्मविश्वास बताया, तो किसी ने इसे जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंस करार दिया।

वहीं कई यूजर्स ने कहा कि उम्मीदवार ने अपनी शर्तें पहले ही साफ कर दीं, जिससे बाद में किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश नहीं रहती। इस वायरल चैट ने एक बार फिर नौकरी, सैलरी और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

डिजिटल मार्केटिंग की नौकरी के लिए किया संपर्क

मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस्ट और फाउंडर नैंसी श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। उनके मुताबिक, एक उम्मीदवार ने डिजिटल मार्केटिंग/कंटेंट राइटर की नौकरी के लिए WhatsApp पर संपर्क किया।

उम्मीदवार ने अपने पोर्टफोलियो के साथ लिखा कि उसे सोशल मीडिया पोस्ट बनाने का अनुभव है और वह एडवांस प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की मदद से AI आधारित कंटेंट राइटिंग में भी अच्छी पकड़ रखता है।

मैसेज में रखीं साफ-साफ शर्तें

नौकरी के लिए आवेदन करते हुए उम्मीदवार ने अपनी अपेक्षाएं भी बिना किसी झिझक के बता दीं। उसने लिखा कि उसे ₹40,000 से ₹50,000 तक की सैलरी चाहिए और इससे कम पर वह काम नहीं करेगा। यही नहीं, उसने यह भी कहा कि उसे शनिवार और रविवार की फिक्स छुट्टी चाहिए। साथ ही उसने अनुरोध किया कि उससे फोन कॉल नहीं, सिर्फ WhatsApp पर ही संपर्क किया जाए।

फाउंडर ने कहा- समझ नहीं आया भर्ती कौन कर रहा था

इस बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए नैंसी श्रीवास्तव ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि मैसेज पढ़ने के बाद उन्हें ही समझ नहीं आया कि नौकरी कौन दे रहा है और कौन ले रहा है। उन्होंने लिखा कि उम्मीदवार ने सैलरी, वीकेंड ऑफ और कम्युनिकेशन का तरीका पहले ही तय कर दिया। बस ऑफर लेटर और जॉइनिंग डेट पूछना बाकी रह गया था।

सोशल मीडिया पर आई मजेदार प्रतिक्रियाएं

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने तरह-तरह के कमेंट किए।

  • एक यूजर ने लिखा, “इतना कॉन्फिडेंस चाहिए, कृपया इसका कोचिंग सेंटर बता दीजिए।”
  • दूसरे ने कहा, “कम से कम उम्मीदवार को पता तो है कि उसे क्या चाहिए।”
  • एक अन्य यूजर ने मजाक में लिखा, “मैं भी इसी उम्मीदवार के साथ जॉइन करना चाहता हूं।”
  • वहीं किसी ने इसे Gen Z का नया अंदाज बताया।

कुछ लोगों ने उम्मीदवार का किया समर्थन

जहां कई लोगों ने इस मैसेज पर हंसी-मजाक किया, वहीं कुछ यूजर्स ने उम्मीदवार की साफगोई की तारीफ भी की।

उनका कहना था कि अपनी उम्मीदें पहले ही बता देना गलत नहीं है। इससे उम्मीदवार और कंपनी दोनों का समय बच सकता है।

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वायरल पोस्ट पर उठे सवाल भी

हालांकि, हर कोई इस वायरल पोस्ट पर भरोसा करने को तैयार नहीं था। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि यह बातचीत नकली भी हो सकती है। उनका कहना था कि इतने कम समय में इतने सारे मैसेज टाइप होना थोड़ा अजीब लगता है। इसलिए कुछ लोगों ने स्क्रीनशॉट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

कॉन्फिडेंस या ओवरकॉन्फिडेंस?

यह वायरल WhatsApp चैट अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है। कुछ लोग इसे आत्मविश्वास की मिसाल मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि नौकरी मांगते समय पेशेवर व्यवहार और बातचीत का तरीका भी उतना ही जरूरी होता है।

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरी पाना आज कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी परेशानी को दिखाती है बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट की कहानी, जिसने नौकरी की तलाश में एक महीने के भीतर 500 से ज्यादा आवेदन भेजे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। इस युवा इंजीनियर ने लिंक्डइन, अलग-अलग जॉब पोर्टल और कंपनियों की करियर वेबसाइटों पर लगातार प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी।

उसका कहना है कि वो किसी बड़ी सैलरी या नामी कंपनी की तलाश में नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ऐसा मौका चाहता है जहां वह काम सीख सके और अपने करियर की शुरुआत कर सके। उसकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेशर्स की परेशानियों को उजागर कर दिया है।

बड़ी सैलरी नहीं, बस शुरुआत का एक मौका चाहिए

युवा इंजीनियर ने कहा कि उसका लक्ष्य किसी बड़ी कंपनी में भारी पैकेज हासिल करना नहीं है। वह सिर्फ ऐसा अवसर चाहता है जहां वह काम सीख सके, इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सके और अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर सके।

उसने लिखा कि वह किसी भी अच्छे टेक रोल, यहां तक कि शुरुआती दौर के स्टार्टअप में भी काम करने के लिए तैयार है, जहां उसे सीखने और योगदान देने का मौका मिले।

जब ऑनलाइन आवेदन भी बेअसर हुए तो रेडिट से मांगी मदद

लगातार कोशिशों के बाद जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी परेशानी साझा की। उसने नौकरी देने वालों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील की।

उसकी पोस्ट का शीर्षक था  “एक महीने में 500+ नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन एक भी इंटरव्यू नहीं मिला।”

पोस्ट वायरल होते ही कई फ्रेशर्स ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं।

फ्रेशर्स की सबसे बड़ी चुनौती

कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं रह गया है। एक यूजर ने सलाह दी कि उम्मीदवारों को सीधे कंपनी के फाउंडर्स, एचआर या कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी ऐसा करके देखा, लेकिन 100 से ज्यादा एचआर को मैसेज करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू का मौका नहीं मिला।

स्किल्स हैं, फिर भी दरवाजे बंद हैं

एक कमेंट में एक टेक उम्मीदवार ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास इंटर्नशिप अनुभव और कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की जानकारी होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। उसने बताया कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन, ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, लैंगचेन और लैंगग्राफ जैसी तकनीकों पर काम कर चुका है, फिर भी कंपनियों तक पहुंच बनाना चुनौती बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा जॉब मार्केट में फ्रेशर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है, जबकि कुछ ने उम्मीदवारों को नेटवर्किंग और सीधे संपर्क जैसे तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी।

वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद भी दिखाई। एक यूजर ने बताया कि उसे एक जॉब प्लेटफॉर्म के जरिए इंटरव्यू मिला और पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीना लगा।

नौकरी बाजार की नई हकीकत

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिग्री और तकनीकी ज्ञान आज के जॉब मार्केट में पर्याप्त हैं? बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन कंपनियां अनुभव, प्रोजेक्ट्स और नेटवर्किंग को भी तेजी से महत्व दे रही हैं।

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Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या की वजह से कई ऑफिस ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है। वहीं हाल ही में एक महिला प्रोफेशनल ने बताया कि, उसको वर्क फ्रॉम होम मिलने के बावजूद सिर्फ लैपटॉप लेने के लिए ऑफिस जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऑफिस तक पहुंचने में कुल 1 घंटे का समय लगा। वहीं कई यूजर्स ने मुंबई में हर साल मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों और बारिश के बीच भी कर्मचारियों पर पड़ने वाले काम के दबाव को लेकर अपनी राय रखी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

मार्केटिंग प्रोफेशनल और आईआईएम रायपुर से पढ़ाई कर चुकी इहिना डी ने मुंबई में रेड अलर्ट के दौरान अपना एक्सपीरिएंस लिंक्डइन पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, भारी बारिश के बीच, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लोगों को केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की कि खराब मौसम को देखते हुए जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। इहिना डी ने बताया कि उनकी कंपनी ने भी भारी बारिश के कारण कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू कर दी थी।

ऑफिस में भूल गई लैपटॉप

इहिना डी ने बताया कि उन्हें बाद में याद आया कि उनका लैपटॉप ऑफिस में ही रह गया है। उन्होंने लिखा, “मुंबई में कल रेड अलर्ट घोषित किया गया था, इसलिए आज मैं वर्क फ्रॉम होम कर रही हूं। लेकिन अपना लैपटॉप ऑफिस में ही छोड़ आई थी।” उन्होंने आगे लिखा, “जब पूरा शहर अपने प्लान रद्द कर रहा था और रेनकोट निकाल रहा था, तब मैं मजबूरी में कार से ऑफिस जा रही थी।” इहिना ने बताया कि ऑफिस पहुंचकर उन्होंने सिर्फ अपना लैपटॉप उठाया और करीब तीन मिनट में वापस निकल गईं। उन्होंने लिखा, “अपना लैपटॉप लिया, तीन मिनट में फिर कार में लौट आई। एक घंटे का सफर और ऑफिस में सिर्फ तीन मिनट।”

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इस एक्सपिरिएंस के बाद इहिना ने मुंबई में हर साल होने वाली बारिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ये सिर्फ बारिश नहीं है। यह हर साल होने वाला ऐसा ठहराव है, जिसके आने का सभी को पता होता है, लेकिन पूरा शहर मानो ये दिखावा करता है कि यह आने वाला ही नहीं है।” उन्होंने हर साल मानसून के दौरान होने वाली पानी भरी सड़कों, जलभराव और आखिरी समय में होने वाली वर्क-फ्रॉम-होम की घोषणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “हम जानते हैं कि बारिश जून में शुरू होगी। हमें यह भी पता है कि जुलाई में हालात और खराब होंगे। फिर भी हर साल ऐसा लगता है जैसे यह सब अचानक हो गया हो।”

उन्होंने ये भी माना कि हर किसी के पास घर से काम करने की सुविधा नहीं होती। उन्होंने लिखा, “आज मुझे वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला, इसलिए मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। मेरा काम नहीं रुका और मेरा सफर सिर्फ मेरे बेडरूम से मेरी डेस्क तक था। लेकिन इससे मुझे यह भी एहसास हुआ कि लाखों मुंबईकरों के पास वर्क फ्रॉम होम का विकल्प नहीं है। वे फिर भी बारिश में, लोकल ट्रेन से और बाइक पर सफर करके काम पर पहुंचे। यह कोई ‘हसल कल्चर’ नहीं है, यह बस मुंबई है।”

Jai Moondra: भारत को हराने वाला खिलाड़ी ढूंढ रहा फुल-टाइम नौकरी! जय मूंदड़ा की कहानी हुई वायरल

आयरलैंड के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने भारत के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में शानदार गेंदबाजी कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दोनों मुकाबलों में शानदार गेंदबाजी करते हुए कुल 5 विकेट चटका कर प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड भी अपने नाम किया। उनकी सटीक और कसी हुई गेंदबाजी ने पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं इसी बीच जय मूंदड़ा अपनी शानदार गेंदबाजी के अलाला किसी और वजह से भी चर्चा में हैं। जय मूंदड़ा आईटी सेक्टर में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।

भारत के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करने वाले जय मूंदड़ा सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि आईटी सेक्टर से भी जुड़े हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह अभी भी फुल-टाइम नौकरी की तलाश में हैं।

2025 में छोड़ दी नौकरी

राजस्थान के टोंक के रहने वाले जय मूंदड़ा साल 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए आयरलैंड गए थे। आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम से खेलने के बावजूद उनके पास अब भी भारतीय पासपोर्ट है। आयरलैंड जाने के बाद जय मूंदड़ा ने सितंबर 2022 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री पूरी की। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने इंटेल में प्रोडक्ट डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। लेकिन, जून 2025 में उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, इसके बाद से उन्होंने किसी नई कंपनी में काम शुरू नहीं किया है।

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नए नौकरी की तलाश में जय मूंदड़ा

29 वर्षीय जय मूंदड़ा फिलहाल इंजीनियरिंग क्षेत्र में नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर आयरलैंड और यूरोप में अवसरों के लिए OpenToWork का बैज भी दिखाई देता है। करीब छह महीने पहले जय मूंदड़ा ने लिंक्डइन पर आयरलैंड और यूरोप में टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों की एक पोस्ट में रुचि दिखाई थी। वहीं लगभग एक महीने पहले उन्होंने एक अन्य पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए खुद को इंटेल का पूर्व कर्मचारी बताया और कहा कि वह नए नौकरी के अवसर की तलाश में हैं।

लोगों ने किया कमेंट

भारत को हराने के बाद आयरलैंड के गेंदबाज जय मूंदड़ा की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लगा OpenToWork बैज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक तरफ वह नई नौकरी की तलाश में हैं और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “ये एक कॉर्पोरेट नौकरी है जिसने उन्हें दूसरा मौका दिया। मेहनत करने वाले की इज्जत करनी चाहिए। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “वह भारत नहीं, बल्कि आयरलैंड के लिए खेल रहे हैं। इसलिए गुजारा चलाने के लिए उन्हें नौकरी भी करनी पड़ती है।”