नौकरी जॉइन करने के 6 घंटे बाद ही दिया इस्तीफा, वजह जानकर मैनेजर भी रह गया हैरान

दिल्ली स्थित कंपनी Hiring Insider के संस्थापक और पूर्व टैलेंट एक्विजिशन लीडर हर्षित श्रीवास्तव की एक LinkedIn पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है। उन्होंने एक नए कर्मचारी से जुड़ा ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने भर्ती प्रक्रिया और नौकरी की वास्तविकता के बीच के अंतर पर सवाल खड़े कर दिए। खास बात यह रही कि कर्मचारी ने कंपनी जॉइन करने के महज छह घंटे बाद ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों को नौकरी की पूरी और सच्ची तस्वीर दिखाई जाती है?

अक्सर कंपनियां किसी पद को आकर्षक तरीके से पेश करती हैं, लेकिन असली जिम्मेदारियां, काम का दबाव और टीम का माहौल जॉइन करने के बाद सामने आता है। हर्षित की पोस्ट ने इसी अंतर को बेहद दिलचस्प तरीके से उजागर किया, जिसके बाद LinkedIn पर लोगों के बीच पारदर्शिता और ईमानदार hiring को लेकर सवाल उठा दिए हैं।

पुराने कर्मचारी ने ही नए कर्मचारी को ट्रेनिंग दी

कहानी के मुताबिक, एक कर्मचारी पहले ही इस्तीफा दे चुका था। मैनेजर ने उससे कहा कि जाने से पहले वो अपनी जगह किसी नए व्यक्ति को हायर करे और उसे काम समझाकर जाए। उस कर्मचारी ने उम्मीदवार का इंटरव्यू लिया, उसे चुना और जॉइनिंग के पहले दिन उसे काम की पूरी जानकारी दी।

इंटरव्यू से अलग थी असलियत

नए कर्मचारी को सिर्फ सामान्य काम नहीं बताया गया। उसे कंपनी की पॉलिसी, टीम स्ट्रक्चर, स्टेकहोल्डर्स, काम का दबाव, डेडलाइन और एस्केलेशन कल्चर तक सब कुछ साफ-साफ समझाया गया। सबसे खास बात यह थी कि पुराने कर्मचारी ने कुछ छिपाया नहीं और न ही बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया।  नतीजा? दिन खत्म होते-होते नए कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया।

मैनेजर ने पूछा “तुमने उसे क्या बताया?”

नए कर्मचारी के इस्तीफे से मैनेजर हैरान और नाराज था। उसने पुराने कर्मचारी से पूछा कि आखिर उसने नए व्यक्ति को ऐसा क्या बता दिया कि उसने कुछ ही घंटों में नौकरी छोड़ दी। जवाब मिला “वही सब, जो आपने मुझे उसे सिखाने के लिए कहा था।” यानी नए कर्मचारी को पहली बार नौकरी की असली तस्वीर दिखाई गई थी। कंपनी ने नौकरी बेची, कर्मचारी ने काम की सच्चाई दिखाई

श्रीवास्तव ने इस घटना को एक दिलचस्प लाइन में समझाया कंपनी ने उसे नौकरी का सपना दिखाया था, जबकि पुराने कर्मचारी ने उसे उस नौकरी की हकीकत दिखा दी। उनका कहना था कि कई बार नौकरी के विज्ञापन और इंटरव्यू में भूमिका जितनी आकर्षक दिखाई जाती है, असल में काम उससे काफी अलग होता है।

ईमानदारी से हो सकती है बेहतर भर्ती

इस कहानी के बाद LinkedIn पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि भर्ती के दौरान सैलरी और पद के साथ-साथ काम की असली चुनौतियां भी बतानी चाहिए। अगर कंपनी शुरुआत में ही काम का दबाव, जिम्मेदारियां, टीम कल्चर और वास्तविक उम्मीदें साफ कर दे, तो बाद में कर्मचारी के निराश होकर छोड़ने की संभावना कम हो सकती है।

अच्छी hiring सिर्फ कंपनी को पसंद आने वाला उम्मीदवार ढूंढना नहीं है। यह भी देखना है कि उम्मीदवार को कंपनी और नौकरी की सच्ची तस्वीर पहले से पता हो और फिर भी वह वहां काम करना चाहे।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

नौकरी के इंटरव्यू में कैंडिडेट आमतौर पर सैलरी, छुट्टियों, वर्क फ्रॉम होम और जॉब रोल से जुड़ी बातें पूछते हैं। लेकिन नोएडा के एक फाउंडर के सामने एक उम्मीदवार ने ऐसी मांग रख दी, जिसने इंटरव्यू का माहौल ही बदल दिया। कैंडिडेट ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि उसे हर दोपहर 30 मिनट की नींद लेने की जरूरत होगी, क्योंकि इससे उसकी productivity बेहतर होती है। हैरानी की बात यह थी कि उसने यह बात न तो मजाक में कही और न ही किसी झिझक के साथ।

फाउंडर नितिन वर्मा के मुताबिक, उम्मीदवार ने अपनी इस जरूरत को ऐसे रखा जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। पहली प्रतिक्रिया में उन्हें इंटरव्यू खत्म करने का ख्याल आया, लेकिन बाद में उन्होंने इस मांग को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। सवाल यह था कि क्या कर्मचारी के काम के नतीजे अच्छे हों तो 30 मिनट की nap वास्तव में बड़ी समस्या है?

 ‘हर दोपहर मुझे Nap चाहिए’

IIT-backed कंपनी के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा ने LinkedIn पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। उनके मुताबिक, उम्मीदवार ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ कहा कि दोपहर की 30 मिनट की झपकी उसके काम को बेहतर बनाती है। वर्मा ने बताया कि उम्मीदवार ने यह बात ऐसे रखी, जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। उनका पहला विचार इंटरव्यू खत्म करने का था, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि क्या यह मांग वाकई इतनी गलत है।

फाउंडर को पसंद आई कैंडिडेट की बेबाकी

नितिन वर्मा ने माना कि छोटी दोपहर की नींद से फोकस, एनर्जी और याददाश्त बेहतर हो सकती है। उन्होंने मजाक में कहा कि कॉरपोरेट ऑफिस में दोपहर की मीटिंग्स के दौरान कई लोग वैसे भी ऊंघते नजर आते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह उम्मीदवार अपनी जरूरत खुलकर बता रहा था। फाउंडर के मुताबिक, ज्यादातर लोग इंटरव्यू में खुद को कंपनी की पसंद के हिसाब से पेश करते हैं, जबकि इस कैंडिडेट ने साफ बताया कि वह किस तरह काम करने पर सबसे ज्यादा productive रहता है।

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कब सोते हो’

वर्मा ने कैंडिडेट को फिक्स 30 मिनट की Nap Break देने के बजाय साफ कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी कब आराम करता है। उनके लिए जरूरी यह है कि सौंपा गया काम समय पर पूरा हो। यानी शर्त सीधी थी, काम पूरा करो, तो घंटे गिनने की जरूरत नहीं; काम नहीं हुआ तो कोई Nap मदद नहीं करेगी।

आखिरकार मिल गई नौकरी

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कैंडिडेट को नौकरी मिल गई। फाउंडर ने कहा कि उसकी Nap की मांग असली मुद्दा नहीं थी। उन्हें उसकी ईमानदारी और आत्मविश्वास ने प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि क्या आधुनिक वर्कप्लेस में कर्मचारियों की productivity को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए या उनके actual results से।

LinkedIn पर लोगों ने क्या कहा?

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे बदलते workplace culture का संकेत बताया। कुछ ने कहा कि अगर कर्मचारी अपना काम पूरा कर रहा है तो उसे अपनी working style में थोड़ी आजादी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने Gen Z के इस अंदाज पर मजाक भी किया। एक यूजर ने कहा कि Gen Z को पता है कि जरूरी benefits के लिए negotiation कैसे करनी है।

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‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

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Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दोकमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

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Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दोकमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्त कितने प्रकार के होते हैं? जानिए किन दोस्तों से रहना चाहिए सतर्क

friendship day type of friends

Friendship Day: मित्रता जीवन का सबसे खूबसूरत और अनमोल रिश्ता माना जाता है। हर साल अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। वर्ष 2026 में फ्रेंडशिप डे 2 अगस्त को मनाया जा रहा है। दोस्ती जहाँ जीवन में रंग भरती है, वहीं गलत संगति या गलत दोस्तों की पहचान न होना आपको मानसिक, भावनात्मक या आर्थिक रूप से नुकसान भी पहुँचा सकती है। आइए जानते हैं कि जीवन में आमतौर पर कितने प्रकार के दोस्त मिलते हैं और किनसे सतर्क रहने की ज़रूरत है।

 

1. जीवन में मिलने वाले दोस्तों के प्रकार

आचार्य चाणक्य और आधुनिक मनोविज्ञान दोनों ही मानते हैं कि दोस्त कई तरह के होते हैं:-

सच्चे और पक्के दोस्त (True Friends): ये वे दोस्त हैं जो आपकी सफलता में जलते नहीं और असफलता में आपका हाथ थामकर खड़े रहते हैं। ये आपके सामने आपकी गलतियां बताते हैं और दूसरों के सामने आपका बचाव करते हैं।

समय और सुविधा के दोस्त (Convenience Friends): ये वे दोस्त हैं जो सिर्फ तब तक आपके साथ हैं जब तक उनका कोई काम आपसे निकल रहा हो (जैसे—नोट्स लेना, पार्टी करना या गाड़ी उधार लेना)।

 

बचपन या पुरानी यादों के दोस्त (Nostalgic Friends): भले ही आप इनसे रोज़ बात न करें, लेकिन जब भी मिलते हैं, पुरानी खट्टी-मीठी यादें और मासूमियत लौट आती है।

 

पेशेवर दोस्त (Workplace/Professional Friends): ये आपके ऑफिस या कॉलेज के साथी होते हैं, जिनके साथ विचार तो मिलते हैं लेकिन दायरा काम तक सीमित रहता है। हालांकि ऑफिस या कॉलेज के कुछ दोस्त पक्के दोस्त भी बन जाते हैं।

 

2. ऐसे दोस्तों से रहें हमेशा सतर्क!

फ्रेंडशिप डे के इस मौके पर अपनी फ्रेंड लिस्ट को ज़रा फिल्टर करें और नीचे दिए गए प्रकार के दोस्तों से दूरी या सावधानी बनाकर रखें:-

friendship day type of friends

1. 'मीठे ज़हर' जैसे दोस्त (Fake / Flattering Friends)

पहचान: ये आपके मुँह पर हमेशा आपकी अत्यधिक तारीफ करेंगे और पीठ पीछे आपकी बुराई या खिल्ली उड़ाएंगे या ये दोस्त सभी के सामने आपका मजाक उड़ाकर आपकी छवि खराब करेंगे और अकेले में आपका अच्‍छा दोस्त बनने का नाटक करेंगे। 

सतर्कता: इनकी बातों में आकर कभी भी अति-आत्मविश्वासी न बनें और जब ये सार्वजनिक रूप से मजाक मजाक में आपका मजाक उड़ाकर आपकी छवि खराब करने का काम करें तो इन्हें उसी वक्त टोंके।

 

2. स्वार्थी या मतलब के साथी (The Parasites)

पहचान: इन्हें आपकी याद सिर्फ तब आती है जब इन्हें पैसों की जरूरत हो, कोई काम निकलवाना हो या ये खुद अकेले महसूस कर रहे हों। आपकी ज़रूरत के समय इनके पास हमेशा कोई न कोई बहाना तैयार रहता है।

 

3. ईर्ष्यालु या जलने वाले दोस्त (Jealous Friends)

पहचान: आपकी किसी भी छोटी या बड़ी सफलता पर इन्हें असली खुशी नहीं होती। ये आपकी उपलब्धि को किस्मत का खेल बताकर कम आंकने की कोशिश करते हैं। यह दोस्त आपके स्कूल, कॉलेज या ऑफिस कहीं भी मिल सकते हैं।

 

4. टॉक्सिक या हमेशा नकारात्मक रहने वाले दोस्त (The Energy Vampires)

पहचान: ये हर परिस्थिति में सिर्फ कमियां और नकारात्मकता ढूंढते हैं। इनसे बात करने के बाद आप खुद को मानसिक रूप से थका हुआ, उदास या अवसाद में महसूस करेंगे। ऐसे दोस्तों के कारण आपक कभी भी खुश नहीं रह सकते हैं। इसलिए इन्हें तुरंत ही छोड़ देने में भलाई है।

 

5. राज़ उजागर करने वाले दोस्त (Gossipers)

पहचान: जो दोस्त दूसरों के गुप्त राज़ आपके सामने खोलते हैं, इस बात की पूरी संभावना है कि वे आपके व्यक्तिगत राज़ भी दूसरों के सामने जाहिर कर रहे होंगे। ऐसे दोस्त कभी भी अपना राज आपको नहीं बताएंगे लेकिन दूसरों का राज जानने में इनकी बड़ी रुचि रहती है।

 

फ्रेंडशिप डे पर एक खास टिप

सच्चे दोस्त ढूंढने से पहले खुद एक सच्चा और ईमानदार दोस्त बनने की कोशिश करें। दोस्तों की संख्या (Quantity) के पीछे भागने के बजाय उन 1-2 दोस्तों की गुणवत्ता (Quality) की कद्र करें जो आपके हर ढाल और धूप में साथ खड़े रहते हैं और वह भी नि:स्वार्थ।

Mercedes-AMG E53 Hybrid 4MATIC+ review: Current Affair

Mercedes-AMG E53 front quarter tracking

The Mercedes-AMG E53 Hybrid 4MATIC+ arrives at a time when performance cars are being asked to do more than simply go fast. It has to deliver the pace and character expected of an AMG while embracing electrification to meet increasingly stringent emissions norms and changing buyer expectations. The result is a plug-in hybrid performance sedan that combines a 3.0-litre turbo-petrol inline-six engine with an electric motor for a formidable system output of 585hp, while also offering enough electric-only range for mundane daily drives.

But this isn’t just an E-Class with a bigger battery and more power. The E53 gets AMG-specific chassis hardware, all-wheel drive, rear-wheel steering and a suite of performance-focused electronics designed to counter the added weight. Can this electrified AMG still deliver the thrills enthusiasts expect while remaining a genuinely usable luxury sedan every day?

Mercedes-AMG E53 Exterior Design and Engineering

Expectedly, the E 53 has put on quite a bit of muscle. The front bumper is sportier, with large air dams. The Panamericana grille gets illuminated surrounds and is wide enough to gulp massive amounts of air to cool the engine, while the power lines on the bonnet add more intent to its character.

The E53 has good amount of muscle with aggressive bumpers, big grille and power lines

The profile flaunts flared wheel arches, larger 20-inch wheels (the last-gen E 53 featured 19-inchers) and, like before, a standard wheelbase, giving it sportier proportions than the long-wheelbase E-Class.

At the rear, there’s an E 53 badge with red highlights, a quad-exhaust setup that isn’t actually connected to the exhaust pipes, a diffuser and a ducktail spoiler that’s large enough to be noticed but won’t do much for downforce.

Not being a long wheelbase gives it perfect proportions

Overall, it’s a handsome-looking car with just the right amount of restraint. However, if you’re looking for a bit more visual drama, you’ll have to pay extra for the MANUFAKTUR paint finishes, as the standard colour palette is more E-Class than AMG.

Mercedes-AMG E53 Interior Space and Comfort 

Inside, the E 53 strikes an appealing balance between luxury and sportiness. Instead of carbon-fibre or piano-black trim, Mercedes has used open-pore wood that feels rich and tactile. A large central MBUX touchscreen dominates the dashboard, while the passenger display found on the standard E is absent – not particularly bothersome given how good the main screen is.

Red and black upholstery looks racy while open pore wood adds luxe factor

The AMG sports seats offer plenty of support and adjustment, although ventilated and massage functions are missing. Likewise, the chunky AMG steering wheel feels superb in hand but is cluttered with touch-sensitive controls that remain frustrating to use.

Rear-seat space is naturally tighter than the long-wheelbase E-Class, but there’s still enough room for two adults to travel comfortably. Manual sunblinds and a panoramic sunroof add to the ambience, although the large transmission tunnel makes this a strict four-seater.

There’s good space in the rear despite this not being a long wheelbase

The boot, however, sees the biggest compromise. At 370 litres, it’s 170 litres smaller than the standard E-Class because the battery sits beneath the floor. There’s no spare wheel either, with its space instead occupied by the charging cable and puncture repair kit.

Mercedes-AMG E53 Features and Safety

The E 53 is a well-equipped sedan despite missing features such as ventilated seats. The centre screen is the brains of the operation and, unfortunately, many of the controls are routed through it, making them difficult to operate on the move.

We’ve praised the MBUX infotainment system for its clear interface and high-resolution display, but usability isn’t its strongest suit. The large screen makes it difficult to accurately select the desired function while driving.

Too many controls on the steering is distracting

The E 53 gets a comprehensive suite of driver assistance systems, including Lane Keep Assist, Automatic Emergency Braking, Rear Cross Traffic Alert and Blind Spot Monitoring. Thankfully, these systems can also be switched off manually if required.

The 360-degree camera is crisp and high-resolution, while the 17-speaker Burmester 4D audio system delivers an exceptional listening experience. As impressive as the sound system is, however, it ultimately plays second fiddle to the performance on offer.

Mercedes-AMG E53 Performance and Refinement

Like before, the new E 53 is powered by a 3.0-litre turbo-petrol straight-six engine. This time, however, it gets support from a 28.6kWh battery pack and an electric motor, taking the combined output to 585hp and 750Nm.

585hp six-cylinder engine makes 150hp more than before

Unlike the bigger PHEV AMGs, the E 53 isn’t an ‘E PERFORMANCE’ model, which means the electric motor is mounted within the gearbox housing rather than integrated into the rear axle. Power is sent to all four wheels via the familiar 9-speed automatic transmission, and the E 53 gets a host of drive modes that are noticeably different from one another.

‘Individual’ lets you tailor the engine, gearbox and suspension to your liking. ‘Battery Hold’ prevents the car from using the battery charge, saving it for when you truly need it. ‘EL’ is the full-electric mode, provided there’s sufficient charge in the battery. ‘Comfort’ offers a more relaxed setup, ‘Sport’ sharpens the responses, and ‘Sport+’ is the most aggressive setting.

Naturally, Sport+ is the mode you’ll spend most of your time in if you want the E 53 to feel like a proper AMG. The exhaust note, the urgency of the power delivery and the firmer suspension all come together beautifully. With the engine and electric motor working at full tilt, straight-line performance is genuinely rapid. Acceleration is smooth yet thrilling, as the engine piles on speed rapidly without the neck-snapping brutality of a powerful EV. Power delivery is strong and linear across the rev range, and the gearbox complements the aggressive character of Sport+ perfectly. 0-100kph takes just 4 secs with the ‘Race Start’ which is essentially launch control included in the AMG Dynamic Plus package as power jumps up to 612hp.

For greater driver involvement, you can also engage ‘M’ mode, which gives you full manual control of the gearbox. It will happily bounce off the limiter without automatically upshifting until you pull a paddle.

The exhaust note is a bit of a mixed bag. It’s genuine, but it’s also channelled into the cabin through the speakers and a subwoofer in the boot. It’s not the ideal solution because, outside the car, the engine and exhaust produce a genuinely enjoyable snarl. Still, in an era of synthesised, computer-generated soundtracks, a real exhaust note—even if it’s amplified through the speakers—is worth appreciation.

Switch to Comfort mode and the E 53 adopts an entirely different character. It’s calm, refined and smooth, with gentler power delivery that’s well suited to long-distance cruising.

Where the powertrain disappoints is in city traffic and slow stop-start driving. The gearbox is simply too eager and, even in Comfort mode, it feels a bit like walking an overexcited Rottweiler. It’s constantly trying to surge forward and grab the next gear before you’ve asked it to. The constant shuffling through the lower gears results in unnecessary jerks that spoil the experience.

The solution is to engage EL mode. It’s almost as if it was designed specifically for this scenario. In EL, the E 53 feels smooth and effortless. There’s very little noise apart from the drone generated by the Michelin Pilot Sport 4S tyres, which can be quite rumbly, especially on concrete surfaces.

Braking is less convincing, however. Despite massive 390mm front discs and regenerative braking, the pedal never delivers a natural or consistent feel. Stopping power is strong, but the spongy, inconsistent pedal detracts from an otherwise polished driving experience.

Mercedes-AMG E53 Mileage and Efficiency

One of the biggest talking points of the new E 53 isn’t its staggering performance, but the fact that it can deliver it without constantly visiting a fuel station. This plug-in hybrid marks a significant shift in AMG’s philosophy, combining electrification with a silky-smooth six-cylinder engine to create a performance sedan that’s as comfortable commuting as it is attacking a mountain road.

Charging via an 11kW AC charger will replenish the battery in 2.25 hrs; No DC charging option

The headline figure is a claimed electric-only range of up to 100km, courtesy a 28.6kWh battery pack. You can expect 75-90km on electric power alone making it entirely possible to complete daily urban commutes without firing up the engine. 

Once the battery begins to deplete, the turbocharged 3.0-litre inline-six takes centre stage. Even then, the hybrid system continues to contribute through regenerative braking and electric assistance, ensuring the E 53 feels responsive while reducing fuel consumption compared to a conventional performance sedan. Mercedes has also equipped the car with four regenerative braking modes, allowing drivers to maximise energy recovery or opt for a more natural driving experience. For owners with access to home or workplace charging, fuel stops could become surprisingly infrequent. Charging is equally convenient, with the 11kW AC onboard charger replenishing the battery in around three hours.

28.6kWh battery allows for an electric-only range of 100km

Mercedes-AMG E53 Ride Comfort and Handling

For those who enjoy being behind the wheel, the E 53 delivers in abundance. Despite carrying the additional weight of a sizable battery pack, it feels remarkably composed. In Sport and Sport+, the car tightens up noticeably. Body roll is kept firmly in check, the dampers become more alert, and the steering gains welcome heft. What impresses most is how well the chassis disguises its mass. The battery may add considerable weight, but it’s mounted low in the car, lowering the centre of gravity and lending the E 53 impressive stability through fast corners.

The rear-biased 4MATIC+ all-wheel-drive system plays a major role here. The rear wheels can turn up to 2.5 degrees, which isn’t a huge amount, as you’ll still find yourself making the occasional three-point turn. Above 60kph, however, they turn in the same direction as the front wheels, adding another layer of stability through corners.

It is over 400kg heavier than the last-gen model but you just can’t feel it from behind the wheel

The Michelin Pilot Sport 4S tyres aren’t the quietest, but they allow the driver to deploy the combined output with confidence, even when exiting slower bends. Turn-in is crisp, and while the steering isn’t overflowing with feedback, it’s accurate enough to place the car confidently on a winding road. 

At low speeds, the adaptive AMG Ride Control suspension does an admirable job of filtering out broken tarmac, expansion joints and sharp-edged potholes. It isn’t perfect, though. Compared with the last-generation E 53, which rode on smaller 19-inch wheels with taller-profile tyres, the new car’s 20-inch wheels have sacrificed a degree of ride compliance. As a result, the low-profile tyres transmit the occasional thud over particularly nasty potholes.

The adaptive dampers mated with the active engine mounts offer terrific stability

Ultimately, the Mercedes-AMG E 53 Hybrid 4MATIC+ isn’t as razor-sharp as a dedicated sports sedan, nor is it as pillowy as the standard E-Class. Instead, it strikes an impressive middle ground, blending everyday comfort with genuine driver engagement. It’s a car that feels just as at home soaking up kilometres on the expressway as it does carving through a series of fast, flowing corners.

Mercedes-AMG E53 Value for Money

Prices start at Rs 1.45 crore for the Performance Edition and Rs 1.48 crore for the Racing Edition. In this price range, there isn’t a direct rival to the E 53. The BMW M5 is both more powerful and considerably more expensive, while the BMW M4 is effectively rivalled by the Mercedes-AMG CLE 53 as a two-door coupe. The Audi RS5, meanwhile, hasn’t been launched in India yet.

The E 53 succeeds because it doesn’t try to be everything at once. It delivers the pace, handling and character expected of an AMG while introducing meaningful electric-only capability that genuinely enhances everyday usability. The brakes may lack the natural feel you’d expect from a performance sedan, and the gearbox can feel over-eager in slow-moving traffic, but these shortcomings do little to overshadow what is otherwise a remarkably accomplished package.

Fast, engaging and surprisingly efficient, the new E53 Hybrid is one of the most complete performance sedans on sale today. More importantly, it proves that electrification doesn’t have to dilute the AMG experience—it can make it even more usable.

मेटल डेकोर से चमकेगा घर का हर कोना? फेंगशुई में बताए गए हैं ये खास फायदे

फेंगशुई (Feng Shui) एक प्राचीन चीनी पद्धति है, जिसे घर और ऑफिस (Office) में सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) बनाए रखने के लिए अपनाया जाता है। इसमें धातु को पांच प्रमुख तत्वों में से एक माना गया है, जो प्रोग्रेस, डिसिप्लिन और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि सही जगह पर धातु की कलाकृतियां (metal artifacts) रखने से घर का माहौल पॉजिटिव बना रहता है। आइए जानते हैं फेंगशुई में धातु की कलाकृतियों का क्या महत्व है और इन्हें किस तरह इस्तेमाल करना शुभ (auspicious) माना जाता है:

घर का माहौल बदल सकती है ये छोटी-सी चीज

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फेंगशुई (Feng Shui) के अनुसार धातु की कलाकृतियां (Feng Shui) घर या ऑफिस में एनर्जी के फ्लो को बैलेंस करने में मदद करती हैं। खासतौर पर पीतल, तांबा, स्टील या कांस्य से बनी डेकोरेटिव आइटम नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) को कम कर सकारात्मक माहौल बनाने का प्रतीक मानी जाती हैं। इन्हें ऐसी जगह रखना बेहतर माना जाता है, जहां लोग सबसे ज्यादा समय बिताते हैं।

सफलता से जुड़ा है इसका खास कनेक्शन

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धातु तत्व (metal element) को फोकस, डिसिप्लिन और डिसीजन लेने की एबिलिटी से जोड़ा जाता है। इसलिए ऑफिस (offices), स्टडी रूम (study room) या वर्कप्लेस (workplace) में धातु की कलाकृतियां (metal artifact) रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे काम के प्रति एकाग्रता बढ़ती है और करियर (career) या व्यवसाय (business) में नई संभावनाओं का माहौल बनता है।

खुशहाली का छिपा हुआ राज

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फेंगशुई में धातु के सिक्के (metal coin), धातु का जहाज (metal ship model), सुनहरे रंग की कलाकृतियां (gold-colored artifact) या धातु से बने शुभ प्रतीकों (metal symbol) को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन्हें घर के उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखने की सलाह दी जाती है, ताकि पॉजिटिव एनर्जी का बैलेंस बना रहे।

सजावट के साथ मिलेगा डबल फायदा

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धातु की कलाकृतियां (Metal artifact) केवल फेंगशुई के लिहाज से ही नहीं, बल्कि इंटीरियर डेकोरेशन में भी खास भूमिका निभाती हैं। मॉडर्न डिजाइन वाली मेटल वॉल आर्ट, मूर्तियां या हैंगिंग पीस घर को स्टाइलिश और एलिगेंट लुक देते हैं। इससे घर का माहौल भी ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड और अट्रैक्टिव दिखाई देता है।

मन को सुकून देने वाला आसान तरीका

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फेंगशुई के अनुसार धातु तत्व मेंटल क्लैरिटी और इमोशनल बैलेंस का प्रतीक है। शांत और सुंदर धातु की कलाकृतियां (metal artifact) देखने से मन को सुकून महसूस हो सकता है और घर में सकारात्मक वातावरण का एहसास बढ़ सकता है। हालांकि इसे व्यक्तिगत आस्था के रूप में देखा जाता है।

एक छोटी-सी गलती बिगाड़ सकती है असर

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फेंगशुई में धातु तत्व के लिए पश्चिम (West) और उत्तर-पश्चिम दिशा (Northwest direction) को शुभ माना जाता है। इसलिए धातु की कलाकृतियों को इन दिशाओं में रखना बेहतर माना जाता है। साथ ही इन्हें हमेशा साफ और अच्छी कंडीशन में रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि टूटी या जंग लगी वस्तुएं शुभ नहीं मानी जातीं।

इसे अपनाते समय भूलकर भी न करें ये काम

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फेंगशुई में किसी भी एलिमेंट का बैलेंस सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूरे घर में केवल धातु की डेकोरेटिव आइटम (decorative item) रखने के बजाय लकड़ी, पौधे, पानी और मिट्टी जैसे अन्य तत्वों के साथ बैलेंस बनाकर डेकोरेट करने की सलाह दी जाती है। इससे घर का वातावरण बैलेंस्ड और खूबसूरत बना रहता है।

IIT की डिग्री और हाई पैकेज के बाद भी क्यों छोड़ी नौकरी? पत्नी संग पहाड़ों में रहने लगा शख्स

कभी बड़े शहरों की भागदौड़ और कॉर्पोरेट करियर का हिस्सा रहे IIT कानपुर के पूर्व छात्र अर्जव मोदी ने अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया। अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई और शहर की सुविधाओं के बीच भी उन्हें एक अलग तरह के संतुलन की तलाश थी। इसी तलाश ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के छोटे से पहाड़ी कस्बे बीर तक पहुंचाया, जहां उन्होंने अपनी पत्नी सिमरन चौधरी के साथ एक अलग जीवनशैली अपनाई।

यहां की शांत वादियां, धीमी रफ्तार और प्रकृति के करीब रहने का अनुभव उनके लिए किसी बदलाव से कम नहीं रहा। अर्जव और सिमरन की यह कहानी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग करियर, खुशी और जिंदगी की प्राथमिकताओं को लेकर नए सिरे से सोच रहे हैं।

कम कमाई लेकिन ज्यादा खुशी का एहसास

शहरों में अच्छी कमाई और सुविधाओं के बावजूद अर्जव को महसूस हुआ कि जीवन में संतुष्टि की कमी है। अब वह फ्रीलांस राइटिंग और कंटेंट का काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी रिमोट जॉब जारी रखे हुए हैं। दोनों की संयुक्त आय पहले से आधी से भी कम हो गई है, लेकिन उनका कहना है कि वे अब ज्यादा खुश और संतुष्ट हैं।

95 किलो से 72 किलो तक, बदली सिर्फ जिंदगी नहीं सोच भी

अर्जव ने लिंक्डइन पर अपने सफर को साझा करते हुए बताया कि 2021 में IIT से निकलने के बाद वह बेंगलुरु में तेज-तर्रार कॉर्पोरेट लाइफ जी रहे थे। उस समय उनका वजन 95 किलो था। 2026 में वह पहाड़ों में सादा जीवन जी रहे हैं, वजन करीब 72 किलो है और कम कमाई के बावजूद खुद को ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं।

पहाड़ों ने सिखाया ‘घर’ का असली मतलब

सिमरन ने बताया कि बीर में रहने के बाद उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। वे ज्यादातर खाना घर पर बनाते हैं, कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं और प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल लगभग छोड़ चुके हैं। उनके अनुसार, पहाड़ों ने सिखाया कि घर सिर्फ खूबसूरत जगह या महंगे सामान से नहीं बनता, बल्कि उस जगह से जुड़ने और उसमें योगदान देने से बनता है।

शहर की दौड़ बनाम पहाड़ों की शांति

अर्जव ने अपनी पोस्ट में दो तरह की जिंदगी की तुलना की। एक तरफ महानगर में रहने वाला युवा प्रोफेशनल है, जिसकी कमाई ज्यादा है, लेकिन लगातार दूसरों से तुलना, करियर का दबाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है।

दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में रहने वाला व्यक्ति है, जिसकी आय कम हो सकती है, लेकिन वह प्रकृति, रिश्तों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेता है।

पहाड़ों में चले जाओ’ नहीं, सोच बदलने की बात

अर्जव ने साफ किया कि उनका मकसद सभी को शहर छोड़कर पहाड़ों में बसने की सलाह देना नहीं है। उनका संदेश सिर्फ इतना है कि जिंदगी की खुशी केवल ज्यादा कमाई या दूसरों से आगे निकलने में नहीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं को समझने और संतुलन बनाने में भी है।

हर ऑटो ड्राइवर एक जैसा नहीं! बेंगलुरु के इस शख्स का अंदाज देख मुस्कुरा उठेंगे आप